Love Story Hindi: जूही के मंडवे तले

Love Story Hindi. मन में दुख के घनघोर बादल उमड़घुमड़ कर मेरे सारे वजूद को अपनी लपेट में ले लेते हैं. नींद मेरी आंखों से कोसों दूर है. हर रात मेरे साथ ऐसा ही होता है.

उफ, यह रात क्यों मेरे घावों को कुरेदती है? दिन के उजाले में जब घाव कुछ भरने लगते हैं, तो काली रात उसे हरा कर देती है.

मैं क्या करूं? कैसे आसिफ से कहूं कि रात आते ही मेरे घाव हरे हो जाते हैं. और… और उन घावों में इतनी सड़न होती है कि मेरा दम घुटने लगता है. मुझे खुद ही नफरत होने लगती है. मन करता है कि खुद को अभी, इसी समय खत्म कर डालूं.

मेरे दिलोदिमाग में एक हलचल सी मच जाती?है, पर मैं चाह कर भी खुद को नहीं मिटा पाती. वैसे, मैं मरने से नहीं डरती… लेकिन क्या करूं मुझे जीना पड़ रहा है. अपने लिए नहीं, अपने मासूम फारान और अपनी नन्ही सी बेटी के लिए. और… और अरसलान के लिए.

मैं चाह कर भी अरसलान से कुछ नहीं कह पाती? ‘क्या मैं बेवफा हूं?’ यह सवाल मेरा दिल मुझ से करता.

‘नहीं, हरगिज नहीं. मैं बेवफा नहीं हूं. फिर मैं…’ अरसलान को सबकुछ क्यों नहीं बता देती?

काश, मैं अपने अंदर इतना हौसला पैदा कर पाती कि अरसलान के सीने में सिर छिपा कर उन से सबकुछ बता दूं, ताकि मेरे सीने पर रखा बोझ कुछ हलका हो जाए. मैं चैन की सांस ले सकूं.

अरसलान मुझे बहुत प्यार करते हैं. मैं उन की बीवी हूं. वे जरूर मुझे माफ कर देंगे. और फिर इस में मेरा कुसूर ही क्या?है? मैं ने जानबूझ कर तो कोई गुनाह किया नहीं. तो क्या अरसलान मुझे माफ कर देंगे? क्या सबकुछ जानने के बाद भी वे मुझे पहले सा प्यार देंगे? क्या वे फारान को…

हां, फारान मेरा मंझला बेटा है, पर सिर्फ मेरा ही, अरसलान का नहीं. नहीं, मैं अरसलान से कुछ भी नहीं कहूंगी. वे मर्द हैं… और मर्द… कभी यह बरदाश्त नहीं कर सकता कि उस की पत्नी के साथ…

मैं क्या करूं?

बीते समय के जंगल से गुजरने लगो, तो काफी घनी झाडि़यां मिलती हैं. फिर भी रास्ता बनता चला जाता है. एक के बाद एक सिलसिलेवार कडि़यां मिलती चली जाती हैं. रास्ते खुले नजर आने लगते हैं.

सचमुच बीता समय कितना खूबसूरत होता है. यही समय तो इनसान की सब से बड़ी कमजोरी और सचाई है. ऐसे समय की खुशनुमा बातें जिंदगी की सब से खूबसूरत चीज होती हैं, जबकि बुरा समय सीने में दफन रह कर भी हर पल चुटकियां लेता रहता?है.

मैं हर रात को अपना बीता समय दोहराती हूं, याद रखने के लिए या भूल जाने के लिए. मुझे हर पल अपने बीते समय की एकएक बात याद आती रहती?है. अगर न याद करूं, तो शायद जिंदा ही न रह सकूं. इन का एकएक पल मेरी सांसों की तरह मेरे अंदर महफूज है, जो हर वक्त मुझे तड़पाता है, रुलाता है, जलाता है और पलपल मुझे एहसास दिलाता है कि मैं एक बेदाग औरत नहीं हूं. मेरे अंदर कुछ टूट कर बिखर जाता है. एक हूक सी उठती?है.

