Hindi Funny Story: मेरी गली का हीरो-एक मजनू की शामत

Hindi Funny Story: शाम हुई और हीरो जैसे कपड़े पहन कर, उन्हीं की तरह बनावसिंगार कर के वह मियां मजनू सड़क पर खड़ा नजर आने लगा.

कुछ दिनों तक मामला केवल नजरें फेंकने तक ही सिमटा रहा. एक दिन दिल पर हाथ रख कर वह आहें भी भरने लगे और फिर अपनी हथेली पर चुम्मा ले कर सुहानी की तरफ उछालने का सिलसिला भी उस ने शुरू कर दिया.

सुहानी उस मजनू की इन हरकतों के एवज में कभीकभी उस के सामने एकाध मुसकान भी फेंक देती थी. मुसकान पा कर तो वह निहाल हो जाता था. ठंडीठंडी आहें भरने लगता और दीवानगी की ढेर सी हरकतें करने लगता.

जब यह सिलसिला चलते हुए बहुत दिन हो गए, तो मुझे सड़क पर गोश्त और रोटी बेचने वाले नसीम भटियारे से कहना पड़ा, ‘‘नसीम चाचा, इन मियां मजनू को समझाओ, नहीं तो मैं बदनाम हो जाऊंगी.’’

नसीम भटियारा हंस कर बोला, ‘‘बेटी, ऐसी बात है, तो मैं कल ही उसे फटकारता हूं. नजारे तो मैं भी रोज ही देखता रहा हूं. मैं ने समझा था कि शायद ताली दोनों हाथ से बज रही है.’’

‘‘नहीं चाचा, भला ऐसे सड़कछाप मजनुओं से मेरा क्या लेनादेना,’’ सुहानी ने कहा.

दूसरे दिन सुहानी ने देखा कि जब उस का आशिक आए और खिड़की की तरफ मुंह कर के ‘दिल तड़प रहा है, आ भी जा…’ गाने पर ऐक्टिंग शुरू की तो नसीम भटियारे ने उसे समझाया, ‘‘जनाब, यह शरीफों का महल्ला है. यहां शरीफ औरतें रहती हैं. आप अपनी ये बेहूदा हरकतें कहीं और जा कर कीजिए.’’

शायद उस हीरो में दिलीप कुमार जाग उठा. वह उसी की तरह धीरे से बोला, ‘‘ऐ मुहब्बत के दुश्मन, तू नहीं जानता कि प्यार करना कोई बुरा काम नहीं है. मैं भी एक शरीफ घराने का लड़का हूं. तुम क्यों विलेन बनते हो? हटो, प्यार के रास्ते से हटो और अपनी गोश्तरोटी बेचो.’’

दूसरे दिन मेरे एक चचेरे भाई ने उसे समझाया, तो उस ने राजेश खन्ना की तरह कहा, ‘‘अरे बेवकूफ, प्यार करना या न करना, न तेरे बस में है, न मेरे बस में. प्यार तो ऊपर वाला कराता है. हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं, जो उसी के इशारे पर नाचती हैं.’’

सुहानी की गली के उस हीरो ने उस के बाद हर तरह के लोगों को कई सिनेमा हीरो के अंदाज में प्यार को सही बता कर चुप करा दिया और चलता बना.

वैसे, उसे रोकना जरूरी था, क्योंकि तब सुहानी की बदनामी तय लग रही थी. इसीलिए अपने एक अन्य चचेरे भाई से उसे कहना पड़ा. वह थोड़ा अक्खड़ मिजाज का था.

उस ने गली के उस हीरो को समझाते हुए कहा, ‘‘देख बे मजनू की औलाद, यहां मनमोहन नाम का एक लड़का तेरी तरह आशिकी बघारने आता था, हम ने उस की वह धुनाई की थी कि उस का नाम ही लोगों ने मनमोहन ‘घायल’ रख दिया. कल से अगर तू ने इस गली में कदम रखा, तो समझ ले

कि तेरे नाम के आगे भी ‘अधमरा’ या ‘अधकुचला’ लग जाएगा.’’

‘‘प्यार में तो लोग शहीद भी हो जाते हैं,’’ उस ने हंसते हुए कहा था.

सुहानी के उस चचेरे भाई को उस दिन एक जरूरी काम था, इसलिए उस दिन तो वह चला गया, लेकिन दूसरे दिन उस के अपने तकरीबन 20 साथियों के साथ गली के उस हीरो को उस समय घेर लिया, जब वह सुहानी की तरफ चुम्मा उछाल रहा था.

गली का वह हीरो इतनी भीड़ देख कर घबराया नहीं, बल्कि उस ने मुसकरा कर सुहानी की ओर देखा, फिर अपनी कमीज की बांहों को ऊपर की ओर खींचा.

शायद तब उस में धर्मेंद्र जाग उठा था. उस ने अपनी ओर बढ़ रही भीड़ में से एक के जबड़े पर हथौड़ा मार्का घूंसा जड़ दिया.

