Political Story: आज विजय ने अनामिका से मिलने का प्रोग्राम बनाया था. दोनों मिले भी, पर अनामिका का मूड कुछ उखड़ा हुआ था.
‘‘तुम्हारा चेहरा क्यों लटका हुआ है? क्या हुआ?’’ विजय ने पूछा.
‘‘यार, हमारे गांव में लफड़ा हो
गया है,’’ अनामिका बु?ा हुई आवाज में बोली.
‘‘लफड़ा मतलब? अंकल और आंटी ठीक तो हैं न?’’ विजय को चिंता हुई.
‘‘तुम तो जानते हो कि पापा का मछली का कारोबार है. हुआ यों कि वहां एक रंगदार है, जो हर किसी पर रोब जमाने के लिए धमकी देता था,’’ अनामिका बोली.
‘‘क्या उस ने अंकल से कुछ कह दिया?’’ विजय ने बीच में ही टोक कर कहा. ‘‘अरे नहीं, बल्कि एक दूसरे रंगदार ने मछली से भरी उस की नाव डुबो दी. पर वे मछलियां हमारी थीं. बैठेबिठाए पापा का नुकसान हो गया. अब पापा भी बदले की आग में गया,’’ अनामिका बोली. ‘‘ओह, यह तो बहुत बुरा हुआ. पर आजकल पूरी दुनिया में यही हो रहा है.’’
‘‘मतलब?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘इजराइल, अमेरिका और ईरान का युद्ध भी तो अपने दबदबे की लड़ाई है. इस सब में पिस वे देश और लोग रहे हैं, जिन्हें यह युद्ध चाहिए ही नहीं. कल तक शांति का नोबल पुरस्कार मांगने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है. बस, किसी तरह अमेरिका सब से ज्यादा ताकतवर बन जाए, यही तो डोनाल्ड ट्रंप चाहता है.’’
‘‘अच्छा, यह बताओ कि ईरान और इजराइल का असली मसला क्या है? कोई तो इतिहास होगा न, जो आज ये दोनों देश युद्ध की आग में खुद तो ?ालस रहे हैं, साथ ही और भी कई दूसरे देशों को बरबाद कर रहे हैं,’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘सोशल मीडिया पर तो तरहतरह के दावे किए जा रहे हैं, पर मैं उन पर ज्यादा यकीन नहीं करता. लेकिन ‘जनसत्ता’ की एक रिपोर्ट ने मेरा ध्यान जरूर अपनी तरफ खींचा. उस के मुताबिक, मध्यपूर्व में ईरान और इजराइल के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है. यह संघर्ष दशकों पुराना है, जो समयसमय पर युद्ध जैसे हालात पैदा करता रहा है,’’ विजय ने अनामिका से कहा.
‘‘मुझे जरा पूरी बात समझाओ,’’ अनामिका बीच में ही बोली.
‘‘मेरी पूरी बात तो सुन लो तुम… हां, तो मैं कह रहा था कि हाल के दिनों में यह टकराव (ईरान और इजराइल के बीच) और ज्यादा खतरनाक हो गया और अमेरिका और इजराइल ने शनिवार, 28 फरवरी, 2026 को ईरान पर हमला कर दिया.’’
‘‘टकराव तो ईरान और इजराइल के बीच है, फिर अमेरिका क्यों चौधरी बना?’’ अनामिका बोली.
‘‘इस हालिया युद्ध पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस सैनिक कार्रवाई का मकसद अमेरिका के लिए पैदा हुए सिक्योरिटी खतरे को खत्म करना है और ईरान के लोगों को अपने शासकों के खिलाफ खड़े होने का मौका देना है.
‘‘लेकिन अमेरिका, इजराइल और ईरान के इन हमलों के बाद क्षेत्र के तेल उत्पादक खाड़ी देशों में चिंता बढ़ गई, क्योंकि पूरे इलाके में संघर्ष के और बढ़ने का खतरा पैदा हो गया. वहीं इजराइल
ने कहा कि इस के जवाब में ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं.
‘‘ईरान ने भी जवाबी हमला करते हुए चेतावनी दी कि वह इस कार्रवाई का बदला लेगा. ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने शनिवार, 28 फरवरी, 2026 को कहा कि इजराइल और अमेरिका को अपने इस कदम पर पछताना पड़ेगा.’’