काश, मेरी जिंदगी में वे मनहूस पल आए ही नहीं होते. मेरी इज्जत दागदार नहीं हुई होती. आज सबकुछ होते हुए भी मेरे पास कुछ नहीं है, क्योंकि मैं अपनी इज्जत लुटा चुकी हूं.

अगर औरत के पास इज्जत नहीं तो कुछ भी नहीं. मैं ने उस कमजोर समय में औरत के बेदागपन को दागदार कर दिया. मेरे दागदार समय को कोई नहीं जानता, सिवा मेरे और उस के, जो अब दुनिया में नहीं है, इसलिए मेरा बीता समय मेरे पास अमानत के रूप में दिलोदिमाग में दफन है.

आज मैं इस बोझ को अपने दिलोदिमाग से उतार फेंकना चाहती हूं. आसिफ, जो कभी मेरी जिंदगी था, के बगैर मेरा जीना मुश्किल था. मैं और आसिफ इतने आगे बढ़ चुके थे कि पलटना बहुत मुश्किल था.

हमारे बीच न दौलत की दीवार खड़ी थी, न जातबिरादरी की और न ऊंचनीच की. हम मुहब्बत से बहुत खुश थे. जिंदगी बहुत मजे में कट रही थी. हम ने मिल कर ढेर सारे सपने संजोए थे.

उन दिनों जिंदगी काफी खूबसूरत लगती थी. मैं और आसिफ उस रैस्टोरैंट के बरामदे में लगे जूही के मंडवे तले घंटों बातें किया करते थे, वादे करते, कसमें खाते, साथसाथ जीने और मरने की बातें करते.

एक दिन अब्बू ने मेरी शादी अरसलान से तय कर दी. उन दिनों आसिफ फौज की ट्रेनिंग पर गया हुआ था. मैं बुजदिल लड़की तब कुछ बोल नहीं सकी. मैं ने उसे मोबाइल पर फोन करने की कोशिश भी की, पर पता चला कि वह उस इलाके में है, जहां नैटवर्क भी नहीं चलता और सिर्फ सैटेलाइट फोन से सेना वाले काम करते हैं.

मैं विरोध कैसे करती. जब तक आसिफ साथ न हो, मैं कैसे अब्बूअम्मां के सामने झोली फैला सकती थी. छिपछिप कर रोती रही. अपनी बरबादी का दुख मनाती रही. बस, एक उम्मीद थी कि शायद आसिफ ही आ कर कुछ करे. मैं ने आसिफ के पास चिट्ठी भी लिख दी.

आसिफ का जवाब 2-3 महीने बाद आया, ‘मुहब्बत की आखिरी मंजिल शादी नहीं होती. मुहब्बत का मजा तो एकदूसरे को खोने में है, पाने में नहीं. हम ने एकदूसरे को चाहा जरूर है, मगर जरूरी नहीं कि जिस चीज को इनसान चाहे, वह उसे मिल ही जाए.

‘तुम सबकुछ भूल जाओ. समझ लेना कि हम ने गुडि़यागुड्डे का खेल खेला था. तुम जानती हो कि तुम्हारे पिता कितने जिद्दी हैं. वह अपनी इज्जत पर आंच नहीं आने देंगे, बल्कि बेटी को इज्जत के लिए कुरबान कर देंगे.

‘यही समय की जरूरत है. कुछ भी सोचना या चिंता करना बेकार है. समय बहुत गुजर चुका है. तुम्हारे पिता अरसलान के बाप को जबान दे चुके हैं. मुझे भूल जाओ, इसी में तुम्हारी भलाई है.’

मैं रोती रही. मेरे आंसू पोंछने वाला कोई नहीं था. एक दिन मेरे सपनों का जनाजा डोली के रूप में निकला. मैं ने भी हालात से समझौता कर लिया. यहां तक कि मैं एक बच्चे की मां बन गई. मैं अपने बेटे शायान के प्यार में धीरेधीरे अपने बीते समय को भूल बैठी.

