Editorial: दिल्ली सरकार ने सरकारी योजनाओं के तहत गरीबों को भाजपा के सांसदों और विधायकों के चरण चुमवाने की बढि़या स्कीम तैयार की है. लक्ष्मी योजना में 2,500 रुपए 21 साल से 60 साल की एक घर की सब से बड़ी लड़की या औरत को मिलेंगे अगर उस के घर की आमदनी 2 लाख रुपए सालाना यानी 17,000 रुपए मासिक से कम है. उस का दिल्ली का वोटर होना भी जरूरी है.
जो बात सब से मजेदार है वह है सांसद या विधायक का पत्र लगाना चाहिए. 6 कागजों में यह जरूरी है. चुनाव से पहले कहा गया था कि यह रकम 17 लाख औरतों को मिलेगी और इस का मतलब है कि अब 17 लाख औरतें सांसदों और विधायकों को मुफ्त में मिल रही हैं.
कोर्ट यह सोचे कि विधायक और सांसद मुफ्त में यह पत्र दे देगा तो या तो बेवकूफ है या अंधभक्त है. सांसद और विधायक देखेगा कि 17 साल से 61 साल तक की लड़की या औरत या फिर उस के घर की कोई और औरत या लड़की या मर्द उस के किस काम के हैं. इस पत्र को लेने के लिए भाजपा के 7 सांसदों और 48 विधायकों के घरों में सुंदरसुंदर लड़कियों से ले कर बूढ़ी औरतें तक खड़ी होंगी कि हुजूर हम से चाहे जो काम करा लो, 2,500 रुपए दिला लो.
ह्यूमन टै्रफिकिंग इसी को कहते हैं. पैसे और सुख के लालच में तनमन देना तो धर्म भी सिखाता है. जब पैसा मिल रहा है तो राजा जैसे सांसदों या विधायकों के लिए कुछ भी करने में क्या हर्ज है. यही बात तो हमारे पौराणिक ग्रंथों में कही गई है. बारबार जब भी राजा कोई यज्ञ करता दूरदूर से ऋषियोंमुनियों को बुलाता था और लौटते समय उन्हें अनाज के साथ दासदासियां भी देता था, सैकड़ों में. आखिर राजा के पास ये सैकड़ों दासियां आती कहां से थीं? लूट कर लाई गई होंगी न या उन्हें कुछ लालच दे कर अपने हरमों में या जेलों में रखा गया होगा.
आज वही दोहराया जा रहा है. सांसद या विधायक से पत्र लेने के नाम पर 17 लाख फायदा पाने वालों की गिनती घट कर 5-7 लाख रह जाएगी पर ढोल पीटा जाता रहेगा कि हम तो इतनी सारी औरतों को हर माह 2,500 रुपए दे रहे हैं जैसे ये पैसे खुद कमाए थे. यह कहने की बात थोड़ी है कि यह पैसा तो असल में जनता से सैकड़ों तरह के टैक्सों और फीसों से वसूला जाता है.
सरकारों को औरतों को सहूलियतें देनी हैं तो उन की पढ़ाई व हैल्थकेयर बिलकुल मुफ्त होनी चाहिए. उन्हें उसी पढ़ाई का हक मिलना चाहिए जो अमीर घरों की लड़कियों को मिल रहा है. जैसे सड़क सब की साथी होती है, जैसे स्ट्रीट लाइट सब की साझी होती है, पढ़ाई एकजैसी सब की होनी चाहिए. इस मे न सांसद दखल दें, न विधायक.
हैल्थकेयर सब को मिलनी चाहिए, कम से कम जान बचाने वाली और एक्सीडैंट के बाद. कल को दिल्ली सरकार शायद यह भी बहाना कर देगी कि अस्पताल या स्कूल में भरती होना है, किसी सांसद या विधायक का लैटर ले कर आओ. जिस तरह की मानसिकता आज की सरकार की है, उस में तो वह कहना शुरू कर दे कि गली के मंदिर के पुजारी का पत्र ले कर आओ तो बड़ी बात नहीं क्योंकि आज की सरकार तो मंदिर पर ही टिकी है. हर सांसद, हर विधायक, हर पार्षद, हर जिला परिषद सदस्य, हर पंच मंदिरों की खातिर ही जीता है. Editorial




