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Honor Killing :  दिल दहलाने  वाली वारदात

Honor Killing. एक 6 साल के बच्चे के दिमाग में एक ऐसी बात घर कर चुकी थी, जो समय के साथसाथ नासूर बन चुकी थी. फिर एक दिन उस ने इतना बड़ा और कड़ा फैसला लिया कि किसी की दुनिया ही उजड़ गई.

32 साल की वसीमा अपने पति इरशाद और 3 बच्चों के साथ गौतमपुरी इलाके में रहती थी. इरशाद फल बेचता था. वसीमा के मायके वाले दिल्ली के ही जाफराबाद इलाके में रहते थे. वैसे, वे उत्तर प्रदेश के मेरठ इलाके से थे.

शुक्रवार, 17 जुलाई को पुलिस ने बताया कि रात के तकरीबन सवा 8 बजे सूचना मिली कि गौतमपुरी की गली नंबर-17 में एक लड़के मोहम्मद अनस ने वसीमा को गोली मार दी है.

पुलिस मौके पर पहुंची तो वसीमा खून से लथपथ पड़ी थी. उस के सीने में गोली लगी थी. उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, पर वहां डाक्टरों ने उसे मरा हुआ बता दिया.

इधर, इस वारदात के कुछ ही देर बाद जाफराबाद थाने के हैड कांस्टेबल नफीस गश्त पर थे. चौहान बांगर की गली नंबर-10 में उन्हें एक लड़का भागता हुआ दिखाई दिया. रोक कर तलाशी लेने पर उस के पास से एक देशी पिस्टल और 6 कारतूस बरामद हुए.

पूछताछ में उस लड़के की पहचान मोहम्मद अनस निवासी सरधना गांव मेरठ के रूप में हुई. उस ने स्वीकार किया कि उस ने अपनी बहन वसीमा की गौतम पुरी के घर में गोली मार कर हत्या की है.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि वसीमा पहले भी एक बार प्रेम प्रसंग के चलते घर छोड़ कर चली गई थी, लेकिन कुछ समय बाद लौट आई थी. इस के बाद वह दूसरी बार घर से चली गई और इरशाद नामक लड़के से लव मैरिज कर ली.

वसीमा के इस कदम से अनस बेहद नाराज था. इसी वजह से उस ने बहन की हत्या की साजिश रची. वह मेरठ से देशी पिस्तौल और कारतूस ले कर दिल्ली आया और मौका मिलते ही बहन को गोली मार दी.

पुलिस हैरान है कि जिस समय वसीमा ने लव मैरिज की थी, उस समय आरोपित अनस सिर्फ 6 साल का था. अनस ने पुलिस को बताया कि बचपन से ही वह यह सुनता आया था कि बहन के लव मैरिज करने से परिवार को गांव में बेइज्जती का सामना करना पड़ा.

इस के चलते उस ने इस वारदात को अंजाम दिया. Honor Killing

Honor Killing : बेटी के प्रेमी को दी मौत

Honor Killing. अब तक यही समझा जाता रहा है कि कब कोई लड़का या लड़की अपनी मरजी से किसी दूसरे धर्म या जाति में शादी कर ले तो समाज में अपनी साख बचाने की खातिर उन के परिवार वाले लड़की या लड़की को पहले समझाते हैं और अगर नतीजा मनमुताबिक न आए तो हत्या करने जैसा बड़ा जुर्म भी कर बैठते हैं. ऐसा ही कुछ साल 2023 में हुआ था, जिस का अदालत का फैसला अब आया है.

यह मामला बुलंदशहर के डिबाई थाना क्षेत्र के गांव दौरऊ का है, जहां 23 साल के किशन उर्फ कालू का अपने ही पड़ोसी महेश कुमार की बेटी रजनी से पिछले 4 साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था.

आज से तकरीबन 3 साल पहले 27 या 28 मार्च, 2023 की रात को तकरीबन 1 बजे किशन अपनी प्रेमिका रजनी से मिलने उस के घर गया था, लेकिन इसी दौरान रजनी के पिता महेश, भाई सोनू उर्फ संतोष और राजू ने उसे देख लिया. बस, फिर क्या था. गुस्से से तिलमिलाए उन तीनों ने किशन को बंधक बना कर बैल्ट और लाठीडंडों से अधमरा होने तक पीटा.

अपनी खुंदक उतारने के बाद उन आरोपियों ने किशन के परिवार को बुला कर उसे सौंप दिया. पिता भोजराज सिंह उसे घर ले कर आए.

परिवार के मुताबिक, दर्द से कराह रहे किशन ने पिता से पानी मांगा और सो गया, पर सुबह के तकरीबन 6 बजे अचानक उस की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. एक लोकल डाक्टर को बुलाया गया, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि सुबह के साढ़े 6 बजे किशन की मौत हो गई.

यह मामला कोर्ट में गया और अब सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रवेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि एडीजे कोर्ट अनूपशहर के न्यायाधीश राजेश कुमार (तृतीय) ने गवाहों और पुख्ता सुबूतों के आधार पर तीनों आरोपियों को कुसूरवार पाया. कोर्ट ने उन्हें धारा 304 (भाग-1) में उम्रकैद और धारा 323/34 में 1-1 साल की सजा सुनाई. जुर्माना न देने पर कुसूरवारों को अतिरिक्त जेल काटनी होगी.

अदालत ने बेटी के प्रेमी की बेरहमी से पीटपीट कर हत्या करने के मामले में लड़की के पिता और उस के 2 भाइयों को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है. कोर्ट ने तीनों दोषियों पर 51-51 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

Crime Story: हाथरस में औनर किलिंग-सैनिक को दी प्यार की सजा

Crime Story: जगह थी उत्तर प्रदेश की हाथरस और तारीख थी 5 फरवरी, 2026. दोपहर के तकरीबन 3 बजे सादाबाद कोतवाली इलाके के आगराअलीगढ़ नैशनल हाईवे पर चंद्रा हाउस के पास एक सैनिक की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. एक इको कार और बाइक सवार हमलावरों ने भारतीय सेना के सैनिक की कार को घेर लिया था और इस के बाद उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी.


इस तरह अचानक हमला हुआ तो वह सैनिक अपनी जान बचाने के लिए भागा, लेकिन हमलावरों ने दौड़ादौड़ा कर उसे गोलियों से भून दिया. उस सैनिक का नाम अखिलेश चौधरी था जो गांव समदपुर का रहने वाला था और हाथरस कोर्ट में पेशी से वापस लौट रहा था. पुलिस ने इस हत्याकांड को सुलझाने में तेजी दिखाई और मारे गए सैनिक अखिलेश चौधरी की पत्नी की बूआ के 2 बेटों को गिरफ्तार किया. दरअसल, सैनिक अखिलेश चौधरी ने अपने गांव की ही एक लड़की से लवमैरिज की थी. इस बात से लड़की के परिवार वाले उन की जान के दुश्मन बन गए थे. इस के बाद यह कांड हो गया.


हाथरस पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों बौबी उर्फ विशाल और राजा उर्फ राहुल के पास से 2 तमंचे, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई एक इको कार बरामद की. पुलिस की पूछताछ के दौरान इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले आरोपियों ने खुलासा किया कि फौजी अखिलेश चौधरी ने उन के परिवार की एक लड़की से लव मैरिज की थी. इस के चलते परिवार की समाज में बेइज्जती हो रही थी. इस बदनामी का कलंक मिटाने के लिए उन्होंने अखिलेश चौधरी की हत्या की योजना बनाई.


मारे गए सैनिक अखिलेश चौधरी की बहन ने 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, जबकि पत्नी निधि ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर सादाबाद कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे. निधि ने पुलिस की मिलीभगत से उस के पति हत्या का आरोप लगाया था. सैनिक अखिलेश चौधरी की बहन ने तो प्रदेश सरकार से अपील भी की कि उस के भाई की हत्या करने वालों के घरों पर बुलडोजर चला दिया जाए.    

 

Hindi Story: अपना खयाल रखना अब्बू

Hindi Story: लखनऊ छोड़ कर गाजियाबाद में नौकरी करने आई सना का सामना मिस्टर कुमार से हुआ जो उस का बौस था. एक दिन कुमार ने उसे अपने घर बुला कर धोखे से उस की इज्जत लूट ली. सबा को अपने बीमार अब्बू का खयाल आया. क्या वह हालात को संभाल पाई?

जिंदगी में चाहे जितनी बार भी इंटरव्यू दिया जाए, हर बार घबराहट होना लाजिमी ही है. यही हाल सना का भी था. आज गाजियाबाद के ‘ओरियन मौल’ में उस का इंटरव्यू था.
सना ने हलके आसमानी रंग का सूट पहना था और अपने बालों को खुला रहने दिया था. होंठों पर नैचुरल कलर की लिपस्टिक लगा कर उस ने अपनेआप को देखा, तो अपनी खूबसूरती पर रश्क किए बिना न रह सकी.


कैब में बैठने के ठीक 30 मिनट के बाद ही सना ‘ओरियन मौल’ के सामने थी. कैब का भुगतान करने के बाद सना उस मौल के मौडर्न गेट से अंदर दाखिल हुई. अभी सुबह के 10 ही बज रहे थे. मौल में भीड़भाड़ का आना अभी शुरू नहीं हुआ था. भीतर चारों तरफ रूम फ्रैशनर की खुशबू फैली हुई थी. सना ने अपनी नजरें दौड़ाईं, तो पाया कि इस मौल की विशालता और खूबसूरती के आगे वे सब मौल और शोरूम फीके हैं, जिन में वह पहले काम कर चुकी है. सना ने 5वें फ्लोर पर जाने के लिए लिफ्ट का बटन दबाया. कुछ ही सैकंड्स के बाद लिफ्ट खुल गई. ट्रांसपेरेंट लिफ्ट ऊपर जा रही थी और सना अपनी उत्सुकता भरी नजरों से चारों तरफ मौल की भव्यता को देख रही थी.


5वें फ्लोर पर लिफ्ट खुली तो सना ने देखा कि फ्लोर के एक कोने पर मार्बल का बड़ा सा काउंटर बना हुआ है जिस के पीछे एक दुबलीपतली सी खूबसूरत रिसैप्शनिस्ट बैठी हुई है. सना ने आत्मविश्वास भरे लहजे में उस से बात शुरू की, ‘‘गुड मौर्निंग मैम, आज मु?ो अकाउंट औफिसर के इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है.’’ सना की बात आगे सुनने से पहले ही वह रिसैप्शनिस्ट मुसकराई और उस ने एक बटन दबा कर चपरासी को बुलाया और सना के लिए कौफी लाने को कहा. थोड़ी देर में ही कौफी भी आ गई.
दिव्या नाम की उस रिसैप्शनिस्ट ने सना को एक ओर रखे सोफे पर बैठने और कौफी पीने का इशारा किया, तो सना  ‘थैंक्स’ कह कर कौफी पीने लगी.


कौफी खत्म करते ही सना तेजी से उठ कर रिसैप्शनिस्ट के पास पहुंची तो रिसैप्शनिस्ट ने सना को बताया कि उस का इंटरव्यू आज नहीं हो पाएगा, क्योंकि अकाउंट मैनेजर कुमार सर बाहर गए हुए हैं और उन की गैरमौजूदगी में किसी का भी इंटरव्यू नहीं हो सकता. सना को पूरे 2 दिन का इंतजार करना होगा. सना बु?ो मन से अपने होटल में लौट गई और अपनी खिसियाहट और थकान मिटाने के लिए एक शावर लिया और कमरे में ही पिज्जा मंगवा कर खाया और मोबाइल साइलैंट मोड पर लगा कर सो गई. जब सना जागी तो मोबाइल में अब्बू की 3 मिस कौल्स थीं. सना ने ?ाट से अब्बू को फोन मिलाया. अब्बू सना का हालचाल और खैरियत जानना चाह रहे थे.


