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Controversy: कास्टिंग काउच से शुरू हुआ विवाद एक्ट्रेस अंजना सिंह के चप्पल तक पहुंचा

Controversy: भोजपुरी सिनेमा इन दिनों अपनी फिल्मों या गानों की वजह से नहीं, बल्कि कलाकारों के बीच छिड़ी जुबानी जंग और गालीगलौज को लेकर चर्चा में है. सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और भोजपुरी की मशहूर एक्ट्रेस अंजना सिंह के बीच शुरू हुआ यह विवाद पूरी इंडस्ट्री को दो धड़ों में बांट चुका है. सोशल मीडिया पर फैंस की ‘ट्रॉल आर्मी’ और एक्टर्स के बीच तमीज की सारी सीमाएं लांघ दी गई हैं.

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
इस पूरे विवाद की चिंगारी एक पॉडकास्ट से सुलगी. दरअसल, कुछ समय पहले खेसारी लाल यादव ने कास्टिंग काउच को लेकर एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था: “हर एक्ट्रेस कहती है कि कास्टिंग काउच होता है, लेकिन कोई यह नहीं कहती कि मेरे साथ हुआ है, तो फिर शिकार कौन हुआ?”
जब एक पॉडकास्ट के दौरान अंजना सिंह से खेसारी के इस बयान पर जवाब मांगा गया, तो अंजना ने खेसारी को आड़े हाथों लेते हुए सीधे शब्दों में कहा— “वह (खेसारी) तो कुछ भी कहते हैं.” अंजना सिंह का यह बयान खेसारी लाल यादव के फैंस को नागवार गुजरा. इसके बाद खेसारी के फैंस ने सोशल मीडिया पर अंजना सिंह को बुरी तरह ट्रोल करना शुरू कर दिया. हद तो तब हो गई जब ट्रोलर्स ने अंजना और उनकी मासूम बेटी को लेकर बेहद भद्दे और अश्लील कमेंट्स किए.

इस ट्रोलिंग से तंग आकर अंजना सिंह सोशल मीडिया पर लाइव आईं. उन्होंने गुस्से में चप्पल दिखाते हुए कहा कि वह किसी के आगे हाथ जोड़ने या भीख मांगने वाली नहीं हैं और सबको सबक सिखाएंगी.
अंजना ने खेसारी लाल यादव और उनके फैंस पर सीधा हमला बोलते हुए अपने टोलर्स यानी खेसारी के फैन्स को ‘माउगा आर्मी’ और खेसारी को ‘माउगास्टार’  कह डाला.
अंजना ने दावा किया कि यह ट्रोलिंग इसलिए हो रही है क्योंकि उन्होंने ‘पावरस्टार’ पवन सिंह की तारीफ की थी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “क्या तारीफ करूं उनकी (खेसारी की)? ये कि वो अपनी पत्नी को अपनी बहन मानते हैं?”

खेसारी के समर्थन में डिंपल सिंह और अखिलेश कश्यप की एंट्री कैसे हुई?
अंजना के इस तीखे प्रहार के बाद खेसारी लाल यादव के समर्थन में एक्ट्रेस डिंपल सिंह और मशहूर गीतकार और लेखक अखिलेश कश्यप उतर आए. हालांकि, अखिलेश कश्यप के बयान ने इस विवाद की आग में घी डालने का काम किया.
अखिलेश कश्यप ने लाइव आकर अंजना सिंह के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने अंजना को ‘चाची’ और ‘बुढ़िया’ कहा, उन्हें थप्पड़ मारने और लखनऊ में आकर मिलने की धमकी दी, की साथ ही अंजना की बेटी के लिए भी बेहद अपमानजनक और भद्दे शब्द बोले.

