Hindi Kahani: क्या यही प्यार है?

जेबा की बरात आने वाली थी. सभी पूरी तैयारी के साथ बरात के आने का इंतजार कर रहे थे कि तभी जेबा का आशिक राहिल कहीं से अचानक आंगन में गया. ‘‘आप डरें नहीं. मैं कुछ गड़बड़ करने नहीं आया हूं. मैं तो सिर्फ जेबा से मिलने आया हूं. आज से वह किसी दूसरे की हो जाएगी. प्लीज, मु? उस से आखिरी बार मिल लेने दें,’’ आंगन में खड़ी औरतों से इतना कहने के बाद राहिल सीधा जेबा के कमरे में घुस गया, जिस में वह दुलहन बनी बैठी थी.

‘‘जेबा, यह तो मेरी शराफत है, जो तुम्हें किसी और की होते देख रहा हूं, वरना किस में इतनी हिम्मत थी कि जो तुम को मु? से जुदा कर देता. ‘‘खैर, मैं तुम से यह कहने आया हूं कि हम दो जिस्म जरूर हैं, लेकिन जान एक है. कोई दूसरा तुम्हारे सिर्फ तन पर हक जमा सकता है, लेकिन मन पर नहीं. मु? पूरा यकीन है कि तुम मु? कभी नहीं भूलोगी…’’ इतना कहने के बाद राहिल अपना मुंह जेबा के कान के पास ले जा कर धीरे से बोला, ‘‘तुम अपनी मांग में कभी सिंदूर मत भरना. मैं भी तुम से वादा करता हूं कि जिंदगीभर किसी दूसरी लड़की की तरफ नजर नहीं उठाऊंगा.

‘‘अच्छा जेबा, अब मैं चलता हूं. तुम हमेशा खुश रहो,’’ इतना कह कर राहिल उस कमरे से चला गया.
राहिल के जाने के बाद सब ने राहत की सांस ली, मगर दिलों में यह खटका बना रहा कि वह कमबख्त कहीं निकाह के वक्त कर किसी तरह की हंगामेबाजी शुरू कर दे. इन हालात से निबटने के लिए जेबा के घर वालों ने पूरी तैयारी कर रखी थी. पर सबकुछ शांति से पूरा हो गया और जेबा अपने हमसफर शबाब के साथ एक नई जिंदगी शुरू करने के लिए रवाना हो गई. वैसे तो सबकुछ ठीक हो गया था, लेकिन जेबा और उस के घर वाले अंदर ही अंदर काफी परेशान थे कि राहिल जाने कब क्या कर बैठे.
जेबा और राहिल एकदूसरे को चुपकेचुपके चाहते रहे थे. इस सचाई से परदा तब उठा, जब जेबा की शादी शबाब के साथ तय कर दी गई. राहिल को जब इस बात का पता चला, तो उस के दिल की धड़कन जैसे थम सी गई.

कभी जी चाहता कि जेबा को ले कर कहीं भाग जाए, तो कभी उस के बाप का खून कर देने का मन करता. कभी यह विचार आता कि वह अपना और जेबा का खात्मा कर डाले. वह तो जेबा की सू?ाबू? थी, जो पागल हाथी जैसे राहिल को किसी तरह काबू में किए थी. ‘‘आखिर मु? में क्या कमी है, जो जेबा को मु? से दूर किया जा रहा है?’’ एक दिन राहिल जेबा के अब्बा हशमत अली से उल? पड़ा. ‘‘कमी यह है कि तुम दिमाग से ज्यादा दिल की सुनते हो और जज्बाती हो. सब से बड़ी कमी तो तुम में यह है कि तुम दूसरों पर मुहताज हो. जो खुद मुहताज हो, वह भला दूसरों को क्या दे सकता है,’’ हशमत अली की साफगोई राहिल को बेहद कड़वी लगी, फिर भी जवाब में वह खामोश रहा. राहिल एक बेरोजगार और भावुक किस्म का नौजवान था. बाप के पास जो दौलत थी, बस उसी पर उस की जिंदगी का दारोमदार था. वह अपनी जिंदगी के प्रति कभी संजीदा नजर नहीं आया.

शौहर के रूप में शबाब को पा कर जेबा बहुत खुश थी. एक भले संजीदा शौहर की सारी खूबियां उस में कूटकूट कर भरी थीं. शबाब जेबा का पूरा खयाल रखता कि उसे किसी तरह की तकलीफ पहुंचने पाए. मगर जेबा ही इस मामले में नाकाम थी, क्योंकि वह पूरे तनमन से चाह कर भी अपने शौहर के आगे खुद को पेश नहीं कर पाती थी. जेबा इस बात को ले कर डरीसहमी रहती कि अपने शौहर से पहले वह किसी और की थी. कभीकभी उसे राहिल के दीवानेपन से भी डर लगता. वह जानती थी कि राहिल जुनून में कर किसी भी हद को पार कर सकता है, इसीलिए वह चाह कर भी शबाब को अपने प्यार से दूर रखती थी.
सब से बड़ी बात तो यह थी कि जेबा ने आज तक शबाब के नाम का सिंदूर अपनी मांग में नहीं लगाया, जो शबाब को अच्छा नहीं लग रहा था. राहिल ने जेबा को इस बात के लिए मना कर के उस की शादीशुदा जिंदगी पर कितना बड़ा जुल्म ढाया था. जेबा राहिल के गुस्से से शबाब को बचाने के लिए ही अपनी मांग को सिंदूर से नहीं सजाती थी.

शादी के 2 दिन बाद ही जेबा की सूनी मांग को देख कर शबाब पूछ बैठा, ‘‘अरे, यह क्या जेबा, तुम्हारी मांग में सिंदूर क्यों नहीं है?’’ जेबा ने बड़े प्यार से शबाब को सम?ाया, ‘‘असल में सिंदूर से मु? एलर्जी है. बचपन में गुड्डेगुडि़यों का ब्याह रचाने के दौरान गुड्डे की अम्मां बनी लड़की ने खेलखेल में मेरी मांग में सिंदूर डाल दिया था. इस के कुछ समय बाद ही मेरे सिर में खुजली होने लगी थी और मैं चकरा कर गिर पड़ी थी. तब से मैं सिंदूर से काफी दूर रहने लगी हूं.’’ जेबा की दलील सुन लेने के बाद शबाब चुप तो हो गया था, लेकिन उसे कुछ अटपटा सा जरूर लगा था. सास ननदें जेबा को मांग में सिंदूर डालने की कहतेकहते थक चुकी थीं, लेकिन उस के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. इस बात को ले कर परिवार में मनमुटाव सा रहने लगा था. इससे पहले कि जेबा की जिद और ससुराल वालों की नाराजगी कोई गंभीर रूप लेती, एक दिन अचानक घटी एक घटना ने जेबा की सारी उल?ानों को पलभर में ही सुल? दिया. राहिल ने जेबा के किसी करीबी रिश्तेदार के हाथों उस के पास एक खत भेजा, जिस में लिखा था:

जेबा, मैं तुम्हारे दिलोदिमाग पर हुकूमत तो नहीं कर सका, लेकिन उस पर नाजायज ढंग से कब्जा कर के तुम्हें ब्लैकमेल जरूर करता रहा. अब इस बात का एहसास मु? पूरी तरह से होने लगा है. मु? दुख है कि मेरी घटिया सोच का शिकार हो कर तुम घुटनभरी जिंदगी जी रही हो और धीरेधीरे अपने ससुराल वालों की नजरों में गिरती जा रही हो. मु? माफ कर दो. तुम ने सही कहा था कि मेरा यह गैरसंजीदापन कभी मु? महंगा पड़ सकता है. एक खुशखबरी सुनो. मैं शादी करने जा रहा हूं. वह भी एक ऐसी लड़की के साथ, जो मु? जैसे किसी सड़कछाप आशिक के जुल्म का शिकार हो चुकी है. जानती हो, इस तरह की लड़की को अपना हमसफर बना कर मैं क्या करना चाहता हूं? मैं अपने गुनाह की सजा कम करना चाहता हूं.

