डेटिंग टिप्स: क्यों जरूरी है डेट

आज की व्यस्त जिंदगी में प्यार की राह में कदम बढ़ाने से पहले लड़का और लड़की एकदूसरे के बारे में काफी कुछ जान लेना चाहते हैं. इस के लिए वे डेट पर जाने का प्लान करते हैं. वैसे भी कुछ मुलाकातें किसी भी प्यार भरे रिश्ते को पूरा करने के लिए बहुत जरूरी होती हैं. ये मुलाकातें ही तय करती हैं कि आप का फ्यूचर कैसा होगा.

1. फिल्म लाइफ इन मैट्रोका हीरो

इरफान खान और हीरोइन कोंकणा सेन प्लान कर के पहली डेट पर मिलते हैं. लेकिन पहली बार मिलने पर इरफान की नजर कोंकणा पर कम उस के कपड़ों और फीगर पर ज्यादा होती है. ऐसे में कोंकणा का मूड खराब हो जाता है और वह सोचने लगती है कि कैसा है यह? इस का तो मेरे कपड़े और फीगर पर ही ध्यान है. अत: कोंकणा सेन को डेट पसंद नहीं आती है.

ऐसे में अगर आप अपनी डेट को यादगार बनाना चाहती हैं, तो जानिए कुछ खास बातें जो न सिर्फ आप के प्यार को परवान चढ़ाएंगी वरन चंद मुलाकातों में ही नजदीकियां भी बढ़ जाएंगी.

2. क्यों जरूरी है डेटिंग

मनोचिकित्सक प्रांजलि मल्होत्रा बताती हैं, ‘‘किसी अपोजिट सैक्स से मिलने की जो खुशी होती है वह किसी भी व्यक्ति को रोमांच से भर देती है. डेटिंग ही व्यक्ति को अपने रूटीन काम से हटा कर लाइफ में स्पार्क देती है और इसी से अच्छी फीलिंग्स आने लगती हैं. आप खुद पर न सिर्फ पूरी तरह से ध्यान देने लगती हैं वरन अपने कपड़ों, बिहेवियर पर भी ध्यान देने लगती हैं. दरअसल, हम सब में एक सैक्सुअल ऐनर्जी होती है, जो मनमस्तिष्क में रोमांच भर देती है. जब किसी से मिलने की खुशी होती है, तो वह ऐसी फीलिंग देती है कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. उसे लगता है कि वह किसी के लिए इतना इंर्पोटैंट है या समाज में डिजायरेबल है. तभी कोई उस से मिलना चाहता है. डेटिंग हमें सोशल ऐटिकेट्स भी सिखाती हैं.’’

3. डेटिंग करें जम कर

डेटिंग चाहे पार्टनर चुनने की हो या फ्रैंडशिप की, डेटिंग जम कर करें. डेट पर जाना अपनेआप में एक दिलचस्प अनुभव होता है. इस के जरीए एकदूसरे को समझनेपरखने का मौका मिलता है.

4. फर्स्ट डेट

डेट पर जाना किसी बड़े टास्क से कम नहीं होता है. यह किसी भी लड़के या लड़की के लिए महत्त्वपूर्ण पल होता है. फिर जब बात हो पहली डेट पर जाने की तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि आप अपनी फर्स्ट डेट को यादगार बनाएं. फर्स्ट डेट पर आप अपना इंप्रैशन ऐसा दें कि सामने वाला आप से दोबारा मिलने को बेताब हो उठे. इस के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

– समय और स्थान का चुनाव पहले ही कर लें और अपने तय समय से पहले पहुंच जाएं.

– पहली बार डेटिंग पर जा रही हैं, तो ज्यादा भड़कीले कपड़े पहनने के बजाय सिंपलसोबर बन कर जाएं. मेकअप भी कम से कम करें.

– पहली बार मिलने पर अपने पार्टनर के लिए गिफ्ट ले जाना न भूलें और गिफ्ट ऐसा हो जो उसे पसंद आए.

– पहली डेट पर ज्यादा ऐक्साइटमैंट न दिखाएं. अपने बिहेवियर को कंट्रोल में रखें. उस में बनावटीपन न लाएं.

5. डेटिंग को सफल बनाएं ऐसे

ड्रैस का चुनाव: आप ऐसे कपड़ों का चुनाव करें, जिन में न सिर्फ आप की पर्सनैलिटी में निखार आए, बल्कि आप कंफर्टेबल भी महसूस कर सकें.

6. डेटिंग के लिए स्थान व समय: फर्स्ट

डेट के लिए किसी सार्वजनिक स्थान का चयन करें ताकि आप सहज और सुरक्षित महसूस करें. फर्स्ट डेट पर ज्यादा समय न बिताएं. संभव हो तो मील लंच पर ही मिलें. इस से आप का पार्टनर आप के टाइम की वैल्यू भी समझेगा. फर्स्ट डेट पर जो बिल आए उसे शेयर जरूर करें.

7. क्या न करें

– डेटिंग को सिर्फ टाइमपास या मौजमस्ती न समझें, बल्कि सामने वाले को जाननेसमझने का मौका दें.

– डेटिंग के दौरान फ्लर्टिंग न करें.

– डेटिंग के दौरान धूम्रपान व नशीले पदार्थों का सेवन न करें.

– फर्स्ट डेट में ही ज्यादा करीब जाने की कोशिश न करें.

– अगर पार्टनर की कोई बात पसंद नहीं आ रही है तो चुप रहें. किसी बात पर बहस न करें.

– फर्स्ट डेट में फिजिकल होने की कोशिश न करें.

– फर्स्ट डेट में खुद ही न बोलती जाएं, बल्कि उस की भी सुनें.

– डेटिंग को इंटरव्यू न बनाएं और हंसीमजाक भी सोचसमझ कर करें.

7. जब पार्टनर हो नापसंद

किसी से मिलने से पहले आप उस के बारे में पौजिटिव ही सोचते हैं. लेकिन मिलने के बाद असलियत पता चलती है कि उस का लुक बिहेवियर कैसा है. दूर से सभी अच्छे लगते हैं. यदि पार्टनर पसंद न आए तो इन बातों पर गौर फरमाएं:

– फर्स्ट डेट को इक्वल टु शादी न समझें. पसंद न आने पर सिर्फ फ्रैंडशिप भी रख सकती हैं.

– पसंद न आने पर उस के साथ ज्यादा टाइम स्पैंड न करें.

– फर्स्ट डेट पर पसंद न आने पर भी अपनी नापसंद उस पर जाहिर न होने दें.

– जब भी किसी से फर्स्ट डेट पर मिलें पहले से ही उस के बारे में जानकारी ले लें कि वह कैसा है, तब प्रौब्लम नहीं होगी.

8. डेटिंग को बनाएं रोमांचक

आप अपनी फर्स्ट डेटिंग को इस तरह रोमांचक बना सकती हैं:

लौंग ड्राइव: युवाओं में लौंग ड्राइव का बहुत क्रेज होता है. आप अपने पार्टनर को ऐसी जगह ले जाएं जहां आप दोनों लौंग ड्राइव का भरपूर मजा ले सकें.

मूवी या पार्क: डेटिंग के दौरान मूवी देखने जा सकते हैं. यदि मूवी देखना पसंद न हो तो पार्क में बैठ सकते हैं.

इन्ट्रैस्टिंग उपाय: डेटिंग को रोमांचक बनाने के लिए आप बोटिंग, फिशिंग या और भी इन्ट्रैस्टिंग साधन ढूंढ़ सकते हैं.

विंडो शौपिंग: मस्ती और फन के साथ विंडो शौपिंग या फिर हौट शौपिंग भी कर सकते हैं. इस से आप एकदूसरे की पसंदनापसंद को भी जान पाएंगे.

गैटटुगैदर: किसी को जाननेसमझने का सब से अच्छा औप्शन है गैटटुगैदर. आप अपने पार्टनर को अधिक कंफर्टेबल महसूस करवाने के लिए घर पर भी कुछ और फ्रैंड्स के साथ गैटटुगैदर कर सकते हैं. आप चाहें तो घर पर ही कैंडल लाइट डिनर भी कर सकते हैं.

वर्जिनिटी खोने से पहले बरतें ये सावधानी

lifestyel News in Hindi: वर्जिन सैक्स को सैक्स संबंधों की वह सीढ़ी माना जाता है जहां पहली बार मर्द औरत आपस में सैक्स संबंध बनाते हैं. लोगों का यह मानना है कि मर्द जब अपने अंग को पहली बार किसी औरत के अंग में प्रवेश कराता है तो यह वर्जिन सैक्स होता है यानी यहीं से औरत की वर्जिनिटी खत्म हो जाती है.

माना जाता है कि इस के पहले उस मर्दऔरत का किसी दूसरे से सैक्स संबंध नहीं बना है. अगर वर्जिन सैक्स के बारे में पहले से सही जानकारी न हो तो वह कई तरह से नुकसान भी पहुंचा सकता है.

अगर संबंध बनाते समय समझदारी न दिखाई जाए तो पहली बार का यह सैक्स दर्द देने वाला भी हो सकता है. इस की वजह औरत के अंग का सूखापन व झिल्ली का फटना भी हो सकती है. वहीं मर्द के मामले में उस के अंग के ऊपरी सिरे की चमड़ी पहली बार किए जाने वाले सैक्स के दौरान धीरेधीरे नीचे खिसकती है. ऐसे में मर्द के लिए भी यह दर्दभरा साबित हो सकता है.

