Hindi Story. पूर्णिमा एक कामयाब बिजनैसवुमन थी, पर उस का पति उस के गोलमटोल शरीर का सरेआम मजाक उड़ाता था. फिर एक डेटिंग ऐप पर पूर्णिमा की मुलाकात शोएब से हुई जो औरतों की जिस्मानी भूख शांत करता था. आगे क्या हुआ?
किसी दार्शनिक ने बहुत सही कहा है कि औरतों को कामयाबी पाने के लिए मर्दों की तुलना में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है.
पूर्णिमा की जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार थी, भीतर से उतनी ही खोखली और अंधेरी हो चुकी थी. एक बहुत ही कामयाब और होशियार बिजनैसवुमन, मार्केटिंग कंपनी की हैड होने के नाते वह बोर्डरूम में बड़ेबड़े फैसले लेती थी, लेकिन घर में उस का सामना विक्रम की कड़वाहट और अनदेखी से होता था.
विक्रम का रूखा बरताव केवल पूर्णिमा की उदासी की वजह नहीं था, बल्कि वह पूर्णिमा के आत्मविश्वास को धीरेधीरे खत्म कर रहा था.
विक्रम पूर्णिमा को ‘बौडी शेम’ का अहसास कराता था. उसे अपनी हाईप्रोफाइल पत्नी पसंद नहीं थी, वजह यह कि उस का गोलमटोल और भारी शरीर.
विक्रम को अपनी पत्नी अच्छी नहीं लगती थी, क्योंकि वह किसी फिल्म हीरोइन की तरह छरहरी और सैक्सी नहीं थी. उस से पसीने की बदबू आती थी, उसे सलीके से बनसंवर कर रहना नहीं आता था, वह पति की सेवा नहीं करती थी, उसे एक कप चाय बनानी नहीं आती थी वगैरहवगैरह.
पूर्णिमा हर जोरजुल्म सहती रही, लोकलाज के डर से उस ने तलाक लेने की भी कोशिश नहीं की.
विक्रम की एक छोटी सी सरकारी नौकरी पूर्णिमा के मल्टीनैशनल कंपनी के हैड की तगड़ी सैलरी के आगे एक फूटी कौड़ी के जैसे थी, फिर भी उसे पूर्णिमा को अपने साथ किसी सामाजिक समारोह में ले जाने में शर्म महसूस होती थी.
विक्रम पूर्णिमा की चचेरी बहन रिद्धि से प्रभावित था. एक सिंपल ग्रेजुएट, घरेलू लेकिन कायदे की लड़की. वह उसे गिफ्ट देता रहता था, वे दोनों फोन पर बतियाते रहते थे और शायद मिलते भी हों.
पूर्णिमा ये सभी बातें नजरअंदाज करती रहती थी लेकिन एक दिन पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा.
दीवाली की उस रात, जब पूरा घर दीयों की रोशनी से जगमगा रहा था, पूर्णिमा की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिस ने उसे अंदर तक तोड़ दिया. पूर्णिमा ने रंगे हाथों दोनों को एक कमरे में देख लिया.
रिद्धि बिस्तर पर लेटी हुई थी, जांघें फैलाए, और विक्रम उस के ऊपर सवार था. दोनों की सांसें तेज थीं और विक्रम के हाथ उस के कूल्हों को कस कर पकड़े हुए थे.
नीचे पूरा घर दीवाली की पूजा की तैयारी कर रहा था और ऊपर दोनों एक बंद कमरे में क्या कर रहे थे? विक्रम ने बहाना बना दिया कि उसे पता नहीं था कि रिद्धि बाथरूम में नहा रही है. पूर्णिमा ने भी ऐसे जाहिर किया कि उसे उन के ?ाठ पर विश्वास हो गया है कि ऐसा ही है.