शादी के बाद भी तुम पर अपना नाजायज हक जमा कर मैं ने गुनाह नहीं तो और क्या किया है. तुम मेरी दीवानगी का खौफ अपने जेहन से बिलकुल निकाल दो और पूरे तनमन से शबाब की बीवी बन कर जिंदगी गुजारो. आज से अपनी मांग सूनी मत रखना. तुम्हारा नाचीज, राहिल.’ खत पढ़ लेने के बाद जेबा खुद को इतना हलका महसूस कर रही थी, मानो उस की छाती पर से कोई बहुत बड़ा बो? हट गया हो.                        

Hindi Story: बिखरी जिंदगी

Hindi Story: शादी से पहले ही सपना पेट से हो गई थी. पर उस का प्रेमी चिरंजीवी डरपोक निकला. मजबूरी में सपना ने अबौर्शन कराया. फिर उस की शादी प्रभात के साथ हुई. पर डाक्टर ने प्रभात को बता दिया कि सपना का शादी से पहले अबौर्शन हुआ था. आगे क्या हुआ?


जि का डर था वही हुआ. सपना मायके रहने गई. उस के पति ने तलाक का नोटिस भेज दिया.
मैं यानी सपना की भाभी निशा हमेशा अपने पति रंजन से कहती रही कि शादीब्याह के मामले में कुछ भी छिपाना अच्छी बात नहीं है. चाहे जैसा भी हो सपना के अतीत के बारे में बता देना उचित हेगा, उस के बाद जो होगा उन की मरजी. अगर उन्हें लगेगा कि सपना से शादी करना ठीक होगा तो करेंगे, नहीं तो कहीं और कोशिश करो.


दरअसल, नौकरी के दरमियान सपना की जानपहचान एक दक्षिण भारतीय लड़के चिरंजीवी से हुई थी. बात इतनी बढ़ी कि वह उस से पेट से हो गई. सपना ने चिरंजीवी पर शादी करने का दबाव बनाया, तो एकाएक वह नौकरी छोड़ कर अपने गांव चला गया. इस बीच सपना ने उसे कई बार फोन किया, मगर चिरंजीवी ने हर बार यही कहा कि वह शादी करने के हालात में नहीं है, लिहाजा वह बच्चा गिरा दे.
सपना एक ऐसे भंवर मे फंस गई, जहां से उसे सिवा बरबादी के कुछ नहीं दिख रहा था. उस से रोते बन रहा था, ही हंसते. कैसे अपने मांबाप को सब बताएगी? उन्हें जब पता चलेगा तब उन पर क्या बीतेगी? एक बार खुदकुशी करने का खयाल मन में आया, मगर बढ़ते कदम रुक गए. खुदकुशी करना क्या आसान होता है?


आखिरकार सपना ने फैसला लिया कि वह मम्मीपापा को बता देगी. अबौर्शन करवाना कोई गुनाह नहीं. उस का गुनाह इतना था कि उसे इस हद तक नहीं जाना चाहिए था. मांबाप अगर बेटियों पर भरोसा कर के उन्हें बाहर नौकरी करने की इजाजत देते हैं, तो उन्हें मर्यादा का खयाल रखना चाहिए. लड़कों का क्या जाएगा, वे तो कोई भी बहाना बना कर कन्नी काट लेंगे, ?ोलना तो लड़कियों को ही पड़ता है. मम्मीपापा ने सुना तो वे आगबबूला हो गए. सपना को खरीखोटी सुनाई. चिरंजीवी से बात करना चाहा, मगर उस का फोन स्विच औफ मिला. एक बार चेन्नई जाने को सोचा, फिर यह सेच कर चुप हो गए कि उस का पुश्तैनी घर एक गांव में था, जहां कुछ कहनेसुनने से कुछ नहीं होगा. वे हमारी बात सम?ाने वाले नहीं. उलटे सपना को ही कुसूरवार मान कर गांव से भगा देंगे. काफी सोचविचार कर सपना का अबौर्शन कराना उचित सम?.


अब सपना आजाद थी. पर उस का औफिस जाना छुड़वा दिया गया. रंजन के ऊपर सपना की शादी की जिम्मेदारी थी. ऐसा इसलिए, क्योंकि रंजन पूर्वांचल की एक छोटे सी तहसील भाटी में नौकरी करते थे, जो दिल्ली से काफी दूर थी. दिल्ली के आसपास सपना की शादी करना उचित नहीं लगा. भेद खुलने का डर था. लड़का रंजन के ही औफिस में काम करता था. रंजन से उस की अच्छी जानपहचान थी. भाटी में उस का खुद का मकान था, साथ में गांव में कुछ पुश्तैनी जमीन भी थी. सपना इस शादी के हक में नहीं
थी. कहां दिल्ली, कहां एक छोटा सा कसबावह उदास हो गई. मम्मी ने भरोसा दिया कि उस का तबादला लखनऊ हो जाएगा, तब वह आराम से महानगर में रह सकेगी.


पता नहीं मम्मी के भरोसे में कितनी हकीकत थी. एकबारगी मु? लगा कि मम्मीपापा किसी तरह से सपना का घर बसना देखना चाहते थे. लेकिन सपना की पसंदनापसंद का कोई सवाल नहीं था. आज के दौर में शारीरिक संबंध बनना एक सामान्य घटना है. भागदौड़ की जिंदगी में इसे कोई इतनी गंभीरता से नहीं लेता, मगर मम्मीपापा के भीतर  इतना डर था कि उन्होंने सपना को ऐसी जगह ब्याहना मुनासिब सम?, जहां सपना जैसी लड़की के लिए एक पल रहना मुमकिन नहीं था. लड़के का नाम प्रभात था. उसे एकमुश्त जमीन खरीदने के लिए रकम की जरूरत थी, जिसे रंजन ने स्वीकार कर लिया. थोड़े से लोगों की मौजूदगी में सपना की शादी कर दी गई, पर उस का भाटी में कभी मन नहीं लगा.


सपना अकसर रंजन से यही कहा करती थी कि वह किसी तरह प्रभात का तबादला लखनऊ करवा दे, ताकि वहां कोई फ्लैट ले कर रहा जाए. इस बीच सपना पेट से हुई. पहली बार जब प्रभात उसे महिला डाक्टर के पास ले गया, तो चैकअप करने के बाद उस ने प्रभात को अपने केबिन मे बुला कर पूछा कि क्या आप की पत्नी का पहले कभी अबौर्शन हुआ था? यह सुन कर प्रभात थोड़ा हैरान हो कर बोला, ‘‘नहीं, ऐसा तो नहीं है. यह हमारा पहला अनुभव है.’’ डाक्टर ने दोबारा कुछ पूछना मुनासिब नहीं सम?. कुछ दवाएं लिख दीं और बीचबीच में कर दिखाने की सलाह दी. रास्तेभर प्रभात के कानों में लगातार डाक्टर साहिबा की कही बात गूंजती रही. जैसे ही वह सपना के साथ घर के अंदर दाखिल हुआ, सब से पहले उस का यही सवाल था, ‘‘क्या तुम्हें पहले कभी अबौर्शन हुआ था?’’


यह सुन कर सपना कांप गई, फिर खुद को संभालते हुए बोली, ‘‘कैसी बचकानी बातें कर रहे हैं…’’
‘‘डाक्टर की बात ?ाठी नहीं हो सकती…’’ प्रभात बोला.
‘‘डाक्टर बीच में कहां से गई?’’
‘‘उन्होंने ही बताया कि तुम्हारा एक बार अबौर्शन हो चुका है.’’
‘‘डाक्टर कैसे पता लगा सकता है?’’
‘‘और कौन बताएगा?’’


सपना ने थोड़ा कड़ा मन करते हुए कहा, ‘‘मान लो ऐसा ही हो तो तुम कर क्या सकते हो?’’
‘‘मैं ऐसी चरित्रहीन औरत के साथ एक पल भी नहीं रहना चाहूंगा,’’ प्रभात ने दो टूक कहा.
‘‘तलाक लेना क्या आसान होगा? दूसरे, मैं डाक्टर की बात को गलत साबित करती हूं. जब ऐसा कुछ हुआ ही हो तो मैं कैसे मान लूं?’’ सपना की आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी.
उस रोज प्रभात और सपना में काफी बहस हुई. दोनों का ?ागड़ा सुन कर प्रभात की मां गईं. पूछने पर प्रभात ने कुछ नहीं छिपाया.
‘‘मु? तो पहले से ही शक था.
तुम्हीं शादी के लिए उतावले थे.
10 लाख क्या दिया खोटा सिक्का
थमा दिया,’’ मां सपना को जलीकटी सुनाने लगीं.