वर्जिन सैक्स को ले कर कई तरह की गलतफहमियां व नासमझी दुखदायी सैक्स की वजह बन जाती हैं. वर्जिन सैक्स में औरत के अंग के ऊपरी हिस्से में पतली झिल्ली जिसे हाइमन झिल्ली कहा जाता है, फटती है. इस झिल्ली के फटने से खून भी बह सकता है. कभीकभी यह झिल्ली खेलकूद, भागदौड़ वगैरह से पहले ही फट चुकी होती है जिस की वजह से सैक्स के दौरान खून तो नहीं आएगा लेकिन उचित सावधानी न बरतने की वजह से यह दर्दभरा जरूर होता है.

ऐसे में वर्जिन सैक्स को ज्यादा मजेदार और यादगार बनाने के लिए कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत पड़ सकती है जिस से वर्जिनिटी खोने से पैदा होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है.

लोगों का यह मानना है कि वर्जिनिटी खोने के दौरान एचआईवी एड्स, यौन संक्रमण जैसी खतरनाक बीमारियां नहीं होती हैं.

वर्जिन सैक्स के मामले में यह माना जाता है कि किसी मर्द ने अगर किसी औरत के अंग में अपना अंग प्रवेश किया है या किसी औरत ने किसी मर्द का अंग अपने अंग में प्रवेश कराया है तो उस ने वर्जिनिटी खो दी है और ऐसे मामले में सुरक्षित सैक्स के तरीकों को अपनाना जरूरी हो जाता है लेकिन इस में अकसर लापरवाही बरती जाती है जो औरत व मर्द के लिए खतरनाक हो सकती है.

वर्जिनिटी खोने के दौरान सैक्स के सही तरीकों की जानकारी की कमी अकसर देखी गई है, जिस से औरत के अंग में दर्द की शिकायत पाई जाती है. वर्जिनिटी खोने की हड़बड़ी में घबराहट भी बड़ी रुकावट मानी जाती है. कभीकभी अंगों का कसा होना भी सैक्स में बाधा पैदा करता है.

इन सभी हालात से निबटने के लिए पहले से ही तैयार होना चाहिए. इस के लिए किसी माहिर डाक्टर से सलाह भी ली जा सकती है.

बरतें सावधानी

वर्जिनिटी सैक्स को ले कर डाक्टर मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि पहली बार के सैक्स में भी उतनी ही सावधानी जरूरी है जितनी कई बार सैक्स कर चुके लोगों  द्वारा अपनाई जाती है, क्योंकि यह जरूरी नहीं है कि जिस पार्टनर के साथ सैक्स करने जा रहे हैं उस की वर्जिनिटी सुरक्षित ही हो.

किसी औरत के अंग में मर्द के अंग के प्रवेश को ही वर्जिनिटी का खोना माना जाता है जबकि अगर अंग में अंग के प्रवेश के अलावा मुख मैथुन, गुदा मैथुन की क्रिया की गई है तो एचआईवी एड्स व अंग संक्रमण का डर बढ़ जाता है.

इस के अलावा अगर आप का साथी वर्जिन है और वह संक्रमित सूई का इस्तेमाल करता है तब भी एचआईवी होने के खतरे कई गुना बढ़ जाते हैं.

अगर इन बीमारियों से बचना है तो कोशिश करनी चाहिए कि पहली बार सैक्स संबंध बनाने से पहले आपसी सहमति से डाक्टरी जांच जरूर कराई जाए. हो सकता है कि डाक्टरी जांच के मसले पर आप का साथी यह सवाल खड़ा करे कि आप उस के चरित्र पर उंगली उठा रहे हैं. लेकिन सब्र रखते हुए उसे यह समझाने की कोशिश करें कि जरूरी नहीं कि यौन रोग या एड्स सैक्स संबंध बनाने के चलते ही हों, वे कई दूसरी और वजह से भी होते हैं.

कंडोम बचाव का बेहतर उपाय

जब तक यह तय न हो जाए कि जिस के साथ आप पहली बार सैक्स संबंध बनाने जा रहे हैं, भले ही वह अपने वर्जिन होने के तमाम सुबूत दे लेकिन कोशिश करें कि सुरक्षा के लिए कंडोम का इस्तेमाल किया जाए.

इस से न केवल सैक्स से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि अनचाहे पेट से भी दूरी बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

दर्द से मिल सकता है छुटकारा

अगर आप वर्जिनिटी खोने के दौरान होने वाले दर्द से छुटकारा पाना चाहते हैं तो कभी सैक्स की शुरुआत करने से पहले जल्दबाजी न दिखाएं बल्कि रोमांटिक बातों से शुरुआत करते हुए धीरेधीरे नाजुक अंगों के साथ छेड़छाड़ करें, जिस से औरत जल्दी ही सैक्स के लिए तैयार हो जाती है और उस के अंग के भीतर गीलापन बढ़ने से चिकनाहट बढ़ती है. इस हालत में मर्द के अंग में प्रवेश से औरत को दर्द से नजात मिल सकती है.

लोगों का मानना है कि पहली बार का सैक्स हमेशा ही दर्द देने वाला होता है जबकि यह एक भरम के हालात पैदा करता है. अगर मर्द को लगे कि उस के अंग में पहली बार के सैक्स में दर्द हो सकता है तो वह कंडोम का इस्तेमाल कर सकता है.

अगर आप भी अपनी वर्जिनिटी खोने जा रही हैं या जा रहे हैं तो कोशिश करें कि इस दौरान होने वाली परेशानियों से बचने के लिए बताए गए उपायों को अपनाएं. साथ ही, अपने जीवनसाथी को भी इन्हें अपनाने के लिए कहें. ये उपाय आप की वर्जिनिटी खोने के मजे को कई गुना ज्यादा बढ़ा देंगे.

50+पुरुष डेटिंग के वक्त फिर से घर बसाने की नहीं सोचता!

55 वर्षीय राजेश की पत्नी का देहांत करीब 5 साल पहले हो गया था. राजेश के दो बच्चे हैं, दोनो की शादी हो चुकी है. दोनों वेल सेटेल्ड हैं. राजेश सरकारी कर्मचारी है. दिखने में अभी भी शरीर लम्बा-चैड़ा और सुडौल है. चूंकि राजेश बच्चों से अलग रहता है इसलिए अपनी शारीरिक जरूरतों के लिए किसी महिला दोस्त की तलाश में भी रहता है और इर्दगिर्द तांकझांक भी करता है. लेकिन इस उम्र में वह शादी नहीं करना चाहता. उसे महिला दोस्त तो चाहिए, मगर जीवनसंगिनी नहीं.

कहने की बात यह है कि 50 साल पार करने के बाद महिला व पुरुष की सोच में जमीन-आसमान का अंतर आ जाता है. महिला 50 साल बाद भी यदि अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरुआत करती हैं तो वह कोशिश करती है कि किसी के साथ सेटेल हो. जबकि 50+का पुरुष मौज मस्ती और जिंदगी जीने पर यकीन रखता है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि 25 वर्षीय युवा और 50 वर्षीय अधेड़ पुरुषों की सोच में अच्छा खासा पफर्क होता है. 50 साल का व्यक्ति ज्यादा समझदार, व्यवहारिक और लॉजिकल तरीके से सोचते वाला होता है. इसलिए दोनो का डेटिंग फंडा भी एक दूसरे से भिन्न होता है.

लेकिन जहां तक बात महिलाओं की है तो वह पुरुषों से बिल्कुल उलट होती हैं. महिलाएं हमेशा खुद को सामाजिक रीति रिवाजों से अलग नहीं कर पातीं. अब आप 53 वर्षीय सीमा को ही लें. सीमा बचपन से ही बहुत महत्वाकांक्षी रही हैं. नतीजतन बहुत कम उम्र में उसने सरहानीय सपफलता हासिल कर ली. लेकिन इसका घातक परिणाम उसकी निजी जिंदगी में देखने को मिला. उसकी उम्र के लड़के या तो अभी सफलता की सीढ़िया चढ़ रहे थे या फिर  प्रारंभ कर रहे थे. नतीजतन उसे कोई लड़का नहीं भाया. इसके बावजूद उसके माता-पिता ने उसकी शादी एक अधेड़  उम्र के पुरुष से कर दी जिसके साथ घूमना-फिरना, रोमांस करना उसे कतई पसंद नहीं आया.

आखिरकार उसने उससे तलाक ले लिया. जिंदगी में इतने उतार चढ़ाव के बाद 50 साल के पड़ाव से गुजरते हुए सीमा को किसी साथी की कमी बहुत खलती है. यही कारण है कि 50 साल का होने के बाद भी वह अपने लिए किसी ऐसे पार्टनर की तलाश कर रही है जो उसकी जिंदगी मंे ठहराव ला सके. सीमा अकेली ऐसी महिला नहीं है जिसे ठहराव के लिए किसी साथी की कमी न खलती हो. असल में हर महिला ऐसा ही चाहती है. पुरुष जहां इस उम्र में जिंदगी की तमाम जद्दोजहद, परेशानियों  असफल वैवाहिक आदि से तनावग्रस्त होकर फिर से शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहते, वे नए सिरे से परिवार बनाना, बच्चों की परवरिश करना, पत्नी के नाज नखरे सिर पर उठाने जैसी चीजों से ऊब हो चुके होते हैं.

