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Crime Story in Hindi : विश्वासघात

Crime Story in Hindi. दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी. सौम्या उस समय घर में अकेली थी. उस का पति करन दफ्तर जा चुका था.

सौम्या ने जब दरवाजा खोला, तो बाहर खड़े शख्स को देख कर वह चौंक पड़ी,    ‘‘अरे, आप…’’    ‘‘अंदर आने के लिए नहीं कहेंगी,’’ बाहर खड़े नौजवान ने मुसकरा कर कहा.   ‘‘मैं तो भूल ही गई. आइए, अंदर आइए,’’ वह झेपते हुए बोली.

वह नौजवान, जिस के बदन पर कीमती सूट था और बाएं हाथ की 2 उंगलियों में हीरे की अंगूठियां थीं, अंदर आ कर एक कुरसी पर बैठ गया.

‘‘आप कितने दिनों बाद आए हैं. लगता है, आप को हमारी याद ही नहीं आती,’’ सौम्या शिकायत करने लगी.

‘‘ऐसी बात नहीं है भाभीजी…’’ वह नौजवान बोला, ‘‘दरअसल, आप को तो मालूम है कि बाबूजी की मौत के बाद घर और कारोबार की सारी जिम्मेदारी मुझे ही संभालनी पड़ती है.’’ ‘‘मैं आप के लिए चाय बना कर लाती हूं,’’ सौम्या ने कहा.

कुछ देर बाद सौम्या नमकीन और चाय ले कर आ गई.

‘‘करन तो ड्यूटी पर गया होगा?’’ उस नौजवान ने पूछा. ‘‘हां,’’ सौम्या ने उसे चाय का कप पकड़ाते हुए कहा.

‘‘उस से तो मुलाकात हो ही नहीं पाती. काम में मसरूफ रहता हूं. आज दफ्तर मेें ज्यादा काम नहीं था, इसलिए उसे जल्दी निबटा कर यहां आ गया.’’ ‘‘आप रविवार को आइए, करन घर में ही मिलेंगे.’’

इधरउधर की बातें कर के उस नौजवान ने अपने कोट की जेब से एक अंगूठी निकाली और सौम्या की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘मेरी तरफ से यह अंगूठी आप के लिए…’’

सौम्या ने खूब मना किया, पर वह नौजवान अंगूठी दे कर ही माना.

‘‘यह तो बहुत कीमती होगी?’’ ‘‘बिलकुल नहीं…’’ वह नौजवान मुसकराते हुए बोला, ‘‘आप के आगे तो यह बिलकुल सस्ती है.’’ सौम्या चाय के खाली कप उठाते हुए बोली, ‘‘खाना खा कर जाना.’’

चाय के कप उठाते समय सौम्या की साड़ी कंधे से नीचे खिसक गई थी. उस नौजवान ने देख लिया था. वह सकपका गई. उस ने फौरन साड़ी का पल्ला दुरुस्त किया.

तभी वह नौजवान खड़ा हो गया और बोला, ‘‘अभी मैं चलता हूं. खाना फिर कभी खाऊंगा.’’

उस 22 साला नौजवान का नाम दीप था. वह करन के बचपन का साथी था. वह बहुत अमीर था, जबकि करन पोस्ट औफिस में क्लर्क था. इस के बावजूद वे दोनों बहुत गहरे दोस्त थे.

करन के मांबाप बहुत पहले ही एक कार हादसे में मर चुके थे. सौम्या के साथ करन ने लव मैरिज की थी.

दुनिया में अच्छी दोस्ती और प्यार से जलने वालों की कमी नहीं है. करन और दीप की दोस्ती भी दुनिया वालों की नजरों में खटकती थी.

करन के घर के सामने वाली पान की दुकान के पास भीड़ का जमावड़ा रहता था. उन में से ज्यादातर लड़के मवालीगुंडे होते थे.

उन्हीं में से एक था राजू, जो अपने 3-4 दोस्तों के साथ अकसर वहां आता था. वह दीप और सौम्या के बारे में उलटीसीधी बातें किया करता था.

आज भी जब दीप करन के घर से निकल कर अपनी कार में बैठ कर जा रहा था, तो राजू पान की दुकान के पास खड़ा पान चबा रहा था.

जब कार आंखों से ओझल हो गई, तो राजू का एक दोस्त बोला, ‘‘राजू, यह लड़का यहां अकसर आता है.’’

‘‘तुझे क्या दिक्कत है?’’ पान चबाते हुए राजू ने एक खास अंदाज में कहा, ‘‘अरे भाई, जिस के यहां माल होगा, उसी के यहां तो चोर आएंगे…’’

उस की बात पर सब हंस पड़े.

रविवार को जब दीप आया, तो करन घर में ही था. उस दिन दोनों ने बैठ कर खूब गपशप की और नाश्ता व खाना भी साथसाथ खाया.

खाना खाते समय दीप ने अगले शुक्रवार को शहर के सब से महंगे होटल में लंच कराने का औफर दिया.

‘‘वह तो बहुत महंगा है. वैसे सौम्या तो कई बार वहां चलने के लिए कह चुकी है, पर… इतने महंगे होटल में मैं नहीं जा सकता,’’ करन ने कहा.

‘‘उस की चिंता तुम क्यों करते हो? अरे, भाभीजी पर कुछ हक मेरा भी तो बनता है. क्या उन की एक ख्वाहिश को भी मैं पूरा नहीं कर सकता?’’ दीप पास खड़ी सौम्या की तरफ प्यार से देखते हुए बोला.

दीप की जिद के आगे करन को उस की बात माननी ही पड़ी.

जब शुक्रवार आया, तो करन को कुछ जरूरी काम पड़ गया और वह बाहर चला गया, लेकिन जाते समय फोन पर दीप से कह गया कि वह सौम्या को खाना खिलाने होटल ले जाए.