उस दिन के बाद प्रभात ने सपना की  तरफ देखना भी छोड़ दिया. सपना की जिंदगी खजूर पर लटके हुए इनसान की तरह हो गई. वह दिल्ली की रही, ही भाटी की. मम्मीपापा ने जो सोच कर उस की शादी का घरौंदा बनाया था, वह रेत की तरह बिखरने वाला था. एक दिन सपना ने फोन कर के रंजन को सारी बातें बता दीं. रंजन सपना की ससुराल आया. प्रभात को रंजन से इतनी नफरत हो गई थी कि जब कभी उस का औफिस में सामना होता, तो वह दुआसलाम भी नहीं करता था. रंजन को सम? में नहीं आया कि एकाएक प्रभात इतना बदल कैसे गया. उसे लगा होगी कोई औफिस की समस्या, पर अब सारा राज खुल गया था.


प्रभात की मां ने साफसाफ कह दिया कि वह सपना को अपनी बहू बना कर नहीं रखना चाहतीं. रंजन ने लाख सम?ाया, मगर प्रभात सम?ाने के लिए तैयार था, ही उस के घर वाले.
‘‘क्या यह आप लोगों का आखिरी फैसला है?’’ रंजन हताश मन से पूछा.
‘‘हां,’’ प्रभात ने जवाब दिया.
‘‘कहीं तुम ने सपना को तलाक देने का तो फैसला नहीं ले लिया है?’’ रंजन ने शक जताया.
‘‘आप ने सही सोचा है,’’ प्रभात
की इस बात पर रंजन के माथे पर बल पड़ गए.
‘‘तलाक लेना आसान नहीं है. वह तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली है.’’
‘‘मैं उसे अपना बच्चा नहीं मानता,’’ प्रभात ने हेकड़ी दिखलाई.
‘‘तुम्हारे मानने या मानने से कुछ नहीं होगा. जैसे डाक्टर ने सपना के अबौर्शन की जानकारी दी, वैसे ही तकनीक के जरीए बताया जा सकता है कि यह तुम्हारा बच्चा ही है. तुम्हें उसे वे सारे हक देने होंगे, जो एक बच्चे के होते हैं,’’ रंजन बोला.


पर प्रभात पर रंजन की बात का बिलकुल भी असर नहीं पड़ा. उस रोज रंजन बिना कोई ठोस फैसला लिए वापस अपने घर गया. घर कर उस का मन किसी काम में नहीं लगा. उस के दिमाग में बारबार सपना ही घूमती रही. क्या सोचा था, क्या हो गया. उसे भरोसा था कि इतनी दूर, साथ में अच्छाखासा दहेज दे कर वह सपना के नाजायज प्यार पर परदा डाल देगा, मगर ऐसा हुआ नहीं. रंजन को अपने फैसले पर अफसोस होने लगा. इस सब की जानकारी जब मम्मीपापा को लगेगी, तब उन पर क्या बीतेगी, यह सोच कर उस का दिल बैठने लगा. अब अकसर अबौर्शन को ले कर सपना और प्रभात में ?ागड़ा होने लगा. प्रभात का सारा परिवार उस के साथ था, जबकि सपना अकेली. कितनी खिलाफत करती. तंग कर एक
दिन अपना जरूरी सामान बांध कर रंजन के पास रहने चली आई.


औफिस में मौका मिला तो रंजन ने प्रभात को सम?ाने की काफी कोशिश की, मगर वह तो कुछ भी सुनने के लिए तैयार था. वह बहुत गुस्से में था. जल्दी ही यह खबर औफिस में फैल  गयी कि प्रभात और रंजन की बहन सपना में अनबन हो गई है. मामला तलाक पर गया है. रंजन को काफी शर्मिंदगी महसूस होने लगी. ऊपर से तो कोई कुछ नहीं कहता था, मगर अंदर ही अंदर कानाफूसी जारी थी. रंजन ने मम्मीपापा को सारी बात बताई. वे दोनों भी बेहद परेशान हो गए. पापा रंजन से बोले कि चाहे जैसे भी हो सपना को वापस ससुराल भेजो. ‘‘किस के बल पर? क्या गारंटी है कि वहां सपना महफूज होगी? कहीं वे सब सपना को मार डालें तब?’’ ‘‘इतना ही डर था तो फिर शादी क्यों की?’’ पापा चिल्लाए.


‘‘पापा, आप 2 तरह की बातें करते हैं. एक तरफ आप छिपाना चाहते थे, तो दूसरी तरफ शादी पर सवाल खड़ा कर रहे हैं. इतना ही था तो कर लिए होते अपने तरीके से शादी,’’ इतना बोलने के अगले पल रंजन को पापा को कहे शब्दों पर अफसोस होने लगा. उसे पापा से ऐसे तल्ख लहजे में नहीं बात करनी चाहिए थी. उस ने पापा से माफी मांगी. इधर, सपना ने साफसाफ कह दिया कि वह उस गांव में रहने नहीं जाएगी. वहां उस का मन नहीं लगता. भले ही जिंदगी अकेले काटनी हो, काट लेगी मगर वापस उस जेलखाने में नहीं जाएगी. जेलखाना ही थी उस की ससुराल. सासससुर, ननदननदोई कहीं से भी वे लोग शहरी नहीं लगते थे. पता नहीं रंजन ने क्या देखा जो टूट पड़े इस रिश्ते के लिए.


आखिरकार रंजन ने सपना को वापस दिल्ली भेज दिया. दिल्ली कर फिर से वही सवाल खड़ा हुआ कि सपना के पेट में पल रहे बच्चे का क्या होगा? एक बार सोचा कि फिर से अबौर्शन करा कर पहले की तरह आजाद जिंदगी जिए. नौकरी तो मिल ही जाएगी. सपना के मम्मीपापा इस के खिलाफ थे. उन्हें भरोसा था कि देरसवेर प्रभात को सम? जाएगा और सबकुछ ठीक हो जाएगा. काफी जद्दोजेहद के बाद सपना ने मम्मीपापा की बात मान ली. उसे भी लगा यही ठीक रहेगा. इस बीच प्रभात ने तलाक का नोटिस भेज दिया. सपना कुछ पल के लिए बेचैन हुई, मगर अगले पल खुद में हिम्मत संजोई कि चाहे जो भी हो जाए, वह प्रभात को तलाक नहीं देगी.


पूरे 9 महीने बाद सपना ने अपने बच्चे को जन्म दिया. प्रभात ने काफी कोशिश की, मगर सपना टस से मस
हुई. 2 साल गुजरने के बाद भी सपना ने तलाक के लिए कोई पहल नहीं की, तब सुनने में आया कि प्रभात ने दूसरी शादी कर ली. यह तो और भी बड़ा अपराध था. सपना ने बच्चे के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बनाया. उस ने प्रभात की पुश्तैनी जायदाद पर दावा ठोंक दिया, साथ में उस की दूसरी शादी पर भी सवाल खड़े किए. तमाम कानूनी पचड़े की वजह से प्रभात काफी दबाव में गया और उस ने सपना की बात मान कर उसके मनमुताबिक हर्जाना दे कर तलाक पा लिया. सपना का बेटा 5 साल का हुआ, तो उस ने दोबारा नौकरी करने का मन बनाया. उसे नौकरी मिल भी मिल गई. ऐसे ही एक शाम सपना औफिस से घर आने के लिए मैट्रो का स्टेशन पर इंतजार कर रही थी, तभी उसे चिरंजीवी दिखा. उस ने नफरत से नजरें दूसरी तरफ मोड़ लीं. इस के बावजूद चिरंजीवी ने उसे देख लिया. वह उस के करीब आया.