वहीं महिलाएं इस उम्र में भी शुरु से शुरु करना चाहती हैं. शायद इसलिए क्योंकि महिला स्वभाव से ही केयर करने वाली होती है. वह चाहे मां की भूमिका में हो, बहन की भूमिका में हो, पत्नी की भूमिका में हो या गर्लप्रफेंड की भूमिका में. वह हर रूप में पुरुष की बच्चे की तरह देखरेख करना चाहती है. 50 वर्षीय पुरुषों को इन सब बातों से कोफ़्त  होने लगती है. मनोविदों का मानना है कि महिलाओं की ऐसी छवि के पीछे प्रमुख वजह यह है कि महिलाएं हमेशा से ही पुरुषों पर आश्रित रहती हैं. उन्हें हर कदम पर ऐसे व्यक्ति की जरुरत होती. जो उनकी दूसरों से रक्षा कर सके. जबकि पुरुषों को किसी के अंडर रहने की आवश्यकता नहीं होती.

62 वर्षीय अजय मागो के मुताबिक, ‘आज से 15 साल पहले मेरी पत्नी मुझे बिना तलाक दिये छोड़कर चली गई थी. खैर, वह मेरा गुजरा हुआ कल है. इसलिए उसे याद करके कोई फायदा नहीं है. अगर चाहता तो शायद तब शादी कर सकता था. मगर जैसे जैसे उम्र निकलती गई, मेरा इस बारे में विश्वास दृढ़ होता गया कि आप 50-55 साल के बाद नए सिरे से घर नहीं बना सकते. इसके पीछे कई वजहें हैं. पहली तो समाज इसकी इजाजत नहीं देता.

अगर मैं ऐसा करता तो निश्चित रूप से मेरे बच्चों को कापफी बुरा लगता. उनके दोस्त उन्हें ताना देते हुए अजीबोगरीब कमेंट करते. सो, मैं अपनी खुशी के लिए उन्हें दांव पर नहीं लगा सकता. इसके अलावा नए सिरे से घर की शुरुआत यानी एक और पत्नी, उसके बच्चे और उसके बच्चे की जिम्मेदारी. कुल मिलाकर बात यह हुई कि 80 साल की उम्र तक मैं बच्चों की परवरिश से जूझता रहूं. मेरे हिसाब से यह मुमकिन नहीं है. अतः मैं 50 साल के बाद नये सिरे से घर की शुरुआत करने के पक्ष में नहीं हैं.’

लब्बोलुआब यह कि महिला चाहे उम्र के किसी भी पड़ाव में क्यों न हो उसे हर वक्त सहारे की जरुरत होती है. जबकि पुरुषों की सोच 50 साल बाद बिल्कुल उलट जाती है. विशेषकर उन पुरुषों की जिनके साथ जिंदगी की असपफल दास्तानें जुड़ी हुई हैं. सो, महिलाएं ध्यान रखें अगर आप किसी 50$ पुरुष के साथ डेटिंग कर रही हैं तो उससे शादी करने का इरादा न बना लें. क्योंकि वह आपको अपनी संगिनी बनाना नहीं चाहता. वह तो सिपर्फ अपने आपको इंटरटेन कर रहा है. इसके उलट पुरुष भी इस बात का खास ख्याल रखें कि यदि 50+महिला आपके साथ डेटिंग कर रही है तो वह उस उम्र में भी आपको अपना जीवनसाथी बनाने की चाहत रखती है. 50 साल से ज्यादा उम्र का पुरुष परिपक्व होता है, माहौल से परिचित होता है, उसके लिए कोई चीज नई नहीं होती. इसलिए उनकी सोच अलग होती है, चाहत अलग होती है.

अट्रैक्शन बढ़ाने के लिए करें ये 8 Exercises

जवान होती युवतियों के लिए उन के शरीर की बनावट व कसावट बड़े मायने रखती है, जिस की बदौलत कोई भी युवती किसी युवक को अपनी तरफ न केवल आकर्षित कर सकती है, बल्कि उस के कैरियर को भी प्रभावित करती है. ऐसे में युवतियों के शरीर की कसावट ही उन की सुंदरता का निर्धारण करती है. किसी भी युवती की सुंदरता उस के नितंब के आकार व कसावट, त्वचा, कमर व स्तनों के चुस्तदुरुस्त होने से ही आंकी जा सकती है. शरीर के इन अंगों में ढीलापन किसी भी युवती के लिए दूसरे को अपनी ओर सैक्सुअली अट्रैक्ट करने में बाधक बनता है.

ज्यादातर युवतियां आकर्षक दिखने के लिए भारीभरकम पैसा खर्च कर फिटनैस विशेषज्ञों का सहारा लेती हैं. कई जगह जौब पर ऐसी ही युवतियों को रखा जाता है, जिन की फिगर देखने में जीरो साइज यानी उन के शरीर की बनावट ऐसी हो जो आसानी से किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता रखती हो. इस के लिए युवती के स्तनों में कसाव, नितंबों का भरा होना, चेहरे पर निखार, चरबी मुक्त पतली कमर होना बहुत जरूरी है. फिटनैस विशेषज्ञ निरुपम श्रीवास्तव का कहना है कि सैक्सुअली आकर्षक दिखने वाली युवतियों के शरीर के कुछ अंग ऐसे होते हैं जिन के लोग दीवाने होते हैं. इन में कसे व उठे नितंब वाली युवतियों की न केवल फैशन में बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में भी डिमांड है. वे आम जीवन में भी काफी लोकप्रिय होती हैं. पतली कमर, कसे स्तन व छरहरा बदन हर किसी को अपना दीवाना बना सकते हैं. सैक्सुअली अट्रैक्ट मानी जाने वाली फिगर को 36-24-36 इंच में मापा जाता है यानी युवती के सब से सैक्सी अंगों का यह आकार स्तन, कमर व नितंबों से मापा जाता है. वहीं अब ग्लैमर, फैशन व फिल्म इंडस्ट्री में 31-23-32 का आकार अच्छा समझा जाने लगा है.

फिटनैस विशेषज्ञ अनुराधा दूबे का कहना है कि सैक्सुअली आकर्षण बढ़ाने के लिए हर युवती को शरीर के इन अंगों का खासा ध्यान रखना पड़ता है. इस के लिए संतुलित खानपान से ले कर व्यवस्थित दिनचर्या की जरूरत होती है. लेकिन जिस की सब से ज्यादा जरूरत होती है, वह है फिगर को सैक्सी बनाए रखने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण व्यायाम, जिन से हर युवती खुद को आकर्षक बना सकती है. इस से न केवल मसाज पार्लर व फिटनैस सैंटर जाने से छुटकारा मिलेगा बल्कि आप अपने बदन को सैक्सी व छरहरा भी बना पाएंगी. सैक्सी दिखने के लिए त्वचा में कसाव के साथ निखार आना भी बेहद जरूरी है. वहीं नितंबों व स्तनों में कसाव, सुडौलता व कमर का पतला होना भी जरूरी होता है. ऐसी फिगर के लिए यहां बताए जा रहे 10 व्यायाम कर आप खुद को सैक्सुअली अट्रैक्ट बना सकती हैं.

1. एयर बाइक

यह व्यायाम त्वचा में कसावट लाने व निखार बढ़ाने के लिए किया जाता है. इस व्यायाम को करने के लिए सब से पहले आप पीछे की तरफ कमर के बल लेटें. इस के बाद दोनों कुहनियों को मोड़ते हुए हथेलियों को सिर के नीचे लगाएं. इस के बाद घुटनों को अपनी तरफ खींचें. फिर पुन: व्यायाम की दूसरी स्थिति में जाने के लिए आप कंधों को दूसरी तरफ ऊपर उठा कर अपनी दाईं कुहनी को बाएं घुटने की तरफ तब तक खींचें जब तक कि दोनों आपस में मिल न जाएं. इस के बाद इसी प्रक्रिया को बाईं कुहनी और दाएं घुटने के साथ करें. इस व्यायाम को कई बार करने से ढीली त्वचा में कसावट व चमक दोनों बढ़ जाती हैं.

2. लैग्स अप स्ट्रैट आर्म क्रंच

इस व्यायाम को करने से आप के ऐब्स व त्वचा दोनों में निखार आता है. इस को करने के लिए सब से पहले आप जमीन पर कमर के बल लेट जाएं और टांगों को 90 डिग्री तक ऊपर की तरफ उठाएं. टांगों को उठाते समय अपने दोनों हाथों में डंबल पकड़ना न भूलें. टांगों को ऊपर उठाने के दौरान डंबल्स भी धीरेधीरे हाथों से ऊपर उठाएं. डंबल्स को जहां तक आसानी से उठा पाएं वहां तक उठाने के बाद उस स्थिति को कुछ सैकंड तक ऐसे ही रहने दें. इस के बाद धीरेधीरे कंधों को ढीला छोड़ दें. इस प्रक्रिया को आप बारबार दोहराएं.