दीप सौम्या को ले कर जब उस महंगे होटल में पहुंचा, तो सौम्या की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. यहां आने के बारे में वह न जाने कब से सोच रही थी. दीप उसे होटल के एक शानदार कमरे में ले गया.

‘‘हम यहां कमरे में क्यों आए… लंच तो बाहर…’’ कमरे में पहुंच कर कुछ सोचते हुए सौम्या बोली.

‘‘बाहर भीड़ ज्यादा है और भीड़ में आप का दम घुटता है, इसलिए लंच का प्रोग्राम मैं ने इस कमरे में ही बनाया है. यह कमरा तो मैं ने कल ही बुक करवा दिया था.’’

‘‘तुम तो मेरी पसंदनापसंद को जानते हो,’’ सौम्या हंस कर बोली.

यह सुन कर दीप केवल मुसकरा दिया.

दीप ने एक वेटर को बुला कर लंच कमरे में ही मंगा लिया और शानदार पलंग पर बैठ कर दोनों खाना खाने लगे.

‘‘यह कोल्ड ड्रिंक पता नहीं कैसी… मुझे  चक्कर सा…’’ कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद सौम्या अचानक सिर पकड़ कर बोली. ‘‘हां, स्वाद भी कुछ बदलाबदला सा…’’ दीप पलंग से उतरते हुए बोला, ‘‘मैं वेटर से पूछता हूं.’’

अभी दीप पलंग से उतरा ही था कि सौम्या भी पलंग से उतरी और कुछ दूर चलते ही उस के कदम लड़खड़ा गए. अगर दीप ने फौरन पलट कर उसे अपनी बांहों में थाम न लिया होता, तो वह गिर जाती.

उसी समय सौम्या को तेज हिचकी आई और वह ?ाटका खा कर दीप से लिपट गई. दीप ने उसे और कस कर जकड़ते हुए अपने सीने से लगा लिया.

सौम्या के शरीर को अपनी बांहों में जकड़े दीप को अपना शरीर जलता हुआ सा मालूम होने लगा. उसे ऐसा लगा, जैसे शरीर में अंगारे भर गए हों. उस का चेहरा लाल होने लगा.

दीप की बांहों का शिकंजा अपनेआप कसने लगा. 2 जिस्मों की गरमी से पूरा कमरा सुलगने लगा, लेकिन इस से पहले कि आग लग पाती, सौम्या घबरा कर दीप से अलग हो गई.

‘‘हमें घर चलना चाहिए,’’ सौम्या माथे से पसीना पोंछते हुए दरवाजे की तरफ बढ़ते हुए बोली. दीप भी उस के पीछेपीछे चल पड़ा.

सौम्या को घर छोड़ कर जब दीप बाहर निकला, तो वह काफी परेशान दिख रहा था. उस ने राजू व उस के दोस्तों को अपनी ओर घूरते हुए देखा. वह जल्दी से कार में बैठा और वहां से चला गया.

राजू के चेहरे पर आज कुछ ज्यादा ही खुशी झलक रही थी.

सुबह का समय था. दीप अपने दफ्तर में बैठा एक फाइल मेें उल?ा हुआ था, तभी मेज पर रखा फोन बजा.

‘‘हैलो,’’ दीप ने ही फोन उठाया.  ‘‘हैलो,’’ उधर से एक भारीभरकम आवाज सुनाई दी.

‘‘मैं दीप भारती बोल रहा हूं… आप कौन?’’ दीप ने पूछा.    ‘‘यह मत पूछो कि मैं कौन बोल रहा हूं. मैं ने फोन क्यों किया, यह पूछो?’’

दीप कुछ चौंका, फिर भी उस ने कहा, ‘‘क्यों किया फोन?’’    ‘‘तुम्हारी मेज पर… तुम्हारे बिलकुल ठीक सामने जो फाइल रखी है, उसे खोल कर देखो…’’

अब दीप चक्कर में पड़ गया कि आखिर माजरा क्या है? हकीकत जानने के लिए उस ने एक हाथ बढ़ा कर मेज पर रखी फाइल उठा ली और जब उसे खोल कर देखा, तो उस में एक बड़ा सा लिफाफा रखा था.

जब दीप ने लिफाफा खोल कर देखा, तो उस के पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया. दिल की धड़कनें बढ़ गईं, चेहरे पर पसीने की बूंदें झलकने लगीं.

‘‘क्यों, देख लिया?’’ फोन करने वाले शख्स ने हंस कर पूछा. ‘‘तुम कौन हो? क्या चाहते हो?’’ दीप घबरा गया था.

‘‘अभी भी नहीं समझे. मुझे पैसा चाहिए. अगर तुम चाहते हो कि लिफाफे में रखे तुम्हारे और सौम्या के फोटो तुम्हारे बचपन के दोस्त करन के पास न पहुंचें, तो मु?ो पूरे 20 लाख रुपए दो.’’

‘‘20 लाख…’’ दीप चौंका. ‘‘हां, तुम्हारी घटिया हरकत के मुकाबले यह रकम ज्यादा नहीं है.’’

दीप हिम्मत जुटा कर बोला, ‘‘तुम्हें एक पैसा भी नहीं मिलेगा.’’ ‘‘पैसा, अरे पैसे से क्या होता है आजकल? मुझे पूरे 20 लाख रुपए चाहिए,’’ उधर से धमकी भरी आवाज सुनाई दी.

दीप सोचने लगा, ‘अगर करन ने ये तसवीरें देख लीं, तो वह मेरे और सौम्या के बारे में क्या सोचेगा. उस का बसाबसाया घर बरबाद हो जाएगा. नहीं, यह नहीं होना चाहिए.’

‘‘क्या सोचने लगे?’’ कुछ देर बाद उधर से पूछा गया.

पहले दीप ने सोचा कि फोन काट दे, फिर यह सोच कर कि फोन काट देने से यह समस्या हल नहीं होगी, उस ने पूछा, ‘‘ठीक है, पैसे कहां पहुंचाने हैं?’’