‘‘लेकिन तुम ने बताया नहीं कि ईरान और इजराइल विवाद आखिर है क्या और क्यों पूरा मिडिल ईस्ट अब
इस संघर्ष को ?ोल रहा है?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘खबरों के मुताबिक, ईरान और इजराइल के बीच दुश्मनी की असली शुरुआत 1979 की ईरानी क्रांति के बाद हुई. इस क्रांति से पहले ईरान पर मोहम्मद रजा पहलवी का राज था और उस समय ईरान और इजराइल के रिश्ते सामान्य ही नहीं, बल्कि काफी सहयोगी भी थे. दोनों देशों के बीच व्यापार, खुफिया सहयोग और सैन्य संपर्क मौजूद थे.
‘‘लेकिन 1979 में क्रांति होने के
बाद रुहोल्ला खोमैनी की अगुआई में ईरान में इसलामिक राज आया. नई सरकार ने अपनी विदेश नीति पूरी तरह बदल दी. ईरान ने इजराइल को मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया और उसे ‘अवैध राज्य’ बताते हुए अपना प्रमुख दुश्मन घोषित कर दिया.
‘‘इस के बाद ईरान ने फिलिस्तीन के समर्थन को अपनी नीति का अहम हिस्सा बना लिया. इसी वजह से उस ने हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों को राजनीतिक और सैन्य समर्थन देना शुरू किया, जो इजराइल के खिलाफ संघर्ष करते हैं. इजराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया. यहीं से दोनों देशों के बीच ‘शैडो वार’ का दौर शुरू हो गया.’’
‘‘अब यह ‘शैडो वार’ क्या बला है?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘दरअसल, पिछले 20 सालों में इन दोनों देशों ने सीधे युद्ध के बजाय कई अप्रत्यक्ष तरीके अपनाए. इन में साइबर हमले, वैज्ञानिकों की हत्या, सीरिया और लेबनान में प्रौक्सी मिलिशिया (जैसे ईरान समर्थित हिजबुल्लाह या हूती, जो सीधे युद्ध में शामिल हुए बिना राज्य को फायदा पहुंचाते हैं) के जरीए हमले शामिल हैं. पिछले कुछ सालों के दौरान इजराइल कई बार सीरिया में ईरान समर्थित ठिकानों पर एयरस्ट्राइक करता रहा है.’’
‘‘तो फिर अमेरिका क्यों इस युद्ध में कूदा?’’ अनामिका ने सवाल किया.
‘‘28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बमबारी शुरू
की, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान
पर आरोप लगाया कि वह ऐसे परमाणु हथियार बना रहा है, जो अमेरिकी सहयोगियों के लिए खतरा हैं और जल्द ही अमेरिका तक पहुंच सकते हैं.
‘‘हालांकि, 2 मार्च को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि प्रशासन को पता था कि इजराइल ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने वाला है और ईरान इस के बाद अमेरिका को भी निशाना बनाता. इस वजह से अमेरिका को उस पर हमला करने की पहल करनी पड़ी,’’ विजय बोला.
‘‘यह बात कुछ हजम नहीं हुई. मु?ो लगता है कि ईरान, इजराइल और अमेरिका हमारे गांव के दबंग जैसे हैं, जो अपने निजी फायदे के लिए पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन रहे हैं. इन की रंगदारी पूरी दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो रही है,’’ अनामिका बोली.
‘‘तुम सच कह रही हो. 28 फरवरी को जब यह संघर्ष शुरू हुआ, तो किसी ने नहीं सोचा था कि महज एक हफ्ते के भीतर यह 14 देशों तक फैल जाएगा. एक तरफ जहां अमेरिका के ‘आपरेशन एपिक फ्यूरी’ और इजरायल के ‘रोरिंग लायन’ अभियान के तहत ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने भी अपनी पूरी ताकत ?ांकते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलों की बौछार की.
‘‘खबरों की मानें तो ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई की मौत की खबरों से ले कर स्ट्रेट औफ होर्मुज की नाकाबंदी तक, इस एक हफ्ते ने दुनिया का नक्शा और समीकरण दोनों बदल दिए हैं. आसमान में आधुनिक फाइटर जैट्स के बीच सीधी भिड़ंत हो रही है, तो समंदर में युद्धपोत डूब रहे हैं. तबाही का आलम यह है कि 14 देश अब इस जंग का मैदान बन चुके हैं और हर बीतते दिन के साथ खतरा और गहरा होता जा रहा है.
