News Story. इस बार दिल्ली में बारिश ने काफी भिगोया. अब इस सुहावने मौसम में विजय को अनामिका की बहुत याद आ रही थी, पर वह काफी देर से फोन नहीं उठा रही थी.
विजय ने झल्ला कर फिर से फोन मिलाया. उधर से अनामिका की आवाज आई, ‘‘चैन नहीं है क्या? क्यों बारबार फोन कर रहे हो?’’
‘‘डार्लिंग, इस मस्त मौसम में मैं और मेरा प्यारा सा बिस्तर तुम्हारा इंतजार कर रहा है. मम्मीपापा भी आज रात घर पर नहीं हैं. तो आप कब तक आ रही हैं?’’ विजय ने रोमांटिक होते हुए कहा.
‘‘नहीं आ सकती मैं. बहुत बिजी हूं,’’ अनामिका ने दो टूक कहा.
‘‘यार, तुम पिछले 2 दिन से मुझ से ढंग से बात नहीं कर रही हो? क्या हुआ?’’ विजय ने पूछा.
‘‘अभी नहीं बता सकती. और मुझे बारबार फोन कर के परेशान मत करो,’’ अनामिका ने इतना कहा और फोन काट दिया.
विजय हैरान रह गया. उसे बहुत गुस्सा आया कि अनामिका इतनी बेरुखी क्यों दिखा रही है. उस ने यह राज जानने के लिए अनामिका के फ्लैट का रुख किया.
एक घंटे में विजय अनामिका के फ्लैट पर था. जब वह घर में घुसा तो वहां का नजारा देख कर दंग रह गया. स्कूल की तकरीबन 20-25 बच्चियां वहां जमा थीं.
‘‘यह क्या माजरा है अनामिका?’’ विजय ने सवाल किया.
‘‘यह माजरा नहीं बल्कि इस जेनरेशन अल्फा के भविष्य का गंभीर मसला है. आंदोलन है अपनी पढ़ाई को ले कर. और तुम यहां क्यों आए? मैं ने मना किया था न,’’ अनामिका बोली.
‘‘यार, पकाओ मत. साफसाफ बोलो की क्या बात है? ये बच्चियां कौन हैं और यहां क्या कर रही हैं?’’ विजय ने सवाल किए.
‘‘थोड़ा सब्र करो. बच्चो, ये हैं विजय अंकल और विजय ये हैं हमारे इलाके के एक सरकारी स्कूल की बच्चियां जो अपने स्कूल की बदहाली के लिए एक दिन का धरना प्रदर्शन करने दिल्ली आई हैं. हम सब कल जंतरमंतर जाएंगी,’’ अनामिका बोली.
‘‘मुझे सारी बात बताओ,’’ विजय ने कहा.
‘‘अच्छा तो सुनो. तुम तो जानते हो कि मेरे पापा का मछली का कारोबार है. ये सब लड़कियां उन के जानकारों की वे बेटियां हैं जो वंचित समाज से आती हैं और गरीब होने के चलते सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं. पर जब से कौकरोच जनता पार्टी ने देशभर के सरकारी स्कूलों की बदहाली की पोल खोलनी शुरू की है, इन जैसी बच्चियों का भी हौसला बढ़ गया है,’’ अनामिका ने कहा.
‘‘तो तुम क्या और कैसे मदद करोगी?’’ विजय ने सवाल किया.
‘‘बहुत सही सवाल किया. मैं इन्हें हौसला दे रही हूं कि हमारे संविधान में कितनी ताकत है और यही ताकत आज छोटेछोटे बच्चों को नेताओं से सवाल करने की हिम्मत दे रही है. हमारे नेता तो बुढ़ा गए हैं. उन्हें तो हिंदूमुसलिम, जातिवाद, मंदिरमसजिद करने से फुरसत नहीं है तो हम जैसों का फर्ज बनता है कि अपने पढ़ाई के हक के लिए इस नई पीढ़ी को इस तरह तैयार करें कि वह पढ़े भी और आगे बढ़े भी,’’ अनामिका बोली.