3. लाइंग लैग रेसेज

यह व्यायाम पेट की मांसपेशियों में कसावट लाने के लिए सब से उपयुक्त माना जाता है. इस व्यायाम को शुरू करने के लिए सब से पहले आप कमर के बल जमीन पर लेट कर अपनी टांगों व हाथों को टाइट करें. टांगों को फर्श से ऊपर 90 डिग्री पर उठाएं. इस दौरान जितना हो सके टांगों को टाइट रखें. इस के बाद टांगों को टाइट अवस्था में ही धीरेधीरे नीचे लाएं जब तक कि फर्श से सट न जाएं. इस प्रक्रिया को कई बार दोहराने से पेट व त्वचा में कसावट आती है.

4. सीजर जंप्स

नितंबों को सुडौल बनाने के लिए यह व्यायाम सब से अच्छा माना जाता है. इस के लिए आप को सीधे खड़े हो कर पैरों को फैलाना होता है, जिस से कि बीच में बहुत गैप हो. अब अपने पैरों की उंगलियों को एक तरफ मोड़ कर बैठने की कोशिश करें, लेकिन पूरी तरह बैठें नहीं. हाफ वे सिटिंग की मुद्रा में जितनी देर संभव हो, रहें. अब दोबारा उठ कर इसे करने की कोशिश करें. इस व्यायाम को बारबार करने से नितंबों की मांसपेशियों में कसावट आती है और नितंब आकर्षक दिखने लगते हैं.

4. वौल सिट

यह व्यायाम भी नितंबों को सैक्सी लुक देने के लिए किया जाता है. इस व्यायाम को शुरू करने के लिए सब से पहले अपनी पीठ को दीवार की तरफ ले जाएं और इस तरह बैठें जैसे कुरसी पर बैठते हैं. परंतु इस कसरत के दौरान सचमुच कुरसी का प्रयोग न करें, क्योंकि इस से आप को कोई फायदा नहीं होगा. इस प्रक्रिया के दौरान भी आप को अपना पेट कड़ा रखना होगा और आप का सारा भार पैरों पर होना चाहिए. अगर आप इस कसरत की आदी हो गई हैं तो अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए अपना एक पैर आगे कर के रखें. दर्द कम करने के लिए हर 15 सैकंड में पैरों को स्विच करते रहें. इस से आप के नितंब अट्रैक्टिव नजर आएंगे.

4. स्ट्रेट लैग पल्स

इस व्यायाम को करने के लिए चलने की मुद्रा में कुछ इस तरह खड़े हों कि आप का दायां पैर आगे और बायां पीछे हो. अब बारबार पैर को जमीन से छूने की कोशिश करते हुए बैठें और एकसाथ अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रखें. इस मुद्रा में 2-3 मिनट रहने के बाद खड़ी हो जाएं. इस कसरत को जितनी देर हो सके उतनी देर करें. इस प्रक्रिया में आप की रीढ़ की हड्डी सीधी और आप का पेट कड़ा होना चाहिए.

5. पुशअप

स्तनों को आकर्षक बनाने के लिए यह सब से अच्छा व्यायाम माना जाता है. इस व्यायाम में शरीर को हवा में उठाया जाता है. इस व्यायाम को करने के लिए  समतल जगह का चुनाव करना जरूरी होता है, पुशअप्स करने से पहले थोड़ा वार्मअप करना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह स्ट्रैंथ ट्रेनिंग ऐक्सरसाइज का एक प्रकार भी है, जो बिना जिम के किया जाता है. वार्मअप करने से आप का शरीर इस ऐक्सरसाइज के लिए थोड़ा तैयार हो जाता है. वार्मअप करने के बाद पुशअप्स की शुरुआत कीजिए. इस व्यायाम को शुरू करने के लिए पेट के बल सीधे हो कर मैट पर लेट जाइए. इस दौरान आप का पूरा शरीर सीधा होना चाहिए. पुशअप्स के दौरान सब से महत्त्वपूर्ण भूमिका आप के हाथपैरों की होती है, क्योंकि आप के पूरे शरीर का भार इन पर होता है. पुशअप्स से पहले शरीर का भार हाथों और पैरों के पंजों पर रखिए. घुटने भी सीधे रहें.

फिर अपने पूरे शरीर को हवा में कीजिए. अगर आप ने पुशअप्स के दौरान सांस अंदरबाहर करने का सही तरीका अपनाया तो पुशअप्स की गिनती आसानी से बढ़ा सकती हैं. शरीर को नीचे ले जाते वक्त सांस बाहर छोड़ें और उठाते वक्त सांस को अंदर की तरफ खींचिए. यदि पुशअप्स की शुरुआत करने जा रही हैं तो एक बार में ही ज्यादा करने से बचें. इस के 3 सैट बना लीजिए, 10-10 के 3 सैट से इस की शुरुआत कीजिए. बाद में अपनी क्षमतानुसार इस की संख्या बढ़ाइए.

6. डंबल्स

स्तनों को सुडौल बनाने के लिए यह व्यायाम सब से उपयुक्त माना जाता है. इस व्यायाम को करने के लिए सर्वप्रथम आप चटाई पर लेट जाएं और दोनों हाथों में एकएक डंबल ले लें. इस के बाद हाथों को सीधा करें. इस से आप की मांसपेशियों को बल मिलेगा. 2 मिनट तक ऐसा करने के बाद हाथों को अपने शरीर के दोनों तरफ ले जाएं. इस दौरान कुहनी को मोड़ें नहीं और न ही फर्श या चटाई पर टिकाएं. इस के बाद हाथों को फर्श से कुछ इंच ऊपर ही रखें. 10 मिनट तक इसी अवस्था में रहें और फिर हाथों को नीचे की तरफ लें. इस व्यायाम को प्रतिदिन 10 बार करने से स्तनों में आकर्षण के साथ कसावट आती है.

7. स्क्वैट्स

कमर के लिए यह सब से सरल व्यायाम है. इस व्यायाम को शुरू करने के लिए सीधी खड़ी हो जाएं और हाथों को अपने सामने की तरफ सीधे लेते हुए बिना घुटनों को ढीला छोड़ें, धीरेधीरे फिर वापस उसी स्थिति में आएं. यह ऐक्सरसाइज न केवल आप के हिप्स के फैट को कम करने में मदद करती है बल्कि पैरों की मांसपेशियों को भी टोन करती है.

8. साइकिलिंग

यह एक तरह से कमर, जांघों, कूल्हों और पिंडलियों की मांसपेशियों की कसरत होती है, जिस में इस्तेमाल होने वाली साइकिल पर रोजाना 2 से 3 मिनट तक व्यायाम करने से आप काफी कैलोरी बर्न कर सकती हैं. 45 मिनट की साइकिलिंग करें या फिर बाहर भी साइकिल चला कर कसरत कर सकती हैं. इस व्यायाम को करने से आप के शरीर का फैट कम हो जाता है.

सर्दियों में हेल्दी रहने के लिए जरूर खाएं ये 5 चीजें

सर्दियों के मौसम में सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. सर्दी से बचने के  लिये केवल गर्म कपड़े ही काफी नहीं है. बल्कि जरूरी है कि शरीर में अंदरूनी गर्माहट बनी रहे जिस के लिये हमें  अपने खान पान का ध्यान रखना अति आवश्यक है. अगर हमारा आहार पौष्टिक और शरीर को गर्माहट देने वाला होगा तो हमारी सेहत भी ठीक रहेगी व हम अपने शरीर को सर्दी से होने वाले संक्रमण से भी बचा सकते हैं. ज्यादातर लोगों  के साथ यह परेशानी होती है की सर्दी जुखाम, खासी की गिरफ्त में जल्दी ही आ जाते हैं. इसका कारण इम्युनिटी सिस्टम का कमजोर होना भी  होता है सर्दियों में  खास तौर पर बच्चों का ध्यान अधिक रखना होता है. सर्दियों के मौसम में  हमें सामान्य से 500 कैलोरी  अधिक लेनी चाहिये क्योंकि हमारा मेटाबोलिज्म रेट बढ़ जाता है जिस कारण हमें ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है. हर मौसम में मौसमी सब्जी, फल, नट्स अपनी एक अलग अहमियत रखते है. यह हमारे शरीर के तापमान को मौसम के अनुसार बना कर रखते  हैं. सर्दियों में हमारा रक्त संचार धीमी गति से होता है , जिस कारण ब्लड ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है. इससे निबटने के लिये जरूरी है कि खान पान का अधिक ध्यान रखा जाये.

रोजाना खाये गुड़

गुड़ की तासीर गर्म होती है जिससे शरीर का तापमान ठीक रहता है इसमें कैल्शियम व मैग्नीशियम तत्व पाए जाते हैं जो हड्डियों के साथ मांसपेशियों व नसों की थकान को दूर करता है. गुड़ खाने  से पाचन तंत्र तंदरुस्त रहता है डायबिटीज के शिकार लोग चीनी की जगह मीठे के रूप में गुड़ खा सकते हैं क्योंकि यह नैचुरल शुगर है.

