Special Story. 22 साला अंकिता (बदला नाम) और उम्र में उस से 2 साल बड़े रवि (बदला नाम) ने साल 2016 में विदिशा से भोपाल भाग कर शादी की थी, क्योंकि उन के घर वाले इस के लिए तैयार नहीं हो रहे थे.

अंकिता लोधी जाति की थी और रवि कुशवाह जाति का था. दोनों का प्यार डेढ़ साल तक चला, लेकिन शहर छोटा होने के चलते ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं रह सका. लिहाजा, वे सब अड़ंगे घर वालों ने डाले जो किसी भी इंटरकास्ट लव मैरिज में आमतौर पर डाले जाते हैं.

दोनों के घर वालों ने जाति की दुहाई दी, इज्जत का वास्ता दिया, रवि की मम्मी ने खाना पीना छोड़ने की धमकी दी, अंकिता के पापा ने तो आत्महत्या तक कर लेने की धमकी दे दी थी, लेकिन वे दोनों मिथुन चक्रवर्ती और पद्मिनी कोल्हापुरे की फिल्म ‘प्यार ?ाकता नहीं’ की तर्ज पर अडिग रहे और अपनी जिंदगी और भविष्य के लिए उन्हें भाग कर शादी कर लेने का फैसला ही बेहतर लगा.

अब दोनों की शादी को 10 साल होने को आ रहे हैं. दोनों का एक 6 साल का प्यारा सा बेटा भी है जो भोपाल के एक बड़े अंगरेजी स्कूल में दूसरी क्लास में पढ़ रहा है. एक छोटा सा फ्लैट भी दोनों ने अपनी कमाई से खरीद लिया है.

अंकिता और रवि अब एक खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं, क्योंकि उन्होंने वक्त रहते एक सही फैसला न केवल लिया था, बल्कि उस पर अमल भी किया था. लेकिन दूसरे प्यार करने वालों की तरह इन की लव मैरिज भी आसान नहीं थी, क्योंकि उन्हें इस के बारे में कुछ खास नहीं मालूम था. जोकुछ भी बताया था वह रवि के दोस्तों की दी गई जानकारी की बिना पर था.

भोपाल आ कर दोनों सीधे नेहरू नगर के आर्य समाज मंदिर गए जहां की एक कर्मचारी गायत्री सोनी (बदला नाम) से मिल कर उन्हें काफी हिम्मत मिली.

आर्य समाज मंदिर में शादी करने के कुछ दिन बाद दोनों ने एहतियात के तौर पर अपनी शादी का कानूनी रजिस्ट्रेशन भी करा लिया था, जिस से उन का रहासहा डर और मन में पनप रहा शक भी दूर हो गया था.

कौन कर सकता है लव मैरिज

अंकिता और रवि के दिलोदिमाग में कतई यह खटका नहीं था कि लव मैरिज कर के वे कोई गुनाह कर रहे हैं, क्योंकि दोनों को ही यह मालूम था कि 2 बालिग अपनी मरजी से शादी करें तो कोई और दे न दे लेकिन कानून उन का साथ देता है. बस, इसी आस और विश्वास ने उन्हें अपनी मरजी से शादी कर लेने की हिम्मत दी थी.

साल 1947 में देश अंगरेजों से तो आजाद हो गया था, लेकिन ब्राह्मणवाद के फैलाए जातिवाद के जहर से आजाद नहीं हो पाया था. यह और बात है कि आजाद तो आज भी पूरी तरह नहीं हो पाया है लेकिन जितना भी हुआ है, उस में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और संविधान बनाने वाले पहले कानून मंत्री डाक्टर भीमराव अंबेडकर का रोल बहुत अहम है, जिन्होंने दूसरी कई बंदिशों से आजादी के साथसाथ बालिगों को अपनी मरजी से किसी भी जाति या धर्म में शादी कर लेने का कानूनी हक दिलाया.

अंकिता और रवि जैसे लाखों प्रेमियों को यह हक देता है हिंदू मैरिज एक्ट यानी हिंदू विवाह अधिनियम 1955 जिस में साफसाफ लिखा है कि कोई भी बालिग हिंदू जिन में जैन, सिख और बौद्ध धर्म के लोग भी शामिल हैं, इस एक्ट की धारा 5 की शर्तों के मुताबिक अपनी मरजी से किसी भी जाति में शादी कर सकते हैं.

इस में मांबाप की रजामंदी और जबरदस्ती के अलावा उपजाति और गोत्र के भी कोई माने नहीं हैं. लेकिन इस के लिए उन का बालिग होने के साथसाथ कुछ और शर्तों का पूरा करना भी जरूरी है, मसलन :

* शादी के लिए लड़के की उम्र 21 और लड़की की उम्र 18 साल होना जरूरी है.

* दोनों अपनीअपनी रजामंदी से शादी करने के लिए तैयार हों.

