Mamata’s Politics: संघर्ष से सफल मुख्यमंत्री तक ममता की कहानी

Mamata’s Politics: ममता बनर्जी, जिन्हें लोग ‘दीदी’ कहते हैं, उनका सफर एक साधारण परिवार से निकलकर पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने तक काफी संघर्षों से भरा रहा है। पश्चिम बंगाल में 34 साल पुराने वामपंथी किले को ढहाना कोई आसान काम नहीं था। वो मामता ही थी जिसनें मुमकिन बनाया।

ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता के एक निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। जब वे केवल 17 वर्ष की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया। उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर अपना घर चलाया और अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने इतिहास और शिक्षा (Education) में मास्टर डिग्री हासिल की और बाद में कानून की पढ़ाई भी पूरी की।

ममता बनर्जी ने अपने कॉलेज के दिनों में ही कांग्रेस के साथ राजनीति शुरू कर दी थी। उन्होंने 1984 के लोकसभा चुनाव में दिग्गज कम्युनिस्ट नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर सीट से हराकर सबको चौंका दिया। वह उस समय देश की सबसे युवा सांसदों में से एक बनीं। उन्होंने अपनी छवि एक जुझारू और सड़क पर उतरकर संघर्ष करने वाली नेता के रूप में बनाई।

1997 में कांग्रेस से वैचारिक मतभेदों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी और 1 जनवरी 1998 को अपनी नई पार्टी ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ बनाई। उनका मुख्य लक्ष्य बंगाल में 34 साल से जमी कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंकना था।

ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के पीछे दो सबसे बड़े आंदोलन रहे, जिन्होंने बंगाल की राजनीति बदल दी यह आंदोलन ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था।

बुद्धदेव भट्टाचार्य की वामपंथी सरकार ने टाटा नैनो कार फैक्ट्री के लिए हुगली जिले के सिंगूर में लगभग 1000 एकड़ उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किया था। उन्होंने कहा कि खेती की जमीन पर जबरन कब्जा नहीं होने देंगी। ममता बनर्जी ने 26 दिनों तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की। उन्होंने सिंगूर में जाकर धरने दिए और किसानों को एकजुट किया। भारी विरोध के कारण टाटा को अपनी फैक्ट्री गुजरात (साणंद) ले जानी पड़ी। इससे संदेश गया कि ममता बनर्जी किसानों की सबसे बड़ी रक्षक हैं।

नंदीग्राम आंदोलन एक ‘खूनी संघर्ष’ रहा सिंगूर के बाद नंदीग्राम में आग भड़क उठी, सरकार वहां एक Special Economic Zone (SEZ) और केमिकल हब बनाना चाहती थी। 14 मार्च 2007 को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 14 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। ममता ने इसे “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” करार दिया। उन्होंने नंदीग्राम के घर-घर जाकर लोगों का साथ दिया। इस घटना ने बुद्धिजीवियों लेखकों और कलाकारों को लेफ्ट सरकार के खिलाफ कर दिया।
“मां, माटी, मानुष” का नारा ममता बनर्जी ने इन आंदोलनों के दौरान एक बहुत ही प्रभावशाली नारा दिया: मां: महिलाओं और परिवार का सम्मान,माटी किसानों की जमीन और मिट्टी की रक्षा,मानुष आम इंसान के अधिकार। इस नारे ने बंगाल के गांव-गांव में लोगों के दिलों में जगह बना ली।

ममता बनर्जी ने इन आंदोलनों की ऊर्जा को चुनाव में बदल दिया। उन्होंने नारा दिया— “चिह्न बदल दो, सरकार बदल दो” (Marku bodlao, Sarkar bodlao)। 2011 के चुनाव में Trinamool-Congress गठबंधन ने 294 सीटों में से 227 सीटें जीतकर वामपंथियों का सूपड़ा साफ कर दिया। इसके साथ ही दुनिया के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाली लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई कम्युनिस्ट सरकार का अंत हुआ।

