Editorial . पिछले कुछ सालों से पंडितों के गैंग ने पूरे समाज को बड़े हिस्सों में बांट दिया है और अब लोग खेमों में नजर आने लगे हैं चाहे एक ही धर्म और जाति के हों या अलगअलग. फूट डालो, राज करो का फार्मूला पंडितों का है, अंगरेजों का नहीं और इसी के बल पर गांव के 4-5 ब्राह्मण घरों का पूरे गांव पर दबदबा रहता है और वे किसी भी अफवाह व  झूठ को सच के कपडे़ पहना कर पूरे गांव पर थोप सकते हैं.

सच और  झूठ का हरेक की जिदगी पर बड़ा असर पड़ता है. एक बच्चा जब यह कहे कि गिलास उस ने नहीं तोड़ा जबकि उसी ने तोड़ा था तो सम झ लें कि आप के घर का माहौल उन  झूठों पर टिका है जो धर्म के सहारे आप के घर की हर खिड़की व दरवाजे से आ रहा है और हरेक को हमेशा लड़ने के मूड में रखता है.

झूठ ही बड़ी वजह होती है जिस से घरों में, व्यापारों में, मालिकनौकरों में, दुकानदार से खरीदने पर, स्कूल में हर समय टैंशन रहती है. हर समय  झूठ बोल कर अपने को सही बतलाना हर धर्म में सिखाया जाता है. बाइबिल  झूठी कहानी है कि 6 दिन में ईश्वर ने पूरी दुनिया-आसमान, चांदसितारे, सूरज, आदमी, पेड़पौधे, पानी, आग बना डाले.

इस  झूठ को थोपने के लिए उन्होंने बड़ी लड़ाइयां लड़ीं. मेरा  झूठ तुम्हारे धर्म के  झूठ से बेहतर है. तुम्हारे धर्म के हिसाब से दुनिया बनाने वाला तो कमल पर बैठा था जो एक और देवता की नाभि से निकला था और वह देवता एक नाग पर बैठा था जो सरस पानी के समुद्र में तैर रहा था.

इन  झूठों को ले कर जो  झगड़े साइंसटैक्नोलौजी के आने से कम हुए थे और लोगों को भरोसा होने लगा था कि हर चीज एक नियम है, एक फार्मूले से चलती है तो खुशहाली बढ़ी, बीमारियां खत्म होने लगीं, पक्के मकान मिलने लगे.

पर यह  झूठ तो हमारी नसों में अभी भी दौड़ रहा है. पतिपत्नी के बीच होता है. पिताबेटे में होता है. सासबहू में चलता है.  झूठ नहीं कहा यह कहने वाला बारबार दोहरा कर खुद मानने लगता है कि वह असल में ही सच्चा है जबकि सामने वाला  झूठ का  झूठ साफसाफ देख सकता है. अगर बोलने वाला 2 मिनट रुक कर मान जाए कि वह  झूठ बोल रहा है तो आधे  झगड़े तभी खत्म हो जाएं, अपनी गलती सम झ आने पर मान लेते ही आपसी व्यवहार सुधरने लगता है.

झूठसच का धर्म से लेनादेना नहीं. कसम खाना एक बेकार की बात है. यह वादा तो खुद करना होगा कि कौन से  झूठ के तुरंत मान लेने में हर्ज नहीं है.  झूठ के सहारे कुछ मिलता नहीं. कुछ गलत किया, यह मन में गांठ की तरह चुभता रहता है. नेताओं की तरह न बनो, वैज्ञानिकों की तरह बनो जो जानते हैं कि उन की दुनिया में कोई  झूठ कहीं नहीं चल सकता. Editorial

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