Political Kahani: हम रह गए जीरो पड़ोसी बन रहा हीरो

Political Kahani:: मार्च में एकदम से मौसम का मिजाज बदल गया था. अनामिका ने सोचा कि विजय से मिल लेती हूं, पर जब वह उस के घर गई, तो विजय का मूड उखड़ा हुआ था.
‘‘मुंह क्यों लटकाया हुआ है?
सब ठीक है ?’’
अनामिका ने विजयसे पूछा.
‘‘सब मस्त. देख बिन मौसम की बारिश ने ठंडक बढ़ा दी है,’’ विजय बेमन से बोला.
‘‘हम्म, पर तुम्हारे चेहरे पर बारह क्यों बजे हैं?’’ अनामिका ने कहा.
‘‘चल , रणवीर सिंह की नई फिल्म देखने चलते हैं. सिनेमाघर पर फिल्म देखे बहुत दिन हो गए हैं. कौर्नर की सीट लेंगे,’’ विजय यह कह तो रहा था, पर उस का ध्यान कहीं और ही था.
‘‘विजय, सच बताओ कि क्या बात है? तुम्हें तो अभी कोई अवार्ड भी मिला है. तुम ने उस का भी नहीं बताया. मैं ने सोशल मीडिया पर तेरा फोटो देखा था अवार्ड लेते हुए,’’ अनामिका बोली.
‘‘फिल्म देखते हुए हम समोसे खाएंगे. बारिश के मौसम में समोसे खाने का अलग ही मजा है,’’
विजय ने कहा.

‘‘पता है, रसोई गैस कितनी महंगी हो गई है. 15 रुपए का समोसा अब 20 रुपए में मिल रहा है. सिनेमाघर में तो कम से कम 50 रुपए का होगा. और तू मु? अपने अवार्ड की बात क्यों नहीं बता रहा है?’’ अनामिका ने विजय का हाथ पकड़ कर पूछा.
‘‘अरे यार, क्या बताऊंमैं तो बड़ी मुसीबत में फंस गया. चौबे चले छब्बे बनने, दुबे बन कर लौट वाली कहावत  फिट बैठती है,’’ विजय ने धीरे से कहा.
‘‘ पूरी बात बताओ,’’ अनामिका ने विजय के बालों में हाथ फेरते हुए कहा.
‘‘तुम तो जानती हो कि पड़ोस में जो जसवंत अंकल हैं, वे लोकल गुरुद्वारा के मैंबर हैं. इस बार उन्होंनेयुवा शक्ति अवार्डके लिए चुना था. मतलब उन की गुरुद्वारा कमेटी ने. पिछले
रविवार को वहां हुए एक कार्यक्रम में उन लोगों ने मेरा सम्मान किया था. मु? एक शील्ड, सर्टिफिकेट और शौल भी दिया था.’’
‘‘हां, मैं ने तुम्हारे सोशल मीडिया हैंडल पर उस कार्यक्रम से जुड़े फोटो और वीडियो देखें थे. पर यह तो खुशी की बात है. मुंह किस बात पर फूला हुआ है, यह बताओ?’’ अनामिका बोली.
‘‘इस अवार्ड के चक्कर में मैं अब घनचक्कर बन गया हूं. हुआ यों कि मंगलवार को हमारे पड़ोस में रहने वाले अग्रवाल अंकल और मिस्टर जोसेफ का जसवंत अंकल के साथ ?ागड़ा हो गया. शोर सुन कर मैं भी वहां चला गया,’’ विजय ने बताया.
‘‘फिर आगे क्या हुआ?’’ अब अनामिका थोड़ा परेशान हो गई थी.
‘‘सारा ?ागड़ा एक नाली के गंदे पानी को ले कर था. अग्रवाल अंकल और जोसेफ अंकल बोल रहे थे कि जसवंत अंकल की वजह से नाली का पानी भर कर सड़क पर गया है, पर वे बोले कि पीछे वाले करीम भाई की वजह से ऐसा है.

