Story in Hindi. 22 साल की नैना पहली बार अकेले नेपाल घूमने आई थी. उसे किसी धार्मिक जगह या भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थल में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी. वह पहाड़, जंगल, झीलें और खुली हवा देखना चाहती थी.
काठमांडू पहुंचने पर एक होटल के रिसैप्शन पर नैना की मुलाकात आकाश से हुई. आकाश स्थानीय नौजवान था और पर्यटकों को आसपास की जगहें दिखाने का काम करता था.
आकाश इस होटल के मैनेजमैंट से जुड़ा हुआ था. जो भी टूरिस्ट होटल में रुकने के लिए आते तो आकाश ही उन का गाइड बन जाता.
आकाश की उम्र यही कोई 25 साल के आसपास होगी. छोटीछोटी आंखों वाले आकाश के चेहरे पर जमानेभर का भोलापन था. वह थोड़ा जल्दीजल्दी बोलता था और उस की बोली में नेपाली भाषा का असर भी साफ झलकता था. इसी भोलेपन के कारण वह सहज ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर लेता था.
‘‘मैडम, अगर आप को सच में नेपाल देखना है तो सिर्फ शहर मत देखिए, पहाड़ों और जंगलों की तरफ चलिए,’’ आकाश ने कहा तो नैना ने पूछा, ‘‘और अगर मैं रास्ते में पहाड़ों में खो जाऊंगी तो?’’
आकाश हंस पड़ा और उस ने कहा कि वह हर हाल में नैना को ढूंढ़ ही लेगा.
नैना को आकाश का यह जवाब अच्छा लगा.
उ स दिन नैना ने आराम करना ही उचित समझा. वह होटल के कमरे में गई. अपना सामान एक ओर रख दिया और गरम पानी से शावर लिया और फिर एक कौफी मंगवा कर पी. उस ने कुछ भी खाने के लिए और्डर नहीं किया, बल्कि वह अपने साथ वर्मा बेकरी के बिसकुट ले कर आई थी. कौफी के साथ उस ने सिर्फ वे बिसकुट ही खाए.
उस रात नैना जल्दी ही सो गई और जब अगली सुबह उठी तो वह एकदम फ्रैश थी और उस की आंखें नेपाल की खूबसूरती देखने के लिए उतावली हो रही थीं.
नैना नीचे रिसैप्शन पर पहुची तो उस ने देखा कि आकाश पहले से ही वहां उस का इंतजार कर रहा था. उसे देख कर आकाश ने मुसकराते हुए नैना को जोरदार ढंग से ‘गुड मौर्निंग’ कहा और दोनों गाड़ी में बैठ कर घूमने निकल पड़े.
गाड़ी आगे बढ़ी तो नैना बाहर की ओर देखने लगी. कितनी खूबसूरती फैली थी चारों ओर. नैना की आंखें खूबसूरती को आंखों में बसाने में लगी हुई थीं.
गाड़ी चलते हुए लगभग आधा घंटा बीत चुका था और नैना अपने कैमरे से लगातार तसवीरें उतारे जा रही थी. काठमांडू शहर से उत्तर की तरफ जाने पर शिवापुरी इलाका था. यहां चारों ओर कुदरती खूबसूरती फैली हुई थी. झोल नाम का एक झरना भी बह रहा था वहां. नैना उसे अपलक निहारने लगी थी.
नैना बुदबुदा उठी थी कि किसी ने कितना सही कहा है कि गिरो तो झरने की तरह गिरो जिस मे असीम सुंदरता समाहित हो… झरने पर नजर गड़ाए हुए ही नैना गाड़ी से उतरी और झोल वाटरफाल की तसवीरें लेने लगी.
आकाश ने भी झरने के आगे नैना के साथ सैल्फी ली और तसवीरें लेने के बाद वे लोग आगे बढ़ गए. फिर एक छोटी झील के किनारे काफी देर बैठे रहे. झोल का पानी बिलकुल शांत था और सामने के पहाड़ बादलों में आधे छिपे हुए थे.
नैना ने कहा, ‘‘यह जगह तो तसवीरों में देखी गई जगह से ज्यादा खूबसूरत है.’’
