Youth Protest. त्रेतायुग से ले कर आजादी के आंदोलन तक जितनी भी लड़ाइयां हुई हैं, वे सिर्फ सत्ता के लिए हुई हैं. रामरावण का युद्ध भी सत्ता के लिए था और कौरवपांडव भी कुरुक्षेत्र में किसी तत्कालीन एसआईआर को ले कर आमनेसामने नहीं आ खड़े हुए थे. तब मुद्दा हस्तिनापुर की गद्दी था जो दिल्ली से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर है. अब इसी दिल्ली में जेनजी प्रोटैस्ट पार्ट-2 में कौकरोच जनता पार्टी ‘ज्ञानू’ (सीईसी ज्ञानेश कुमार को प्यार से वह इसी नाम से पुकारती है ) के इस्तीफे से कम कुछ मंजूर नहीं.
बहुत से लोगों का मानना है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की संभावना कम है. हालांकि यही बात जुलाई के प्रोटैस्ट के दौरान भी कही गई थी कि कुछ भी हो जाए जिद्दी मोदी और उन की सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं करवाएंगे. लेकिन इस्तीफा हो ही गया तो हर कोई कौकरोचों और जेनजी के इस जौइंट वैंचर का कायल हो गया.
हकीकत में जेनजी के असल रोल मौडल सिर्फ अंबेडकर हैं, जिन्होंने संविधान बनाया, कानून बनाए जिस से दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यकों और महिलाओं को ज्ञात इतिहास में पहली बार धार्मिक जकड़न से मुक्ति के साथसाथ सवर्ण पुरुषों के बराबर अधिकार मिले. लेकिन जैसे ही मोदी सरकार ने इन संवैधानिक अधिकारों को कुचलना शुरू किया तो बिना किसी यज्ञ, हवन या वरदान के अभिजीत दीपके प्रकट हो गया.
प्रोटैस्ट पार्ट-1 की जीत के बाद जेनजी प्रोटैस्ट पार्ट-2 को ले कर भी पहले की तरह उत्साहित और गंभीर दिखा, बस निशाने पर ज्ञानेश कुमार उर्फ ज्ञानू हैं, जिन पर वोटर लिस्ट में धांधलियों के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट भी आंशिक रूप से मान चुका है. शिक्षा और स्कूल के बाद जेनजी अब चुनावी प्रक्रिया में सुधार को ले कर अड़ गई है जिस का पहला चरण वह मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को मान रही है.
यह इस्तीफा हो न हो लेकिन यह बेहद साफ हो गया है कि जेनजी मोदी सरकार से सत्ता नहीं चाहती. वह कह रही है आप ही जबावदेह बनो और सुधर जाओ. किसी से भी वोट का हक छीनना गैरसंवैधानिक है और देश का युवा इसे भी बरदाश्त नहीं करेगा. धीरेधीरे अभिजीत दीपके का कारवां बढ़ता जा रहा है जिसे देख कर केंद्र सरकार के हाथपैर फूले हुए हैं कि राहुल और प्रियंका की दैनिक गिरफ्तारियों को तो लोग एक दफा सियासी चश्मे से देखना गंवारा कर लेंगे लेकिन टीम दीपके पर यह थ्योरी लागू नहीं होती.
इसलिए लागू नहीं होती कि यह टीम अपनी पैदाइश के वक्त ही यह साफ कर चुकी है कि हम कोई राजनीति करने नहीं आए, हम हम चुनावों में उतर कर सत्ता नहीं चाहते. हम तो सिस्टम और लोकतांत्रिक संस्थाओं में सुधार चाहते हैं. इस के लिए हम एक पब्लिक प्रैशर ग्रुप की तरह काम करेंगे. इस के बाद बीती 6 अगस्त को अभिजीत दीपके ने कहा था कि इस देश में चुनाव लड़ने से क्या फायदा जहां वोट ही चोरी हो जाते हैं.
अब जिन लोगों को सुधार और जबावदेही से भी परहेज हो उन का कोई क्या कर लेगा. Youth Protest