अरसलान ने मुझे इतना प्यार दिया कि कभीकभी मुझे अपने ऊपर गुस्सा आता कि मैं कैसी बीवी हूं. इतना अच्छा पति प्यार करने वाला मिला?है. उस पर भी मैं उसे याद करती हूं, जिस ने ‘गुडि़यागुड्डे का खेल’ कह कर मेरी भावनाओं को करारी चोट पहुंचाई?है.

मैं सचमुच अपने घर, अपने शौहर और शायान में ऐसी खोई कि फिर पलट कर कभी उस रैस्टोरैंट को नहीं देखा, जहां जूही लगी थी.

वक्त अपनी रफ्तार से दौड़ता रहा. अरसलान दफ्तर के काम से दौरे पर जाने वाले थे. मैं भी बहुत दिनों से नैहर नहीं गई थी. अरसलान मुझे मेरे मायके छोड़ कर दौरे पर चले गए. मैं बहुत दिनों

बाद अपने अब्बू के घर आई थी. यहां मुझे आसिफ के साथ गुजारे गए समय की याद आने लगती, तो मैं परेशान हो उठती.

तभी आसिफ वापस भी आ गया. वह फौजी वरदी में बहुत शानदार लग रहा था. उसे देखते ही मेरे मन में कड़वाहट भर आई. मैं हर समय उस से दूर रहने की कोशिश करती. मगर, मैं उस से जितना दूर भागती, वह मेरे उतना ही करीब रहने की कोशिश करता. बारबार ह्वाट्सएप पर मैसेज भेजता, ‘एक बार तो मिल लो.’

एक दिन उसे मुझ से बातचीत करने का मौका मिल ही गया. मैं बाद में उसी जूही के मंडवे तले बैठी थी. शायान सो चुका था. अम्मी भी सोई हुई थीं. पिताजी मुकदमे की पेशी के सिलसिले में 2 दिनों के लिए बाहर गए हुए थे.

शाम के 7 बजने वाले थे. अंदर कमरे में उमस थी. मैं चुपके से रैस्टोरैंट में चली गई. वहां जूही के पेड़ के नीचे बैठ गई. उस पर बेशुमार सफेदसफेद फूल खिले हुए थे, जिन की खुशबू आसपास फैली हुई थी. अजीब सा माहौल था. कुछ पुरानी यादें, कुछ फूलों की भीनीभीनी खुशबू. इन सब ने मेरे अंदर एक हलचल सी मचा दी थी.

हवा ठहरठहर कर चल रही थी. जब हवा चलती, तो फूल जमीन पर बिखर जाते. जमीन जूही के फूलों से भरी पड़ी थी. मैं ने मुट्ठीभर फूलों की पंखुडि़यां उठा कर अपनी गोद में रख लीं, तभी अचानक आसिफ मेरे बिलकुल नजदीक आ कर खड़ा हो गया. उसे देखते ही मैं संभल कर बैठ गई.

‘‘मुझे मालूम था कि तुम यहीं होगी. नाराज हो क्या?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘तो फिर मुझ से कतराती क्यों हो? मेरे मैसेजों पर रिप्लाई क्यों नहीं करतीं?’’

‘‘आसिफ, अब मेरी शादी हो चुकी है. अब तुम से मेरा क्या वास्ता?’’

‘‘कहीं प्यार के पल भी भुलाए जा सकते हैं? उन्हें भुलाना इतना आसान नहीं होता.’’

‘‘नहीं आसिफ, मैं ने अपने बीते समय को बिलकुल भुला दिया है. मैं अपनी दुनिया में बहुत खुश हूं. मैं एक वफादार बीवी हूं. मेरे पति ने मुझे सबकुछ दिया है. मैं ने सच्चे दिल से अपने पति को स्वीकार कर लिया है. मैं ने सबकुछ पीछे छोड़ दिया है आसिफ.’’