* दोनों में से किसी की पहली शादी अगर हुई हो और पति या पत्नी जिंदा न हो यानी दोनों में से कोई भी पहले से शादीशुदा न हो. हां, कानूनी तौर पर तलाक हो गया हो तो शादी हो सकती है.

* दोनों में 5 पुश्तों से खून का रिश्ता न हो इसे सपिंड कहा जाता है.

* दोनों दिमागी तौर पर फिट हों यानी किसी में कोई कोई दिमागी नुक्स न हो.

कैसे करें लव मैरिज

अपने प्यार को शादी के अंजाम तक पहुंचाने का सब से आसान और प्रचिलित तरीका वही है जो अंकिता और रवि ने अपनाया कि पहले अपनी तसल्ली के लिए आर्य समाज या किसी दूसरे मंदिर में शादी करो, फिर वहां से मिले मैरिज सर्टिफिकेट पर एसडीएम के औफिस से कानूनी मुहर लगवा लो.

आर्य समाज मंदिर से शादी करने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की जरूरत होती है. उम्र साबित करने के लिए 10वीं क्लास की मार्कशीट के अलावा निवास प्रमाणपत्र और दोनों के दूसरे दस्तावेज जैसे आधारकार्ड व अगर हो तो पैनकार्ड.

शादी के लिए 2 गवाहों का होना जरूरी है. इस के लिए यारदोस्त आसानी से तैयार हो जाते हैं. कुछ दूसरे भले आदमी भी दस्तावेज देख कर गवाही दे देते हैं, लेकिन गवाहों का इंतजाम पहले से कर लेना बेहतर होता है. अब बारी आती है शादी की तारीख की जो मंदिर वालों से चर्चा कर आप अपनी व उन की सहूलियत के मुताबिक तय कर सकते हैं.

मंदिर से शादी करने में कोई लंबाचौड़ा खर्च नहीं आता है. आजकल 10-15 हजार रुपए में ही शादी हो जाती है. इस में शहर के साइज के मुताबिक मंदिर हाल की फीस 3 से 5 हजार रुपए, पूजन व हवन सामग्री और दूल्हादुलहन के लिए फूलमाला, सिंदूर आदि के 2,000 रुपए के अलावा पंडित की दक्षिणा के 500 से 1,000 रुपए जोड़े की हैसियत और श्रद्धा के मुताबिक लगते हैं.

यह पंडित शादी की वैदिक रीतिरिवाज वाली तमाम रस्में अदा करवाता है, जो हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 7 के मुताबिक जरूरी होती हैं. इन में सप्तपदी यानी सात फेरे सब से अहम होते हैं. इस के बाद मंदिर से मिलने वाले सर्टिफिकेट के लिए 500 से एक 1,000 रुपए जमा करने पड़ते हैं.

लव मैरिज में वैसे तो शादी के इनविटेशन कार्ड की ज्यादा जरूरत नहीं पडती लेकिन अगर छपवा लिया जाए तो यह सहूलियत वाला ही साबित होता है. जरूरत पड़ने पर यह सुबूत का काम भी करता है.

यहां यह याद रखना चाहिए कि सभी दस्तावेजों की ओरिजनल कौपी दिखाना जरूरी होती है जिन्हें आमतौर पर मंदिर के शास्त्रीजी जांचते हैं. दूल्हादुलहन के 5-5 फोटो भी जरूरी होते हैं.

ये सब और दूसरी अहम बातें मंदिर वाले तारीख की बुकिंग के साथ ही बता देते हैं. मंदिर की शादी में कुल 2 से 3 घंटे लगते हैं और शादी के तुरंत बाद उस का सर्टिफिकेट मिल जाता है.

शादी के बाद और मंदिर से उस का प्रमाणपत्र मिल जाने के बाद बेफिक्र हो कर नहीं बैठ जाना चाहिए. शादी का एसडीएम या रजिस्ट्रार के दफ्तर में रजिस्ट्रेशन करा लेना कई मुश्किलों से बचाता है. इस के लिए एक रजिस्ट्रेशन फार्म भरना पड़ता है. यहां मंदिर का सर्टिफिकेट दिखाना जरूरी होता है, लेकिन जोड़े के उम्र और निवास के दस्तावेज भी दिखाने पड़ते हैं.

पतिपत्नी दोनों का एक हलफनामा भी लगता है जिसे नोटरी सत्यापित करता है. इस में शादी की सारी डिटेल्स होती हैं, मसलन शादी की तारीख, उस की जगह और वे तमाम बातें जो कानूनन जरूरी होती हैं दोनों के. पासपोर्ट साइज के फोटो भी जरूरी होते हैं.

