Hindi Story:
‘चोली के पीछे क्या है
चोली के पीछे,
चुनरी के नीचे क्या है
चुनरी के नीचे…’
इस गाने पर जबरदस्त सैक्सी नाच चल रहा था. नाचने वाला अपने सीने को उचकाउचका कर कामुक इशारे कर रहा था और नाच देखने वाले लोग जैसे सिसकारियां भरे जा रहे थे.
कामुक नाच देख कर दर्शक ‘औरऔर’ की मांग किए जा रहे थे, पर आखिरकार गाना खत्म हो गया और नाचने वाला परदे के पीछे चला गया. दर्शक अब भी शोर किए जा रहे थे.
कमरे के अंदर पहुंच कर नाचने वाले ने अपना पसीना पोंछा और अपनी चोली को उतार दिया. उस ने चोली के अंदर एक ब्रा पहने हुई थी जिस में छोटे कपड़ों को गोल गेंद बना कर इस तरह पहना गया था जिस से सीने के उभार एकदम औरत के सीने की तरह दिखें और इसे पहन कर औरतों जैसा डांस किया जा सके. इसे पहनने वाला मीठा नाम का 24 साल का एक नौजवान था.
मीठा लौंडा डांस करने के लिए आसपास के गांव में थोड़ाबहुत फेमस था. वह जाति से तो दलित था, पर उस ने अपने पिता की तरह सफाई का काम नहीं किया, बल्कि कसबे की एक ड्रामा कंपनी वालों के साथ रह कर औरतों का वेश धरना सीखा और औरतों की तरह कमर मचका कर नाचना सीख लिया. अब आसपास के गांवों में जब भी कोई नाटकनौटंकी होता तो लौंडा डांस करने के लिए मीठा को बुलाया जाता.
मीठा के बदन में कमाल की लचक थी और वह औरतों की तरह ही हावभाव करता था. अभी 2 साल पहले ही उस की शादी हुई थी. उस की पत्नी धानी को मीठा का इस तरह औरतों की तरह नाचना अच्छा नहीं लगता था.
धानी कई बार मीठा से कोई और काम करने को कहती थी, मगर मीठा उस की बात सुन कर कह देता था कि काम तो काम है और यह काम तो उस की कला है. फिर इस के अलावा उसे कोई और काम आता भी तो नहीं है.
इसी गांव में धीमन सिंह नाम का 35 साल का दबंग आदमी रहता था. उस के पुरखे गांव के जमींदार हुआ करते थे. समय बीतने के साथ जमींदारी तो चली गई, पर धीमन सिंह जैसे लोगों की हेकड़ी अब भी बाकी थी.
धीमन सिंह की पत्नी अल्पना एक सुंदर और सुशील औरत थी और अपने पति की हर पसंदनापसंद का खयाल रखती थी, पर फिर भी धीमन सिंह उस पर अपनी धौंस जमाया करता था और अपने पैर की जूती समझता था. इस का एक बड़ा कारण था अल्पना का मां न बन पाना. हालांकि इस का कारण धीमन सिंह ही था. उस के पास मर्दाना ताकत तो थी पर जरूरी स्पर्म काउंट नहीं था जो औलाद को जन्म देने के लिए चाहिए होता है. यह बात डाक्टरी रिपोर्ट में साबित भी हो चुकी थी. अल्पना विद्रोह न कर दे इसीलिए धीमन सिंह उसे अपने दंभ से दबा कर रखता था.
धीमन सिंह अपनी हवेली के आंगन में धूप खाने बैठता तो गांव के तमाम चाटुकार वहां आ जाते और तरहतरह के किस्सेकहानियों से धीमन सिंह का मनोरंजन किया करते.
उस दिन धीमन सिंह खुली जीप में अपने कुछ लोगों के साथ कसबे से वापस आ रहा था कि तभी मीठा अपनी पत्नी धानी को साइकिल पर बैठा कर अस्पताल ले कर जा रहा था.
धीमन सिंह की नजर धानी की सांवली कमर और गहरी नाभि पर पड़ी, तो वह धानी की सुंदरता पर मोहित हो गया और उसे घूरता रह गया.
धीमन सिंह की मंशा देख कर उस का एक साथी कहने लगा, ‘‘ठाकुर साहब, यह मीठा है न, अरे वही जो लौंडिया बन कर नाचता है, उस की घरवाली मस्त आइटम है एकदम. उस के जिस्म का स्वाद तो आप ने चखा ही नहीं है अब तक, देखो तो कितनी तीखी है.’’