‘‘वाह…’’ सुहानी के मुंह से अचानक निकला, ‘‘सचमुच, धर्मेंद्री हथौड़ा है.’’

चोट खाने वाले लड़के के 2 दांत हथेली पर निकल आए थे. बेचारा कराह कर एक तरफ गिर पड़ा था. सुहानी को लगा कि ठीक हिंदी फिल्मों की तरह ही अब उस की गली का वह हीरो एकएक की धुनाई कर देगा, लेकिन हुआ उस का उलटा ही.

भीड़ में शायद इंकलाब जाग उठा था. उन सब ने एकएक ही हाथ उस पर चलाया. किसी ने जबड़े पर घूंसा मारा, तो किसी ने पेट पर या पीठ पर, कुछ लोगों ने लातें भी चलाई थीं.

इन सब का फल भी तब हिंदी फिल्मों के फल के उलटा निकला था. बेचारा वह… गली का हीरो सचमुच अधमरा हो गया था. उस की देह पर केवल जांघिया और बनियान ही नजर आ रहे थे.

‘‘यह सब क्या चल रहा है?’’ दारोगाजी ने प्रेमनाथ की तरह पूछा. वे उसी समय अपने एक दीवान और सिपाही के साथ उधर से गुजर रहे थे.

‘‘हुजूर…’’ दीवानजी और सिपाही के चेहरों को देखता हुआ नसीम भटियारा मुकरी की तरह मिमियाया, ‘‘यह रोटीसालन खा कर बिना पैसे दिए भाग रहा था. जब मेरे आदमियों ने इसे रोका, तो इस ने एक के 2 दांत तोड़ दिए. मेरे आदमी ने इसे पकड़ रखा था. बस, इतनी सी बात है हुजूर.’’

‘‘क्यों बे लफंगे की औलाद…’’ इस बार दारोगाजी अमरीश पुरी की तरह गुर्राए, ‘‘चोरी, ऊपर से सीनाजोरी,’’ फिर सिपाही की तरफ देख कर उन्होंने कहा, ‘‘इसे गिरफ्तार कर लो.’’

और सचमुच, सुहानी के गली के उस हीरो पर मुकदमा हो गया. गवाहों की क्या कमी थी. फिर उस ने जुर्म तो किया ही था, इसलिए बेचारे को सजा हो गई.

कुछ समय बाद सजा काट कर जब वह एक बार सुहानी की गली में गलती से चला आया, तो बच्चे उस के पीछे दौड़े, ‘अधमराजी… अधमराजी…’

तब वह बेचारा भाग खड़ा हुआ. वह फिर कभी सुहानी की गली में नहीं दिखा. Hindi Funny Story

Hindi Story: प्रिया-क्या हुआ था हेमंत के साथ

Hindi Story: हर रोज की तरह आज भी शाम को मर्सिडीज कार लखनऊ के सब से महंगे रैस्तरां के पास रुकी और हेमंत कार से उतर कर सीधे रैस्तरां में गया. वहां पहुंच कर उस ने चारों तरफ नजर डाली तो देखा कि कोने की टेबिल पर वही स्मार्ट युवती बैठी है, जो रोज शाम को उस जगह अकेले बैठती थी और फ्रूट जूस पीती थी. हेमंत से रहा नहीं गया. उस ने टेबिल के पास जा कर खाली कुरसी पर बैठने की इजाजत मांगी.

‘‘हां, बैठिए,’’ वह बोली तो हेमंत कुरसी पर बैठ गया. इस से पहले कि दोनों के बीच कोई बातचीत होती हेमंत ने उसे ड्रिंक औफर कर दिया.

‘‘नो, इस्ट्रिक्टली नो. आई डोंट टेक वाइन,’’ युवती ने विदेशी लहजे में जवाब दिया.

हेमंत को समझते देर नहीं लगी कि युवती विदेश में सैटल्ड है.

वह युवती का नाम जान पाता, इस से पहले युवती ने बात आगे बढ़ाई और बोली, ‘‘मैं कनाडा में सैटल्ड हूं. वहां वाइन हर मौके पर औफर करना और पीना आम बात है, लेकिन मैं अलकोहल से सख्त नफरत करती हूं.’’

‘‘आप का नाम?’’ हेमंत ने पूछा.

‘‘क्या करेंगे जान कर? मैं कुछ महीनों के लिए इंडिया आई हूं और थोड़े दिनों बाद वापस चली जाऊंगी. शाम को यहां आती हूं रिलैक्स होने के लिए. क्या इतना जानना आप के लिए काफी नहीं है?’’ युवती ने जवाब दिया और अपनी घड़ी देख उठने लगी.

‘‘प्लीज, कुछ देर बैठिए. मैं आप के साथ कुछ देर और बैठना चाहता हूं. मुझे गलत मत समझिए. आप के विचारों ने मुझे बहुत इंप्रैस किया है, प्लीज,’’ हेमंत ने कहा.

