Controversy. पिछले दिनों बिहार प्रदेश की राजनीति में बंगले को ले कर रोचक नोकझोंक हुई. पहले तो बिहार की मुख्यमंत्री रह चुकी राबड़ी देवी को पुराने बंगला छोड़ नए बंगले में जाने का हुक्मनामा जारी हुआ, फिर वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए उपमुख्यमंत्री आवास को भी अपने मुख्यमंत्री आवास में समेटने की तैयारी शुरू कर दी. लेकिन अदालत के आदेशों का सम्मान करते हुए उन्होंने इस से हाथ खींच लेना ही मुनासिब समझा.

दरअसल, बिहार का एक सरकारी आवास 5, देशरत्न मार्ग पर बना हुआ है. अब तक यह आवास राज्य के उपमुख्यमंत्री के लिए रिजर्व हुआ करता था. मगर जब सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री बने तो उन्हें कई तरह के विवादों के बाद इस आवास को छोड़ना पड़ा और अब यह आवास किसी उपमुख्यमंत्री को नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के बेटे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को अलौट किया गया है.

इस बंगले की खासीयत ही किसी को आकर्षित करने के लिए काफी है. इस संबंध में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रह चुके सुशील मोदी की एक टिप्पणी से समझ  सकते हैं. उन्हें जब 2019 में यह आवास अलौट किया गया था, तब उन्होंने कहा था, ‘‘इस बंगले के आगे तो राजभवन और मुख्यमंत्री आवास भी फीका है.’’

आप समझ सकते हैं कि क्यों सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनने के बाद भी इस बंगले को खाली नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इस बंगले को सीएम हाउस का एक्सटैंशन घोषित कर दिया था.

अब जरा इस बंगले की खासीयत को समझे. 5 कमरे वाले इस दोमंजिला आवास में 44 एसी लगे हैं. कुछ एसी तो बाथरूम तक में लगे हैं. ब्रिज कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन ने यहां 59 लाख के फर्नीचर लगाए हैं. इस बंगले में बढि़या चमड़ा मढ़े 35 महंगे सोफे लगे हैं. एक्सक्लूसिव डिजाइन वाले 108 पंखे हैं. 34 दीवारों पर वुडन पैनल लगे हैं. 464 फैंसी एलईडी लाइट लगी हैं, जिन्हें विदेश से मंगवाया गया है. कमरों की वुडन फ्लोरिंग की गई है.

दिलचस्प है कि यह सब जानकारी सुशील मोदी ने 2019 में खुद मीडिया को दी थी, जब अदालती लड़ाई के बाद तेजस्वी यादव को यह बंगला छोड़ना पड़ा था और बंगला उन्हें अलौट किया गया था. उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि इस बंगले के रिनोवेशन में पुल निर्माण निगम ने करोड़ों की राशि खर्च की थी, जबकि ‘बंगला’ भवन निर्माण विभाग के अधीन है.

वरिष्ठ पत्रकार पुष्य मित्र के अनुसार, ‘‘अब समझिए कि हमारे प्रतिनिधि, जो खुद को लोक सेवक भी कहते हैं, के बंगले कैसे होते हैं. उपमुख्यमंत्री का 5, देशरत्न मार्ग स्थित बंगला तो बस एक उदाहरण है. और हां, यह भी समझ  लीजिए कि इसी बिहार में 41 फीसदी परिवारों के पास पक्का मकान भी नहीं है. इन में 14 फीसदी झोपडि़यों में रहते हैं और 63,000 से ज्यादा परिवार बेघर हैं.’’

अब दूसरा विवाद बिहार विधानपरिषद की नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के बंगले की. दरअसल, नियमों में यह प्रावधान है कि प्रतिपक्ष के नेता को भी मंत्री स्तरीय सुविधाएं मिलती हैं.

इसी के तहत यह 10, सर्कुलर रोड पर बना बंगला उन्हें साल 2006 में मिला था, जो उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मिला था. तब से वह सपरिवार वहीं रह रही थीं. अब उन्हें इसे छोड़ने के लिए उन पर दबाव दिया जा रहा है.

अब विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता के रूप में उन्हें 39, हार्डिंग रोड स्थित बंगला अलौट किया गया है. अब तक उन्हें पूर्व बंगला खाली करने और नए बंगले में जाने के लिए 5 बार  नोटिस मिल चुके हैं. फिलहाल 10, सर्कुलर रोड  पर बना बंगला डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया गया है, जो बंगला खाली होने की बाट जोह रहे हैं.

पहले अपने पत्र के जवाब में राबड़ी देवी ने यह मांग की थी कि उन के पति लालू यादव, जो बिहार के मुख्यमंत्री भी थे, के स्वास्थ्य को देखते हुए वहां एक विशेष चिकित्सकीय कमरा बनवाया जाए.

अपने एक अन्य पत्र में उन्होंने लिखा है कि जब उन्हें 2006 में उक्त बंगला आवंटित किया गया था, वह सूची उपलब्ध कराई जाए, जिस में इस बंगले में संबंधित सरकारी  सामान का ब्योरा है. उन्हें डर है कि कल को बंगला खाली करने के बाद उन पर चोरी कर सरकारी सामान ले जाने का आरोप न लग जाए.

वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र यादव का कहना है, ‘‘बिहार सरकार धार्मिक उन्माद को अब जातीय युद्ध में बदलना चाहती है. इस के लिए यादव को टारगेट किया जा रहा है. विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के आवास को बेवजह मुद्दा बनाया जा रहा है. राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव दोनों पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में भी बड़े और भव्य बंगले के अधिकारी हैं.’’

वीरेंद्र यादव अपनी बातों को कुछ यों समझते हैं, ‘‘जीतनराम मांझी और नीतीश कुमार दोनों पूर्व मुख्यमंत्री हैं. दोनों के नाम से बंगला आवंटित है, जबकि दोनों सांसद भी हैं.

‘‘सरकार को यह बताना चाहिए कि इन दोनों को किस हैसियत से पटना में बंगला आवंटित है? यदि दोनों को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में बंगला आवंटित है, तो लालू यादव को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में बंगला क्यों नहीं मिलना चाहिए?

‘‘अगर सरकार राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में नया बंगला आवंटित करती है, तो भी लालू प्रसाद यादव पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत वाले बंगले के अधिकारी हैं ही. मंत्री संतोष सुमन और उन की पत्नी व विधायक दीपा कुमारी को अलगअलग बंगला आवंटित है, तो लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को अलगअलग 2 बंगले क्यों आवंटित नहीं हो सकते हैं?

‘‘इस के अलावा उपेंद्र कुशवाहा, संजय झा  और देवेश चंद्र ठाकुर के नाम भी पटना में सरकारी बंगला आवंटित हैं, जबकि तीनों सांसद हैं. सरकार को यह बताना चाहिए कि पटना में 5 सांसदों को किस नियम के तहत बंगले आवंटित किए गए हैं? या कि पांचों अवैध कब्जा कर के सरकारी आवास में रह रहे हैं?’’

ये सब आरोप राजद के राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी और प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने एक प्रैस कौन्फ्रैंस में लगाए थे. फिलहाल यह मुद्दा तूल न पकड़े, इसलिए राबड़ी देवी ने बंगला खाली कर दूसरी जगह जाने का मन बना लिया है. लेकिन सरकारी बंगले में रहने का अपना सुख है. भले ही वह नेता प्रतिपक्ष हों, इस से सत्ता से जुड़े रहने का अहसास तो बना ही रहता है. और इसे सस्ते में कोई क्यों छोड़े? वैसे, राबड़ी देवी बंगला छोड़ चुकी हैं. Controversy

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