‘‘बस, फिर क्या था, जसवंत अंकल को अकेला देख कर वे दोनों उन से भिड़ गए और धकियाने लगे. जब मैं ने जसवंत अंकल की साइड ली, तो अग्रवाल अंकल बोले, ‘तु? तो अवार्ड दिलाया है , तू तो इस का पक्ष लेगा ही.’ ‘‘इस पर जसवंत अंकल बिफर गए. हट्टेकट्टे तो वे हैं ही, उन्होंने दोनों अंकल को अकेले ही पीट डाला. मैं ने बीचबचाव की कोशिश की, पर तब तक तो मामला बिगड़ चुका था. कुछ लोगों ने उन तीनों को छुड़ाया, पर इस सब में मैं बुरा बन गया. अग्रवाल अंकल और जोसेफ अंकल मु? से बहुत ज्यादा नाराज हैं.
‘‘जोसेफ अंकल ने तो इतना तक कह दिया, ‘जसवंत तो करीम भाई से जलता है, इसलिए उस का नाम लगा रहा है. तू ने भी गलत आदमी का साथ दिया.’
‘‘यार, अनामिका, मैं तो बेवजह फंस गया. अब तो मैं अग्रवाल अंकल और मिस्टर जोसेफ से नजरें भी नहीं मिला पा रहा. उन दोनों के घर के दरवाजे तो मेरे लिए जैसे बंद हो गए हैं,’’ विजय ने अपनी बात रखी.
‘‘ओह, तो यह मामला है. अब आया . पर तू जानता है कि किसी और के साथ भी ऐसा हुआ है…’’ अनामिका बोली.
‘‘किस के साथ?’’ विजय ने हैरानी से पूछा.
‘‘हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ. उन्हें इजराइल ने अपने देश का सर्वोच्च सम्मान दिया और उसी के बाद से इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया. इस सब से दुनियाभर में यह संदेश गया कि भारत इजराइल और अमेरिका के साथ है ओर ईरान हमारा दुश्मन देश है.

‘‘कोढ़ पर खाज तो यह रही कि हमविश्वगुरुकी तरह सुलह कराने के सपने देख रहे थे कि नरेंद्र मोदी अमेरिका और इजराइल से कह कर युद्ध रुकवा देंगे, पर उन की कहीं भी नहीं चलती दिख रही.
‘‘अब खबर आई है कि पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर ऐसा कुछ करिश्मा कर सकते हैं कि यह युद्ध रुक जाए,’’ इतना कह कर जैसे अनामिका ने विजय पर कोई बम फोड़ दिया.
‘‘मु? पूरी बात बता कि सारा माजरा क्या है?’’ विजय ने पूछा.
‘‘खबरों की मानें तो ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से उपजी चिंताओं के बीच पाकिस्तान मीडिएटर के रोल में नजर रहा है. वह अमेरिका के संदेश ईरान तक पहुंचा रहा है और तेहरान के जवाब वाशिंगटन को देने का काम कर रहा है.

‘‘इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से फोन पर बातचीत की. व्हाइट हाउस के मुताबिक, चर्चा का मेन मुद्दा ईरान युद्ध था. हालांकि, इस बातचीत को संवेदनशील बताते हुए बड़े अफसरों ने और ज्यादा बताने से इनकार कर दिया.
‘‘व्हाइट हाउस की प्रैस सचिव कैरोलिन लिविट ने पहले कहा था
कि यह संवेदनशील कूटनीतिक चर्चा है और अमेरिका मीडिया के जरीए कोई बातचीत नहीं करेगा.
‘‘सूत्रों के मुताबिक, आसिम मुनीर
ने डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की और पाकिस्तान ने खुद को अमेरिकी और ईरान के बड़े अफसरों के बीच बातचीत की संभावित जगह के रूप में पेश किया.
‘‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की. एक्स पोस्ट के जरीए उन्होंने ईद उल फितर और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और ईरान के लोगों के साथ अपनी हमदर्दी जताई.
‘‘शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों पक्षों ने खाड़ी क्षेत्र के गंभीर हालात पर चर्चा की और तनाव कम करने, डायलौग और कूटनीति की जरूरत पर सहमति जताई. उन्होंने इसलामी दुनिया में एकता और क्षेत्र में शांति बहाल करने में पाकिस्तान के रोल पर भी जोर दिया.
‘‘इस बीच सोमवार, 23 मार्च को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ बेहतर और ठोस बातचीत के बाद उन्होंने हमले को 5 दिनों तक टालने की घोषणा की थी. हालांकि, यह साफ नहीं है कि पाकिस्तान का मीडिएटर बनने का डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से सीधा संबंध है या नहीं.
‘‘ईरान ने सीधे अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ मित्र देशों के जरूरी संदेश मिले हैं. जानकारों के मुताबिक, यह कूटनीतिक कोशिश अभी शुरुआती चरण में है.’’