मौडर्न तरीके से साड़ी में लिपटी हुई उस युवती ने कुछ सोचा फिर बैठ गई और बोली, ‘‘मेरा नाम प्रिया है और मैं एनआरआई हूं. एक टीम के साथ गैस्ट बन कर इंडिया घूमने आई हूं. यहां लखनऊ में मेरे चाचा रहते हैं, इसलिए उन से मिलने आई हूं. मेरे पेरैंट्स वर्षों पहले कनाडा शिफ्ट कर गए थे. वहां वे सरकारी स्कूल में टीचर हैं.’’

इतना कह कर उस ने फिर चलने की बात कही तो हेमंत ने कहा, ‘‘चलिए मैं आप को चाचा के घर छोड़ देता हूं. मुझ पर विश्वास कीजिए और यकीन न हो तो अपने चाचा से इजाजत ले लीजिए. उन से कहिए कि सुपर इंडस्ट्रीज के मालिक की गाड़ी से घर आ रही हूं. सुपर इंडस्ट्रीज लखनऊ और पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है.’’

प्रिया ने उस से विजिटिंग कार्ड मांगा. उसे देखा फिर पर्स में रखा और उस के साथ चलने को राजी हो गई. गाड़ी में बैठते वक्त हेमंत अत्यधिक विचलित सा था. पता नहीं क्यों एक अनजान युवती को वह अपना समझने लगा था. शायद युवती के आकर्षक व्यक्तित्व व अंदाज से प्रभावित हो गया था. गाड़ी में हेमंत ने पारिवारिक बातें छेड़ीं और अपने परिवार और बिजनैस के बारे में बताता रहा. गाड़ी तो चल पड़ी, लेकिन जाना कहां है हेमंत को मालूम नहीं था. उस ने प्रिया से पूछा, ‘‘कहां जाना है?’’

‘‘अमीनाबाद,’’ प्रिया का संक्षिप्त जवाब था.

‘‘तुम्हारे चाचा क्या करते हैं?’’ हेमंत ने फिर सवाल किया.

प्रिया ने बताया कि उस के चाचा इरिगेशन डिपार्टमैंट में जौब करते हैं और अमीनाबाद में उन का फ्लैट है.

‘‘गाड़ी रोकिए , मेरा घर पास ही है,’’ प्रिया ने कहा.

हेमंत ने बड़ी विनम्रता से कहा, ‘‘चलिए घर तक छोड़ देता हूं.’’

‘‘नहींनहीं ठीक है. अब मैं खुद चली जाऊंगी,’’ प्रिया का जवाब था.

फिर मिलने की बात नहीं हो पाई. प्रिया कार से उतर कर रोड क्रौस कर के गायब हो गई. हेमंत उदास सा अपने घर की ओर चल पड़ा. गेट पर दरबान ने विस्मय से हेमंत की ओर देखा और बोला, ‘‘साहब, बड़ी जल्दी घर आ गए.’’ हेमंत बिना कुछ बोले गाड़ी पोर्टिको में रख कर बंगले में पहुंचा. मम्मी अपने कमरे में थीं. उस की इकलौती लाडली छोटी बहन ड्राइंगरूम में बैठ कर एक बुकलेट में हीरों का सैट देख कर पैंसिल से उन्हें टिक कर रही थी.

हेमंत ने पूछा, ‘‘क्या देख रही हो बिन्नी?’’

बिन्नी ने हेमंत के प्रश्न का उत्तर दिए बिना कहा, ‘‘भैया, आज जल्दी आ गए हो तो चलो हीरे का सैट खरीद दो. मेरा बर्थडे भी आ रहा है, वह मेरा गिफ्ट हो जाएगा.’’ हेमंत सोफे पर बैठा ही था कि हाउसमेड ऐप्पल जूस का केन और कुछ ड्राई फ्रूट्स ले कर आ गई. जूस पीते हूए हेमंत समाचारपत्र देखने लगा और बिन्नी से बोला, ‘‘जल्दी रेडी हो जाओ. चलो तुम्हारा सैट खरीद देता हूं.’’

वे डायमंड सैट खरीद कर लौट रहे थे तो बिन्नी ने हिम्मत जुटा कर अपने भैया से पूछा, ‘‘भैया, एक सैट तो मैं ने अपनी पसंद से खरीदा, लेकिन दूसरा सैट तुम ने अपनी पसंद से क्यों खरीदा?’’ हेमंत के पास तुरंत कोई जवाब नहीं था, वह बस मुसकरा कर रह गया. बिन्नी को लगा कि पैरेंट्स 2 वर्षों से जिस दिन का इंतजार कर रहे थे, संभवतया वह दिन आने वाला है. वरना दर्जनों विवाह के रिश्ते को ठुकराने के बाद भैया ने आज क्व18 लाख का डायमंड सैट क्यों खरीदा? जरूर आने वाली भाभी के लिए.

घर जा कर जब बिन्नी ने यह रहस्य खोला तो पूरे घर में उत्सव का माहौल हो गया. हाउसमेड ने मुसकराते हुए रात का खाना परोसा, तो कुक ने एक स्पैशल डिश भी बना डाली. खाना खा कर सभी हंसतेखिलखिलाते अपनेअपने कमरों में चले गए.