सना ने अपनी बातों से अब्बू को निश्चिंत कर दिया था कि वह ठीक है और अपना ध्यान खुद रख सकती है.
अब्बू ने फोन अम्मी को पकड़ा दिया तो अम्मी की वही पुरानी नसीहतें फिर से शुरू हो गई थीं, ‘‘जमाना बहुत खराब है. आदमी की जात पर कभी भरोसा मत करना और देर रात तक घर के बाहर रहना बिलकुल ठीक नहीं.’’ सना मुसकरा रही थी और अम्मी की हर बात का जवाब देते जा रही थी. बातचीत के बाद सना ने फोन रखा और खाना खाने के लिए बाहर गई और अगले 2 दिन उस ने घूमनेफिरने में बिताए और वह सुबह भी आ ही गई जब सना को अपना इंटरव्यू देने जाना था. अगली सुबह सना रिसैप्शनिस्ट दिव्या से जा कर मिली.


दिव्या ने एक मुसकराहट से सना का स्वागत किया और उसे बताया कि आज सना को निराश नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि कुमार सर आ गए हैं और थोड़ी देर में अपने औफिस में आ जाएंगे, तब तक सना को उन का इंतजार करना होगा. सना एक ओर रखे सोफे में धंस गई थी. थोड़ी देर बाद दिव्या ने सना को आ कर बताया कि कुमार सर अपने छठी मंजिल पर बने औफिस में आ चुके हैं और सना अब जा कर इंटरव्यू दे सकती है. सना लिफ्ट ले कर छठे फ्लोर पर पहुंची. लिफ्ट से बाहर निकल कर बाईं तरफ एक शानदार केबिन बना हुआ था जिस के बाहर कुमार के नाम की नेम प्लेट लगी हुई थी. सना ने धड़कते दिल से दरवाजा खोला और बोली, ‘‘सर, क्या मैं अंदर आ सकती हूं?’’


सना के सामने एक 30-32 साल का आदमी बैठा हुआ था, जो अपनेआप को काफी बिजी दिखा रहा था. उस की टेबल पर 2 लैपटौप रखे हुए थे, जिन पर वह बारबार नजरें गड़ा रहा था. ‘‘मैं ने आप का बायोडाटा देखा, काफी अच्छी परफौर्मैंस रही है आप की,’’ मिस्टर कुमार के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर सना खुश हुई. ‘‘पर एक बात नहीं सम?ा आई?’’ सना मिस्टर कुमार के इस सवाल से थोड़ा ठिठक गई. मिस्टर कुमार ने सना से यह जानना चाहा कि वह तो रहने वाली लखनऊ की है और लखनऊ में न तो शौपिंग मौल्स की कमी है और न तो अकाउंट से रिलेटेड किसी भी काम की, तो फिर उसे लखनऊ छोड़ कर गाजियाबाद क्यों आना पड़ा?


‘‘जी ,दरअसल, गाजियाबाद में मेरे कुछ दोस्त और कई रिश्तेदार रहते हैं. वे बता रहे थे कि बड़ी जगह काम करने से एक्सपोजर ज्यादा मिलता है और फिर जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए बहुत सी बातों को छोड़ना पड़ता हैं. और फिर मेरे अब्बू की किडनी में इंफैक्शन है, जिस के कारण उन का इलाज काफी महंगा है. पैसे की जरूरत भी मेरे यहां आने की एक वजह है,’’ सना ने जवाब दिया. कुछ और औपचारिक सवाल पूछने के बाद मिस्टर कुमार ने सना से बाहर इंतजार करने को कहा. सना बाहर आ कर बैठ गई, पर अब उसे अच्छा नहीं लग रहा था. पता नहीं उसे यह नौकरी मिले भी या न मिले, पर सना की यह सोच जल्द ही खत्म हो गई जब मिस्टर कुमार ने सना को अंदर बुलाया और उस को बधाई देते हुए कहा कि उसे अकाउंट औफिसर की जौब के लिए रख लिया गया है और वह कल से ही काम पर आ सकती है. सना ने कैब बुला ली और होटल में वापस आ गई. आते ही उस ने एक पीजी रूम खोजना शुरू कर दिया. औफिस से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर पीजी रूम मिला.


सना ने अगले दिन से ही औफिस जौइन कर लिया. कुमार सर के ठीक बगल में सना का केबिन था. वह मेहनत और लगन से काम करती थी और सारे खर्चे और पैसों के लेनदेन का पूरा हिसाब रखती थी.
उस दिन जब सना औफिस से घर जाने के लिए निकली तभी कुमार भी अपनी कार पार्किंग से निकाल कर आ रहा था. सना को देख कर उस ने कार रोकी और अंदर आने का इशारा किया. सना पहले तो हिचकिचाई पर फिर कार के अंदर बैठ गई. कुमार ने सना से उस के पीजी रूम का पता पूछा तो सना ने पता बताया. कुमार सना से कहने लगा कि उस का पीजी तो औफिस से बहुत दूर पड़ता है.
‘‘जी सर, औफिस के आसपास तो पीजी रूम मैं अफोर्ड नहीं कर सकती.’’ बदले में कुमार मुसकरा दिया था. इस के बाद कुमार सना को कार से उस के पीजी पर छोड़ने लगा. एक दिन कुमार ने सना से पास ही बनी सिविल लाइंस कालोनी के उस के फ्लैट में चल कर एक कप कौफी पीने को कहा, तो सना को तनिक
भी हिचकिचाहट नहीं हुई.


सिविल लाइंस एक बेहद शानदार कालोनी थी, जिस के अंदर मौल, जिम, स्विमिंग पूल जैसी कई सुविधाएं
मुहैया थीं. कुमार का 3 कमरों का फ्लैट देख कर सना को अजीब सा जरूर लगा कि अकेले आदमी के लिए तो एक कमरे का फ्लैट ही काफी होगा, फिर 3 कमरे का खासा बड़ा फ्लैट क्यों ले रखा है?
इतने में कुमार खुद ही कौफी बना कर ले आया था और सना से कौफी पीने को कहा और खुद मोबाइल पर दूसरे कमरे में जा कर बात करने लगा. जब तक कुमार आया, तब तक सना कौफी पी चुकी थी. कुमार सना को देख कर मुसकराए जा रहा था. सना ने कुछ देर बाद ही महसूस किया कि उस का सिर भारी हो रहा है और आंखों के सामने धुंधलापन छा रहा है. सना को तेज़ी से नींद आ रही थी.


सना की बेहोशी कब टूटी उसे पता नहीं था. उसे इतना जरूर सम?ा आ गया था कि उस के बदन से उस के कपड़े गायब हैं और पास में ही कुमार भी बिना कपड़ों के बेशर्मी से लेटा हुआ था. ‘‘तुम भी और लोगों की तरह नीच और कमीने निकले. मैं चुप नही बैठूंगी, बल्कि पुलिस में तुम्हारी रिपोर्ट करूंगी,’’ सना चीख रही थी. कुमार ने मुसकराते हुए सना की तरफ मोबाइल की स्क्रीन घुमा दी, जिस में एक वीडियो क्लिपिंग चल रही थी जिस में कुमार सना के नंगे जिस्म से खेल रहा था. सना अचकचा कर रह गई, ‘‘नहीं… इसे डिलीट करो.’’ कुमार पर सना की बात का कोई असर नहीं हुआ क्योंकि अब तो उस के हाथ में तुरुप का पत्ता लग गया था, जिसे वह इस्तेमाल कर के सना को जब चाहे तब मजबूर कर सकता था.


कुमार पर भरोसा करना सना को बहुत भारी पड़ गया था और अब तो उस क्लिपिंग के बल पर कुमार उसे ब्लैकमेल करेगा और सना का अंदाजा सही था. आने वाले दिनों में कुमार लगातार सना को वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर उस से शारीरिक संबंध बनाता रहा. करीब 2 महीने हो चुके थे. इस बीच कुमार ने कई बार सना को ब्लैकमेल किया. पर उस दिन सना को पता नहीं क्या हुआ कि वह कुमार के औफिस में जा कर रोने और गिड़गिड़ाने लगी, ‘‘प्लीज, आप को जो करना था आप मेरे साथ कर चुके हैं अब तो वह क्लिप डिलीट कर दीजिए, नहीं तो खुदकुशी करना ही मेरे लिए आखिरी उपाय रह जाएगा.’’ सना को इस तरह रोता देख कर कुमार का मन भर आया और उस ने अपने मोबाइल से वह क्लिप सना को सैंड कर दी और तुरंत ही अपने मोबाइल से डिलीट भी कर दी.


सना के मन से मानो बहुत भारी बो?ा उतर गया था. उस की न्यूड क्लिप डिलीट हो चुकी थी और अब कुमार उसे ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा, पर ऐसा सोचना सना की गलतफहमी थी. 2 दिन के बाद कुमार का फोन फिर आया और उस ने सना को अपने फ्लैट पर बुलाया और न आने पर क्लिप को वायरल करने और औफिस में सब को उन के नाजायज रिश्ते की बात बता देने की धमकी देने लगा. ‘‘पर अब तुम मु?ो ब्लैकमेल नहीं कर सकते. वह क्लिप तो तुम ने डिलीट कर दी थी,’’ सना ने तीखी आवाज में कहा तो कुमार ठहाके मार कर हंसने लगा और कुटिल अंदाज में उस ने बताया कि सना जैसी खूबसूरत लड़की के नंगे जिस्म के साथ गुजारे हुए पलों की वीडियो की एक नहीं, बल्कि कई कौपी रखी जाती हैं और इतना कह कर कुमार ने सना की एक और वीडियो क्लिप उसे सैंड कर दी.


सना यह देख कर हैरान थी कि यह वीडियो क्लिप उस की बेहोशी वाले दिन की नहीं है, बल्कि बाद के किसी दिन ही है, जो कमरे में छिपे हुए कैमरे से शूट की गई है और ऐसी न जाने कितनी वीडियो क्लिप उस के पास होंगी और उन के बल पर वह न जाने कितने दिनों तक उस का शोषण करता रहेगा…
अब तो सना को नौकरी छोड़ कर लखनऊ वापस चले ही जाना चाहिए. पर तब भी तो कुमार उस का पीछा नहीं छोड़ेगा… तो क्या खुदकुशी करना ही आखिरी उपाय है? पर तब अम्मीअब्बू क्या सोचेंगे? और फिर उन के बुढ़ापे में उन का साथ कौन देगा? सना परेशान होती जा रही थी   और कुमार के लगातार आते फोन और मैसेज उसे और भी परेशान कर रहे थे. सना पिछले 4 दिन से औफिस भी नहीं गई थी और मन ही मन उस ने यह फैसला ले लिया था कि अब कुमार उसे लगातार ब्लैकमेल करता रहेगा, इसलिए उस के लिए इस्तीफा दे कर वापस जाना ही ठीक रहेगा, बाद में जो होगा वह देखा जाएगा.


सना ने तुरंत ही अपने लैपटौप पर इस्तीफा टाइप किया और अपना सामान पैक करने लगी. उस ने आननफानन में  कैब बुला कर गाजियाबाद छोड़ने की तैयारी कर ली थी. कैब में बैठ कर सना ने राहत की सांस ली. वह सोच रही थी कि स्टेशन पर पहुंच कर अपना इस्तीफा कंपनी को सैंड कर देगी. सना की कैब सिविल लाइंस वाले इलाके से निकल रही थी. वह एक अजीब सी उल?ान से भर उठी थी. उस ने नजरें नीची कर लीं और जल्दी से स्टेशन पहुंच जाने के बारे में सोचने लगी, पर लाल बत्ती के चलते कैब रुकी, तो सना ने अपने अगलबगल की गाडि़यों पर नजर डाली. सना ने तभी देखा कि बगल वाली गाड़ी में कुमार अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ बैठा हुआ था. कुमार अपने बीवीबच्चे के साथ बहुत खुश नजर आ रहा था, पर यह कुमार की पत्नी है या कोई और, सना सम?ा नहीं पाई.

कुछ सोच कर सना ने रिसैप्शनिस्ट दिव्या को फोन लगाया और बातोंबातों में कुमार के शादीशुदा होने के बारे में जानकारी मांगी, तो उसे पता चला कि कुमार ने उस से अविवाहित होने का ?ाठ बोला था. सच तो यह था कि उस का एक बच्चा भी है और उस की पत्नी सरकारी नौकरी में है और उस के पास गाजियाबाद आती रहती है. सना के चेहरे पर कई रंग आते और जाते रहे. इस दौरान ड्राइवर ने स्टेशन पर जा कर कैब रोक दी, पर सना उतरी नहीं, बल्कि उस ने कैब वापस ले चलने को कहा और कुछ देर बाद एक बार फिर से सना पीजी रूम में वापस आ चुकी थी. सना अगले 2-3 दिन तक औफिस नहीं गई. इस बीच कुमार ने भी उसे कोई फोन नहीं किया.