आकाश ने तुरंत जवाब दिया, ‘‘तसवीरें सच नहीं बोलती हैं, क्योंकि तसवीरों में हवा नहीं होती.’’
नैना हंस पड़ी. उस दिन के बाद वे दोनों लगभग हर दिन साथ घूमने लगे. कभी पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलते, कभी छोटी सी चाय की दुकान पर बैठ जाते, तो कभी किसी ऊंचे स्थान से नीचे फैली घाटी देखते.
आकाश ने नैना से पूछा कि उस के चले जाने के बाद भी वह अपने चारों ओर एक अजीब सी खुशबू महसूस करता रहा है, तो इस बात पर नैना ने मजाक में कहा कि यह तो उस की पर्सनालिटी की खुशबू है. असल में नैना मस्क का परफ्यूम का प्रयोग करती थी जिस की खुशबू काफी देर तक बनी रहती है.
नैना को आकाश हर जगह से जुड़ी हुई कोई न कोई कहानी जरूर बताता. कई बार तो नैना को लगता कि आकाश उसे खुश करने के लिए सिर्फ मनगढ़ंत कहानी सुना रहा है पर आकाश तो अपनी बताई गई हर बात को सच बताता और उस की सच्चाई साबित करने पर आमादा भी रहता.
धीरेधीरे नैना को महसूस होने लगा कि नेपाल की जगहों की खूबसूरती आकाश के शब्दों के बयान से और भी ज्यादा सुंदर हो जाती है.
नैना ‘भुवन सुंदरी’ नाम के होटल में रुकी हुई थी और इस होटल के एक किलोमीटर आगे चलने पर छोटा सा भोजनालय था, जिसे दिलीप और उस की पत्नी सरिता चलाते थे.
एक शाम वहां जोरजोर से झगड़ा हो रहा था. दिलीप अपनी पत्नी सरिता से लड़ रहा था. दोनों में झगड़ा पैसों को ले कर था.
दिलीप अपनी पत्नी से कह रहा था कि वह ग्राहकों से खाने के कम पैसे लेती है, जबकि सरिता का कहना था कि जब हर चीज का दाम फिक्स है तो कम पैसे लेने का मतलब ही नहीं है.
नैना थोड़ी देर ये सब देखती रही फिर चुपचाप वहां से हट गई. बाद में उस ने आकाश से पूछा कि क्या इन के बीच हमेशा ऐसा ही रहता है?
आकाश ने नैना को बताया कि असल में दिलीप को जुआ खेलने की लत है और वह शहर के कसीनो में रोज जा कर जुआ खेलता है और फिर अपनी पत्नी से नजर बचा कर खुद के होटल में ही चोरी करता है और बड़ी चतुराई से इलजाम अपनी पत्नी पर मढ़ देता है.
पैसा बहुत से रिश्ते बनवा भी देता है और बहुत जल्दी भरोसा तोड़ भी देता है. आकाश के द्वारा कही गई यह बात नैना के मन में रह गई थी.
नैना ने बातोंबातों में आकाश के परिवार के बारे में उस से पूछा तो आकाश ने उसे बताया था कि भरापूरा परिवार है उस का. मांबाप के अलावा उस की 2 छोटी बहनें भी हैं जो अभी कुंआरी हैं और उन के लिए आकाश लड़का ढूंढ़ रहा है. बस थोड़े पैसे और जमा हो जाएं फिर वह बारीबारी दोनों बहनों की शादी कर देगा.
कितनी जिम्मेदारी निभा रहा है आकाश और अपने परिवार के प्रति कितना सच्चा और ईमानदार है… नैना की नजर में आकाश का कद और बढ़ गया था.
अगले दिन आकाश नैना को नागरकोट नाम की ऊंची पहाड़ी पर ले गया जहां से सूर्यास्त और सूर्योदय का दृश्य बहुत लुभावना लगता था.
आकाश ने नैना को बताया कि सभी टूरिस्ट को यह जगह बहुत पसंद आती है. नैना ने उस से पूछा कि क्या एक बार जो पर्यटक उस के पास आते हैं, वे दोबारा भी उसी के पास आते हैं?