सुबह हुई तो हेमंत के डैडी ने कोई गाना गुनगुनाते हुए चाय की चुसकी ली, तो बिन्नी और उस की मम्मी ने दिन भर शादी की तैयारी पर बातचीत की. गैस्ट की लिस्ट भी जुबानी तैयार की.

फिर वही शाम, लखनऊ का वही रैस्तरां. लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी प्रिया नहीं आई, तो हेमंत उदास सा देर रात में अपने घर लौटा. अगली शाम कुछ देर के इंतजार के बाद प्रिया ने रैस्तरां में प्रवेश किया, तो हेमंत लगभग दौड़ता हुआ उस के पास गया और पूछा, ‘‘कल क्यों नहीं आईं?’’

‘‘क्या मेरे नहीं आने से आप को कोई प्रौब्लम हुई?’’ प्रिया ने उलटा सवाल किया.

हेमंत ने अपने दिल की बात कह डाली, ‘‘मुझे तुम्हारे जैसी लड़की की तलाश थी, जो मेरे लाइफस्टाइल से मैच करे और मेरी मां और बहन को पूरा प्यार दे सके. यह सिर्फ भारतीय मानसिकता वाली लड़की ही कर सकती है. सच कहूं, यदि तुम्हारी शादी नहीं हुई है तो समझो मैं तुम्हें अपनी बीवी मान बैठा हूं.’’

प्रिया ने प्रश्न किया, ‘‘बिना पूरी तहकीकात किए इतना बड़ा फैसला कैसे ले सकते हैं? आप मेरे नाम के सिवा और कुछ भी जानते हैं? आप के बारे में भी मुझे पूरी जानकारी हासिल नहीं है. मुझे अपने पेरैंट्स की भी सलाह लेनी है. जैसे आप अपने परिवार के बारे में सोचते हैं, वैसे ही मेरे भी कुछ सपने हैं, परिवार के प्रति जवाबदेही है. और इस की क्या गारंटी है कि शादी के बाद सब ठीकठाक होगा?’’

हेमंत ने प्रस्ताव रखा, ‘‘चलो मेरे घर, वहीं पर फैसला होगा.’’

प्रिया घर जाने को राजी नहीं हुई. उस का कहना था कि वह अपने चाचा के साथ उस के घर जा सकती है. कार में बैठ कर अगले दिन अपने चाचा को रैस्तरां में लाने का वादा कर प्रिया नियत मोड़ पर कार से उतर गई.

अगली शाम फिर वही रैस्तरां. प्रिया आज अत्यधिक स्मार्ट लग रही थी. साथ में एक 20-22 वर्ष का लड़का था, जिसे प्रिया ने अपना कजिन बताया. चाचा के बारे में सफाई दी कि चाचा अचानक एक औफिस के काम से चेन्नई चले गए हैं, सप्ताह भर बाद लौटेंगे. हेमंत चुप रहा, लेकिन प्रिया उस के दिलोदिमाग में इस कदर छा गई थी कि वह एक कदम भी पीछे नहीं हटने को तैयार नहीं था. घर में पूरी तैयारी भी हो चुकी थी, ऐसे में उस ने मौके को हाथ से जाने देने को मुनासिब नहीं समझा.

प्रिया और उस के कजिन को ले कर हेमंत अपने घर पहुंच गया. बिन्नी और उस की मां ने घर के दरवाजे पर आ कर दोनों का स्वागत किया. बिन्नी प्रिया का हाथ पकड़ कर अंदर ले गई.

सीधीसाधी किंतु स्मार्ट युवती को देख कर सभी खुश थे पर हेमंत के डैडी इतनी जल्दी फैसला लेने को तैयार नहीं थे. लेकिन हेमंत, बिन्नी और पत्नी के आगे उन की एक न चली. हेमंत की मां बहू पाने की लालसा में अत्यंत उत्साहित थीं. हेमंत द्वारा खरीदा हुआ क्व18 लाख का हीरे का सैट प्रिया को मुंह दिखाई में दे दिया गया. मंगनी की चर्चा होने पर प्रिया ने कहा कि मंगनी 1 महीने बाद की जाए, क्योंकि मेरे पेरैंट्स अभी इंडिया नहीं आ सकते. वैसे मां से मेरी बात हुई है. मां ने मुझ से कह दिया है कि मेरी पसंद उन सब की पसंद होगी.

