News Story: ‘‘यार, ऐसा कौन सा सरप्राइज देना है, जो तू मुझे  इस हाउसिंग सोसाइटी के बाहर ले आई? तेरा कोई दोस्त रहता है क्या यहां?’’ विजय ने तंग आ कर अनामिका से पूछा.

‘‘इतनी भी क्या जल्दी है. अंदर तो चलो पहले,’’ अनामिका बोली और विजय को उस सोसाइटी के 7वें फ्लोर पर एक 2 बैडरूम सैट के बाहर ले गई.

‘‘यहां कौन रहता है?’’ विजय ने सवाल किया.

‘‘अभी तो कोई नहीं रहता, पर जल्दी ही कोई यहां अपने सपनों की दुनिया बसाएगा…’’ अनामिका ने इतना कहा और अपने पर्स से एक चाबी निकाली, ‘‘अब जरा दरवाजा खोलिए.’’

हैरान विजय ने उस चाबी से दरवाजा खोला और वे दोनों उस फ्लैट के भीतर दाखिल हुए. वह सोसाइटी बहुत अच्छी लोकेशन पर बनी थी, पर विजय के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था.

‘‘अरे बाबा, इतनी चिंता क्यों कर रहे हो. यह फ्लैट मेरे पापा ने मुझे गिफ्ट में दिया है. कब तक किराया भरती रहूंगी…’’ अनामिका ने राज खोला.

‘‘बधाई मेरी जान,’’ इतना कह कर विजय ने अनामिका को गले लगा लिया.

‘‘डार्लिंग, आप भी अपना सामान यहां रख सकते हैं, पर एक बात का ध्यान रखना,’’ अनामिका बोली.

‘‘कौन सी बात?’’ विजय ने पूछा.

‘‘यही कि तुम इस घर में रह सकते हो, अपनी चला भी सकते हो, पर रहेगा यह मेरा ही. मैं तुम्हें जनता की तरह इजाजत और अधिकार देती हूं कि तुम एक जनप्रतिनिधि की तरह इस घर को चलाओ और हम दोनों के सुनहरे सपनों को पूरा करो,’’ अनामिका बोली.

‘‘जनता, जनप्रतिनिधि, अधिकार… क्या है यह सब?’’ विजय ने पूछा.

‘‘देश का हाल देख कर मैं यह सब कह रही हूं. हाल ही में नरेंद्र मोदी ने सब से ज्यादा दिन तक प्रधानमंत्री बने रहने का रिकौर्ड बनाया है, पर ऐसा लग रहा है जैसे जनता ने उन्हें नहीं, बल्कि उन्होंने किसी दैवीय अधिकार के बल पर प्रधानमंत्री पद हासिल किया है,’’ अनामिका बोली.

‘‘हम दोनों के बीच में राजनीति कहां से आ गई. तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है कि नरेंद्र मोदी जनता के नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रतिनिधि हैं?’’ विजय ने एकदम से सवाल किया.

‘‘तुम्हें नहीं लगता कि पिछले 12 साल में भारत में ‘राजा का दैवीय अधिकार’ वाली सोच बढ़ी है. बह्मा की बनाई इस दुनिया में ‘मनुस्मृति’ के हिसाब से ‘राजा विष्णु का अंश है’ बताया गया है. मतलब राजा भगवान का प्रतिनिधि है और जनता का काम सेवा करना और टैक्स देना है.

‘‘पर असलियत में ऐसा नहीं है. धर्मग्रंथों में भले ही बह्मा ने दुनिया बनाई है, पर 1947 के बाद हम जनता ने तय किया कि ‘दैवीय अधिकार’ वाली थ्योरी नहीं चलेगी. हम भारत के लोग हैं और यहां का शासन संविधान से चलेगा. जनता का कोई भी प्रतिनिधि संविधान की रक्षा की शपथ लेता है, ईश्वर बचाने की नहीं. जब भी कोई प्रधानमंत्री खुद को संविधान से ऊपर सम?ाता है, तो जनता उसे गद्दी से उतार देती है. बिना किसी खूनखराबे के,’’ अनामिका बोली.

‘‘पर नरेंद्र मोदी ने कब कहा कि वे ईश्वर के प्रतिनिधि हैं?’’ विजय ने सवाल किया.

‘‘बताती हूं और मुझे  इस बात का बहुत ज्यादा दुख हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बारे में ‘नौन बायोलौजिकल’ वाला बयान दिया था,’’ अनामिका बोली.