‘‘तुम्हें इस से क्या सम? आता है?’’ विजय ने पूछा.
‘‘यही कि ईरान और अमेरिका के बीच सुलह की कोशिशें तेज हो गई हैं. अमेरिकी समाचार आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के अफसरों की इसी कड़ी में पाकिस्तान में मुलाकात और बातचीत मुमकिन है. पाकिस्तान में अमेरिकी और ईरानी अफसरों के बीच यह बैठक हो सकती है.
‘‘इजराइल के न्यूज चैनल-12 ने इजराइली अफसर के हवाले से बताया कि पाकिस्तान में होने वाली संभावित बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हो सकते हैं.
‘‘अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने सोमवार, 23 मार्च को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी ईरान से खुली बातचीत करने पर चर्चा की. ‘‘इस से पहले एक रिपोर्ट में यह
भी कहा गया कि तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान के प्रतिनिधि व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकौफ से मुलाकात कर चुके हैं. साथ ही, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी अलग से मिले.
‘‘इस से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के संकेत दे चुके हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ पर ईरान के साथ पौजिटिव बातचीत की बात कही थी. साथ ही, ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों को 5 दिन के लिए टाल दिया था.
‘‘डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि चर्चाओं का यह दौर पूरे हफ्ते जारी रहेगा. दोनों देशों के बीच गहन चर्चाओं के पौजिटिव रवैए को देखते हुए, मैं ने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर सभी सैनिक हमलों को फिलहाल 5 दिनों के लिए टाल दिया जाए.’’
‘‘तो तुम यह मानती हो कि पाकिस्तान इस युद्ध को रुकवा सकता है, जबकि नरेंद्र मोदी नहीं?’’ विजय ने सवाल किया.

‘‘बात अगर इस खबर की करें, तो क्यों नहीं. सोचो कि इस सब में पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर का नाम लिया जा रहा है और अगर पाकिस्तान कामयाब रहता है, तो फिर हमारे पड़ोसी का कद बढ़ना तय है. ‘‘मेरे खयाल से असली कूटनीति यही होती है कि चुपचाप काम को करो, ढिंढ़ोरा मत पीटो. पर हमारे देश मे पिछले कुछ साल से काम कम हो रहे हैं और बातें ज्यादा बनाई जा रही हैं.
‘‘तेल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं है, पर जनता जो भुगत रही है वह भी सब के सामने है. गैस सिलैंडर की कालाबाजारी हो रही है. जो चाय कल तक 10 रुपए की एक कप थी, वह आज 15 रुपए हो गई हैऔर भी जाने किस तरह से महंगाई ने देश को कब्जे में ले लिया है.’’
‘‘कह तो तुम सही रही हो.