‘‘परसों रात के 11 बजे रुपए तैयार रखना. मैं बता दूंगा कि रुपए कहां पहुंचाने हैं, लेकिन कोई होशियारी नहीं होनी चाहिए.’’

‘‘नहीं होगी, पर उस के नैगेटिव?’’ ‘‘परसों रात को ही मिल जाएंगे.’’

उधर से फोन काट दिया गया. पर दीप 2 दिन बेचैन रहा.

जब तयशुदा समय पर रात के ठीक 10 बजे ब्लैकमेलर का फोन आया और दीप को रुपए ले कर शहर के बिलकुल बाहर सुनसान जगह पर बने खंडहरों में आने के लिए कहा गया, तो दीप, जिस ने रुपए का इंतजाम पहले ही कर लिया था, कार से बताए गए पते की ओर चल पड़ा.

खंडहरों तक पहुंचने में दीप को आधा घंटा लग गया.

दीप ने कार से उतर कर पहले उस खतरनाक जगह का मुआयना किया. वह सूटकेस हाथ में लिए हुए था.

तभी आवाज आई, ‘‘जहां खड़े हो, सूटकेस वहीं रख दो और सामने खड़े बबूल के पेड़ के पास जाओ. तुम्हें वहीं फोटो के नैगेटिव मिल जाएंगे.’’

दीप ने सूटकेस वहीं रख दिया और बबूल के पेड़ की तरफ बढ़ गया. तभी कोई अंधेरे को चीरते हुए आया और सूटकेस उठा ले गया.

‘‘यहां तो कुछ नहीं है,’’ बबूल के पेड़ के पास कुछ न पा कर दीप बौखला गया और चीखा.

‘‘तुम सही कह रहे हो. नैगेटिव वहां नहीं हैं, जहां तुम ढूंढ़ रहे हो.’’ ‘‘फिर कहां हैं?’’ ‘‘दूसरी तरफ देखो.’’

दीप कुछ आगे बढ़ कर जब दूसरी तरफ पहुंचा, तो उसे एक सफेद लिफाफा पड़ा हुआ मिल गया, जिस में नैगेटिव थे.

वह नैगेटिव ले कर घर आ गया. उन्हें चैक किया और जला दिया. जब 2-3 महीने तक ब्लैकमेलर का फोन नहीं आया, तो वह निश्चिंत हो गया.

इसी बीच दीप की शादी तय हो गई. दीप शादी का कार्ड ले कर जब करन के घर पहुंचा, तो उन दोनों को बिस्तर पर बैठा पाया.

दीप ने दरवाजे पर दस्तक दे कर उन का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए जैसे ही हाथ उठाया, तो ठिठक गया. अंदर से आ रही आवाजों ने उसे वहीं रुकने पर मजबूर कर दिया.

‘‘देखा मेरे दिमाग का कमाल,’’ करन कह रहा था. ‘‘इस में मेरा भी तो योगदान है,’’ सौम्या हंसते हुए बोली.

‘‘हां जानेमन…’’ करन उस के गालों को चूम कर बोला, ‘‘तुम अगर अपना रोल ठीक से नहीं निभातीं, तो हम कभी अमीर नहीं बन पाते.’’

‘‘हां, लेकिन तुम ने यह अंदाजा कब लगा लिया था कि दीप हमारे जाल में फंस जाएगा?’’ सौम्या ने पूछा.

‘‘जब पहली बार वह तुम से मिलने आया था,’’ करन ने कहा.

‘‘वैसे, तुम्हारी चाल थी बेहद शानदार. कैसे तुम ने होटल में वेटर को पैसे दे कर कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलवा कर भिजवाई. दीप तो शराब को हाथ भी नहीं लगाता है. वह जरा सी शराब में ही बहकने लगा था.

‘‘बहकने की तो मैं ने भी शानदार ऐक्टिंग की. उसे क्या पता कि मु?ो तो शराब पीने का बहुत पहले से शौक रहा है,’’ सौम्या ने कहा.

‘‘फिर छिप कर मैं ने ही तुम दोनों की तसवीरें खींचीं और ब्लैकमेलर बन कर दीप से 20 लाख रुपए भी झटक लिए,’’ इतना कह कर करन जोर से हंसा और उस ने सौम्या को दोबारा चूम लिया.

विश्वासघाती करन की हंसी बाहर खड़े दीप के कानों में पिघले हुए गरम कांच की तरह उतर रही थी.  Crime Story in Hindi

– अनुराग कुमार जीनियस

Crime Story : सरप्राइज गिफ्ट -अवैद्य संबंधों के शक में बीवी की हत्या

Crime Story.19 जून, 2017 की शाम मनोज बेहद खुश था. लेकिन उस के दोस्त अनुज को उस की यह बेवजह की खुशी समझ में नहीं आ रही थी. जब रहा न गया तो अनुज ने पूछ ही लिया, ‘‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना क्यों हो रहा है, कुछ बताएगा भी या यूं ही बकवास करता रहेगा.’’

‘‘बताऊंगा, पर ऐसे नहीं. पहले मिल कर थोड़ा जश्न मनाते हैं. फिर अपनी खुशी का राज जाहिर करूंगा. ये ले पैसे और औफिसर्स चौइस की बोतल, तले हुए काजू, नमकीन और सिगरेट का पैकेट ले आ. सोच ले, आज मैं तुझे अपनी आजादी की पार्टी दे रहा हूं.’’ कह कर उस ने पर्स से 2 हजार रुपए का नोट निकाल कर अनुज को दे दिया.