हेमंत को एक बिजनैस ट्रिप में विदेश जाना था. उस ने इच्छा जताई कि मंगनी की रस्म जल्दी संपन्न कर दी जाए. परिवार वालों ने हामी भर दी, तो मंगनी की तारीख 2 दिन बाद की तय हो गई. फाइव स्टार होटल के अकबर बैंक्वैट हौल में हेमंत का परिवार और तकरीबन 100 गैस्ट आए. प्रिया पर सभी मेहमानों ने भेंट स्वरूप गहनेऔर कैश की वर्षा कर दी. हेमंत ने हीरे की अंगूठी पहनाई, तो प्रिया ने भी एक वजनदार सोने की अंगूठी हेमंत को पहनाई. हेमंत की मां ने फिर क्व25 लाख का हीरों का सैट दिया. डिनर के बाद सभी गैस्ट बधाई देते हुए एकएक कर के विदा हो गए, तो दस्तूर के अनुसार बिन्नी और उस की मां ने गहनों और कैश का आकलन किया. लगभग क्व5 लाख कैश और क्व85 लाख मूल्य के गहने भेंट स्वरूप प्राप्त हुए थे. बिन्नी मुबारकबाद देते हुए प्रिया से गले मिली और एक पैकेट में पैक कर के गिफ्ट उस के हाथों में थमा दिया. हमेशा की तरह हेमंत ने अपने ड्राइवर को प्रिया मैडम को घर तक छोड़ने की हिदायत दी और गार्ड को भी साथ जाने का हुक्म दिया. फिर अगले दिन लंच साथ करने का औफर देते हुए प्रिया को विदा किया. अगली सुबह ब्रेकफास्ट के बाद हेमंत ने औफिस पहुंच कर जल्दी काम निबटाया. औफिस स्टाफ ने बधाइयां दीं और मिठाई की मांग की. तो हेमंत पार्टी का वादा कर प्रिया के घर की ओर चल पड़ा. 20-25 मिनट बाद अमीनाबाद पहुंच कर ड्राइवर ने वहां गाड़ी रोक दी जहां हर बार प्रिया उतरती थी और हेमंत से सवाल किया, ‘‘अब किधर जाना है, साहब?’’

‘‘प्रिया मैडम के घर चलो,’’ हेमंत ने ड्राइवर की ओर देख कर कहा.

‘‘साहब, मैडम रोज यहीं उतर जाती थीं. कहती थीं कि लेन के अंदर कार घुमाने में प्रौब्लम होगी,’’ ड्राइवर ने जवाब दिया.

‘‘अरे, बुद्धू, तुम रोज मैडम को यहीं सड़क पर उतार देते थे. मंगनी की रात गार्ड को भी भेजा था. वह जरूर साथ गया होगा, उसे फोन लगाओ,’’ हेमंत गरजा.

गार्ड बंगले की ड्यूटी पर था. उस ने जवाब दिया, ‘‘मैं ने बहुत जिद की पर मैडम बोलती रहीं कि वे खुद चली जाएंगी. उन के हुक्म और जिद के आगे हमारी कुछ नहीं चली.’’

हेमंत जोर से चिल्लाया, ‘‘बेवकूफ, मैं ने तुम्हें मैडम की सिक्यूरिटी के लिए भेजा था और तुम ने उन्हें आधे रास्ते पर छोड़ कर अकेले जाने दिया? मैं तुम दोनों की छुट्टी कर दूंगा.’’ हेमंत ने अब प्रिया को फोन किया लेकिन उस का स्विच औफ मिला. उस ने अपने औफिस पहुंच कर फिर फोन लगाया. इस बार प्रिया का रेस्पौंस आया. वह धीमी आवाज में बोली, ‘‘मेरे कजिन की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई है. उसे डाक्टरअभी देख रहे हैं. मैं रात में बात करती हूं,’’ इतना कह कर प्रिया ने मोबाइल का स्विच औफ कर दिया.

हेमंत की रात बैचेनी से कटी. अगली सुबह मौर्निंग जौगिंग छोड़ कर हेमंत अमीनाबाद की ओर चल पड़ा. मंगनी के 36 घंटे बीत चुके थे. प्रिया से पूरी तरह संपर्क टूट चुका था. ड्राइवर ने जिस गली को प्रिया मैडम के घर जाने का रास्ता बताया था, दिन के उजाले में हेमंत अनुमान से उस जगह पर पहुंच गया और कार को रुकवा फुटपाथ पर चाय की दुकान पर चाय पीने लगा. हेमंत को हर हाल में आज प्रिया से मिलना था, अत: उस ने चाय वाले से हुलिया बताते हुए पूछताछ की. बाईचांस चाय वाले ने प्रिया को 2 बार कार से उतरते देखा था, लेकिन उस ने भी निराशाजनक जवाब दिया.उस ने हेमंत को बताया, ‘‘आप ने जो हुलिया बताया वैसे हुलिए की अनेक महिलाएं हैं और रात में देखे गए चेहरे की पहचान करना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन एक बात पक्की है कि जिस गाड़ी से 2 बार मैं ने उन्हें उतरते देखा, यह वही गाड़ी है जिस से आप आए हैं.’’

हेमंत पैदल चलते हुए गली में प्रवेश कर गया. सुबह का समय था इसलिए प्राय: हर कोई घर में ही था. कुछ लोगों ने प्रिया नाम सुन कर कहा कि इस नाम की किसी लड़की को नहीं जानते, लेकिन एक पढ़ेलिखे नेता टाइप के मौलवी साहब ने जो बातें हेमंत को बताईं, उसे सुन कर हेमंत के पैरों तले मानो जमीन खिसक गई. मौलवी साहब ने कहा, ‘‘बेटे, इस गली में या तो मजदूर या छोटीमोटी नौकरी करने वाले लोग रहते हैं. यहां कभी भी किसी एनआरआई या आप के बताए हुए हुलिए की युवती को कभी नहीं देखा गया है. यह गली जहां खत्म होती है उस से आगे रिहाइशी इलाका भी नहीं है, आप गलत जगह आ गए हैं.’’

