Emotional Story in Hindi. हर लड़की का सपना होता है अपना छोटा सा घर, जिस में खुशियों का भंडार हो, हंसमुख व बेहद चाहने वाला पति हो. उन्हीं हसीन सपनों को अपने दिल में सजा कर सरला भी दुलहन बन पालकी में बैठ अपने साजन के घर आ गई.
वह खुशनुमा सुहागरात थी. गुलाब की खुशबुओं में डूबी रात उस की जिंदगी के नए राज खोलने वाली थी.
एक महीने दोनों इश्क की हवाओं में उड़ते रहे. पता ही नहीं चला कि कितना सफर गुजर गया.
धीरेधीरे योगेंद्र के बरताव में तबदीलियां आने लगीं. ज्यादातर वह अपना समय बाहर गुजारने लगा. एक रात वह घर देर से लौटा. सरला दुखी मन लिए इंतजार में तारे गिन रही थी.
‘‘योगेंद्र, मुझे तड़पाने में तुम को क्या सुख मिलता है?’’ सरला ने कहा.
‘‘मैं कई दिनों से परेशान हूं,’’ योगेंद्र बोला.
‘‘तुम्हें दिल में कोई कष्ट या मन में कोई उलझन हो, तो मैं तुम्हारा सहारा बनूंगी. दूर भागने से समस्या का हल तो नहीं होगा,’’ सरला बोली.
‘‘मैं ने तुम से सच्चा प्यार पाया, पर एक कसक बाकी रह गई.’’
‘‘वह क्या?’’ ‘‘तुम ने शादी से पहले की बातें जाहिर नहीं होने दीं. तुम उन्हें कब तक पचा सकोगी?’’
‘‘तुम क्या जानना चाहते हो?’’
‘‘कभीकभी तुम्हें विचारों में खोया देख कर चिंता होने लगती है कि कहीं किसी पुराने साथी का प्यार तो नहीं सताने लगा?’’ उस ने हंस कर कहा.
‘‘ऐसी कोई बात नहीं,’’ वह एकदम घबरा गई, उसे लगा कि कहीं योगेंद्र उस के पुराने साथी के बारे में जान न गया हो.
‘‘चुप क्यों हो गई सरला?’’
‘‘मैं ने सोचा, अगर तुम को किसी बात के लिए शक होने लगा, तो उस का हल खुद ही ढूंढ़ लो, मेरे पास सफाई देने के लिए कोई शब्द नहीं हैं. कोई सजा देना चाहो, वह भी कबूल होगी.’’
‘‘सजा का सवाल तब उठता है, जब कोई गुनाह किया हो. मैं ने तुम पर कोई दोष तो नहीं लगाया.’’
‘‘शादी से पहले की बातें जो भी रही हों, मेरी या तुम्हारी, उन्हें कुरेद कर बाहर निकालने से दुख के सिवा कुछ नहीं मिलता. तुम मुझे बेवफा समझते हो?’’
‘‘रात बहुत हो चुकी है, सो जाओ. फिर कभी बात करेंगे,’’ कहते हुए योगेंद्र नींद की गोद में चला गया. सरला बगल में लेटी थी, किंतु नींद कोसों दूर जा चुकी थी.
सरला आंखें मूंद कर यादों में खोने लगी. शादी से पहले वह प्रदेश विकास प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर की असिस्टैंट थी. लोग मकान बनाने का नक्शा पास कराने के सिलसिले में पहले उसी से मिला करते थे.
मकान के सिलसिले में अनसुल नाम का नौजवान अकसर उस के पास आया करता था. वह कभीकभी छोटीमोटी गिफ्ट भी साथ ले आता था. इस तरह दोनों में मेलजोल बढ़ता गया.
दफ्तर से छुट्टी के बाद एक रोज वह शाम को रैस्टोरैंट पहुंची, तो अनसुल को वहां बैठे देखा, जो स्नैक्स के साथसाथ कौफी की चुसकी भी ले रहा था. वह भी वहीं बैठ गई.