बाजरा व मक्का  करें डाइट में शामिल  

बाजरा न केवल ऊष्मा देता है बल्कि यह  एक बहुत पौष्टिक आहार है. यह हमारे रक्त मे कोलेस्ट्रौल के स्तर को संतुलित रखता है यह रोटी खिचड़ी पुलाव के रूप मे खाया जाता है वहीं मक्का डायबेटिज के मरीजों के लिये बहुत लाभदायक होता है इसमें  विटामिन ए, बी व पोषक तत्व मौजूद होते हैं. इसे रोटी , सब्जी ,स्वीट कौर्न व पौप कौर्न के रूप मे खाया जाता है.

मूंगफली खाकर हड्डियां करें मजबूत

मूंगफली मे कैल्शियम और विटामिन डी होता है जो कि हड्डियों को कमजोर नहीं होने देता . इसके सेवन से कोलेस्ट्रौल का स्तर सही रहता है व खून की कमी नहीं होने देता. रोजाना सेवन से पाचन तंत्र ठीक रहता है मूंगफली का तेल जोड़ो की मालिश के लिये बहुत लाभदायक होता है. मूंगफली खाते समय उसका लाल छिलका उतार कर खाएं व  खाने के बाद आधा घंटे  तक पानी न पिये. क्योंकि छिलके समेत खाने से खांसी  की समस्या हो सकती है.

सरसों का साग खाएं

सर्दियां हो साग नहीं खाया तो क्या सर्दियों का  क्या मजा आया. जी हां साग स्वादिष्ट तो होता ही है और पौष्टिक भी सरसोें के साग में कैल्शियम और पोटाशियम मौजूद होता है जो कि हड्डियों को मजबूती देता है.  विटामन के, ओमेगा 3 फैटी एसिड पाए जाते हैं जो गठिए के रोग और शरीर के किसी भी भाग में सूजन से राहत दिलाने का काम करता है.

गाजर खाकर रहे तंदरुस्त

गाज़र  दिल, दिमाग, नस के साथ-साथ हेल्‍थ के लिए भी फायदेमंद है. इसमें विटामिन A, B,C,D,E, G और K पाए जाते हैं जिससे हमारी बौडी को काफी सारे न्‍यूट्रिएंट्स मिल जाते हैं. इसमें बीटा-कैरोटीन भी पाए जाते हैं क्योंकि ये  लाल, गहरे हरे, पीली  या फिर नारंगी रंग की सब्जी में पाया जाता है. एक गाजर  किसी व्यक्ति के भी शरीर में विटामिन-A की दैनिक खपत का 300 % ज्यादा पूर्ति करती है.गाजर हमें रतौंधी,कैंसर ,जैसी बिमारियों से बचाती है इससे  ब्लड कोलेस्ट्रौल कन्ट्रोल रहता है.

 

क्या पौर्न फिल्म देखना आप के शरीर को कमजोर कर सकता है?

आमतौर पर जब पॉर्न के बारे में बातचीत को चर्चा में लाया जाता है , तो इसे या तो जल्दी से निपटा दिया जाता है या फिर इसके बारे में बात ही नहीं की जाती. ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी सामाजिक कंडीशन ही ऐसी है जहां लोग पॉर्न देखना तो पसंद करतें है लेकिन उसके बारे में  या उससे होने वाले नुकसानों के बारे में बात करना नहीं चाहते. आज इंटरनेट पर इतनी पॉर्न वेबसाइट्स उपलब्ध हैं जिसको आप जितना चाहें उतना पॉर्न देख सकते है.

साउथ एशियन कंट्री में पॉर्न की बात करना यानी एक तरह का पाप करने जैसा है. सबसे ज्यादा भारत और पाकिस्तान में. या सही मायने में कहे कि यह एक तरह की हिपोक्रेसी है . इन दोनों देशों में लोग सबसे ज्यादा पॉर्न देखते है लेकिन बात करते हुए इसे पाप मानते है.

हालांकि भारत सरकार ने अधिकांश पॉर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन उन तक पहुंचना कोई मुश्किल बात नहीं. इस बात को ध्यान में रखे कि सेक्स और पॉर्न दोनो ही बहुत अगल हैं एक दूसरे से जैसे: पॉर्न एग्रेसिव सेक्स को दर्शाता है , और सेक्स फिजिकल प्लेजर है जो कि एक स्वाभाविक बात है .

यदि आप अधिक पॉर्न देखते है तो  क्या आप जानते है पॉर्न देखने के कितने नुकसान हो सकते है? कोई भी चीज यदि ज्यादा हद तक की जाये तो वह हानिकारक ही होती है. पॉर्न की लत भी उसी तरह है जो पीछा आसानी से नहीं छोड़ती है . पर आप यह जानने के बाद अपने आप पीछे हट जाएंगे कि पॉर्न से कैसे होता है नुकसान.

अत्यधिक पॉर्न पहुंच सकता है नुकसान :

* रियलिटी से दूर होना :

इंटरनेट पॉर्न की कहानियां घटिया स्टोरी लाइन पर निर्धारित है जो एक पिज्जा डिलीवरी बॉय से ले कर एस्ट्रोनॉट तक ही सीमित है . जैसे ही पॉर्न अनिवार्य रूप से रिग्रेसिव सोसायटी में सेक्स एजुकेशन का एक मात्र स्त्रोत बन जाता है , दर्शक अनियंत्रित रूप से इन हाफ– बेक्ड  स्टोरीलाइन को वास्तविक जीवन का एक हिस्सा समझ लेते है. जिससे लोगों में  कंसेंट  की  गलत समझ  पैदा होती है, और समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

* आत्मसम्मान में कमी ना :

अक्सर पॉर्न वीडियो में जो लोग होते है वे कई वर्षो से इस काम को कर रहे होते है , वे अनुभवी हैं और जानते हैं की कैमरे के सामने खुद को कैसे संभालना है. एक युवा दर्शक जो ऐसे पॉर्न नियमित रूप से देखता है , वह खुद की परफॉर्मेंस और फिजिक को उनसे तुलना  करके धीरे धीरे खुद से ही नाराज हो जाते है जो उन्हे अंततः आत्मसम्मान की कमी की ओर ले जाता है.

* सेक्स के दौरान मजा ना :

इंटरनेट पॉर्न के कंटेंट को एक प्रोफेशनल टीम इस तरह दर्शती है जो लोगो को एक अलग तरह का प्लेजर देता है . उसे इस कदर प्रदर्शित करते है जो दर्शकों प्रसन्न करता है. एक मेकअप आर्टिस्ट से लेकर साउंड एडिटर तक पूरी टीम उस वीडियो को इतनी ग्लॉसी बनाती है की दर्शक सोचते है की यही हकीकत है . जबकि वास्तविकता कुछ और ही होती है . इससे आप स्वयं , अपने पार्टनर , और अपने फिजिकल इंटिमेसी से निराश हो जाते हैं.

* रिश्ते टूटने का डर :

एक रेगुलर पॉर्न दर्शक के लिए  पॉर्न वीडियो के कुछ कार्य ,  सेक्स का आदर्श बन जाते है जबकि उनके पार्टनर के सेक्स के प्रति कुछ  अलग विचार रहते है. इससे रिश्ता में दरार पड़ जाती है और शारीरिक परेशानी भी पैदा होती है .

* आदत बन जाना :

एक स्टडी के अनुसार पॉर्न की लत और ड्रग की लत को एक समान माना गया है क्योंकि दोनों एक समान तरीके से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाते हैं. इंटरनेट पर पॉर्न की आदत लगने की संभावना सबसे ज्यादा पाई गई  है.

इंटरनेट वेबसाइट इस तरह पॉर्न को दर्शाते है की यह दर्शकों की आदत ही बन जाती है. लोग ऐसे विडियोज को पसंद करते हैं और खुद को इन सब में इन्वॉल्व कर लेते हैं . चिंता की बात यह है की पॉर्न लोगों पे इस तरह हावी हो जाता है की लोग खुद की इच्छाओं को भूल जाते  हैं, अपने विचारों को बदल देते हैं, जो उन्हे खुद भी कभी महसूस नहीं होता.

क्या आपको भी होती हैं, सांस फूलने की परेशानी

आए दिन सांस फूलने की शिकायतें सुनने को मिलती हैं. शादीब्याह या किसी छोटेमोटे प्रोग्राम में मौसी, बूआ, ताऊ, चाची या अन्य किसी चिरपरिचित को सांस फूलने की शिकायत करते सुना जाता है. क्या कभी आप ने सोचा कि सांस फूलने के असली कारण क्या हैं.

1. सांस फूलना

सांस फूलने की मुख्य वजह है शरीर को औक्सीजन ठीक से न मिल पाना जिस से फेफड़े पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. ऐसे में फेफड़े औक्सीजन पाने के लिए श्वसन क्रिया की गति को बढ़ा देते हैं जिस को हम सरल भाषा में सांस फूलना कहते हैं. यदि समय रहते सांस फूलने पर ध्यान नहीं दिया गया तो इस के परिणाम जानलेवा हो सकते हैं.

सांस फूलने के रोकने के 2 उपाय हैं. एक, या तो शरीर की औक्सीजन की मांग पूरी करने के लिए बाहर से अतिरिक्त औक्सीजन दी जाए, दूसरे, शरीर की औक्सीजन की मांग को कम किया जाए.

