Hindi Story:  जौडर्न एलिना की देह तो भोगता था, पर शायद उस का प्यार मर गया था. एलिना समझ नहीं पाई थी इस बदलाव को. क्या था इस का राज? रीर बदलता है, प्रेम का आकार भी. पर औरत की आत्मा को तौलना किस ने सिखाया मर्दों को?’ बिस्तर से उठते हुए उस ने अपने कपड़ों को समेटा. उस की नजर पहले बिस्तर पर गई, फिर फर्श पर बिखरे कपड़ों पर. एकएक कपड़ा वह धीरे से उठाती,  पहनती गई. जौर्डन ने अब तक उस की ओर देखा भी नहीं था. उस की पीठ उस की तरफ थी. शर्ट के बटन बंद करता हुआ वह तेज कदमों से कमरे से बाहर चला गया.

वह एक पल के लिए ठिठक गई. उस के मन में एक टीस उठी, ‘‘मर्द कपड़े उतारते समय तो साथ होते हैं, पर पहनते समय क्यों नहीं?’’ उस का मुंह उतर गया. उसे लगा जैसे उस के भीतर कोई भारी चीज भर गई हो. एलिना का चेहरा बेहद खूबसूरत था. पतली नाक, नरम होंठ, साफ आंखें. उस की हंसी मासूम और मोहक थी. लेकिन अब उस का वजन बढ़ गया था. वह अब 16 बरस की 47 किलो की लड़की नहीं थीवह अब 55 किलो की 27 साल की औरत थी. अपने पेट और जांघों पर चढ़ आई चरबी से वह अनजान नहीं थी, पर यह चरबी एक दिन शर्म में बदल जाएगी, ऐसा उस ने कभी सोचा नहीं था.

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उस ने कई बार जौर्डन की आंखों में वह पल देखा था जब उस के शरीर को तौलती हुई एक हलकी सी अरुचि चमक जाती थी. फिर भी वह उस से उत्सुकता से संबंध बनाता था. उस के उभारों, उस की स्किन को, उस के निजी अंगों को बड़ी जिज्ञासा से छूता था. लेकिन पेट और जांघों को देखते ही उस की हथेलियां रुक जातीं और वह उन हिस्सों को अनदेखा कर देता. एलिना ने कितनी ही बार चाहा कि वह अपना वजन कम कर ले, पुराने दिनों जैसा शरीर वापस पा ले, ताकि जौर्डन की आंखों में वह खुद के लिए उठती नफरत को देखे. पर लाख कोशिशों के बावजूद वजन वहीं अटका रहा. अकेलेपन और लगातार तनाव ने उसे सिगरेटों की ओर धकेल दिया. दिनभर मीठी चाय, थकान और घुटता डर उसे भीतर ही भीतर खाता गया.
जौर्डन कोई आदर्श शरीर वाला मर्द नहीं था.

उस का अपना वजन 70 किलो था और पेट उभर आया था, पर संबंध बनाते समय एलिना ने कभी उस की ओर ऐसे नहीं देखा था. उसे शर्म आती थी किसी के शरीर को इस तरह देखने में. लेकिन अब वह जौर्डन के शरीर पर गौर करने लगी थी. एक औसत कद का, थोड़ा ठिगना मर्द. उसे अपना वजन कम लगता था और वह कहता था कि वह और वजन बढ़ाना चाहता है. एलिना को उस की आंखों में उस के पेट पर जमी चरबी के लिए कोई शर्म नहीं दिखी, बल्कि वह अपने शरीर के प्रति बहुत सहज था, जैसे कोई समस्या ही हो.
एलिना सोचती, ‘मर्द ऐसे क्यों होते हैं? वे औरत को यह क्यों जता देते हैं कि वह कहां परफैक्ट नहीं है चाहे वे खुद कितने ही भद्दे क्यों हों?’’ औरतों को उन के साथ हमेशा बहुतवेल मैनर्डरहना पड़ता है, क्योंकि जरा सी ऊंचनीच पर वे उन्हें बेइज्जत महसूस करवा देते हैं.