उस दिन कुमार बहुत खुश था, क्योंकि उस के बेटे का बर्थडे था. कुमार शाम को जल्दी घर वापस आ गया था. घर को उस की पत्नी ने पूरी तरह से सजा दिया था, पर कुमार यह देख कर बुरी तरह चौंक गया था कि उस की पत्नी के साथ सना भी उस के काम में हाथ बंटा रही थी. कुमार सवालिया नजरों से सना की तरफ देखे जा रहा था. बदले में सना सिर्फ मुसकराए जा रही थी. ‘‘इन से मिलो, ये सना हैं. मार्केट में मिली तो दोस्ती हो गई. अभी थोड़ी परेशान हैं, क्योंकि इन का बौस इन्हें तंग कर रहा है. मेरे हिसाब से ऐसे बौस को तो जेल में होना चाहिए… आप बैठिए, मैं चाय ले कर आती हूं,’’ कुमार की पत्नी एक सांस में कह गई थी.
कुमार को सना पर बहुत गुस्सा आ रहा था, लेकिन वह नौर्मल रहने का दिखावा करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता था. सना बच्चे के केक कटने तक वहां रुकी रही थी. कुमार ने देखा कि उस का बेटा भी सना से बहुत लगाव दिखा रहा था.


अगले दिन सना औफिस भी गई थी और अपना काम कर रही थी. कुमार ने उसे फोन कर के बुलाया.
‘‘मेरे घर क्यों गई थी?’’ गुस्से से कुमार ने पूछा. ‘‘मैं तो इस से पहले भी कई बार आप के घर जा चुकी हूं और आप के बिस्तर पर सो भी चुकी हूं… भूल गए क्या आप?’’ सना ने यह बात कुछ इस ढंग से कही थी कि कुमार को मिर्ची सी लग गई थी. सना अपनी कुरसी से उठ कर बात करने लगी थी, ‘‘अगर आप यह सोचते हैं कि मेरा न्यूड वीडियो वायरल कर के आप मु?ो अब भी ब्लैकमेल कर सकते हैं, तो ऐसा सोचना छोड़ दें, क्योंकि अब वे वीडियो मेरे मोबाइल पर भी आप मु?ो भेज चुके हैं,’’ सना ने कहा तो कुमार को याद आया कि उस के मोबाइल पर कुमार ने ही तो वीडियो क्लिप भेजी थी, ताकि सना डर जाए.


सना ने आगे यह भी कहा कि कुमार ने अगर उसे ब्लैकमेल किया, तो वह खुद औफिस में सब को वह न्यूड वीडियो दिखा देगी क्योंकि उस वीडियो में कुमार भी तो न्यूड ही नजर आ रहा है और अगर बेइज्जती सना की होगी तो कुमार की भी तो बेइज्जती होगी और यह भी शक किया जाएगा कि इस तरह न जाने कितनी लड़कियों का यौन शोषण किया होगा कुमार ने. इस के बाद सना यह वीडियो मीडिया में दे देगी और कुमार पर नशा दे कर रेप करने का आरोप लगाएगी. और तो और अब तो कुमार की पत्नी भी यहां पर है. सोचो जरा जब कुमार की पत्नी अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ ऐसी हालत में देखेगी, तो उस पर क्या गुजरेगी? ‘‘इसलिए मिस्टर कुमार, अब यह सना तुम्हारी धमकियों से नहीं डरेगी, बल्कि अब तुम्हें मु?ा से डरना होगा, क्योंकि यह वीडियो में तुम्हारी पत्नी को सैंड करने जा रही हूं,’’ मोबाइल हाथ में घुमाते हुए सना ने कहा.

कुमार थूक निगल रहा था. उसे सना की आंखों में चिनगारियां और आवाज में कठोरता सम?ा में आ गई थी. वह सम?ा गया था कि सना की उंगली की एक थिरकन उस के बसेबसाए घर को उजाड़ सकती है और उस के औफिस में बनी इमेज को मिट्टी में मिला सकती है. और हो सकता है कि सना इस वीडियो के सहारे उसे जेल की हवा भी खिला दे. कुमार एकदम से सना के पैरों में गिर गया था, ‘‘मु?ो माफ कर दो. मु?ा से गलती हो गई. मैं अभी तुम्हारी सारी वीडियो डिलीट करता हूं, बस तुम मेरी पत्नी से यह सब मत बताना,’’ कहते हुए कुमार ने अपने मोबाइल और लैपटौप से सना के सारे न्यूड वीडियो डिलीट कर दिए थे.
सना की मांग पर कुमार ने उसे नौकरी में प्रमोशन और डबल इंक्रीमैंट भी दे दिया था.

सना मुसकरा रही थी. उस ने मजबूरी में कुमार के आगे घुटने तो टेक दिए थे, मगर ठंडे दिमाग और शातिराना चाल चल कर उस ने अपनेआप को दलदल में गिरने से बचा लिया था. सना का फोन बजा तो उस ने देखा कि अब्बू की वीडियो काल थी. सना रिलैक्स हो कर अब्बूअम्मी से बात कर रही थी, ‘‘यहां सब ठीक है अब्बू. आप की बेटी अपना ध्यान रख सकती है. आप लोग अपना खयाल रखना.’’ सना अब सच में अपना ध्यान रख सकती थी.  Hindi Story                 

Politics: तेजप्रताप यादव की ‘घर वापसी’ की अटकलें तेज

Politics:  राजद ने हाल ही बिहार विधानसभा चुनाव में मुंह की खाई है. इस की एक बड़ी वजह लालू  यादव के परिवार में टूट होना भी थी. पर अब उन के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने पार्टी और परिवार से निकाले जाने के 8 महीने बाद  दिल्ली में अपने पिता लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की. यह मुलाकात तेजप्रताप यादव की बड़ी बहन और सांसद मीसा भारती के आवास पर हुई. उन्होंने अपने पिता और बहन को भोज में आने का निमंत्रण भी दिया था.

इस दौरान तेजप्रताप यादव का सामना अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव से भी हुआ था. दरअसल, तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव दोनों रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले मामले में हो रही सुनवाई के दौरान दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई.

आप को बता दें कि तेजप्रताप यादव ने 1 जनवरी, 2026 को अपनी माता राबड़ी देवी के 67वें जन्मदिन पर 10, सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी निवास पहुंच कर सब को चौंका दिया था.

तेजप्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया पर 2 तसवीरें शेयर की थीं. पहली पोस्ट में वे अपनी मां के साथ केक काटते दिखे और दूसरी तस् वीर पुरानी है जिस में पूरा परिवार एकसाथ दिख रहा है. उन्होंने इस के साथ एक बहुत ही भावुक करने वाला पोस्ट लिखा था.

तेजप्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘मां, आप मेरी सब से बड़ी प्रेरणा हैं. जन्मदिन की बधाई. मां, आप हमारे परिवार की आत्मा हैं. हर हंसी, हर प्रार्थना, हर उस पल के पीछे आप ही हैं जो घर जैसा लगता है. यह जिंदगी जो हम जीते हैं – गर्मजोशी भरी, अधूरी, प्यार से भरी हुई, यह सब आप की वजह से है. आप ने इसे तब संभाला जब हमें पता भी नहीं था कि संभालना क्या होता है. आप मेरी सब से बड़ी प्रेरणा हैं. आप ने बिना कुछ गिने दिया, बिना किसी शर्त के प्यार किया, और तब भी मजबूत बनी रहीं जब किसी ने नहीं देखा कि यह कितना मुश्किल था…’

इन तमाम घटनाक्रमों से राजनीतिक गलियारों में तेजप्रताप यादव की ‘घर वापसी’ की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. बता दें कि पिछले साल से ही तेजप्रताप यादव का परिवार से अलगाव जगजाहिर है. 2025 में कथित प्रेमिका अनुष्का यादव के साथ की तसवीर वायरल हुई तो लालू प्रसाद यादव ने उन्हें पार्टी और परिवार से बेदखल कर दिया था. लालू प्रसाद यादव ने अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को कथिततौर पर पार्टी और परिवार का मुखिया चुन लिया है. इस से राजनीतिक मतभेद बढ़े और व्यक्तिगत मुद्दों ने परिवार को बांट दिया. सियासी विरासत की लड़ाई भी सार्वजनिक तौर पर दिखी, मगर अब इन नई तसवीरों ने फिर से नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या लालू परिवार एक होने जा रहा है.Politics

Sexual Blackmailing: प्रोफैसर का बनाया न्यूड वीडियो

Sexual Blackmailing: छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में कुछ लोगों ने एक प्रोफैसर को धोखे से अगवा कर उस का न्यूड वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी. इतना ही नहीं, उन्होंने प्रोफैसर से 25 लाख रुपए की फिरौती भी मांगी. खास बात यह है कि इस कांड में ब्लैकमेलिंग गैंग का मास्टरमाइंड सीएफ का एक जवान भी निकला.

लूटपाट, अपहरण और फिरौती के इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों पर बीएनएस की धारा 140(2), 308(2), 309(6), 61(2) के तहत केस दर्ज कर जेल भेज दिया. पकड़े गए इन आरोपियों में करन दिनकर, अरुण मनहर, श्यामजी सिन्हा, कार्तिकेश्वर रात्रे शामिल रहे. वहीं नाबालिग को बाल सुधारगृह में भेज दिया गया. ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहे गैंग सरगना सीएफ जवान के पास पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई एक बाइक और 5 मोबाइल फोन भी जब्त किए. Sexual Blackmailing

Honour Killing: शव से शादी – औनर किलिंग का नतीजा

Honour Killing: आंचल सक्षम की लाश के पास जा बैठी और और उस के खून से अपनी मांग भर ली. शरीर पर हलदी लगाई, दुलहन की तरह घूंघट किया और ऐलान कर दिया कि ‘आज से मैं इस घर की बहू हूं’.

20 साला सांवलीसलोनी आंचल मामिलवाड निहायत ही नाजुक, मासूम और खूबसूरत लड़की थी, जिसे देख कर लगता है कि खुद एआई ने फुरसत में उसे अपने टूल्स से गढ़ा है. महाराष्ट्र के नांदेड़ की रहने वाली आंचल का गुनाह इतना भर था कि हिंदू होते हुए भी उसे एक ऐसे 21 साला लड़के सक्षम ताते से इश्क हो गया था, जो बौद्ध धर्म को मानने वाला था.

बौद्ध धर्म यानी वह धर्म जो हिंदू धर्म में पसरे जातपांत, जातिगत भेदभाव, ब्राह्मणों के कर्मकांडों, धर्म की बिना पर शोषण और खासतौर से छुआछूत के खिलाफ गौतम बुद्ध ने खड़ा किया था, जिस के मानने वालों की तादाद आज करोड़ों में है.

इन करोड़ों में ज्यादातर एससी जातियों के लोग हैं, जिन्होंने धार्मिक घुटन और शोषण से छुटकारा पाने के लिए बौद्ध धर्म की राह पकड़ी.

इन्हीं करोड़ों में से एक था नांदेड़ का ही रहने वाला नौजवान सक्षम ताते जो उन वंचितों में से एक था, जिन के घर राम, कृष्ण या शंकर की नहीं, बल्कि बुद्ध, भीमराव अंबेडकर और ज्योतिबा फुले जैसी हस्तियों की तसवीरें टंगी रहती थीं.

जिन के घर रामायण या गीता नहीं, बल्कि संविधान नाम की वह किताब रहती थी, जिस ने पहली दफा आदमी को आदमी होने का कानूनी हक दिया था और धार्मिक जकड़न से आजादी दिलाई थी. लेकिन आजादी के इतने सालों बाद भी समाज कितनी शिद्दत से धार्मिक बंदिशों में जकड़ा हुआ है, यह आंचल और सक्षम की लव स्टोरी से पता चलता है.