‘‘राहेला, मैं तुम्हारा कुसूरवार हूं, पर मैं ने अपने दिल पर पत्थर रख कर तुम्हारे पिता की इज्जत के लिए कहा था, क्योंकि मैं उन्हें खूब जानता हूं. आखिर वे हैं मेरे चाचा ही न. उन से यह कहने की हिम्मत मुझ में नहीं थी कि मैं राहेला को अपनाना चाहता हूं.

‘‘मैं बुजदिल था राहेला. आज मुझे अपनी हार महसूस हो रही है. यह चुप्पी मेरा दम घोंटती है. मेरे अंदर कुछ टूट कर बिखर जाता है. अब मेरी हिम्मत जवाब दे गई है.

‘‘तुम ही बताओ, पानी नहीं मिल पाने के चलते सूख गईं जड़ों को उखड़ने में समय नहीं लगता है? मुझे माफ कर दो राहेला. मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूं.

‘‘राहेला, इतनी बेरुखी मैं बरदाश्त नहीं कर पाऊंगा. वैसे भी एक फौजी की जिंदगी का क्या भरोसा? अगली बार मोरचे पर से लौट पाऊंगा भी या शहीद हो जाऊंगा, कुछ मालूम नहीं. अगर तुम ने मुझे माफ नहीं किया, तो मैं बहुत शर्मिंदा होऊंगा.’’

आसिफ मेरे नजदीक बैठ कर जूही की टूटी पंखुडि़यों से खेल रहा था. उस के चेहरे पर अजीब सी उदासी छाई हुई थी. वह मेरे इतने करीब बैठा था कि मेरा दिल धकधक करने लगा.

‘‘राहेला, मुझे माफ नहीं करोगी?’’ उस की आवाज में दुनिया का दर्द समाया हुआ था.

उस ने मेरा हाथ थाम लिया. मैं अरसलान को भूल गई. बेटे शायान को भी भूल बैठी. आसिफ मेरे बालों में धीरेधीरे अपनी उंगलियां फेर रहा था. उस की गरम सांसें मुझे पिघलाए दे रही थीं. जूही के मंडवे तले हम दुनिया से बेखबर बैठे थे.

‘‘राहेला,’’ उस ने मुझे धीरे से पुकारा. उस की आवाज मुझे बहुत दूर से आती महसूस हुई.

‘‘हां,’’ मैं ने भी धीरे से कहा.

‘‘मैं अगर मर गया तो…?’’ उस ने बात अधूरी छोड़ दी.

मैं खामोश रही. हम दोनों पर शैतान हावी हो चुका था.

आसिफ ने मुझे अपनी बांहों के घेरे में कैद कर लिया. मैं छटपटाई, क्योंकि हम ने पहले कभी ऐसी हरकत नहीं की थी. हमारी मुहब्बत बेदाग थी.

रात हो गई थी. रैस्टोरैंट का मालिक भी जा चुका था. उस ने हमें देखा ही नहीं.

उसी जूही के मंडवे तले हम कहां से कहां निकल गए… हकीकत से दूर भावनाओं की दुनिया में हम बहते चले गए. जूही के फूलों की चादर हमारी बिछावन बनी थी. जब भावनाओं का बुखार उतरा, तो मैं घबरा गई. मुझे उन बिखरे फूलों की पंखुडि़यों की चादर औरत की इज्जत का कफन लगने लगी. मैं अपनी नजरों में गिर गई. मुझे खुद से नफरत हो गई. फिर मैं ने आसिफ का सामना नहीं किया. अरसलान के आने से पहले ही मैं पिता के साथ लखनऊ चली गई.

उस नाजुक समय में मुझ से अनजाने में जो गलती हुई थी, उसे मैं अपने दिल में तो छिपाए रही, पर मेरा मन घुटता रहता. हर समय मैं अपनी उस गलती की आग में जलती रहती.