धानी को देख कर धीमन सिंह के मुंह में पानी और आंखों में हवस की चमक आ गई थी.
‘‘अरे नहीं, अब समय बदल गया है. अब तो दलित लोग और इन की औरतें बड़ी जागरूक हो गई हैं. इन को दबाना अब आसान नहीं रहा,’’ धीमन सिंह ने कहा तो उस के एक दूसरे चाटुकार ने कहा, ‘‘अरे ठाकुर साहब, आप भी वही करिए जो आप के पुरखे किया करते थे.’’
इस के बाद उस ने धीमन सिंह को समझाया कि मीठा अपनेआप को बड़ा कलाकार समझता है और अपनी नाच की कला को आगे ले जाने के लिए उसे पैसों की जरूरत है.
इतिहास गवाह है कि किसी जमींदार का कर्जा कोई दलित कभी चुका ही नहीं पाया है, इसलिए धीमन सिंह उसे अपने कर्जे के नीचे दबा दे और फिर धानी कब्जे में आ जाएगी.
धीमन सिंह की सम?ा में सारी बात आ गई थी और उसी प्लान के तहत मीठा को बुलावा भेजा और उस के लड़की बन कर नाचने की जम कर तारीफ की. फिर उस से कहा कि शहरों के थिएटर आदि में इस तरह के रोल निभाने वालों की खूब कद्र होती है, तो वह भी शहर में जा कर आगे बढ़ कर कुछ बड़ा क्यों नहीं करता, जिस से वह भी फेमस हो जाए.
‘‘अब मालिक, क्या बताएं कि शहर में जा कर डांस ग्रुप बनाने जैसा कुछ करने के लिए पैसों की जरूरत होती है और हम गरीबों के पास इतना पैसा कहां…’’
बस, यही वह समय था जब धीमन सिंह ने अपनी चाल चली और 10,000 रुपए का कर्जा देने की बात कही. मीठा खुश हो गया था, पर अपनी खुशी को दबाता हुआ बोला, ‘‘पर इतना सारा पैसा मैं चुकता कैसे कर पाऊंगा मालिक…’’ मीठा ने कहा.
धीमन सिंह ने बड़ा दिल दिखाते हुए कहा कि वह चिंता न करे, पर इस दरियादिली के पीछे धीमन सिंह की चालाकी समझ नहीं पाया मीठा.
मीठा को पैसे दे दिए गए और एक सादे कागज पर उस का दस्तखत ले लिया गया.
मीठा खुश हो कर घर आया तो धानी बुखार में तप रही थी. मीठा उसे दवा दिला कर गया था, पर वह उसे फायदा नहीं कर रही थी. वैसे भी धानी को अंगरेजी दवाओं पर भरोसा नहीं था. वह तो अपने बाबूजी के साथ बचपन से ही जंगलों में जाजा कर पेड़पौधों के रस से इलाज करना जानती थी, इसलिए मीठा के घर आते ही उस ने और दवा खाने से मना कर दिया और जंगली जड़ीबूटी से ही अपना इलाज कर लेने की बात कही.
मीठा ने धानी की बात पर ध्यान देना जरूरी नहीं सम?ा, क्योंकि उस के पास तो इस समय 10,000 रुपए थे और वह इन से अपनी नाचने की कला को आगे बढ़ाने के खयाल में खोया हुआ था. उस ने धानी की कोई खैरखबर नहीं ली.
अगले दिन ही मीठा पैसे ले कर पास के कसबे में फीनिक्स डांस ग्रुप वालों से मिलने जा रहा था. वह बस में बैठा था कि बस में न जाने कहां से 4-5 गुंडे आए, उसे मारापीटा और सारे रुपए छीन लिए.
मीठा बिलखता रहा पर किसी ने मदद नहीं की. मीठा को सम?ा ही नहीं आया था कि यह सब धीमन सिंह की चाल का ही एक हिस्सा था.
मीठा घर वापस आया तो धानी ने अपना बुखार छोड़ कर उस के घावों पर पत्तियों का लेप आदि लगाया. ठीक होने पर मीठा ने अपने साथ हुई मारपीट और पैसे छीने जाने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई, पर कोई फायदा नहीं निकला.