‘‘मुझे थोड़ा समझाओ कि यह जो आजकल सोशल मीडिया और मेनस्ट्रीम मीडिया में स्कूल और उन की बदहाली पर बहस चल रही है, उस की जड़ में क्या है?’’ विजय ने पूछा.
‘‘अब आए न लाइन पर. सब बताती हूं. खबरों को ही खंगालते हैं पहले. यह मामला थोड़ा पुराना है. तकरीबन एक साल पुराना. बिहार में बेलदारी चक में बने जर्जर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पढ़ाई से छात्रों ने इनकार कर पटनागयामसौढ़ी रोड जाम कर दिया था. खस्ताहाल भवन, दूषित पानी और सिर्फ 2 कमरों में 150 बच्चों की पढ़ाई को ले कर छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया था.
‘‘तब छात्रों का कहना था कि स्कूल की इमारत कई जगहों से गिरने की हालत में है. पानी की टंकी में कीड़े लगे रहते हैं, जिस से गंदा पानी पी कर कई बच्चे बीमार पड़ चुके हैं. मजबूरी में टीचर कभी पास के खेत में तो कभी मंदिर परिसर में बच्चों को पढ़ाते हैं,’’ अनामिका ने बताया.
‘‘ओह, यह तो बहुत शर्मनाक बात है,’’ विजय ने कहा.
‘‘इतना ही नहीं, मैं ने एक खबर पढ़ी थी, जिस में अलगअलग जगह बच्चों के अपने स्कूल की बदहाली को ले कर सवाल पूछे गए थे. यह सब एक आंदोलन के बाद ही मुमकिन हुआ है कि अब कम उम्र के स्कूली छात्र अपनी समस्याओं को ले कर सड़कों पर उतर आए हैं. कहीं स्कूलों में पंखे नहीं हैं, कहीं शौचालय नहीं, कहीं टीचर नहीं और कहीं बुनियादी ढांचा तक नहीं है,’’ अनामिका ने कहा.
‘‘मुझे भी सब जानना है,’’ विजय ने एक बच्ची के सिर पर हाथ रखते हुए कहा.
‘‘उस खबर के मुताबिक, राजस्थान में जयपुर के एक गांव के प्राथमिक विद्यालय के बच्चे मवेशियों के बाड़े में बैठ कर पढ़ाई करने को मजबूर थे. रामपुरा कनवारपुरा गांव के स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे आंदोलनकारियों और कुछ गांव वालों के बीच झगड़े के बाद राज्य सरकार ने स्कूल के लिए नई इमारत बनाने की घोषणा की.
‘‘सरकार ने स्वीकार किया कि रामपुरा स्कूल की इमारत को सितंबर, 2025 में जर्जर घोषित कर दिया गया था और तब से बच्चों की कक्षाएं मवेशियों के बाड़े में लगाई जा रही थीं.
‘‘इसी तरह राजस्थान के अजमेर के एक सरकारी स्कूल की छात्राओं ने 17 अगस्त को प्रधानाचार्य के खिलाफ प्रदर्शन किया था. उन का आरोप तो बहुत ज्यादा संगीन था.
‘‘छात्राओं ने प्रधानाचार्य पर कथिततौर पर उन के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था. छात्राओं और उन के अभिभावकों ने प्रधानाचार्य के चेहरे पर कालिख पोती और उन की गिरफ्तारी की मांग को ले कर प्रदर्शन किया.’’
‘‘यह तो बहुत ज्यादा गंभीर मामला है,’’ कहते हुए विजय थोड़ा गुस्सा हो गया.
‘‘इस से पहले 5 अगस्त को जयपुर के सरकारी आनंदीलाल पोद्दार वरिष्ठ माध्यमिक बधिर विद्यालय के सुनने और बोलने में असमर्थ छात्रों ने खराब बुनियादी ढांचे और जरूरी सुविधाओं की कमी को ले कर प्रदर्शन किया था.
