Story in Hindi. टूटीफूटी सड़क पर एक मिनी बस उछलती हुई सूखी नहर के पास जा कर झटके के साथ रुकी. उस में से उतर कर एक औरत ने किसी मुसाफिर से पूछा, ‘‘यहां से पनौरा गांव कितनी दूर होगा?’’
‘‘जिस गांव की आप बात कर रही हैं, वहां पहुंचने के लिए सूखे खेतों और पतली पगडंडी से हो कर कम से कम 2 किलोमीटर पैदल चल कर जाना होगा,’’ उस मुसाफिर ने बताया.
उस औरत ने शुक्रिया कहा और अपने बगल में एक झोला लटकाए, जिस में से कुछ किताबें व कौपियां दिखाई पड़ रही थीं, एक हाथ में छोटा सा सूटकेस ले कर, जिस में उस के कपड़े वगैरह होंगे, पैदल ही आगे बढ़ने लगी.
वह औरत जैसे ही पनौरा गांव में घुसी, घासफूस और खपरैल से बने कुछ घरों में भूख से बिलखते बच्चे नजर आए, जो एक अजनबी को देखते ही अपनी झोपडि़यों के भीतर ऐसे भागे, मानो कोई डरावनी चीज आ गई हो.
उस गांव में 10-12 मकान थे, जिन की कुल आबादी 50 के आसपास रही होगी. वहां के लोगों के पास खेती का कोई साधन न था. चारों ओर की जमीन बंजर जो थी.
गांव में कुछ लोगों ने उस औरत के पास पहुंच कर हैरानी जाहिर करते हुए उस के आने की वजह पूछी.
‘‘मुझे शहर से यहां बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजा गया है. क्या आप लोग मेरी मदद करेंगे?’’ वह औरत बोली.
यह सुन कर गांव वाले एकदूसरे की शक्ल देखने लगे.
‘‘हम लोगों को आज तक किसी ने नहीं पूछा कि हम क्या खाते हैं, कैसे रहते हैं. पढ़ाईलिखाई से हमारा क्या फायदा होगा?’’ एक आदमी ने पूछा.
दूसरे आदमी ने कहा, ‘‘हमारे यहां दाल तभी बनती है, जब कोई रिश्तेदार आ जाता है. ठेकेदार काम करा कर समय से पैसे नहीं देते, परेशान करने के बाद आधा पैसा दे कर भगा देते हैं. ठेकेदारों ने सड़क का काम कराया, लेकिन कई महीने गुजरने के बावजूद हमें पैसा नहीं दिया.’’
‘‘क्या इस गांव में नेता या पुलिस वाले नहीं आते?’’ उस औरत ने हैरान हो कर पूछा.
‘‘नेता क्या होते हैं, हमें नहीं मालूम. पुलिस को हम लोगों ने अपने गांव में कभी नहीं देखा. शहर से कोई यहां क्यों आएगा? जब हम लोगों को ही खानेपीने के लाले पड़े रहते हैं, तो उन की क्या सेवा करेंगे? शायद इसीलिए कोई नहीं आता,’’ एक आदमी ने बताया.
‘‘2-3 मील पर बनी टूटीफूटी कच्ची सड़क के अलावा हमारे गांव तक आने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है. यहां बिजली, पानी, अस्पताल, दवाखाना, डाक्टर… यहां तक कि कोई स्कूल भी नहीं है.
‘‘आप को गांव के बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजा गया है. उन बेचारों का जब पेट खाली रहेगा, तो वे पढ़ाई क्या करेंगे? यहां खुद के रहने का कोई पक्का ठिकाना नहीं, तो आप के लिए हम कहां से इंतजाम करेंगे? फिर भी आप आ ही गई हैं, तो रहने का इंतजाम करना ही पडे़गा,’’ दूसरे आदमी ने कहा.
‘‘आप लोगों की मदद के लिए सरकार की ओर से मुझे कुछ रुपए दिए गए हैं. आप लोग दूसरे गांव से चावल, दाल, आटा, सब्जी ला कर सभी परिवारों में बराबर बांट दें. मैं सरकार से और भी चीजों की मांग करती रहूंगी,’’ उस औरत ने बताया.
यह सुन कर गांव वालों में खुशी की लहर दौड़ गई. पूछने पर उस औरत ने अपना नाम गोमती बताया था.
कुछ दिनों में ही गांव वालों ने गोमती के रहने के लिए एक झोपड़ी तैयार कर दी. बच्चे भी उस की ओर खिंचने लगे थे, पास आ कर बैठनेबतियाने लगे थे.
