Editorial. दिल्ली में एक बस ड्राइवर और उस के साथी पर एक औरत के लगाए रेप चार्ज पर पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी. 2012 के केस की याद दिलाते हुए इस औरत का कहना है कि बस 7 किलोमीटर तक चलाई गई जब एकएक कर के 2 जनों ने उस से रेप किया.
इस मामले में पेंच यह है कि यह औरत सैक्स वर्कर का काम कर रही है और रात के 12 बजे के करीब बस में बैठाई गई थी. औरत ने शायद पुलिस रिपोर्ट में लिखाया है कि तय 3,000 रुपए कुछ देर के लिए तय हुए थे पर बस में चढ़ने के बाद बस में सवार 3 लोगों ने रातभर सैक्स करने की मांग 1,500 रुपए में रखी. जब झगड़ा हुआ तो पुलिस थाने में शिकायत की गई.
2012 के मामले में रेप की शिकार स्टूडैंट थी जो अपने साथी के साथ देर शामको जा रही थी जब खाली बस में सवार लोगों ने उन्हें सिर्फ लिफ्ट दी थी पर बाद में लड़के को बाहर फेंक दिया और लड़की को बुरी तरह रौंदा और उस के प्राइवेट पार्ट में रौड तक सिर्फ मजे के लिए डाली.
इस मामले में औरत 4 बच्चों की मां है, उस का आदमी निठल्ला टीबी का मरीज है और पैसा कमाने के लिए वह औरत रात को सैक्स से कमाई के लिए निकली. अपने घरों से दूर रह रहे सैक्स के प्यासों से अकेले, बिना दलाल के बदन बेचना गुनाह नहीं कानून में इसलिए रेप का मामला तो लेनदेन को सुलटाने के लिए नहीं बनाया गया, यह पुलिस को देखना होगा. अगर सुलह पहले से न हो तो अदालतों को सिर खपाना पड़ेगा कि क्या करें.
असल समस्या तो यह है कि औरतों को यह क्यों आज भी कहा जा रहा है कि वे बदन किराए पर दे कर पैसे कमा सकती हैं और मर्दों को यह पाठ क्यों पढ़ाया जा रहा है कि आज भी औरत का सैक्स खरीदा जा सकता है और उस से फिर जबरदस्ती की जाती है.
गरीब औरतों को आज इतना हुनर क्यों नहीं सिखाया जा रहा कि वे बिना बदन बेचे भी अच्छा पैसा कमा लें. अभी तक बदन बेचने में ज्यादा स्किल की जरूरत नहीं होती पर दूसरे कामों में खासी स्किल सीखनी होती है. पर आफतें तो इस धंधे में भी होती हैं, क्योंकि न मालूम कौन सा ग्राहक कौन सी बीमारी ले कर चल रहा है, कितना मैला और बदबूदार है, कितना खतरनाक है और मारपीट तक को सैक्स का आनंद समझता है.
सदियों से औरतों को जानबूझ कर हुनर नहीं सिखाए गए ताकि उन्हें मनमरजी से पुरुष की सेवा में लगा कर रखा जाए. अब जब गोरों से नहीं, राजाओं, जमींदारों, सेठों, पुजारियों के आतंक से भी 1947 में आजादी मिली तो 2026 में एक 30 साला औरत को क्यों बदन का सहारा लेना पड़े. मनमरजी से सैक्स करने का उसे हक है चाहे पति से, चाहे किसी दूसरे से, पर पैसे के लिए क्यों करना पड़ रहा है. यह सरकार, समाज और धर्म निकम्मापन दिखाता है जो दावा करते हैं कि हम ही तो बचाते हैं. Editorial