‘‘कौन सा बयान?’’ विजय ने पूछा.

‘‘नरेंद्र मोदी ने 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान एक इंटरव्यू में एक बात कही थी कि ‘जब मेरी मां जिंदा थीं, मुझे लगता था कि मैं बायोलौजिकल रूप से पैदा हुआ हूं. उन के जाने के बाद मैं मानने लगा हूं कि परमात्मा ने मुझे भेजा है. यह ऊर्जा बायोलौजिकल नहीं हो सकती, मुझे परमात्मा ने काम के लिए भेजा है’.’’

‘‘पर यह तो उन्होंने भावनात्मक या आध्यात्मिक संदर्भ में कहा था. मां के निधन के बाद अब वे खुद को ‘ईश्वर का उपकरण’ मानते हैं यानी वे काम करने के लिए भेजे गए हैं, बस उन का शरीर बायोलौजिकल है. उन के समर्थकों ने इसे ‘सेवा भाव’ कहा था,’’ विजय बोला.

‘‘क्या तुम्हें नहीं लगता कि इस कथन में स्वयं को ईश्वर का दूत बताने या जताने की कोशिश की गई है? वे जनता के सेवक हैं और एक चुने हुए जनप्रतिनिधि, इसलिए उन्हें ऐसा कोई दावा नहीं करना चाहिए कि वे ईश्वर के कहने पर काम करते हैं,’’ अनामिका ने अपनी बात रखी.

‘‘मतलब हम भारत की जनता ही संविधान का मूल हैं?’’ विजय ने सीधा सवाल किया.

‘‘हां, बिलकुल सही बोला तुम ने. भारतीय संविधान का यही बेसिक आइडिया है. इसे ‘लोकतांत्रिक गणराज्य’ और ‘प्रतिनिधि लोकतंत्र’ कहते हैं. तुम नहीं जानते कि भारत का संविधान क्या कहता है?’’

‘‘क्या कहता है, बताओ तो जरा?’’ विजय ने सवाल दागा.

‘‘संविधान की ‘प्रस्तावना’ के पहले 3 शब्द ही सब बता देते हैं कि ‘हम, भारत के लोग…’ यानी सत्ता का सोर्स जनता है, राजा या कोई तानाशाह नहीं.

‘‘अनुच्छेद 326 को समझ, जिस में हर बालिग भारतीय को वोट देने का अधिकार है. इसी वोट से जनता अपनी ‘ताकत’ किसी विधायक या सांसद को ‘उधार’ देती है. जनता ही असली मालिक है. 5 साल में एक बार आप वोट दे कर बताते हो कि शासन कौन चलाएगा. तो असली पावर आप के पास हुई न?

‘‘आसान शब्दों में कहूं तो जनता के चुने हुए प्रतिनिधि नौकर की तरह होते हैं. विधायक, सांसद, प्रधान, मेयर… ये सब जनता के नौकर हैं. इन का काम है आप के लिए कानून बनाना, बजट पास करना, सरकार चलाना.’’

‘‘अगर तुम्हारी ही बात को सही माना जाए तो मैं सरकार को नौकर नहीं, बल्कि ट्रस्टी कहूंगा. सरकार आप की दी हुई ताकत को ट्रस्ट की तरह चलाती है. मनमानी की तो 5 साल बाद आप कुरसी छीन सकते हो,’’ विजय ने कहा.

‘‘कह सकते हैं, पर डाक्टर अंबेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि संविधान में जनता सर्वोच्च है. सरकार उस के प्रति जवाबदेह है. पर सारी गड़बड़ तब होती है, जब प्रतिनिधि मालिक बन जाता है. वह जनता को भूल कर सिर्फ पार्टी

या पैसे के लिए काम करता है,’’ अनामिका बोली.

‘‘पर अगर जनता ही सो जाए तो?’’ विजय ने सवाल किया.

‘‘जनता के सोने का मतलब है वोट न देना, सवाल न पूछना या फिर जातिधर्म के नाम पर वोट देना. फिर नेता तानाशाह हो जाते हैं. यही आजकल हो रहा है. जहां देखो लोग जाति, धर्म और समाज के नाम पर बंट रहे हैं. यह वर्तमान सरकार का ही कियाधरा है.’’

‘‘मतलब नरेंद्र मोदी ने अपने राज में कोई भी ढंग का काम नहीं किया?’’ विजय ने पूछा.