बातोंबातों में सरला ने कहा, ‘आप मेरे दफ्तर में जिस काम से आते हैं, वह काम इतना आसान नहीं. आप किसी तरह का कोई गिफ्ट मत लाया करें, वरना लोग दूसरा मतलब लगा देंगे.’
‘आगे से ध्यान रखूंगा.’
‘वैसे, आप करते क्या हैं?’ ‘मकान बनवाना, खरीदनाबिकवाना यानी दलाली का काम.’
‘तब तो आप की बहुत कमाई होगी?’
‘यों ही समझ लीजिए. आप अपने यहां मेरा काम कराती रहेंगी, तो कुछ पैसा आप को मिल जाया करेगा.’
‘शुक्रिया,’ कह कर वह वहां से चल पड़ी.
फिर वह अकसर उस से मिलने जाने लगी. वह उसे बड़ा सज्जन आदमी लगा, क्योंकि उस ने कोई गलत फायदा उठाने की कोशिश नहीं की.
उस के बीते हुए दिनों के बारे में जब सरला ने जानना चाहा, तो उस ने अपने बचपन से ले कर अब तक का चिट्ठा खोल कर रख दिया.
सरला को उस की कहानी सुन कर दुख हुआ. उस से हमदर्दी हो गई थी. धीरेधीरे दोनों का मेलजोल बढ़ने लगा.
एक दिन सरला ने उस से कहा, ‘मैं तुम्हें बहुत प्यार करने लगी हूं. इतना जानती हूं कि तुम ने मुझे अपना लिया, तो सबकुछ छोड़ कर तुम्हारे पास आ जाऊंगी. तुम्हें पाने के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूं. कब शादी करोगे?’
‘सरला, मैं तुम से प्यार करता हूं, पर किसी वजह से शादी नहीं कर सकूंगा.’
‘ऐसी कोई वजह नहीं हो सकती कि तुम मुझ से शादी करने से कतराओ,’ सरला ने नाराज हो कर कहा.
‘अगर नहीं मानती, तो सोचना पड़ेगा,’ कह कर वह एक महीने के लिए कहीं चला गया.
लौटने पर अनसुल ने बताया, ‘सचाई यह है कि मैं जिस मकान का नक्शा पास कराने के लिए दौड़धूप कर रहा था, वह मकान मेरा नहीं, दूसरे का था. मैं कोई ठेकेदारी नहीं करता. अभी मैं नौकरी की तलाश में घूम रहा हूं. तुम से शादी कर के तुम पर बोझ बन कर रहना मुझे गवारा नहीं होगा.’
‘तुम ने मुझ से झूठ क्यों बोला? बहरहाल, मैं सिफारिश कर के तुम्हें नौकरी दिलवा दूंगी.’
‘ऐसी बात है, तो मेरी रिश्ते में एक बड़ी विधवा बहिन हैं. उन के यहां काफी नौकरचाकर हैं. हम उन से शादी की बात कर लें, तो बेहतर होगा.’
‘वे कहां पर हैं?’ ‘गाजियाबाद में.’
अनसुल ने सरला को एक बड़े से मकान में ले जा कर अपनी सुशीला नाम की विधवा बहिन से मिलवाया. वहां सरला की काफी खातिरदारी हुई.
तीसरे दिन अनसुल बोला, ‘तुम यहां रुको. मैं एक दिन बाद दिल्ली का काम निबटा कर लौटूंगा.’
सरला ने मान लिया, पर 3 दिन बाद भी जब वह नहीं आया, तो सरला ने उस की बहिन से पूछा.
उन्होंने बताया, ‘अनसुल अच्छा आदमी नहीं है. सच तो यह है कि मैं उस की बहुत दूर की मामूली रिश्तेदार हूं. पति नहीं रहे, तो ससुराल वालों ने मुझे घर से निकाल दिया.
