Hindi Story. उस ने आज फिर शाम होते ही खुद को अपने कमरे में बंद कर लिया और मुझे उलझन होने लगी. मैं खुद को रोक नहीं पाया और अब मैं उस के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था.
थोड़ी देर में उस ने दरवाजा खोला, ‘‘क्या है अजय? मैं कुछ देर अकेला रहना चाहता हूं. प्लीज, मुझे छोड़ दो,’’ और वह अजीब सी दयनीय सूरत बना कर एक तरह से मुझ से निवेदन करने लगा.
मुझे यह देख कर घबराहट होने लगी. मैं ने उस के कमरे में लगभग दाखिल होते हुए पूछा, ‘‘क्यों इतनी परेशानी हो रही है? मैं दोस्त हूं तुम्हारा, मुझे अपना दर्द बताओ. कहने से दर्द कम हो जाता है. अकेले घुटघुट कर सहने से अच्छा है कि दर्द को कह दिया जाए,’’ मैं देख रहा था कि उस की आंखें भर आई थीं और लग रहा था कि अभी वह रो देगा.
मैं ने उस की बांह पकड़ कर सोफे पर बैठा दिया और खुद उस के पास ही बैठ गया, ‘‘रवि, मुझेबताओ क्या है जिस ने तुम्हें इतना अकेला बना दिया है कि तुम मुझे अपने बचपन के दोस्त से भी नहीं बताना चाहते? इस तरह से घुटते रहोगे तो बीमार पड़ जाओगे. मुझे अपना सारा दर्द बताओ. हम जरूर कुछ मदद कर सकते हैं,’’ मैं ने उसे समझाया.
र वि इतना सुनते ही रो पड़ा और बच्चों की तरह फूटफूट कर रोते हुए लिपट गया, ‘‘अजय, मैं जीना नहीं चाहता हूं. मेरी जिंदगी में अब कुछ नहीं बचा है. मेरे जीने का मकसद ही खत्म हो गया है.’’
‘‘मुझे बताओ क्या बात है?’’ मैं ने उसे सहलाते हुए कहा.
थोड़ी देर की चुप्पी के बाद वह कुछ संभलते हुए बोला, ‘‘अजय, मेरी जिंदगी में तूफान है और मैं एक ऐसी जगह खड़ा हूं जहां से न तो पीछे जा सकता हूं और न आगे,’’ थोड़ी देर की खामोशी के बाद रवि ने आगे कहना शुरू किया, ‘‘अजय, पहली बार मुझे जिंदगी में परिणीता से मिलने के बाद ऐसा लगा था कि कोई अनजानी सी ताकत है जो हमें करीब लाने की कोशिश कर रही है. यह सही था कि मुझे उस से प्यार हो गया था, धीरेधीरे हम कब एकदूसरे के होते चले गए हमें खुद ही पता न चला.
‘‘परिणीता मेरी जिंदगी में एक खूबसूरत सपने की तरह थी और हम दोनों इस सपने से बेहद गहरे जुड़े थे. हम इस सपने को जीना चाहते थे, लेकिन परिणीता के घर वालों को हमारे प्यार का पता चल गया. उस पर बंदिशों का पहरा लगा दिया गया और शादी के लिए एक लड़के की तलाश शुरू कर दी गई.
‘‘परिणीता एक बहुत ही होनहार लड़की थी. उस का सपना एक कामयाब मैनेजर बनने का था. वह मैनेजमैंट का कोर्स करने वाली थी. उस ने मुझे कहा था कि वह एमबीए करना चाहती है, लेकिन इस प्यार की वजह से मुझेडर लग रहा है कि उस के घर वाले जबरदस्ती उस की शादी कहीं भी करा देंगे और उस के सपने पूरे नहीं हो पाएंगे. मेरे लिए इस से बड़ी हार और कुछ नहीं हो सकती.