2. महत्त्वपूर्ण कारण

सांस फूलने के खासकर अपने देश में 2 मुख्य कारण हैं. एक तो ज्यादा मोटापा व दूसरा शरीर में खून यानी लाल कणों की कमी. अगर औक्सीजन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाले रक्तकणों यानी हीमोग्लोबिन की कमी है तो औक्सीजन की सप्लाई बाधित होगी.

अपने देश में अधिकांश महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं. काफी संख्या में महिलाएं बच्चेदानी की समस्या व उस से जुड़ी अनावश्यक व अधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) की समस्या से पीडि़त हैं. देश में अधिकतर बच्चों के जन्म के बीच फासला काफी कम होना भी अनीमिया व सांस फूलने की शिकायत का एक बहुत बड़ा कारण है. सांस न फूले, इस के लिए कुपोषण समाप्त करना जरूरी है.

3. मोटापा एक अभिशाप

आजकल लोगों की आरामतलबी बढ़ रही है. नियमित सुबह की सैर व व्यायाम का अभाव, शराब व चरबीयुक्त खा- पदार्थों का भरपूर सेवन ये दोनों बातें शरीर के मोटापे को तेजी से बढ़ा रही हैं. अकसर मोटे लोगों को यह शिकायत करते सुना जाता है कि जरा सी सीढ़ी चढ़ने में सांस फूलती है. मोटापे में जरूरी नहीं कि दिल की बीमारी ही हो. समय रहते यदि कुपोषण खत्म कर दिया जाए व मोटापे को नियंत्रित किया जाए तो सांस फूलने की समस्या से छुटकारा मिल सकता है.

4. फेफड़े का रोग, बड़ा कारण

फेफड़े का इन्फैक्शन, जैसे निमोनिया व टीबी सांस फूलने का सब से बड़ा कारण हैं? श्वास नली व उस की शाखाओं में सूजन भी इस का एक कारण है जिसे मैडिकल भाषा में एस्थमैटिक ब्रांकाइटिस कहते हैं. कभीकभी श्वास नली पर किसी गिल्टी या छाती में ट्यूमर का दबाव भी सांस फूलने का कारण बन सकता है. अकसर दुर्घटना में छाती की चोट का सही इलाज न होने पर अंदर

खून या मवाद जमा हो जाता है और उस से फेफड़ों पर दबाव बनता है. इस से अकसर सांस फूलने के साथसाथ खांसी की भी शिकायत रहती है.

स्केलोडरमा नाम की बीमारी फेफड़े को आहत करती है और फेफड़े के अंदरूनी हिस्से में अस्वाभाविक बदलाव आता है. इस से फेफड़े की बाहरी औक्सीजन सोखने की क्षमता कम हो जाती है और जरा सा चलने पर सांस फूलने लगती है.

5. दिल के रोग

यदि आप का दिल कमजोर है यानी पिछले हार्टअटैक के दौरान दिल का कोई हिस्सा बहुत कमजोर या नष्ट हो गया है तो ऐसा कमजोर दिल खून व पानी का साधारण भार भी नहीं उठा पाता और सांस फूलने का कारण बन जाता है. ऊपर से अगर मोटापा भी है, तो स्थिति और भी कष्टकारी हो जाती है.

दायीं तरफ का दिल गंदे खून का स्टोरहाउस है जो धड़कन के साथ शरीर के अंगों से आए गंदे खून को फेफड़े की तरफ शुद्धीकरण के लिए भेजता है और फिर यह खून दिल के बाएं हिस्से में इकट्ठा होता है और धड़कन के साथ शरीर के अन्य अंगों में जाता है.

अगर किसी को पैदाइशी दिल की बीमारी है और दिल के अंदर शुद्ध व अशुद्ध खून का आपस में सम्मिश्रण होता रहता है, तो जिस्म में नीलापन दिखता है विशेषकर उंगलियां व होंठ प्रभावित होते हैं और साथ ही, सांस फूलने की भी शिकायत रहती है.

6. आवश्यक जांच

वैसे तो अनगिनत जांचें हैं पर कुछ बहुत जरूरी जांचें सांस फूलने के कारण को समझने व उस के इलाज के लिए आवश्यक हैं, जैसे छाती का ऐक्सरे, छाती का एचआर, सीटी, पीएफटी, दिल के लिए डीएसई (डोब्यूटामीन स्ट्रैस ईको), खून की जांच जैसे विटामिन ‘डी’ की मात्रा व ब्लड गैस एनालिसिस आदि.

7. सांस फूलने पर क्या करें

उस अस्पताल में जाएं जहां आवश्यक जांचों की सुविधा हो. संबंधित जांचों के बाद अगर लगे कि सांस फूलने का कारण फेफड़ा है तो किसी छाती रोग विशेषज्ञ व थोरेसिक सर्जन से सलाह लें. यदि फेफड़ा क्षतिग्रस्त है या दबाव में है तो तुरंत सर्जरी करवाएं, आप की जरा सी  लापरवाही दूसरी तरफ के नौर्मल फेफड़े को भी नुकसान पहुंचा सकती है. अगर सांस फूलना दिल की वजह से है तो किसी हृदयरोग विशेषज्ञ या कार्डियोथोरेसिक सर्जन से सलाह लें. किडनी विशेषज्ञ की राय भी लेनी पड़ती है अगर गुरदे के कारण सांस फूल रही है.

8. कुछ खास बातें

यदि आप 20 साल की उम्र से ही रोज 2 घंटे नियमित टहलते हैं और 2 घंटे धूप का सेवन करते हैं तथा धूलधक्कड़ से दूर रहते हैं तो यकीन मानिए आप सांस फूलने की समस्या से काफी हद तक बचे रहेंगे. मोटापा किसी भी हालत में न पनपने दें.

रोज तकरीबन 350 ग्राम सलाद व 350 ग्राम फलों का सेवन करें. प्रोटीन भरपूर मात्रा में लें. पत्तेदार सब्जियों का नियमित सेवन करें. किसी तरह के धूम्रपान व तंबाकू के सेवन से बचें. शराब न पीएं. अगर आप यह सलाह मानेंगे तो सांस फूलने की तकलीफ ले कर आप को अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.                        –

(लेखक दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ थोरेसिक एवं कार्डियो वैस्कुलर सर्जन हैं.)

माहवारी- मर्ज पर भारी

तकरीबन 15 साल की सुमन डाक्टर के सामने बैठी थी. डाक्टर ने उस से पूछा, ‘‘क्या तुम शादीशुदा हो?’’

सुमन ने सवालिया नजरों से अपनी मां की तरफ देखा. तबीयत खराब होने से भला शादी का क्या कनैक्शन? उस ने ‘नहीं’ में सिर हिलाया.

डाक्टर ने सुमन को बाहर भेज कर मां से धीमी आवाज में कुछ पूछा. इस से आसपास बैठे दूसरे मरीजों में खुसुरफुसुर होने लगी.

दरअसल, पिछले 2 महीने से सुमन की माहवारी मिस हो रही थी. उस ने यह बात अपनी मां को बताई और घबराई मां उसे ले कर डाक्टर के पास आ पहुंची.

छोटे से कसबे की रहने वाली सुमन इस बात से बिलकुल बेखबर थी कि वहां मौजूद बाकी लोग उसे कैसी नजरों से देख रहे थे. उस के जेहन में बारबार यही सवाल उठ रहा था कि डाक्टर ने ऐसा क्यों पूछा कि शादी हुई है या नहीं?

लड़कियों से ऐसे सवाल सिर्फ गांवों या छोटे शहरों में ही नहीं पूछे जाते हैं, बल्कि बड़े शहरों का भी यही हाल है.

‘‘मैं एक सिंगल लड़की हूं. पिछले दिनों मेरे पीरियड्स मिस हो गए और मैं डाक्टर के पास गई. मैं यह उम्मीद ले कर गई थी कि डाक्टर मेरी परेशानी का हल बताएंगी, मु झे दवाएं देंगी, मेरी मदद करेंगी, लेकिन हुआ उलटा.

‘‘उन्होंने मुझ से अजीब से सवाल किए. जैसे कि क्या मेरी शादी हो गई है? क्या मेरा बौयफ्रैंड है? क्या मैं सैक्स करती हूं? क्या मेरे मातापिता को इस बारे में मालूम है? मैं डाक्टर के इस रवैए से हैरान थी.’’

यह वाकिआ सीमा के साथ हुआ. वह इस से बेहद खफा है और चाहती है कि डाक्टर कुंआरी या सिंगल लड़कियों से ऐसे सवाल न पूछें और न ही उन्हें ‘नैतिकता’ का पाठ पढ़ाएं.

सैक्सुअल हैल्थ से जुड़ी परेशानी  पर डाक्टर अकसर ही शादी से जुड़े  सवाल करती हैं. कायदे से यह पूछा जाना चाहिए कि क्या आप सैक्सुअली ऐक्टिव हैं?

गाइनोकोलौजिस्ट डाक्टर विमला जयपुर के वात्सल्य हैल्थ सैंटर में मरीजों को देखती हैं. उन के यहां शहरी के साथसाथ जयपुर के गांवदेहात के इलाकों से भी मरीज आते हैं.