2022 ए लव स्टोरी

आंचल और सक्षम दोनों मामूली खातेपीते घरों के थे, जिन्हें कोई 3 साल पहले इश्क हो गया था. अपने प्यार को उन्होंने जितना मुमकिन हो सका छिपा कर रखा, क्योंकि दोनों को इस बात का एहसास था कि आंचल के घर वाले आसानी से तो क्या मुश्किल से भी उन की शादी के लिए तैयार नहीं होंगे, इसलिए वे समझदार और जागरूक प्रेमियों की तरह पहले अपना कैरियर बनाने की सोच रहे थे.

आंचल बीएससी फर्स्ट ईयर की स्टूडैंट थी, जिस का सपना आईएएस अफसर बन जाने का था. इस काम में सक्षम उस की पूरी मदद भी कर रहा था और उस का उत्साह भी बढ़ाता रहता था.

हालांकि, सक्षम खुद ज्यादा पढ़लिख नहीं पाया था. वजह थी बुरी संगत. पैसा कमाने के लिए वह छोटेमोटे जुर्म करने लगा था और इस काम में उस के सहयोगी आंचल के दोनों भाई और पिता थे. इस नाते उसे आंचल के घर आनेजाने में कोई दिक्कत पेश नहीं आती थी.

लेकिन घर वालों के सामने मिलते वक्त वे दोनों यह एहतियात बरतते थे कि जबान पर दिल की बात न आने पाए. अपनी फीलिंग्स शेयर करने के लिए दोनों दुनियाभर के प्रेमियों की तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते थे.

गलत नहीं कहा जाता कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते. यही इन दोनों के साथ हुआ.

जब आंचल के घर वालों को इस का पता चला तो उन्होंने धूर्तता से काम लेते हुए आंचल को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह सक्षम के खिलाफ झूठी रिपोर्ट लिखा दे.

आंचल चूंकि उस वक्त नाबालिग थी, इसलिए वह पिता और भाइयों की जज्बाती बातों, जो एक तरह से इमोशनल ब्लैकमेलिंग थी, में आ कर तैयार हो गई.

मामला थाने से होता हुआ कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन इस दौरान आंचल बालिग हो गई और उसे इस बात का भी एहसास हो गया कि वह वाकई में सक्षम से सच्चा प्यार करने लगी है, इसलिए उस ने अदालत में बयान बदल दिए, जिस से सक्षम बरी हो गया.

लेकिन जाति, समाज और धर्म की अदालत के कहर से तो अच्छेअच्छे नहीं बच सके, तो इन दोनों की बिसात क्या थी, जिन्हें यह तो एहसास था कि ये दुनिया उन्हें मिलने नहीं देगी, लेकिन इस हकीकत से वे मुंह मोड़े रहते हैं कि इस के लिए वह ऐसेऐसे हथकंडे अपनाती है कि खुद को स्मार्ट समझने वाले प्रेमी अगर सीधे तरीके से रास्ते पर न आएं, तो उन्हें या उन में से किसी एक को ऊपर का टिकट कटा देने से भी नहीं हिचकते.

ये वे लोग हैं जिन्हें अपनी औलाद से ज्यादा प्यारे वे उसूल होते हैं, जिन्हें अपनी आजादी और इच्छाओं से ज्यादा आजिज धार्मिक गुलामी होती है और जिन की बुनियाद ही इस शर्त पर रखी गई है कि कोई अपनी मरजी से प्यार और शादी न करे, नहीं तो इन की तो दुकानें ही बंद हो जाएंगी.

तो एक दिन 27 नवंबर, 2025 की शाम सक्षम की हत्या हो गई यानी एक और औनर किलिंग हो गई (इस विषय पर सरस सलिल के नवंबर, द्वितीय अंक में एक कवर स्टोरी औनर किलिंग पर प्रकाशित की गई है, जिस में औनर किलिंग से ताल्लुक रखते तमाम पहलुओं पर बारीकी से जानकारी दी गई है. यह अंक सभी को खासतौर से नौजवानों को तो जरूर पढ़ना चाहिए कि इस पत्रिका ने इस सामाजिक बुराई के खिलाफ आवाज उठाई है).

हत्यारे भी कोई और नहीं, बल्कि आंचल के भाई हिमेश, साहिल और पिता गजानन मामिलवाड और उन के गिरोह के कुछ सदस्य थे. 27 नवंबर को इन्होंने रेकी करते हुए सक्षम का रास्ता रोका और और उसे गोली मार दी. कहीं गोली खा कर भी वह जिंदा न बच जाए, इस तसल्ली के लिए उस के सिर पर भारी पत्थर पटक दिया.

हल्ला मचा तो पुलिस हरकत में आई और चंद घंटों में ही आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए, लेकिन बकौल आंचल इन्हीं पुलिस वालों में से 2 ने उस के भाइयों को यह कहा था कि बारबार रिपोर्ट लिखाने से तो अच्छा है कि तुम सक्षम को मार ही डालो.

दरअसल, में हत्या वाले दिन ही दोनों भाई आंचल को थाने ले गए थे और उस पर दबाव बना रहे थे कि वह सक्षम के खिलाफ एक बार और रिपोर्ट लिखा दे, लेकिन प्यार में पड़ी आंचल ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था.

तय है कि तब आंचल को यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि ये लोग उस के आशिक का काम ही तमाम कर देंगे.

आशिक की लाश से शादी

जैसे ही औनर किलिंग की इस घटना की खबर आम हुई, तो नांदेड़ समेत पूरे महाराष्ट्र में इस का हल्ला मच गया. आंचल पर तो मानो पहाड़ टूट पड़ा था, जो एक तरह से शादी के पहले ही भाइयों और पिता द्वारा विधवा बना दी गई थी.

काफी देर सकते की सी हालत में रहने के बाद उस ने जो फैसला लिया, उस ने वाकई प्यार करने वालों और प्यार की राह में अड़ंगा डालने वालों के सामने एक मिसाल कायम कर दी. लव स्टोरी का ऐसा क्लाइमैक्स किसी ने न तो देखा था और न ही सुना था.

आंचल सीधे सक्षम के घर गई और उस की लाश देख कर फूटफूट कर रो पड़ी. यह उस के प्रेमी की ही नहीं, बल्कि सपनों और अरमानों की भी लाश थी.

जितने सपने उस ने आने वाली जिंदगी, घरगृहस्थी और कैरियर को ले कर सजाए थे, वे सब एक झटके में इज्जत के पैरोकारों ने अपनी झूठी शान के लिए खाक में मिला दिए थे.

उसे अब याद आ रहा था कि जब पिता के यह कहने पर कि सक्षम छोटी जाति का है उस से तुम्हारी शादी नहीं हो सकती तो वह चौंक गई थी कि हमारे सपनों और जिंदगी का जाति और धर्म से क्या ताल्लुक?

सक्षम ‘जय रामजी’ की बजाय ‘जय भीम’ बोलता है, तो इस से घर वालों और दूसरे हिंदुओं को दिक्कत क्या और फिर खुद वह और उस के घर वाले ओबीसी कैटेगिरी में आते हैं, उन्हें भी ऊंची जाति वाले हिंदू हिकारत से ही देखते हैं. इस के बाद भी उस के और अपने प्यार की खातिर सक्षम बौद्ध धर्म छोड़ कर हिंदू धर्म अपनाने के लिए राजी हो गया था, लेकिन इन दरिंदों को कोई रहम नहीं आया.

ऐसी कई बातें सोचतेसोचते आंचल सक्षम की लाश के पास जा बैठी और और उस के खून से अपनी मांग भर ली. शरीर पर हलदी लगाई, दुलहन की तरह घूंघट किया और ऐलान कर दिया कि ‘आज से मैं इस घर की बहू हूं और जिंदगीभर यहीं रहूंगी. अब बाकी जिंदगी मैं सक्षम के सपने पूरे करूंगी जो उस ने मेरे लिए देखे थे’.

यह नजारा देख कर वहां मौजूद लोग सदमे की सी हालत में आ गए और भावुक भी हो उठे, क्योंकि प्यार का ऐसा रूप वे सभी पहली दफा देख रहे थे.

जब पुलिस आई तो आंचल ने काफी सारी बातें उसे बताईं और हत्यारे पिता और भाइयों के लिए फांसी की सजा की मांग की.

सजा तो उन्हें होगी लेकिन जो सजा वे आंचल को दे गए हैं उस की भरपाई अब नामुमकिन है.

ऐसे मामले देशभर में रोजाना होते हैं, जिन में धर्म, जाति और सामाजिक इज्जत के नाम पर किसी आंचल और किसी सक्षम के ख्वाव फना हो रहे होते हैं.

ऐसे जोड़ों को चाहिए कि वे बिना किसी की परवाह किए स्पैशल मैरिज ऐक्ट 1954 के तहत शादी कर लें जो हर जाति और धर्म के लोगों को आपस में शादी करने की सहूलियत देता है.

मैरिज अफसर के यहां से निकलने के बाद ऐसे जोड़ों को तुरंत ही पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की भी गुहार लगानी चाहिए और शादी में मीडिया वालों को भी बुलाना चाहिए.

इस पर भी अगर खतरा लगे, तो अपनीअपनी जाति के सामाजिक संगठन वालों को बुलाना चाहिए, जो आधुनिक हों, रूढि़यों से लड़ सकते हों और दबंगों का खौफ न खाते हों. Honour Killing

Hindi Crime Story: बायोडाटा चिपकाने वाला गैंगस्टर हुआ ढेर

Hindi Crime Story: ‘सिग्मा’ का मतलब है, जो अपनी मरजी से काम करता है और सामाजिक बंधनों से भी खुद को अलग रखने की कोशिश करता है. वह भीड़ की बजाय अपनी कंपनी में रहना पसंद करता है. पर ‘सिग्मा एंड कंपनी’ गिरोह बनाने वाले रंजन पाठक को लोगों में दहशत फैलाने के बाद अपना प्रचार करने का जुनून था. तभी तो ‘सिग्मा एंड कंपनी’ गिरोह अपने शिकार को गिन कर 6 गोली मारता था. हत्या के बाद उस के ठिकाने, मकान या दुकान पर अपना बायोडाटा भी चिपका देता था.

पर अब ‘सिग्मा एंड कंपनी’ गिरोह का सरगना रंजन पाठक इस दुनिया में नहीं है. दिल्ली के रोहिणी इलाके में बुधवार, 22 अक्तूबर की देर रात बिहार पुलिस और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जौइंट टीम ने एक बड़ा आपरेशन अंजाम दिया.

इस ऐनकाउंटर में बिहार के 4 मोस्ट वांटेड गैंगस्टर ढेर हो गए थे. मरने वालों में गैंग सरगना रंजन पाठक भी शामिल था, जिस पर हत्या, रंगदारी और लूट जैसे कई गंभीर मामलों में आरोप लगे थे.

मिली जानकारी के मुताबिक, रंजन पाठक ‘सिग्मा एंड कंपनी’ के नाम से अपना गैंग चलाता था. बिहार के सीतामढ़ी और आपसपास के इलाकों में 5 हाईप्रोफाइल हत्याओं को इस गैंग ने अंजाम दिया था. पुलिस की तरफ से रंजन पाठक पर 25,000 रुपए का इनाम रखा गया था.

पुलिस के मुताबिक, रंजन पाठक गैंग लंबे समय से बिहार में सक्रिय था और हाल ही में दिल्ली में छिपा हुआ था. बिहार पुलिस को इस गैंग की तलाश कई महीनों से थी. बताया जा रहा है कि यह वही गिरोह था जो सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और मधुबनी में हुई कई बड़ी वारदात में शामिल रहा है.

इस गिरोह ने आदित्य कुमार, मदन कुशवाहा, ब्रह्मर्षि सेना के पूर्व अध्यक्ष राममनोहर शर्मा और श्रवण कुमार समेत 5 हत्याएं की थीं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह गिरोह चुनाव के दौरान बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में था और सीतामढ़ी जिले के कारोबारियों व नेताओं से रंगदारी मांग कर दहशत फैलाता था.

बिहार पुलिस से मिले इनपुट की बुनियाद पर डीसीपी संजीव यादव की निगरानी में क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस की जौइंट टीम ने बुधवार, 22 अक्तूबर, 2025 की देर रात को बेगमपुर इलाके में जाल बिछाया.