उस गांव में खैरातीलाल नाम के एक नौजवान को कोई दिमागी बीमारी थी. रात में अकसर वह अपने गांव के चक्कर लगाता रहता था. उस का बूढ़ा बाप दातादीन कुछ कमाई कर के अपना और उस का पेट पालता था.
‘‘दातादीन, हम लोगों ने कई बार तुम से कहा है कि तुम खैरातीलाल को अस्पताल भिजवा दो, लेकिन तुम ने हर बार यह कह कर टाल दिया कि ठीक हो जाएगा. क्या बिना दवा के कोई ठीक हो जाता है?
‘‘पिछली रात उस ने यशोदा के साथ बलात्कार किया. इसे उस का पागलपन समझा जाए या हवस?’’ दातादीन के घर के बाहर कोई चिल्लाया.
‘‘उसे घर से निकालो दातादीन, वरना हम उस की पिटाई कर के उस का दिमाग ठीक कर देंगे,’’ दूसरा आदमी बोला.
‘‘अभी वह बच्चा है, गलती से कर दिया होगा,’’ दातादीन बाहर आ कर गिड़गिड़ाया.
‘‘यह उस की पहली गलती नहीं है. पिछली बार उस ने जवान रेनू के मकान में घुस कर इसी तरह छेड़छाड़ करते हुए बुरा काम करने की कोशिश की थी. अगर रेनू की बूढ़ी मां न जागी होतीं, तो वह फिर यही अपराध कर देता.’’
गोमती को भी यह शोरशराबा सुनाई पड़ा, लेकिन माजरा उस की समझ में नहीं आया. किसी से पूछा, तो गांव की इज्जत रखने के लिए उस ने कहा कि गांव में तो ऐसा होता ही रहता है.
गांव वाले नहीं चाहते थे कि खैरातीलाल की बुरी आदतों के बारे में गोमती को पता चले, वरना वह उसे जरूर पागलखाने भिजवा देगी.
इस घटना को कई दिन बीत गए. धीरेधीरे गोमती ने बच्चों को अपनी ओर लुभाना शुरू किया. वह उन के लिए शहर से टौफी, चौकलेट, पैंसिल, कागज और किताबें मंगवा कर बांटती और प्यार से समझाती. इस से बच्चे पढ़नेलिखने में दिलचस्पी लेने लगे.
गोमती ने अपनी झोपड़ी में खानेपीने का अच्छा इंतजाम कर लिया था. जब कभी वह अपने हाथ से बनाई चीजें बच्चों को खिलाती, तो वे बहुत खुश हो जाते.
6 महीने के अंदर ही गोमती ने गांव में काफी बदलाव ला दिया था. इस बात से गांव वाले खुश थे.
इधर खैरातीलाल दिन में तो कोई काम कर लेता था, लेकिन शाम को सूरज डूबते ही वह बेचैन होने लगता था और अंदर से परेशानी महसूस करता था.
वह गोमती से कई बार मिल चुका था, लेकिन गोमती को उस की दिमागी परेशानी का एहसास नहीं हुआ था.
एक दिन गोमती ने खैरातीलाल से कहा, ‘‘तुम भी दिन में बच्चों के साथ मेरे घर पर आया करो और पढ़ाई में मन लगाओ. तुम्हें कोई बीमारी नहीं है. तुम अच्छेखासे हो, तुम्हारा खानापीना भी ठीक है. पढ़ने में ध्यान लगाओगे, तो हमेशा अच्छी बातें सोचोगे.’’
यह सुन कर खैरातीलाल हंस पड़ा, मानो उस ने गोमती की सारी बातों को समझ लिया था, लेकिन मन में तो वह कुछ और ही सोचता रहा था.
गांव वालों ने गोमती को कभी नहीं बताया था कि खैरातीलाल को रात में ऐसा दौरा पड़ता है, जिस से वह दिमागी रूप से परेशान हो कर घर से बाहर टहलने निकल जाता है और देर रात घर लौटता है.
खैरातीलाल का गोमती के यहां काफी आनाजाना हो गया था. गोमती के साथ वह अच्छा बरताव करता था. गोमती को उस पर कभी शक नहीं हुआ, क्योंकि वह उम्र में काफी छोटा था.
एक रात खैरातीलाल की नींद गायब हो चुकी थी. बारिश हो रही थी. वह घर से बाहर निकल कर बरसात में भीगने लगा, फिर धीरेधीरे गोमती के घर की ओर बढ़ा.