‘‘सपना, मैं चिरंजीवी,’’ इतना कह कर वह मुसकराया.
सपना ने उस की बात का कोई जवाब नहीं दिया.
‘‘सपना, मु? माफ कर दो. मैं ने तुम्हें धोखा दिया.’’
‘‘अब गड़े मुरदे उखाड़ने से क्या फायदा?’’ सपना की आवाज में
तल्खी थी.
‘‘पिताजी को कोरोना हो गया था. अचानक मु? गांव जाना पड़ा.’’
‘‘चलो, मान लेते हैं. मगर क्या तुम्हारा फर्ज नहीं बनता था कि एक बार फोन कर के मेरा हाल लेते. बड़ी आसानी से कह दिया अबौर्शन करा लो. तुम्हें
मेरी हालत का अंदाजा था?’’ कहतेकहते सपना का गला रुंध गया, ‘‘तुम ने मु? कहीं का नहीं छोड़ा.’’
‘‘मु? माफ कर दो,’’ कह कर चिरंजीवी ने चुप्पी साध ली. उस के चेहरे पर बनतेबिगड़ते भावों से लगा मानो वह सपना से और भी कुछ कहना चाहता है, मगर कह नहीं पा रहा था.
फिर चिरंजीवी ने ही चुप्पी तोड़ी, ‘‘सपना, अगर तुम्हारे पास समय हो तो क्या थोड़ी देर के लिए मेरे साथ पास के किसी रैस्टोरैंट में जा कर चाय पीना पसंद करोगी?’’
‘‘नहीं चिरंजीवी, अब हमारे रास्ते अलगअलग  हैं.’’
‘‘सिर्फ आज, उस के बाद मैं
तुम से कभी नहीं मिलूंगा,’’ चिरंजीवी दोबारा बोला.
दोनों रैस्टोरैंट में आए. चिरंजीवी
ने चाय के साथ कुछ स्नैक्स का भी और्डर दिया.


चाय की चुसकियों के बीच चिरंजीवी ने सपना के पति और बच्चे के बारे में पूछा.
यह सुन कर सपना का मन भीग गया. बड़ी मुश्किल से उस की जबान से बोल फूटे, ‘‘मेरा तलाक हो चुका है. मु? एक 5 साल का बेटा है. वही मेरे जीने का सहारा है.’’
सपना की आंखों में आंसू देख कर चिरंजीवी का दिल पसीज गया.
चाहते हुए भी सपना ने अपने अतीत के पन्ने बारीबारी से खोल कर चिरंजीवी के सामने रख दिए.
चिरंजीवी अपराधबोध से भर गया. सपना की बिखरी जिंदगी के लिए वह खुद को कुसूरवार मानने लगा. वह भरे दिल से बोला, ‘‘सपना, बीते हुए कल को वापस तो नहीं लाया जा सकता, मगर उसे नए सिरे से संवारा जरूर जा सकता है.’’


‘‘मतलब?’’ पूछते हुए सपना हैरानी से उसे देखने लगी.
‘‘क्या हम शादी कर के नई जिंदगी की शुरुआत नहीं कर सकते?’’
‘‘यह तुम क्या कह रहे होतुम्हारे बीवीबच्चे क्या सोचेंगे…’’
‘‘मैं ने आज तक शादी नहीं की.
वैसे भी मेरी उम्र इतनी भी गई नहीं है
कि मैं शादी कर सकूं. अभी तो महज 33 साल का हूं.’’
कुछ सोच कर सपना का मन उदास हो गया, ‘‘नहीं चिरंजीवी, ऐसा नहीं हो सकता. मैं एक बेटे की मां हूं. तुम शायद ही मेरे बेटे का अपना पाओ. अगर मेरा बेटा हम दोनों की शादी की वजह से अनदेखा हुआ, तो मैं खुद का कभी माफ नहीं कर पाऊंगी.’’
‘‘अकेले जिंदगी काटना क्या आसान होगा तुम्हारे लिए?’’ चिरंजीवी के इस सवाल ने सपना को ?ाक?ार कर रख दिया. बेशक आज मांबाप जिंदा हैं, पर कल का क्या ठिकाना. वे नहीं रहे तब किस के सहारे जिंदगी काटेगी. कोई तो होना चाहिए, जो उस के अकेलेपन का साथी हो.


देर हो रही थी. सपना ने चिरंजीवी का मोबाइल नंबर मांगा. घर कर वह बेहद बेचैन हो रही थी. कभी अपने भविष्य के बारे में सोचती, तो कभी बूढ़े हो रहे मांबाप के बारे में. बच्चे को ले कर भी वह परेशान थी. पता नहीं बड़ा हो कर वह चिरंजीवी को अपना पिता स्वीकार करेगा भी या नहीं? सम?ादार होने के बाद अपने असली पिता के पास जाने का जिद कर बैठे और उसे गुनाहगार मानने लगे तब? अगले दिन रविवार था. चिरंजीवी ने सपना के साथ घूमने का प्लान बनाया, जिसे सपना इनकार कर सकी. बेटे को मां के पास छोड़ कर वह यह कह कर गई कि औफिस के काम से जा रही है, जल्द जाएगी.


आज चिरंजीवी और सपना ने एकदूसरे को काफी वक्त दिया.
‘‘चिरंजीवी, क्या तुम मु? पर तरस खा कर शादी तो नहीं कर रहे हो?’’ सपना ने अचानक पूछा.
‘‘बिलकुल नहीं. मैं तुम से आज भी बेहद प्यार करता हूं.’’
‘‘मेरे बच्चे का क्या होगा? क्या तुम उसे बाप का नाम देगे?’’
‘‘सपना, मैं खुद अपने पिता का सौतेला बेटा हूं. क्या मेरे पिता ने मु? बेटे का  मान नहीं दिया. क्या मैं ने उन्हें पिता का दर्जा नहीं दिया. तुम ने खुद देखा होगा कि जब वे कोरोना से पीडि़त हुए थे, तो मैं उन की देखभाल के लिए अपने गांव भागाभागा चला गया था.’’
सपना को चिरंजीवी निश्छल और बेकुसूर लगा.
जब सपना को पूरी तसल्ली हो गई कि चिरंजीवी के बारे में जैसा सोचा था वह वैसा नहीं है, तब घर कर उस ने अपने मम्मीपापा से उस का जिक्र किया. वे तो पहले से ही चाहते थे कि सपना का घर बस जाए. ऐसे में चिरंजीवी की पहल को मना कर सके.


सादे समारोह में शादी हो गई. जब विदाई का समय आया, तब सपना के पापा ने उसे एक कमरे में बुला कर नम आंखों से कहा, ‘‘बेटी, मु? माफ करना. मैं ने तुम्हारे साथ बहुत नाइंसाफी की. तुम पर दबाव बना कर ऐसी जगह तुम्हारी शादी कर दी, जहां करने के बारे में मु? सौ बार सोचना चाहिए था.
सिर्फ शादी कर देना ही मांबाप की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि शादी के लिए बेटी की रजामंदी भी लेनी चाहिए, जो मैं ने नहीं ली.’’  Hindi Story     

Hindi Story: दांव

Hindi Story: औफिस के नए मैनेजर मिस्टर आलोक बहुत ज्यादा हैंडसम थे, पर उन की पत्नी रीता एकदम साधरण सी औरत. लोगों को लगा कि मिस्टर आलोक ने दहेज के चक्कर में रीता मैडम से शादी की है, पर मामला एकदम उलट था. क्या था इस बेमेल शादी का राज?

कं पनी के नए मैनेजर के आने की खबर सुन कर सभी मुलाजिम अपनेअपने काम में जुट गए थे. असिस्टैंट मैनेजर नितिन की जिम्मेदारी कुछ ज्यादा बढ़ गई थी. उन के ऊपर दोहरा दबाव था, एक घर का और दूसरा औफिस का. मैनेजर और असिस्टैंट मैनेजर दोनों के सरकारी मकान अगलबगल थे. इसी वजह से पारिवारिक संबंधों को निभाने की जिम्मेदारी भी नितिन पर पड़ी थी. पुराने मैनेजर मिस्टर कपिल से नितिन के परिवार जैसे संबंध थे. उन के जाने के बाद से नितिन का पड़ोस एकदम सूना हो गया था. अब महीनेभर बाद कल मिस्टर आलोक यह जिम्मेदारी संभालने वाले थे.