उस दिन पूर्णिमा पूरी तरह टूट गई. वह दिनोंदिन और ज्यादा डिप्रैशन में आने लगी. उस ने बहुत ज्यादा शराब और सिगरेट पीना शुरू कर दिया. उस का ब्लड प्रैशर और शुगर गड़बड़ होना शुरू हो गया.
किसी हमदर्द ने डेटिंग ऐप्स का सु?ाव दिया, तो पूर्णिमा भी किसी सच्चे और हमदर्द साथी की तलाश में डेटिंग ऐप स्क्रौल करने लगी.
कौफी शौप में एक मीटिंग के बाद पूर्णिमा को शोएब पसंद आ गया था. उसी दिन वह एक होटल के कमरे में एक जिस्म दो जान हुए. शोएब दिल से उस के शरीर की तारीफ करते हुए चूम रहा था, सहला रहा था.
पहली बार पूर्णिमा को ‘बौडी शेम’ की जगह अपने शरीर की खूबसूरती का अहसास हो रहा था. अपनी जिंदगी में वह मुश्किल से चौथी बार किसी मर्द से शारीरिक सुख हासिल कर रही थी और यह पल उस की जिंदगी के यादगार लमहे बन गए थे.
शोएब, जो असल में एक मेल एस्कौर्ट था. असंतुष्ट औरतों को शारीरिक संतुष्टि देना उस का पेशा था. उस ने ट्रेनिंग ली थी कि कैसे शरीर के हर उभार की तारीफ करनी है, कैसे धीरेधीरे प्रेम जगाना है.
शोएब ने मजबूरी में यह धंधा जौइन किया था लेकिन अब एक कामयाब और अमीर औरत से शादी कर के वह अपनी गृहस्थी बसाना चाहता था, इसीलिए उस ने पूर्णिमा का हर तरीके से शिकार किया था. हर दिन मैसेज, फोन करना, तारीफें…. ‘तेरे बिना मेरा दिन अधूरा है’, ‘तेरा जिस्म मुझे पागल कर देता है’.
इन बातों को सुन कर पूर्णिमा पिघल जाती थी. पहले वे महीने में एक बार मिले थे, अब हर हफ्ते. वह शोएब के बताए रंग और डिजाइन के कपड़े पहनती… टाइट ब्लाउज जो उस के उभारों को उभारते, स्कर्ट जो उस की मोटी जांघों को दिखाती.
शोएब पूर्णिमा को हर जगह ले जाता और हर जगह मजे लेता. कभी हंसते हुए पूर्णिमा कहती, ‘‘तुम तो पेड़पौधों में भी हवस जगा सकते हो,’’ तो शोएब लहराते हुए भद्दी हंसी हंसता, फिर उस के शरीर को अपनी बांहों में भर लेता.
एक शाम कार में शोएब ने पूर्णिमा को पीछे की सीट पर लिटाया. स्कर्ट ऊपर की, पैंटी नीचे. पूर्णिमा ने मुंह दबाया ताकि बाहर आवाज न जाए.
यह सब पूर्णिमा के लिए बिलकुल नया अनुभव था. पहली बार, उसे अपने शरीर को ले कर किसी तरह की शर्मिंदगी का अहसास नहीं हुआ. सालों बाद वह खुद को किसी के करीब महसूस कर रही थी.
लेकिन पूर्णिमा इस बात से बेखबर थी कि शोएब की इस नजदीकी के पीछे एक सोचीसमझी योजना थी. शोएब, जो जिंदगी की मुश्किलों से जूझ रहा था, एक शानदार जिंदगी की तलाश में था. पूर्णिमा भी धीरेधीरे उस के जाल में उलझती चली गई.
3 महीने के समय में पूर्णिमा ने महसूस किया कि वह शोएब को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहती है. जब शोएब ने अपनी पैसे की तंगी, बीमार मां और बेरोजगारी का जिक्र किया, तो पूर्णिमा ने बिना किसी झिझक उस की मदद करने का फैसला किया.