‘‘जंग की शुरुआत अमेरिका और इजराइल के एक बेहद सटीक और सा?ा हमले से हुई. अमेरिका ने इसे ‘एपिक फ्यूरी’ कहा, तो इजराइल ने इसे ‘रोरिंग लायन’ नाम दिया. इस हमले में 100 से ज्यादा लड़ाकू विमानों और भारी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया. टारगेट बिलकुल साफ था, ईरान की सरकारी इमारतें, राष्ट्रपति का घर और सुप्रीम लीडर का दफ्तर. देखते ही देखते खबर आई कि ईरान के सब से बड़े नेता आयतुल्ला अली खामेनेई इस हमले में मारे गए हैं.
‘‘दूसरी तरफ ईरान ने भी एक घंटे के भीतर ही जोरदार जवाब दिया. ईरान की सेना ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला बोला. इस कार्रवाई की रेंज में दुबई के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल भी रहे, जिन्हें निशाना बनाया गया था.
‘‘इसी दौरान ईरान के मीनाब इलाके में एक प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ, जिस में 165 मासूम लड़कियों की जान चली गई. इसे इस संघर्ष की अब तक की सब से बड़ी त्रासदी माना गया.
‘‘इसी दौरान ईरान के अंदर से 2 अलग तसवीरें सामने आईं. खामेनेई की मौत ने देश के लोगों को 2 हिस्सों में बांट दिया था. तेहरान में जहां लोग काले कपड़े पहन कर मातम मना रहे थे, वहीं करज में लोग अपनी गाडि़यां ले कर सड़कों पर उतर आए थे और हौर्न बजा कर अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे.
‘‘जंग के तीसरे दिन तक यह लड़ाई सिर्फ 2-3 देशों के बीच नहीं रह गई थी, बल्कि धीरेधीरे इस में कुल
12 देश शामिल हो चुके थे. जैसेजैसे समय बीत रहा था, युद्ध का
मैदान और बड़ा होता जा रहा था. लेबनान के संगठन हिज्बुल्लाह ने मोरचा खोलते हुए इजराइल पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागनी शुरू कर दीं.
‘‘इजराइल ने भी इस का करारा जवाब दिया और बेरूत पर भीषण हवाई हमले किए, जिस में 31 लोगों की जान चली गई. तनाव इतना बढ़ गया कि पूरे मिडिल ईस्ट में सिर्फ धुएं का गुबार और सायरन की आवाजें सुनाई दे रही थीं.
‘‘इसी बीच ईरान ने सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी को निशाना बनाया. इस हमले का मकसद साफ था दुनियाभर की ऊर्जा आपूर्ति को संकट में डालना. इसी अफरातफरी और भारी तनाव के बीच कुवैत से भी एक बड़ी खबर आई, जहां अमेरिका के 3 लड़ाकू विमान तकनीकी खराबी या आपसी टक्कर की वजह से क्रैश हो गए. अमेरिकी प्रशासन ने बाद में इसे ‘फ्रैंडली फायर’
यानी अपनी ही चूक से हुआ हादसा करार दिया.’’
‘‘क्या नाम दिया है ‘फ्रैंडली फायर’. शब्दों से खेलना तो कोई सियासी लोगों से सीखे. इन के
लिए लोगों का आग में ?ालस कर मर जाना भी ‘फायर ‘फ्रैंडली’ है,’’ अनामिका बोली.
‘‘अगर आगे के युद्ध की बात करें तो ईरान ने स्ट्रेट औफ होर्मुज को पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया. आप को बता दें कि यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का तकरीबन 20 फीसदी तेल गुजरता है.
‘‘ईरान के इस फैसले ने इंटरनैशनल बाजार में खलबली मचा दी और कच्चे तेल की कीमतों को ले कर हर तरफ हाहाकार मच गया. ईरान यहीं नहीं रुका, उस ने रियाद और कुवैत में मौजूद अमेरिकी दूतावासों पर ड्रोन से हमले कर दिए, जिस से वहां कामकाज पूरी तरह ठप हो गया और डिप्लोमैटिक हलकों में सन्नाटा पसर गया.
‘‘इधर, युद्ध के मैदान में इजराइल ने अपनी नई और घातक तकनीक ‘आयरन बीम’ का पहली बार इस्तेमाल किया. यह एक आधुनिक लेजर डिफैंस सिस्टम है, जिस ने हिज्बुल्लाह की तरफ से दागे गए रौकेटों को पलक ?ापकते ही हवा में जला कर राख कर दिया.