एक्स-हस्बैंड यश कुमार का अंजना को  समर्थन
जब बात अंजना सिंह की बेटी पर आई, तो अंजना के पूर्व पति और भोजपुरी एक्टर यश कुमार ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए अंजना के समर्थन में आ गए. यश कुमार ने एक वीडियो जारी कर अपनी बेटी पर अभद्र टिप्पणी करने वालों को सख्त लहजे में चेतावनी दी.
यश ने अखिलेश कश्यप को आड़े हाथों लेते हुए कहा: “तुम अंजना को थप्पड़ मारोगे? ऐसी नीच हरकत की उम्मीद तुमसे नहीं थी। और मारो तुम अंजना को थप्पड़, वो शेरनी तुम्हें बता देगी कि तुम्हारा पाला किससे पड़ा है. आगे से किसी भी महिला के बारे में बोलने से पहले हजार बार सोचना.”

“गाली-गलौज ही भोजपुरी की पहचान बन गई है” — देव सिंह
इंडस्ट्री में मचे इस घमासान पर भोजपुरी के अभिनेता देव सिंह ने गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया है. एक्टर देव सिंह ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा आज भोजपुरी इंडस्ट्री की पहचान सिर्फ गाली-गलौज बनकर रह गई है. फैंस के नाम पर लोग एक-दूसरे की मां-बहन को गालियां दे रहे हैं. देव सिंह ने कहा कि इस कीचड़ उछालने के खेल में कोई यह नहीं सोच रहा है कि भोजपुरी सिनेमा का उत्थान कैसे होगा. कलाकारों को इन फालतू बातों को छोड़कर सिनेमा को आगे ले जाने पर ध्यान देना चाहिए.
सच ही है कि एकदूसरे पर आरोप लगाने से किसी को फायदा नहीं होता लेकिन हम अपने मकसद से भटक जाते हैं.

News Story: ‘विश्वगुरु’ का विदेश कूटनीति में फेल होना

News Story: इस बार दिल्ली में मौसम नेताओं की तरह पलटूराम बना हुआ है, कभी सर्द तो कभी गरम. बेचारे कूलर बेचने वाले दुकान पर मक्खियां मारते दिख रहे हैं और सिर खुजा रहे हैं कि कूलर का बाजार तेज रहेगा या मंदा. पर आम आदमी थोड़ी राहत की सांस ले रहा है. विजय भी ऐसे ही लोगों की लिस्ट में शामिल है और चूंकि आज रविवार है तो उस ने अनामिका के साथ कहीं घूमने का प्लान बनाया है. पर अनामिका अब तक क्यों नहीं आई? इतने में बाहर कोई हलचल हुई. विजय ने देखा कि कोई काले रंग की उबर गाड़ी से आया था. एक जवान लड़की. पर जैसे ही वह गाड़ी से नीचे उतरी, तो आसपास जमा लोगों की भीड़ की नजरें उस पर ही जम गईं.

उस लड़की ने बिहार के मछुआरों की पारंपरिक चोली और घाघरा जैसी ड्रैस पहनी हुई थी. उस ड्रैस से उस के उभार और ज्यादा उभर आए थे. सिंगार भी किसी मछुआरिन सा था. नंगे पैर जब वह मटकमटक कर चल रही थी, तब कुछ मनचले सीटियां बजाने लगे. चूंकि अभी वह लड़की विजय को साफसाफ नहीं दिख रही थी, तो उसे महसूस ही नहीं हुआ कि यह बिंदास मछुआरिन किस के घर जाएगी. थोड़ा आगे आने पर जब विजय ने उस लड़की को देखा, तो अपना सिर पीट लिया, क्योंकि वह और कोई नहीं, अनामिका थी. विजय हैरान रह गया कि आज अनामिका को इस तरह उस के घर आने की क्या जरूरत थी. थोड़ी देर में डोरबैल बजी और बाहर से आवाज आई, ‘‘ओ बाबू, हम बाड़, हमरा के जान…’’