पूर्णिमा ने शोएब को अपनी कंपनी में पर्सनल असिस्टैंट की नौकरी दिलवा दी और उस के रहने के लिए एक फ्लैट का डाउन पेमेंट भी किया.
शोएब को कंपनी में पर्सनल असिस्टैंट का पद मिले अभी 2 ही महीने हुए थे, और पूर्णिमा की जिंदगी एक अलग ही रफ्तार पकड़ चुकी थी. कौरपोरेट वर्ल्ड में पूर्णिमा का रोब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया था और उस के पीछे की वजह थी उस का नया आत्मविश्वास. लेकिन जिस बुनियाद पर यह रिश्ता टिका था, उस की दरारें अब धीरेधीरे सतह पर आने लगी थीं.
शोएब अपनी भूमिका बखूबी निभा रहा था. औफिस में वह एक अनुशासित और पेशेवर कर्मचारी की तरह रहता, लेकिन बंद कमरों में और वीकैंड्स पर वह पूर्णिमा को पूरी तरह अपने काबू में रखता.
पूर्णिमा को लगता था कि शोएब उस से बेपनाह प्यार करता है, लेकिन शोएब के दिलोदिमाग में गणित की सीधीसपाट कैलकुलेशन चल रही थी.
शोएब ने पूर्णिमा के दिए हुए फ्लैट का इंटीरियर अपनी पसंद से करवाया, लग्जरी गाडि़यों के सपने देखे और धीरेधीरे कंपनी के अंदरूनी मामलों में अपनी दखलअंदाजी बढ़ानी शुरू कर दी.
दूसरी तरफ, विक्रम की जिंदगी में सब कुछ सही नहीं चल रहा था. पूर्णिमा का घर पर न के बराबर रहना, उस का बदलता पहनावा और उस की बेफिक्री विक्रम को खटकने लगी थी. जिस पत्नी को वह ताने दिया करता था, वही पत्नी अब उस की तरफ देखती तक नहीं थी.
विक्रम का अहंकार आहत होने लगा. उस ने पूर्णिमा का पीछा करना शुरू किया और जल्द ही उसे पता चल गया कि पूर्णिमा की जिंदगी में कोई नया शख्स आ चुका है और वह कोई और नहीं, बल्कि उस की ही कंपनी का पीए शोएब है.
एक शाम, जब पूर्णिमा औफिस के देर तक चले काम के बाद शोएब के साथ अपने नए अपार्टमैंट में समय बिता रही थी, विक्रम वहां अचानक पहुंच गया. उस ने पूर्णिमा पर कुलटा का आरोप लगाते हुए जोरजोर से चिल्लाना शुरू कर दिया.
विक्रम को लगा था कि पूर्णिमा हमेशा की तरह डर जाएगी, समाज का दुहाई दे कर रोने लगेगी या माफी मांगेगी.
लेकिन इस बार पूर्णिमा का रूप बदला हुआ था. उस ने शांति से अपने पर्स से कुछ कागजात निकाले. वे तसवीरें और सुबूत थे, जो उस ने दीवाली वाली रात के बाद विक्रम और रिद्धि के खिलाफ एक प्राइवेट डिटैक्टिव से जमा करवाए थे.
पूर्णिमा ने एक ठंडी मुसकान के साथ विक्रम की तरफ देखते हुए कहा, ‘‘जिस कांच के घर में तुम सालों से रह रहे थे विक्रम, उस की छत बहुत पहले गिर चुकी है. कोर्ट में जब ये दस्तावेज जाएंगे, तो तुम्हारी सरकारी नौकरी और बचीखुची इज्जत दोनों नीलाम हो जाएंगी. चुपचाप तलाक के कागजों पर दस्तखत करो और मेरी जिंदगी से निकल जाओ.’’
विक्रम बदहवास हो कर वहां से चला गया. उस रात पूर्णिमा को लगा कि उस ने अपनी जिंदगी की सब से बड़ी जंग जीत ली है. उस ने शोएब को गले लगाया, यह सोच कर कि शोएब ही उस का असली सहारा है. लेकिन कहानी में असली मोड़ आना अभी बाकी था.