‘‘वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया कि फिलहाल किसी भी तरह के सम?ाते या युद्धविराम की कोई गुंजाइश नहीं है.
‘‘ट्रंप ने चेतावनी दी कि यह जंग अभी थमने वाली नहीं है और यह 5 हफ्ते से भी ज्यादा खिंच सकती है. भारत जैसे देशों के लिए यह खबर किसी बड़े ?ाटके से कम नहीं थी, क्योंकि खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई रुकने का सीधा मतलब था देश में पैट्रोल और डीजल के दामों का आसमान पर पहुंच जाना.
‘‘फिर तो युद्ध का दायरा सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हिंद महासागर और यूरोप की दहलीज तक जा पहुंचा. युद्ध में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब तुर्की की ओर बढ़ रही एक ईरानी मिसाइल को नाटो के एयर डिफैंस सिस्टम ने बीच हवा में ही मार गिराया. नाटो के इस सीधे दखल ने पूरी दुनिया को चौंका दिया और यह साफ कर दिया कि अब यह जंग और भी बड़े लैवल पर फैल सकती है.
‘‘उधर, हिंद महासागर के गहरे पानी में एक और खौफनाक मंजर देखने को मिला. यहां एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के शक्तिशाली युद्धपोत ‘आईआरआईएस डेना’ को टारपीडो से निशाना बनाया और उसे समंदर में डुबो दिया.
‘‘सब से दुखद बात यह रही कि यह ईरानी जहाज भारत में एक नौसैनिक अभ्यास पूरा कर के वापस लौट रहा था. इस अचानक हुए हमले में 87 ईरानी नाविकों की जान चली गई, जिस से हड़कंप मच गया.
‘‘इधर, इजराइली वायु सेना ने भी अपने तेवर और कड़े कर लिए. हालात इतने बिगड़ते देख, कई यूरोपीय देशों ने अपनी सुरक्षा को ले कर अपनी सेनाएं और जंगी जहाज मिडिल ईस्ट की ओर रवाना करना शुरू कर दिए. माहौल ऐसा बन चुका था कि पूरा इलाका मानो एक बारूद के ढेर पर बैठा हो, बस एक छोटी सी चिनगारी ही इसे पूरी तबाही में बदलने के लिए काफी थी.
‘‘इस के बाद इस महाजंग की आग अजरबैजान तक भी पहुंच गई. वहां के एक हवाईअड्डे पर हुए ड्रोन हमले में 4 लोग घायल हो गए, जिस से काकेशस क्षेत्र में भी तनाव चरम पर पहुंच गया.
स्ट्रेट औफ होर्मुज बंद होने का असर भी अब साफ दिखने लगा था, जिस के चलते समंदर में तेल टैंकरों की आवाजाही 90 फीसदी तक गिर गई थी. इस का नतीजा यह हुआ कि इंटरनैशनल बाजार में कच्चे तेल के दाम बेकाबू होने लगे और पूरी दुनिया में महंगाई का डर सताने लगा.
‘‘लेकिन तभी सब से बड़ी खबर आई वाशिंगटन से, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथियार बनाने वाली बड़ी कंपनियों के साथ मीटिंग की और ईरान को खुली चेतावनी दे दी. ट्रंप ने दो टूक कहा, ‘अब ईरान के साथ कोई बातचीत या नई डील नहीं होगी. अगर बचना है, तो बिना शर्त सरैंडर करना होगा’. उन्होंने यह भी कहा कि वे ईरान की अर्थव्यवस्था को सुधार देंगे, लेकिन पहले उसे घुटने टेकने होंगे,’’ विजय ने अपनी बात पूरी की.
‘‘तुम ने एक बात और नोटिस की?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘क्या?’’ विजय ने थोड़ा हैरान हो कर कहा.
‘‘इस युद्ध में सोशल मीडिया ने भी बहुत अड़ंगा लगाया है. पहले जब युद्ध होते थे तो उन से जुड़ी प्रैस रिलीज में गंभीरता से सारी बात लिखी होती थी और भाषा भी बड़ी सधी हुई होती थी. लेकिन अब जब से ‘एक्स’ या दूसरे सोशल मीडिया हैंडल पर बड़ेबड़े
नेताओं के बयान आते हैं, तो वे
भड़काऊ या बचकाने ज्यादा लगते हैं,’’ अनामिका बोली.