अनुज की समझ में तो कुछ नहीं आया, लेकिन उस ने मनोज के हाथों से 2 हजार रुपए का नोट ले कर जेब में रखा और शराब के ठेके की ओर चला गया. कुछ देर बाद वह सारा सामान ले आया तो दोनों कमरे में पीने बैठ गए. मनोज ने 2 पैग बनाए और जाम से जाम टकराने के बाद दोनों शराब पीने लगे. जब मनोज पर नशे का सुरूर चढ़ा तो उस ने कहना शुरू किया, ‘‘अनुज, जानते हो मैं आज इतना खुश क्यों हूं.’’

‘‘जब तक तू बताएगा नहीं, तब तक मैं कैसे जानूंगा कि तेरे मन में किस बात को ले कर लड्डू फूट रहे हैं.’’ नशे की झोंक में अनुज उस की ओर देख कर बोला.

Crime Story

‘‘बेटे, आज मैं आजाद हो गया हूं.’’

‘‘पहेलियां न बुझा कर सीधी तरह बता, तेरी इस खुशी का राज क्या है?’’ अनुज ने चौथा पैग पीते हुए उत्सुकता से पूछा.

‘‘मैं ने तेरी भाभी को खुदागंज रवाना कर दिया है. मुझे उस से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है.’’

मनोज की बात सुन कर अनुज को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उस ने पूरी बात बताई तो उसे लगा कि हो न हो मनोज ने कोमल की हत्या कर दी है. अनुज का सारा नशा काफूर हो गया. थोड़ी देर तक वह मनोज की बात सुनता रहा, फिर पीना छोड़ कर उठ खड़ा हुआ और घर में किसी जरूरी काम का बहाना कर के वहां से चला गया.

बाहर आ कर वह कुछ दोस्तों से मिला और मनोज की बात उन्हें बताई. सब ने उसे यही सलाह दी कि इस बात की सूचना पुलिस को दे देनी चाहिए, क्योंकि बाद में वह भी पुलिसिया लफड़े में फंस सकता है. सोचविचार कर उस ने यह सूचना कंझावला थाने की पुलिस को दे दी.

पति द्वारा किसी औरत की हत्या की सूचना मिलते ही कंझावला थाने की पुलिस हरकत में आ गई. जेजे कालोनी सवदा पहुंच कर पुलिस ने मनोज गुजराती को हिरासत में ले लिया. थाने में जब मनोज से पूछताछ शुरू हुई, तब तक उस का नशा कम हो चुका था. पहले तो उस ने एसआई निखिल को बताया कि शराब के नशे में वह यह सब अपने दोस्त पर रौब जमाने के लिए  कह रहा था. लेकिन निखिल का एक करारा थप्पड़ उस के गले पर पड़ा तो उस के होश ठिकाने आ गए.

उस ने बताया कि वह अपनी पत्नी कोमल की हरकतों से बहुत परेशान था. इसलिए उस ने उसे बोंटा पार्क के जंगल में ले जा कर उस की हत्या कर दी है. बोंटा पार्क दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास है. कंझावला थाने से वह काफी दूर था. तब तक काफी रात हो चुकी थी, इसलिए अगली सुबह निखिल कांस्टेबल महेश और नरेश को साथ ले कर उत्तरी दिल्ली के मोरिसनगर थाने पहुंचे और वहां की थानाप्रभारी इंसपेक्टर आरती शर्मा को उन के इलाके के बोंटा पार्क में एक लड़की की हत्या किए जाने की सूचना दी.

17 जून, 2017 को कंझावला पुलिस द्वारा मिली इस सूचना को थाना मौरिसनगर के डीडी नंबर 14 ए में दर्ज करवा कर इंसपेक्टर आरती शर्मा ने अतिरिक्त थानाप्रभारी इंसपेक्टर  वीरेंद्र सिंह को इंसपेक्टर राकेश कुमार, एएसआई बिजेंद्र, हैडकांस्टेबल राजकुमार, सुखवीर, कांस्टेबल श्याम सैनी तथा महिला कांस्टेबल मधु को आरोपी मनोज और कंझावला पुलिस के साथ बोंटा पार्क भेजा.

पुलिस टीम पार्क के गेट नंबर 6 से अंदर दाखिल हुई. अंदर जा कर पुलिस कोमल की लाश की तलाश में जुट गई. मनोज ठीक से उस जगह के बारे में नहीं बता पा रहा था, जहां उस ने अपनी पत्नी कोमल की हत्या कर के उस की लाश छिपाई थी. पुलिस की तलाशी 12 घंटे तक जारी रही, लेकिन कोमल की लाश नहीं मिली. रात घिर आई थी, फिर भी तलाशी चलती रही.

रात के करीब 12 बजे मनोज पुलिस टीम को एक छोटी चट्टान के पास ले कर गया, जहां 22-23 साल की एक लड़की की लाश पड़ी थी. वह गुलाबी रंग का टौप और नीले रंग की जींस पहने थी. लाश की छानबीन करते समय इंसपेक्टर वीरेंद्र सिंह ने देखा कि उस के दाहिने हाथ पर कोमल गुदा हुआ था.

आरोपी मनोज ने लाश की ओर इशारा कर के बताया कि यह उस की पत्नी कोमल की लाश है, जिसे उस ने कल शाम को धोखे से यहां ला कर उस की हत्या कर दी थी. लाश की फोटोग्राफी कराने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए सब्जीमंडी मोर्चरी भेज दिया गया, साथ ही कोमल के घर वालों को फोन कर के उस की लाश की शिनाख्त के लिए सब्जी मंडी मोर्चरी बुला लिया गया.