ममता बनर्जी हमेशा सफेद सूती (कॉटन) साड़ी और हवाई चप्पल पहनती हैं। वह एक बहुत ही साधारण जीवन जीने के लिए जानी जाती हैं। राजनीति के अलावा, वह एक अच्छी चित्रकार और कवयित्री भी हैं। उन्होंने 80 से अधिक किताबें लिखी हैं। वह केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ भी खुलकर आवाज उठाने के लिए जानी जाती हैं। ममता बनर्जी केंद्र में रेल मंत्री, पद पर काम करनें वाली 1 मात्र महिला है मंत्री है, कोयला मंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुकी हैं।

2011 से लगातार बंगाल में ममता की सरकार है, वह एक मात्र ऐसी विपक्षी नेता है जहां भाजपा की भी दाल नही गलती देश में हर विपक्षी पार्टी को हराने तोड़ने अपनें गठबंधन में शामिल करनें के बाद एक पश्चिम बंगाल ही है जहां राजनीति में आज के चाणक्य मानें जाने वाले अमित शाह, को भी को मुंह की खानी पड़ती है, केंद्र लगातार मामता और उनकी पार्टी से जुड़े लोगों पर छापे जैसे तरह तरह के हत्कंडे अपनाती है, पर मामता डरती नहीं और मजबूती से उनके सामनें खड़ी होकर उनको पीछे ढ़केल देती है, 2026 में फिरसे मामता मॉ, माटी, मानुष के नारे के साथ, सफेद साड़ी, हवाई चप्पल में खेला करनें को तैयार है।

Press Release: पटना में सजेगा भोजपुरी सिनेमा का महोत्सव

Press Release: 7वां सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स समारोह का 15 मार्च, 2026 को पटना के बापू सभागार में*

पटना: भोजपुरी सिनेमा के प्रतिष्ठित और बहुप्रतीक्षित 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स शो का आयोजन 15 मार्च को सायं 6 बजे से बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में किया जाएगा। यह समारोह भोजपुरी फिल्म उद्योग के लिए एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सिनेमा जगत की नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी।

इस संबंध में पटना स्थित आई.एम. ए. हाल में आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए दिल्ली प्रेस में सरस सलिल के इंचार्ज भानु प्रकाश राणा ने बताया कि यह अवॉर्ड शो अब बिहार की राजधानी पटना में हो रहा है, जो एक नए अध्याय की शुरुआत है. इस बार इसे और भव्य और बड़े स्तर पर किया जाएगा और दर्शकों के लिए यह मनोरंजन का शानदार अनुभव रहेगा।

भानु प्रकाश राणा ने बताया कि इस अवॉर्ड शो में नामांकित फिल्मों और कलाकारों को जूरी द्वारा चयनित कर विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लाइव म्यूजिकल परफॉर्मेंस और स्टार नाइट मुख्य आकर्षण रहेंगे।

*डिजिटल युग के साथ बदला अवॉर्ड शो का स्वरूप*
भोजपुरी सिनेमा में अपनी जबरदस्त कॉमेडी के जरिए हंसाने वाले अभिनेता रोहित सिंह मटरू ने बताया इस वर्ष के आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका परिवर्तित फॉर्मेट है। बदलते समय और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार को ध्यान में रखते हुए इस बार अवॉर्ड शो को तीन प्रमुख वर्गों में बांटा गया है—सिनेमा (थिएटर रिलीज फिल्में), ओटीटी प्लेटफॉर्म और यूट्यूब/टीवी कंटेंट के आधार पर बेस्ट अवॉर्ड्स दिए जाएंगे। आयोजन समिति से जुड़े बृहस्पति कुमार पांडेय ने बताया कि भोजपुरी कंटेंट अब केवल सिनेमाघरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ओटीटी और डिजिटल माध्यमों के जरिए विश्वभर में देखा जा रहा है। ऐसे में इन प्लेटफॉर्म पर कार्य करने वाले कलाकारों और तकनीशियनों को समान मंच देना समय की आवश्यकता है।