डाक्टर विमला का मानना है कि डाक्टरों के लिए मरीज की सैक्स लाइफ और सैक्सुअल ऐक्टिविटी के बारे में जानना जरूरी होता है.

वे यह भी मानती हैं कि मरीज शादीशुदा है या नहीं, वह सैक्सुअली कितनी ऐक्टिव है, ऐसी बातों से डाक्टर का बहुत ज्यादा मतलब नहीं होना चाहिए.

उन्होंने आगे बताया, ‘‘मैं अपने यहां आने वाली लड़कियों को सेफ सैक्स की सलाह देती हूं. एक बालिग लड़की ‘सही’ और ‘गलत’ का फैसला खुद ले सकती है. लड़कियों की माहवारी मिस हो जाना ही सैक्सुअल हैल्थ से जुड़ा मसला नहीं है. इस के अलावा भी कई दिक्कतें हो सकती हैं, जैसे अंग के इंफैक्शन से फैलने वाली बीमारियां.’’

डाक्टरों का ऐसा बरताव निजी क्लिनिकों और छोटे अस्पतालों तक सिमटा हुआ नहीं है, बल्कि बड़े अस्पतालों में भी लड़कियों को इस तरह के सवालों का सामना करना पड़ता है.

23 साल की सोनम बताती है कि डाक्टर यह मान कर चलते हैं कि कोई सैक्स तभी करता है, जब उस की शादी हो जाती है.

जयपुर में रहने वाली 25 साल की सोनम अपने अनुभव सा झा करते हुए कहती है, ‘‘वेजाइनल इंफैक्शन होने पर मैं एक गाइनोकोलौजिस्ट के पास गई. मैं ने उन से पूछा कि कहीं यह एसटीडी तो नहीं है?’’

उस की बात सुन कर डाक्टर ने कहा, ‘‘अगर तुम शादीशुदा नहीं हो, तो एसटीडी का सवाल ही नहीं उठता.’’

सोनम कहती है कि डाक्टर यह मान कर चलते हैं कि कोई सैक्स तभी करता है, जब उस की शादी हो जाती है. मु झे उन के बरताव पर बहुत गुस्सा आया और मैं ने इस बारे में अपना गुस्सा जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिख डाली.

जयपुर के कांवटिया हौस्पिटल में तैनात डाक्टर आरके चिरानियां ने काफी समय तक ऐसे मामलों को हैंडल किया है. वे कहते हैं, ‘‘गाइडलाइंस की बात करें तो छोटीमोटी दिक्कतों के लिए हमें मरीज के अलावा किसी और से बात करने की जरूरत नहीं होती. लेकिन बात अगर बच्चा ठहरने तक पहुंच जाए, तो लड़की के पार्टनर या किसी करीबी को बताना जरूरी हो जाता है.

‘‘कई बार गांवों की ऐसी लड़कियां मेरे पास आती थीं, जिन्हें पता ही नहीं होता था कि वे पेट से हैं. उन्हें बस इतना पता होता था कि उन के पेट में दर्द हो रहा है. ऐसे में उन के मातापिता से बात करना मजबूरी हो जाती थी.’’

डाक्टर आरके चिरानियां इस के पीछे तर्क देते हैं कि किसी को बिना बताए बच्चा गिराना खतरनाक होता है. इस में मौत का डर भी होता है.

‘मर्दाना कमजोरी का शर्तिया इलाज’, ‘सैक्स रोगी मिलें’, ‘जवानी में भूल की है तो न पछताएं’ जैसे इश्तिहार गांवकसबों और बड़े शहरों में जगहजगह दीवारों पर देखने को मिल जाते हैं. लेकिन जहां बात लड़कियों  की आती है, तो हर तरफ चुप्पी छा जाती है या फिर इशारों में बातें होने लगती हैं.

हमारे डाक्टर भी उसी समाज से आते हैं, जहां से हम. मैडिकल साइंस और विज्ञान उन्हें इस काबिल तो बनाता है कि वे बीमारी पहचान सकें, इलाज कर सकें, लेकिन शायद वे यह सम झने में नाकाम होते हैं कि उन का काम यहीं तक है, फैसले सुनाने या मोरल साइंस पर लैक्चर देने का नहीं.

अब यह सवाल उठता है कि क्या हम ऐसे समाज की कल्पना कर सकते हैं, जहां लड़कियां बेझिझक हो कर अपनी सैक्स से जुड़ी तकलीफों के बारे में बात कर पाएं? कम से कम वे डाक्टरों से अपनी तकलीफ खुल कर बता पाएं?

जानकारी: इरेक्टाइल डिसफंक्शन कैसे पाएं निजात 

इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी ईडी का मतलब है कि यौनक्रिया करते वक्त लिंग में पर्याप्त तनाव उत्पन्न न हो पाना. इसे कभीकभी नपुंसकता भी कहते हैं. हालांकि, नपुंसकता शब्द का इस्तेमाल अब कम हो गया है. यह वृद्ध पुरुषों एवं मध्य आयुवर्ग के पुरुषों की आम समस्याओं में से एक है.

अधिकांश पुरुषों को ईडी के प्रबंधन के लिए विकसित होते सिद्धांतों एवं सक्षम थेरैपी की जानकारी नहीं होती, जो सालों तक ईडी का इलाज न कराए जाने का मुख्य कारण है. ईडी का इलाज कराने के लिए सब से पहला कदम यह है कि इस बीमारी के बारे में अपने डाक्टर से खुल कर बात की जाए क्योंकि वह आप को जीवनशैली के परिवर्तनों से ले कर मैडिकेशन व सर्जरी तक के कई उपायों की सलाह दे सकते हैं.

ईडी के कारण

मैडिकल समस्याएं, जैसे हाइपरटैंशन, डायबिटीज मेलिटस एवं कार्डियोवैस्कुलर बीमारी (सीवीडी) और मनोवैज्ञानिक समस्याएं, जैसे अवसाद व चिंता पुरुषों में यौन समस्याएं बढ़ाती हैं. डायबिटीज यौन समस्याओं का आम कारण है क्योंकि यह लिंग में खून का प्रवाह बनाने वाली रक्तवाहिनियों और नसों दोनों को प्रभावित करती है. जीवनशैली की खराब आदतें, जैसे मोटापा, धूम्रपान, अल्कोहलपान आदि भी ईडी के कारण हैं.

ईडी से पीडि़त होने के लक्षण

लिंग में तनाव उत्पन्न करने में परेशानी होना.

यौनक्रिया के वक्त तनाव बनाए रखने में मुश्किल होना.

यौनेच्छा की कमी.

अत्यधिक उत्तेजना उत्पन्न होने के बाद भी संभोग सुख प्राप्त न कर पाना.

यदि ये लक्षण 3 माह या उस से ज्यादा समय तक रहते हैं तो व्यक्ति को डाक्टर से संपर्क करना चाहिए. डाक्टर आप को यह सम झने में मदद करेगा कि आप के ये लक्षण आप की किसी अन्य समस्या के कारण हैं जिस का इलाज कराए जाने की जरूरत है.

ईडी को रोकने में मदद करने के लिए आप अनेक उपाय कर सकते हैं. इन में से कई उपायों में जीवनशैली में सेहतमंद परिवर्तन शामिल हैं. ये परिवर्तन न केवल ईडी को रोकने के लिए अच्छे हैं बल्कि आप की संपूर्ण सेहत में भी सुधार लाते हैं.

ईडी को रोकने के सुझाव

दिल की बीमारी और डायबिटीज को नियंत्रण में रखें.

नियमित तौर पर व्यायाम करें.
वजन नियंत्रित रखें.

सेहतमंद आहार लें.

तनाव का प्रबंधन करने या उसे कम करने के तरीके खोजें.

यदि चिंता या अवसाद हो रहा हो तो मदद लें.

धूम्रपान त्याग दें.

अल्कोहल का सेवन सीमित मात्रा में करें. ऐसी दवाइयां न लें जिन का परामर्श आप के डाक्टर ने न दिया हो.

ईडी का इलाज

सब से पहले नौन-इन्वैसिव यानी कोई चीरा लगाए बिना इलाज किया जाता है. ईडी के अधिकांश मशहूर इलाज कारगर हैं और सुरक्षित भी.

ईडी के लिए अकसर फौस्फोडायस्टेरेज टाइप-5 इन्हिबिटर्स जैसी ओरल दवाइयां या गोलियां दी जाती हैं, जैसे वियाग्रा, सियालिस, लेविट्रा, स्टेंड्रा आदि.

टेस्टोस्टेरौन थेरैपी (जब खून की जांच में टेस्टोस्टेरौन की कमी पाई जाती है).

पेनाइल इंजैक्शन (आईसीआई, इंट्राकेवरनोजल एल्प्रोस्टेडिल/ बाईमिक्स).

वैक्यूम इरेक्शन डिवाइसेस

यदि ओरल दवाइयां काम न करें तो ईडी वाले पुरुषों को एल्प्रोस्टेडिल/ बाईमिक्स दवाई दी जाती है. यह दवाई इस्तेमाल के तरीके के आधार पर 2 रूपों में आती है : इंट्राकैवरनोजल इंजैक्शन यानी ‘आईसीआई’ या यूरेथ्रा द्वारा (आईयू थेरैपी). इस के अलावा व्यक्ति सर्जिकल इलाज भी करा सकता है.
लिंग का प्रत्यारोपण : यह उन पुरुषों के लिए अंतिम विकल्प है जिन्हें दवाइयों एवं अन्य नौन-इन्वैसिव इलाजों से कोई लाभ नहीं मिलता.