17 जून को कोमल की बड़ी बहन गौरी सब्जी मंडी पहुंची,जहां लाश देखने के बाद उस ने उस की पहचान अपनी छोटी बहन और मनोज गुजराती की पत्नी कोमल के रूप में कर दी. कोमल की लाश की शिनाख्त होने के बाद गौरी की तहरीर पर उसी दिन कोमल की हत्या का मामला उस के पति मनोज गुजराती के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत दर्ज कर लिया गया. इस मामले की विवेचना इंसपेक्टर वीरेंद्र सिंह को सौंपी गई. गौरी के बयान तथा मनोज गुजराती के बयानों के बाद 2 साल की लव मैरिज का जो दर्दनाक वाकया सामने आया, वह इस प्रकार था—

कोमल के पिता चमनलाल का परिवार नांगलोई के चंचल पार्क में रहता था. उन के परिवार में पत्नी कमलेश के अलावा 4 बेटियां तथा 2 बेटे थे. इन में कोमल पांचवे नंबर की थी. घर के लोग उसे प्यार से कमली कह कर पुकारते थे. कोमल के बड़े भाई गंगाराम की शादी 8 साल पहले दिव्या से हुई थी. मनोज गुजराती दिव्या का चचेरा भाई था.

मनोज का परिवार कंझावला इलाके के सावदा गांव में रहता था. उस के परिवार में उस के अलावा इस के पिता राजू गुजराती, मां कमलेश तथा एक बहन परवीन थी. घर के बाहरी कमरे में मनोज की परचून की दुकान थी. दुकान अच्छीखासी चलती थी, जिस की वजह से मनोज की जेब हमेशा भरी होती थी. वह शौकीनमिजाज युवक था और हमेशा बनठन कर रहता था. चूंकि दोनों के परिवार आपस में रिश्तेदार थे, इसलिए समय समय पर उन का एकदूसरे के यहां आनाजाना लगा रहता था.

2 साल पहले एक दिन मनोज अपने दोस्तों के साथ मस्ती करने गुरुग्राम के सहारा मौल पहुंचा. वहां उस की नजर एक लड़की पर पड़ी, जो शक्लसूरत से जानीपहचानी लग रही थी. वह कोमल थी. मौडर्न कपड़ों, गहरे मेकअप और फ्लड लाइट की रंगबिरंगी रोशनी में कोमल बहुत ही सुंदर लग रही थी. दरअसल, कोमल वहां एक पब में नौकरी करती थी.

मनोज ने किसी बहाने से कोमल को अपने पास बुलाया तो दोनों ने एकदूसरे को पहचान लिया. बातोंबातों में मनोज ने उस का मोबाइल नंबर ले लिया और जल्द ही उस के घर चंचल पार्क आने का वादा किया. कोमल ने मनोज की खूब आवभगत की और उसे अपने साथ काम करने वाली कुछ सहेलियों से भी मिलवाया.

कोमल के लटकेझटके देख कर मनोज पहली ही नजर में उसे दिल दे बैठा. इधर कोमल भी मनोज के प्रति आकर्षित हो गई. उस दिन मनोज घर लौटा तो उस के दिलोदिमाग में कोमल की मनमोहिनी सूरत बसी हुई थी. वह जल्दी से जल्दी उसे अपनी बना लेना चाहता था.

उस दिन के बाद दोनों एकदूसरे को फोन कर के अपने दिल की बातें शेयर करने लगे. कोमल मनोज को हमेशा मौल में आने वाले हाईफाई लोगों के बारे में तरहतरह के किस्से सुनाती, जो मनोज को बहुत अच्छे लगते. वह कोमल को प्रभावित करने के लिए उसे महंगे तोहफे देने लगा. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों के घर वाले इस सब से कब तक अनजान रह सकते थे. उन्हें भी उन के प्यार की जानकारी हो गई.

मनोज और कोमल के घर वाले यों तो रिश्तेदार थे, लेकिन पता नहीं क्यों उन्हें यह रिश्ता मंजूर नहीं था. कोमल के पिता चमनलाल को लगता था कि मनोज उन की बेटी को ज्यादा दिनों तक खुश नहीं रख पाएगा. मनोज सावदा गांव में रहता था, जहां के लोगों का रहनसहन पुराने जमाने जैसा था.

उधर मनोज के घर वालों की सोच भी कुछ ऐसी ही थी. जब मनोज और कोमल ने अपनेअपने घरों में अपनी पसंद जाहिर की तो उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया. लेकिन प्यार इन बंदिशों को कहां मानता है. वैसे भी दोनों ही अपने पैरों पर खड़े थे. इसलिए 5 जून, 2015 को कोमल ने अपने मम्मीपापा की मर्जी के खिलाफ जा कर तीसहजारी कोर्ट में मनोज से शादी कर ली. शादी के बाद दोनों रघुबीर नगर में किराए का मकान ले कर रहने लगे.

8-10 महीने तो दोनों ने खूब मौजमस्ती की, लेकिन बाद में मनोज को कोमल का सहारा मौल में काम करना बुरा लगने लगा. उस ने कोमल से यह काम छोड़ देने के लिए कहा, पर वह इस के लिए तैयार नहीं थी. उसे मौल में जा कर परफौरमेंस देना और नएनए लोगों से मिल कर हंसनाबोलना अच्छा लगता था. बात आगे बढ़ी तो दोनों के बीच झगड़े शुरू हो गए. पड़ोसियों ने दोनों को समझाया तो कोमल मनोज के घर जेजे कालोनी, सावदा में रहने को तैयार हो गई.

इस के बाद कोमल अपने पति मनोज के साथ सावदा में जा कर रहने लगी. लेकिन घर छोटा होने के कारण उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. मनोज की एक बहन परवीन थी, जिस से उस की कतई नहीं बनती थी. यह देख कर मनोज ने दूसरी जगह किराए पर एक घर ले लिया और दोनों उसी में रहने लगे. कुछ दिनों तक दोनों सुखचैन से रहे. मनोज की जिंदगी में अचानक भूचाल तब आया, जब एक दिन वह कोमल के सूटकेस में रखी उसकी एलबम देख रहा था. एक फोटो में वह एक लड़के के साथ बहुत खुश दिख रही थी.