मिस्टर आलोक फिलहाल अकेले रहे थे. उन की पत्नी रीता के साथ आने के चलते नितिन का तनाव थोड़ा कम हो गया था. नितिन ने मिस्टर आलोक के आने से पहले ही घर और औफिस दोनों जगह का इंतजाम ठीक करवा दिया था. औपचारिक मुलाकात के लिए शाम की चाय पर उन्हें घर बुलाने की बात भी अपनी पत्नी रेखा से कह दी थी. मिस्टर आलोक दोपहर में घर पहुंच गए. औफिस वालों ने उन के घर को ठीक तरह से सजासंवार दिया था. मिस्टर आलोक इस समय बहुत कम सामान साथ ले कर आए थे. उन्होंने मातादीन के अलावा वहां पर तैनात दूसरे मुलाजिमों को वापस भेज दिया था.


औफिस से कर नितिन को मिस्टर आलोक को घर पर मुलाकात कर उन्हें चाय पर आने का न्योता भी देना था. नितिन ठीक 5 बजे घर पहुंचे. मिस्टर आलोक ने उन्हें आते हुए देख लिया. जरा देर में वे खुद ही नितिन के घर पहुंच गए. उन्होंने डोर बैल बजाई. रेखा ने दरवाजा खोला. उस के कुछ पूछने से पहले ही मिस्टर आलोक ने अपना परिचय भी दे दिया. तभी नितिन की आवाज सुनाई दी, ‘‘कौन है रेखा?’’
रेखा के मुंह से अभी आवाज तक नहीं निकल रही थी. इतनी देर में नितिन वहां गए और बोले, ‘‘सर, आप…’’
‘‘शुक्र है, तुम मु? देख कर
चौंके नहीं.’’
‘‘मैं आप से मिलने आने वाला ही
था सर.’’
‘‘उस से पहले मैं ही चला आया. कायदे से नए पड़ोसी को पुराने
पड़ोसी के घर जाना चाहिए. तुम औपचारिकता निभाने के लिए ही मेरे घर आने वाले थे.’’
‘‘नहीं सर, यह बात नहीं है. आप मेरे बौस हैं. मेरा फर्ज बनता है कि मैं पहले घर पर आप से मिलूं और आप को अपने घर आने का न्योता दूं.’’
‘‘मैं औफिस में तुम्हारा बौस हूं.
घर में हम सिर्फ पड़ोसी हैं,’’ मिस्टर आलोक बोले.
रेखा को मिस्टर आलोक का खुलापन बड़ा भला लग रहा था. लंबेचौड़े, स्मार्ट
और सुडौल देह के स्वामी मिस्टर आलोक बहुत दिख रहे थे. उन का गोरा रंग उन के कालेसफेद खिचड़ी बालों के साथ बहुत मेल खा रहा था.
‘‘बैठिए सर,’’ नितिन ने कहा.
तभी रेखा ने शांताबाई के हाथ पानी भिजवा दिया और खुद भी कर औपचारिकतावश हाथ जोड़ दिए.
‘‘यह मेरी पत्नी रेखा है और ये हमारे कंपनी के नए मैनेजर मिस्टर आलोक हैं,’’ नितिन ने उन दोनों का परिचय भी कराया.