खैरातीलाल ने खिड़की से झांका, तो अपना आपा खो बैठा. दरवाजे पर पहुंच कर उस ने दरवाजा खोलने की कोशिश की, तो वह खुल गया.
गोमती अपने बिस्तर पर सो रही थी. उस की साड़ी हवा के झोंके से घुटने के ऊपर तक खिसक गई थी. उस के ब्लाउज के 2 बटन खुले थे, जिस से उस के अंग बिजली की चमक पड़ने से और साफ दिखाई देने लगे थे.
गोमती की ऐसी हालत देखते ही खैरातीलाल की आंखों में वासना के लाल डोरे तैरने लगे. वह उसे पाने के लिए तड़पने लगा. उस ने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया.
खैरातीलाल ने गोमती को जगाया. वह हड़बड़ा कर उठने लगी, तो वह बोला, ‘‘तुम लेटी रहो, उठने की कोशिश मत करो.’’
‘‘तुम अंदर कैसे आ गए? तुम क्या चाहते हो? कोई काम था तो शाम को मिल लेते. इस बरसाती रात में मेरे पास आने की क्या जरूरत थी?’’ गोमती ने घबरा कर पूछा.
‘‘मैं तुम्हारे हुस्न का दीवाना हो गया हूं. मुझे नींद नहीं आई, इसलिए तुम्हारे पास अपनी प्यास बुझाने चला आया.’’
‘‘तुम कैसी बेतुकी बातें करने लगे हो? मैं तुम से उम्र में बहुत बड़ी हूं. तुम तो नेक इनसान बनना चाहते थे, मुझ से पढ़ रहे थे…’’
‘‘ये सब फुजूल की बातें बाद में सुनाना,’’ कहते हुए खैरातीलाल ने गोमती को अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसी पर गिर पड़ा.
गोमती ने अपनी पूरी ताकत से उसे दूर धकेलने की कोशिश की, लेकिन उस दरिंदे में उस से ज्यादा ताकत थी. उस ने अपनी हथेली से कस कर गोमती का मुंह बंद कर दिया.
गोमती ने अपने दांतों से उस के हाथ पर काटा और चिल्लाने लगी, पर उस तूफानी रात में उस के चीखनेचिल्लाने की आवाज दूर तक नहीं पहुंच सकी. नतीजतन, खैरातीलाल उस के जिस्म को रौंदता रहा.
उस रात गोमती की आबरू मिट्टी में मिल चुकी थी. सुबह हुई, तो उस ने अपना सूटकेस उठाया और गांव से जाने की तैयारी करने लगी.
गांव वालों को जब इस घटना के बारे में पता चला, तो वे खैरातीलाल के घर में घुस कर उसे बाहर पकड़ लाए और मारतेपीटते उसे अधमरा कर दिया.
‘‘इस ने गोमती के साथ बलात्कार कर के गांव की इज्जत मिट्टी में मिला दी है. इसे जीने का कोई हक नहीं है,’’ एक गांव वाला बोला.
‘मारो… और मारो, जब तक यह मर न जाए…’ गांव में शोर होने लगा, ‘इस पागल को गांव से निकाल बाहर करो. इस गांव में इस के लिए अब कोई जगह नहीं है.’
तभी गोमती ने कहा, ‘‘जिस का दिमाग काम न कर रहा हो, जो बीमार हो, आप लोग उसे मार डालेंगे, तो आप को क्या मिलेगा? इस गांव में जो पुलिस आज तक नहीं आई, अब आ जाएगी.
‘‘पुलिस सब से पहले खैरातीलाल को पागलखाने भिजवाने के बाद मामला कोर्ट में दर्ज कराएगी. इस के बाद हम सभी को बारबार कोर्ट दौड़ना पड़ेगा. आप की मेहनत की सारी कमाई कोर्ट के चक्कर में खर्च हो जाएगी.
‘‘इस से बेहतर यही होगा कि कुछ रुपए इकट्ठा कर के आप लोग खैरातीलाल का शहर के अस्पताल में इलाज कराएं.
‘‘मेरी लुटी इज्जत वापस नहीं लौट सकती. आप लोग मुझे इस गांव से जाने की इजाजत दीजिए, क्योंकि मेरे दिल पर जो गहरी चोट लगी है, उसे मैं यहां रह कर बरदाश्त नहीं कर सकूंगी. मेरे जाने के बाद कोई न कोई आप लोगों की सेवा करने के लिए आता ही रहेगा.’’
गांव वालों ने गोमती को रोकने की बहुत कोशिश की, पर उन्हें कामयाबी नहीं मिली. Story in Hindi