तो बदले में आकाश के स्वर में थोड़ी निराशा झलक आई थी. उस ने बताया कि बहुत सारे लोग बड़े वादे कर के तो जाते हैं कि हम तुम से मिलने जरूर आएंगे, पर ज्यादातर लोग वापस नहीं आते. आते भी हैं तो किसी और होटल में किसी और गाइड के साथ.
दुनिया बहुत बड़ी है मैडम, तरहतरह के लोग हैं बिलकुल इंद्रधनुष के रंगों की तरह… सामने निकले हुए इंद्रधनुष को देखते हुए आकाश ने कहा.
‘‘पर मैं वापस जरूर आऊंगी,’’ नैना ने आकाश की छोटी और मासूम आंखों में झांकते हुए कहा.
इस बीच शाम हो रही थी. नीचे पूरा इलाका धुंध में डूब रहा था और आसमान धीरेधीरे नारंगी हो रहा था. दोनों वापस आने के लिए नीचे उतरने लगे थे.
रात को बारबार बिजली कड़कती रही. नैना को खयाल आया कि पहाड़ों पर बारिश को अच्छा नहीं माना जाता. कहावत है कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आती. नैना ने खिड़की से ?ांका तो उसे अहसास हुआ कि बादल छाए हुए हैं, बारिश हो सकती है.
पर अगली सुबह आकाश जल्दी आ गया था और नैना और वह पैदल ही घूमने निकले थे. अभी वे रोड के किनारे की टपरी पर चाय पी रहे थे कि मौसम अचानक कुछ ज्यादा ही बिगड़ गया. आसमान घनघोर काला हो गया, पहाड़ों से तेज आवाजें आने लगीं.
पहले लोगों को लगा कि कहीं भूस्खलन हुआ है पर असल में बादल फटने के कारण एक ही जगह ढेर सा पानी आ गया था और अब वह पानी लगातार आगे बढ़ता जा रहा था.
फिर पानी और मलबे का तेज बहाव सड़क की तरफ आया. इसी समय तेज आंधी भी चलने लगी थी. लोगों में भगदड़ मच गई.
पानी का बहाव अपने साथ मिट्टी के मलबे को ले कर आ रहा था और रास्ते में पड़ने वाली हर चीज को अपने साथ बहा ले जाने पर आमादा था.
आकाश ने नैना का हाथ पकड़ा और दोनों बेतहाशा भागने लगे. नैना को ज्यादा कुछ समझ नहीं आ रहा था, पर फिलहाल तो जान बचाने के लिए किसी महफूज जगह पर पहुचना था, इसलिए दोनों के हाथ एकदूसरे के हाथों को जकड़े हुए थे. वे दोनों लगातार भाग रहे थे लेकिन कुछ ही पल में उन के बीच लोगों की भीड़ और मलबा आ गया.
आकाश एक तरफ फंस गया. फिर पानी और मलबे की एक लहर दोनों के बीच आ गई और दोनों एकदूसरे से अलग हो गए.
आकाश ने चीख कर नैना को ऊपर की तरफ जाने को कहा था जहां वह महफूज रह सकती थी और नैना उसी दिशा में बेतहाशा बढ़ती चली गई.
नैना महफूज जगह पहुंच गई थी. वह चारों ओर के भयानक मंजर को देख कर बुरी तरह डर गई थी.
आकाश कहीं दिखाई नहीं दे रहा था. बाढ़ का पानी और मलबे का बहाव कुछ घंटों के बाद शांत हुआ पर इतनी देर में काफीकुछ तबाह हो चुका था. जानवर, इनसान और दुकानें बह गई थीं और बहुत सारे लोगों के घर तक ढह गए थे.
घटना के बाद से ही नेपाल की सरकार हरकत में आ गई और राहत शिविर लगाए जाने लगे. लोगों के लिए खानेपीने का सामान पहुंचाया जाने लगा. बिछड़े लोगों को उन के परिवार से मिलाए जाने की कवायद तेजी से चल रही थी.
नैना के पास उस का मोबाइल भी तो नहीं था जो वह आकाश को ढूंढ़ती, इसलिए उस ने चारों ओर जाजा कर कर आकाश को ढूंढ़ना शुरू किया. वह ऐसा क्यों कर रही थी? वह एक गाइड के लिए क्यों इतना परेशान हो रही थी? खुद उसे भी पता नहीं था.
