News Story. विजय कई दिनों से अनामिका से नहीं मिला था. गरमी भी बहुत ज्यादा पड़ रही थी. इसी बीच अपने पड़ोस के एक बच्चे का सीईयूटी का एग्जाम दिलाने के लिए वह नोएडा भी गया था. वहां तपती दोपहरी में बच्चों के मांबाप ने कैसे दिन गुजारा था, यह देख कर विजय का दिलोदिमाग हिल गया था. वह तो अच्छा हो, विजय का एक दोस्त वहीं आसपास रहता था, वरना उस का भी लू के चलते भेजा फ्राई हो जाता.
इसी तनाव को दूर करने के लिए विजय अनामिका से मिलने उस के कमरे पर पहुंचा. पर वहां तो एक अलग ही राग अलापा जा रहा था. वहां कमरे के एक कोने में अनामिका ने कुछ डंडों पर प्लेकार्ड लगा रखे थे, जिन में कुछ फोटो और स्लोगन आदि थे. दीवार के बीच में एक कागज पर केजीपी लिखा था.
‘‘अनामिका, यह सब क्या नौटंकी है? यह केजीएफ क्या बला है?’’ विजय ने पूछा. ‘‘यह मेरा नया मिशन है. केजीएफ. बोले तो कटखनी गाय पार्टी. एक ऐसा आंदोलन जो सत्ता पक्ष की ईंट से ईंट बजा देगा,’’ अनामिका बोली. ‘‘अब इस की क्या जरूरत आ पड़ी है?’’ विजय ने पूछा.
‘‘तुम ने खबर नहीं पढ़ी कि कैसे लड़कियों और औरतों को सताया जा रहा है. ट्विशा शर्मा की मौत का मामला भूल गए क्या. उन के पति समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं और उन की सास गिरिबाला सिंह पूर्व जिला जज हैं. इन दोनों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है. दूसरी तरफ हमारे चीफ जस्टिस सूर्यकांत नई पीढ़ी को कौकरोच बता रहे हैं. सत्ता पक्ष का तो छोड़ ही दो, अब तो कानून वाले भी अपने फर्ज से भटकने लगे हैं,’’ अनामिका बोली.
‘‘तुम भी सोशल मीडिया के बहकावे में आ गई. हमारी सरकार और कानून व्यवस्था एकदम सही काम कर रही है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की अधिकतम संख्या (स्वीकृत पद) को 34 से बढ़ा कर 38 कर दिया है. ‘‘इतना ही नहीं, दुनियाभर में लड़ाई का माहौल है और हमारे प्रधानमंत्री हर बड़े नेता से मिल कर दुनिया को एकजुट कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि दुनिया में शांति हो,’’ विजय ने सरकार को ले कर अपना पक्ष रखा.
‘‘हां, देख लिया हम ने उन का मैलोडी चौकलेट वाला वीडियो. भारत की जनता से कहा कि कहीं बाहर मत जाओ, अपने खर्चे कम करो, सोना मत खरीदो और खुद सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा कर रहे हैं. ‘‘यही वजह है कि सोशल मीडिया पर बना कौकरोच जनता पार्टी पेज एकदम से वायरल हो गया है. देखते ही देखते लाखों नौजवान उस से जुड़ गए हैं.
‘‘हमारी कटखनी गाय पार्टी भी ऐसा ही भौकाल मचाने के लिए बनी है. जो लोग लड़कियों और औरतों को बेचारी गऊ समझते हैं उन्हें हम बताएंगे कि सींग मारने वाली कटखनी गाय कितनी खतरनाक होती है,’’ अनामिका ने कहा. ‘‘अब तुम किस कौकरोच जनता पार्टी को कहां से बीच में ले आई?’’
‘‘वही पार्टी जिस ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत के एक गलत बयान के बाद जन्म लिया है और उसी के दम पर लाखों नौजवान अब केंद्र सरकार से सवाल पूछ रहे हैं,’’ अनामिका ने कहा. ‘‘चलो, मान लिया कि जस्टिस सूर्यकांत को इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी. पर इतना जल्दी सोशल मीडिया पर कौकरोच जनता पार्टी का पेज बनाना कोई हंसीखेल नहीं है. यह सब किस ने किया और हुआ कैसे?’’ विजय ने पूछा.
अनामिका बोली, ‘‘मैं इस बारे में जब खोजबीन कर रही थी, तो बीबीसी की एक रिपोर्ट पर मेरी नजर गई. वहां बड़ी डिटेल में सब बताया गया था.’’ ‘‘तो तुम मुझे भी समझा दो न,’’ विजय बोला.