मनोज ने कोमल को वह फोटो दिखा कर उस लड़के के बारे में पूछा तो कोमल ने बताया कि यह अमित है और उस के साथ सहारा मौल में नौकरी करता था. अमित महज उस का दोस्त है. लेकिन मनोज को कोमल की बातों पर विश्वास नहीं हुआ. उस ने कोमल के जानकारों से अमित के बारे में पूछा तो पता चला कि शादी से पहले अमित कोमल का बौयफ्रैंड था. मनोज को यह जानकारी मिली तो वह परेशान हो गया. कोमल के बारे में यह जानकारी मिलने के बाद मनोज उस से उखड़ाउखड़ा रहने लगा.

कुछ ही दिनों बाद उन के बीच फिर से झगड़े शुरू हो गए. कोमल ने अपने घर में फोन कर के बताया कि मनोज उस से दहेज लाने के लिए दबाव डालता है और मना करने पर उस के साथ मारपिटाई करता है.

एक महीने बाद कोमल मनोज की मारपिटाई से दुखी हो कर अपनी बड़ी बहन किरण के पास रहने के लिए रघुवीरनगर चली गई. मनोज सावदा स्थित अपने घर में अकेला रह गया. एक दिन उसे पता चला कि कोमल फिर से अपने पुराने बौयफ्रैंड अमित से मिलने लगी है. यह जान कर मनोज को चिंता हुई कि कोमल कहीं उस से किनारा न कर ले. यही सोच कर उस ने कोमल के मोबाइल पर बात करने की कोशिश की. कुछ दिन तो कोमल मनोज के फोन को नजरअंदाज करती रही, लेकिन धीरेधीरे दोनों में बातचीत शुरू हो गई.

एक महीना पहले कोमल ने मनोज को बताया कि वह बहन पर बोझ नहीं बनना चाहती, इसलिए उस ने रघुवीरनगर के ही डी ब्लौक में अपने लिए अलग कमरा ले लिया है, जहां रह कर अब वह फिर से जौब पर जाएगी. घर में बैठेबैठे उस का मन नहीं लगता. दूसरे बिना पैसों के जिंदगी भी नहीं चलती. मनोज को उस की यह बात अच्छी नहीं लगी तो उस ने उस के नौकरी करने का विरोध करते हुए वापस घर लौट आने के लिए कहा. इस पर कोमल ने ऐतराज करते हुए मनोज से कहा कि वह उस के साथ गांव में नहीं रहेगी, क्योंकि वह उस के  साथ गालीगलौच करने के साथ मारपीट करता है. ऐसा जीवन वह नहीं जी सकती.

15 जून, 2017 को मनोज अपनी दुकान छोड़ कर कोमल से मिलने उस के घर पहुंचा. मनोज को आया देख कर उस ने उसे और उस के परिवार वालों को बहुत बुराभला कहा. कोमल की बातों से मनोज को लगा कि वह उस के साथ नहीं रहना चाहती. उसे बहुत गुस्सा आया. घर पहुंच कर वह सोचने लगा कि उस ने कोमल से कोर्टमैरिज की है और वह उस की पत्नी है. अगर वह उस के साथ नहीं रहेगी तो वह भी उसे उस की मनमर्जी से नहीं जीने देगा.

अगले दिन सुबह उस ने एक मोबाइल शौप पर जा कर नया सिम खरीदा और एक मैकेनिक के यहां से क्लच वायर ले आया. उसी सिम से उस ने कोमल से बड़े प्यार से बात की. बातोंबातों में उस ने कोमल को घूमने जाने के लिए राजी कर लिया. उस दिन काफी बारिश हुई थी, जिस से मौसम सुहाना हो गया था.

16 जून को मनोज ने कोमल को फिर फोन कर के मिलने के लिए सीमेंट गोदाम के पास बुलाया. कोमल ने कहा कि वह उस के पास पहुंच जाएगी. 2 बजे मनोज अपनी मोटरसाइकिल से सीमेंट गोदाम के पास पहुंचा तो थोड़ी देर बाद कोमल आ गई. उस ने कोमल को मोटरसाइकिल की पिछली सीट पर बिठाया और रिंगरोड होते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी के बोंटा पार्क जा पहुंचा.

पार्क के गेट पर मोटरसाइकिल खड़ी कर के वह कोमल के साथ अंदर चला गया. कोमल को विश्वास में लेने के लिए वह उस से रोमांटिक बातें कर रहा था. वहां झाडि़यों के पास कई युवा जोड़े प्रेमालाप में मग्न थे. यह देख कर कोमल भी रोमांटिक हो गई. कोमल से प्यारीप्यारी बातें करते हुए मनोज उसे एकांत में ले गया, जहां दोनों एक साफसुथरी चट्टान पर बैठ गए. मनोज ने उसे बांहों में ले कर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी और फिर से ऐसा न करने की कसम खाई तो कोमल खुश हो गई.

जब मनोज को लगा कि मौका एकदम सही है तो उस ने कोमल से कहा, ‘‘तुम अपना मुंह पीछे की तरफ कर लो, मैं तुम्हारे लिए एक सरप्राइज गिफ्ट लाया हूं.’’

कोमल ने खुश हो कर मुंह पीछे की ओर कर लिया. उचित मौका देख कर मनोज ने जेब में रखा क्लच वायर निकाला और कोमल की गर्दन पर लपेट कर कस दिया. कोमल ने मनोज को वायर ढीला करने के लिए कहा, साथ ही बचने के लिए बहुत हाथपैर मारे, जिस की वजह से मनोज के हाथों में खरोंचे भी आ गईं. लेकिन उस ने वायर को ढीला नहीं किया.