विक्रम से पीछा छूटने के कुछ ही हफ्तों बाद, पूर्णिमा को अपनी कंपनी के अकाउंट्स में कुछ बड़ी गड़बडि़यों का पता चला. कंपनी के एक बड़े क्लाइंट का फंड एक अनजान अकाउंट में ट्रांसफर किया जा रहा था. जब पूर्णिमा ने गहराई से छानबीन की, तो डिजिटल फुटप्रिंट्स सीधे शोएब के सिस्टम तक पहुंचे.
पूर्णिमा का दिल बैठ गया. उस ने जिस इनसान को अपना हमदर्द, अपना प्रेमी और अपना रक्षक समझा था, वह केवल उस के पैसे और रुतबे का इस्तेमाल कर रहा था. शोएब की मां की बीमारी, बहन की शादी… सब एक रची हुई पटकथा का हिस्सा थे.
शोएब का मकसद कभी पूर्णिमा से शादी कर के बसना नहीं था, बल्कि उसे भावनात्मक रूप से इतना निर्भर बना देना था कि वह कंपनी का एक बड़ा हिस्सा उस के नाम कर दे.
शोएब की चोरी पकड़ने के बाद पूर्णिमा ने उसे, उसी कैंडललाइट डिनर पर बुलाया जहां वे पहली बार मिले थे. शोएब को लग रहा था कि पूर्णिमा उसे कंपनी में पार्टनर बनाने की घोषणा करने वाली है.
शोएब ने कहा, ‘‘आज काले रंग का लैस वाला सैट पहनना, और कोई अंदर वाला नहीं.’’
खाना खत्म होने के बाद, होटल के सुइट में शोएब ने पूर्णिमा को जी भर कर भोगा. उसे पूरा सुख दिया. काम खत्म होने के बाद पूर्णिमा ने टेबल पर 2 लिफाफे रखे.
‘‘पहला लिफाफा तुम्हारे रैजिग्नेशन लैटर और फ्लैट के कैंसिलेशन पेपर्स का है…’’ पूर्णिमा ने बहुत शांत आवाज में कहा, ‘‘और दूसरा लिफाफा उस पुलिस शिकायत की कौपी है, जो पैसे की धोखाधड़ी के जुर्म में तुम्हारे खिलाफ तैयार है.’’
शोएब का चेहरा फक पड़ गया. उस की सारी ट्रेनिंग, उस का आकर्षण और उस की चालाकियां पूर्णिमा के इस रूप के आगे धरी की धरी रह गईं. उस ने सफाई देने और पूर्णिमा को फिर से अपने प्यार के जाल में फंसाने की कोशिश की, लेकिन पूर्णिमा अब वह कमजोर औरत नहीं थी जो किसी के भी झूठे आकर्षण में आ जाए.
‘‘तुम ने मुझे शरीर की खूबसूरती का अहसास कराया, उस के लिए शुक्रिया, लेकिन तुम ने मुझे यह भी सिखाया कि मेरी असली ताकत किसी मर्द के दिए प्यार में नहीं, बल्कि मेरे अपने आत्मसम्मान में है.’’
पूर्णिमा ने शोएब को कंपनी से बेदखल कर दिया और विक्रम से कानूनी तौर पर अलग हो गई.
कुछ महीने बाद पूर्णिमा ने अपनी कंपनी का विस्तार एक नए शहर में किया. अब वह शराब या सिगरेट के सहारे नहीं जीती थी, न ही उसे अपना अकेलापन बांटने के लिए किसी ऐप या किसी मर्द की जरूरत थी. वह अपनी शर्तों पर जी रही थी…
एक ऐसी औरत के रूप में जिस ने टूटने से इनकार कर दिया था और अपनी जिंदगी की खुद मालिक बनी थी. Hindi Story