‘मैं कुछ मनचले लोगों के चक्कर में फंस गई, तो अनसुल ने आगे बढ़ कर उन बदमाशों से मेरी इज्जत बचाई. इस के बाद मैं ने उसे अपना हमदर्द समझते हुए अपने 2 कमरे के किराए के मकान में कुछ दिनों के लिए रख लिया.
‘एक रात मैं गहरी नींद में सोई थी. अनसुल ने आ कर मुझे अपनी बांहों में कस लिया. मैं ने बहुत मना किया, लेकिन वह नहीं माना. एक बार वैसा हो गया, तो मेरी देह की प्यास बढ़ गई.
‘मैं ने खुद उसे अपने को सौंपते हुए उस से वादा लिया कि वह मुझ से शादी कर लेगा, लेकिन वह झांसा देता रहा. उस ने कमाई का दूसरा जरीया निकाला. मेरे जिस्म को बेचने लगा.
‘मुझे बाद में पता चला कि जिन बदमाशों ने मेरे साथ छेड़खानी की थी, वे अनसुल के दोस्त थे. उस ने उन्हें इशारा किया कि वे मुझ से छेड़छाड़ करें, ताकि वह मुझे उन के पंजे से छुड़ा कर एहसान लाद सके.
‘मैं उस की चाल नहीं समझी और बुरी तरह फंस गई. वह अभी तक मुझे शादी का झांसा देता रहा. उस ने मुझे कालगर्ल बना दिया. तब से मेरी यही रोजी बन गई. वह तुम्हें भी फुसला कर वही पेशा कराने लाया होगा. एक बार उस के चंगुल में फंस गई, तो वापस नहीं जा सकोगी.
‘अनसुल तुम्हारे लिए दिल्ली में बड़ा ग्राहक ढूंढ़ने गया है, लौट आया तो वापस नहीं जा सकोगी.
‘मुझे हैरानी हो रही है कि तुम जैसी पढ़ीलिखी और सरकारी नौकरी करने वाली कैसे उस लफंगे के जाल में फंस कर यहां तक चली आई.
‘तुम बेहद खूबसूरत हो, अगर चाहो तो तुम भी यहां रह कर देह धंधा कर सकती हो. आगे पैसा ही पैसा. कालगर्ल को बहुत कम लोग पहचानते हैं.’
सरला को अनसुल से सख्त नफरत हो गई. वह वापस घर आ गई. उस की मां ने योगेंद्र से उस का रिश्ता पक्का कर दिया था. दोनों की शादी हो गई.
सरला को शक था कि शादी के बाद भी अनसुल उस की सुखी जिंदगी में आग लगाने की कोशिश करेगा, जिस से योगेंद्र का मन उचट जाएगा और वह उस पर शक करने लगेगा.
‘‘सरला, नींद नहीं आ रही है क्या? किस सोच में खोई हुई हो?’’ सरला को हिलाते हुए योगेंद्र ने पूछा, तो वह यादों से बाहर निकल आई.
योगेंद्र बड़े प्यार से उसे अपनी बांहों में भर कर हंसने लगा, ‘‘मैं ने तो यों ही तुम से मजाक किया था. क्या तुम डर गई? मानो चोर की दाढ़ी में तिनका. तुम बेवफा नहीं हो.’’
सरला की आंखों से आंसू बहने लगे थे, दिल धड़कने लगा था.
‘‘पगली, सच्चा प्यार करने वाला पति कभी इस तरह शक की निगाह से मनोरंजन न करे, तो जिंदगी का मजा ही नहीं आता.
‘‘मुझे तुम पर पूरा भरोसा है. उसी भरोसे को ले कर हमें जिंदगी जीनी होगी,’’ कहते हुए योगेंद्र ने प्यार से सरला को बांहों में भर लिया. Emotional Story in Hindi