‘‘छात्र स्कूल से बाहर निकल कर धरने पर बैठ गए थे. उन्होंने सांकेतिक भाषा के जरीए बताया कि गंदे शौचालय, पीने के पानी की कमी और जर्जर स्कूल भवन के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
‘‘छात्रों का यह भी कहना था कि स्कूल प्रशासन से बारबार शिकायत करने के बावजूद उन की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया. इस के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल के प्रधानाचार्य को हटा दिया था.
‘‘छात्रों के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफैसर रह चुके प्रभु महापात्र ने कहा कि ये घटनाएं इस बात को दिखाती हैं कि शिक्षा नीति बनाते समय छात्रों को महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया.
‘‘प्रभु महापात्र ने आगे कहा कि ये विरोध प्रदर्शन शिक्षा के लिए घटती प्राथमिकता को भी दिखाते हैं. गिरावट केवल बुनियादी ढांचे में ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता में भी दिखाई देती है.
‘‘मध्य प्रदेश में तो अनोखा प्रदर्शन हुआ था. वहां की राजधानी भोपाल में 21 अगस्त को 36 जिलों से आए ‘जेन अल्फा’ और ‘जेन जी’ छात्रों और शिक्षकों ने प्रदर्शन किया. उन्होंने जर्जर स्कूल भवनों और राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के खिलाफ आवाज उठाई.
‘‘भोपाल के नीलम पार्क में छात्रों और शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि राज्य में 25,000 से ज्यादा स्कूल बंद हो चुके हैं. उन्होंने ‘स्कूल बचाओ’ आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की और अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी.
‘‘इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश के अलगअलग हिस्सों में भी स्कूली छात्रों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए. छात्र हाथों में पोस्टर और तख्तियां ले कर सड़कों पर उतरे और कई शहरों में प्रमुख चौराहों पर यातायात रोक दिया. फतेहपुर, हमीरपुर और कन्नौज में हुए इन प्रदर्शनों ने सोशल मीडिया और समाचार सुर्खियों में जगह बनाई.
‘‘लखनऊ के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्रों ने 14 अगस्त को शिक्षकों की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया. छात्रों ने कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात भी रोक दिया. पुलिस प्रशासन और राज्य के मंत्री असीम अरुण के उन की शिकायतें सुनने पर सहमत होने के बाद छात्र स्कूल लौट गए.
‘‘लेकिन यह समझौता ज्यादा दिन नहीं चला. 3 दिन बाद छात्राओं ने उन्हीं मांगों को ले कर दोबारा सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया. भारी बारिश भी उन का हौसला नहीं तोड़ सकी.
‘‘छात्राओं ने शहर की 2 सड़कों को रोक दिया और हाथों में पोस्टरबैनर ले कर विभिन्न समस्याओं के खिलाफ नारे लगाए. एक छात्रा अनामिका ने आरोप लगाया कि स्कूल में विज्ञान वर्ग के छात्रों की संख्या काफी अधिक होने के बावजूद वहां रसायन विज्ञान के सिर्फ एक शिक्षक हैं और भौतिक विज्ञान तथा जीव विज्ञान के शिक्षक हैं ही नहीं.
‘‘लखनऊ से सटे उन्नाव में भी 19 अगस्त को एक सरकारी आवासीय विद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने प्रदर्शन किया. उन्होंने खराब गुणवत्ता वाले भोजन, पीने के पानी की कमी, शिक्षकों की कमी और प्रधानाचार्य के व्यवहार को ले कर शिकायत की. प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को उन की समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया, जिस के बाद उन्होंने प्रदर्शन खत्म कर दिया.
‘‘जंतरमंतर पर 28 जुलाई को हुए तनावपूर्ण प्रदर्शन के खत्म होने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के महज 3 दिन बाद, उत्तर प्रदेश के किशनपुर में बने सर्वोदय इंटर कालेज के छठी से ले कर 12वीं कक्षा तक के तकरीबन 1,800 छात्रों ने प्रदर्शन किया.