जैसा हाल मेरे पड़ोसियों ने क्या है, वैसा ही हाल देश चलाने वालों का हो गया है. गलत का साथ देने से पहले कई बार सोचना चाहिए. हर पड़ोसी से बना कर रखनी चाहिए, फिर चाहे वह कोई देश हो या पासपड़ोस,’’ विजय ने कहा. ‘‘अब ज्यादा मुंह मत लटकाओ और स्माइल करो. हमें हर बात से सीख लेनी चाहिए. फिलहाल जनता अगर चुप है, तो इस का मतलब यह नहीं है कि उस में अपना गुस्सा दिखाने की ताकत नहीं है. जैसे तुम ने इस मामले से सबक सीखा है, उसी तरह देश के नेताओं खासकर सत्ता पक्ष को भी सबक सीखना चाहिए वरना 2 बिल्लियों की लड़ाई में बंदर बाजी मार जाता है.
‘‘हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालत फिलहाल तो किसी खिसियानी बिल्ली जैसी है, जो अपनी फर्जी कामयाबी का खंभा नोंच रही है,’’ अनामिका ने दो टूक कहा.         

Hindi Story: उद्धार

Hindi Story: ‘‘  री छमिया, री कहां रह गई. चल, जल्दीजल्दी चल. सब से पहले हमें पहुंचना है. तेरे भाई को मैं ने पहले ही भेज दिया, ताकि वह हमारी जगह रोक कर रखे.’’ ‘‘आई भाभी आई, कोई ढंग का कपड़ालत्ता नहीं मिल रिहा था. फटाफट  दर्जी से यह लहंगा बनवाने लग गई थी. इसी खातिर देर हो गई,’’ छमिया ने कहा.


जैसे ही छमिया लहंगा पहन कर झोपड़े से बाहर निकली, उस की मुंहबोली भाभी बस्ती के मांगेलाल की बहू लाजो बिना पलकें ? झपकाए उसे ही देखे जा रही थी. मानो उस ने कोई अजूबा देख लिया हो.
‘‘भाभी, चालो अब, यह मुझे मुझे टुकुरटुकुर क्या देख रही हो?’’ ‘‘वाह छोरी, मैं ने तो पहचाना ही नहीं, एकदम परी लग रही है आज तोध्यान से रहना वहां, कहीं कोई शहरी बाबू दिल दे बैठे .’’


‘‘क्या भाभी, तुम भी …’’ छमिया ने ऐसा कहते हुए शरमा कर नजरें झुका लीं. झॉ दोनों  उस तरफ चल पड़ीं, जिधर आज बहुत बड़ा पंडाल बना हुआ था. मुफ्त में खाना बंटने वाला था. खाने के साथ हर ?  झोपड़पट्टी वाले को 1-1 कंबल मुफ्त में दिया जाएगा. ऐसी घोषणा 2 दिन पहले हुई थी. कोई नेता रहे थे नारी उद्धार का बीड़ा उठाने. इस बस्ती में वे नारी उद्धार कर के रहेंगे. अब कोई नारी किसी भी वजह से दुखी नहीं रहेगी, इसलिए बस्ती के सभी लोगों को उस पंडाल में जमा होने को कहा गया था. सभी अपनीअपनी फरियाद ले कर पहुंचें, सभी की समस्याओं का हल किया जाएगा. ऐसी अनाउंसमैंट हुई थी.


लाजो और छमिया दोनों को जातेजाते रास्ते में और भी औरतें मिली थीं. बहुत ज्यादा बड़ी बस्ती तो थी नहीं, लेदे कर 400-500 घर ही होंगे उस बस्ती में. घर भी क्या ?ांपड़पट्टी ही कहो. सभी औरतें रास्ते में अपनीअपनी समस्याओं का जिक्र करती जा रही थीं. कोई कहती कि बस्ती में पानी की समस्या का समाधान होना चाहिए, तो कोई कहती कि बस्ती में एक भी डाक्टर नहींअगर कोई बीमार पड़ जाए तो दवादारू के लिए उसे शहर जाना पड़ता है. कभी किसी की हालत ज्यादा खराब हो तो शहर तक जातेजाते रास्ते में ही उस का राम नाम सत्य हो जाता है.