एक महीना बीत चला था पर मीठा धीमन सिंह का पैसा वापस नहीं कर सका. इस बार धीमन सिंह ने कुछ नहीं कहा. धीरेधीरे जब 5 महीने बीत गए तब मीठा को तलब किया गया और पैसे मांगे गए तो मीठा गिड़गिड़ाने लगा, ‘‘थोड़ी मोहलत दे दें मालिक, आसपास के गांव में 2-4 प्रोग्राम मिले हैं. जम कर नाचूंगा तो ज्यादा पैसे आएंगे, फिर जल्द ही आप का कर्जा पूरा हो जाएगा.’’
धीमन सिंह ने बड़ा दिल दिखाते हुए ‘ठीक है’ कह तो दिया, पर मीठा नहीं जानता था कि इस के पीछे क्या चालाकी भरी हुई है.
मीठा सिर झुका कर धीमन सिंह की जयजयकार करते हुए वापस जा रहा था कि उसे किसी औरत की आवाज सुनाई दी.
धीमन सिंह की पत्नी अल्पना हवेली के पिछले दरवाजे पर खड़ी थी. मीठा सकुचाता हुआ सा अल्पना के पास पहुंचा.
‘‘सुना है तू बड़ा अच्छा नाचता है… मुझे भी सिखा दे अपने जैसा नाचना,’’ फुसफुसाते हुए अल्पना ने कहा तो मीठा ने शरमाते और डरते हुए किसी ठाकुर जाति वाली औरत को नाच सिखाने से मना कर दिया.
इस पर अल्पना ने मीठा को हिम्मत बंधाई और कहा कि शाम को 5 बजे धीमन सिंह शहर जाने वाली सड़क पर दूर तक सैर के लिए जाते हैं. मीठा उसी समय पीछे के दरवाजे से आ कर उसे नाचना सिखा दिया करे.
इतना कहते हुए अल्पना ने मीठा की हथेली पर 500 रुपए पेशगी के तौर पर रख दिए.
मीठा इस छुअन से रोमांचित हो गया था, पर उस ने नजरें झुका लीं और वहां से चला गया.
शाम को मीठा जब दूसरे गांव में लड़की बन कर नाच रहा था, तब योजना के अनुसार धीमन सिंह उस के घर पर पहुंचा और दरवाजा खटखटाया पर धानी ने किसी अनहोनी के डर से दरवाजा नहीं खोला तो धीमन सिंह के गुरगों ने दरवाजे को जबरदस्ती तोड़ दिया.
नशा धीमन सिंह पर हावी हो रहा था. उस ने धानी को अपनी बांहों में भर लिया और उस के सांवले शरीर पर अपनी जबान फेरने लगा. धानी उस के चंगुल से छूट जाना चाहती थी, लेकिन बाहुपाश की मजबूती के चलते वह कुछ नहीं कर पा रही थी.
धानी की चोली फट चुकी थी और धीमन सिंह ने उसे खटिया पर पटक दिया. धानी की चीख सुन कर भी कोई बचाने नहीं आया था और धीमन सिंह ने धानी का सबकुछ लूट गया था.
एक कुटिल मुसकराहट थी धीमन सिंह के चेहरे पर. उस ने धानी को एक कागज दिखाते हुए कहा, ‘‘तेरे मर्द ने खुद है इस पर साइन किया है कि अगर हमारा कर्जा वह न दे सके तो हम तुम्हारी इज्जत लूट सकते हैं. हम ने गलत नहीं किया, हम ने तो अपना कर्जा वसूला है,’’ कहते हुए वह अपने गुरगों के साथ बाहर निकल गया.
अगली सुबह तकरीबन 8 बजे मीठा वापस लौटा तो धानी की हालत देख कर परेशान हो उठा. उसे अपने ऊपर अफसोस हो रहा था और वह धानी के गले लग कर रोने लगा.
‘‘अब हमारे पास खुदकुशी करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है,’’ मीठा कराह उठा था, पर धानी ने गुस्से में कहा, ‘‘खुदकुशी किसी समस्या का हल नहीं है.’’
इस के बाद धानी उठी और कुछ देर बाद नहा कर वापस आई. उस की आंखों में लाचारी की जगह बदले की चिनगारी साफ झलक रही थी और उस के दिमाग में अंधड़ चल रहा था.
वह कब, क्या और कैसे अपना बदला लेगी यह बात सिर्फ धानी ही जानती थी.
समय बीतने के साथसाथ मीठा का नाचने का काम फिर से शुरू हो गया था. जीने के लिए कमाना जरूरी था और इस काम के अलावा उसे और कुछ करना भी तो नहीं आता था.