विजय ने जल्दी से दरवाजा खोला और अनामिका को ऊपर से नीचे घूरा. टाइट ब्लाउज, बदन से चिपकी धोती और हाथ में एक बैग, अनामिका एकदम अतरंगी लग रही थी.
‘‘जल्दी से अंदर आओ. और यह सब क्या नौटंकी है?’’
‘‘हम बाड़… हमरा के खाना चाही,’’ अनामिका ने इतना कहा और खिलखिला कर हंस दी.
‘‘अनामिका, ज्यादा मजाक नहीं.
तुम उतरी तो काली गाड़ी से हो और यह सब प्रपंच क्यों? गाड़ी से आने की क्या जरूरत थी? और तुम आज बिहारी क्यों बोल रही हो? यह मेरे सिर के ऊपर से जा रही है,’’ विजय झल्लाया.
‘‘क्या एक मछुआरे की बेटी अपनी पारंपरिक वेशभूषा नहीं पहन सकती?’’ अनामिका ने सवाल किया.
‘‘पर मौका भी तो होना चाहिए न. कोई फैंसी ड्रैस कंपीटिशन तो चल नहीं रहा. तुम तो टीशर्ट और जींस ज्यादा पहनती हो. तुम ने देखा नहीं, लोग तुम्हारी खिल्ली उड़ा रहे थे,’’ विजय
ने कहा.

‘‘मैं विश्वगुरु बनने निकली हूं. मुझे अपनी पारंपरिक वेशभूषा और बिहारी भाषा पर गर्व है.’’
‘‘यहां भाषा कहां से बीच में आ गई?’’ विजय बोला.
‘‘अपनी महल्ले वाली लड़ाई भूल गया. उन सरदारजी के हक में तू ने खूब बोला, पर उन की ठेठ पंजाबी तू खुद नहीं समझ पाया था. बड़ा चला था तू उन अंकलों का झगड़ा सुलटाने, खुद ही बुराई मोल ले कर बैठ गया. तू भी मोदीजी की तरह कूटनीति में फेल हो गया.’’
‘‘अब यहां पर कूटनीति और मोदीजी कैसे बीच में आ गए?’’

‘‘जैसे तू उन अंकलों का झगड़ा निबटाने में नाकाम रहा, उसी तरह मोदीजी दावे तो बहुत कर रहे थे, पर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच की जंग की कूटनीति पर वे फेल हो गए. इस में भाषा का बड़ा रोल होता है. शब्दों का सही खेल ही कूटनीति की कामयाबी की पहली सीढ़ी है. विदेश के मसलों पर आप की भाषाई जानकारी बेवकूफी भी जाहिर कर सकती है.’’
‘‘क्या तुम मुझे आसान शब्दों में समझा सकती हो? मुझ में और मोदीजी की कूटनीति में क्या समानता है?’’
‘‘तुम समझ नहीं रहे हो. किसी राज्य का मुख्यमंत्री होने और देश का प्रधानमंत्री होने में बहुत ज्यादा फर्क है. आप को दुनियाभर में आनाजाना पड़ सकता है. यह ठीक है कि आप की अपनी भाषा पर अच्छी पकड़ है, पर उस का असर विदेशी कूटनीति पर पड़ भी रहा है या नहीं, यह भी बहुत ज्यादा अहम बात है.
‘‘विदेश कूटनीति में भाषा का रोल बहुत खास होता है. वहां वह भाषणबाजी के टूल की तरह इस्तेमाल नहीं होती है, बल्कि एक देश की संस्कृति, इतिहास, और मूल्यों को भी सब के सामने रखती है,’’ अनामिका बोली.

‘‘जैसे?’’ विजय ने सवाल किया.
‘‘जैसे तुम्हें मेरी बिहारी भाषा के चंद शब्द ही बरदाश्त नहीं हो रहे थे. तुम्हें कोफ्त हो रही थी. तुम मुझे झेल रहे थे.
‘‘पर जब विदेश कूटनीति की बात होती है, तो भाषा विदेश मंत्रियों, राजदूतों और दूसरे कूटनीतिज्ञों के बीच संचार का मुख्य साधन बन जाती है.
‘‘भाषा एक देश की संस्कृति को दूसरे देश में पहुंचाने में मदद करती है, जिस से दोनों देशों के बीच समझ और सहयोग बढ़ता है. यही वजह है कि भाषा व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने में मदद करती है, क्योंकि यह व्यावसायिक संचार को आसान बनाती है.
‘‘सब से जरूरी बात तो यह है कि भाषा राजनयिक संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करती है, क्योंकि यह दोनों देशों के बीच समझ और विश्वास को बढ़ाती है.