औरतों के सब से बड़े आलोचक अकसर उन के अपने साथी मर्द होते हैं और इस रोल में वे प्रेमी नहीं, बल्कि कठोर समीक्षक बन जाते हैं. साल बीतते गए. एलिना के वजन में कोई तबदीली नहीं आई. जौर्डन का प्रेम भी वहीं अटका रहा, पर उस की चाहत शरीर के कुछ हिस्सों तक सीमित रही. एक दिन फोन पर जौर्डन ने कहा, ‘‘मैंने तुम्हारी पीठ पर कभी भी किस नहीं किया.’’ एलिना ने सोचा कि अच्छा है, कम से कम इसने यह सोचा तो सही. पर तुरंत जौर्डन की अगली बात ने जैसे सब बदल दिया, ‘‘लेकिन तुम्हारी पीठ पसंद नहीं.  बस सामने से मतलब हैतुम्हारे उभार बहुत पसंद हैं.’’ एलिना चुप रही. उस के पास शब्द ही नहीं थे कि वह इस पर क्या कहे.

उस की चुप्पी एक आंतरिक संवाद में बदल गई, ‘क्या मैं सिर्फ उभार और निजी अंग भर हूं? क्या प्रेम में शरीर काआकर्षकरहना हमेशा जरूरी है? क्या पसंद करने वाला मर्द भी अपनी पसंदीदा औरत को ऐसे टुकड़ों में बांट कर देखता है?’ उस ने तो कभी जौर्डन को ऐसे नहीं देखा था. वह तो उस के लिए अब भी वही था, जैसा कालेज के दिनों में था, खास और दिलकश. उस के जेहन में रोजमर्रा की औरतों की यादें उतर आईं. सड़कों पर चलतीं, सिर पर टोकरी उठाए फिरतीं, घर की ओट पर बैठींबेरंगी, बेढंगी साड़ी में लिपटी औरतें. उन का काला, चपटा, उभरा, भद्दा पेट. जो आकर्षक शरीर को भूल चुकी थीं या सोचती भी नहीं थीं. उन का संघर्ष रोटी कमाना, पेट पालना, बच्चे पालना था.

उन की जिंदगी में भी तो होते होंगे निजी पलक्या महसूस करती होंगी वे उन पलों में? क्या उन के साथी
मर्द उन के बेडौल शरीर को प्रेम करते होंगे? मर्द को यादों में रही औरत याद आती होगी? क्या वे याद करते होंगे कि यही औरत सुबह उन के फर्श को साफ कर रही थी? यही औरत बेतरतीब लिपटी साड़ी में बच्चों को स्कूल छोड़ आई? या बस उन्हें दिखती होगी एक बेडौल शरीर की, कमज्यादा कदकाठी वाली औरत? क्या वे करते होंगे उपयोग? क्या वे जानते होंगे कि औरतें कितनी काम की होती हैं? अचानक उसे कालोनी में बाहर दरवाजे पर बैठी औरतें याद आईं. उन की घूरती आंखें और उन की फुसफुसाहट.
ये जवान लड़कियों के पीछे क्यों पड़ी होती हैं? क्या ये नहीं करतीं अपनी जिंदगी में यह सब, जो इतनी नफरत से भरी नजर से देखती हैं एक जवान लड़की को निकलते हुए?’

इन में यह कुंठा कहां से आई होगी? क्या यह कुंठा औरतों में यहीं से आई होगी? क्या वे यह भी नहीं सकीं कि मर्दों का मात्र दैहिक सुख उन की आत्मा को शांति नहीं देता था? कहीं कुछ रह गयावे मात्र दाता तो नहीं थीं. मगर यह सब वे औरतें सोचती भी होंगी? नहींउसे नहीं लगता था. मगर वह इन मन के जालों में गई थी, जैसे कि उसने सारी कडि़यां जोड़ ली हों, मगर उसके पास मात्र एक आह के सिवा कुछ भी नहीं.
वह खुद को अपने मन के आईने में देखतीएकदम सुडौल और आकर्षक शरीर में, काली प्लेन साड़ी पहने और जौर्डन की उस पर टिक गई नजरें.

वह चुप और खोई हुई रहती. सोचती कि कैसे वह पेट और जांघों की चरबी कम करे. कैसे वह जौर्डन की आंखों को अपने लिए चमकता हुआ देखे. कैसे वह आकर्षक रूप से उस के सामने इतराती हुई खड़ी होअब उसे यह दूर की कौड़ी लगती थी. वह निजी पलों में पेट और जांघों को छिपाने लगी थी. अब वे उसे बहुत नफरत महसूस कराने लगे थे. वह चाहती थी उन के बीच संबंध घोर अंधेरे में बनें, ताकि जौर्डन की नजर उस के पेट की चरबी और जांघों पर पड़े. उस का बेडौल शरीर अब खुद उसे पसंद नहीं था. असहजता अब उस के भीतर घर कर चुकी थी.           

राजनंदिनी रावत

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