मीठा नाचता, पैसे कमाता और अपने इस काम के बीच उस ने धीमन सिंह की गैरहाजिरी में उस की हवेली पर चुपके से जाना भी जारी रखा.
अल्पना को नाच का शौक तो था ही, पर उस से ज्यादा उसे मीठा से बात करना अच्छा लगता था, क्योंकि उस हवेली में मीठा ही एकलौता मर्द था जिस से वह अपने मन का दुखदर्द कह सकती थी.
मीठा का सिर्फ सुन भर लेना अल्पना को बहुत भाता था. अपनी बातें बतातेबताते वह अकसर मीठा के करीब आ जाती तो मीठा असहज हो उठता. एक अजीब सी खुशबू आती थी अल्पना के पास आने से.
उस दिन की बात है मीठा अल्पना को नाचने के कुछ टिप्स बता रहा था कि बाहर अचानक बरसात शुरू हो गई और हवेली की बत्ती गुल हो गई. मीठा बिस्तर पर किनारे बैठ गया और अल्पना ने एक मोमबत्ती जला ली और इधरउधर की बात करने लगी.
मीठा सोच रहा था कि जल्दी से बारिश रुक जाए और वह यहां से चला जाए, पर अचानक से अल्पना ने मीठा की हथेली को पकड़ा और अपने सीने पर रख लिया और दबाव बढ़ाने लगी.
मीठा के लिए यह सब बहुत चौंकाने वाला था. अचानक से अल्पना ने फूंक मार कर मोमबत्ती बुझा दी और मीठा के पैरों के बीच बैठ गई.
अब मीठा नीचे था और अल्पना उस के ऊपर अपनी कामुकता को एक मुक्त आकाश देना चाहती थी.
अल्पना ने मीठा को चूमना जारी रखा था. बाहर बारिश थम चुकी थी और हवेली के अंदर अल्पना की हवस का तूफान भी शांत हो गया था.
इधर पिछले कुछ दिनों से धानी जड़ीबूटी और पत्तियों के साथ ज्यादा समय बिता रही थी. वह उन्हें साफ करती, उबालती, छानती और फिर मिट्टी के बरतनों में भर कर रखती थी. मीठा की कुछ समझ में नही आता था कि वह क्या कर रही है, पर धानी को अच्छी तरह पता था कि उसे क्या करना है.
उस दिन मीठा को धीमन सिंह और उस के गुरगों ने रोक लिया और धमकाते हुए कहा, ‘‘तेरा लौंडा डांस बहुत हो गया अब. तू बता हमारे 10,000 कब वापस करेगा?’’
‘‘जल्द ही मालिक,’’ मीठा घिघिया उठा था.
इस के बाद धीमन सिंह ने मीठा को धमकी देते हुए कहा, ‘‘अगर तू पैसे नहीं दे सकता तो शाम को अपनी बीवी धानी को हवेली पर हमारा मन बहलाने के लिए भेज दे, नही तो हम उसे उठा कर ले जाएंगे और सब के सामने उसे नंगा कर के उस की इज्जत लूट लेंगे.’’
यह बात सुन कर मीठा कांप उठा था. वह तुरंत घर गया और उस ने यह बात धानी बताई, तो धानी घबराने के बजाय मुसकरा उठी थी. मीठा अवाक रह गया था उस के मुसकराने पर, लेकिन कुछ समझ नहीं पाया था.
‘‘शाम को मैं अकेली नहीं, बल्कि हम दोनों धीमन सिंह के घर पर जाएंगे… बस मुझे थोड़ी सी तैयारी कर लेने दो,’’
यह कह कर धानी कमरे के कोने में रखी हुई कुछ जड़ीबूटियां पीस कर उन का रस निचोड़ने में बिजी हो गई थी. उस के चेहरे पर बदले की भावना साफ नजर आ रही थी और आंखों में एक तीखी सी चमक भी दिखाई दे रही थी.
शाम को मीठा और धानी दोनों ही धीमन सिंह की हवेली पर पहुंच गए थे. उस समय वह अपने गुरगों के साथ अपने कमरे में बैठा हुआ था.
धानी को देख कर उस के मुंह में पानी आ गया था. उस की नजर धानी के बड़े उभारों और गहरी नाभि पर टिक गई थी.