कुछ ही पलों में कोमल ने आखिरी हिचकी ली और उस की गर्दन एक ओर लुढ़क गई. कोमल की लाश को परे धकेल कर वह पार्क से बाहर आ गया और अपनी मोटरसाइकिल पर सवार हो कर घर लौट आया. इस के बाद उस ने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए अपने दोस्त अनुज के साथ शराब की पार्टी की, जहां कोमल की हत्या का राज उस पर जाहिर कर दिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने 17 जून, 2017 को मनोज को तीसहजारी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Crime Story

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— 2017 में प्रकाशित

Live-in Relationship का खौफनाक अंजाम

Live-in Relationship, लेखक – महेश कांत शिवा

27 जून, 2025 को हरियाणा के पानीपत में एक औरत की उस के लिवइन पार्टनर ने गला काट कर हत्या कर दी और फरार हो गया. दरअसल, उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के गांव केलई की रहने वाली उषा के पति की काफी दिनों पहले मौत हो गई थी. गांव में रोजगार न होने के चलते वह कामधंधे की तलाश में पानीपत चली आई.

उषा पानीपत की गंगाराम कालोनी में किराए के कमरे में रहने लगी. यहां पर उस की मुलाकात उत्तर प्रदेश के बदायूं के रहने वाले महेंद्र नामक एक नौजवान से हुई. पहले उन दोनों में दोस्ती हुई और फिर बाद में उन्होंने लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला कर लिया.

बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से उषा और महेंद्र में किसी बात को ले कर झगड़ा चल रहा था. 24 जून, 2025 को महेंद्र्र ने चाकू से उषा का गला काट कर उस की हत्या कर दी और फरार हो गया. हालांकि, पुलिस ने महेंद्र को 2 दिन बाद ही गिरफ्तार कर लिया.

महेंद्र ने पुलिस को बताया कि उषा उस से बातबात पर झगड़ा करने लगी थी. उसे शक था कि वह किसी दूसरे मर्द से फोन पर बात करने लगी थी. उस की इसी हरकत से तंग आ कर उस ने उषा की हत्या कर दी.

इसी तरह पश्चिम बंगाल की रहने वाली 24 साल की ब्यूटी खातून तकरीबन 6 महीने पहले अपने परिवार वालों को बिना बताए पानीपत आई थी. यहां वह पुराना औद्योगिक क्षेत्र के कुलदीप नगर में किराए पर रहने लगी और एक फैक्टरी में काम करने लगी.

इसी दौरान ब्यूटी खातून की जानपहचान सूरज पठान नाम के एक नौजवान से हुई. दोनों में पहले दोस्ती हुई और कुछ ही दिनों में दोस्ती प्यार में बदल गई. इस के बाद वे लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे.

हालांकि, ब्यूटी खातून ने अपनी बहन नेहा खातून को फोन कर के बता दिया था कि वह पानीपत में है और एक लड़के से प्यार करती है और वे दोनों एकसाथ रहते हैं. पर 19 जून, 2025 को सूरज पठान ने ब्यूटी खातून की हत्या कर दी.

गिरफ्तारी के बाद सूरज पठान ने बताया कि ब्यूटी खातून उस के अलावा किसी दूसरे लड़के से भी बात करती थी. उस ने अनेक बार ब्यूटी खातून को सम?ाया कि वह किसी दूसरे से बात न करे, लेकिन वह नहीं मानी.

इसी के चलते सूरज पठान ने 19 जून, 2025 को ईंट से ब्यूटी खातून के सिर पर वार किया, जिस से उस की मौत हो गई.

14 जून, 2025 को पानीपत से सटे करनाल शहर में 35 साल की पूजा नामक औरत की हत्या भी उस के लिवइन पार्टनर ने कर दी थी.

पूजा मूल रूप से कंबोपुरा गांव की रहने वाली थी और उस की शादी गांव बढ़ेडा में हुई थी. वह 3 बच्चों की मां थी. वह अपने पति को छोड़ कर करनाल की दीवान कालोनी में एक आदमी के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी थी.

उन दोनों में किसी बात को ले कर झगड़ा हुआ और पूजा के लिवइन पार्टनर ने उस की गला दबा कर हत्या कर दी और लाश को एक एंबुलैंस में घर के बाहर छोड़ कर फरार हो गया.

हरियाणा के पलवल के गांव नांगल ब्राह्मण का रहने वाला योगेश फरीदाबाद में प्राइवेट नौकरी करता था, जहां उस की जानपहचान उत्तर प्रदेश के अयोध्या की रहने वाली एक लड़की से हुई. दोनों में मुलाकात हुई और प्यार हो गया. इस के बाद योगेश ने साल 2017 में उस लड़की से लवमैरिज की थी.

शादी के बाद योगेश के 2 बच्चे हुए, जिन में 6 साल की बेटी और 10 महीने का बेटा था. इस के बाद उस की अपनी पत्नी से अनबन रहने लगी, तो योगेश की पत्नी उसे छोड़ कर बच्चों समेत अपने मायके चली गई और वहीं रहने लगी.

पत्नी के मायके जाने के बाद योगेश फरीदाबाद की नौकरी छोड़ कर हरियाणा के रेवाड़ी आ गया और यहां के धारूहेड़ा इलाके में एक अस्पताल में ओटी असिस्टैंट की नौकरी करने लगा.

नौकरी के दौरान योगेश की मुलाकात करनाल के वकीलपुरा सदर बाजार की रहने वाली प्रिया से हुई. दोनों में दोस्ती हुई और फिर प्यार हो गया, जिस के बाद उन दोनों ने लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया.

बाद में प्रिया भी अपने 3 बच्चों को ले कर आ गई और वे धारूहेड़ा के सैक्टर 6 में एक किराए के मकान में रहने लगे. प्रिया ने अपने तीनों बच्चों का दाखिला गुरुकुलम स्कूल में करा दिया.

बताया जाता है कि उन दोनों के बीच कुछ समय से किसी बात को ले कर अनबन चल रही थी. इसी बीच स्कूल की छुट्टी पड़ने के चलते प्रिया ने अपने तीनों बच्चों को अपनी बहन के पास भेज दिया. अब मकान में योगेश और प्रिया ही रह रहे थे.

