Hindi Short Story. ‘‘मुझे बचा लीजिए. कुछ गुंडे मेरे पीछे पड़े हैं,’’ एक हांफती लड़की को उस नौजवान ने चौंकते हुए देखा, जो अचानक सामने से भागती हुई उस की मोटरसाइकिल से टकराई थी.
मोटरसाइकिल वाले नौजवान ने पूछा, ‘‘तुम कौन हो?’’ ‘‘नजराना,’’ नौजवान के सवाल को भांपते हुए नजराना ने फौरन कहा.
‘‘बैठो…’’ उस नौजवान के कहने पर नजराना जल्दी से मोटरसाइकिल पर बैठ गई.
वह नौजवान नजराना को अपने घर ले आया था, क्योंकि रात के 11 बजे उसे कहीं छोड़ना मुनासिब नहीं लगा.
‘‘पानी पी लो,’’ नौजवान ने पानी का गिलास उसे थमाया और खुद उस के सामने कुरसी पर बैठ गया.
नजराना ने एक सहमी हुई नजर उस पर डाली, फिर एक सांस में पूरा गिलास खाली कर दिया. उस ने खाली गिलास कांपते हाथों में दबोच लिया और घूरघूर कर पूरे घर को देखने लगी.
खूबसूरत बरामदा था, दीवार पर बड़ीबड़ी तसवीरें लगी थीं. कमरा कुछ बुजुर्गों की तसवीरों से सजा हुआ था. बरामदे के ठीक बीच में एक बड़ा सा सोफा रखा था.
‘‘देखिए, यहां आप को डरने की कोई जरूरत नहीं है. आप मेरे घर में पूरी तरह से महफूज हैं,’’ वह नौजवान मुसकरा कर बोला और चंद सवाल करने लगा, ‘‘आप कहां रहती हैं?’’
‘‘मैं उत्तर प्रदेश के एक गांव की हूं,’’ नजराना ने खाली गिलास मेज पर रखा और धीरे से बोली.
‘‘यहां दिल्ली में कैसे?’’ यह सुन कर वह चुप रही.
‘‘कहां जाना है? आप के मांबाप का क्या नाम है? जब तक आप बताएंगी नहीं, तब तक मैं आप को वहां भला कैसे पहुंचाऊंगा?’’ उस नौजवान ने पूछा, तो जवाब में नजराना फूटफूट कर रोने लगी.
‘‘मेरा कोई नहीं है. मुझे कहीं नहीं जाना,’’ नजराना थोड़ी देर बाद कुछ सोच कर बोली.
‘‘क्यों?’’ वह नौजवान हैरान होते हुए बोला. ‘‘मैं घर से भागी हुई लड़की हूं.’’
‘‘क्या?’’ यह सुन कर उस नौजवान को जोर का झटका लगा.
‘‘हां, मैं घर से भागी हुई हूं, पर मुझे घर से भागने पर मेरे अपने ही घर वालों ने मजबूर किया था,’’ नजराना को पहली बार कोई ऐसा मिला था, जिस से वह अपने दिल का हाल बताने पर मजबूर हो गई थी.
नजराना ने बताया, ‘‘हम 4 बहिनें थीं. घर में सब से बड़ी मैं ही थी. मां की एक बेटे की आस में 4 लड़कियों ने घर में कदम रख लिया था.
‘‘अब्बा को हम से कोई लगाव नहीं था. अम्मां की गालीगलौज व मारपीट के साथ हम बड़ी हो गईं.
‘‘अम्मां का जुल्म बढ़ता गया. दहेज की खातिर मेरा रिश्ता टूट गया. तब मेरा वजूद ही कहीं खो गया था.
‘‘एक दिन अम्मां ने मुझे बहुत मारापीटा और कहा, ‘जा, कहीं जा कर डूब मर या किसी के साथ अपना मुंह काला कर के भाग जा. यहां से कम से कम मेरे सीने का बोझ तो कम होगा. न जाने कौन से जन्म का हम से बदला ले रही है. इतनी लड़कियां देने के बजाय 4 बेटे ही दे देता.’
‘‘मैं ने घर की सारी जिम्मेदारी संभाल रखी थी. मगर इस तरह रोजरोज मां की गालियां, मारपीट सह कर मेरा दिलोदिमाग खराब हो गया. खुद को खत्म करने के इरादे से मैं तनहा घर से निकल गई, लेकिन जैसा मैं ने सोचा था, ऐसा बिलकुल नहीं हुआ. मैं दुनिया जितनी आसान समझती थी, वैसी थी नहीं.
‘‘रास्ते में मुझे कुछ शराबियों, जुआरियों ने पकड़ लिया. वे मुझे बेचने के इरादे से शहर ले आए, पर मैं अपनी इज्जत बड़ी मुश्किल से बचा कर भाग निकली.’’
‘‘तुम अब कहां जाओगी?’’ उस नौजवान ने नजराना की आपबीती सुनने के बाद पूछा.