‘‘मैं हिंदी में किसी प्रधानमंत्री के बात करने को गलत नहीं मानती, पर उस हिंदी को अन्य भाषाओं में जब ट्रांसलेट किया जाता है और दूसरे लोगों को सुनाया जाता है, तब उस दुभाषिए ने क्या उसे सही से समझा है या कहने वाले की ‘मन की बात’ का मतलब समझा है, इस की जवाबदेही कौन तय करेगा?’’
‘‘क्या तुम किसी उदाहरण से अपनी बात समझा सकती हो?’’ विजय ने सवाल किया.
‘‘बात बहुत पुरानी है. मैं ने बीबीसी में एक लेख पढ़ा था देवीलाल के बारे में. वही देवीलाल जो हरियाणा के दबंग नेता थे और जिन्हें हरियाणा की जनता ने ‘ताऊ’ की उपाधि दी थी.
‘‘बात साल 1989 की है. 1 दिसंबर, 1989 को आम चुनाव के बाद नतीजे आने के बाद संयुक्त मोरचा संसदीय दल की बैठक हुई और उस बैठक में विश्वनाथ सिंह के प्रस्ताव पर चंद्रशेखर के समर्थन से चौधरी देवीलाल को संसदीय दल का नेता मान लिया गया था.


‘‘देवीलाल धन्यवाद देने के लिए खड़े जरूर हुए, लेकिन सहज भाव से उन्होंने कहा, ‘मैं सब से बुजुर्ग हूं, मुझे सब ‘ताऊ’ कहते हैं, मुझे ‘ताऊ’ बने रहना ही पसंद है और मैं यह पद विश्वनाथ प्रताप को सौंपता हूं.’
‘‘उस समय तरह तरह की बातें चली थीं. देवीलाल ‘किंग’ बन सकते थे, पर ‘किंगमेकर’ बन गए. वीपी सिंह और उन के बीच पहले ही कोई समझौता हो चुका था. हालांकि, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक तो देवीलाल के खुद का आत्मविश्वास प्रधानमंत्री पद के लायक नहीं था.
‘‘मुझे लगता है कि अगर खुद में आत्मविश्वास की कमी में भाषा पर अच्छी पकड़ न होना भी बहुत माने रखती है. मैं 2 लोगों की बातों से अपना पक्ष रखूंगी. नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री और नामचीन संपादक पत्रकार रहे एमजे अकबर ने देवीलाल के निधन पर लिखे स्मृति लेख में लिखा था, ‘दरअसल, देवीलाल ने महसूस कर लिया था कि शहरी भारत उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, लिहाजा उन्होंने खुद को सब से बड़े पद की दौड़ से अलग कर लिया था.’


‘‘इसी तरह देवीलाल की राजनीतिक जीवनी लिख चुके और आधुनिक भारतीय इतिहासकार प्रोफैसर केसी यादव बताते हैं, ‘देवीलाल खुद बहुत संपन्न परिवार के थे. वे 1930 से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे, लेकिन उन का अंदाज ठेठ ग्रामीणों वाला ही रहा. वे दिल्ली के पावर कौरिडोर में खेतिहर मजदूरों और गरीबगुरबों की सब से बड़ी उम्मीद थे. देश का अभिजात्य तबका उन को भदेस, दबंग और लठैत नेता की तरह ही देखता रहा.’
‘‘देवीलाल की यह ‘ताऊ’ वाली इमेज हरियाणा में तो लोगों को खूब पसंद थी, पर पूरा देश उन्हें उन के भाषाई तेवर से पसंद करता, शायद देवीलाल को भी इस में शक था. खुद उन्होंने या उन के सलाहकारों ने इसे ध्यान में रख कर ही यह फैसला लिया होगा, जो समझदारी भरा फैसला था. इस से देवीलाल की ‘किंगमेकर’ की इमेज हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गई.’’
‘‘तुम्हारी बात में दम है. हम 8,000 करोड़ के हवाईजहाज में तो चल सकते हैं, करोड़ों की काली गाड़ी में सड़कें नाप सकते हैं, पर जब विदेश की कूटनीति पर बात करनी हो, तो भाषा का टूल सब से खास होता है.

