Romantic Story. इंटरनैट का दौर अभी शुरू ही हुआ था. चैटिंग के जरीए मेरी मुलाकात गडि़या के एंड्रूज कालेज की एक लड़की शुभा से हुई. उसी समय मेरी नौकरी साउदर्न एवेन्यू के एक मारुति शोरूम में सेल्स एग्जीक्यूटिव के तौर पर लग चुकी थी. जिंदगी नईनई खुशियों से भर रही थी. एक तरफ कैरियर की शुरुआत, दूसरी तरफ शुभा जैसी दोस्त का साथ.
समय के साथ हमारी दोस्ती गहरी होती गई. तभी एक दिन शुभा ने बताया कि उस की सहेली नैना को मेरी मदद की जरूरत है. बिना ज्यादा सोचे मैं ने उस की मदद कर दी. शायद वहीं से मेरी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया.
कुछ समय बाद नैना मुझ से मिलने गरियाहाट आई. एक कौफी शौप में हमारी पहली मुलाकात हुई. उस ने ‘थैंक यू’ कहा, लेकिन उस की आंखों में जो भाव थे, वे शब्दों से कहीं ज्यादा गहरे थे.
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बातचीत के दौरान नैना ने अपने संघर्षों के बारे में बताया.पिता के न रहने के बाद मां के साथ मामा के घर रहना, मां की सरकारी नौकरी से घर चलना और खुद के बड़े सपने.
नैना की सादगी, उस की आंखों का दर्द और उस के भीतर का जुनून, सबकुछ मुझे छू गया. धीरेधीरे हमारी बातचीत बढ़ी और कब यह रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़ गया, पता ही नहीं चला.
वक्त बीता, कालेज खत्म हुआ और नैना ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी में स्नातकोत्तर में दाखिला लिया. मैं ने उसे अपनी मां से भी मिलवाया. लेकिन शायद यहीं से मेरी जिंदगी की सब से बड़ी भूल शुरू हुई. मैं अपने परिवार और अपने प्यार के बीच बैलेंस नहीं बना पाया.
नैना मीडिया में कैरियर बनाना चाहती थी. एक दिन मैं ने उसे एक बड़े मीडिया हाउस की वैकेंसी के बारे में बताया. उस ने आवेदन किया और उस की नौकरी लग गई. 6 महीने में उसे प्रमोशन भी मिला.
लेकिन इसी बीच नैना के घर में शादी की बात चलने लगी. एक दिन उस ने मुझ से कहा, ‘‘हमें अब शादी कर लेनी चाहिए.’’ मैं उसे समझाता रहा कि मैं घर वालों को मना लूंगा. मैं चाहता था कि हम सब साथ रहें, लेकिन हालात मेरे बस में नहीं थे.
एक दिन नैना ने कहा कि हम भाग कर शादी कर लें. मैं फिर भी परिवार को साथ रखने की जिद में अड़ा रहा. तभी मेरे दोस्त संजीव, जो जमशेदपुर में काम करता था, अचानक आया. उस ने कहा, ‘‘तुम दोनों यहां आ जाओ, नई जिंदगी शुरू करो.’’
इस बार हम ने फैसला कर लिया. हम ने शाम 5 बजे बसअड्डे पर मिलने का तय किया. मैं पहुंच गया लेकिन नैना नहीं आई. मैं ने फोन किया. कोई और उठा रहा था. उस ने कहा, ‘‘एक बस हादसा हुआ है आप तुरंत म्युनिसिपल अस्पताल पहुंचिए.’’ अस्पताल पहुंचा तो देखा कि नैना अपनी आखिरी सांसें गिन रही थी. उस दिन के बाद मैं उस से कभी नहीं मिल पाया.
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समय बीतता गया. जिंदगी आगे बढ़ी. मुझे सन्मार्ग हिंदी अखबार में नौकरी मिली, फिर आईएचएम कोलकाता में हिंदी अफसर बनने का मौका मिला. बाद में अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया और गूगल से जेआरएफ फंड भी मिला.
मेरा नाम इंडिया बुक औफ रिकौर्ड्स और वर्ल्ड रिकौर्ड्स यूनिवर्सिटी में दर्ज हुआ.
लेकिन यह सारी कामयाबियां अधूरी हैं, क्योंकि यह सब मैं उसे कभी बता नहीं पाया. अगर उसे पता होता तो शायद वह सब से ज्यादा खुश होती.
आज कई साल बीत चुके हैं. दाढ़ी में सफेदी आ गई है, लेकिन उस की यादें आज भी ताजा हैं. उस की मासूमियत, उस का भोलापन, उस की नाराजगी कुछ रिश्ते अधूरे रह कर भी जिंदगी भर पूरे लगते हैं. Romantic Story
लेखक : सप्तर्षि विश्वास