*2020 से शुरू हुआ सम्मान का यह सिलसिला*

सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स शो की शुरुआत वर्ष 2020 में बस्ती जिले से हुई थी जिसका उद्देश्य था भोजपुरी सिनेमा को एक व्यवस्थित और प्रतिष्ठित मंच प्रदान करना। लोकप्रिय पत्रिका सरस सलिल द्वारा शुरू की गई इस पहल ने कुछ ही वर्षों में भोजपुरी फिल्म उद्योग में अपनी विशेष पहचान बना ली।
इसके बाद अयोध्या में 3 बार, बस्ती में 2 बार, इसका आयोजन हुआ था। लगातार इस आयोजन की भव्यता और सहभागिता में वृद्धि होती गई।

*लखनऊ में हुआ था छठा भव्य आयोजन*
पिछले वर्ष ‘छठा सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स’ शो का आयोजन लखनऊ के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुआ था। यह अब तक का सबसे बड़ा और व्यवस्थित समारोह माना गया।
उस समारोह में 50 से अधिक श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। बेस्ट फिल्म, बेस्ट अभिनेता, बेस्ट अभिनेत्री, बेस्ट निर्देशक, बेस्ट सिंगर, बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर और लाइफटाइम अचीवमेंट जैसी प्रमुख श्रेणियों में कलाकारों को सम्मानित किया गया।

अब तक हुए अवॉर्ड समारोह में यह अवॉर्ड दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’, अरविंद अकेला ‘कल्लू’, प्रदीप पांडे ‘चिंटू’, अंजना सिंह, आम्रपाली दुबे, ऋचा दीक्षित, संजय पांडेय, देव सिंह, अवधेश मिश्रा, रक्षा गुप्ता, मनोज टाइगर, प्रियंका सिंह, सीपी भट्ट, संजय कुमार श्रीवास्तव,विजय खरे, केके गोस्वामी, शुभम तिवारी, माही खान, मनोज भावुक, प्रसून यादव, कविता यादव, अनुपमा यादव, अंतरा सिंह ‘प्रियंका’, समर सिंह, सहित कई नामचीन एक्टरों को मिल चुका है।

पिछले वर्ष लखनऊ में हुए अवॉर्ड शो में लोकप्रिय अभिनेता अरविंद अकेला ‘कल्लू’, अभिनेत्री अंजना सिंह, निर्देशक रजनीश मिश्रा सहित कई चर्चित हस्तियों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान मिला। समारोह में बड़ी संख्या में दर्शकों और मीडिया की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया।

*इस बार पटना में और भी भव्य तैयारी*
अभिनेता और गायक विवेक पांडेय ने पटना में आयोजित हो रहे सातवें संस्करण को और भी भव्य और आकर्षक बनाने की तैयारी की गई है। रेड कार्पेट एंट्री, सेलिब्रिटी इंटरैक्शन, लाइव डांस परफॉर्मेंस और विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए इसे यादगार बनाने की योजना है।
भोजपुरी सिनेमा के चर्चित सितारे, निर्माता-निर्देशक, संगीतकार, गायक और तकनीकी विशेषज्ञ इस समारोह में भाग लेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह मंच केवल सितारों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे काम करने वाले तकनीकी कलाकारों को भी बराबर की पहचान देता है।

*क्षेत्रीय सिनेमा को नई ऊंचाई*
आयोजकों ने बताया कि सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स शो का मुख्य उद्देश्य भोजपुरी फिल्म उद्योग के प्रतिभाशाली कलाकारों और तकनीशियनों को प्रोत्साहित करना तथा क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
भोजपुरी सिनेमा ने पिछले कुछ वर्षों में कंटेंट, तकनीक और प्रस्तुति के स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति की है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ इसकी पहुंच देश-विदेश तक बढ़ी है। ऐसे में यह अवॉर्ड समारोह उद्योग को एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता की दिशा में प्रेरित करता है।

*सिने प्रेमियों से अपील*
आयोजन समिति ने पटना और आसपास के जिलों के सिने प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस भव्य समारोह की शोभा बढ़ाने की अपील की है। जब बापू सभागार में रोशनी, कैमरा और तालियों की गूंज होगी, तब यह केवल कलाकारों का सम्मान नहीं बल्कि पूरी भोजपुरी संस्कृति का उत्सव होगा।

7वां सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स शो एक बार फिर यह साबित करने जा रहा है कि भोजपुरी सिनेमा अब क्षेत्रीय दायरे से निकलकर राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

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