‘‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुंहफट नेता हैं. वे कब क्या बोल दें, कोई नहीं जान सकता. वे दुनिया के एक धड़े में मशहूर हो सकते हैं, पर उन का भाषा का लैवल भी कोई कमाल का
नहीं है. ‘‘इधर नरेंद्र मोदी ‘विश्वगुरु’ होने का दावा तो करते हैं, पर विदेश कूटनीति में फेल दिखते हैं. उन के हाल में लिए गए बहुत से फैसले लोगों के मन में शक पैदा करते हैं. पड़ोसी देशों से बिगड़ते संबंध इस का सब से बड़ा उदाहरण है.
‘‘चीन की बात करें तो साल 2020 में गलवान घाटी झड़प के बाद एलएसी पर तनाव लगातार बना रहा. व्यापार घाटा रिकौर्ड लैवल पर पहुंचा और सीमा विवाद का कोई पक्का हल नहीं निकला.
‘‘इतना ही नहीं, पाकिस्तान में तथाकथित सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट के बाद भी आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ जारी रही. कूटनीतिक संवाद पूरी तरह ठप है. भारत नेपाल, मालदीव और बंगलादेश में चीन के बढ़ते असर को रोकने में भारत नाकाम रहा. नेपाल ने नया नक्शा जारी किया, मालदीव में ‘इंडिया आउट’ अभियान चला, बंगलादेश में भी चीन का निवेश बढ़ा.


‘‘इजराइल के खुल कर समर्थन से अरब देशों में भारत की पारंपरिक साख को नुकसान पहुंचा है. कतर में
8 पूर्व नौसैनिकों को मौत की सजा का मामला और फिर ईरान व इजराइल तनाव में साफ रुख न ले पाना, विदेश नीति की दुविधा दिखाता है,’’ विजय ने अपनी बात रखी.
‘‘अब तुम ने सही रग को पकड़ा है. चुनाव के समय जनता के सामने विदेश नीति की बड़ी बड़ी बातें करने से देश की कूटनीति पर कोई फर्क नहीं पड़ता है, बल्कि हमें समस्या की जड़ में जा कर उस का पक्का हल ढूंढ़ना होता है.
‘‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेनाध्यक्ष असीम मुनीर ईरान, इजराइल और अमेरिका के युद्ध में कितना अहम रोल निभाते हैं, यह तो आने वाला समय बताएगा, पर उन की गुपचुप कूटनीति पर आज दुनियाभर में बात हो रही है. जो काम भारत के लोग नरेंद्र मोदी से पूरा होने की उम्मीद देख रहे थे, वे सीन में कहीं भी नहीं दिखाई दे रहे हैं,’’ अनामिका बोली.


‘‘तभी तुम आज अपनी पारंपरिक वेषभूषा और बिहारी भाषा का ज्यादा ही दिखावा कर रही थी. मुझे समझ आ गया है कि दिखावा करना और अमल में लाना दोनों अलग बातें हैं.
‘‘किसी प्रदेश में दिए गए चुनावी भाषण में आप कुछ भी पारंपरिक पहन कर वहां की भाषा के
2-4 वाक्य बोल कर जनता का दिल एक बार को जीत सकते हैं, पर विदेश कूटनीति में हर कदम सोचसमझ कर उठाना पड़ता है. यही ‘विश्वगुरु’ बनने का मूलमंत्र है,’’ जब विजय ने यह बात कही, तो अनामिका ने तालियां बजाईं.
‘‘चलो, आज इसी खुशी में मैं तुम्हें लिट्टीचोखा खिलाती हूं. हरी मिर्च का अचार जरूर खाना, उस का स्वाद ही अलग लैवल का होता है,’’ अनामिका ने इतना कहा और आईने के सामने अपने बाल संवारने लगी. अभी उसे अपनी ड्रैस भी बदलनी थी. टीशर्ट और जींस, जिस में वह कमाल की लगती है.         