शादी की रस्मों के दौरान जितने हो सकें फोटो खिंचवा लेने चाहिए. ये भी शादी का अहम सुबूत होते हैं. एसडीएम या रजिस्ट्रार दफ्तर में 2-3 ऐसे फोटो जमा कराने जरूरी होते हैं, जिन में पतिपत्नी साथ नजर आ रहे हों.

आजकल मोबाइल फोन के चलते फोटो लेना व वीडियो बनाना कितना आसान हो गया है यह हर कोई जानता है. 2 या 3 गवाहों की जरूरत यहां भी पड़ती है, उन के भी आधारकार्ड लगते हैं. एक महीने के अंदर 500 रुपए में यह सर्टिफिकेट मिल जाता है. यह बैंक खाता, पासपोर्ट और वीजा जैसे दस्तावेज हासिल करने के लिहाज से भी जरूरी और उपयोगी होता है.

सीधे कोर्ट मैरिज भी हर्ज नहीं

मंदिर में शादी प्रेमी इसलिए करते हैं कि वे फटाफट सामाजिक तौर पर शादी के बंधन में बंध जाएं, ताकि कभी कोई सवाल करे, एतराज जताए या फसाद खड़ा करे तो उन्हें मुंह न छिपाना पड़े. दूसरे, सात फेरे खुद को भी तसल्ली देने वाले होते हैं कि विधिविधान से शादी हो गई.

लेकिन प्यार करने वाले शादी सीधे कोर्ट जा कर भी कर सकते हैं, जहां किसी तरह के रीतिरिवाज व रस्में नहीं होतीं. इसे कोर्ट मैरिज कहा जाता है. कई हिंदी फिल्मों में हीरोहीरोइन को मैरिज अफसर या रजिस्ट्रार के औफिस में शादी करते और रजिस्टर में दस्तखत करते दिखाया गया है. यह अफसर पतिपत्नी को मुबारकबाद देते कहता नजर आता है कि आज से आप पतिपत्नी हुए.

इस तरह की शादी स्पैशल मैरिज एक्ट 1956 के तहत होती है. इस में एसडीएम को एक महीने पहले शादी का नोटिस देना पड़ता है. जन्म प्रमाणपत्र समेत वे तमाम दूसरे सर्टिफिकेट यहां भी जमा कराने पड़ते हैं जो मंदिर में शादी के लिए जमा कराते हैं. हलफनामा भी लगता है और हाल में खिंचे 5-5 पासपोर्ट साइज के फोटो भी लगते हैं. बाकी कानूनी शर्तें वही हैं जो हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 5 में लिखी हैं.

एप्लीकेशन जमा होने के बाद एसडीएम 30 दिनों का एक अनिवार्य नोटिस जारी करता है जिस से किसी को एतराज हो या जोड़े द्वारा गलत जानकारी मसलन पहली शादी छिपाने की दी गई हो तो उस का निबटान हो सके.

अगर 30 दिन के अंदर कोई एतराज दर्ज नहीं होता है तो मैरिज अफसर शादी की तारीख दे देता है. कोर्ट मैरिज में 3 गवाहों की जरूरत पड़ती है. ये कोई भी हो सकते हैं, लेकिन उन का पहचानपत्र होना जरूरी होता है.

कोर्ट मैरिज में धार्मिक तामझाम बिलकुल भी नहीं होते, बस जोड़े को गवाहों समेत एक घोषणापत्र पर दस्तखत करना पड़ते हैं. इस के बाद सर्टिफिकेट मिल जाता है.

आजकल अच्छी बात यह है कि कई राज्यों में नोटिस बोर्ड पर नोटिस नहीं चिपकाया जाता. इस से खासतौर से कट्टरवादी और लडकी के मांबाप किसी तरह का फसाद खड़ा नहीं कर पाते,

जिन की कोशिश यह रहती है कि लड़कालड़की शादी के पहले मिल जाएं तो उन की मारकुटाई कर के या लड़के के खिलाफ किडनैपिंग और रेप की रिपोर्ट दर्ज करा कर शादी रोक लें.

प्यार को शादी के मुकाम तक पहुंचाने वालों को किसी से डरना नहीं चाहिए. अगर कोई खतरा महसूस हो तो कानून उन की हिफाजत भी करता है. इस बाबत सुप्रीम कोर्ट तक ने हिदायत दी है कि ऐसे जोड़ों की हिफाजत के इंतजाम किए जाएं. शादी मंदिर से करें या कोर्ट से करें, अगर कोई डराएधमकाए तो तुरंत पुलिस में इस की रिपोर्ट दर्ज कराना चाहिए.

जरूरत पड़ने पर पुलिस के बड़े अफसरों से भी मिल कर अपनी बात कहनी चाहिए कि हम दोनों बालिग हैं, एकदूसरे से प्यार करते हैं और शादी कर अपना घर बसाना चाहते हैं, इसलिए हमें हिफाजत मुहैया कराई जाए.    Special Story

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