फिर वे दोनों आपस में बातें करने लगे. रेखा किचन की तरह बढ़ गई.
‘‘आप के साथ परिवार के बाकी सदस्य आते तो बहुत अच्छा लगता सर.’’
‘‘मेरी पत्नी रीता, बेटी रोशनी और बेटा राहुल भी जल्दी जाएंगे. अभी जरा वे काम में बिजी थे. वैसे, आप के बच्चे दिखाई नहीं दे रहे…’’ मिस्टर आलोक ने पूछा.
‘‘खेलने गए हैं. वे अभी छोटे हैं सर,’’ नितिन बोले.
कुछ ही देर में शांताबाई चायनाश्ते के साथ हाजिर हो गई.
‘‘इस सब की क्या जरूरत थी? सिर्फ चाय ही काफी थी,’’ मिस्टर आलोक बोले.
तीनों साथ बैठ कर चाय पीने लगे. कुछ देर बाद मिस्टर आलोक ने उन से विदा ली.
‘‘सर स्वभाव से बहुत सरल हैं. उन में बौस जैसी अकड़ नहीं है,’’ मिस्टर आलोक के जाने के बाद नितिन बोले.
अगले दिन मिस्टर आलोक ने औफिस जौइन किया था. उन के स्वभाव से सभी खुश थे. वे बहुत जल्दी सब के साथ घुलमिल गए. अकसर वे शाम को नितिन के पास जाते और खेल से ले कर राजनीति तक की चर्चा करते.
‘‘आप का परिवार कब रहा है?’’ एक दिन नितिन ने पूछा.
‘‘हफ्तेभर के अंदर जाएंगे वे लोग,’’ मिस्टर आलोक बोले.
‘‘यह तो बड़ी अच्छी बात है.’’
तकरीबन एक महीने बाद रीता मैडम के बच्चों के साथ आने की तारीख तय हो गई थी और मिस्टर आलोक ने इस की खबर नितिन को दे दी थी. उन के निर्देश पर मैडम के वैलकम की तैयारी होने लगी. रेखा भी उन के मकान का इंतजाम देख रही थी.
आखिर वह दिन गया और रीता मैम अपने जवान बच्चों के साथ गईं. औफिस के सब लोग सपरिवार मैडम के स्वागत के लिए आए हुए थे.
उम्मीद के उलट रीता मैम को देख कर औफिस के सभी लोग हैरान रह गए और उन की कल्पना एक ?ाटके में बिखर गई.
कंप्यूटर औपरेटर मिनी बोली, ‘‘कहां सर और कहां रीता मैडमदोनों में जमीनआसमान का अंतर है.’’
‘‘ऐसी जोड़ी की तो मैं सपने में
भी कल्पना नहीं कर सकती थी,’’ रिया ने कहा.
रीता मैडम को देख कर सब खुसुरफुसुर कर रहे थे, लेकिन ऊपर से चेहरे पर मुसकान ओढ़े हुए थे.
रेखा ने रीता मैडम को बुके थमा कर कहा, ‘‘वैलकम मैडम.’’
रीता ने एक गहरी नजर रेखा पर डाली लेकिन बोली कुछ नहीं. वह चारों तरफ नजर घुमा कर सब को देख रही थी. उसे पूरा विश्वास था कि इस समय सब उसे देख कर क्या महसूस कर रहे हैं, लेकिन उसे इस बात की कोई चिंता नहीं थी. वजह, वह ऐसी ही प्रतिक्रिया पहले भी कई वैलकम पार्टी में देख चुकी थी. उसे अपने बारे में कोई गलतफहमी
नहीं थी.
रीता मोटी, नाटी और सांवली थी. कहीं से भी उन दोनों का कोई मेल नहीं था. उसे बात करने का सलीका था और ही उठनेबैठने और खानेपीने का. वह एक साधारण औरत की तरह सब
से पेश रही थी, जो मिस्टर आलोक के ओहदे से कहीं भी मेल नहीं खा रहा था. उस से मिल कर सभी को निराशा हुई थी.
जब रीता किसी समारोह में जाती, तो बातें पहले धीमी होतीं, फिर उस के कानों तक पहुंच ही जातीं.
‘‘देखो, वही है…’’
‘‘हां, वही सर की पत्नी
‘‘सम? नहीं आता, सर ने इस में क्या देखा…’’
एक बार किसी औरत ने सीधे पूछ ही लिया, ‘‘रीताजी, आप पहले क्या करती थीं?’’
रीता ने बिना किसी ?ि?ाक के कहा, ‘‘जीना…’’
पूछने वाली औरत थोड़ी असहज हो गई, ‘‘मतलब कोई काम?’’
‘‘काम तो अब भी करती हूं.’’
‘‘कौन सा?’’
‘‘अपने बच्चों का भविष्य संवारने का…’’ रीता ने जवाब दिया.
लोग अकसर रीता मैडम को तौलते थे. तराजू में रखते थे एक पल में.
‘‘ पढ़ीलिखी, सलीकेदार, ही खूबसूरत…’’
रीता को यह अजीब नहीं लगता था. वह जानती थी कि समाज कीमत दिखने वाली चीजों से लगाता है. जिस दिन उसे पहली बार एहसास हुआ कि लोग उस की मौजूदगी से असहज हैं, उसी दिन उस ने तय कर लिया था कि वह खुद को हलका साबित नहीं करेगी.
एक सामाजिक कार्यक्रम में किसी सज्जन ने आलोक से हंसते हुए कहा, ‘‘आप की पत्नी बड़ी अलग हैं.’’
आलोक कुछ कहने ही वाले थे,
तभी रीता ने खुद जवाब दे दिया, ‘‘हां, क्योंकि मैं सही समय पर जीना सीख
गई थी.’’
वहां सन्नाटा छा गया. समाज को यही खलता था कि रीता शर्मिंदा नहीं थी. अगर वह सिर ?ाका लेती तो शायदबेचारीकहलाती. अगर रोती तोदयामिल जाती. पर वह रोती थी, ?ाकती थी. वह जानती थी कि समाज के लिए उस की कीमत सिर्फ इतनी थी कि वह किस की पत्नी है, उस से ज्यादा नहीं और कम भी नहीं. उसे यह भी पता था अगर वह खूबसूरत होती तो यही समाज उसेभाग्यशालीसे ज्यादा कुछ कहता.
रीता ने कभी सफाई नहीं दी, क्योंकि सफाई वही देता है जो अपराधी हो. रीता ने सिर्फ एक बात पकड़े रखी,
उस की जगह. आज भी जब लोग उसे देखते हैं, तो सोचते हैं कि यह यहां तक कैसे पहुंची?
समाज की नजर में रीता की कीमत कभी ऊंची नहीं रही, पर उसे अब यह फर्क नहीं पड़ता था, क्योंकि जिस औरत ने अपनी कीमत खुद चुकाई हो, उसे समाज के लेबल की जरूरत नहीं होती.
रेखा सोच रही थी कि एक मैनेजर की पत्नी में जिन गुणों की उम्मीद की जाती है उन में से एक भी रीता में नहीं था. इस से पहले भी 2 मैनेजर उन के बगल के बंगले में रह कर जा चुके थे. उन की पत्नियां बड़ी सुघड़ और सलीकेदार थीं. वह सोचने पर मजबूर हो गई कि हो हो मिस्टर आलोक ने रुपयों की खातिर लालच में पड़ कर रीता मैम जैसी औरत से शादी की हामी भरी होगी.
आज दिनभर चर्चा का विषय रीता मैडम ही थीं.
‘‘मैडम तुम्हें बड़ी तिरछी नजर से देख रही थीं. तुम ने उन की तारीफ नहीं की रेखा.’’
‘‘किस बात की तारीफ करूं नितिन? उन में रूप है और ही कोई खास गुण दिखाई दे रहा था.’’
‘‘बारीकी से देखोगी तो तुम्हें उन में भी कोई खास गुण दिखाई दे जाएगा,’’ नितिन बोले, तो रेखा हंस दी.
मिनी और रिया तो अकसर आलोक सर को देखते ही मैडम की बातें ले कर बैठ जातीं. उन दोनों को बात करने के लिए एक अच्छाखासा टौपिक मिल
गया था.
‘‘तुम्हारा क्या खयाल है कि सर की लव मैरिज है या अरेंज?’’
‘‘जरूर दहेज के लिए घर वालों की मरजी से शादी की होगी, वरना…’’
‘‘यह भी हो सकता है रिया कि उन में कोई ऐसा गुण हो जिस पर सर मोहित हो गए हों. कहते हैं प्यार अंधा होता है.’’
‘‘मु? तो उस की उम्मीद नहीं है,’’ इतना कह कर दिया फाइल ले कर सर के केबिन में चली गई.
रीता से मुलाकात करने के बाद औफिस में अभी उसे ले कर बातों का बाजार गरम था. उसे अपने बारे में
किसी भी तरह का कोई शिकवा नहीं होता था. वह जैसी थी उस से कोई शिकायत नहीं थी और अपनी उपलब्धि पर खुश भी थी.
रीता को लोगों पर हंसी आती जो हरेक का बाहरी रूप देख कर बिना जाने जज करना शुरू कर देते थे. वह जानती थी कि मर्दों को खूबसूरती लुभाती है लेकिन वक्त पड़ने पर इस से उन का कोई लेनादेना नहीं होता. वे तो बस औरत की देह के मोह जाल में फंस
जाते हैं.
मिस्टर आलोक की पसंद हर मामले में अच्छी मानी जाती थी. कारोबार हो या रिश्ते लोग उन की सम? की मिसाल देते थे, लेकिन रीता को ले कर उन से चूक हो गई थी. सब उसे भाग्यशाली कहते, पर रीता भाग्यवादी नहीं थी. उस का मानना था कि भाग्य अपनेआप नहीं बनता, उसे बनाना पड़ता है और उसे बनाने में बहुतकुछ दांव पर भी लगाना पड़ता है.
अपने भविष्य के लिए रीता ने भी बड़ा दांव खेला था और वह दांव उस के हिसाब से सीधा पड़ा था.
लोगों ने रीता को देख कर अपनीअपनी राय बना ली थी. किसी को यकीन था कि वह किसी बड़े बिजनैसमैन परिवार से होगी, तो कोई कहता कि मिस्टर आलोक ने दहेज के लालच में शादी की है.
कोई नहीं जानता था कि यह शादी अरेंज नहीं थी. यह माना जाता है कि प्यार तन से ज्यादा मन की खूबसूरती देखता है. यह आम सोच थी, पर रीता की सोच इस से मेल नहीं खाती थी
उस का अनुभव कुछ और कहता था. वह खुद से कहती, ‘‘एक मर्द पहले तन देखता है, मन और उस की खूबसूरती के बारे में बाद में सोचता है.’’
शायद यही वजह थी कि जब एक साधारण सी औरत ने तन के बल पर सबकुछ हासिल कर लिया, तो उस के मन में यह विश्वास बैठ गया कि
एक खूबसूरत औरत के लिए इस
दुनिया में कुछ भी पाना नामुमकिन
नहीं है.
?ांपड़े में रहते हुए रीता ने बहुतकुछ देखा था. मर्दों की निगाह, उन की कमजोरी, उन का डर. उसे जल्दी सम? गया था कि गरीबी और देह दोनों का सौदा चलता है, फर्क सिर्फ कीमत का होता है. उस ने आलोक को चुना थाइसलिए नहीं कि वह सब से अच्छा आदमी था, बल्कि इसलिए कि वह
सब से असुरक्षित अमीर आदमी था.
रीता एक बहुत गरीब परिवार से थी. उस के पिताजी एक फैक्टरी में मजदूरी करते थे. अब वे नहीं रहे. आलोक खानदानी रईस थे और पढ़ाई करने के लिए परिवार से दूर दिल्ली आए थे. उन्होंने अपने लिए अलग घर ले रखा था. उस के ठीक सामने रीता का ?ांपड़ा था. उस की मां बरसों पहले गुजर गई थी.
4 भाईबहनों में रीता सब से बड़ी थी, जिन की परवरिश की खातिर उस ने पढ़ाई छोड़ दी थी. सब दिन में स्कूल चले जाते और रीता घर पर अकेली रहती. अब उन सब की शादी हो गई और उन के घर बस गए. सब अपने परिवार में खुश थे.
आलोक अकसर अपने घर से रीता के ?ांपड़े की ओर ?ांकते रहते. एक दिन वे रीता को देख कर मुसकराए. बदले में वह भी हंस दी. इशारा मिलते ही अगले दिन आलोक दोपहर में उस के घर गए और मुसकरा कर बोले, ‘‘मेरे घर पर काम करोगी?’’
रीता ने तुरंत हां कह दी. अब तो रोज आनेजाने और मिलने का सिलसिला शुरू हो गया.
एक दिन आलोक ने जैसे ही रीता का हाथ पकड़ा, तो वह सारी लाजशर्म छोड़ कर उन से लिपट गई. उस ने आलोक को कस कर पकड़ लिया.
आलोक आखिर मर्द ही तो थे. जरा सी देर में पिघल गए और उन के बीच की सारी दीवारें टूट गईं.
रीता जानती थी कि वह जो कर रही है उस में बहुत ज्यादा रिस्क है, लेकिन उस के सामने कोई दूसरा उपाय नहीं था. वह गरीबी से परेशान थी और आलोक एक अमीर परिवार के बेटे थे. अगर उस का दांव सीधा पड़ गया, तो जिंदगीभर का आराम था, पर वह गलत भी पड़ता तो उन जैसों पर उस का ज्यादा असर पड़ता.
आलोक पर रीता का नशा चढ़ चुका था. रोज ही वह काम के बहाने आलोक के घर आती और उन के सामने समर्पित हो जाती. 6 महीने तक सबकुछ ठीक चला और फिर एक दिन रीता ने तब जबरदस्त धमाका कर दिया, जब उस ने आलोक को बताया कि वह पेट से है, तो उन के पैरों की नीचे से जमीन खिसक गई.
आलोक एकदम से बोले, ‘‘यह क्या कह रही हो?’’
‘‘मैं सच कह रही हूं. जितनी जल्दी हो सके मु? से शादी कर लो.’’
‘‘शादी और तुम से…’’
‘‘क्या कमी है मु? में?’’
‘‘यह पूछो कि क्या है तुम में?’’
‘‘तो फिर क्यों रोज मेरे सामने गिड़गिड़ाते थे,’’ रीता चीखी तो आलोक नरम पड़ गए.
‘‘इस बच्चे से छुटकारा पा लो. जो मांगोगी मैं तुम्हें देने के लिए तैयार हूं.’’
‘‘यह नहीं हो सकता. बच्चा तो मेरे साथ ही मरेगा यह जान लो और मैं तुम सब को फंसा कर मरूंगी,’’ रीता ने कहा.
मजबूर हो कर आलोक को यह बात अपने घर वालों को बतानी पड़ी. वह किसी के दबाव के आगे नहीं ?ाकी. आलोक लाचार हो गए थे. घर वालों ने फैसला आलोक पर छोड़ दिया. इन्हें अपनाने के लिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार थी, पर लाखों रुपयों के लालच में करोड़ का भविष्य छोड़ने को राजी थी.
मजबूर हो कर आलोक को रीता से शादी करनी पड़ी. घर वालों का दबाव अभी भी बना हुआ था. वे अभी भी हर कीमत पर रीता से छुटकारा पाना चाहते थे, पर वह कानून की दुहाई दे कर इन पर अपना दबाव बनाए हुए थी.
तनाव भरे माहौल में पहली बेटी रोशनी का जन्म हुआ. घर वाले अभी भी यही कह रहे थे कि इसे छोड़ दो, लेकिन आलोक जानते थे कि यह इतना आसान नहीं था.
शादी और बेटी के हो जाने पर भी वे नहीं पिघले. रीता भी हार मानने वालों में थी. परिवार और दुनिया दोनों ही जगह उस का जीना मुश्किल हो रहा था और वह सुनहरे भविष्य के खातिर आलोक को छोड़ने को राजी थी.
उस ने अपनी जिंदगी को ले कर बहुत बड़ा दांव खेला था.
रीता की जिद के चलते परिवार की इज्जत खराब हो रही थी. उसी की खातिर उन्होंने रीता को घर में जगह दे दी थी, पर दिल में नहीं. वह खुश थी कि उस की जद्दोजेहद कामयाब हो रही थी. जवान मर्द आखिर क्या करता?