18 साल के लड़के ने समोसे बेचने के साथ-साथ किया नीट का एग्जाम पास

कहते है फल की इच्छा मत कर, काम किए जा, यानी जो काम आप कर रहे हो आपको उसका फल जरूर मिलेगा. ऐसे ही एक मिसाल 18 साल के बच्चे ने दी है. जिसने अपने सोमसे बचने के साथ साथ पढ़ाई भी की और नीट की परीक्षा भी पास कर ली.

 

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ये सफलता की एक कहानी इन दिनों नोएडा की सड़कों से आ रही है. सड़क के किनारे समोसा बेचने वाले एक लड़के ने वो कर दिखाया, जो कई स्टूडेंट्स महंगे महंगे कोचिंग के बाद भी नहीं कर सकते. इस लड़के ने बिना किसी कोचिंग क्लास के नीट यूजी 2024 क्लियर कर लिया.

नोएडा के 18 साल के सनी कुमार ने नीट की परीक्षा पास कर ली. उसने 884 में से 720 अंक पाए. लेकिन सनी की ये सफलता लोगों के लिए खास बन गई. दरअसल, सनी ने बिना किसी कोचिंग के नीट क्लियर किया. वो भी दिनभर सड़क पर समोसे बेचने के साथ साथ.

सनी दिन में सड़क के किनारे समोसे बेचा करता था, लेकिन रात में मन लगाकर पढ़ाई करता था. इस तरह से मेहनत करके सनी ने नीट क्लियर कर लिया.

बता दें, सनी की ये स्टोरी फिजिक्स वाला के संस्थापक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर शेयर की. उन्होंने सनी की स्टोरी उन लोगों को प्रेरणा देने के लिए शेयर की, जो परेशानियों से घबरा जाते हैं. उनके लिए सनी की स्टोरी मिसाल है. हर दिन तीन सौ रुपए की कमाई करने वाला सनी ही पूरे घर को चलाता है. लेकिन उसकी मां का सपना था कि उसका बेटा डौक्टर बने. ऐसे में सनी ने दिन में समोसा बेचा और रात में पढ़ाई कर आखिरकार नीट की परीक्षा पास कर ली.

आपको बता दें कि सनी के पास महंगे कोचिंग के लिए पैसे नहीं थे. इस स्थिति में सनी ने चार हजार रुपए फीस भरकर औनलाइन ही नीट की तैयारी शुरु की. कई लोगों ने सनी को ठेले पर काम करने के दौरान औनलाइन लेक्चर अटेंड करते भी देखा है. अब सनी अपनी कामयाबी के चलते हर जगह छाएं हुए है.

पिता चलाते थे रिक्शा बेटा बना आईएएस

22 साल के उम्र में IAS बनने वाले गोविंद के पिता रिक्शा चलाकर उनकी पढ़ाई के लिए पैसे भेजते थे. IAS Govind Jaiswal का नाम उन आईएएस औफिसर्स में लिया जाता है, जिनकी कहानी लाखों युवाओं को प्रेरित करने वाली है.

जब चाय वाली की बेटी बनीं अफसर

चाय बेचने वाले की बेटी ने 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद CA पास किया. दिल्ली की रहने वाली अमिता प्रजापति ने कहा कि उनके पिता ने अपने रिश्तेदारों को नजरअंदाज कर उन्हे आगे बढ़कर पढ़ाई करवाई. जिसे पूरे आत्मविश्वास के साथ अमिता ने पूरी भी किया और सीए का एग्जाम पास किया.