पुलिस के रोकने पर आरोपियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जवाबी कार्रवाई में चारों घायल हो गए और अस्पताल में मृत घोषित कर दिए गए.

मृतकों की पहचान 25 साल के रंजन पाठक, 25 साल के बिमलेश महतो, 21 साल के अमन ठाकुर और 33 साल के मनीष पाठक के रूप में हुई.

ऐसे बना गिरोह का सरगना

पुलिस के मुताबिक, रंजन पाठक का जन्म गांव मलाही में हुआ था. वह मनोज पाठक और विमला देवी का सब से बड़ा बेटा था. उस के परिवार में एक छोटा भाई और 5 बहनें भी हैं. जब रंजन पाठक महज 19 साल का था, तभी उसे पता चला कि उस की एक सौतेली बहन को भूमिहार जाति के शख्स से प्यार हो गया है.

इस बात से गुस्साए रंजन ने अपने दोस्त के साथ मिल कर उस शख्स की गोली मार कर हत्या कर दी थी.
इस कांड में हुई लड़ाई के दौरान रंजन पाठक के सिर में गोली लगी थी, लेकिन वह भागने में कामयाब रहा था.

रंजन पाठक के सिर में लगी उस गोली का निशान अब उस की पहचान बन चुका था. इस बीच वह कई बार जेल गया और साल 2025 में जेल से छूटने के बाद वह सीतामढ़ी के नामी गैंगस्टर शशि कपूर से मिला और फिर उस ने शराब की तस्करी के लिए ‘सिग्मा एंड कंपनी’ खोल डाली.

पुलिस के मुताबिक, शराब की तस्करी के लिए रंजन पाठक को लोकल सरपंच का भी साथ मिला हुआ था. आदित्य ठाकुर नाम के दूसरे शराब तस्कर ने जब एतराज जताया, तो रंजन ठाकुर ने मार डाला. इस के बाद सीतामढ़ी में खूनी खेल शुरू हो गया था. पर अब रंजन पाठक भी निबट गया है.

दुनियाभर के बदनाम गैंगस्टर

ऐसा नहीं है कि अकेला रंजन पाठक ही कोई गैंग चलाता था. पूरी दुनिया में ऐसे गैंगस्टर हुए हैं, जिन्होंने अपने देश की सरकार और पुलिस की नाक में दम कर दिया था. वे बेरहम तो थे ही, पैसे से भी बहुत ज्यादा ताकतवर थे.

भारत में आज भी बहुत से गैंगस्टर जेल में बैठ का अपना डर का धंधा चमका रहे हैं. इन में लौरेंस बिश्नोई, नीरज बवानिया, लखबीर सिंह सरन उर्फ लक्खा सिधाणा, सुनील सरढानिया, काला जठेड़ी, हाशिम बाबा, कपिल सांगवान, इरफान उर्फ छेनू खास हैं.

ये पुलिस के निशाने पर तो रहते ही हैं, आपसी गैंगवार में भी खत्म हो जाते हैं. ऐसा भी देखा गया है कि बहुत से नेता ऐसे गैंगस्टरों के कंधे पर बंदूक रख कर अपना उल्लू सीधा करते हैं. वे अपने मतलब के लिए लोगों को डराने और चुनाव में मदद करने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

नौजवान गैंगस्टर क्यों बनते हैं? इस सवाल पर लखबीर सिंह सरन उर्फ लक्खा सिधाणा ने बीबीसी से बात करते हुए बताया था, ‘‘मैं ने कालेज में छोटेमोटे अपराध करने शुरू किए. मुझे इस जिंदगी से प्यार हो गया. हम ताकत और शोहरत के नशे में चूर थे. हमें इस बात से खुशी मिलती थी कि लोग हम से डरते हैं, उन्हें डरता देख कर हम और ताकतवर महसूस करते थे.’’

पर हाल ही में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने विदेश में छिपे गैंगस्टर्स को लोमड़ी, सियार, गीदड़ और सांपबिच्छू जैसा बताया है. उन्होंने कहा कि गीदड़ की तरह भागते रहते हैं, कुत्ते की तरह मारे जाते हैं. काहे के गैंगस्टर, काहे का खौफ. ओपी सिंह की बात में दम है, क्योंकि ज्यादातर गैंगस्टर का ऐसा ही हाल होता है.

लखबीर सिंह सरन भी पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह की बात को सच साबित करते हैं. उन्होंने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा था, ‘‘मैं बगैर हथियारों के या अकेले कहीं नहीं जा सकता, क्योंकि मुझे दुश्मनों से या ऐसे किसी भी शख्स से खतरा है, जो मेरी जान लेना चाहता हो. मेरी पत्नी और परिवार डर के साए में जीते हैं. मेरी आने वाली 2-3 पीढि़यां तक सुरक्षित नहीं हैं. यह शोहरत बस नाम की है.’’ Hindi Crime Story

प्यार का ऐसा नशा कि कर दी मां की हत्या

बलराम ने जल्दीजल्दी इंटरव्यू लैटर, नोट बुक, पैन आदि बैग में रख कर सोनिया को आवाज दी, ‘‘दीदी, जल्दी से मेरा नाश्ता लगा दीजिए, मुझे देर हो रही है.’’

‘‘आ कर नाश्ता कर लो, मैं ने तुम्हारा नाश्ता तैयार कर दिया है.’’ सोनिया ने रसोईघर से ही कहा.

बलराम ने जल्दीजल्दी नाश्ता किया और अपना बैग ले कर मां के पास पहुंचा. शकुंतला देवी चारपाई पर लेटी थीं. बेटे को देख कर उन्होंने कहा, ‘‘जाओ बेटा, सफल हो कर लौटो. लेकिन तुम ने यह तो बताया ही नहीं कि इंटरव्यू देने कहां जा रहे हो?’’

‘‘मां चंडीगढ़ जा रहा हूं, एक बहुत बड़ी कंपनी में. अगर यह नौकरी मिल गई तो जिंदगी सुधर जाएगी.’’

‘‘जैसी प्रभु की इच्छा.’’ शकुंतला देवी ने कहा.

मां के पैर छू कर बलराम घर से निकल गया. यह 5 जून, 2015 की बात है. इंटरव्यू देने के बाद वह शाम के 7, साढ़े 7 बजे घर लौटा तो सोनिया रात का खाना बना रही थी. बैग रख कर बलराम मां के कमरे में पहुंचा तो वहां मां नहीं थी. बाहर आ कर उस ने बहन से मां के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘शाम को कीर्तन करने की बात कह कर गई थीं, पर अभी तक लौटी नहीं हैं.’’

बलराम को पता था कि मां अकसर कीर्तन पर जाती थीं तो देर रात को लौटती थीं. पिताजी के घर छोड़ कर जाने के बाद मां ने खुद को भजनकीर्तन में लगा लिया था. मां की चिंता छोड़ कर उस ने हाथमुंह धोया तो बहन ने उस के लिए खाना परोस दिया.

खाना खा कर बलराम अपने कमरे में आराम करने चला गया. दिन भर का थका होने के कारण लेटते ही उसे नींद आ गई. रात के लगभग 1 बजे उस की आंख खुली तो उठ कर वह मां के कमरे में गया. मां वहां नहीं थी. समय देखा, रात के सवा बज रहे थे. वह बड़बड़ाया, ‘मां अभी तक नहीं आई?’

बलराम को चिंता हुई. उस के मन में बुरे विचार आने लगे. उस की चिंता यह थी कि पिताजी की तरह कहीं मां भी तो उसे छोड़ कर नहीं चली गईं?

पंजाब के जिला खन्ना के थाना जुलकां का एक गांव है मलकपुर कंबोआ. इसी गांव में लाल सिंह अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी शकुंतला के अलावा 2 बेटे और एक बेटी थी.

बड़ा बेटा सोहनलाल खेती करने के अलावा दूसरे राज्यों में जा कर कंबाइन मशीन से फसल काटने का काम करता था. उस से छोटी सोनिया थी, जो दसवीं तक पढ़ाई कर के अब घर में रहती थी. सब से छोटा बलराम बारहवीं पास कर के नौकरी की तलाश में था.

लाल सिंह के पास जो जमीन थी, उसी में मेहनत कर के जैसेतैसे तीनों बच्चों को पालापोसा और पढ़ायालिखाया था. बड़ा बेटा सोहन काम करने लगा तो उन्हें थोड़ी राहत मिली. अचानक न जाने ऐसा क्या हुआ कि लाल सिंह के ऊपर काफी कर्ज हो गया, जिस की वजह से उन्हें अपनी कुछ जमीन बेचनी पड़ी.

जमीन बेचने के बाद लाल सिंह गुमसुम रहने लगे. वह ना किसी से बात करते थे और ना किसी मामले में दखलंदाजी करते थे. ऐसे में ही एक दिन वह बिना किसी को कुछ बताए घर से निकले तो लौट कर नहीं आए. यह 5 साल पहले की बात है.

शकुंतला पति के इंतजार में दरवाजे की ओर टकटकी बांधे देखती रहती थी. उस दिन मां के कीर्तन से न लौटने पर बलराम चिंतित हो उठा. उस ने बहन को जगा कर कहा, ‘‘दीदी उठो, अभी तक मां लौट कर नहीं आई है.’’

‘‘क्या कहा, मां अभी तक लौट कर नहीं आई है?’’

‘‘हां दीदी, रात के 2 बज रहे हैं. इस समय कौन सा मंदिर खुला होगा, जो मां कीर्तन कर रही हैं?’’ रुआंसा हो कर बलराम बोला.

सोनिया घबरा कर उठी. उस ने चिंतित हो कर कहा, ‘‘बल्लू, इस समय हम मां को ढूंढने कहां चलेंगे?’’

बात सही भी थी. उस समय रात के 2 बज रहे थे. उतनी रात को वे कहां जाते. लेकिन मां के बारे में पता तो करना ही था. भाईबहन हिम्मत कर के घर से बाहर निकले. पूरे गांव में सन्नाटा पसरा था, सिर्फ कुत्ते भौंक रहे थे. दोनों मंदिर तक गए. वहां घुप्प अंधेरा था. गांव की हर गली में चक्कर लगाया कि शायद किसी के घर कथाकीर्तन हो रही हो, लेकिन गांव में ऐसा कुछ भी आयोजन नहीं था.

सवेरा होने पर बलराम ने मंदिर जा कर पूछा तो पता चला कि शकुंतला तो कल मंदिर आई ही नहीं थी. थोड़ी ही देर में शकुंतला के गायब होने की बात पूरे गांव में फैल गई. हर कोई अफसोस जता रहा था कि 5 साल पहले बच्चों का बाप गायब हो गया और अब मां गायब हो गई. गांव के कुछ लोग भी शकुंतला की तलाश में लग गए.

बलराम ने बड़े भाई सोहन को भी फोन कर के मां के गायब होने की बात बता दी. उस समय वह मध्य प्रदेश में कंबाइन मशीन ले कर फसल की कटाई कर रहा था. छोटे भाई को सांत्वना दे कर उस ने कहा कि वह तुरंत आ रहा है. अगले दिन दोपहर बाद सोहन घर पहुंचा तो कुछ रिश्तेदार एवं गांव वालों के साथ थाना जुलकां जा कर मां की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

शकुंतला का फोटो ले कर पुलिस ने इश्तेहार शोरेगोगा छपवा कर सभी थानों, बसअड्डों, रेलवे स्टेशनों तथा प्रमुख स्थानों पर लगवा दिए, साथ ही वायरलैस द्वारा उस का हुलिया भी प्रसारित करवा दिया.

दिन, सप्ताह, महीने बीतने लगे, शकुंतला का कुछ पता नहीं चला. धीरेधीरे साल बीत गया. उस की गुमशुदगी के रहस्य से परदा नहीं उठ सका. सोनिया और सोहन ने तो संतोष कर लिया, पर बलराम, जो मां का चहेता भी था, वह मां के गायब होने के रहस्य को जानना चाहता था. इसलिए मार्च, 2016 में उस ने मां की गुमशुदगी की एक चिट्ठी लिखी और खन्ना जा कर एसपी (डी) जसकरण सिंह तेजा से मिला. उन से उस ने हाथ जोड़ कहा, ‘‘सर, मेरी मां को ढुंढवा दीजिए.’’