नैना ने एक राहत शिविर में पता किया पर उस के पास आकाश की कोई तसवीर नहीं होने के कारण कुछ पता नहीं चल पाया था. घायलों की लिस्ट में आकाश का नाम नहीं था.
उस गार्ड ने यह जरूर बताया कि नीचे एक हाइड्रोपावर प्लांट है जिस के अंदर बहुत सारे लोग फंस गए हैं और जिन के बच पाने की उम्मीद बिलकुल भी नहीं है.
नैना का दिल यह सुन कर बैठ गया था पर वह क्या कर सकती थी… नैना नीचे की जगह चल कर पहुंच गई जहां पर लोग फंसे हुए थे, पर पुलिस ने नैना को और आगे नहीं जाने दिया.
नैना की आंखों में आंसू आ गए, पर वह इस समय लाचार थी और बहुत ही अकेलापन महसूस कर रही थी. उस का दिल तो बारबार कह रहा था कि आकाश जिंदा है, पर वह कहां और किस हाल में होगा, यह पता नहीं चल पा रहा था.
नैना बहुत थकी हुई थी. वह अंदर से पूरी तरह से टूट चुकी थी और उसे कमजोरी भी महसूस हो रही थी. वह राहत शिविर में वापस आ गई और अपने भारतीय पर्यटक होने का पूरा ब्योरा नोट कराया.
2 दिन तक नैना को उसी राहत शिविर में रहना पड़ा था, उस के बाद नेपाल सरकार की तरफ से सभी पर्यटकों को वापस उन के देश में भेजने का इंतजाम कर दिया था.
एयरपोर्ट पर भी नैना की आंखें लगातार आकाश को ही ढूंढ़ रही थीं, पर आकाश न जाने कहां खो गया था.
नैना भारत अपने शहर लखनऊ लौट तो आई थी, पर रात को उसे नेपाल का वह दुखद और भयावह मंजर बारबार याद आता था तो उस के रोंगटे खड़े हो जाते थे.
नैना कई दिनों तक सामान्य जीवन नहीं जी पा रही थी और इस सदमे से नजात पाने के लिए उस ने फेसबुक पर एक पेज बनाया, जिस का नाम रखा ‘नेपाल-उम्मीद की एक डोर’.
इस पेज पर लोग अपने खो गए रिश्तेदारों, दोस्तों और परिवार के लोगों के फोटोग्राफ, उन के मोबाइल नंबर और आखिरी बार उन को कहां देखा गया था, यह सब जानकारी अपलोड कर सकते थे.
नेहा को यह भी लग रहा था कि शायद इसी बहाने उसे आकाश मिल जाए, पर अभी तक तो आकाश का कोई अतापता नहीं था.
कहते हैं कि समय से बड़ा कोई मरहम नहीं होता है और वक्त बड़ेबड़े घाव भी भर देता है. धीरेधीरे नैना भी अपने मांबाप और अपने कामकाज में बिजी हो गई पर ऐसा एक पल भी नहीं था जब वह आकाश को एकदम से भूल पाई हो.
नैना के मांबाप चाहते थे कि वे अपनी एकलौती बेटी की शादी कर दें, पर नैना शादी के लिए हामी ही नहीं भर रही थी.
नैना का साफ कहना था कि जब उसे लगेगा कि उसे शादी की जरूरत है तब वह उन लोगों को बता देगी.
समय बीता पर नैना के मन के अंदर अभी भी बेचैनी सी थी. न जाने आकाश का क्या हुआ होगा? उस की बहनें और उस का परिवार किस हाल में होगा? ये खयाल आते थे नैना के दिमाग में, इसलिए पूरे एक साल बाद नैना ने एक बार फिर से नेपाल जाने का प्लान बनाया और वह काठमांडू के उसी ‘भुवन सुंदरी’ नाम के होटल में पहुंच गई.
नेहा ने रिसैप्शन पर जा कर अपने लिए एक कमरा बुक कर लिया और यह भी बताया कि वह जंगल, नदीझरने तो देखना चाहती ही है पर साथ ही साथ वह उस इलाके में भी जाना चाहेगी जहां पर पिछले साल बादल फटने के कारण तबाही आ गई थी.
