Readers Problem: सच्ची सलाह -जीवन और रिश्तों के सवाल

Readers Problem –

सवाल :  मैं 21 साल की लड़की हूं. मेरा एक बौयफ्रैंड है और उस की उम्र 24 साल है. हम दोनों ने खूब हमबिस्तरी की है. पर अब मुझे लगता है कि वह लड़का मेरे लायक नहीं है. इस की वजह यह है कि वह शादी के नाम पर चुप हो जाता है और जब कभी बोलता भी है तो कहता है कि अभी वह शादी करने के मूड में नहीं है.

उस से दूर होने की वजह यह भी है कि मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली जाना चाहती हूं और वह इस में अड़ंगा लगा रहा है. उसे लगता है कि अगर मैं दिल्ली गई तो किसी और के चक्कर में उसे भूल जाऊंगी. इतना ही नहीं, वह धमकी दे रहा है कि अगर मैं दिल्ली गई तो वह सब को हमारे बारे में बता देगा. मुझे  अब उस से डर लगने लगा है. मैं क्या करूं?

जवाब : आप का आशिक अब अपनी पर उतारू हो आया है, इसलिए उसे उस की ही जबान में समझाएं कि आप कोई उस की गुलाम या रखैल नहीं हैं. कई बार हमबिस्तरी कर लेने का यह मतलब नहीं कि वह आप को बीवी समझाने लगे. उलटे वह तो आप की जवानी के मजे लूटने के बाद शादी ही नहीं करना चाहता. जाहिर है कि उस की नीयत में खोट है और वह सरासर आप को ब्लैकमेल कर रहा है.

इस से डरें नहीं, बल्कि राज खोलने की धमकी का डट कर मुकाबला करें और उसे धमकी दें कि आप इस की रिपोर्ट पुलिस में करने से हिचकिचाएंगी नहीं. मुमकिन यह भी है इस से वह और आक्रामक हो जाए, इसलिए संभल कर रहें और धीरेधीरे उस से दूरी बनाते दिल्ली जा कर पढ़ाई पर फोकस करें.


सवाल : मेरी उम्र 39 साल है. मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश में रहता हूं. मेरी शादी को 13 साल हो चुके हैं. मेरी पत्नी बहुत ही सरल स्वभाव की है और मां थोड़ी सख्तमिजाज. मेरी मां की सख्ती की वजह यह भी है कि मेरे कोई औलाद नहीं है और मेरी मां को लगता है कि उन की बहू बांझ है. पर डाक्टरी रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं है. बच्चा न होने की कोई ठोस वजह डाक्टर ने नहीं बताई है.

पर इस सब में हमारे घर में हमेशा तनाव का माहौल रहता है. मेरी पत्नी को अपनी सास की जलीकटी सुननी पड़ती है. हम दोनों पतिपत्नी ऐसा क्या करें कि यह क्लेश खत्म हो जाए?

जवाब : इस क्लेश की असल वजह आप की मां हैं, जिस से छुटकारा पाना आसान काम नहीं. कई बार शादी के सालोंसाल बाद भी बच्चा नहीं होता, जबकि पतिपत्नी दोनों में कोई खोट नहीं होता. यह एक चांस की बात है, इसलिए आप डाक्टर के मशवरे के मुताबिक चलें.

मां को तो बस समझाया ही जा सकता है, जो अपने दौर में जीते हुए सोच रही हैं कि इस साल शादी हुई और दूसरे साल ही घर में किलकारी गूंजी.

पत्नी को भी कहें कि वह जितना हो सके सब्र से काम ले. इस पर भी बात न बने तो मां को भाई या बहन के यहां कुछ दिन के लिए बीचबीच में छोड़ दिया करें.


सवाल :  मेरी उम्र 21 साल है और मैं राजस्थान के सीकर शहर में रहती हूं. कालेज में मेरी एक सहेली है जो बहुत से लड़कों से दोस्ती बनाए हुए है. दोस्ती क्या वह उन के साथ घूमतीफिरती भी है. एक दिन उस ने मुझ से कहा कि उस का दोस्त मेरे चक्कर मे है और मुझे  फिल्म दिखाना चाहता है.

मैं ने मना किया तो बोली कि तू तो दकियानूसी सोच की है. लड़के के साथ डेट पर जाने से डरती है, जबकि यही उम्र है मजे करने की. कई बार तो मुझे  भी खुद पर शक होता है कि क्या मैं वाकई इतनी गई गुजरी हूं कि लड़के के साथ डेट पर जाने के नाम से ही मेरे हाथपैर फूल जाते हैं, पर फिर लगता है कि मैं जैसी हूं वैसी ही ठीक हूं. मुझे कुछ समझा  नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं? मैं कैसे इन हालात को हैंडल करूं?