‘‘वैसे तो हम ने आज धानी को नचाने के लिए बुलाया था, पर कुछ बदलाव करते हैं. आज मीठा अपना नाच दिखाएगा और धानी हमारी गोद में बैठ कर हमें शराब के जाम पिलाएगी,’’ धीमन सिंह ने घमंड में भर कर कहा तो धानी मन ही मन खुश हो गई. उस ने सोचा कि आज तो शिकार खुद ही जाल में फंस गया.
धानी ने मीठा को नाचने के लिए मानसिक रूप से पहले से ही तैयार कर रखा था, इसलिए वह नाचने की तैयारी करने लगा और धीमन सिंह जमीन पर बिछे मोठे गद्दे पर टांगें पसार कर बैठ गया था और धानी उस के करीब ही बैठ गई.
धानी के साथ एक छोटी मटकी भी थी. धीमन सिंह ने धानी से उस मटकी के बारे में पूछा तो धानी ने मदहोश अंदाज में उसे बताया कि यह मर्दाना जोश बढ़ाने वाली दवा है.
‘‘अब क्या करूं सरकार, इस मीठे में जोश जगाने के लिए इन दवाओं का सहारा लेना ही पड़ता है,’’ धानी ने कहा तो धीमन मन ही मन कुछ सोच कर मुसकरा उठा.
इतने में मीठा ने गाना बजा दिया था और वह गाने की ताल पर थिरकने लगा था, ‘मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए, बोल तेरे साथ क्या सुलूक किया जाए…’
कुछ देर बाद मजा सा नहीं आया तो मीठा ने इस गाने को बदल कर थोड़ा भड़काऊ गाना बजा दिया, ‘महबूबा ओ महबूबा… गुलशन में गुल खिलते हैं जब सेहरा में मिलते हैं मैं और तू ऊ ऊ ऊ…’
मीठा कमर मचका कर नाच रहा था और धीमन सिंह शराब पीने लगा था. उस ने अपना हाथ धानी की सांवली कमर के चारों ओर डाल दिया था.
धानी को लगा कि अब सही समय है इसलिए उस ने मटकी में लाया हुआ पेय धीमन सिंह के गिलास में डाला और उस में शराब मिला कर उसे पिला दिया.
धीमन सिंह उसे गटगट पी गया.
उस के गुरगे भी नशे में चूर हो कर गिर चुके थे.
कुछ देर के बाद धीमन सिंह ने महसूस किया कि धीरेधीरे उस की कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न पड़ रहा है. उस ने धानी की तरफ देखा जिस के चेहरे पर हलकी सी मुसकराहट तैर रही थी.
कुछ देर बाद ही धीमन सिंह की कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह से लकवाग्रस्त हो चुका था. अब वह सबकुछ देख तो सकता था, पर चलनेफिरने में नाकाम हो चुका था. बचपन में अपने बाबूजी से सीखे हुए प्राकृतिक नुसखों और जड़ीबूटी आदि को मिला कर धानी ने यह काढ़ा बना कर धीमन सिंह को पिला कर उसे लकवाग्रस्त कर दिया था.
धीमन सिंह का बहुत उपचार चला, पर वह कभी ठीक नही हो सका. अब वह अपने कमरे में बिस्तर पर अकेले पड़ा रहता है. अल्पना ने उस की देखभाल के लिए एक कंपाउंडर रख दिया है. धीमन सिंह ने जो बोया था, वह अब वही काट रहा है.
धानी के बदले में अल्पना के साथ थोड़ी ज्यादती तो जरूर हो गई थी, पर क्या किया जाए, क्योंकि गेहूं के साथ घुन तो पिसता ही है. तकरीबन 5 महीने बीत जाने के बाद अल्पना ने एक बेटी को जन्म दिया और उस का नाम रखा ‘मीठी’.
अब सबकुछ साफ था कि इस लड़की का पिता धीमन सिंह नहीं, बल्कि मीठा था. वह मीठा, जिसे लोग साधारण सा नाचने वाला समझते थे, अब शान के साथ हवेली में आताजाता है और कभीकभी रातरात अल्पना के साथ ही सोता है.
मीठा अल्पना का हर तरीके से खयाल रखता है और धानी भी अल्पना से मिलने जाती रहती है और तब वह धीमन सिंह के पास जा कर उसे अपना सांवला नंगा पेट और गहरी नाभि दिखा कर तड़पाना नही भूलती.
धीमन सिंह धानी की सांवली कमर और गहरी नाभि देख कर तड़प तो सकता था, पर कुछ कर नहीं सकता था. यही था धानी का बदला.