‘‘अजय, तुम उस के पिता से मिलो और उन्हें समझाओ कि उस के सपनों के साथ इस तरह से नाइंसाफी न करें. मैं खुद को रोक लूंगा. वे कहेंगे तो मैं कहीं दूर चला जाऊंगा. लेकिन वे परिणीता को अपना सपना पूरा करने दें,’’ इतना कह कर रवि चुप हो गया, उस की आंखें भर आई थीं.
मैं ने उसे तसल्ली दी और कहा कि मैं कोशिश करूंगा परिणीता के पिता से मिलने की, लेकिन दिक्कत यह थी कि मैं इस के पहले कभी परिणीता के पिता से मिला नहीं था और मेरा उन से पहले से कोई परिचय भी नहीं था.
बहरहाल, मैं ने रवि से वादा तो कर ही लिया था और उस की घबराहट देखने के बाद इस के अलावा और कोई चारा भी नहीं था.
उ से उस के घर छोड़ कर मैं लौट आया और सोचने लगा कि कैसे परिणीता के पिता से मिला जाए और इस मामले पर किस तरह बात की जाए कि परिणीता की पढ़ाई न रुके और वह अपने सपने को पूरा कर सके… यह सब सोचते हुए कब नींद आ गई पता ही नहीं चला.
अगले दिन मैं अपने औफिस जाने के लिए निकला और सोचा कि आज शाम लौटते हुए परिणीता के पिता से मिलने जाऊंगा.
औफिस पहुंच कर मैं अपने काम में बिजी हो गया था और लौटने के समय एक डिपार्टमैंटल स्टोर में कुछ जरूरी सामान खरीदने लगा. इसी बीच मुझे लगा कि कोई बहुत गौर से मु?ो देख रहा है. मैं ने ध्यान दिया तो कुछ दूरी पर मुझे लगा कि शायद परिणीता ही खड़ी थी… हां… यह परिणीता ही थी और उस के साथ उस की मां भी थीं.
मैं ने बिना समय गंवाए उन के पास पहुंचा और अभिवादन किया, ‘‘नमस्ते, आंटी.’’
‘‘नमस्ते बेटा, कैसे हो?’’ ‘‘मैं ठीक हूं आंटी… परी, कैसी हो?’’ मैं ने परिणीता से पूछा.
‘‘ठीक हूं,’’ उस ने उदास लहजे में जवाब दिया.
मैं ने जानबूझ कर पूछा, ‘‘क्या हाल है? पढ़ाई ठीक से चल रही है कि नहीं? देखो, अगले महीने यूनिवर्सिटी के मैनेजमैंट कोर्स का एंट्रैंस एग्जाम है. फार्म भर देना और तैयारी शुरू कर दो.’’
‘‘जी, ठीक है,’’ परिणीता औपचारिक रूप से बोली.
‘‘आंटी, आप की तबीयत ठीक है न?’’ मैं ने बात को बढ़ाने के लिए उस की मां से पूछा.
‘‘अब क्या तबीयत ठीक रहेगी बेटा, उम्र भी हो गई है. बस, परी की चिंता लगी है. इस के हाथ पीले हो जाएं तो मन को आराम मिले,’’ वे बोलीं.
‘‘अरे आंटी, ऐसी भी क्या जल्दी है… परी एक बहुत ही होनहार लड़की है. उसे आगे पढ़ाइए. शादी तो हो ही जाएगी,’’ मैं ने उस की मां को अपने मकसद की तरफ ले जाने की कोशिश की.
‘‘मैं तो चाहती ही हूं क्योंकि शादी में भी आजकल लड़के वाले नौकरी वाली लड़की की मांग करते हैं, पर इस के पापा जिद किए हुए हैं और जल्दी शादी करना चाहते हैं.’’
‘‘आंटी, ऐसी क्या बात है कि अंकलजी जैसे समझदार आदमी भी इस तरह की जिद कर बैठे हैं?’’
‘‘असल में इस के पापा रवि को पसंद नहीं करते और परी को यहां से हटाना चाहते हैं.’’
