भोजपुरी सिनेमा (Bhojpuri Cinema) को ले कर पिछले कुछ समय से एक सवाल लगातार उठता रहा है कि क्या दर्शक अब अच्छी कहानी और पारिवारिक भावनाओं वाली फिल्मों को स्वीकार करेंगे? एसआरके म्यूजिक की फिल्म ‘प्रेम विवाह’ इस सवाल का जवाब काफी मजबूती से देती है.
इस फिल्म में अरविंद अकेला कल्लू ने प्रेम का किरदार निभाया है. संयुक्त परिवार में रहने वाले प्रेम की शादी के लिए रोज लड़कियों की तसवीरें आती हैं. परिवार चाहता है कि प्रेम की शादी पारंपरिक तरीके से तय हो जाए. लेकिन कहानी उस समय दिलचस्प मोड़ लेती है, जब प्रेम की मुलाकात काजल राघवानी के किरदार से होती है और पहली नजर में ही दोनों के बीच प्रेम की शुरुआत हो जाती है.
काजल राघवानी का किरदार फिल्म की कहानी को एक अलग दिशा देता है. वह पढ़ीलिखी और नौकरी करने वाली युवती है, जिस की अपनी सोच और आत्मसम्मान है.
कहानी में जब प्रेम के परिवार की महिलाएं शादी के लिए काजल के घर पहुंचती हैं और रिश्ता लगभग तय हो जाता है, तब एक छोटी सी बात बड़ा विवाद पैदा कर देती है. घर के काम को ले कर काजल का स्पष्ट रुख संयुक्त परिवार की पारंपरिक उम्मीदों से टकराता है.
काजल के पिता के किरदार में संजय पांडे ने असरदार काम किया है. वे बेटी की भावनाओं को सम?ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन साथ ही चाहते हैं कि उन की बेटी ऐसे परिवार में जाए जहां रिश्तों की गरमाहट बनी रहे. वे काजल की शादी संयुक्त परिवार में इसलिए करना चाहते हैं ताकि बेटी भविष्य में अकेलेपन का शिकार न हो.
‘प्रेम विवाह’ की सब से बड़ी उपलब्धि यह है कि फिल्म अपने संदेश को भाषण बना कर नहीं परोसती.
इस फिल्म में कौमेडी है, प्रेम है, पारिवारिक ड्रामा है, गलतफहमी है और इमोशन भी है. दर्शक एक तरफ हंसता है तो दूसरी तरफ परिवार टूटने के दृश्य उसे भावुक करते हैं. यही संतुलन फिल्म को मनोरंजक बनाए रखता है.
भोजपुरी सिनेमा में पारिवारिक फिल्में कोई नई चीज नहीं हैं, लेकिन चुनौती हमेशा यही रहती है कि कहानी उपदेशात्मक न लगे. फिल्म ‘प्रेम विवाह’ काफी हद तक इस संतुलन को साधने में सफल होती है.
फिल्म का निर्देशन संजय कुमार श्रीवास्तव ने किया है. उन्होंने फिल्म को मुख्य रूप से परिवार और प्रेम की केंद्रीय कहानी के आसपास रखा है और कौमेडी तथा भावनात्मक दृश्यों के जरिए दर्शकों को जोड़े रखने की कोशिश की है.
‘प्रेम विवाह’ की सफलता में पूरी कलाकार मंडली ने फिल्म को प्रभावी बनाने में अपनी भूमिका निभाई है. अरविंद अकेला कल्लू ने प्रेम के किरदार को अपने सहज और नैचुरल अंदाज में निभा कर अपनी अलग छाप छोड़ी है, वहीं काजल राघवानी ने रश्मि के किरदार में प्रेम, आत्मसम्मान, उलझन और परिवार के प्रति बदलते नजरिए को अच्छी तरह परदे पर उतारा है.
संजय पांडे ने काजल के पिता के किरदार में खास प्रभाव छोड़ा है.
उन के किरदार में बेटी के प्रति चिंता और उसके बेहतर भविष्य की चाह साफ दिखाई देती है. परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिकाओं में नजर आए कलाकारों ने भी अपनेअपने किरदारों को सहजता से निभाया है.
इस फिल्म से जुड़े कई कलाकारों और टैक्निशियंस को ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स’ से नवाजा जा चुका है, जिस में फिल्म निर्माता रौशन सिंह और शर्मिला सिंह, निर्देशक संजय कुमार पांडेय, अभिनेता अरविंद अकेला कल्लू, संजय पांडेय, विनोद मिश्र, समर्थ चतुर्वेदी, रीना संतोष श्रीवास्तव, साहिल सिद्दीकी सहित तकनीकी पक्ष से आशुतोष तिवारी, प्रियांशु सिंह और मनोज भावुक का नाम शामिल है.Bhojpuri Cinema




