Superstition. राम सजीवन के घर बेटा पैदा हुआ. पंडित ने पोथीपत्रा पलटने के बाद कहा, ‘‘बेटे की नाक के दाहिनी ओर तिल है. ज्योतिष विद्या के अनुसार यह बहुत शुभ है. ऐसे तिल वाला इनसान सुखी और मालामाल होता है.
‘‘इस बच्चे को जिंदगीभर रुपएपैसे की कमी नहीं होगी. अगर नाक के बाएं हिस्से पर तिल होता, तो इसे जिंदगीभर कड़ी मेहनत करनी पड़ती. फिर भी यह सुखी न रहता. कई बार मुश्किल हालात का सामना भी करना पड़ता. अगर आप के बेटे की नाक के बीच में तिल होता, तो यह जिंदगीभर सफर ही करता रहता.’’
राम सजीवन बेहद खुश हुए कि बेटे को रुपएपैसे की कमी नहीं रहेगी. वह हमेशा खुशहाल रहेगा. बेटा बड़ा हो कर स्कूल जाने के काबिल हुआ, तो भी उसे स्कूल नहीं भेजा गया.
गांव के सरपंच ने कहा, ‘‘इसे स्कूल भेजो. अगर यह पढ़ेगा नहीं, तो जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा. इस के साथ के बच्चे स्कूल जाने लगे हैं.’’
यह सुन कर राम सजीवन कहता, ‘‘सरपंचजी, आप ने सुना नहीं कि पंडितजी ने इस के जन्म पर क्या कहा था. इसे कभी भी रुपएपैसे की कमी नहीं रहेगी. इस की नाक के नीचे दाहिनी ओर तिल है. आखिर, पढ़लिख कर करेगा क्या… कोई सरकारी नौकरी पा जाएगा बस.’’
राम सजीवन ने पंडित की बात मान कर अपने बेटे को स्कूल नहीं भेजा. उस के साथ के कई बच्चे पढ़लिख कर अफसर बन गए, लेकिन राम सजीवन का बेटा अपने खेत में घास काटता रह गया.
इसी तरह की एक और घटना है. कामचोर गनपत को गांव के पुजारी शिवशंकर ने बताया कि अगर धनदौलत चाहिए, तो कमल पर बैठे गणेशजी की पूजा करो, जल्द ही मालदार हो जाओगे. पर इस बात का ध्यान रहे कि शरीर पर मात्र धोती होनी चाहिए और कोई कपड़ा नहीं होना चाहिए. सुबह और शाम को सूरज डूबते ही रात के 10 बजे तक मंत्र के साथ लगातार हवन करो.
गनपत को अमीर बनने का जुनून सवार हो गया. वह कमल पर बैठे गणेश की तसवीर के सामने पूजा करने के लिए बेचैन हो गया. बाजार में कमल पर बैठे गणेश की तसवीर खूब ढूंढ़ी, पर उसे नहीं मिली.
एक दुकानदार को उस ने कहा कि जितना भी पैसा लगे, ले लो और कमल पर बैठे गणेश वाली तसवीर मंगाओ.
उस ने गनपत से 3 सौ रुपए ले कर कमल पर बैठे गणेश की तसवीर मंगा कर दे दी, जबकि ऐसी तसवीर 10 रुपए में आसानी से मिल जाती है.
गनपत सुबहशाम घर के सारे काम छोड़ कर केवल धोती पहन कर गणेश की पूजा करता. शरीर का ऊपरी हिस्सा खुला होने की वजह से उसे मच्छरों ने खूब काटा, जिस से उसे मलेरिया बुखार हो गया.
अंधविश्वास के चक्कर में वह अमीर तो नहीं बना, लेकिन घर में जो पैसा था, वह भी उस के इलाज में चला गया.
कीर्ति का बेटा पढ़ने में कमजोर होने के साथसाथ फुजूल की बातों में ज्यादा ध्यान देता था. स्कूल से रोज उस की शिकायत आती थी कि वह होमवर्क नहीं करता.
कीर्ति एक बाबा के पास अपनी सहेली के साथ बेटे को ले कर दिखाने गई. बाबा ने 501 रुपए लिए और उसे एक लौकेट दे दिया और कहा कि इसे हमेशा गले में पहना कर रखो. बेटा पढ़ने लगेगा.
उस बाबा ने यह भी कहा कि अपने बेटे की जगह तुम हरे रंग के गणेशजी की पूजा करो, क्योंकि बुद्धि का कारक बुध ग्रह होता है और हरे रंग का कारक बुध है. अगर ऐसे लोग हरे रंग के या पन्ने से बने गणेशजी की पूजा करें, तो उन के बुध ग्रह से संबंधित सभी दोष कम हो जाएंगे और इस का उन्हें लाभ मिलेगा.