वैस्कुलर सर्जरी : पुरुषों में एक अन्य सर्जिकल विकल्प, वैस्कुलर सर्जरी है जो ईडी करने के लिए जिम्मेदार रक्तवाहिनी की समस्याओं को ठीक करती है.

इसलिए यह बहुत जरूरी है कि ईडी के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए और साथ ही, आम जनता को जानकारी दी जाए कि ईडी का इलाज हो सकता है. ईडी का इलाज संभव है, इस का एक ताजा उदाहरण यहां पेश है.

इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी यौन क्रिया के दौरान लिंग में पर्याप्त तनाव उत्पन्न न कर पाने की समस्या अकसर चिंता, अवसाद या डायबिटीज पीडि़त पुरुषों में होती है. 37 वर्ष के एक पुरुष को डायबिटीज से पीडि़त होने के बाद कुछ समय में इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी हो गया. वह मरीज इंसुलिन पर था. डायग्नोसिस से पहले वह सेहतमंद जिंदगी और सफल संबंधों का आनंद ले रहा था लेकिन डायबिटीज ने उसे ईडी भी कर दिया.

ईडी की शिकायत रहते हुए उस ने इस उम्मीद में शादी कर ली कि इस से उस की स्थिति में सुधार होगा. लेकिन उस की समस्या चलती रही और बीते दिनों के साथ गर्भधारण के लिए सामाजिक दबाव बढ़ने लगा. इस से प्रजनन क्षमता की बातें होने लगीं और अपनी जीवनसाथी के साथ उस के संबंध बिगड़ने लगे. वह अभी तक अपनी समस्या पर खुल कर बात नहीं कर पा रहा था लेकिन बढ़ते दबाव ने आखिरकार उसे डाक्टर से परामर्श लेने पर मजबूर कर दिया.

मैडिकल सहायता देते हुए उसे थेरैपी के तहत इंट्रा पीनल इंजैक्शंस का सु झाव दिया गया. लेकिन इस में उस की रुचि नहीं थी. इसलिए पहले उस ने ओरल दवाई शुरू की जिस का उसे कोई फायदा नहीं हुआ. परिणामस्वरूप, अंत में उस ने लिंग को प्रत्यारोपण कराने की बात मान ली. इलाज शुरू करने से पहले उसे अपनी डायबिटीज को नियंत्रित करना जरूरी था.

डाक्टर्स ने मिल कर अपने मरीज का इलाज किया और उस की डायबिटीज को नियंत्रण में ले कर आए. इस के बाद ईडी के इलाज के लिए थ्री-पीस इन्फ्लेटेबल डिवाइस इंप्लांट की. यह प्रक्रिया सफल रही जिस के बाद मरीज ने सफलतापूर्वक परिवार नियोजन किया. अब उस के 2 खूबसूरत बेटियां हैं.

(लेखक दियोस मैंस हैल्थ सैंटर, नई दिल्ली में क्लिनिकल डायरैक्टर के पद पर सेवारत हैं.)

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बहुत सी ऐसी बातें है जिसकी चाहत हर महिला को होती है लेकिन वो स्‍वयं इन्हें अपनी जुबां से कभी नहीं कहती. जैसे उनका प्रेमी उनके नखरे उठाएं, उनके आगे-पीछे घूमें, उन्हें महत्‍वपूर्ण समझें, उनकी हर बात मानें.

महिलाओं के सीक्रेट

महिलाओं का स्‍वभाव बहुत शार्मिला होता है. इसलिए उनके दिल की बात को जुबां तक आने में काफी समय लगता हैं. लेकिन बहुत सी बातें ऐसी है जो हर महिला चाहती हैं. जैसे अपने प्रेमी से प्‍यार और देखभाल की उम्‍मीद, साथ ही यह भी की उनका प्रेमी उनके नखरे उठाएं, उनके आगे-पीछे घूमें, उन्हें महत्‍वपूर्ण समझें, उनकी हर बात मानें. आइये इसके अलावा महिलाओं की सीक्रेट के बारे में जानें.

1.अपनी तारीफ सुनना

महिलाओं को हमेशा उनकी तारीफ करने वाले पुरुष बहुत अच्‍छे लगते हैं. ऐसे में उन्‍हें बहुत अच्‍छा लगता है जब प्रेमी उनमें किसी भी तरह का बदलाव दिखने पर तुरंत उनकी प्रशंसा करें. जैसे अगर महिला फिट दिखें, कोई नया हेयरकट करवाया हो या आकर्षक लगें, तो उनकी तारीफ जरुर करें.

2. रिश्‍ते में रोमांस

महिलाएं अपने रिश्‍ते की कद्र करने के साथ रिश्‍ते में रोमांस को निरंतर बनाये रखना चाहती हैं. इसलिए यह जरूरी है कि आपका रिश्‍ता चाहे वह 5 म‍हीने से हो या 5 सालों से उसमें रोमांस को हमेशा बनाये रखें.

3. ध्यान रखने वाला पुरुष

महिलाओं को केयर करने वाले पुरुष बहुत पसंद होते है. महिलाएं संवेदनशील होती है इसलिए उन्‍हें ऐसे ही पुरुष बहुत अच्‍छे लगते है. जो परेशानी के समय उनकी अच्‍छे से देखभाल कर सकें.

 

4.कपड़ों से प्रभावित होना

ज्‍यादातर महिलाएं पुरूषों को उनके पहनावे से भी पसंद करती है. इसलिए पुरुषों को चाहिए कि वह महिलाओं को अपने कपड़ों से प्रभावित करने की कोशिश करें. पुरुषों को हमेशा अपने सौंदर्य और कपडों पर ध्यान देना चाहिए. अगर, महिलाएं आपको टाइट जींस में देखना पसंद करती है, तो उनके लिए ज्यादातर टाइट जींस पहनें.

5. पुराने संबंधों के बारे में जानना

अगर महिलाएं आप से आपके पुराने संबंधों के बारे में बात करना चाहे, तो इसका अर्थ यह नहीं कि आपने कुछ गलत किया है. अपने संबंधों के बारे में बात करने से ना डरें. यह तो आप दोनों के लिए अच्छी बात है, क्‍योंकि सच्चाई और लंबी बातचीत आप लोगों को एक दूसरे के करीब ला सकती है.

6. सुझावों को थोपें नहीं

अकसर पुरुष महिलाओं की समस्‍या सुने बिना अपने सुझावों को उनपर थोपने लगते हैं. पुरुष, अपने राय को उन पर थोप कर उनकी दुनिया को सीमित कर देते हैं. इसलिए अगर वह किसी बात से परेशान है, तो उन्हें सलाह देने से पहले उनकी बात को अच्‍छे से सुनें.

7. कमियों को जानना

महिलाओं को प्रशंसा करने वाले पुरुषों के साथ-साथ कमियां बताने वाले पुरुष भी पसंद होते हैं. जैसे, अगर महिला लंबे समय तक काम करने के बाद काफी थक गई हैं और चिडचिडापन महसूस कर रहीं हैं तो उस समय उनकी कमी को बताने वाले पुरुष पसंद आते हैं.

8. बातों को ध्‍यान से सुनना

महिलाएं अकसर यह जानने की कोशिश करती हैं कि उनकी बातों को आप कितनी ध्‍यान से सुनते हो और कैसे प्रतिक्रिया देते हैं. इसलिये महिलाओं से बात करते समय केवल सर हिलाना काफी नहीं है उनकी बात को महत्वपूर्ण ढंग से सुने.

9. सेक्स में उनकी चाहत

महिला अकसर सेक्‍स के बारे में बात करना और अपने साथी को खुश करना चाहती हैं. इसलिए आप भी सेक्‍स के दौरान वह करें जो महिला साथी चाहती है. इसके लिए विनम्र दृष्टिकोण अक्सर सबसे अच्छा होता है. पहले, यह पूछे कि वह क्या चाहती है. फिर अपनी इच्छा को सकारात्मक और सही तरीके से उनके सामने व्यक्त करें.

10. शिष्टता का व्‍यवहार

जब रोमांस की बात आती है तो बहुत सारी महिलाएं पुरुषों की पारंपरिक मर्दाना भूमिका ही पसंद करती है. जैसे लड़की बैठने के लिये खुद ही कुर्सी खीच सकती हो, लेकिन वह आपका इंतजार करती है कि आप उसको कुर्सी खींच कर दें. तो समय आ गया है कि आप उसकी नजरों में सज्जन पुरुष बन जाएं.

11. आपकी शर्ट उनके लिए प्यार का चुंबक

क्‍या आपकी महिला साथी आपके स्‍वेटर में सिकुड़ने या शर्ट में घुसने का प्रयास करती हैं. कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, महिलाओं को पुरुष के पसीने की गंध से आरामदायक प्रभाव पड़ता है. क्‍या आप महिलाओं के इस सीक्रेट के बारे में जानते हैं.

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