जवाब : आप जैसी हैं वैसी ही ठीक हैं, जबरदस्ती अपनेआप को बदलने की कोशिश न करें. लड़कों से दोस्ती करना या उन के साथ डेट पर जाना कोई गुनाह भी नहीं. जब मन किसी लड़के से दोस्ती करने का हो तो बेहिचक करें, लेकिन अगर आप संस्कारों और सख्त परवरिश के दबाव में ऐसा करने से अपनेआप को रोकती हैं तो यह भी खुद के साथ ज्यादती ही है, इसलिए सोचसमझ कर फैसला लें और लड़कों में भी दिलचस्पी लेना शुरू करें.

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Society : दूसरी जाति के दामाद को अपनाएं

Society. प्रेम और ज्योति दिल्ली में रहते हैं. उन की बेटी सलोनी मुंबई से एमबीए कर रही थी. वहां उस की निखिल से मुलाकात हुई, जो दोस्ती से प्यार में बदल गई, पर उन दोनों की जाति अलग थी.

इतना ही नहीं, सलोनी की जड़ें उत्तर प्रदेश से थीं, तो निखिल पश्चिम बंगाल से था. जाति के साथसाथ दोनों के परिवारों का रहनसहन, खानपान, रीतिरिवाज में भी बहुत ज्यादा फर्क था.

इस के बावजूद सलोनी ने अपने मांबाप से निखिल से शादी करने की बात कही तो उन्होंने निखिल से मिलने की बात कही. निखिल दिल्ली गया और सलोनी के मां बाप से मिला.

सलोनी हैरान रह गई कि इस शादी से उस के मांबाप को कोई दिक्कत नहीं थी. इस की सब से खास वजह यह थी कि उन्होंने निखिल से खुले मन से बात की थी. उस के भविष्य के प्लान के बारे में समझा  था और यह भी जाना था कि उस के मन में सलोनी को ले कर क्या चल रहा है.

पर हर कोई प्रेम और ज्योति की तरह इतनी खुली सोच का नहीं होता है, बल्कि यहां तो इस तरह की खबरें आती रहती है कि बेटी ने दूसरी जाति के लड़के से शादी की तो उस के परिवार वालों ने दामाद का खून कर दिया या उसे लड़की को फुसलाने के जुर्म में जेल करा दी.

मांबाप इतना खतरनाक कदम क्यों उठाते हैं? असल में जब कोई लड़की अपनी मरजी से दूसरी जाति के लड़के से शादी करती है तो मांबाप को यही लगता है कि उन्होंने अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के जो सपने देखे थे, वे चकनाचूर हो गए हैं. पर बेटी की खुशी के लिए बहुत से मांबाप को दिल बड़ा करना पड़ता है. यहां दामाद को ‘अपनाना’ मतलब जबरदस्ती होता है, क्योंकि उसे एक इनसान या परिवार के सदस्य के तौर इज्जत नहीं मिलती है.

ऐसे लोग अपनी बेटी के शादी के फैसले पर तो बहुत से सवाल उठा देते हैं, पर कुछ ऐसी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिन से उन्हें दूसरी जाति के दामाद को अपनाने में मदद मिल सकती है. जैसे, वे खुद से सवाल करें कि क्या उन की बेटी खुश है? अगर इस का जवाब ‘हां’ में है, तो सम?ा कि आप ने आधी लड़ाई जीत ली है.

लड़की के मांबाप खुद से दूसरा सवाल यह पूछें कि क्या उन का दामाद अच्छा इनसान है? कोई भी पढ़ीलिखी लड़की अपने लिए शराबी, मारपीट करने वाला, बेरोजगार लड़का तो कभी नहीं तलाश करेगी. वैसे भी इस तरह का अपनी जाति का लड़का भी बेकार है. इस के उलट सब की इज्जत करने वाला, कमाने वाला दूसरी जाति का लड़का भी हीरा है.

सच तो यह है कि जाति का टैग कुछ दिनों तक ही दामाद के गले मे टंगा दिखता है. अगर दामाद अच्छा है तो यकीन मानिए कि कुछ समय बाद किसी को याद नहीं रहेगा कि उस की जाति क्या है.

शुरुआत कैसे करें

पर इस सब की शुरुआत कैसे की जाए? अगर आप का दामाद दूसरी जाति का है, तो लड़की के मांबाप को कभी इस तरह नहीं कहना चाहिए कि ‘तेरा आदमी कहां है?’ इस के बजाय उस का नाम लो, ‘राहुल बेटा, पानी पियोगे?’ नाम से ही इज्जत है.

दामाद को खुले दिल से अपने घर में एंट्री दो. पहली बार घर आए तो दरवाजे पर मत रोको. चायपानी पूछो. आप का बंद दरवाजा, आप के बंद दिल की निशानी है.