जानकारी के मुताबिक, 2 से 6 जून, 2025 के बीच योगेश ने अपनी लिवइन पार्टनर प्रिया की गला घोंट कर हत्या कर दी और लाश को बैड में छिपाने के बाद खुद भी फांसी का फंदा लगा कर खुदकुशी कर ली.

इस बात का पता तब चला जब 6 जून, 2025 को लोगों को योगेश के मकान से बदबू आई, जिस के बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़ा तो योगेश फांसी पर लटका हुआ मिला.

रेवाड़ी पुलिस ने भी रूटीन वर्क की तरह योगेश की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आगे की जांच में जुट गई. उस वक्त योगेश के परिवार वालों सुसाइड करने की वजह पत्नी से अनबन होना बताई थी.

बेटे की मौत के बाद योगेश के पिता गिरीराज 19 जून को अपने बेटे का सामान लेने के लिए धारूहेड़ा पहुंचे. जब वे कमरे से बैड को उठाने लगे, तो वह काफी भारी लगा.

जैसे ही बैड खोला गया, तो उस में कपड़ों के बीच में एक औरत हाथ दिखाई दिया. वह योगेश की लिवइन पार्टनर प्रिया की लाश थी.

इसी तरह मूल रूप से उत्तराखंड के नानकमत्ता की रहने वाली 2 बच्चों की मां पूजा गुरुग्राम के थाना सैक्टर 5 में उत्तराखंड के ही सितारगंज गौरीखेड़ा के मूल बाशिंदे 25 साल के मुश्ताक अहमद के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहती थी.

पूजा एक स्पा सैंटर में काम करती थी, जबकि मुश्ताक टैक्सी चलाता था. कुछ दिनों पहले मुश्ताक पूजा को घुमाने के बहाने उत्तराखंड ले गया और वहां पर गरदन धड़ से अलग कर उस की हत्या कर दी.

हत्या के बाद मुश्ताक ने लाश के सिर को एक प्लास्टिक के थैले में डाल कर नाले में बहा दिया, जबकि धड़ को चादर में लपेट कर दूसरे नाले में फेंक दिया और छिपने के लिए कर्नाटक भाग गया.

उधर, जब काफी दिनों से पूजा नहीं मिली, तो उस की बहन ने उस की थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई. पूजा की बहन ने पुलिस को बताया था कि उस की बहन मुश्ताक के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहती थी.

गुरुग्राम सैक्टर 5 थाना पुलिस ने पहले तो गुरुग्राम में ही पूजा की तलाश की, लेकिन जब वह नहीं मिली, तो उत्तराखंड में स्थानीय पुलिस के सहयोग से मुश्ताक को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई.

मुश्ताक ने पुलिस को बताया कि उस की पूजा से मुलाकात रुद्र्रपुर बसस्टैंड पर हुई थी. वे दोनों बस से गुरुग्राम आ रहे थे. चूंकि दोनों एक ही राज्य के रहने वाले थे, तो दोनों में आसानी से दोस्ती हो गई. दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ऐक्सचेंज किया.

इसी बीच पूजा की बहन की तबीयत खराब हो गई, तो मुश्ताक उसे अपनी टैक्सी में ले कर उस की बहन के घर भी गया, जिस से दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई और उन्होंने लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया. तब से पूजा मुश्ताक को अपना पति मानने लगी थी.

इस बीच मुश्ताक अपने घर उत्तराखंड गया तो उस के परिवार वालों ने उस पर दबाव बना कर अपनी रिश्तेदारी की ही एक लड़की से शादी करा दी. जब पूजा को इस बात का पता चला तो वह मुश्ताक के घर पहुंच गई और मुश्ताक को अपना पति बताते हुए हंगामा किया. परिवार और रिश्तेदारों ने विवाद को आगे न बढ़ाते हुए पूजा और मुश्ताक को घर से बाहर निकाल दिया.

कुछ दिनों बाद मुश्ताक पूजा को धूमाने के बहाने उत्तराखंड ले गया और गरदन काट कर उस की हत्या कर दी.

बढ़ती जरूरतें और इच्छाएं

दरअसल, लिवइन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों की समय बढ़ने के साथसाथ जरूरतें और इच्छाएं भी बढ़ने लगती हैं. लिवइन रिलेशनशिप में आने से पहले दोनों के बीच भले ही यह सहमति बने कि वे दोनों एकदूसरे पर निर्भर नहीं रहेंगे, दोनों एकदूसरे पर पैसे से जुड़ा दबाव या सामाजिक बंधन का दबाव नहीं डालेंगे.

लेकिन जैसेजैसे समय गुजरता है और दोनों के बीच रिश्ता गहरा होता चला जाता है, वैसे ही उन की जरूरतें बढ़नी शुरू हो जाती हैं. दोनों में कहीं न कहीं वे भावनाएं भी पैदा होने लगती हैं, जो पतिपत्नी के रिश्ते के बीच होती हैं.

लिवइन रिलेशनशिप टूटने की दूसरी बड़ी वजहें

* दोनों के साथ रहने के चलते उन के खर्चे भी बढ़ते चले जाते हैं, फिर खर्चे उठाएगा कौन, यह सम?ा नहीं आता.

* लड़की या लड़के द्वारा शादी का दबाव बनाना.

* रसोईघर का खर्च और मकान का किराया कौन भरेगा, यह बड़ी समस्या.

* अगर दोनों के पहले से बच्चे हैं, तो उन की स्कूल फीस और दूसरे खर्च कौन उठाएगा.

* दोनों के घूमनेफिरने पर होने वाला खर्च किस की जेब से जाएगा.

* आपसी संबंध बनने के बाद महिला का पेट से हो जाना.

* परिवार द्वारा लड़के या लड़की की शादी दूसरी जगह तय कर दिया जाना. Live-in Relationship

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