Tragic Love Story. अचानक राकेश की मौत की खबर सुन कर मेरा दिल दहल उठा. मैं वहां जाने ही वाला था कि मां आ कर खाना लगाने लगीं, पर मुझ से खाना नहीं खाया गया. मां की जिद पर सिर्फ एक गिलास दूध पी लिया.

थोड़ी देर बाद मैं ने मां को बता दिया कि राकेश ने खुदकुशी कर ली है.

‘‘यह तो बहुत बुरा हुआ,’’ वे दुखी आवाज में बोल उठीं. फिर वे राकेश के यहां चली गईं और मैं वहीं बैठ कर बीते दिनों की यादों में खोता चला गया.

राकेश और मैं बचपन से एकसाथ पढ़ते चले आ रहे थे. कालेज में पास ही के एक गांव की लड़की पढ़ने के लिए आती थी, जिस का नाम कंचन था. वह ‘कालेज का नूर’ कही जाने लगी थी.

कंचन जिधर से निकलती, लड़के आहें भरने लगते, पर उसे तो सिर्फ अपनी पढ़ाई से मतलब था.

कंचन की वजह से राकेश पढ़ाई में पिछड़ने लगा था, जबकि वह पढ़ने में होशियार थी. सारे कालेज में राकेश ही एक ऐसा लड़का था, जिस में कंचन को दिलचस्पी थी. वह अकसर उस से पढ़ाईलिखाई के बारे में बात कर लिया करती थी.

राकेश कंचन पर दिलोजान से फिदा था, लेकिन इस की भनक उसे बिलकुल नहीं थी. वह उसे एक सहपाठी के रूप में देखा करती थी.

इसी दौरान एक ऐसी घटना घट गई कि कंचन अपनेआप राकेश की ओर खिंचती चली गई.

हुआ यह कि राकेश और मैं एक दिन लाइब्रेरी में कुछ किताबें लेने के लिए रुक गए थे.

कुछ देर बाद हम लोग अपने रास्ते जा रहे थे कि देखा कि एक किताब और एक रूमाल जमीन पर गिरा पड़ा था.

मैं ने लपक कर किताब उठाई और देखा कि उस पर कंचन का नाम लिखा हुआ था.

‘अरे राकेश, जरा देखना तो…’ मैं उतावला होते हुए बोला. ‘क्या है?’ वह कंचन की किताब को देखते ही बोला.

‘लगता है, कंचन किसी मुसीबत में फंस गई है.’ तभी ‘बचाओ… बचाओ…’ की हलकी सी आवाज मेरे कानों में पहुंची.

मैं फौरन पहचान गया कि यह आवाज कंचन की ही है. तकरीबन डेढ़ सौ फुट की दूरी पर एक झाड़ी से वह आवाज आई थी.

राकेश उस तरफ सरपट दौड़ा. झाड़ी के करीब पहुंचने पर वहां का सीन देख कर हम लोग दंग रह गए. 4 मनचले कंचन की इज्जत लूटने पर उतारू थे. उन में से एक के हाथ में चाकू भी था.

राकेश ने गरजते हुए कहा, ‘पागल कुत्तो, अकेली लड़की की इज्जत को लूटते हुए तुम लोगों को शर्म नहीं आती,’ इतना कह कर उस ने चाकू वाले लड़के को पकड़ कर एक तरफ लुढ़का दिया. यह देख कर वे सभी कंचन को छोड़ कर राकेश पर टूट पड़े.

मुझ  में भी जैसे गजब की ताकत आ गई और मैं ने लपक कर राकेश को उठा लिया, जो चारों लड़कों के बीच घिर चुका था. फिर हम दोनों ने मिल कर उन चारों की जम कर धुनाई शुरू कर दी.

तभी किसी तरह उस चाकू वाले लड़के को मौका मिल गया. वह राकेश की ओर बढ़ा. लेकिन उस का चाकू राकेश की पीठ में धंसता, उस से पहले कंचन आगे आ गई. चाकू से उस की बांह बुरी तरह जख्मी हो गई.

कंचन मारे दर्द के कराह उठी. यह देख कर मेरा गुस्सा सातवें आसमान को छूने लगा. मैं ने चाकू वाले लड़के की जम कर पिटाई की.

यह देख कर बाकी तीनों लड़के भाग निकले. तब तक राकेश ने कंचन की बांह पर अपना रूमाल कस कर बांध दिया था.

कंचन अपने सिर को राकेश के सीने पर रखती हुई बोली, ‘अगर आप लोग आज सही समय पर मुझे  बचाने नहीं आते, तो मैं किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहती.’

‘कंचन, आज अगर तुम्हें बचाने में मेरी जान भी चली जाती, तो मैं अपनेआप को खुशनसीब समझता,’ राकेश ने हौले से कहा.

इस के बाद हम लोग कंचन को उस के घर छोड़ आए. अगले दिन से कंचन और राकेश की मुलाकातें बढ़ने लगीं. अकसर कालेज की छुट्टी के बाद वे लोग किसी होटल में साथसाथ चायकौफी पीते देखे जाते.

कंचन और राकेश एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे थे. अगर कंचन एक दिन भी कालेज नहीं आती, तो राकेश बेचैन हो जाता था.

यह बात किसी तरह राकेश के पिता को मालूम हुई, तो वे बौखला गए. राकेश उन का एकलौता बेटा था और वे यह सहन नहीं कर सकते थे कि उन का बेटा किसी दूसरी जाति की लड़की से प्यार करे. उन्होंने ठाकुर महेंद्र प्रताप की बेटी रश्मि से उस का रिश्ता तय कर दिया.

जब राकेश को यह पता चला कि उस की शादी महेंद्र प्रताप की बेटी रश्मि से तय कर दी गई है, तो वह तड़प उठा. उस ने अपने पिताजी से कंचन से शादी करने की बात कही, तो वे गरजते हुए बोले, ‘कंचन एक छोटी जाति की लड़की है. वह हमारे खानदान की बहू नहीं बन सकती. अगर तुम ऐसा करोगे, तो मैं तुम्हें अपनी जायदाद से बेदखल कर दूंगा.’

‘ठीक है,’ कह कर राकेश वहां से चला गया.

अगले दिन राकेश ने कंचन को सबकुछ बता दिया और कहा, ‘मैं तुम्हारे बिना जिंदा नहीं रह पाऊंगा. अगर तुम से बिछुड़ गया, तो हमेशा के लिए इस दुनिया से मुंह मोड़ लूंगा.’

यह सुनते ही कंचन रो पड़ी. अपने आंसू पोंछते हुए वह बोली, ‘नहीं, तुम ऐसा नहीं करोगे… तुम्हें मेरी कसम. तुम अपने मातापिता के एकलौते बेटे हो… तुम्हें अपने पिताजी की बात माननी ही पड़ेगी,’ कंचन अपने सिर को राकेश की बांहों पर टिकाते हुए सिसकने लगी.

राकेश उस दिन कालेज से जल्दी ही लौट गया था. उसे देखते ही पिताजी बोले, ‘परसों तुम्हारी शादी?है. अब कालेज मत जाया करो.’

अगली सुबह राकेश के मातापिता तबाह हो चुके थे, क्योंकि उन का बेटा इस दुनिया से बहुत दूर जा चुका था.

‘‘बेटे, क्या सोच रहे हो?’’ मां की आवाज ने मेरा खयाल भंग किया, तो मेरी आंखों से झरझर आंसू बहने लगे.

फिर 2 दिन के बाद पता चला कि कंचन भी इस दुनिया को छोड़ कर राकेश के पास चली गई है. Tragic Love Story

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