अरसलान करीब 15 रोज बाद लौटे. कुछ दिनों के बाद मुझे अपने अंदर एक पौधे के पनपने का एहसास हुआ. मैं घबरा उठी. ओह, यह कैसी सजा मुझे मिली है. मैं 2 महीने तक अरसलान से यह बात छिपाए रही, फिर जब मेरा जी मिचलाने लगा, तो घर में मेरी बूढ़ी सास की आंखों में चमक आ गई. मुझे ले कर ननद डाक्टर के पास गई.

डाक्टर ने नए मेहमान के आने की सूचना दे दी. सभी खुश थे. मेरी सास को बच्चों से बेहद प्यार था. वे चाहती थीं कि उन के बहुत सारे पोते हों. वक्त आने पर मैं ने अपने दूसरे बेटे फारान को जन्म दिया.

फारान अरसलान की आंखों का तारा है. आसिफ एक आतंकवादी मुठभेड़ में शहीद हो चुका है. वह जातेजाते अपनी निशानी दे गया और साथ में मुझे शर्मिंदा भी कर गया.

मैं सोचती हूं कि अरसलान को अपना गुनाह बता कर कुछ बोझ हलका कर लूं… पर, क्या फिर अरसलान मुझे पहले जैसा प्यार देंगे? क्या वह मुझ से नफरत नहीं करने लगेंगे?

शायद करेंगे… मैं औरत हूं न, इसी लिए. मेरा गुनाह माफ नहीं किया जाएगा. समय कितना आगे निकल गया और मैं कितनी पीछे रह गई. अपनी गलतियों से मेरे बीते समय के साथ.

मैं हकीकत हूं या सपना? मैं सिर्फ औरत हूं, सिर्फ औरत. जिस की जिंदगी सिर्फ प्याज के समान है, जो कुतरतेकुतरते खत्म हो जाती है. जिन की आंखें गीली लकडि़यां सुलगाने के बहाने गीली होती रहती हैं.

मैं सोचती हूं, क्या बता दूं? नहीं, क्योंकि मैं एक औरत हूं.

हम जिंदगी के किसी भी मैदान में चाहे कितनी ही बड़ी जीत हासिल कर लें, फिर भी कभी कोई बदलाव नहीं ला सकते.

शायद मेरी जिंदगी में घुटन ही घुटन है, जो मेरी जिंदगी के साथ ही खत्म होगी. हर मोड़ पर, हर दोराहे पर औरतपन की दीवार हमारे आगे सीना तान कर खड़ी है. तो क्या मैं मौत को अपने गले लगा लूं? नहीं.

मैं ने एक नजर अपने तीनों बच्चों पर डाली, जो बेखबर सोए हुए हैं.

मेरी नजरें अरसलान पर जा टिकी हैं. वे सोते में भी मुसकरा रहे हैं. यह मेरा घर है. खुशियों, मुहब्बतों, उमंगों, चाहतों से भरपूर. इस नगरी में मासूम मुहब्बतें बिखरी पड़ी हैं. मुझे खुद ही सब सहना होगा, मुसकरा कर, हंस कर, खुशीखुशी. यह बात मेरा दिल खुशियों से भरे इस घर को देख कर कह रहा है.

लेखक : सबीहा

Political Kahani: हम रह गए जीरो पड़ोसी बन रहा हीरो

Political Kahani:: मार्च में एकदम से मौसम का मिजाज बदल गया था. अनामिका ने सोचा कि विजय से मिल लेती हूं, पर जब वह उस के घर गई, तो विजय का मूड उखड़ा हुआ था.
‘‘मुंह क्यों लटकाया हुआ है?
सब ठीक है ?’’
अनामिका ने विजयसे पूछा.
‘‘सब मस्त. देख बिन मौसम की बारिश ने ठंडक बढ़ा दी है,’’ विजय बेमन से बोला.
‘‘हम्म, पर तुम्हारे चेहरे पर बारह क्यों बजे हैं?’’ अनामिका ने कहा.
‘‘चल , रणवीर सिंह की नई फिल्म देखने चलते हैं. सिनेमाघर पर फिल्म देखे बहुत दिन हो गए हैं. कौर्नर की सीट लेंगे,’’ विजय यह कह तो रहा था, पर उस का ध्यान कहीं और ही था.
‘‘विजय, सच बताओ कि क्या बात है? तुम्हें तो अभी कोई अवार्ड भी मिला है. तुम ने उस का भी नहीं बताया. मैं ने सोशल मीडिया पर तेरा फोटो देखा था अवार्ड लेते हुए,’’ अनामिका बोली.
‘‘फिल्म देखते हुए हम समोसे खाएंगे. बारिश के मौसम में समोसे खाने का अलग ही मजा है,’’
विजय ने कहा.