‘‘छात्रों ने आरोप लगाया कि स्कूल में स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय, बिजली, पंखे, पर्याप्त फर्नीचर, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय और खेल सुविधाएं नहीं हैं. उन्होंने स्कूल प्रशासन पर दाखिले के दौरान कथित रूप से अनधिकृत तरीके से पैसे लेने और अंकपत्र और दूसरे दस्तावेज जारी करने के लिए भी पैसे मांगने का आरोप लगाया.
‘‘इस के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार स्कूल पहुंचे और छात्रों से बातचीत की. उन्होंने लिखित आश्वासन दिया कि लंबित समस्याओं पर 24 घंटे के भीतर काम शुरू किया जाएगा, जिस के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ,’’ अनामिका तफसील से बताया.
यह सुन कर विजय बोला, ‘‘मुझे छत्तीसगढ़ के दुर्ग इलाके के स्कूल की एक खबर याद आ रही है. दरअसल, छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री के गृह जिले दुर्ग में सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्था को ले कर तकरीबन 200 छात्रछात्राओं को सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करना पड़ा था.
‘‘छात्रों का आरोप था कि स्कूल में पिछले 2 साल से शौचालय और चारदीवारी की सुविधा नहीं है. शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा की कमी में पढ़ाई प्रभावित होने से नाराज विद्यार्थियों ने पहले स्कूल के गेट पर तालाबंदी की और इस के बाद दुर्गपाटन मुख्य मार्ग पर बैठ कर तकरीबन एक घंटे तक चक्काजाम किया.
‘‘प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या को बड़े अधिकारियों और मंत्रियों तक पहुंचाने के लिए कई प्रयास किए थे. जब कहीं से ठोस समाधान नहीं मिला तो उन्होंने चक्काजाम करने का फैसला लिया.’’
‘‘क्या किया जाए, पूरे देश में सरकारी स्कूलों का यही हाल है. अब चूंकि बच्चे सहन नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें ‘जेन जी’ आंदोलन से एक राह मिली है, तो उन्हें रोशनी की हलकी सी किरण दिखाई दी है,’’ अनामिका बोली.
‘‘सुनो, मैं अभी आया,’’ अचानक विजय ने कहा.
‘‘कहां जा रहे हो?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘तुम इंतजार तो करो, मैं बस अभी आया,’’ इतना कह कर विजय वहां से निकल गया. अनामिका को कुछ समझ नहीं आया. वह उन बच्चियों के साथ बिजी हो गई.
तकरीबन एक घंटे बाद अनामिका के दरवाजे की घंटी बजी. उस ने दरवाजा खोला और सामने विजय को देख कर हैरान हो गई.
विजय ने अनामिका को एक फ्लाईंग किस दी और घर के भीतर आ गया. उसे देख कर पहले तो सब बच्चियां हंसीं, फिर तालियां बजाने लगीं. विजय ने स्कूल यूनिफौर्म पहनी हुई थी. कमीज, टाई, हाफ पैंट और जूते. एकदम ‘जेनरेशन अल्फा’ लग रहा था.
‘‘यह सब क्या है?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘अब मैं इन बच्चियों के साथ हूं. एक घंटे में इस से अच्छा गेटअप नहीं आ सकता एक स्कूली बच्चे का. बड़ी मुश्किल से यह यूनिफौर्म मिली. अपने नाप की आल्टर कराई और पहन कर आ गया.
‘‘मैं कुछ पोस्टरबैनर लाया हूं और रंग भी. अब हम सब मिल कर कुछ स्लोगन लिखेंगे अपनी मांगों के. जंतरमंतर पर कुछ तो होना चाहिए हमारे पास प्रशासन और सरकार को दिखाने के लिए,’’ विजय बोला News Story