‘‘आंटी, रवि की वजह से परी का भविष्य बरबाद करना क्या उचित है? रवि से ज्यादा जरूरी परी की पढ़ाई, उस का भविष्य है, उस के सपने हैं और हर मांबाप का सब से बड़ी जिम्मेदारी अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने में सहयोग करना है न कि किसी छोटी समस्या को ले कर बच्चों के भविष्य को निराशा में धकेल देना,’’ मैं ने समझाने की पुरजोर कोशिश की.
‘‘मैं समझ सकती हूं और चूंकि लड़के वाले भी हर जगह नौकरी वाली लड़की की मांग करते हैं, इसलिए भी मैं नहीं चाहती कि परी की पढ़ाई में रुकावट आए.’’
‘‘आंटी, आप कहें तो मैं अंकल से बात करूं?’’ ‘‘कोशिश कर लो, मगर मु?ो नहीं लगता कि वे मानेंगे,’’ परिणीता की मां के स्वर में निराशा झलक रही थी.
‘‘ठीक है आंटी, मैं बात करूंगा, लेकिन जब मैं बात करूं तो आप भी वहां मौजूद रहेंगी. मैं कल सुबह ही आऊंगा.’’
‘‘ठीक है बेटा,’’ इतना कह कर उस की मां आगे बढ़ गईं और परिणीता थोड़ा पीछे रही. मैं ने उसे देख कर कहा, ‘‘बिलकुल परेशान मत होना. सब ठीक हो जाएगा.’’
मेरी बातें सुन कर परिणीता को तसल्ली हुई.
अगली सुबह होने के बाद मैं परिणीता के पिता से मिलने उसके घर पहुंचा तो देखा कि उस के पिता बाहर निकल रहे थे.
‘‘नमस्ते अंकल,’’ मैं उन के सामने पहुंच कर बोला. ‘‘नमस्ते बेटा, क्या हाल है? आजकल दिखाई नहीं देते,’’ वे बोले.
‘‘अंकल, काम बहुत बढ़ गया है औफिस में और इस के कारण जल्दी जाना होता है और लौटने में भी देर हो जाती है, इसलिए कहीं भी चाह कर भी नहीं जा पाता,’’ मैं ने सफाई देते हुए कहा.
‘‘देखो बेटा, अकेले रहोगे तो ऐसे ही परेशान रहोगे. या तो घर से किसी को बुला लो और नहीं तो बेहतर होगा कि शादी कर लो, सब सही हो जाएगा.’’
‘‘अंकल, मेरी सगाई हो चुकी है और शादी अभी कुछ समय बाद यानी अगले साल होगी. तब तक मेरी होने वाली वाइफ का भी बीएड पूरा हो जाएगा. हालांकि, मेरे मांबाप चाहते थे कि इसी साल शादी हो जाए, लेकिन ऋचा यानी मेरी होने वाली पत्नी से पता चला कि वह बीएड करना चाहती है तो मेरे मांबाप और मैं ने खुशीखुशी स्वीकार कर लिया,’’ मैं ने लगभग समझाते हुए कहा.
‘‘क्यों बेटा, वह शादी के बाद भी तो बीएड कर सकती है?’’ अंकल ने अपना नजरिया बताया.
‘‘अंकल, शादी हो जाने के बाद हर लड़की के हालात बदल जाते हैं और सोच में बदलाव आ जाता है. उम्मीदें भी हर किसी की परिवार में बढ़ जाती हैं, इसलिए लड़की ससुराल में रह कर पढ़ाई कर सकती हैं लेकिन उसे बहुतकुछ खोने का डर भी रहता है और अपने मातापिता के यहां रह कर वह अपनी पढ़ाई अच्छी तरह से बिना किसी दबाव के आसानी से पूरी कर सकती है,’’ मैं ने अंकल को प्रैक्टिकल पक्ष समझाने की कोशिश की.