1-2 बार ऐसा हुआ भी था. बस्ती के नाई घसीटामल को सांस की तकलीफ थी. एक बार तकलीफ इतनी बढ़ी कि सांस लेना दूभर हो रहा था. बस्ती का ?ालाछाप डाक्टर भी कुछ नहीं कर पा रहा था. जितना वह इलाज करता, सांस लेने में और दिक्कत आती, इसलिए शहर के डाक्टर के पास जाने की सलाह दी गई.
लेकिन शहर जाते समय रास्ते में घसीटामल की सांस हमेशा के लिए बंद हो गई. इसी तरह के और भी कई केस हुए थे.


इसी तरह सभी औरतें अपनीअपनी समस्याओं के बारे में बातें करते हुए पंडाल में जा पहुंची थीं. तरहतरह के खाने की खुशबू से पंडाल महक रहा था. खुशबू इतनी शानदार थी कि सब के मुंह में पानी गया.
‘‘ भाई, ये साहब लोग कब तक आएंगे? मेरा तो खाना खाने का जी कर रहा है. इतना खुशबूदार खाना आज तक नहीं देखा है. पता नहीं आज क्याक्या मिलेगा खाने को.’’ ‘‘थम जा भाई, अभी जाएंगे. पहले साहब लोगों को खाने देना, फिर आप जितना जी चाहे खा लेना.’’ ‘‘रे बावले, यह जो खाना हम गरीब लोगों के लिए बनाया है, वह साहब लोग थोड़ी खाएंगे. साहब लोगों का खाना तो स्पैशल बनेगा…’’


थोड़ी ही देर में एक लंबी सी गाड़ी कर रुकी. उस के पीछेपीछे कुछ गाडि़यां और भी थीं. लंबी गाड़ी में से सफेद कुरताधोती पहने, सिर पर सफेद टोपी लगाए एक सज्जन निकले और दनदनाते हुए सीधे उस टैंट में घुस गए, जो खास उन के लिए शहर से आए लोगों ने बनाया था. उन के पीछेपीछे कुछ बस्ती वाले भी, जो अपना चौधरपना दिखाना चाहते थे, दुमछल्ले के जैसे पीछे लग लिए, जैसे वे इन मंत्री के सगे वाले हों.
लेकिन टैंट के पास आते ही नेताजी के चमचों ने उन्हें बाहर ही रोक लिया, मगर टैंट के अंदर की एकालक तो देखने को मिल ही गई.


एक शानदार सोफा और सैंट्रल टेबल पर ताजा फूलों से महकता हुआ गुलदस्ता सजा हुआ था. साथ में फलों से भरी हुई छोटी सी खूबसूरत टोकरी रखी हुई थी. और भी जाने क्याक्या पीने के सामान रखे थे, ये वे मासूम बस्ती वाले क्या जानेंखैर, थोड़ी ही देर में जो खाना यहां बना हुआ था उस की एक थाली अंदर टैंट में ले जाई गई और उस के बाद अनाउंसमैंट हुई, ‘‘बस्ती वालो, जो खाना आप लोगों के लिए बनवाया गया है, वही खाना नेताजी को भी दिया गया है, क्योंकि हमारे आदर्श नेता आप सब को अपना भाईबंधु मानते हैं, इसलिए वे भी आप के साथ ही बैठ कर खाना खाना चाहते थे.


‘‘मगर तबीयत खराब होने की वजह से उन का खाना अंदर ही दे दिया गया है और अब आप सब भी खाना शुरू करें. उस के बाद नेताजी खुद कर आप सब के उद्धार के बारे में चर्चा करेंगे.’’ सभी लोग यह सुनते ही खाने वाले पंडाल की तरफ टूट पड़े. आज जाने कितने सालों बाद इतने लजीज खाने की खुशबू सूंघी है. जैसे ही जनता खाने वाले स्टौल की तरफ लपकी, नेताजी का एक चमचा दौड़ कर नेताजी की कार में से टिफिन बौक्स निकाल लाया. हां, इस बस्ती में एक बंदा ऐसा था, जो थोड़ाबहुत सुनसुना कर टूटीफूटी इंगलिश ?ाड़ता था. उस ने नेताजी के बाशिंदे को टिफिन ले जाते देख करा झट से उसे दबोच लिया, ‘‘क्यों सरजी, बट इज इट…’’