कोई उपाय पा कर आलोक ने हार मान ली और उन दोनों के संबंध सामान्य होने लगे. फिर रीता की गोद में राहुल गया. बेटे के खातिर आलोक ने रीता को माफ कर दिया और इस तरह उसे मिस्टर आलोक के घर और जिंदगी में जगह मिल गई.


राहुल के जन्म के बाद आलोक बदले. पहली बार उन्होंने कहा, ‘‘तुम्हें डर नहीं लगता था?’’
‘‘हर दिन लगता था, पर डर के साथ भूख भी थी,’’ रीता ने कहा. आलोक कुछ नहीं बोले. आज लोग उसे देख कर कहते हैं कि सलीका है, सम?. रीता जानती है कि सलीका उस ने सीखा ही नहीं और सम? उस ने जरूरत से ज्यादा पाली है. वह कोई आदर्श औरत नहीं है और ही कहानी की हीरोइन. वह बस एक औरत है, जिस ने यह तय किया है कि वह हार कर नहीं जिएगी. उस का दांव गलत भी हो सकता था, पर उस ने दांव इसलिए नहीं खेला था कि वह सही साबित हो, उस ने इसलिए खेला था कि पीछे लौटने का रास्ता बंद हो जाए. और जब रास्ता बंद हो जाए तो आदमी चलना सीख ही जाता है.


यह सब किसी फिल्मी कहानी से कम था. क्याकुछ नहीं ?ोला था रीता ने अपनी जिंदगी में. भले ही घर वालों की नजर में इस का ज्यादा मोल था, पर रीता की आपबीती बयां कर रही थी कि आज जोकुछ भी उस के पास है, उस का रास्ता उस ने अपने तन से बनाया था. पति आलोक का खुला बरताव देख कर रीता अकसर सोचती, ‘इनसान का शरीर बूढ़ा होता है, पर मन नहीं. उस की खुशी के लिए वह रोजाना नए उपाय ढूंढ़ता रहता है.’ जिंदगी में रीता ने बड़ी जद्दोजेहद देखी थी. इसी ने उसे नए सिरे से सोचने का एक मौका दे दिया. उसे लगता कि दुनिया में बेकार कुछ भी नहीं है. सब की अपनी उपयोगिता है. बस, सही समय पर उस का इस्तेमाल करना आना चाहिए, लेकिन उस के साथ बहुत ज्यादा जोखिम भी जुड़ा होता है. हरेक के बस का यह ?ोलना नहीं होता, जिस ने जिंदगी में कभी भी बड़ा जोखिम नहीं उठाया था. उस के लिए यह रास्ता जायज नहीं ठहराया जा सकता था.          Hindi Story             

लेखक डा. के. रानी

Hindi Story: कलम का जादूगर

Hindi Story. ‘‘को आदमी अपनी गाड़ी के सामने गया है,’’ अपने पति मोहन की यह बात सुन कर किसी अनहोनी के डर से गीता का कलेजा कांप उठा.


अभी नीचे उतरने के लिए गाड़ी का दरवाजा खोला ही था कि उस आदमी का चेहरा देख कर गीता चौंक गई. उस ने ?ाट से हथेलियों से अपना चेहरा ढक लिया. वह कोई और नहीं, बल्कि गीता का सालों का खोया हुआ प्यार अजय था, लेकिन गाड़ी की टक्कर से उसे चोट नहीं आई आई थी.
‘‘सर, आप ठीक तो हैं ?’’ मोहन ने ?ाट गाड़ी से नीचे उतर कर अजय को संभालते हुए पूछा.
गीता और मोहन अपने एकलौते बेटे को लेने के लिए दिल्ली के रेलवे स्टेशन जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ था.


‘‘हां, मैं बिलकुल ठीक हूं,’’ अजय ने कहा. ‘‘लेकिन सर, आप यहां कैसे? मोहन ने पूछा.‘‘सर, आज ही मेरी बेटी लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी कर के घर वापस आई थी. उस के यहां घूमने की जिद के चलते मैं यहां था,’’ अजय ने बताया. ‘‘लेकिन आप की बेटी इस समय आप के साथ नहीं है?’’ मोहन ने पूछा. ‘‘वह कुछ खरीदारी करने गई थी, आती ही होगी,’’ जवाब में अजय ठहाका मार कर हंस पड़ा, तो गीता भी उस के साथ मुसकरा उठी. काफी अरसे बाद वे दोनों साथ हंस रहे थे, लेकिन अजय को इस बात की जानकारी नहीं थी.


देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा होने लगी. सब की आंखें अजय पर टिकी हुई थीं. लेकिन गीता की समझ में कुछ नहीं रहा था. तभी उस भीड़ को चीरती हुई एक बेहद खूबसूरत गाड़ी कर रुकी. उस गाड़ी के सामने गीता की गाड़ी फीकी लग रही थी. उस गाड़ी की ड्राइविंग सीट से एक लड़की उतरी और अजय को देखते हुए बोली, ‘‘पापा, आप यहां क्या कर रहे हैं? सब ठीक तो है ? यहां इतनी भीड़ क्यों जमा है?’’ ‘‘कुछ नहीं बेटाबस ऐसे ही’’ अजय ने कहा. ‘‘तो फिर घर चलें हम?’’ वह लड़की बोली.