‘‘हां, तुम्हारी बात कुछ सही है. चलो, ठीक है. बीएड कर लेने के बाद वह तुम्हारे लिए भी मददगार होगी.’’
हम लोग बात करते हुए थोड़ी दूर बाजार तक आ गए थे.
‘‘अंकल, बुरा मत मानना, पर आप परी को भी आगे पढ़ने से क्यों मना कर रहे हैं? जब वह एमबीए करना चाहती है तो उसे करने दीजिए, शादी तो बाद में भी हो जाएगी ’’ मैं ने अपने मेन मुद्दे पर आते हुए कहा.
‘‘देखो अजय, परी का मामला कुछ अलग है. मेरी भी इच्छा थी कि परी एमबीए करने के बाद ही अपने घर विदा हो लेकिन हालात कुछ बदल गए हैं.’’
‘‘शायद रवि के बारे में आप कुछ कहना चाहते हैं. मेरे विचार से इस मसले पर भी समझदारी से काम लेना ही मुनासिब होगा. जहां तक परी की पढ़ाई की बात है, मुझे पूरा विश्वास है कि रवि का मसला कोई बाधा नहीं बनेगा,’’ मैं ने पूरे विश्वास से कहा.
‘‘जहां तक मैं समझाता था रवि एक समझदार लड़का था, लेकिन वह परी के साथ रिश्ते बनाए, यह सोच कर मु?ो बहुत धक्का लगा.
‘‘अंकल, आप की चिंता जायज है. लेकिन परी मेरे लिए बहन की तरह है और इस आधार पर मैं कह सकता हूं कि सिर्फ रवि ही नहीं, बल्कि परी भी बहुत तेज दिमाग और समझदार लड़की है. ये दोनों ही बहुत भावुक हैं इसलिए ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है जिस से दोनों के परिवारों को कोई चिंता हो,’’ हम बात करते हुए एक पार्क में बैंच पर बैठ गए थे.
‘‘अजय, यह कैसे मुमकिन है कि परी इन हालात में पढ़ाई को एकाग्रता से पूरा कर पाएगी?’’ अंकल ने काफी सावधानी के साथ कहा.
‘‘इसलिए कि रवि खुद चाहता है कि परी को आगे एमबीए करने में कोई बाधा नहीं आए. वह तो जब तक परी की पढ़ाई पूरी न हो जाए अपना ट्रांसफर कहीं दूर करा लेना चाहता है,’’ मैं ने सच बता दिया.
‘‘क्यों? रवि इतनी परेशानी किसलिए उठाएगा? उसे ऐसा कुछ करने की कुछ भी जरूरत नहीं है.’’
‘‘अंकल, सच तो यह है कि जब 2 लोग आपस में सच्चा प्यार करते हैं तो वे सिर्फ और सिर्फ एकदूसरे को खुश देखना चाहते हैं चाहे इस के लिए उन्हें अपनी खुशी अपनी भावनाओं को आहत ही करना पड़े और इस में कोई शक नहीं है दोनों का प्यार तो एक सच्चाई है.’’
‘‘अजय, यह प्यार नहीं है, इस उम्र की भावनाओं का उभार है.’’
‘‘मैं आप को अपनी समझ से कह रहा हूं, आप को मानने के लिए कोई दबाव नहीं दे रहा हूं. अगर आप को बुरा लगा तो मुझे माफ कर दें.’’
‘‘नहीं बेटा, मुझे कोई बुरा नहीं लगा. तुम इसे गलत मत समझना,’’ अंकल की आवाज में भर्राहट सुनाई दे रही थी.
‘‘अंकल, आप भी मेरे पिता समान हैं. मैं आप की किसी बात का बुरा नहीं मान सकता और चूंकि मैं परी को भी अपनी बहन समझाता हूं, इसलिए इस हक से सच को कहने की हिम्मत कर सका,’’ मैं ने अंकल को संभालने की कोशिश की.