अनामिका ने कहा, ‘‘दरअसल, कौकरोच जनता पार्टी की वैबसाइट पर इस के संस्थापक और संयोजक की जानकारी दी गई है और उन का नाम अभिजीत दीपके है.
‘‘अभिजीत दीपके से बीबीसी न्यूज मराठी ने लंबी बातचीत की, जिस में उन्होंने बताया कि इस तरह का सोशल मीडिया कैंपेन उन्होंने किस वजह से शुरू किया.
‘‘अभिजीत दीपके ने बताया, ‘मैं ट्विटर (अब एक्स) पर सीजेई (भारत के मुख्य न्यायाधीश) का बयान देख रहा था, जहां पर वे सिस्टम की आलोचना करने और राय देने के लिए देश के नौजवानों की तुलना कौकरोच और परजीवियों से कर रहे थे.’
‘‘दीपके ने आगे बताया, ‘मैं ने इसे बेहद हास्यास्पद समझा क्योंकि सीजेआई को देश के संविधान का संरक्षक माना जाता है. वह संविधान जो हर किसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आजादी देता है. अब एक ऐसा शख्स जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए कैसे युवाओं की तुलना कौकरोच और परजीवियों से कर सकता है?
‘‘‘इस ने मुझे गुस्से और निराशा से भर दिया और ट्विटर पर मैं ने इस पर अपनी राय दी. मैं ने पूछा कि सब कौकरोच एक साथ आ जाएं, तो क्या होगा? मु?ो जेन जी और 25 साल तक के नौजवानों के कमाल के जवाब मिले और उन्होंने कहा कि हमें साथ आना चाहिए और एक प्लेटफार्म बनाना चाहिए.
‘‘‘इस ने मुझे आइडिया दिया कि हमें औनलाइन एक पैरोडी पार्टी बनानी चाहिए, जिस का नाम कौकरोच जनता पार्टी हो. अगर आप हमें कौकरोच कह रहे हैं तो ठीक है, हम कौकरोच जनता पार्टी बनाते हैं. इस पार्टी में शामिल होने के लिए मैं ने पात्रता तय कीं, जैसे आप को आलसी होना होगा, जैसा सीजेआई ने कहा, आप को बेरोजगार होना होगा और आप लगातार औनलाइन रहने वाले हों, जैसा सीजेआई ने कहा था.
‘‘‘उन्होंने (सीजेआई) जिन भी शब्दों का इस्तेमाल नौजवानों को बेइज्जत करने के लिए किया, हम ने उन्हें इस पार्टी का सदस्य बनने के लिए पात्रता रखा है. कुछ ही घंटों में इस ने चमत्कार कर दिया और हर कोई इस पर प्रतिक्रिया देने लगा और खुद को रजिस्टर्ड करने लगा.
‘‘‘इस के बाद हमें लगने लगा कि यह बड़ा होने वाला है और सिर्फ मजाक नहीं रह गया है, क्योंकि लोग निराश हो चुके थे और हम ने एक वैबसाइट बनाई, पार्टी का घोषणापत्र बनाया. इंस्टाग्राम पर हमारे 2 मिलियन फौलोअर्स (अब कई मिलियन से ज्यादा) हो चुके हैं और 2 लाख से ज्यादा लोगों ने खुद को कौकरोच जनता पार्टी के सदस्य के तौर पर रजिस्टर किया है. भारतीय राजनीति में यह समय के बाद अभूतपूर्व है.’’’
‘‘क्या कुछ चर्चित लोगों ने भी अभिजीत दीपके की इस मुहिम का समर्थन किया है?’’ विजय ने पूछा. ‘‘अगर अभिजीत दीपके की मानें तो क्रिकेटर रह चुके और सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि वे इस पार्टी में शामिल होना चाहते हैं. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस का समर्थन किया. इन के अलावा कई लोगों ने हमारा समर्थन किया है और आज यह चर्चा का विषय है. साथ ही दिन ब दिन यह तादाद बढ़ती चली जा रही है,’’ अनामिका ने बताया.
‘‘अच्छा, तुम्हें कौकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया पर लाखों फौलोअर्स होने के पीछे की क्या कहानी नजर आती है?
‘‘इस बारे में अभिजीत कहते हैं, ‘मैं यह नहीं कहूंगा कि यह सब मैं ने हासिल किया है. ये सब लोग आपस में साथ आए हैं. हमें ये सम?ाना चाहिए कि इन्हें क्या चीज साथ ले कर आई है. अगर आज कोई डिजिटल एजेंसी या कोई राजनीतिक दल ऐसा कुछ करता तो उसे इतनी तेजी से ये कामयाबी नहीं मिलती. फर्क नहीं पड़ता कि उन्होंने कितना पैसा खर्च किया होता. करोड़ों रुपए खर्च कर के भी किसी को ऐसी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिलती.
