Social Story in Hindi. रजा ने गौर किया कि निकहत का चेहरा सफेद हो गया था.

‘‘निकहत, कैसी तबीयत है तुम्हारी?’’ उस ने पूछा. ‘‘ठीक हूं,’’ निकहत बोली. उस की आवाज से लग रहा था कि उसे बोलने में काफी ताकत लगानी पड़ रही है.

रजा को लग रहा था कि निकहत की हालत ठीक नहीं है, जबकि भाभी इस बात से खुश हैं कि उन की देवरानी निकहत मां बनने वाली है और उसे दुआ देने मियांजी उस के घर आने वाले हैं.

मियांजी मजार की चादर ला कर निकहत पर डाल देंगे और उस की बीमारी दूर हो जाएगी.

कल रजा ने अब्बू से कहा था कि वे निकहत को अस्पताल दिखा लाएं, तो वे चिल्ला कर बोले थे, ‘तुम जाहिलों जैसी बातें करते हो. मियांजी आ रहे हैं. वे सब ठीक कर देंगे.’

रजा जानता है कि अब्बू मियांजी के खिलाफ एक शब्द भी सुनना पसंद नहीं करते. घर में चाहे कुछ हो जाए, अब्बू फकीर शाह मुरादों वाले के उर्स में चादर चढ़ाने जरूर जाते हैं.

रजा को याद है, जब वह छोटा था, तब अब्बू ने उर्स में जाने के लिए ब्याज पर रुपए उधार ले लिए थे. उस का ब्याज वे पूरे साल देते रहे थे.

ईद के सीजन की सिलाई से वे बड़ी मुश्किल से कर्ज चुका सके थे. उस साल घर में किसी के नए कपड़े नहीं बने थे. अब्बू ने कर्ज लेने की गलती को अल्लाह की मरजी कह दिया था.

मियांजी जब भी कसबे में आते हैं, उन के चेले त्योहार से ज्यादा उन की मेहमाननवाजी में खर्च कर देते हैं. रोज कमानेखाने वाले चेलों के घरों में कईकई दिन चूल्हा नहीं जलता.

जब से अब्बू ने यह कहा है कि चादर पड़ते ही निकहत ठीक हो जाएगी, तब से रजा कह नहीं पा रहा है कि मियांजी की चादर के चलते उस की अम्मी की जान गई थी.

बचपन की वह घटना रजा को ऐसे याद है, जैसे कल की बात हो. उस की अम्मी को बुखार आया था. अब्बू ने उन्हें डाक्टर के पास ले जाने के बजाय एक तावीज ला कर पहना दिया था.

तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी, तो अब्बू अम्मी को फकीर शाह मुरादों वाले के मजार पर ले गए थे. मियांजी ने अब्बू को भरोसा दिला दिया था कि मजार की चादर पड़ते ही वे ठीक हो जाएंगी.

मियांजी ने अम्मी पर चादर डाल दी थी. अम्मी उलटासीधा बकने लगी थीं, तो मियांजी ने कह दिया था कि उन के ऊपर किसी शैतान का साया है, जो अब भाग जाएगा.

वहां मौजूद एक आदमी ने अब्बू से कहा था कि इन्हें फौरन अस्पताल ले जाओ, इन्हें दिमागी बुखार है.

बहुत कहनेसुनने पर अब्बू अम्मी को अस्पताल ले गए थे. उन की हालत देखते हुए डाक्टर ने कहा था, ‘आप ने बहुत देर कर दी, फिर भी मैं कोशिश करता हूं.’

डाक्टर ने अम्मी को बचाने की बहुत कोशिश की थी, लेकिन वे बचा न सके थे.

रजा को लग रहा था कि निकहत के साथ भी कहीं ऐसा ही न हो जाए.

रजा ने देखा कि मियांजी के चेले आज बहुत खुश हैं, क्योंकि मियांजी उन के कसबे में आ रहे हैं.

रजा जानता है कि मियांजी और उन के साथ आने वाले 20-25 चेलों के लिए अब्बू खाने के लिए बढि़या से बढि़या इंतजाम करेंगे, चाहे कर्ज ही क्यों न लेना पड़े.

सभी मियांजी के स्वागत की तैयारी में लगे थे और निकहत की हालत खराब होती जा रही थी.

‘‘अब्बू, मैं निकहत को अस्पताल ले जा रहा हूं,’’ रजा अब्बू के पास जा कर धीरे से बोला.

‘‘तेरा दिमाग खराब हो गया है. चार अक्षर क्या पढ़ लिए, अपने को बड़ा अक्लमंद समझने लगा है…’’ अब्बू गुस्से से बोले, ‘‘अभी मियांजी आएंगे और सब ठीक कर देंगे.’’

‘‘जैसे अम्मी ठीक हो गई थीं…’’ ‘‘बापबेटे में क्या तकरार हो रही है?’’ मुश्ताक मियां आते हुए बोले.

‘‘चाचाजी, आप की बहू की हालत खराब होती जा रही है और अब्बू कह रहे हैं कि मियांजी की चादर पड़ते ही वह ठीक हो जाएगी.’’

‘‘चलो, मैं भी देखता हूं,’’ मुश्ताक मियां बोले. रजा मुश्ताक को कमरे में ले गया, जहां निकहत बेसुध पड़ी थी.

‘‘अरे, इस की हालत तो बहुत खराब है. इसे फौरन अस्पताल ले चलो,’’ मुश्ताक बोले.     ‘‘यह क्या कह रहे हैं आप,’’ अब्बू ने कहा.

‘‘तुम चादर बाद में डाल लेना, पहले इसे अस्पताल ले चलो. अंधविश्वास में भाभी को खो चुके हो, लेकिन तुम्हारी आंखें नहीं खुलीं,’’ मुश्ताक बोले.

रजा रिकशा ले आया और निकहत को अस्पताल ले गया.    डाक्टर ने निकहत को देखा और बोला, ‘‘इस के शरीर में खून की बहुत कमी है, इसे खून देना होगा.’’

‘‘आप हम लोगों में देख लें, जिस का खून चढ़े उस का ले लें,’’ अब्बू धीरे से बोले.

नर्स ने निकहत का खून ले कर उस का ग्रुप पता किया और सब के खून की जांच करने लगी.

रजा का खून निकहत के ग्रुप का निकला. उस का खून ले कर निकहत को चढ़ाया जाने लगा.

‘‘आप लोग और देर कर देते या खून का इंतजाम न होता, तो इसे बचाना मुश्किल हो जाता,’’ डाक्टर बोले.

अब्बू की आंख पर पड़ा मियांजी की चादर का परदा हट चुका था. वे निकहत के लिए दवा लेने जो चल दिए थे.  Social Story in Hindi

— साबिर हुसैन

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