हेमंत को महसूस होने लगा कि उस के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है. उस के पास प्रिया के घर के पते के नाम पर सिर्फ अनजान गली की जानकारी भर थी. हेमंत वहां से निकल कर रैस्तरां की ओर चल पड़ा. रैस्तरां में अभी साफसफाई चल रही थी, किंतु हेमंत साहब को सुबहसुबह देख कर सारा स्टाफ बाहर आ गया. हेमंत को वहां जो जानकारी मिली उस ने उस की शंका को हकीकत में बदल दिया. सिक्यूरिटी गार्ड ने बताया कि वे मैडम जब पहली दफा रैस्तरां आई थीं, तब उन्होंने मुझ से पूछा कि सुपर इंडस्ट्रीज वाले हेमंत रस्तोगी कौन हैं? मैं ने आप की ओर इशारा किया था. इस के बाद आप दोनों को साथसाथ निकलते देखा तो हम सब यह समझे कि आप लोग एकदूसरे को जानते हैं.

हेमंत सुन कर लड़खड़ा सा गया, तो स्टाफ ने मिल कर उसे संभाला. हेमंत को प्रिया का तरीका समझ में आ गया था. पूरी योजना बना कर और एक अच्छे होमवर्क के साथ हेमंत को टारगेट बना कर उस के साथ फ्रौड किया गया था. हेमंत संभल कर कार में बैठा और घर जा कर सभी को यह कहानी सुनाई. अपने घबराए हुए बेटे को आराम की सलाह दे कर हेमंत के पापा सिटी एसपी के औफिस पहुंच गए. एसपी ने ध्यान से सारी बातें सुनीं, इंगैजमैंट की तसवीर रख ली और दूसरे दिन आने के लिए कहा. एसपी के कहने पर प्रिया के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई.

अगले दिन हेमंत और उस के डैडी सिटी एसपी के औफिस पहुंचे, तो उन्होंने बताया कि दिल्ली क्राइम ब्रांच से खबर मिली है कि इस सूरत की एक लड़की हिस्ट्री शीटर है. फोटो की पहचान पर दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से पता चला है कि बताई गई मंगनी की तारीख के दूसरे दिन वह युवती कनाडा के लिए रवाना हो गई है. यह भी पता चला कि यह युवती बीचबीच में इंडिया आती है और अपना नाम बदल कर विभिन्न शहरों में ऐसा फ्रौड कर के सफाई से विदेश भाग जाती है. एक बार तो जयपुर में शादी रचा डाली और सारा सामान ले कर चंपत हो गई. लेकिन अब वह बच नहीं पाएगी, क्योंकि मैं ने रैडअलर्ट की सिफारिश कर दी है. अगली बार इंडिया आते ही पकड़ी जाएगी. हेमंत को अब यह बात समझ में आ गई कि उस युवती ने कजिन की बीमारी के नाम पर संपर्क तोड़ा और आसानी से भाग निकली.

हेमंत के डैडी ने एसपी साहब से पूछा कि आगे क्या होगा? तो उन्होंने कहा कि अगर लड़की पकड़ी गई तो पहचान के लिए पुलिस थाने आना होगा और केस चलने पर कोर्ट में भी आना होगा. कई तारीखों पर गवाह के रूप में आना आवश्यक होगा. इन सब से पहले तफतीश के समय पुलिस के सामने बयान देना होगा और अपने गवाहों के बयान भी दर्ज कराने पड़ेंगे. हेमंत के डैडी ने टिप्पणी की, ‘‘यानी अपने बिजनैस से टाइम निकाल कर कोर्टकचहरी और पुलिस के चक्कर लगाने होंगे.’’ एसपी साहब ने मुसकरा कर कहा, ‘‘ये तो कानून से जुड़ी बातें हैं. इन का पालन तो करना ही होगा.’’

अब हेमंत ने मुंह खोला और बोला, ‘‘लाखों का फ्रौड और कोर्टकचहरी की दौड़ भी. नुकसान तो बस हमारा ही है.’’ एसपी ने दोबारा पुलिस के संपर्क में बने रहने की बात कही और हेमंत के डैडी से हाथ मिला कुरसी से खड़े हो गए. हेमंत के हिस्से में अब पछतावे और अफसोस के सिवा कुछ भी नहीं बचा था.

अमीर युवकों को अपने हुस्न के जाल में फंसा कर उन्हें लाखों की चपत लगाना और बच निकलना प्रिया का यही काम था. लेकिन जब उस ने हेमंत को अपना शिकार बनाया.