जसकरण सिंह तेजा ने बलराम के निवेदन को गंभीरता से लिया और डीएसपी (देहात) हरविंदर सिंह विर्क और डीएसपी (सिटी) हरवंत कौर को बलराम द्वारा दी गई चिट्टी दे कर सख्त आदेश दिया कि जल्द से जल्द वे इस मामले का खुलासा करें.

हरविंदर सिंह और हरवंत कौर ने शकुंतला का पता लगाने के लिए थाना जुलकां के थानाप्रभारी इंसपेक्टर रणवीर सिंह को नियुक्त किया. उन की मदद के लिए इंसपेक्टर जगजीत सिंह को लगा दिया गया.

शकुंतला की गुमशुदगी की फाइल को निकाल कर फिर से जांच शुरू हुई. पुलिस अधिकारियों ने अपने मुखबिरों को भी शकुंतला की गुमशुदगी का रहस्य पता करने को लगा दिया.

शकुंतला के दोनों बेटों, बेटी तथा रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई. सोहन उन दिनों मध्य प्रदेश में था. उस से छोटा बलराम इंटरव्यू देने चंडीगढ़ गया था. सिर्फ बेटी सोनिया ही घर में थी. पूछताछ में पुलिस ने देखा कि सोनिया बारबार बयान बदल रही है.

रणवीर सिंह ने यह बात डीएसपी हरवंत कौर को बताई तो उन्होंने कहा कि वह अपने मुखबिर सोनिया पर नजर रखने के लिए लगा दें, साथ ही उस के बारे में पता करें.

मुखबिरों से पुलिस को पता चला कि सोनिया के गांव के ही कुलविंदर से प्रेमसंबंध थे. जब से पुलिस दोबारा इस मामले की जांच कर रही है, तब से वह काफी बेचैन और परेशान रहती है. अकसर वह गांव से बाहर खेतों में कुलविंदर से सलाहमशविरा करती दिखाई देती है.

रणवीर सिंह और जगजीत सिंह ने समय न गंवाते हुए एएसआई सुरजीत सिंह से कहा कि वह शकुंतला के घर जा कर उस के बेटों सोहन, बलराम और बेटी सोनिया तथा नजदीकी रिश्तेदारों को थाने ले आएं. अगर वे थाने आने की वजह पूछें तो उन्हें बता देना कि शकुंतला का पता चल गया है. सुरजीत सभी को थाने ले आए. जैसा रणवीर सिंह ने सोचा था वैसा ही था.

सोनिया के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था. उस के पैर कांप रहे थे. उन्होंने बड़े नाटकीय ढंग से कहा, ‘‘सोहन सिंह, तुम्हारी मां का पता चल गया है. यह मेरे अलावा तुम्हारी बहन सोनिया को भी पता है कि तुम्हारी मां कहां है? इसलिए तुम उस से पूछ लो कि वह कहां हैं, वरना मैं तो तुम्हारी मां से तुम्हें मिलवा ही दूंगा.’’

रणवीर की इस बात पर सोहन सिंह ने हैरानी से बहन की ओर देखा. वह खुद हैरानी से रणवीर सिंह को देख रही थी. उस का चेहरा एकदम सफेद पड़ा हुआ था. टांगें पहले से ज्यादा कांप रही थीं. सोहन सिंह ने जब उस से पूछा कि क्या वह जानती है कि मां कहां हैं तो वह कांपती आवाज में बोली, ‘‘नहीं भैया, मुझे नहीं पता कि मां कहां है.’’

‘‘बताओ न तुम्हारी मां कहां है?’’ रणवीर सिंह ने डांट कर कहा तो सोनिया ने सिर झुका लिया. उस के दोनों भाई और साथ आए रिश्तेदार उसे हैरानी से देख रहे थे.

उन की समझ में नहीं आ रहा था कि जब सोनिया को मां के बारे में पता था तो उस ने अब तक बताया क्यों नहीं. रणवीर सिंह ने जब दोबारा डांट कर पूछा तो उस ने रोते हुए अपनी मां की लगभग 11 महीने की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठाते हुए कहा कि उस ने अपने प्रेमी कुलविंदर के साथ मिल कर उस की हत्या कर दी है.

इस के बाद उस ने शकुंतला की गुमशुदगी के पीछे की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

सोनिया और कुलविंदर कभी साथसाथ पढ़ा करते थे. दसवीं पास कर के सोनिया ने पढ़ाई छोड़ दी तो दोनों अलग हो गए. सालों बाद युवा होने पर जब उन की मुलाकात हुई तो बचपन की यादें ताजा हो उठीं. युवा होने पर उन के शरीरों में जो बदलाव आया था, वह काफी आकर्षक था.

दोनों ही खूबसूरत तो थे ही, कुलविंदर का कसरती बदन काफी लुभावना था, जिस से दोनों ही एकदूसरे के आकर्षण में बंधते गए. परिणामस्वरूप दोनों गांव के बाहर खेतों में मिलने लगे. जब इस बात की जानकारी शकुंतला को हुई तो वह परेशान हो उठी.

उस ने कुलविंदर को देखा था. वैसे तो उस में कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह नशा करता था. इस के अलावा वह दूसरी जाति का भी था, यही वजहें थीं कि शकुंतला ने बेटी को मर्यादा में रहने को कहा.

जबकि सोनिया पर तो कुलविंदर के प्यार का ऐसा नशा चढ़ा था कि उस ने मां की एक नहीं सुनी, बल्कि वह खुश थी कि मां को उस के और कुलविंदर के प्यार के बारे में पता चल गया था.

इस के बाद वह कुलविंदर को घर बुलाने लगी. अगर शकुंतला कुछ कहती तो वह कुलविंदर को ले कर अपने कमरे में चली जाती. गायब होने से 2 दिन पहले 3 जून, 2015 को शकुंतला गांव में किसी के यहां गई थी. मां के जाते ही सोनिया ने कुलविंदर को बुला लिया था.

अचानक शकुंतला आ गई और उस ने सोनिया और कुलविंदर को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया. कुलविंदर तो डर के मारे भाग गया, बेटी को शकुंतला ने खूब खरीखोटी सुनाई. चुप रहने के बजाय सोनिया विद्रोह कर बैठी. उस ने मां को धमकाते हुए कहा, ‘‘सुन मां, अगर मेरे और कुलविंदर के बीच कोई आया तो मैं उसे छोड़ूंगी नहीं.’’

फिर उसी दिन शाम को सोनिया ने कुलविंदर के साथ मिल कर मां को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली. उस ने यह योजना कुलविंदर को समझा दी. 5 जून को सोनिया ने दोपहर को खाना बनाया और मां के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं. खाना खाने के कुछ देर बाद ही शकुंतला गहरी नींद में सो गई थी. सोनिया ने मां को हिलाडुला कर देखा. जब देखा कि मां होश खो बैठी है तो उस ने फोन कर के कुलविंदर को बुला लिया. कुलविंदर के आने पर सोनिया ने उसे फावड़ा दे कर आंगन में गड्ढा खोदवाया और शकुंतला की गला दबा कर हत्या कर दी.

इस के बाद लाश को उसी गड्ढे में डाल कर मिट्टी भर दी. ऊपर से गोबर का लेप लगा दिया, ताकि किसी को संदेह न हो. सारे काम निपटा कर दोनों ने शकुंतला के कमरे में उसी के बिस्तर पर इच्छा पूरी की. इस के बाद क्या हुआ आप पढ़ ही चुके हैं. सोनिया के अपराध स्वीकार करने के बाद शकुंतला की गुमशुदगी को हत्या में तब्दील कर सोनिया और कुलविंदर को दोषी बनाया गया.

सोनिया की निशानदेही पर मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट बहादुर सिंह, एसपी (डी) जसकरण सिंह तेजा, डीएसपी (देहात) हरविंदर सिंह विर्क, डीएसपी (सिटी) हरवंत कौर, थाना जुलकां के प्रभारी रणवीर सिंह एवं जगजीत सिंह, सोहन, बलराम और गांव के सरपंच की मौजूदगी में आंगन में गड्ढा खोद कर शकुंतला की लाश बरामद की गई, जो कंकाल बन चुकी थी.

लाश का पंचनामा तैयार कर फौरैंसिक लैब भेजा गया. इस के बाद सोनिया को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया. चूंकि कुलविंदर फरार हो चुका था, इसलिए रिमांड खत्म होने पर सोनिया को पुन: अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस कुलविंदर की तलाश कर रही है.

अय्याशी में डूबा रंगीन मिजाज का कारोबारी

देश भर में क्रिकेट व अन्य खेलों का सामान बनाने के लिए प्रसिद्ध शहर जालंधर (पंजाब) के उपनगर लाजपतनगर की कोठी नंबर 141 में प्रसिद्ध करोड़पति बिजनैसमैन जगजीत सिंह लूंबा का परिवार रहता था. उन के सीमित परिवार में 60 वर्षीय पत्नी दलजीत कौर, 42 वर्षीय बेटा अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू, बहू परमजीत कौर उर्फ पम्मी, 20 वर्षीय पोता शानजीत सिंह, मनजीत सिंह और पोती आशीषजीत कौर थीं. जगजीत लूंबा बड़े सज्जन एवं दयालु प्रवृत्ति के इंसान हैं. धनवान होने के बावजूद भी उन्हें किसी चीज का घमंड नहीं था. शहर में उन की जगजीत ऐंड कंपनी नाम से बहुत बड़ी फर्म है, जिस के अंतर्गत 2 पैट्रोल पंप, सर्विस स्टेशन और एक बहुत बड़ी मैटल ढलाई की फैक्ट्री है, जिस में कई फर्नेस लगे हैं. अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू अपने पिता के साथ कारोबार संभालने में उन की मदद करता था. दलजीत कौर भी कभीकभार पति और बेटे की मदद के लिए पैट्रोल पंपों पर चली जाती थीं. तीनों बच्चे अभी पढ़ रहे थे. बड़ा पोता शानजीत सिंह एपीजे कालेज जालंधर का छात्र था. कुल मिला कर लूंबा परिवार सुखचैन से अपना जीवन निर्वाह कर रहा था.

23 फरवरी, 2017 की शाम करीब 4 बजे की बात है. दलजीत कौर अपने ड्राइंगरूम में परमजीत कौर उर्फ पम्मी और खुशवंत कौर उर्फ नीतू के साथ बैठी चाय पी रही थीं. खुशवंत कौर परमजीत कौर के पति के दोस्त बलजिंदर सिंह की पत्नी थी. दोनों के आपस में पारिवारिक संबंध थे. बलजिंदर की भी जालंधर के लक्ष्मी सिनेमा के पास मैटल ढलाई की फैक्ट्री थी.

अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू की शादी के बाद से परमजीत कौर और खुशवंत कौर के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी. इसी कारण वह हर रोज शाम के समय उस से मिलने उस के घर आ जाया करती थी. पिछले कई दिनों से दलजीत कौर की कमर में दर्द हो रहा था. शायद उम्र का तकाजा था. वह रोज शाम के ठीक 4 बजे फिजियोथैरेपी करवाने के लिए डाक्टर के यहां जाती थीं.

पर उस दिन खुशवंत कौर के आ जाने पर उन्होंने डाक्टर के यहां जाना कैंसिल कर दिया था. तीनों बच्चे शाम 4 से 6 बजे तक ट्यूशन पढ़ने चले जाते थे. मतलब आम दिनों में 4 से 6 बजे तक यानी 2 घंटे पम्मी घर में अकेली होती थी. उस दिन पम्मी की बेटी ट्यूशन चली गई थी.

बेटा शान जब ट्यूशन पढ़ने जाने के लिए निकलने लगा तो पम्मी ने कहा, ‘‘बेटा शान, तुम्हारे पापा का फोन आया था. उन्होंने कहा है कि तुम अपने छोटे भाई के साथ जा कर अवतारनगर रोड पर स्थित कार की दुकान पर एजेंट से मिलो. वह आज तुम्हारे पसंद की जीप खरीदवाएंगे.’’

‘‘ठीक है मम्मी.’’ शान ने मां की बात सुन कर कहा और छोटे भाई मनजीत को ले कर कार से अवतारनगर की तरफ चला गया.  दरअसल शान कई दिनों से अपने लिए जीप खरीदवाने की जिद कर रहा था.