‘‘ज्यादा कुछ खास नहीं. बस, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को ही ज्यादा कोसा, जबकि उन के राज में देश के हालात बहुत ज्यादा अच्छे नहीं थे. जनता आजादी का मतलब भी ढंग से नहीं जानती थी. इस के बावजूद उस समय में देश को आगे बढ़ाने के कई काम हुए थे.’’

‘‘जैसे?’’ विजय ने सवाल किया.

‘‘भले ही नरेंद्र मोदी सब से ज्यादा दिन तक प्रधानमंत्री बनने का रिकौर्ड अपने नाम कर चुके हैं और खूब काम कराने की लिस्ट जनता को दिखाते रहते हैं, लेकिन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुए बड़े कामों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. देश के बंटवारे के बाद भारत में उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की नींव रखी थी और 26 जनवरी, 1950 को दुनिया का सब से बड़ा लिखित संविधान दिया था.

‘‘जब देश में 1951-52 में पहला आम चुनाव हुआ था, तब तकरीबन 17 करोड़ वोटर थे, उन में से 85 फीसदी अनपढ़. तब दुनिया को लगा था कि भारत टूट जाएगा, पर जवाहरलाल नेहरू ने चुनाव आयोग को फ्री हैंड दिया. चुनाव सफल हुआ, जिस से लोकतंत्र मजबूत हुआ.

‘‘नेहरू के राज में देश में भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर जैसी जगहों पर स्टील उद्योग लगे. भाखड़ा नांगल, हीराकुंड, दामोदर वैली डैम बने. विदेश नीति में भारत तीसरी दुनिया की आवाज बना. चीन के साथ पंचशील समझोता किया.

‘‘सामाजिक सुधार की बात करें तो हिंदू कोड बिल 1955-56 लाया गया. हिंदू महिलाओं को तलाक, संपत्ति में हक, एक विवाह का कानून बना. बड़े जमींदारों से जमीन ले कर ‘सीलिंग’ लगाई. गांवों में स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र शुरू किए. पंचायती राज की नींव रखी.

‘‘नेहरू राज की सब से बड़ी कामयाबी यह थी कि वे जनता के सामने हाथ पसार कर उस के भले के काम करते थे और नरेंद्र मोदी जैसे किसी तानाशाह की तरह जबरदस्ती करते दिखाई देते हैं कि किसी ने जरा सी भी चूं की तो बुलडोजर से सब तहसनहस कर दिया जाएगा.’’

‘‘इस सरकार ने कौन सी तानाशाही दिखाई है?’’ विजय ने पूछा.

‘‘अगर नरेंद्र मोदी सरकार की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बात की जाए तो साल 2016 की नोटबंदी को याद करो. तब सरकार ने अचानक से 500 और 1,000 के नोट यह कह कर बंद कर दिए थे कि सरकार का मकसद कालाधन रोकना था. इस सारे तामझाम में कालाधन कितना वापस आया, अगर इसे नजरअंदाज भी कर दें तो भी तब छोटे व्यापार और कैश इकोनौमी को तगड़ा झटका लगा था. इतना ही नहीं, पिछले 12 साल में देश में बेरोजगारी बढ़ी है. जीडीपी ग्रोथ में भी बहुत ज्यादा उतारचढ़ाव रहा. साल 2017 से 2020 के बीच यह ग्रोथ बेहद धीमी रही.

‘‘साल 2020 में सरकार के लाए 3 कृषि कानून तो तुम्हें याद ही होंगे. तब किसान संगठनों ने एक साल तक दिल्ली बौर्डर पर प्रदर्शन किया था. उन का कहना था कि इस से एमएसपी खत्म हो जाएगी और कौर्पोरेट हावी होंगे. थकहार कर साल 2021 में सरकार ने तीनों कानून वापस ले लिए थे.

‘‘इस से पहले नागरिकता संशोधन कानून 2019 के चक्कर में देशभर में विरोध हुआ था. बहुत से लोगों ने इसे धर्म पर आधारित बताया था, जबकि सरकार का कहना था यह कानून सिर्फ शरणार्थियों के लिए है, भारतीय नागरिकों पर लागू नहीं होगा. यह जो लोगों के बीच डर का माहौल बना है, यह मोदी सरकार की सब से बड़ी नाकामी मानी जाएगी,’’ अनामिका बोली.

‘‘तुम तो विपक्ष जैसी दलील दे रही हो. मोदी सरकार से बड़ी राष्ट्रवादी सरकार आज तक नहीं आई है. इस सरकार का तो कहना ही यह है कि देशहित पहले, बाकी सब बाद में,’’ विजय ने कहा.