Hindi Story: एक अच्छा दोस्त-काश सब दिन एक जैसे होते

Hindi Story: सतीश लंबा, गोरा और छरहरे बदन का नौजवान था. जब वह सीनियर क्लर्क बन कर टैलीफोन महकमे में पहुंचा, तो राधा उसे देखती ही रह गई. शायद वह उस के सपनों के राजकुमार सरीखा था.

कुछ देर बाद बड़े बाबू ने पूरे स्टाफ को अपने केबिन में बुलाकर सतीश से मिलवाया.

राधा को सतीश से मिलवाते हुए बड़े बाबू ने कहा, ‘‘सतीश, ये हैं हमारी स्टैनो राधा. और राधा ये हैं हमारे औफिस के नए क्लर्क सतीश.’’

राधा ने एक बार फिर सतीश को ऊपर से नीचे तक देखा और मुसकरा दी.

औफिस में सतीश का आना राधा की जिंदगी में भूचाल लाने जैसा था. वह घर जा कर सतीश के सपनों में खो गई. दिन में हुई मुलाकात को भूलना उस के बस में नहीं था.

सतीश और राधा हमउम्र थे. राधा के मन में उधेड़बुन चल रही थी. उसे लग रहा था कि काश, सतीश उस की जिंदगी में 2 साल पहले आया होता.

राधा की शादी 2 साल पहले मोहन के साथ हुई थी. वह एक प्राइवेट कंपनी में असिस्टैंट मैनेजर था. घर में किसी चीज की कमी नहीं थी, मगर मोहन को कंपनी के काम से अकसर बाहर ही रहना पड़ता था. घर में रहते हुए भी वह राधा पर कम ही ध्यान दे पाता था.

यों तो राधा एक अच्छी बीवी थी, पर मोहन का बारबार शहर से बाहर जाना उसे पसंद नहीं था. मोहन का सपाट रवैया उसे अच्छा नहीं लगता था. वह तो एक ऐसे पति का सपना ले कर आई थी, जो उस के इर्दगिर्द चक्कर काटता रहे. लेकिन मोहन हमेशा अपने काम में लगा रहता था.

अगले दिन सतीश समय से पहले औफिस पहुंच गया. वह अपनी सीट पर बैठा कुछ सोच रहा था कि तभी राधा ने अंदर कदम रखा.

सतीश को सामने देख राधा ने उस से पूछा, ‘‘कैसे हैं आप? इस शहर में पहला दिन कैसा रहा?’’

सतीश ने सहज हो कर जवाब दिया, ‘‘मैं ठीक हूं. पहला दिन तो अच्छा ही रहा. आप कैसी हैं?’’

राधा ने चहकते हुए कहा, ‘‘खुद ही देख लो, एकदम ठीक हूं.’’

इस के बाद राधा लगातार सतीश के करीब आने की कोशिश करने लगी. धीरेधीरे सतीश भी खुलने लगा. दोनों औफिस में हंसतेबतियाते रहते थे.

हालांकि औफिस के दूसरे लोग उन की इस बढ़ती दोस्ती से अंदर ही अंदर जलते थे. वे पीठ पीछे जलीकटी बातें भी करने लगे थे.

राधा के जन्मदिन पर सतीश ने उसे एक बढि़या सा तोहफा दिया और कैंटीन में ले जा कर लंच भी कराया.

राधा एक नई कशिश का एहसास कर रही थी. समय पंख लगा कर उड़ता गया. सतीश और राधा की दोस्ती गहराती चली गई.

राधा शादीशुदा है, सतीश यह बात बखूबी जानता था. वह अपनी सीमाओं को भी जानता था. उसे तो एक अजनबी शहर में कोई अपना मिल गया था, जिस के साथ वह अपने सुखदुख की बातें कर सकता था.

सतीश की मां ने कई अच्छे रिश्तों की बात अपने खत में लिखी थी, मगर वह जल्दी शादी करने के मूड में नहीं था. अभी तो उस की नौकरी लगे केवल 8 महीने ही हुए थे. वह राधा के साथ पक्की दोस्ती निभा रहा था, लेकिन राधा इस दोस्ती का कुछ और ही मतलब लगा रही थी.

राधा को लगने लगा था कि सतीश उस से प्यार करने लगा है. वह पहले से ज्यादा खुश रहने लगी थी. वह अपने मेकअप और कपड़ों पर भी ज्यादा ध्यान देने लगी थी. उस पर सतीश का नशा छाने लगा था. वह मोहन का वजूद भूलती जा रही थी.

सतीश हमेशा राधा की पसंदनापसंद का खयाल रखता था. वह उस की हर बात की तारीफ किए बिना नहीं रहता था. यही तो राधा चाहती थी. उसे अपना सपना सच होता दिखाई दे रहा था.

एक दिन राधा ने सतीश को डिनर पर अपने घर बुलाया. सतीश सही समय पर राधा के घर पहुंच गया.

नीली जींस व सफेद शर्ट में वह बेहद सजीला जवान लग रहा था. उधर राधा भी किसी परी से कम नहीं लग रही थी. उस ने नीले रंग की बनारसी साड़ी बांध रखी थी, जो उस के गोरे व हसीन बदन पर खूब फब रही थी.