‘‘पता है, रसोई गैस कितनी महंगी हो गई है. 15 रुपए का समोसा अब 20 रुपए में मिल रहा है. सिनेमाघर में तो कम से कम 50 रुपए का होगा. और तू मु? अपने अवार्ड की बात क्यों नहीं बता रहा है?’’ अनामिका ने विजय का हाथ पकड़ कर पूछा.
‘‘अरे यार, क्या बताऊंमैं तो बड़ी मुसीबत में फंस गया. चौबे चले छब्बे बनने, दुबे बन कर लौट वाली कहावत  फिट बैठती है,’’ विजय ने धीरे से कहा.
‘‘ पूरी बात बताओ,’’ अनामिका ने विजय के बालों में हाथ फेरते हुए कहा.
‘‘तुम तो जानती हो कि पड़ोस में जो जसवंत अंकल हैं, वे लोकल गुरुद्वारा के मैंबर हैं. इस बार उन्होंनेयुवा शक्ति अवार्डके लिए चुना था. मतलब उन की गुरुद्वारा कमेटी ने. पिछले
रविवार को वहां हुए एक कार्यक्रम में उन लोगों ने मेरा सम्मान किया था. मु? एक शील्ड, सर्टिफिकेट और शौल भी दिया था.’’
‘‘हां, मैं ने तुम्हारे सोशल मीडिया हैंडल पर उस कार्यक्रम से जुड़े फोटो और वीडियो देखें थे. पर यह तो खुशी की बात है. मुंह किस बात पर फूला हुआ है, यह बताओ?’’ अनामिका बोली.
‘‘इस अवार्ड के चक्कर में मैं अब घनचक्कर बन गया हूं. हुआ यों कि मंगलवार को हमारे पड़ोस में रहने वाले अग्रवाल अंकल और मिस्टर जोसेफ का जसवंत अंकल के साथ ?ागड़ा हो गया. शोर सुन कर मैं भी वहां चला गया,’’ विजय ने बताया.
‘‘फिर आगे क्या हुआ?’’ अब अनामिका थोड़ा परेशान हो गई थी.
‘‘सारा ?ागड़ा एक नाली के गंदे पानी को ले कर था. अग्रवाल अंकल और जोसेफ अंकल बोल रहे थे कि जसवंत अंकल की वजह से नाली का पानी भर कर सड़क पर गया है, पर वे बोले कि पीछे वाले करीम भाई की वजह से ऐसा है.