अ चानक ही अंकल ने मुझे अपने गले से लगा लिया और बुरी तरह से फूटफूट कर रोने लगे, ‘‘बेटा, मैं क्या करूं… परी मेरी एकलौती बेटी है और कभी भी मैं ने उसे किसी बात के लिए मना नहीं किया, उस की हर इच्छा पूरी की, पर आजकल मुझे क्या हुआ है… मैं कैसे इतना कठोर हो गया…’’
अंकल को घर छोड़ कर मैं चला गया. हालांकि देर हो गई थी. औफिस में बौस को भी देरी का कारण समझना पड़ा, पर मन में एक तरह का संतोष हो रहा था कि सबकुछ अच्छे तरीके से मैं ने उन लोगों को समझा दिया था.
शाम को घर आने के बाद फोन बजने लगा, ‘‘अजय, मैं अंकल बोल रहा हूं… तुम घर आ गए?’’
‘‘जी अंकल, मैं घर आ गया हूं.’’ ‘‘बेटा, कुछ बात करनी थी. मैं तुम से मिलना चाहता हूं. क्या मैं इस समय तुम से मिलने आ सकता हूं?’’
‘‘जी बिलकुल आ सकते हैं, लेकिन आप परेशान न हों, मैं खुद आ रहा हूं.’’ ‘‘नहीं बेटा, मैं आ रहा हूं,’’ अंकल ने फोन रख दिया.
थोड़ी देर में अंकल आए और अंदर आ कर बैठ गए, ‘‘दरवाजा बंद कर दो.’’ मैं ने दरवाजा बंद कर दिया और पूछा, ‘‘क्या बात है अंकल, कुछ परेशानी है?’’
‘‘नहीं अजय, मैं ने काफी सोचा और परी की मम्मी से भी बात की. परी की पढ़ाई पूरी कराने के बाद ही हम उस की शादी करेंगे, यह हम लोगों ने तय कर लिया है.’’
‘‘अंकल, यह तो बहुत ही अच्छी बात है. आजकल लड़कियों को अपने पैरों पर खड़ा होने के काबिल बनाने में मांबाप को पूरा सहयोग देना चाहिए. बहुत ही होनहार लड़की है परी. मु?ो बहुत खुशी हुई कि अब परी अपने सपनों को पूरा कर पाएगी,’’ मैं बहुत खुश हुआ. मु?ो लगा कि मेरी कोशिश कामयाब हो गई है.
‘‘बेटा, तुम ने मेरी आंखें खोल दीं. मैं ने परी को काफी टैंशन दी है. मैं उस से माफी मांगूंगा, पर बेटा तुम्हे परी को एडमिशन दिलाने में मदद करनी होगी.’’
‘‘जरूर अंकल, मैं पूरी तरह से मदद करूंगा. आखिर वह मेरी भी बहन ही तो है, आप चिंता न करें.’’
‘‘अगर बहन मानते हो तो एक जिम्मेदारी और निभानी पड़ेगी. कर सकोगे?’’ ‘‘आप बोलिए तो मैं हर जगह परी के भाई होने की जिम्मेदारी निभाऊंगा और मुझे बहुत खुशी होगी.’’
‘‘तो तुम्हें रवि को बताना होगा कि भले हम परी की शादी उस के एमबीए पूरा करने पर करेंगे लेकिन सगाई हम इस महीने में ही कर देना चाहते हैं.’’
‘‘ठीक है अंकल, लेकिन क्या किसी लड़के को देखा है और बातचीत पक्की हुई है?’’ ‘‘हां देखा और समझ भी है. परी को पसंद भी है, इसलिए रवि से
कहना कि अपने मातापिता को मुझ से मिलने दे और सगाई की तारीख जल्द ही तय कर ली जाए,’’ कहते हुए अंकल मुसकरा रहे थे और उन के चेहरे पर एक तरह की शांति नजर आ रही थी. Hindi Story