दामाद के सामने कभी भी अपनी बेटी से यह सवाल मत पूछो, ‘तू खुश तो है न?’ अगर किसी बात का खटका है भी तो बेटी से अकेले में करो. सब के सामने पूछोगे तो दामाद को लगेगा कि उस की जाति की वजह से उस पर अभी भी शक करते हैं.

इन बातों का रखें खयाल

अगर दामाद लड़की की जाति का नहीं है तो कभी भी उसे यह ताना न मारें कि ‘हमारी जाति में तो…’ उस के समाज के भोजन, रीतिरिवाज की कभी भी तुलना मत करो. याद रखें कि वह कुछ बदलने नहीं आया है, बल्कि आप से जुड़ने आया है.

‘हम ने अपनी लड़की दे दी, वरना…’ इस तरह की बात अपने दामाद से बिलकुल करें. इस तरह इज्जत दोनों तरफ से होगी. साथ ही, उस की स्किल की तारीफ करो. जाति अपनेआप मिटती चली जाएगी.

Relationship Tips: कभी तलाक नहीं होगा, अगर हसबैंडवाइफ फौलो करेंगे यह रिलेशनशिप रूल

Relationship Tips: शादी एक खूबसूरत बंधन है, लेकिन इसे निभाना उतना ही मुश्किल भी है. पहले के जमाने में जब रिश्तों की समझ और एक दूसरे के प्रति प्यार हुआ करता था तब लोग जिंदगी भर साथ निभा लेते थे बिना किसी शिकायत के मगर आज के दौर में हालात बदल चुके हैं. तलाक जैसे शब्द आम हो गए हैं, मानो अब रिश्तों की अहमियत कम हो गई हो. इस बदलाव की एक बड़ी वजह सोशल मीडिया भी है. आजकल बहुत से लोग इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब वीडियोज में दिखाए गए ‘परफेक्ट कपल्स’ को देखकर अपनी शादीशुदा जिंदगी से कंपेयर करने लगते हैं. अगर किसी वीडियो में दिखाया गया कि एक पति रोज अपनी पत्नी के लिए खाना बनाता है या पत्नी रोज अपने पति के पैर दबाती है, तो असल जिंदगी के रिश्तों में भी वैसी ही उम्मीदें जागने लगती हैं.

दिक्कत तब होती है जब ये उम्मीदें हकीकत नहीं बन पाती. बहुत से वीडियो सिर्फ व्यूज और लाइक्स के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन लोग उन्हें सच मान बैठते हैं. जबकि हर रिश्ता अलग होता है और हर इंसान की सोच अलग होती है. आज के समय में हर कोई कमाता है फिर चाहे वे पति हो या पत्नी क्योंकि महंगाई भरे इस दौर में एक की कमाई से घर चलाना काफी मुश्किल हो चुका है. महंगाई की बात ना भी करें तो आजकल लड़कियां भी चाहती हैं कि वे किसी पर डिपेंडेंट ना रहें और खुद पैसे कमाएं.

इसी के चलते दोनों में बराबर की ईगो भी जन्म ले लेती है और ऐसे में जब घर की जिम्मेदारियों की बात आती है तो पति सोचता है कि यह तो सिर्फ पत्नी का ही काम है लेकिन ऐसी सोच रखना बिल्कुल गलत है. अगर पत्नी कमाने जा सकती है तो पति को भी घर के काम करने में शर्म नहीं आनी चाहिए. अगर आप पूरे दिन काम करके थक जाते हैं ठीक उसी तरह आपकी पत्नी भी थकती है. आप सारी जिम्मेदारियां पत्नी पर नहीं डाल सकते.

दूसरी ओर, यह समझना भी जरूरी है कि अगर एक कमा भी रही है और सेल्फ डिपेंडेंट है तो इसका यह मतलब नहीं कि वह अपने पति की इज्जत करना छोड़ दे या फिर घर की जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर ले. शादी एक ऐसा रिश्ता है जिसमें आपने एक-दूसरे का साथ देने का वादा किया है, तो फिर रिश्ते में ‘मैं’ और ‘तुम’ की जगह ‘हम’ होना चाहिए. अगर आपका पति घर के कामों में आपकी मदद करता है, तो यह उसकी समझदारी है. ऐसे में पत्नी का भी यह फर्ज़ बनता है कि वह ना सिर्फ पति के इमोशंस को समझे, बल्कि घर की बाकी जिम्मेदारियों में भी अपनी हिस्सेदारी निभाए.

रिश्ते में ईगो की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. सच्चा रिश्ता वही होता है जहां दोनों एक-दूसरे की बात सुनें, समझें और बिना किसी से तुलना किए एक दूसरे का साथ निभाएं. Relationship Tips

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