Mahima Makwana. इन दिनों महिमा मकवाना अपनी न्यू सीरीज ‘मुसाफिर कैफे’ के लिए सुर्खियां बटोर रही हैं. महिमा ओटीटी, फिल्म और टीवी इंडस्ट्री का जानापहचाना नाम हैं. महिमा अपनी मरजी से ऐक्ट्रेस नहीं बनीं, बल्कि हालात ने उन्हें ऐक्टिंग करने के लिए मजबूर किया.

हिंदी वैब सीरीज ‘मुसाफिर कैफे’ में प्रीति का रोल निभाने वाली महिमा मकवाना आजकल चर्चा का विषय बन गई हैं. इस सीरीज को काफी अच्छा रिस्पौंस मिल रहा है, साथ ही, महिमा ने अपने रोल को बहुत ही खूबसूरती से निभाया भी है.

महिमा आज टीवी, ओटीटी और फिल्म तीनों माध्यमों पर काम कर रही हैं. लेकिन उन के फिल्मी कैरियर की बात करें तो उन्हें कई उतारचढ़ावों का सामना करना पड़ा. जब वे 5 महीने की थीं, पिता का साया उन पर से उठ गया और उन की मां ने घर संभाला. महिमा ने बताया कि जब वे 10 साल की थीं तो उन्होंने औडिशन देने शुरू कर दिए थे. उन्होंने बताया कि वे अपनी मां और भाई का ध्यान रखना चाहती थीं, इस वजह से उन्होंने इतनी छोटी सी उम्र में काम करना शुरू कर दिया था. महिमा को पहला शो तब मिला जब वे 12 साल की थीं.

महिमा का ऐक्टिंग कैरियर
महिमा ने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर कलर्स टीवी के शो ‘मोहे रंग दे’, ‘बालिका वधु’ और स्टार वन के शो ‘जब हम तुम’ में काम किया. ‘सपने सुहाने लड़कपन के’ ने उन्हें घरघर मशहूर कर दिया था. टीवी सीरियल्स के बाद महिमा ने साउथ की फिल्में कीं.

‘वेंकटपुरम’ उन की पहली साउथ इंडियन (तेलुगू) फिल्म थी, जो एक थ्रिलर ड्रामा है. तेलुगू की ही ‘मोसागल्लू’ में उन्होंने सोहा का किरदार निभाया था. इस के अलावा हिंदी वैब सीरिज ‘रंगबाज’, ‘फ्लैश’, ‘शोटाइम’ और अब कई सालों बाद ‘मुसाफिर कैफे’ में उन्हें देखा गया है.

बौलीवुड डैब्यू
अभिनेत्री महिमा ने बौलीवुड में सलमान खान की फिल्म ‘अंतिम- द फाइनल ट्रुथ’ से फीमेल लीड के तौर पर डैब्यू किया था. इस फिल्म में सलमान खान के जीजा आयुष शर्मा मेल लीड रोल में हैं. अपने इंटरव्यूज में महिमा ने बताया कि इस फिल्म को करने के बाद लोगों ने तारीफें तो बहुत कीं, फिल्म को अच्छा रिस्पौंस भी मिला लेकिन काम नहीं मिला.

महिमा कहती हैं कि टीवी पर काम करना और फिल्म इंडस्ट्री में काम करना दोनों बहुत ही अलग हैं. इंडस्ट्री में काम करने के लिए आप को ब्रैंड्स, मार्केटिंग और कपड़ों सबकुछ का ध्यान रखना पड़ता है. इस के बाद उन्हें एक और फिल्म में देखा गया जिस का नाम है ‘तुमसे न हो पाएगा.’

अपनी मरजी से ऐक्ट्रेस नहीं बनीं
2021 में रणवीर इलाहाबादिया के पौडकास्ट में बात करते हुए महिमा ने बताया था- ‘मैं सिर्फ 5 महीने की थी जब मेरे पापा का निधन हो गया. उस समय मेरी मां एक एनजीओ में काम करती थीं. मेरे भाई की उम्र 9 साल थी. मेरी मां हमेशा से ऐक्ट्रेस बनना चाहती थीं, लेकिन बन नहीं पाईं. सो, उन्होंने मुझे ऐक्टिंग की तरफ धकेला.’

उन्होंने आगे बताया- ‘मैं 9 साल की उम्र से औडिशन देने लगी थी. मैं अपनी मां से कहती थी कि मुझे ऐक्टिंग नहीं करनी. मुझे इस दुनिया की समझ ही नहीं थी. मैं स्कूल का आधा दिन पढ़ कर बस से औडिशन देने जाती और बहुत थक कर लौटती. लेकिन मां मुझे लगातार आगे बढ़ाती रहीं.’

महिमा ने कहा कि इस इंडस्ट्री में आने की सब से बड़ी वजह यह थी कि मैं अपने परिवार का सहारा बनना चाहती थी. इस जिम्मेदारी ने उन का बचपन छीन लिया. घर में कमाने वाला और कोई नहीं था. हम चाल में रहते थे. यहां तक कि समाज, रिश्तेदार सभी हमें नीची नजरों से देखते थे.

महिमा को 2012 में जी टीवी के शो ‘सपने सुहाने लड़कपन के’ से बड़ी पहचान मिली. उस समय वे सिर्फ 13 साल की थीं. शो की सफलता ने कुछ ही समय में उन के परिवार की आर्थिक हालत बदल दी.

महिमा कहती हैं, ‘उस के बाद मैं ने अपना पहला घर खरीदा. मैं सिर्फ 14 साल की थी. मैं ने मीरा रोड में घर लिया और अपनी पहली कार भी खरीदी. मैं ने अपनी जिंदगी के सुनहरे दिन, यानी स्कूल, खो दिए. मैं सिर्फ एग्जाम देने के लिए स्कूल जाती थी. इस दौरान मैं बहुत जल्दी बड़ी हो गई.’

पिता का साया न होने के बावजूद आज उन के पास घर, गाड़ी और पैसा सब है. इस के लिए उन की जितनी तारीफ कि जाए, कम है.

काम की कमी
महिमा मकवाना को टीवी सीरियल हो या वैब सीरिज या फिर बौलीवुड फिल्में, काम की तारीफ तो हुई लेकिन काम नहीं मिला. अगर उन के अपकमिंग प्रोजैक्ट्स की भी बात करें तो फिलहाल उन के पास कोई काम नहीं है. कई साल बाद उन के हाथ ‘मुसाफिर कैफे’ लगी जिसे फैंस पसंद कर रहे हैं तो क्या आगे उन्हें और भी काम मिल सकता है, यह तो वक्त ही बताएगा.Mahima Makwana

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