‘‘‘नौजवानों के अंदर कई सालों से जो निराशा और गुस्सा पल रहा है वही इतनी बड़ी प्रतिक्रिया की वजह है. सरकार की नाकामियों की वजह से नौजवान बेरोजगार हैं. उन्हें एक मंच मिला जहां पर वे अपनी निराशा और गुस्से को निकाल सकते हैं.’’’ ‘‘लेकिन अभिजीत दीपके आखिर कौन हैं? सुना है वह आम आदमी पार्टी से जुड़ा रहा था?’’ विजय ने सवाल दागा.
‘‘इस बारे में अभिजीत दीपके खुद बताते हैं, ‘मैं महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर से हूं. ग्रैजुएशन के लिए मैं पुणे गया. इस के बाद मुझे कुछ सालों के लिए आम आदमी पार्टी के साथ काम करने का मौका मिला जहां मैं उन की कम्युनिकेशन टीम में था.
‘‘‘मैं उन के स्वास्थ्य और शिक्षा पर काम करने की वजह से उन से आकर्षित था. यह कुछ नया था जो पहली बार भारतीय राजनीति में हो रहा था. जैसे आज कौकरोच जनता पार्टी नई है, ऐसा ही मु?ो लगा कि वो कुछ नया बदलाव लाने जा रहे हैं.
‘‘‘मैं ने कुछ समय के लिए उन के साथ काम किया फिर मु?ो लगा मु?ो और पढ़ने की जरूरत है और मैं घर पर मास्टर्स की तैयारी करने लगा. मुझे बोस्टन यूनिवर्सिटी से बुलावा आया. मैं 2 साल से यहां पर हूं और अपनी ग्रैजुएशन पूरी की है.’’’ ‘‘क्या कौकरोच जनता पार्टी का कोई घोषणापत्र भी है?’’ विजय ने पूछा.
‘‘इस पर अभिजीत दीपके ने बताया, ‘मुझे लगता है कि घोषणापत्र इस समय भारत के लोकतंत्र और वर्तमान राजनीतिक स्थिति के बारे में बताता है. हम लगातार देख रहे हैं कि वे जज जिन्हें निष्पक्ष रहना होता है, जिन का सरकार से कुछ लेनादेना नहीं होना चाहिए वे रिटायरमैंट के बाद सरकार से लाभ ले रहे हैं. यह बहुत खतरनाक है, क्योंकि न्यायपालिका को स्वतंत्र रहना होता है. अगर न्यायपालिका भी सरकार की राह पर चलेगी तो फिर क्या रह जाएगा? फिर लोकतंत्र को कौन बचाएगा?
‘‘‘दूसरी बात महिला के प्रतिनिधित्व को ले कर है. मैं बचपन से सुनता आया हूं कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा, लेकिन आज तक यह नहीं हुआ. अगर महिलाओं को आरक्षण देना है तो उन्हें 50 फीसदी आरक्षण दीजिए.’’’
‘‘तो क्या भारत के जेन जी नेपाल और श्रीलंका के जेन जी वाले आंदोलन की तरफ जा रहे हैं? नेपाल में तो आंदोलन के बाद सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था. क्या यहां भी ऐसा ही कुछ हो सकता है?’’
‘‘तुम्हारा सवाल बड़ा रोचक है. वैसे, ऐसे हालात पर अभिजीत दीपके कहते हैं कि भारत के जेन जी की तुलना श्रीलंका, नेपाल और बंगलादेश के जेन जी से करना ‘एक बड़ा अपमान’ होगा, क्योंकि वे (भारतीय जेन जी) हिंसा नहीं भड़का रहे हैं.
‘‘अभिजीत आगे कहते हैं, ‘भारतीय जेन जी व्यंग्य के जरीए अपनी नाखुशी जाहिर कर रहे हैं. कौकरोच का कौस्ट्यूम पहन कर वे यमुना को साफ कर रहे हैं, कूड़ा हटा रहे हैं. वे इस के जरीए सिस्टम की खिल्ली उड़ा रहे हैं. वे सड़क पर जा कर हिंसा नहीं भड़का रहे हैं और अगर कल को वे सड़कों पर जाते भी हैं तो वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से यह करेंगे.