‘‘किसी ने कहा है कि लड़की उस कटी पतंग की तरह होती है, जिसे हर कोई अपनी जागीर समझ कर लूटने के लिए दौड़ पड़ता है. ऐसे हालात में मैं ने देख लिया है कि जमाना कितना भी बदल जाए, मगर औरत को हर रूप में मर्द की जरूरत होती है, चाहे वह भाई हो, बाप हो या शौहर का साथ.
‘‘हर औरत का आखिरी ख्वाब एक छत होती है. न तो मेरे पास छत है और न ही किसी मर्द का साथ. बस, अब मैं इज्जत के साथ मरना चाहती हूं,’’ कहते हुए वह भावुक हो गई.
‘‘अगर आप चाहें तो… मेरा मतलब है, आप गलत बात कर रही हैं मरने की. आप मुझे अच्छी लगीं, जो आप ने अपनेपन से मुझे सब सचसच बता दिया.
‘‘आज रात आप चाहें तो…’’ वह नौजवान कुछ आगे कहना चाह रहा था, तभी अंदर से कुछ गिरने की आवाज आई, तो दौड़ कर वह कमरे में भागा.
नौजवान के पीछे नजराना भी भागी. अंदर कमरे में एक बूढ़ी औरत बिस्तर के करीब नीचे बेसुध पड़ी थी. उस का चेहरा एकदम पीला लग रहा था.
नौजवान ने फौरन उस बूढ़ी औरत को उठा कर बिस्तर पर लिटाया और डाक्टर को बुलाने के लिए तुरंत फोन किया.
नौजवान ने बगल वाले कमरे से नजराना से पानी लाने को कहा. वह दौड़ती हुई उस कमरे में पहुंची और झटपट पानी ले कर आ गई. उस का हर दर्द हर गम जैसे छूमंतर हो गया था.
अब उसे नौजवान का दर्द अपना सा लग रहा था. बूढ़ी औरत नौजवान की अम्मी थीं. वे हाई ब्लड प्रैशर की मरीज थीं. डाक्टर ने आ कर अम्मी का चैकअप किया और दवाएं दीं.
नजराना रातभर अम्मी की सेवा में लगी रही. नौजवान भी अपनी अम्मी की देखभाल कर रहा था, मगर सुबह होते ही कमरे से निकल कर वह कुछ परेशान सा लग रहा था, फिर सिर झटक कर नहाने चला गया.
जब अम्मी की आंख खुली, तो देखा कि नजराना उन के सिरहाने बैठी उन का सिर दबा रही थी.
अम्मी बोलीं, ‘‘क्या नाम है तुम्हारा?’’ उन के सपाट लहजे से नजराना को बिलकुल हैरानी नहीं हुई थी. रात से ही उस के मन में हजारों खयाल उमड़घुमड़ रहे थे कि नौजवान की अम्मी के सवालों का वह कैसे जवाब देगी.
‘‘बेटी, तुम ने नाम नहीं बताया,’’ अम्मी के दोबारा पूछने पर वह चौंक कर अपनी सोच से बाहर आ गई और धीरे से बोली, ‘‘जी, नजराना.’’
अम्मी ने हौले से कहा, ‘‘मेरा नवेद लाखों में एक है. किसी तरह की बुराई उस में नहीं है. लेकिन दुनिया इतनी भी अच्छी नहीं है, यह तो तुम जान ही चुकी हो,’’ अम्मी नजराना का सहारे ले कर बैठ गईं.
उस नौजवान का नाम नवेद है, यह नजराना जान गई थी, मगर अम्मी के मुंह से अपने बारे में जान कर वह सन्न रह गई.
‘‘नजराना, इतनी हैरान मत हो. मैं ने सब सुन लिया है. तुम्हारी अम्मी ने ठीक नहीं किया. एक औरत हो कर एक औरत पर जुल्म करे.
‘‘बेटी, मैं मानती हूं, तुम ने जो किया था, सही था, पर जुल्म देख कर भागना जुर्म है, बहादुरी वह है, जो जुल्म को भगा दे,’’ अम्मी ने समझाया, तो नजराना सिर हिला कर रह गई.
अम्मी ने उसे बांहों में समेट लिया, तभी नवेद चायनाश्ते के साथ अंदर आया.
अम्मी के साथ नजराना को यों देख नवेद के दिल में सुकून सा उतर गया.
‘‘नवेद,’’ अम्मी ने पुकारा. ‘‘जी, अम्मी…’’ नवेद ने इतमीनान से कहा, ‘‘आप की तबीयत कैसी है?’’
‘‘मैं ठीक हूं, क्योंकि मेरी बेटी ठीक है,’’ अम्मी ने अपने दिल की बात कही.
‘‘मैं समझा नहीं,’’ नवेद ने कहा. ‘‘मेरी बेटी को इस के घर छोड़ कर आओ. नजराना की अम्मी से कहना कि मैं उन से मिलने आऊंगी. मुझे उन से एक खास बात करनी है,’’ अम्मी के कहने पर नवेद के चेहरे पर शरारती मुसकराहट फैल गई थी. Hindi Short Story
–एनएसएन अंसारी