‘‘बस, फिर क्या था, जसवंत अंकल को अकेला देख कर वे दोनों उन से भिड़ गए और धकियाने लगे. जब मैं ने जसवंत अंकल की साइड ली, तो अग्रवाल अंकल बोले, ‘तु? तो अवार्ड दिलाया है , तू तो इस का पक्ष लेगा ही.’ ‘‘इस पर जसवंत अंकल बिफर गए. हट्टेकट्टे तो वे हैं ही, उन्होंने दोनों अंकल को अकेले ही पीट डाला. मैं ने बीचबचाव की कोशिश की, पर तब तक तो मामला बिगड़ चुका था. कुछ लोगों ने उन तीनों को छुड़ाया, पर इस सब में मैं बुरा बन गया. अग्रवाल अंकल और जोसेफ अंकल मु? से बहुत ज्यादा नाराज हैं.
‘‘जोसेफ अंकल ने तो इतना तक कह दिया, ‘जसवंत तो करीम भाई से जलता है, इसलिए उस का नाम लगा रहा है. तू ने भी गलत आदमी का साथ दिया.’
‘‘यार, अनामिका, मैं तो बेवजह फंस गया. अब तो मैं अग्रवाल अंकल और मिस्टर जोसेफ से नजरें भी नहीं मिला पा रहा. उन दोनों के घर के दरवाजे तो मेरे लिए जैसे बंद हो गए हैं,’’ विजय ने अपनी बात रखी.
‘‘ओह, तो यह मामला है. अब आया . पर तू जानता है कि किसी और के साथ भी ऐसा हुआ है…’’ अनामिका बोली.
‘‘किस के साथ?’’ विजय ने हैरानी से पूछा.
‘‘हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ. उन्हें इजराइल ने अपने देश का सर्वोच्च सम्मान दिया और उसी के बाद से इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया. इस सब से दुनियाभर में यह संदेश गया कि भारत इजराइल और अमेरिका के साथ है ओर ईरान हमारा दुश्मन देश है.

‘‘कोढ़ पर खाज तो यह रही कि हमविश्वगुरुकी तरह सुलह कराने के सपने देख रहे थे कि नरेंद्र मोदी अमेरिका और इजराइल से कह कर युद्ध रुकवा देंगे, पर उन की कहीं भी नहीं चलती दिख रही.
‘‘अब खबर आई है कि पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर ऐसा कुछ करिश्मा कर सकते हैं कि यह युद्ध रुक जाए,’’ इतना कह कर जैसे अनामिका ने विजय पर कोई बम फोड़ दिया.
‘‘मु? पूरी बात बता कि सारा माजरा क्या है?’’ विजय ने पूछा.
‘‘खबरों की मानें तो ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से उपजी चिंताओं के बीच पाकिस्तान मीडिएटर के रोल में नजर रहा है. वह अमेरिका के संदेश ईरान तक पहुंचा रहा है और तेहरान के जवाब वाशिंगटन को देने का काम कर रहा है.

‘‘इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से फोन पर बातचीत की. व्हाइट हाउस के मुताबिक, चर्चा का मेन मुद्दा ईरान युद्ध था. हालांकि, इस बातचीत को संवेदनशील बताते हुए बड़े अफसरों ने और ज्यादा बताने से इनकार कर दिया.
‘‘व्हाइट हाउस की प्रैस सचिव कैरोलिन लिविट ने पहले कहा था
कि यह संवेदनशील कूटनीतिक चर्चा है और अमेरिका मीडिया के जरीए कोई बातचीत नहीं करेगा.
‘‘सूत्रों के मुताबिक, आसिम मुनीर
ने डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की और पाकिस्तान ने खुद को अमेरिकी और ईरान के बड़े अफसरों के बीच बातचीत की संभावित जगह के रूप में पेश किया.
‘‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की. एक्स पोस्ट के जरीए उन्होंने ईद उल फितर और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और ईरान के लोगों के साथ अपनी हमदर्दी जताई.
‘‘शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों पक्षों ने खाड़ी क्षेत्र के गंभीर हालात पर चर्चा की और तनाव कम करने, डायलौग और कूटनीति की जरूरत पर सहमति जताई. उन्होंने इसलामी दुनिया में एकता और क्षेत्र में शांति बहाल करने में पाकिस्तान के रोल पर भी जोर दिया.
‘‘इस बीच सोमवार, 23 मार्च को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ बेहतर और ठोस बातचीत के बाद उन्होंने हमले को 5 दिनों तक टालने की घोषणा की थी. हालांकि, यह साफ नहीं है कि पाकिस्तान का मीडिएटर बनने का डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से सीधा संबंध है या नहीं.
‘‘ईरान ने सीधे अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ मित्र देशों के जरूरी संदेश मिले हैं. जानकारों के मुताबिक, यह कूटनीतिक कोशिश अभी शुरुआती चरण में है.’’