सतीश के दरवाजे की घंटी बजाते ही राधा की बांछें खिल उठीं. उस ने मीठी मुसकान बिखेरते हुए दरवाजा खोला और उसे भीतर बुलाया.

ड्राइंगरूम में बैठा सतीश इधरउधर देख रहा था कि तभी राधा चाय ले कर आ गई.

‘‘मैडम, मोहनजी कहां हैं? वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे,’’ सतीश ने पूछा.

राधा खीज कर बोली, ‘‘वे कंपनी के काम से हफ्तेभर के लिए हैदराबाद गए हैं. उन्हें मेरी जरा भी फिक्र नहीं रहती है. मैं अकेली दीवारों से बातें करती रहती हूं. खैर छोड़ो, चाय ठंडी हो रही है.’’

सतीश को लगा कि उस ने राधा की किसी दुखती रग पर हाथ रख दिया है. बातोंबातों में चाय कब खत्म हो गई, पता ही नहीं चला.

राधा को लग रहा था कि सतीश ने आ कर कुछ हद तक उस की तनहाई दूर की है. सतीश कितना अच्छा है. बातबात पर हंसतामुसकराता है. उस का कितना खयाल रखता है.

तभी सतीश ने टोकते हुए पूछा, ‘‘राधा, कहां खो गई तुम?’’

‘‘अरे, कहीं नहीं. सोच रही थी कि तुम्हें खाने में क्याक्या पसंद हैं?’’

सतीश ने चुटकी लेते हुए जवाब दिया, ‘‘बस यही राजमा, पुलाव, रायता, पूरीपरांठे और मूंग का हलवा. बाकी जो आप खिलाएंगी, वही खा लेंगे.’’

‘‘क्या बात है. आज तो मेरी पसंद हम दोनों की पसंद बन गई,’’ राधा ने खुश होते हुए कहा.

राधा सतीश को डाइनिंग टेबल पर ले गई. दोनों आमनेसामने जा बैठे. वहां काफी पकवान रखे थे.

खाते हुए बीचबीच में सतीश कोई चुटकुला सुना देता, तो राधा खुल कर ठहाका लगा देती. माहौल खुशनुमा हो गया था.

‘काश, सब दिन ऐसे ही होते,’ राधा सोच रही थी.

सतीश ने खाने की तारीफ करते हुए कहा, ‘‘वाह, क्या खाना बनाया है, मैं तो उंगली चाटता रह गया. तुम इसी तरह खिलाती रही तो मैं जरूर मोटा हो जाऊंगा.’’

‘‘शुक्रिया जनाब, और मेरे बारे में आप का क्या खयाल है?’’ कहते हुए राधा ने सतीश पर सवालिया निगाह डाली.

‘‘अरे, आप तो कयामत हैं, कयामत. कहीं मेरी नजर न लग जाए आप को,’’ सतीश ने मुसकरा कर जवाब दिया.

सतीश की बात सुन कर राधा झम उठी. उस की आंखों के डोरे लाल होने लगे थे. वह रोमांटिक अंदाज में अपनी कुरसी से उठी और सतीश के पास जा कर स्टाइल से कहने लगी, ‘‘सतीश, आज मौसम कितना हसीन है. बाहर बूंदों की रिमझिम हो रही है और यहां हमारी बातोें की. चलो, एक कदम और आगे बढ़ाएं. क्यों न प्यारमुहब्बत की बातें करें…’’

इतना कह कर राधा ने अपनी गोरीगोरी बांहें सतीश के गले में डाल दीं. सतीश राधा का इरादा समझ गया. एक बार तो उस के कदम लड़खड़ाए, मगर जल्दी ही उस ने खुद पर काबू पा लिया और राधा को अपने से अलग करता हुआ बोला, ‘‘राधाजी, आप यह क्या कर रही हैं? क्यों अपनी जिंदगी पर दाग लगाने पर तुली हैं? पलभर की मौजमस्ती आप को तबाह कर देगी.

‘‘अपने जज्बातों पर काबू कीजिए. मैं आप का दोस्त हूं, अंधी राहों पर धकेलने वाला हवस का गुलाम नहीं.

‘‘आप अपनी खुशियां मोहनजी में तलाशिए. आप के इस रूप पर उन्हीं का हक है. उन्हें अपनाने की कोशिश कीजिए,’’ इतना कह कर सतीश तेज कदमों से बाहर निकल गया.

राधा ठगी सी उसे देखती रह गई. उसे अपने किए पर अफसोस हो रहा था. वह सोचने लगी, ‘मैं क्यों इतनी कमजोर हो गई? क्यों सतीश को अपना सबकुछ मान बैठी? क्यों इस कदर उतावली हो गई?

‘अगर सतीश ने मुझे न रोका होता तो आज मैं कहीं की न रहती. बाद में वह मुझे ब्लैकमेल भी कर सकता था. मगर वह ऐसा नहीं है. उस ने मुझे भटकने से रोक लिया. कितना महान है सतीश. मुझे उस की दोस्ती पर नाज है.’

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें