News Story. ‘‘अनामिका ने फ्लैट लेने के बाद हमें पहली बार अपने घर बुलाया है. व्हाट्सऐप मैसेज पर उस ने सरप्राइज पार्टी का कुछ हिंट दिया था. पता नहीं उस के मन में कौन सी खुराफात चल रही है,’’ शिवानी बोली.
शिवानी, महेश और राघव एक कार से अनामिका के नए फ्लैट पर जा रहे थे. विजय पहले से ही वहीं था.
‘‘क्यों इतनी चिंता कर रही हो. कुछ देर में पता चल जाएगा कि दिन में पार्टी रखने का मकसद क्या है,’’ राघव ने कार अनामिका की हाउसिंग सोसाइटी में दाखिल करते हुए कहा.
वे तीनों अनामिका के फ्लैट के सामने खड़े थे. राघव ने डोरबैल बजाई. विजय ने दरवाजा खोला. उसे देखते ही उन तीनों की आंखें फटी की फटी रह गईं.
विजय एक भगवा चोले में उन्हें आशीर्वाद देने की मुद्रा में बोला, ‘‘आओ बच्चो, हमें आप का ही इंतजार था.’’
वे तीनों मुंह खोले अंदर घुसे कि वहां अनामिका का भी यही हाल था. उस ने भी भगवा धारण किया हुआ था.
‘‘यह सब क्या माजरा है? तुम ने हमें पार्टी में बुलाया है या किसी सत्संग में?’’ शिवानी बोली.
‘‘शांत बालिका, अभी सब खुलासा हो जाएगा. पहले आप तीनों भी ये ड्रैस पहन लो. फिर हमें एक मिशन पर निकलना है,’’ विजय बोला.
‘‘मिशन से तुम्हारा क्या मतलब है?’’ महेश ने पूछा.
‘‘हम पांचों को यह भगवा ड्रैस पहन कर सोसाइटी में लोगों से मिलना है और एक प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए चंदा जमा करना है. जब चंदा जमा हो जाएगा, तो हम उस पैसे से पार्टी करेंगे,’’ अनामिका बोली.
‘‘यह कैसा मजाक है… लोग हमें क्यों चंदा देंगे?’’ राघव ने पूछा.
‘‘आज हमें भगवा रंग की ताकत देखनी है,’’ विजय बोला.
पूरी तरह सम झने पर उन तीनों को भी यह एक रोचक मामला लगा. उन्होंने भगवा पहना और चंदा जमा करने के लिए राजी हो गए.
अनामिका और राघव एक टीम में थे और बाकी तीनों दूसरी टीम में. 2 घंटे में उन्हें वापस लौटना था, चाहे कितना भी चंदा जमा हो.
अनामिका ने एक घर की डोरबैल बजाई. एक बूढ़ी औरत ने दरवाजा खोला और उन दोनों को देख कर वे हाथ जोड़ने लगीं.
‘‘अम्मां, हम एक मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए चंदा जमा कर रहे हैं. आप की जितनी श्रद्धा हो…’’ राघव धीरे से बोला.
वे बूढ़ी औरत बिना देर किए 500 रुपए ले कर आईं और अनामिका को थमा दिए. न ज्यादा जानकारी मांगी और न ही चंदे की रसीद ही ली.
‘‘यार, इस तरह मंदिर के नाम पर चंदा मांगना तो बहुत आसान है,’’ राघव खुश हो कर बोला.
फिर वे दोनों अगले घर की तरफ हो लिए. इस तरह कब 2 घंटे बीत गए पता ही नहीं चला. तकरीबन एक बजे वे पांचों अनामिका के फ्लैट पर थे.
‘‘कैसा रहा आज का चंदा जमा करने का मिशन? हमें तो बहुत मजा आया,’’ राघव ने विजय से पूछा.
‘‘ठीक ही रहा. पर एक अंकल ने बहुत तगड़ी छानबीन की,’’ विजय बोला.
‘‘मतलब?’’ अनामिका ने सब को ठंडा पानी सर्व करते हुए पूछा.
‘‘मैं बताती हूं. जब हम फर्स्ट फ्लोर के एक घर में गए तो वहां एक अधेड़ आदमी से हमारा सामना हुआ. जैसे ही हम ने चंदा मांगा, उन के तेवर ही बदल गए,’’ शिवानी बोली.
‘‘अच्छा, ऐसा क्या हुआ वहां पर?’’ राघव ने पूछा.
‘‘ऐसा लगा कि वे खुफिया विभाग में हैं. हम सब का परिचय पूछने लगे. फिर मंदिर की पूरी जानकारी ली. सब से बड़ी बात तो उन्हें चंदे की रसीद चाहिए थी,’’ इस बार महेश बोला.
‘‘फिर तुम लोगों ने क्या किया?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘करना क्या था. उन से कहा कि आप को विश्वास होना चाहिए कि हम चंदे से मंदिर ठीक कराएंगे, पर उन्होंने जब अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला सामने रखा तो हमें सम झ आया कि गलत बंदे को छेड़ दिया है.
हम ने बड़ी मुश्किल से पीछा छुड़ाया,’’ विजय बोला.
‘‘मतलब तुम लोगों को ज्यादा चंदा नहीं मिला?’’ राघव ने सवाल दागा.
‘‘ऐसा नहीं है. औरतों और बुजुर्गों ने अच्छा चंदा दिया. हमें कुल 3,000 रुपए मिले. और तुम लोगों को?’’ शिवानी ने अनामिका से पूछा.
‘‘कुल जमा हुए 4,450 रुपए,’’ अनामिका बोली.
‘‘वाह, चलो खाने का औनलाइन और्डर करते हैं,’’ विजय बोला.
खाना और्डर करने के बाद अनामिका बोली, ‘‘पर यार, यह जो राम मंदिर का चंदा चोरी का मामला है, बहुत ही संवेदनशील मामला है. वहां हुई चोरी से लोगों की धर्म और मंदिर में आस्था कम हुई है.’’
यह सुन कर राघव बोला, ‘‘मैं तुम्हारी बात से सहमत नहीं हूं. अयोध्या का राम मंदिर महज एक मंदिर नहीं है, बल्कि दुनियाभर के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र भी है. जनवरी, 2024 में राम लला की प्रतिमा की स्थापना के बाद से ही लाखों लोग यहां दर्शनपूजन के लिए हर दिन आते हैं.’’
‘‘पर सारा मसला ही राम मंदिर में चढ़ने वाले चढ़ावे का है. प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से मंदिर को भक्तों से जबरदस्त दान मिला है. लाखों लोग नकद, सोनाचांदी, आभूषण और दूसरे कीमती उपहार रामलला को चढ़ाते हैं, इसलिए रामलला के चढ़ावे में हेराफेरी, कीमती सामान का गायब होना, अभिलेखों में कथिततौर पर हेराफेरी के दावे ने इसे राष्ट्रीय विवाद का मुद्दा बना दिया,’’ अनामिका ने कहा.
‘‘यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में राम मंदिर को मिले दान में कथित अनियमितताओं को उजागर किया. यह मुद्दा 7 जून को तब राजनीतिक बन गया, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि करोड़ों रुपए के चढ़ावे का हिसाब नहीं मिल पा रहा है.
‘‘शुरुआत में खबर आई थी कि 5 करोड़ से 75 करोड़ रुपए तक की दान राशि का हिसाब नहीं मिल रहा है. बाद में कुछ खबरों में दावा किया गया कि कथित गड़बड़ी की रकम कहीं ज्यादा हो सकती है. कई रिपोर्टों में अंदाजा लगाया गया कि गायब रकम 200 करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो सकती है,’’ अनामिका ने आगे जोड़ा.
‘‘पर इन आरोपों की हकीकत क्या है? और पूरा मामला क्या है?’’ विजय ने सवाल किया.
‘‘पहली नजर में यह विवाद दान के प्रबंधन से जुड़ा हुआ है. रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ कैश काउंटिंग स्टाफ ने कथिततौर पर वाउचर में दान पेटियों से जमा की गई नकदी को कम कर के बताया. श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोनेचांदी और आभूषणों के प्रबंधन को ले कर भी सवाल उठाए गए.
‘‘कई महीनों तक नकदी गिनने वाले क्षेत्रों से सीसीटीवी फुटेज कथिततौर पर हटाए जाने के आरोपों के बाद शक और भी बढ़ गया. इस के अलावा यह भी आरोप है कि अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों को या तो नजरअंदाज कर दिया गया या उन पर ढंग से कार्रवाई नहीं की गई,’’ अनामिका बोली.
‘‘तुम्हारा मानना है कि चूंकि ये आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं, लेकिन चंदा चोरी की आम धारणा को काफी हद तक मजबूत किया है, इसलिए गहन जांच की जरूरत है?’’ शिवानी ने गंभीर सवाल किया.
‘‘बिलकुल. वैसे, यह विवाद तब और सुर्खियों में आ गया, जब धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने बहुमूल्य रामशिलाओं के संबंध में सनसनीखेज आरोप लगाए. उन के मुताबिक, सोनेचांदी, हीरेमाणिक और दूसरी कीमती धातुओं से बनी तकरीबन 1,250 रामशिलाएं गायब हैं. इन्हें कथिततौर पर भारत और विदेशों में पूजाअर्चना के बाद अयोध्या लाया गया था,’’ अनामिका बोली.
‘‘अच्छा तो यह बताओ कि राम मंदिर में दान कैसे एकत्र किया जाता है?’’ महेश ने सवाल दागा.
‘‘इन सब आरोपों को समझने के लिए वसूली के प्रोसैस को समझना भी बहुत जरूरी है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा दर्शन मार्ग के आसपास कई दान पेटियां या हुंडियां लगाई गई हैं. हर दिन हजारों श्रद्धालु इन बक्सों में नकद दान जमा करते हैं.
‘‘ट्रस्ट ने दान में दिए गए नकद को गिनने के प्रोसैस में भारतीय स्टेट बैंक को शामिल किया. बाद में बैंक ने यह काम एक निजी एजेंसी को आउटसोर्स कर दिया. इस का असर यह हुआ कि दान के पूरे प्रोसैस में मंदिर के कर्मचारी, आउटसोर्स किए गए कैश काउंटर, पर्यवेक्षक, बैंकिंग टीमें शामिल हो गए.
‘‘फिलहाल आरोप इस बात पर केंद्रित हैं कि दान एकत्र होने के बाद क्या हुआ होगा, न कि इस बात पर कि दान किए गए सामान सीधे दान पेटियों से गायब हो गए.’’
‘‘यह मामला बहुत ज्यादा रोचक और पेचीदा है,’’ विजय ने कहा.
‘‘रोचक तो मैं कह नहीं सकती पर पेचीदा जरूर है. राम मंदिर चंदा चोरी विवाद का शायद सब से अहम पहलू इस से संपत्ति में बेहिसाब इजाफा है. खबरों के मुताबिक, दान प्रबंधन में शामिल कई कर्मचारी जांच के दायरे में आ गए, जब जांचकर्ताओं ने कथिततौर पर उन की अपार संपत्ति का पता चला. ये उन के बताए गए आय के स्रोतों से कहीं ज्यादा थे,’’ अनामिका बोली.
‘‘अच्छा? जरा सम झाना कि यह कैसे सामने आया?’’ राघव ने पूछा.
‘‘रिपोर्टों से पता चलता है कि तकरीबन 18,000 रुपए से 20,000 रुपए प्रतिमाह कमाने वाले कर्मचारियों के पास आलीशान घरकार हैं और उन्होंने बिजनैस में निवेश किया है. खबरों के मुताबिक, 2 कर्मचारियों ने डेढ़ करोड़ रुपए और 40 लाख रुपए की जमीनें खरीदीं थीं. बाद में लवकुश मिश्रा की गिरफ्तारी और पैसों की बरामदगी से मामला और ज्यादा साफ हुआ.
‘‘दरअसल, कैश गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद जांच में तेजी आई. खबरों के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने उस के घर से तकरीबन 10 लाख रुपए बरामद किए हैं. मीडिया रिपोर्टों में आगे बताया गया कि कुछ नकदी कथिततौर पर गोबर के नीचे छिपाई गई थी,’’ अनामिका ने बताया.
‘‘पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि इंटरनल औडिट में कोई वित्तीय अनियमितता नहीं पाई गई है और इस में कही घपला नहीं मिला है,’’ महेश ने कहा, ‘‘तो क्या राम मंदिर चंदा विवाद को सीधे उत्तर प्रदेश सरकार से जोड़ना भ्रामक नहीं है? क्योंकि जैसेजैसे विवाद बढ़ता गया, विपक्षी नेताओं ने इसे उत्तर प्रदेश सरकार की नाकामी के रूप में दिखाने का प्रयास किया, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट की कानूनी और संस्थागत संरचना से योगी सरकार का कोई लेनादेना नहीं है.
‘‘जहां तक मेरी जानकारी है श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नहीं किया गया था. इस की स्थापना फरवरी, 2020 में सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से की गई थी. अधिग्रहित भूमि का स्वामित्व उस कानूनी ढांचे के तहत सीधे ट्रस्ट को हस्तांतरित कर दिया गया था.’’
‘‘तकनीकी रूप से यह सही है, तभी तो उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए 3 सदस्यों वाली स्पैशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई. अधिकारियों के मुताबिक एसआईटी का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किया गया. यह कदम ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के अनुरोध पर उठाया गया, जिस ने इसे ‘गलत जानकारी को रोकने और सच सामने लाने’ के लिए जरूरी बताया और आरोप लगाया कि राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं.
‘‘एसआईटी में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर आईएएस विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) आईपीएस किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. राज्य सरकार के मुताबिक मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या मंदिर परिसर में दान पेटियों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी,’’ अनामिका बोली.
‘‘तुम सही कह रही हो. इस पूरे मामले में केंद्र और राज्य सरकार भी कठघरे में खड़ी दिखाई देती है. ऐसा महसूस होता है कि एसआईटी का गठन एक छलावा मात्र है,’’ शिवानी बोली.
‘‘तभी तो कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद के मकर द्वार के सामने इस मुद्दे को ले कर तीखा विरोध प्रदर्शन किया. अदालत की निगरानी में जांच की मांग रखी. कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ट्रस्ट के भीतर एक संगठित रैकेट काम कर रहा है. विपक्ष ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज के नेतृत्व में या कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.
‘‘विपक्ष का कहना है कि मौजूदा एसआईटी जांच महज एक दिखावा है, जो केवल निचले स्तर के आउटसोर्स कर्मचारियों को निशाना बना रही है, जबकि इस के पीछे के बड़े और प्रभावशाली चेहरों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसे भाजपा सरकार की सब से बड़ी नाकामी करार दिया है.
‘‘इतना ही नहीं, इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि साधुसंतों में भी गुस्सा देखा जा रहा है. मीडिया की कई रिपोर्टों के मुताबिक, विभिन्न आध्यात्मिक गुरुओं और सैकड़ों संतों ने मंदिर के चढ़ावे में हुई इस चोरी के विरोध में दिल्ली में मार्च निकाला और प्रधानमंत्री आवास तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की.
‘‘फिलहाल यह मामला पूरी तरह से अदालत की निगरानी और पुलिस जांच के अधीन है. जहां एक तरफ सरकार निष्पक्ष जांच का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे बड़ा घोटाला बता कर लगातार हमलावर है,’’ अनामिका ने अपनी बात रखी.
इस के बाद कमरे में चुप्पी छा गई. तभी डोरबैल बजी. औनलाइन फूड डिलीवरी बौय था. जो चंदा इन लोगों ने जमा किया था, उस का इन्होंने खाना जो मंगा लिया था.
अभी खाना सर्व भी नहीं हुआ था कि दोबारा डोरबैल बजी. अब की बार ड्रैस वाला था. उन सब को भगवा ड्रैस में देख कर उस की हंसी निकल गई, फिर वह बोला, ‘‘आप ने 3 घंटे के लिए ड्रैस किराए पर ली थी और अब तो 5 घंटे हो गए हैं. प्लीज, आप ड्रैस वापस कर दीजिए और किराया भी.’’
यह सुन कर सब एकदूसरे का मुंह ताकने लगे. उन का चंदे से मंगाए गए खाने का स्वाद चखने से पहले ही किरकिरा हो गया था. News Story