‘‘नथिंग, नथिंग, जस्ट मैडिसन…’’
‘‘हांजीक्या बोले जी? अरे, हम पूछिंग, बट इज दिस…’’
‘‘ओह, इस टिफिन में साहब की दवाएं हैं. खाने के साथ लेनी होती हैं, इसलिए ले जा रहा हूं.’’
‘‘ओके, ओके, गो, गो…’’


आप समझ सकते हैं सबकुछ कि टिफिन में कौन दवाएं रखता है. अरे, नेताजी भला वह खाना खाएंगे जो आम लोगों के लिए लंगर चलवाया था? खैरभोजनपानी हो गया. सब लोग पंडाल में गए. नेताजी भी दांतों मेंसे कुछ फंसा हुआ चिकन का पीस
माचिस की तीली से निकालते हुए पधार रहे हैं. चमचों ने सब को शांत हो कर बैठने को कह दिया. सब लोग शांति से बैठ गए.


जिन के छोटे बच्चे थे, वे थोड़ा शोरशराबा करने लगे, तो नेताजी के चमचों ने फरमान सुनाया कि इन बच्चों को उन के दादादादी पंडाल के पीछे के हिस्से में खेलने के लिए ले जाएं, ताकि वे जवान लोगों को उन के उद्धार का तरीका अच्छे ढंग से सम? सकें. औरतें आगे और मर्द पीछे बैठ गए. नेताजी कि नजरें उद्धार करने लायक चेहरे खोजने लगीं. अब हुआ नेताजी का भाषण शुरू.


नेताजी ने सब की शिकायतें सुनीं और अपने एक चमचे को हुक्म दिया कि कागज पर सब की शिकायतें नोट कर लें, ताकि किसी की भी कोई समस्या रह जाए, जिस का समाधान हो. अब नेताजी ने सब को आश्वासन दिया कि सत्ता में आते ही सब की समस्या का समाधान किया जाएगा और इस बस्ती का उद्धार नेताजी कर के रहेंगे. नेताजी ने एक और बहुत बड़ी बात कह दी कि चाहे वे सत्ता में आएं या आएं, लेकिन इस बस्ती का उद्धार तो वे आज से करना शुरू करेंगे, क्योंकि यह बस्ती उन्हें अपने परिवार की तरह है.


जी हां, सामने छमिया जैसी कई सुंदरियां उन्हें अपनी ही लग रही थीं, इसलिए भाषण के बाद उन के टैंट में उन सुंदरियों की भीड़ लग गई, जिनजिन के नाम ले कर उद्धार के लिए बुलाया गया था. नेताजी उन सब सुंदरियों को शहर में अच्छी नौकरी, अच्छा रहनसहन, अच्छा खानपान और शहरी सलीका सिखाने के लिए साथ ले गए. 2 साल बाद छमिया जैसी सभी वे लड़कियां जिन का उद्धार करने के लिए ले जाया गया था, बस्ती में आईं. सब ने बेशकीमती कपड़े और गहने पहने हुए थे. हाथों में पान की छोटी सी डिबिया जिन में से वे पान निकाल कर मुंह में ठूंस कर इधरउधर पीक फेंक रही थीं. उन के परिवारजनों के पास छोटेछोटे पक्के मकान थे. बिजलीपानी की सुविधा थी.


दूसरे  झांपड़पट्टी वालों ने उद्धार की गुहार लगाई, तो उन्हें बताया गया कि शहर में केवल सुंदरियों को ही काम पर रखा जाता है. उन के द्वारा ही उन के परिवारों का उद्धार हो सकता है और इसलिए वे उद्धार करने के लिए ही दूसरी सुंदरियों को चुनने आई हैं.  Hindi Story 

लेखक प्रेम बजाज

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