स्टाइलिश दिखने के लिए अपनाएं आयुष्मान खुराना के ये 4 लुक्स…

बौलीवुड इंडस्ट्री के औल राउंडर कहे जाने वाले अभिनेता आयुष्मान खुराना एक्टिंग के साथ-साथ फैशन में भी अपने जलवे बिखेर रहे हैं. आयुष्मान खुराना अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने फैंस के लिए अक्सर अपनी स्टाइलिश फोटोज शेयर करते रहते हैं. आइए देखते हैं उनके कुछ लुक्स जो आप अपनी रियल लाइफ में ट्राय कर सकते हैं…

  1. ओरेंज बार इन द कार…

हाल फिलहाल उनकी लेटेस्ट फोटो सामने आई है जिसमें उनहोनें लाईट पिंक कलर की प्रिंटिड टी-शर्ट और ट्राउसर के साथ ओरेंज कलर का लौंग कोट पहन रखा है, साथ ही में उन्होनें कैप्शन में लिखा है कि “ओरेंज बार इन द कार”. इस फोटो में आयुष्मान काफी अच्छे और ट्रेंडी लुक में नज़र आ रहें हैं. आप सब भी आयुष्मान का यह लुक किसी भी कैज़ुएल पार्टी में ओरों से बहतर और ट्रेंडी दिखने के लिए ट्राई कर सकते हैं.

 

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Orange bar in the car.

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2. कलरफुल कपड़ों का ट्रेंड…

जहां 90 के दशक में गोविंदा जैसे बड़े अभिनेता ने रंग-बिरंगे कपड़े पहने बडे पर्दे पर नज़र आते थे वहीं आयुष्मान की एक लेटेस्ट फोटो सामने आई है जिसमें उन्होनें कलरफुल जैकेट के साथ कलरफुल लोअर पहन रखा है. ऐसा लगता है कि आयुष्मान फिर से वही पुराना ट्रेंड वापस लाना चाहते हैं. फैंस ने इस फोटो को काफी पसंद किया है और काफी अच्छे कमेंटस भी किए हैं. आप इस लुक को कहीं भी अपने डेली यूज़ में ट्राई कर सकते हैं.

 

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3. आप भी ट्राई कर सकते हैं आयुष्मान का औफिस लुक…

औफिस जाने वाले लोगों को अक्सर समझ नहीं आता कि उन्हे औफिस में किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए जिनसे वे और स्टाइलिश दिख सकते हैं. आयुष्मान का एक औफिशियल लुक भी सामने आया है जिसमें उन्होनें व्हाइट कलर की शर्ट, ब्लैक कलर की वी-नैक स्वैटर और क्रीम कलर का कोट पहना हुआ है. आयुष्मान इस लुक में काफी स्टाइलिश नजर आ रहें हैं, तो अगर आप भी अपने औफिस में स्टाइलिश नजर आना चाहते है तो आप भी आयुष्मान के इस लुक को ट्राई कर सकते हैं.

 

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4. कौलेज जाने वाले यंगस्टर्स करें आयुष्मान का ये लुक ट्राई…

आयुष्मान का एक कौलेज लुक भी देखने को मिला है जिसमें वे एक किताब पड़ते नजर आ रहे है. इस फोटो में आयुष्मान ने व्हाइट कलर की टी-शर्ट के ऊपर ब्लैक और रेड कलर की प्रिंटेड शर्ट पहन रखी है. कौलेज जाने वाले युवा अपने पहनावे को ले कर काफी सोच विचार करते हैं ताकी वे अपने कौलेज में ओर ज्यादा स्टाइलिश और ट्रेंडी दिख सकें.

 

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#WorldBookDay

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बता दें कि आयुष्मान बेहतरीन एक्टर होने के साथ एक अच्छे सिंगर, पोएट, और टेलिविजन होस्ट भी हैं. आयुष्मान ने अपने अब तक के करियर में कई सारे अवार्डस भी जीते हैं जिनमें से तीन फिल्म फेयर अवार्ड भी शामिल हैं. वो जल्द ही फिल्म आर्टिक्ल 15 में नजर आएंगे, जिसमें वो एक पुलिस औफिसर का किरदार निभा रहे हैं.

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