‘‘चलता हूं,’’ अजय ने वहां जमा भीड़ की तरफ हाथ जोड़ते हुए कहा और अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया. उस के बैठते ही गाड़ी सड़क पर दौड़ने लगी. जब अजय की गाड़ी दूर निकल गई और गीता को यह यकीन हो गया कि अब वह भीड़ की तरफ मुड़ कर देखेगा, तो भी उसे नहीं पहचान पाएगा, लिहाजा वह गाड़ी से नीचे उतर गई. ‘‘कौन था यह आदमी?’’ गीता ने अनजान बनते हुए मोहन से पूछा. ‘‘जादूगर,’’ मोहन ने कहा.


‘‘जादूगर?’’ गीता ने मोहन का यह शब्द बड़े ही जबरदस्त अंदाज में दोहराया. ‘‘हां, कलम का जादूगर. दुनियाभर में इस के लिखे उपन्यास खूब बिकते हैं. फुरसत के पलों में मैं भी इस के उपन्यास बड़े ही चाव से पढ़ता हूं,’’ मोहन ने गीता को बताया. उस समय रात के 2 बज रहे थे, लेकिन गीता की आंखों से नींद कोसों दूर गायब थी. आज उसे रहरह कर पुरानी यादें ताजा हो रही थीं.


गीता अजय की सादगी पर मरमिटी थी. वे दोनों एक ही कालेज में पढ़ते थे और प्यार भी करते थे. लेकिन उन दोनों के प्यार को गीता के भैया की नजर लग गई थी.गीता के भैया नहीं चाहते थे कि वह एक गरीब लड़के से प्यार करे, क्योंकि गीता एक अमीर परिवार से थी, इसलिए उस के भैया की नजर में अजय गरीब होने के साथसाथ एक गंवार और जाहिल लड़का भी था. लेकिन प्यार तो प्यार होता है. एक दिन गीता के भैया ने उन दोनों को एकसाथ देख लिया.

उसी दिन भैया ने गीता की शादी अपने दोस्त के बेटे के साथ तय कर दी. भैया, मैं यह शादी नहीं कर सकती,’ गीता ने कहा. क्यों? क्या बुराई है इस रिश्ते में?’ भैया ने पूछा. कुछ नहीं भैया. बुराई तो आप की बहन में है जो किसी से बेपनाह मुहब्बत कर बैठी है.’ किस से? उस अनपढ़, जाहिल, गंवार लड़के से, जिस के पास कोई ठिकाना नहीं है?’ हां भैया.

आप की यह बहन उस के बगैर जिंदा नहीं रह सकती, इसलिए आप मेरा प्यार मेरी झोली  में अपनी तरफ से भीख समझ कर डाल दीजिए,’ यह कहते हुए गीता ने अपना आंचल भाई के आगे फैलाया ही था कि भाई ने गीता के गाल पर एक थप्पड़ रसीद कर दिया. थप्पड़ इतना जोरदार था कि गीताधड़ामसे फर्श पर गिर गई. गीता को इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी. आज अपने मांबाप की बहुत कमी खल रही थी कि तभी अजय की आवाज उस के कानों में गूंजी.


देख लीजिए भैया. अजय आज अपने प्यार को छिनते देख कर आप के पास चला आया है.’ मैं इस की हिम्मत का कद्र करता हूं, लेकिन आज यह मेरे हाथों से जिंदा बच कर नहीं जाएगा,’ कहते हुए भैया दीवार पर टंगी हुई म्यान से तलवार खींच कर दरवाजे की तरफ बढ़ गए. नहीं भैया, आप ऐसा नहीं करेंगे. आप जहां चाहेंगे, मैं वहीं शादी करने के लिए तैयार हूं,’ जब गीता ने यह कहा, तो भैया के बढ़ते कदम रुक गए.


तो जा कर उस से कह दो कि तुम इस शादी से खुश हो. साथ ही यह भी बोल देना कि आज के बाद वह
यहां आसपास भी दिखाई दे,’ भैया ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा. अजय गली में खड़ा था. गीता के बाहर आते ही उस ने गीता का हाथ कस कर पकड़ कर कहा, ‘यह मैं क्या सुन रहा हूं…’ तुम ने ठीक सुना है…’ गीता की आवाज कड़क थी, ‘आखिर जिस से मेरी शादी हो रही है, उस के पास सबकुछ है. तुम्हारे पास क्या है?’


क्या तुम ने इसलिए मुझसे से प्यार किया था कि आज मेरी हैसियत का मजाक उड़ा सको?’ गीता ने कुछ नहीं सुना और घर के भीतर चली गई. देखते ही देखते जाने कैसे 25 साल गुजर गए, पता ही नहीं चला और अजय की याद दिल के कोने में ही दब गई. लेकिन उस की याद गीता में एक टीस पैदा कर देती थी. ‘‘गीता सुबह हो गई, तुम कहां खोई हो?’’ मोहन के कहने पर वह वर्तमान में आई.


‘‘अभी थोड़ी देर में उठती हूं,’’ कह कर गीता ने मोहन से पीछा छुड़ाया. थोड़ी देर में मोहन नहाने के लिए बाथरूम में चले गए. अब मोहन से क्या कहती गीता कि वह कभी अजय से दिलोजान से मुहब्बत करती थी. उस दिन के बाद जब भी वह उस के लिखे गए उपन्यास को पढ़ती है, तो उसे अजय से हुई आखिरी मुलाकात याद जाती है.


गीता रोते हुए अजय से बोल रही थी, ‘अजय, आज मुझे इस बात की उतनी तकलीफ नहीं है कि कल सवेरे हम दोनों एकदूसरे से हमेशा के लिए अलग हो जाएंगे, जितना मुझे इस बात की तकलीफ है कि मेरे भैया तुम्हें एक अनपढ़, जाहिल, गंवार से ज्यादा कुछ नहीं समझाते हैं, क्योंकि तुम गरीब हो. इसे हमदर्दी मत समझना पर तुम्हें तुम्हारी गरीबी से नजात दिलाने के लिए मैं तुम्हारे लिए एक कलम लाई हूं.

जिस तरह तुम ने मेरे बगैर जीना नहीं सीखा है, उसी तरह तुम इस कलम से सीख लेना और अच्छा लिखना.तुम अपना चेहरा तभी  मुझे दिखाना जब तुम एक कलम का जादूगर बन चुके होगे,’ इतना कह कर अजय की जेब में कलम रख दी और गीता अपने घर की तरफ बढ़ गई. पुलिस से उगाही करने वालों पर लगा मकोका

दिल्ली में पुलिस वालों कोब्लैकमेलकर वसूली करने वाले गैंग को दबोच कर उस पर महाराष्ट्र कंट्रोल औफ और्गैनाइज्ड क्राइम एक्ट लगा दिया गया. क्राइम ब्रांच की एंटी रौबरी एंड स्नैचिंग सैल ने इस मामले में केस दर्ज किया और गिरोह के सरगना राजकुमार उर्फ राजू मीणा को गिरफ्तार कर लिया. उसे दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया, जहां से 7 दिन की रिमांड मिली.

पुलिस अफसरों ने बताया कि यह उगाही गैंग दिल्ली नौर्थईस्ट जिले में साल 2018 से सक्रिय था, जो ज्यादातर ट्रैफिक पुलिस वालों को टारगेट करता था. ट्रैफिक स्टाफ से कथिततौर पररिश्वतलेते हुए का वीडियो होने का दावा किया जाता था. इस के बाद वे एक लाख से ले कर 5 लाख रुपए तक मांगते थे. पैसा नहीं देने पर गैंग मैंबर आला अफसरों के साथसाथ सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर कैरियर बरबाद करने की धमकी देते थे. कई पुलिस वाले इस गिरोह के जाल में फंसे, जिन्होंने मोटी रकम दे कर अपना पीछा छुड़ाया.  Hindi Story

लेखक – आनंद कुमार नायक

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