कीर्ति अपने बच्चे की ओर ध्यान देने के बजाय बाबा के चक्कर में पड़ गई. गणेश की पूजा में ज्यादा से ज्यादा समय गंवाने लगी. नतीजतन, उस का बेटा स्कूल के हर टैस्ट में फेल होता गया.
पुराने खयालों की श्यामा की नईनवेली बहू आई. महल्ले के लोगों ने देख कर खूब सराहा कि श्यामा की बहू बहुत सुंदर और गुणी है. लेकिन महल्ले की राधा से रहा नहीं गया और उस ने कह दिया, ‘‘बाकी सब तो ठीक है, लेकिन बहू के दाएं गाल पर तिल है. पता नहीं, श्यामा को फलेगा कि नहीं.’’
श्यामा का भी ध्यान बहू के तिल पर गया और वे परेशान हो उठीं. दूसरे ही दिन वे बीमार पड़ गईं. नातेरिश्तेदार कहने लगे कि बहू के कदम पड़ते ही सास बीमार पड़ गई. न जाने क्या होगा.
पढ़ीलिखी होने की वजह से बहू रत्ना ने घर वालों से कहा, ‘‘यह आप लोगों का वहम है. तिल होने से कुछ नहीं होता. आप लोगों को परेशानी है कि मेरे दाएं गाल पर तिल है. मैं कल ही यह तिल हटवा दूंगी.’’
सास ने हैरान हो कर पूछा, ‘‘क्या ऐसा भी हो सकता है?’’
‘‘हो सकता है. लेजर मशीन से शरीर के किसी भी हिस्से का तिल हटाया जा सकता है,’’ रत्ना ने कहा.
रत्ना दूसरे दिन ही ब्यूटीपार्लर में जा कर दाएं गाल का तिल हटवा कर घर आ गई. उस की सास ने देखा कि गाल पर तिल अब नहीं है. उस ने राधा को बुला कर दिखाया और कहा, ‘‘देख, मेरी बहू के दाएं गाल पर तिल नहीं है.’’
राधा मुंह बना कर चली गई. तिल से घर में कुछ हुआ नहीं, लेकिन बेवजह तिल हटवाने के लिए हजारों रुपए चले गए.
शंकर का कारोबार नहीं चल रहा था. वह परेशान रहता था. उस की पत्नी आरती ने कहा, ‘‘जरूर दुकान पर कोई टोटका कर गया है, इसलिए दुकान नहीं चल रही है. पड़ोसन संध्या बता रही थी कि एक बाबा हैं, जो लोगों की परेशानियां हल कर देते हैं.’’
शंकर ने कहा, ‘‘मैं बाबाओं के चक्कर में नहीं पड़ना चाहता. सब के सब ढोंगी होते हैं. पिछली बार भी तुम्हारे कहने पर एक बाबा के पास गया था, तो दुकान तो चली नहीं, लेकिन 10 हजार रुपए का नुकसान हो गया था.’’
आरती ने एक दिन बाबा से मिल कर सारी बातें बताईं. बाबा ने कहा कि तंत्र शास्त्र में ऐसे कई टोटके हैं, जिन से ऐसी सभी समस्याएं तुरंत हल हो जाती हैं. तुम्हारी मुसीबत का हल निकालने के लिए 5 हजार रुपए खर्च करने होंगे.
आरती ने शंकर को सारी बातें बताईं. पहले तो वह तैयार नहीं हुआ, लेकिन बाद में वह पत्नी के दबाव के आगे झुक गया. 5 हजार रुपए देने के बाद भी शंकर की माली हालत में कोई सुधार नहीं आया.
थकहार कर शंकर ने अपने दोस्त हरीश को सारी बातें बताईं. उस ने सलाह दी कि तुम जूस या फिर आइसक्रीम की दुकान खोलो. आसपास ऐसी दुकान नहीं है.
शंकर ने वैसा ही किया और उस की दुकान चल निकली.
दरअसल, कोई तांत्रिक, साधु, पंडित और ज्योतिषी घाटे में चल रहे उद्योगधंधे को न तो फायदे में पहुंचा सकते हैं और न ही कुछ और कर सकते हैं. टोटके से केवल समय और पैसे की बरबादी होती है. अंधविश्वास के खूंटे में बंधे रहने से न तो समाज की तरक्की होगी और न ही देश की.
रमेश कुमार ‘रिपु’