‘‘‘यह जेन जी आबादी हमारे केंद्रीय मंत्रिमंडल से ज्यादा पढ़ीलिखी है. हमें सवाल यह करना चाहिए कि हम पर अशिक्षित लोग शासन क्यों कर रहे हैं,’’’ अनामिका ने बताया. ‘‘कौकरोच जनता पार्टी का भविष्य क्या होगा?’’ विजय ने पूछा.
‘‘इस पर अभिजीत कहते हैं कि यह सिर्फ एक शुरुआत है, कल और युवा संगठन आगे आएंगे. नौजवान तबका मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से तंग आ चुका है. अगले कुछ सालों में आप देखेंगे कि नौजवान बदलाव की मांग करेगा क्योंकि पिछले 10-12 सालों में इन्होंने ‘हिंदूमुसलिम’ उपदेश के अलावा कुछ भी नहीं सुना है,’’ अनामिका ने कहा.
‘‘इस का मतलब है कि यह नई पार्टी देश में कोई क्रांति ला सकती है?’’ विजय ने सवाल किया. ‘‘हां, बिलकुल ला सकती है,’’ अनामिका ने अपनी राय रखी.
विजय ने कुछ सोच कर कहा, ‘‘पर मुझे नहीं लगता. यह एक सोशल मीडिया का नया ट्रैंड जरूर हो सकता है, पर सिर्फ इस के चलते हम यह कह दें कि जेन जी कोई करिश्मा कर देंगे, अभी दूर की कौड़ी लगता है. इस की सब से बड़ी वजह यह है कि देश की ज्यादातर जनता, जो वोट करती है, उसे मालूम ही नहीं है कि रोज कुआं खोदो और पानी पियो से आगे भी जिंदगी है.
‘‘ऐसे लोग राजनीतिक पार्टियों की मुफ्त की घोषणाओं को ही तरक्की मान लेते हैं. बिहार में देखा नहीं कि जैसे ही कुछ महिलाओं के खाते में पैसे आए, सारे वोट उधर ही शिफ्ट होते दिखे. स्वराज पार्टी वालों ने देश की समस्याओं के नाम पर वोट मांगे, उन का हाल तो सब ने देख लिया.
‘‘हाल ही में थलापति विजय की पार्टी को भी तमिलनाडु राज्य में ऐसी घोषणाएं करनी पड़ीं. 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने की बात हुई न? केंद्र हो या राज्य सरकार, सब जानते हैं कि जनता तुरंत का फायदा देखती है, बाकी बातें भूल जाती है.
‘‘अभी तो कौकरोच जनता पार्टी पर विपक्ष खूब हल्ला काट रहा है, पर कोई दल नहीं चाहेगा कि भविष्य की राजनीति में उस के अलावा कोई दूसरा भारतीय जनता पार्टी का विकल्प बने. हां, कौकरोच जनता पार्टी के नाम पर लोग सत्ता पक्ष के खिलाफ देश में कोई विद्रोह कर दे, तो उन का रास्ता आसान हो जाएगा.’’
‘‘तुम्हारी बात में दम है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो भी देश का ही नुकसान है. सत्ता बदलने से समस्याएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी, इस बात की कोई गारंटी नहीं है,’’ अनामिका बोली.
‘‘पर एक बात की गारंटी जरूर है,’’ विजय बोला. ‘‘मैं समझी नहीं. किस बात की गारंटी?’’ अनामिका ने पूछा. ‘‘अगर तू कटखनी गाय पार्टी बनाएगी तो तेरीमेरी नहीं निभेगी. लिहाजा, मैं ने एक फैसला कर लिया है,’’ विजय बोला. ‘‘कैसा फैसला?’’ यह सुन कर अनामिका के कान खड़े हो गए.
‘‘जब तू कटखनी गाय बन जाएगी, तो सब से पहले सींग मु?ो ही मारेगी. इस से अच्छा तो यह है कि मैं कुछ दिनों के लिए कन्याकुमारी हो आता हूं. वैसे, जाना तो मैं एकदम दक्षिण में अंटार्टिका चाहता था, पर जब से मोदीजी ने कहा है कि एक साल तक बाहर विदेश घूमने मत जाओ तो अब भारत के दक्षिण कन्याकुमारी जाने का प्लान बनाया है. मोदीजी की बात रह जाएगी और कटखनी गाय यानी तुम से भी बचा रहूंगा,’’ विजय बोला.
‘‘अगर तुम एक सैकंड के अंदर यहां से दफा नहीं हुए, तो मैं अभी तुम्हारी चप्पल परेड करा दूंगी. कौकरोच की तरह तड़पते दिखोगे…’’ अनामिका का इतना कहना था कि विजय घुटनों पर आ गया.