तीनों महिलाएं चाय की चुस्कियां लेते हुए आपस में बतिया रही थीं कि तभी डोरबेल बजी. घंटी बजते ही पम्मी ने चाय का प्याला टेबल पर रखा और दरवाजे पर जा कर दरवाजा खोला तो सामने 2 आदमी खड़े थे. बिना कुछ कहे ही उन्होंने पम्मी को भीतर की ओर धक्का दे कर दरवाजा बंद कर दिया.

इस से पहले कि पम्मी कुछ समझ पाती, उन दोनों में से एक ने अपनी कमर से पिस्तौल निकाली और पम्मी को निशाना बना कर एक के बाद एक 3 गोलियां चला दीं. पम्मी को तो चीखने का अवसर भी नहीं मिला और वह फर्श पर गिर गई. गोलियों की आवाज सुन कर दलजीत कौर ड्राइंगरूम से बाहर आईं. बहू की हालत देख कर वह चिल्लाईं, ‘‘ओए मार दित्ता जालमा.’’

उन के साथ ही खुशवंत कौर भी कमरे से बाहर आ गई थी. माजरा समझ दोनों हमलावरों पर झपट पड़ीं. उन की इस हरकत से हमलावर घबरा गए. खुशवंत कौर दोनों में से एक से गुत्थमगुत्था हो गई. दलजीत कौर दूसरे आदमी से भिड़ गईं, जिस के हाथ में पिस्तौल था.

पिस्तौल वाले हमलावर ने दलजीत कौर से खुद को छुड़ाने के लिए उन पर गोली चला दी. इस के बाद दूसरे आदमी ने खुशवंत कौर को काबू करने के लिए अपने हाथ में थामा पेचकस उस की गरदन में पूरी ताकत से घुसेड़ दिया. उसी समय पिस्तौल वाले ने उस पर भी गोली चला कर मामला खत्म कर दिया.

तीनों औरतों की हत्या कर दोनों हमलावरों ने चैन की सांस ली और ड्राइंगरूम से निकल कर लौबी में आ गए. लौबी में रखे फ्रिज के पीछे टंगी चाबियों में से उन्होंने एक चाबी उठाई और घर के पिछवाड़े आ कर कोठी के बैक साइड वाला दरवाजा खोल कर निकल गए. मात्र 6-7 मिनट में वे 3 हत्याएं कर के आराम से चले गए थे.

दूसरी ओर जीप देखने के बाद शाम सवा 5 बजे शंटू जब अपने दोनों बेटों के साथ कोठी पर आया तो मुख्य दरवाजा भीतर से बंद मिला. काफी खटखटाने के बाद भी जब अंदर से कोई आहट नहीं सुनाई दी तो किसी अनहोनी की आशंका से परेशान हो कर बापबेटों ने धक्के मार कर दरवाजा तोड़ दिया. इस के बाद सामने का दृश्य देख कर उन के होश उड़ गए. शंटू चीखने लगे, ‘‘मार गए…मार गए… बीजी को मार गए.’’

बच्चे भी मदद के लिए उन के साथ चीखने लगे थे. चीखपुकार सुन कर पड़ोसी जमा हो गए. उन में खुशवंत कौर का बेटा अर्शदीप भी था. मां की लाश देख कर वह भी जोरजोर से रोने लगा. पड़ोसियों की मदद से तीनों को नजदीक के प्राइवेट अस्पताल ले गया. पौश कालोनी में दिनदहाड़े हुई 3 हत्याओं की खबर जंगल में लगी आग की तरह शहर भर में फैल गई. लोगों में दहशत भर गया. कोई इसे आंतकवादी घटना बता रहा था तो कोई आपसी रंजिश. किसी ने पुलिस को फोन कर दिया था. डा. अमनप्रीत सिंह ने मुआयना करने के बाद दलजीत कौर और खुशवंत कौर को मृत घोषित कर दिया. पुलिस केस था, इसलिए अस्पताल से भी पुलिस को सूचना दे दी गई.

परमजीत कौर की हालत नाजुक थी. उस के दिल की धड़कनें काफी धीमी थीं. उस की जान बचाने के लिए डाक्टरों ने उसे वेंटीलेटर पर रख दिया.

खबर मिलते ही थाना डिवीजन नंबर-4 के थानाप्रभारी प्रेम सिंह और थाना डिवीजन नंबर-6 के थानाप्रभारी गुरवचन सिंह दलबल सहित घटनास्थल पर पहुंच गए.

लाजपतनगर इलाका पहले थाना डिवीजन नंबर-6 में था, पर बाद में उसे थाना डिवीजन नंबर-4 में शामिल कर दिया गया. घटनास्थल पर पहुंचने के बाद पुलिस को पता चला कि सब लोग अस्पताल गए हैं तो थानाप्रभारी ने कोठी पर 2 सिपाही तैनात कर इंसपेक्टर प्रेम सिंह के साथ अस्पताल पहुंच गए. डाक्टर परमजीत को बचाने की कोशिश कर रहे थे पर उस की हालत में सुधार नहीं हो रहा था. फिर रात 9 बजे के करीब उस ने दम तोड़ दिया.

अस्पताल में पता चला कि जिन तीनों महिलाओं को गोली मारी गई थी, उन की मौत हो चुकी है. उन की लाशें कब्जे में ले कर पुलिस ने शंटू के बयान दर्ज किए और उन्हीं की ओर से भादंवि की धारा 302, 307, 452, 34 और 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तीनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए राजकीय अस्पताल भेज दिया.

मामला करोड़पति बिजनैसमैन के परिवार में हुई 3 हत्याओं का था, इसलिए खबर मिलते ही पुलिस कमिश्नर (जालंधर) अर्पित शुक्ला सहित पुलिस के तमाम अधिकारी अपनेअपने लावलश्कर के साथ लाजपतनगर की कोठी नंबर-141 पर पहुंच गए. कोठी के ड्राइंगरूम में खून फैला था. क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ मौके से सबूत ढूंढने का प्रयास कर रहे थे.

घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद पुलिस अधिकारियों को लगा कि हत्याएं लूटपाट के इरादे से नहीं की गईं, क्योंकि कोठी का सारा कीमती सामान अपनी जगह पर यथावत था. एक जगह कुरसियां और चाय के बरतन जमीन पर गिरे पडे़ थे, जिस से अनुमान लगाया गया कि वहां संघर्ष हुआ होगा.

हत्यारे जिस तरह कोठी के पीछे का दरवाजा खोल कर निकले थे, उस से यही अनुमान लगाया गया कि वह लूंबा परिवार के परिचित रहे होंगे, जिन का कोठी में आनाजाना रहा होगा. क्योंकि वह दरवाजा अकसर बंद रहता था और उस की चाबी फ्रिज के पीछे टंगी रहती थी. उन का मकसद केवल परमजीत कौर उर्फ पम्मी और उस की सास दलजीत कौर की हत्या करना था.

चश्मदीद गवाह न रहे, इसलिए उन्होंने कोठी में मौजूद खुशवंत कौर को भी मार दिया था. शंटू ने पुलिस को बताया था कि उस के परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. पुलिस मामले की जांच में जुट गई. पुलिस को पता चला कि उस कोठी में 4 नौकरानियां काम करती थीं.

सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक 3 नौकरानियां बरतन झाड़ूपोंछा, कपड़े धोने आदि का काम कर के अपने घर चली जाती थीं. एक नौकरानी रीतू लगभग 3, साढ़े 3 बजे की चाय बनाने के बाद घर जाती थी. पुलिस ने चारों नौकरानियों और उन के पतियों से गहन पूछताछ करने के साथ उन की पारिवारिक कुंडली को भी खंगाला.

क्योंकि अकसर बड़े घरों में होने वाली ऐसी वारदातों के पीछे किसी न किसी नौकर का हाथ होता है. पर ये सब बेकसूर पाए गए. पुलिस को घटनास्थल से 2 खाली कारतूस मिले थे, जबकि तीनों मृतक महिलाओं पर 7 गोलियां चलाई गई थीं, इस का मतलब यह था कि शेष 5 गोलियां मृतकों के शरीर में रह गई थीं.

अगले दिन डा. चंद्रमोहन, डा. प्रिया और डा. राजकुमार के पैनल ने तीनों लाशों का पोस्टमार्टम किया. एक्सरे और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार, दलजीत कौर को कुल 3 गोलियां मारी गई थीं, जिस में से एक गोली उन के दिल के पास और एक सिर में फंसी थी. परमजीत कौर को भी 3 गोलियां लगी थीं, जिन में एक गोली उस के माथे के ठीक बीचोबीच लगी थी और एक खोपड़ी और एक बाजू में फंसी हुई थी. इस के अलावा उस के शरीर पर चोटों के 6 निशान पाए गए थे.

खुशवंत कौर के सिर में एक गोली उस की कनपटी से हो कर खोपड़ी में फंस गई थी. उस की गरदन में 16 सेंटीमीटर लंबा एक पेचकस भी फंसा हुआ था. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने तीनों लाशें परिजनों को सौंप दीं. उन के अंतिम संस्कार में शहर के अनेक व्यापारी, गणमान्य व्यक्तियों के अलावा हजारों लोग शामिल हुए थे.

पुलिस को अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू से पूछताछ करनी थी, इसलिए अंतिम संस्कार के बाद पुलिस ने उसे थाने बुला लिया. उस समय वहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे. थानाप्रभारी ने उस का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले कर चैक किया तो पता चला कि उस की सारी काल डिटेल्स डिलीट की हुई थी. उस का फोन नंबर सर्विलांस पर लगाने के बाद संबंधित फोन कंपनी से उस के नंबर की काल डिटेल्स हासिल की गई.

काल डिटेल्स की जांच में पुलिस को कई फोन नंबर संदिग्ध मिले. उन नंबरों के बारे में शंटू से पूछताछ की गई तो इस तिहरे हत्याकांड का खुलासा हो गया.

मामले का 24 घंटे में खुलासा होने पर पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली. हत्याकांड की साजिश में शामिल तेजिंदर कौर उर्फ रूबी नाम की महिला की गिरफ्तारी के लिए एक टीम फगवाड़ा भेज दी.

उस की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कमिश्नर अर्पित शुक्ला ने उसी शाम प्रैसवार्ता कर पत्रकारों को बताया कि लाजपतनगर के तिहरे हत्याकांड के साजिशकर्ता और कोई नहीं, बल्कि अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू और उस की प्रेमिका तेजिंदर कौर उर्फ रूबी है. इन दोनों अभियुक्तों ने पत्रकारों के सामने हत्या की कहानी बयान कर दी. इस सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी—

जगजीत सिंह लूंबा की सारी कंपनियां दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रही थीं. वह बड़े बिजनैसमैन थे, इसलिए उन का समाज में एक अलग ही रुतबा था. अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू और उस की पत्नी परमजीत कौर में बड़ा गहरा प्यार था. शंटू और जगजीत सिंह सुबह एक साथ घर से निकलते थे. जगजीत सिंह का अधिकांश समय पैट्रोल पंपों पर गुजरता था, जबकि शंटू स्वतंत्र रूप से फैक्ट्री को देखता था. दोनों ने अपनेअपने काम बांट रखे थे, पर सारे कारोबार का लेखाजोखा जगजीत ऐंड कंपनी में होता था.

लूंबा परिवार की बरबादी के दिन की शुरुआत उस समय हो गई थी, जब सन 2013 में उन की कंपनी में तेजिंदर कौर उर्फ रूबी ने बतौर हैड एकाउंटैंट का कार्यभार संभाला. इस के पहले जगजीत ऐंड कंपनी में उस का पति सुखजीत बतौर कैशियर काम करता था. सुखजीत सिंह रूबी का नाम का ही पति था. क्योंकि उस पर सुखजीत सिंह का कोई नियंत्रण नहीं था.

अपना जीवन कैसे जीना है, इस बात के फैसले रूबी खुद लेती थी और उस में वह किसी का भी दखल बरदाश्त नहीं करती थी. कुल मिला कर वह एक आजाद खयाल महिला थी. कालेज के दिनों में ही रूबी ने तय कर लिया था कि वह भारत छोड़ कर विदेश जाएगी, जहां खूब दौलत कमा कर अपनी जिंदगी का लुत्फ उठाएगी.