मैनेजर ने नैना की बात सुन कर उसे बताया कि कल सुबह वह नैना को इन सब जगह घुमाने के लिए एक गाइड का इंतजाम कर देगा.
अगली सुबह नैना ने ब्लू कलर की जींस पर आसमानी रंग का टौप पहना और अपने बाल खुले रहने दिए. वह अपना फेवरेट मस्क डियो लगाना नहीं भूली थी.
‘‘आप के लिए गाइड और गाड़ी तैयार है मैडम,’’ मैनेजर ने बताया और किनारे खड़े आदमी की तरफ इशारा किया.
नैना ने उस आदमी पर नजरें डालीं तो खुशी से चौंक गई. यह तो आकाश था. आकाश जिंदा था.
‘‘अरे, तुम ने मुझे फोन भी नहीं किया. अपने ठीक होने का मैसेज तो दे सकते थे. ऐसा क्यों किया तुम ने आकाश? मैं कितना परेशान थी तुम्हारे लिए,’’ एक ही सांस में न जाने क्याक्या कह जाना चाहती थी नैना.
आकाश, जो अब तक कुरसी पर बैठा हुआ था. वह अपनी कुरसी से धीरे से खड़ा हुआ. उस के एक हाथ में बैसाखी थी.
नैना की सवालिया नजरें आकाश के पैरों की तरफ गईं. आकाश ने फीकी मुसकराहट के साथ उसे बताया कि एक पैर तो पिछले साल के हादसे में ही चला गया था, पर नैना को घबराने की जरूरत नहीं है, वह अब भी उसे पूरी शिद्दत से वे सारी जगहें घुमा देगा जो पिछले साल उस ने दिखाई थीं.
नैना थोड़ी देर तो खामोश रही. उसे आकाश को इस हाल में देख कर कुछ अच्छा नहीं लगा था. नैना ने एक लंबी सांस छोड़ी और फिर आकाश से उस ने सब से पहले नागरकोट वाली पहाड़ी पर ले चलने को कहा. वह आज फिर से वही खूबसूरत नजारा देखना चाहती थी.
कुछ देर की ड्राइविंग के बाद आकाश और नैना नागरकोट की पहाड़ी पर बैठे हुए थे. नैना उसे अपने पिछले साल की सारी बातें बता रही थी, जिस में उस ने यह भी बताया कि उस ने अभी तक उस ने शादी नहीं की है.
आकाश ने भी बताया कि फिलहाल उस की जिंदगी में भी कुछ नहीं बदला है, उलटा हालात बदतर ही हुए हैं. उस का घर बाढ़ से टूट गया था और उस की दोनों बहनें अब भी कुंआरी हैं, पर उस ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. वह अभी एक टांग से ही बहुतकुछ कर पाने में समर्थ है. आकाश की बातें सुन कर नैना मुसकरा दी.
‘‘आप वापस आईं, मुझे बहुत अच्छा लगा. आप के पास से आज भी वही पुरानी खुशबू आ रही है,’’ आकाश ने कहा तो नैना ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘जिन से एक रिश्ता बन जाता है उन के पास तो वापस आना ही पड़ता है.’’
आकाश ने अपनी नजरें नैना के चेहरे पर गड़ा दीं और पूछा, ‘‘भला एक गाइड और एक टूरिस्ट के बीच कौन सा रिश्ता हो सकता है?’’
नैना थोड़ी देर कुछ न बोल सकी, फिर उस ने कहा, ‘‘अरे दोस्ती का आकाश, मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूंगी. हम दोनों जीवनभर अच्छे दोस्त बन कर रहेंगे. फोन पर एकदूसरे का हालचाल लेते रहेंगे और सोशल मीडिया पर भी एकदूसरे से जुड़े रहेंगे.’’
‘‘बिलकुल मैडम, आप अपनी शादी में मुझे जरूर बुलाना. अपनी एक टांग पर खूब नाचूंगा मैं,’’ आकाश ने भोलेपन से कहा तो प्यार से नैना ने उस का हाथ अपने हाथों में ले लिया.
नैना और आकाश ने देखा कि सामने की ओर एक सतरंगी इंद्रधनुष अपनी छटा बिखेर रहा था.Story in Hindi