‘‘अच्छा? फिर इस सरकार पर जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप क्यों लगा? ईडी, सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों में 95 फीसदी केस विपक्षी नेताओं पर ही क्यों हुए?

‘‘और अगर प्रधानमंत्री इतने ही दबंग नेता हैं, तो मई, 2023 से मैतेईकुकी संघर्ष में 200 से ज्यादा मौतें हुई थीं, तब प्रधानमंत्री द्वारा इस मुद्दे पर बहुत देर के बाद बयान देने और मणिपुर न जाने पर खूब आलोचना क्यों हुई थी?’’ अनामिका ने सवाल किया.

‘‘पर इस सरकार ने कोविड काल में खूब वाहवाही बटोरी थी. कितना बढि़या मैनेजमैंट दिखा था तब,’’ विजय ने मानो बचाव सा किया.

‘‘कोविड की दूसरी लहर अप्रैलमई 2021 में आई थी. इस के बावजूद अस्पतालों में औक्सीजन सिलैंडरों और बिस्तरों की कमी देखी गई थी. कितने ही लोग बेमौत मारे गए थे.

‘‘जब मार्च 2020 में अचानक लौकडाउन लगा था, तब महज 4 घंटे के नोटिस पर प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया था.’’

‘‘तुम्हें तो सरकार की हर बात में कमी नजर आती है. हम ने अपने पड़ोसी देशों पर नकेल कस रखी है,’’ विजय तुनक कर बोला.

‘‘तुम्हारी याददाश्त बड़ी कमजोर है. साल 2020 का चीन सीमा विवाद भूल गए जब गलवान में 20 जवान शहीद हुए थे. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने ‘चीनी घुसपैठ’ की बात स्वीकारी नहीं.

‘‘चलो, इसे भी नजरअंदाज करते हैं. रुपए की गिरावट पर क्या कहोगे?

साल 2014 में एक डौलर 60 रुपए के बराबर था, जबकि साल 2024 में एक डौलर 83 रुपए के बराबर हो गया था. मतलब, रुपया कमजोर हुआ था. आज 95 रुपए बराबर एक डौलर है,’’ अनामिका ने तेज आवाज में कहा.

‘‘अच्छा, मुझे  यह बता कि तुझे  नरेंद्र मोदी से दिक्कत क्या है?’’ विजय ने सवाल किया.

‘‘मुझे  किसी भी नेता से कोई दिक्कत नहीं है. अगर जनता ने किसी को वोट दे कर चुना है, तो यह लोकतंत्र की असली पहचान है. पर जब नेता जनता को सेवक समझने की भूल करते हैं, तो उन की सोच से तानाशाही की बू आती है. वे भूल जाते हैं कि जनता ने उन्हें काम करने की इजाजत दी है.

‘‘अगर सरकार की तरफ से देश में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त भोजन दिया जा रहा है तो यह सरकार की उपलब्धि नहीं है. सरकार को तो देश में ऐसा ढांचा तैयार करना चाहिए कि हर हाथ को काम मिले, हर पेट को रोटी मिले, हर तन को कपड़ा और घर मिले. ऐसा कर के कोई सरकार जनता पर अहसान नहीं कर रही है, बल्कि सरकार तो बनी ही इसी काम के लिए है.

‘‘जब नेता जनता को बरगलाते हैं, चाहे वह धर्म के नाम पर हो या जातबिरादरी के नाम पर तो शक पैदा होता ही है,’’ अनामिका बोली.

‘‘तो इस का हल क्या है?’’ विजय ने पूछा.

‘‘हल यही है कि जब कोई जनप्रतिनिधि संविधान की रक्षा की कसम खा कर प्रधानमंत्री या कोई भी मंत्री आदि बनता है तो वहां संविधान का मतलब है जनता की रक्षा करना. संविधान तो नियमों की एक किताब है. उस का आदर करें, पर जनता को न भूलें, क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है,’’ अनामिका ने अपनी बात रखी.

‘‘जनार्दन साहिबा, मैं आप की बात सम?ा गया. यह घर गिफ्ट में मिलने की तुम्हें दोबारा बधाई और अंकल को मेरी तरफ से थैंक्स कहना. बाकी इस घर को हम दोनों संवारेंगे और इसे दुनिया की सब से खूबसूरत जगह बनाएंगे, मेरा वादा है,’’ विजय ने कहा और अनामिका को चूम लिया.

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