इस के लिए उस ने कोई भी कीमत चुकाने का फैसला कर लिया था, पर विदेश जाने के लिए उस के पास पर्याप्त धन नहीं था. आखिर उस ने स्कौलरशिप ले कर आस्ट्रेलिया जाने का फैसला लिया. बारहवीं करने के बाद रूबी ने कंप्यूटर एजूकेशन में डिप्लोमा किया. इस के बाद उस ने सन 2009 में आईईएलटीएस की परीक्षा दी.

इस परीक्षा के तहत विदेश में नौकरी करने के लिए इच्छुक लोगों का अंगरेजी भाषा का टेस्ट लिया जाता है. फिर इस में मिले स्कोर बैंड के आधार पर उसे वीजा देने का फैसला लिया जाता है. इस परीक्षा में रूबी का स्कोर बैंड 5.5 आया. यह स्कोर बैंड अंगरेजी भाषा के मामूली उपयोगकर्ता का होता है, इसलिए कम स्कोर बैंड आने पर रूबी को आस्ट्रेलिया का वीजा नहीं मिला.

रूबी ने हिम्मत नहीं हारी. उस ने एक बार फिर आईईएलटीएस की परीक्षा दी. इस बार उसे 6.5 स्कोर बैंड प्राप्त हुए. यह स्कोर बैंड सक्षम उपयोगकर्ता का माना जाता है. पर उसे कम से कम 7 बैंड की जरूरत थी. इस बार भी वीजा न मिलने पर उस की विदेश जाने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी. उसी दौरान उस की शादी सुखजीत सिंह से हो गई.

सुखजीत सिंह एक शरीफ युवक था. रूबी उसे ज्यादा महत्त्व नहीं देती थी. बातबात पर वह उस से क्लेश करती थी. क्लेश से बचने के लिए वह शांत रहता था. रूबी पति के साथ जालंधर के सोढल चौक पर किराए के मकान में रहती थी. पर अपनी महत्त्वाकांक्षा के चलते उस ने विदेश जाने का इरादा नहीं छोड़ा था.

वह किसी ऐसे आदमी की तलाश में थी, जो उस पर ढेर सारी दौलत लुटाए और उस के सपने पूरे करे. इस बीच उस की नौकरी अच्छे वेतन और अन्य सुविधाओं के साथ जगजीत ऐंड कंपनी में लग गई थी. इस नौकरी को उस ने अपने सपने पूरे करने का जरिया बना डाला था.

अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू पहली ही मुलाकात में तेजिंदर कौर उर्फ रूबी का दीवाना हो गया था. रूबी भी अपने बौस की नजरों को ताड़ गई थी. यही तो वह चाहती थी. जिस आदमी की उसे तलाश थी, वह तलाश उस की पूरी हो गई थी.

शंटू किसी भी तरह रूबी को हासिल करना चाहता था. इस के लिए उस ने रूबी को तमाम सुविधाएं देने के साथ अपनी निजी सचिव बना लिया. अब वह हर समय शंटू के साथ रहती थी. दोनों एकदूसरे का शिकार करने पर तुले थे, पर तीर चलाने में पहल कोई नहीं कर रहा था.

रूबी को सरप्राइज देने के लिए शंटू ने जालंधर के रामामंडी क्षेत्र में एक कोठी खरीदी और उस की चाबी रूबी को देते हुए कहा, ‘‘आज से तुम इस कोठी में रहोगी. यह तुम्हारे लिए है.’’

रूबी की खुशी का ठिकाना न रहा. क्योंकि उस ने सोचा भी नहीं था कि शंटू इतनी जल्दी उस की झोली में आ गिरेगा. उसी शाम उस नई कोठी में रूबी के सामने जब शंटू ने प्यार का इजहार किया तो रूबी को जैसे मनचाही मुराद मिल गई. इसी दिन का तो उसे इंतजार था. दोनों ने ही उस दिन अपनी इच्छा पूरी की. इस के बाद रूबी पति को छोड़ कर शंटू द्वारा दी गई कोठी में रहने लगी.

शंटू का भी अधिकांश समय रूबी के साथ उसी नई कोठी में गुजरने लगा. घर पर काम का बहाना बना कर वह रूबी की बांहों में पड़ा रहता. 3 साल कब गुजर गए, पता ही नहीं चला और न ही उन के संबंधों की बात किसी को कानोकान पता चली. पर अवैध संबंध कभी न कभी खुल ही जाते हैं.

दिसंबर, 2016 में परमजीत कौर को अपने पति और रूबी के नाजायज संबंधों की भनक लग गई. इस बारे में जब उस ने शंटू से पूछा तो वह साफ मुकर गया. पर परमजीत के पास पुख्ता सबूत थे. उस ने यह बात अपनी सास दलजीत कौर को बताई. फिर एक दिन वह अपनी ननद और सास को ले कर रामामंडी वाली कोठी पर पहुंची.

रूबी कोठी में ही थी. तीनों ने मिल कर रूबी की खूब बेइज्जती की और उसे धक्के मार कर कोठी से बाहर कर अपना ताला लगा दिया. शंटू को जब इस बात का पता चला तो उसे अपने घर वालों पर बड़ा गुस्सा आया. घर आ कर उस ने खूब झगड़ा किया और पिता जगजीत सिंह से साफ कह दिया, ‘‘मैं पम्मी से तलाक ले कर रूबी से शादी कर के उसे इस घर की बहू बनाना चाहता हूं.’’

‘‘तेरी मति मारी गई है क्या, जो इस उम्र में पागलों जैसी बातें कर रहा है. शांति से अपने बीवीबच्चों के साथ रह.’’ जगजीत सिंह ने डांटा.

जगजीत सिंह और दलजीत कौर ने बेटे को बहुत समझाया, पर शंटू तो रूबी के मोहजाल में इस कदर जकड़ा था कि वह किसी भी सूरत में उस से दूर होने को तैयार नहीं था. शंटू की ससुराल वालों और अन्य रिश्तेदारों ने यह बात सुनी तो सभी उन की कोठी पर आ गए.

सभी ने शंटू को फटकार लगाते हुए समझाया, तब कहीं जा कर यह मामला शांत हुआ. उस समय सभी बड़ेबूढ़ों के दबाव में आ कर शंटू शांत हो गया, पर दिनरात वह पम्मी से पीछा छुड़ा कर रूबी से ब्याह रचाने के बारे में सोचता रहता था. वह इस बात को अच्छी तरह समझ गया था कि एक म्यान में 2 तलवारें नहीं रह सकतीं यानी पम्मी के रहते हुए वह रूबी को कभी इस घर की बहू नहीं बना सकता.

शंटू के पैट्रोल पंप पर कुछ समय पहले तक गांव ढिलवां निवासी विपिन नौकरी करता था. विपिन अपराधी प्रवृत्ति का था. उस पर कई मुकदमे चल रहे थे. एक दिन अचानक रास्ते में शंटू की मुलाकात विपिन से हो गई. गाड़ी रोक कर उस ने विपिन को अपने साथ बिठा लिया. शंटू ने उसे अपने और रूबी के रिश्ते के बारे में बता कर कहा, ‘‘पम्मी के रहते रूबी को अपना बनाना असंभव है. तू बता पम्मी का इलाज कैसे किया जाए?’’

‘‘जी, मैं क्या बताऊं?’’ विपिन ने असमंजस में कहा, ‘‘आप किसी वकील से सलाह ले लो.’’

‘‘नहीं, पम्मी का बड़ा सीधा इलाज है.’’ शंटू ने कहा.

‘‘वह क्या जी?’’ विपिन ने हैरानी से पूछा.

‘‘पम्मी का काम तमाम कर दे. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.’’ शंटू ने सुझाव दिया.

‘‘ठीक है जी, हटा देते हैं रस्ते से.’’ विपिन अब पूरी बात समझ गया था. मुद्दे पर आते हुए उस ने कहा, ‘‘पर यह काम मैं अकेला नहीं कर सकूंगा. दूसरे बदले में कितने रुपए मिलेंगे?’’

‘‘पहले तू आदमी का इंतजाम कर ले, रुपयों की बात तभी कर लेंगे.’’ शंटू ने कहा.

अगले ही दिन विपिन ने गांव सरहाल कलां चब्बेवाल निवासी अमृतपाल को शंटू से मिलवाया. उस का बड़ा भाई विदेश में नौकरी करता था. वह भी मलेशिया में नौकरी करता था. 3 साल नौकरी कर के वह 6 महीने पहले ही घर लौटा था. यहां आ कर उस ने पैट्रोल पंप के शेड बनाने का काम शुरू कर दिया था.

उसी दौरान उस की मुलाकात विपिन से हुई थी. अमृतपाल साफसुथरी छवि वाला आदमी था, पर पैसों की वजह से उसे लालच आ गया. उस ने इस काम के लिए 15 लाख रुपए मांगे. सौदेबाजी के बाद मामला 8 लाख रुपए में तय हो गया. शंटू ने उसी समय विपिन को 1 लाख 40 हजार रुपए एडवांस दे दिए. इन रुपयों से विपिन और अमृतपाल उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद गए और वहां से किसी से एक पिस्तौल और गोलियां खरीद लाए.

शंटू ने अपनी पत्नी परमजीत कौर उर्फ पम्मी की हत्या की सुपारी अपनी प्रेमिका रूबी के कहने पर दी थी. हत्या की योजना बन जाने के बाद शंटू ने विपिन और अमृतपाल को अपनी कोठी का पूरा नक्शा समझाते हुए एकएक बात बारीकी से समझा दी कि कैसे उन्हें कोठी में दाखिल होना है और कैसे हत्या करनी है. उस के बाद फ्रिज के पीछे टंगी पिछले दरवाजे की चाबी से ताला खोल कर बाहर निकल जाना है.

शंटू ने विपिन और अमृतपाल को अपने घर के सभी सदस्यों की भी पूरी जानकारी दे दी थी कि कौन किस वक्त कहां होता है. हत्या करवाने के लिए शंटू ने शाम 4 से 5 बजे का टाइम तय किया था. क्योंकि वह जानता था कि उस समय परमजीत कौर कोठी में अकेली होती है.

21 फरवरी, 2017 को शंटू की योजनानुसार विपिन और अमृतपाल उस की कोठी नंबर 141 पर पहुंचे. उन्होंने यह कह कर घर में लगे सीसीटीवी कैमरों के कनेक्शन काट दिए कि शंटू भाई ने कहा है कि इन पुराने कैमरों की जगह अब नए मौडर्न कैमरे लगाए जाएंगे. इसी बहाने वे कोठी के अंदरूनी भाग को पूरी तरह देखसमझ आए. अगले दिन 22 फरवरी, 2017 को दोनों फिर से कोठी पर गए और वहां रखा डिजिटल वीडियो रिकौर्डर और मौनीटर भी उठा लाए.

23 फरवरी, 2017 की शाम करीब 4 बजे दोनों फिर कोठी पर पहुंचे और अपनी योजनानुसार इस हत्याकांड को अंजाम दे कर चुपचाप निकल गए. बात केवल परमजीत कौर उर्फ पम्मी की हत्या करने की हुई थी. इसलिए विपिन और अमृतपाल दलजीत कौर और खुशवंत कौर की हत्या नहीं करना चाहते थे, लेकिन हालात ऐसे बन गए कि उन्हें उन की भी हत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

शंटू को इस बात की आशंका बिलकुल नहीं थी कि उस की मां की भी मौत हो सकती है. वह अपनी मां से बेहद प्यार करता था. इस का उसे बहुत पश्चाताप है. रिमांड के दौरान पूछताछ करते समय वह अपनी मां को बारबार याद कर के रोने लगता था. उसे इस बात का अफसोस है कि उस की अय्याशियों और बेवजह की हठधर्मी से उस के परिवार का विनाश हो गया.

विपिन और अमृतपाल फरार हो गए थे. उन की तलाश में पुलिस की एक टीम दिल्ली और गाजियाबाद भी गई, पर वे पुलिस के हाथ नहीं लग सके. पुलिस ने अमरिंदर सिंह उर्फ शंटू और तेजिंदर कौर उर्फ रूबी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है. कथा लिखे जाने तक विपिन और अमृतपाल गिरफ्तार नहीं हो सके थे.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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