मैं नौकरी करती हूं और औफिस में कई लोगों से बात करनी पड़ती है. मेरा बौयफ्रैंड शक करता है हर बात पर सवाल पूछता है. मुझे घुटन को महसूस कर रही हैं
आप जिस घुटन को महसूस कर रही हैं, वह प्यार की कमी से नहीं, भरोसे की कमी से पैदा होती है. नौकरी करना, लोगों से बात करना और प्रोफैशनल रिश्ते निभाना आज की जरूरत है, इसे शक की नजर से देखना किसी भी रिश्ते को धीरेधीरे थका देता है. आप के बौयफ्रैंड का शक शायद उस के डर और असुरक्षा से आता हो, लेकिन यह वजह आप के हर कदम पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं देती.
उसेके लिए बहस या सफाई देने के बजाय शांत और स्पष्ट बातचीत जरूरी है. उसे बताइए कि भरोसा रिश्ते की नींव है और अगर हर बात पर जांचपड़ताल होगी तो प्यार का दम घुटने लगेगा. यह भी साफ कहें कि आप पारदर्शिता रख सकती हैं, लेकिन अपनी स्वतंत्रता नहीं खो सकतीं. रिश्ते में प्यार का मतलब निगरानी नहीं, सम्मान और विश्वास होता है.
अगर वह सच में आप को समझना चाहता है तो आप की बात सुनेगा और अपने व्यवहार पर काम करेगा लेकिन अगर शक के नाम पर कंट्रोल बढ़ता जाए तो यह आप के आत्मसम्मान और मानसिक शांति के लिए खतरे की घंटी है. याद रखिए, सच्चा रिश्ता वह होता है जहां आप खुद को साबित करने में नहीं, खुद होने में सुरक्षित महसूस करें.
मैं और मेरा बौयफ्रैंड फिजिकल रिलेशनशिप में हैं, लेकिन सैक्स के बाद वह भावनात्मक रूप से दूरदूर रहने लगता है. इस से अकेलापन महसूस होता है. मैं क्या करूं?
आप जो महसूस कर रही हैं, वह सिर्फ अकेलापन नहीं है, बल्कि भावनात्मक असंतुलन की पीड़ा है. जब किसी रिश्ते में शारीरिक नजदीकी तो हो, लेकिन उस के बाद भावनात्मक दूरी आ जाए तो मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मैं सिर्फ एक जरूरत बन कर रह गई हूं? यह सोचना आप की कमजोरी नहीं, आप की संवेदनशीलता का प्रमाण है.
हर व्यक्ति को अलग तरह से जीना है. संभव है कि आप के बौयफ्रैंड के लिए फिजिकल क्लोजनैस अपनेआप में पूरी हो जाती हो, जबकि आप के लिए उस के बाद का अपनापन, बातचीत और स्नेह ज्यादा मायने रखता हो. समस्या वहां पैदा होती है, जहां यह अंतर खुल कर कहा नहीं जाता. चुप रह कर सहते जाना धीरेधीरे आप को भीतर से खाली कर देगा.
शांत मन से, बिना आरोप लगाए, उस से यह कहना जरूरी है कि शारीरिक रिश्ते के बाद उस की दूरी आप को असुरक्षित और अकेला महसूस कराती है. यह कोई मांग नहीं, आप की भावनात्मक जरूरत है. अगर वह आप को सम?ाने की कोशिश करता है तो वह अपने व्यवहार में बदलाव भी लाएगा. लेकिन अगर वह आप की भावना को हल्का समझे या टालता रहे तो आप को खुद से यह ईमानदार सवाल पूछना होगा कि क्या यह रिश्ता आप को सिर्फ शरीर से जोड़ रहा है, दिल से नहीं.
याद रखिए इंटीमेसी का मतलब सिर्फ पास आना नहीं, पास रहना भी होता है और जिस रिश्ते में आप बारबार खुद को भावनात्मक रूप से अकेला महसूस करें, वहां ठहर कर सोचना जरूरी हो जाता है क्योंकि प्यार वह है, जो आप को भरा हुआ महसूस कराए, खाली नहीं.
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