Geopolitics: आज ईरान और अमेरिका एक दूसरे के खून के प्यासे है। दोनो युद्ध के मैदान में है ईरान खुदको अमेरिका और इजराइल से बचाने के लिए अपनी संप्रभुता की लड़ाई लड़ रहा है पर अमेरिका ये लड़ाई क्यों लड़ रहा है, यह अमेरिका समेत सभी शोधर्थीयों के लिए शोध का विषय है। बहरहाल क्या आप जानते है आज अमेरिका और इजराइल में जितनी गहरी दोस्ती है, ऐसी ही दोस्ती अमेरिका और ईरान की थी। अमेरिका और ईरान जिगरी दोस्त हुआ करते थे लेकिन 1979 के बाद दोनों एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गए।

ईरान में पेट्रोलियम की खोज हो गई थी। अमेरिका और ब्रिटेन ईरान से अंधाधुंध पेट्रोल लेके जा रहे थे लेकिन ईरान के प्रधानमंत्री मूसा डेक—मोहम्मद एक फैसला लेते है की ईरान की जितनी भी पेट्रोलियम कंपनीयां थी सबको नेशनलाइज करके सरकारी घोषित कर दिया। जिसे ब्रिटेन और अमेरिका तेल निकालकर मुनाफा कमाती ईरान की प्राकृतिक संसाधनों दोहन करती थी। मूसा डेक के फैसले के बाद ब्रिटेन और अमेरिका की कंपनी को वापस जाना पड़ा। इससे वहां के लोग बहुत खुश हुए।
अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA और ब्रिटेन की MI6 ने मिलकर ‘ऑपरेशन एजेक्स’ (Operation Ajax) चलाया और अगस्त 1953 में उनका तख्तापलट कर दिया। और इन्हें गिरफ्तार करा दिया और ईरान की सत्ता रजा पहलवी को दे दी। रजा पहलवी अमेरिका के इशारों की कठपुतली की तरह काम करते है।”

“रजा पहलवी के आने के बाद ईरान के जितना पेट्रोलियम है उसे अमेरिका निकालता है, उसे रिफाइन करने का काम भी अमेरिका करता है, बेचने के लिए डॉलर का यूज़ करता है, तेल था ईरान का लेकिन पूरा फायदा जाता था अमेरिका। यह बात वहां के लोगों को चुभ रही थी और ईरान के लोग रजा पहलवी के खिलाफ हो गए। लेकिन इसके खिलाफ जब आवाज उठाया गया तो रुहल्ला खमैनी ने इसका प्रतिनिधित्व कर रहे थे लेकिन रुहल्ला खमैनी के इस आंदोलन को रजा पहलवी ने बहुत सख्ती से दबा दिया और रुहल्ला खमैनी को ईरान छोड़कर भागना पड़ा। वे ईरान छोड़ के इराक गए, सीरिया गए, तुर्की गए, फाइनली फ्रांस—इनको शरण दिया था वे वहां से भी संदेश भेजते थे लेकिन उतना प्रभाव नहीं पड़ता था।”
“जो लोग रजा पहलवी के खिलाफ आवाज उठाते थे, रजा पहलवी अपनी खुफिया एजेंसी सबाक की मदद से उन लोगों को घर से उठवा लेती थी, और उसकी फैमिली को टॉर्चर करते और मार डालते थे। कोई भी रजा पहलवी के खिलाफ बोलने के लिए तैयार नहीं था।

रजा पहलवी ने अमेरिका से प्रेरित होकर वाइट रिवोल्यूशन लाया जहां पश्चात सभ्यता का विस्तार हुआ। 1971 पार्से पोलिस का त्यौहार मनाया पूरी दुनिया के नेता को बुलाया बहुत बेवजह खर्च किया इसके खिलाफ पेरिस में बैठे रुहल्ला खमैनी ने आवाज उठाई और जनआंदोलन छेड़ दिया। रजा ने उसे दबाने की भरपूर कोशिश की ” 8 सितम्बर 1978 शुक्रवार को नमाज के बाद आंदोलन कर रहे लोगो पर गोलिया चलवा दी बहुत लोग मारे गए। जैसे ही ये घटना हुई आंदोलन उग्र हो गया आंदोलनकारियों ने चारो तरफ से घेर लिया जनवरी 1979 को रजा पहलवी को भागना पड़ा। फरवरी 1979 को खामैनी ईरान वापस आ जाता है, रुहल्ला खमैनी नें वाइट रिवोल्यूशन को खत्म कर ईरान रिपब्लिकन ऑफ इस्लाम बना दिया।
रजा पहलवी को जिमी कार्टर ने अमेरिका में शरण दे दिया था। ईरान के स्टूडेंट, पब्लिक खिलाफ हो गई “अमेरिका से रजा पहलवी को वापस देने की मांग की, लेकिन अमेरिका वापस देने को तैयार नहीं था। अमेरिका ने कहा कि उसे कैंसर हुआ है, यहाँ इलाज करवा रहा है।

स्टूडेंट ने 4 नवंबर 1979 को तेहरान में यूएसए दूतावास के 52 डिप्लोमेट्स को पकड़ लिया और उन्हें तेहरान की गलियों में आँख पे पट्टी बाँध के परेड निकाला था। डिप्लोमेट्स को 444 दिन तक, यानी लगभग डेढ़ साल तक, इन लोगों ने बंदी बना के रखा था। जिमी कार्टर ने रूहुल्ला खामेनी से कहा कि हमारे डिप्लोमेट्स को वापस भेजो। रूहुल्ला ने रजा पहलवी को वापस भेजने को कहा। तब जिमी कार्टर ने ईरान के 12 बिलियन डॉलर के एसेट्स —सोने, चांदी, डॉलर उसको सीज कर दिया। अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया।
उस समय से लेके 2026 तक ईरान के ऊपर अमेरिका ने इतना प्रतिबंध लगाया कि ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था तोड़ दिया। जिमी कार्टर के ऊपर दबाव था, हमारे डिप्लोमेट्स को वापस लाइए। जिमी कार्टर ने 1980 में ऑपरेशन ‘ईगल क्लॉ’ (Operation Eagle Claw) लांच किया डिप्लोमेट्स को वापस लाने के लिए। जो अब तक का सबसे फेल्ड आपरेशन था। अमेरिका में जनरल इलेक्शन हुए जिमी कार्टर चुनाव हार गए, ईरान नें अमेरिकी डिप्लोमेट्स को वापस भेज दिया, रजा पहलवी की कैंसर से मृत्यु हो गई।

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