‘‘तुम्हें इस से क्या सम? आता है?’’ विजय ने पूछा.
‘‘यही कि ईरान और अमेरिका के बीच सुलह की कोशिशें तेज हो गई हैं. अमेरिकी समाचार आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के अफसरों की इसी कड़ी में पाकिस्तान में मुलाकात और बातचीत मुमकिन है. पाकिस्तान में अमेरिकी और ईरानी अफसरों के बीच यह बैठक हो सकती है.
‘‘इजराइल के न्यूज चैनल-12 ने इजराइली अफसर के हवाले से बताया कि पाकिस्तान में होने वाली संभावित बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हो सकते हैं.
‘‘अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने सोमवार, 23 मार्च को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी ईरान से खुली बातचीत करने पर चर्चा की. ‘‘इस से पहले एक रिपोर्ट में यह
भी कहा गया कि तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान के प्रतिनिधि व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकौफ से मुलाकात कर चुके हैं. साथ ही, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी अलग से मिले.
‘‘इस से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के संकेत दे चुके हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ पर ईरान के साथ पौजिटिव बातचीत की बात कही थी. साथ ही, ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों को 5 दिन के लिए टाल दिया था.
‘‘डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि चर्चाओं का यह दौर पूरे हफ्ते जारी रहेगा. दोनों देशों के बीच गहन चर्चाओं के पौजिटिव रवैए को देखते हुए, मैं ने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर सभी सैनिक हमलों को फिलहाल 5 दिनों के लिए टाल दिया जाए.’’
‘‘तो तुम यह मानती हो कि पाकिस्तान इस युद्ध को रुकवा सकता है, जबकि नरेंद्र मोदी नहीं?’’ विजय ने सवाल किया.

‘‘बात अगर इस खबर की करें, तो क्यों नहीं. सोचो कि इस सब में पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर का नाम लिया जा रहा है और अगर पाकिस्तान कामयाब रहता है, तो फिर हमारे पड़ोसी का कद बढ़ना तय है. ‘‘मेरे खयाल से असली कूटनीति यही होती है कि चुपचाप काम को करो, ढिंढ़ोरा मत पीटो. पर हमारे देश मे पिछले कुछ साल से काम कम हो रहे हैं और बातें ज्यादा बनाई जा रही हैं.
‘‘तेल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं है, पर जनता जो भुगत रही है वह भी सब के सामने है. गैस सिलैंडर की कालाबाजारी हो रही है. जो चाय कल तक 10 रुपए की एक कप थी, वह आज 15 रुपए हो गई हैऔर भी जाने किस तरह से महंगाई ने देश को कब्जे में ले लिया है.’’
‘‘कह तो तुम सही रही हो.

जैसा हाल मेरे पड़ोसियों ने क्या है, वैसा ही हाल देश चलाने वालों का हो गया है. गलत का साथ देने से पहले कई बार सोचना चाहिए. हर पड़ोसी से बना कर रखनी चाहिए, फिर चाहे वह कोई देश हो या पासपड़ोस,’’ विजय ने कहा. ‘‘अब ज्यादा मुंह मत लटकाओ और स्माइल करो. हमें हर बात से सीख लेनी चाहिए. फिलहाल जनता अगर चुप है, तो इस का मतलब यह नहीं है कि उस में अपना गुस्सा दिखाने की ताकत नहीं है. जैसे तुम ने इस मामले से सबक सीखा है, उसी तरह देश के नेताओं खासकर सत्ता पक्ष को भी सबक सीखना चाहिए वरना 2 बिल्लियों की लड़ाई में बंदर बाजी मार जाता है.
‘‘हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालत फिलहाल तो किसी खिसियानी बिल्ली जैसी है, जो अपनी फर्जी कामयाबी का खंभा नोंच रही है,’’ अनामिका ने दो टूक कहा.         

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