‘‘जैसे?’’ विजय ने पूछा.
‘‘यह युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने
सोशल मीडिया (ट्रुथ सोशल) पर ईरान के खिलाफ आक्रामक बयान दिए थे, जिस में उन्होंने ईरान से ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ की मांग की थी.‘‘उन्होंने दावा किया था कि ईरान की सैन्य क्षमता नष्ट हो चुकी है और वे ईरानी जनता को शासन बदलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, साथ ही किसी भी हमले की हालत में विनाशकारी नतीजे की चेतावनी दी थी.
‘‘यह बयान अपनेआप में बड़ा विनाशकारी बना और आज नतीजा देख लो कि कितने देश बिना किसी वजह के युद्ध की आग में ?ांक दिए गए हैं. मैं तो इजराइल, अमेरिका और ईरान तीनों को अपने गांव के रंगदारों जैसा ही गुंडा मानती हूं, जो अपने फायदे के लिए दूसरे का नुकसान करने से भी बाज नहीं आते हैं,’’ अनामिका बोली. ‘‘तुम्हारी बात में दम है. सोशल मीडिया ने हमें शब्दों और विचारों से पंगु बना दिया है. चार लाइनें लिख दो, बस हो गया काम खत्म. पढ़ने और लिखने की तो जैसे आदत ही नहीं रही है. यह ट्रैंड नई पीढ़ी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. इमोशनल हो कर सोशल मीडिया पर कुछ भी लिख दो, फिर भुगतो ट्रोल सेना को.
‘‘मुझे लगता है कि इन तीनों देशों के लोग पढ़नेलिखने से ज्यादा सोशल मीडिया पर यकीन करते हैं. एक्स हैंडल तो जैसे दिल का गुबार निकालने का औजार बन गया है.
‘‘तुम्हें याद होगी भारत की आजादी की लड़ाई और महात्मा गांधी के वे लेख जो ‘नवजीवन’ और ‘हरिजन’ अखबारों में लिखे जाते थे. ज्यादातर तो गुजराती भाषा में होते थे. बाद में उन के अनुवाद दूसरी भाषाओं में और अखबारों में छपते थे.
‘‘ऐसे लेखों में विचार बड़े संतुलित होते थे, शब्द बड़े मारक होते थे, जनता के हित लिए होते थे, पर आज सोशल मीडिया पर किसी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता. हर कोई कुछ भी लिख मारता है, चाहे काम का हो नहीं,’’ विजय ने अपनी भड़ास निकाली.
‘‘तुम सही कह रहे हो. लोगों को खुद समझना होगा कि सोशल मीडिया उन की लिखने की ताकत की हत्या कर रहा है… चलो, देखते हैं कि यह युद्ध का ऊंट किस करवट बैठेगा. उम्मीद है कि यह लड़ाई जल्दी खत्म हो और इन तीनों रंगदारों से दुनिया को नजात मिले,’’ अनामिका बोली.
‘‘तुम अपने पापा को कहो कि कारोबार का जो भी नुकसान हुआ है, उसे भूल जाएं और वहां के रंगदारों से बातचीत कर के बीच का कोई रास्ता निकालें, क्योंकि इस तरह की दुश्मनी से कुछ हासिल नहीं होगा,’’ विजय ने अपनी राय दी.
‘‘मैं जरूर करूंगी पापा से बात,’’ अनामिका ने अनमने मन से कहा.औनलाइन सट्टे में मिली हार, परिवार पर किया जानलेवा वार मुनचुन नाम का एक शख्स अपने परिवार के साथ दिल्ली में समयपुर बादली में सिरसपुर के चंदन पार्क में किराए के मकान पर रहता था.
उसे सट्टेबाजी की बुरी लत लग गई थी. वह पैसा कमाता और सट्टेबाजी में गंवा देता था. गंवाया हुआ पैसा वापस पाने के लिए उस ने कर्ज ले कर सट्टा लगाया, लेकिन वे भी पैसे डूब गए. वह पूरी तरह से कर्ज में डूब गया था. फिर उस ने एक कांड कर दिया. पुलिस ने उसे पकड़ा तो अपने कुबूलनामे में उस ने बताया कि वह क्रिकेट में सट्टा लगाता था. अचानक उस के पास एक फोन आया, जिस के बाद उस ने अपनी और अपने परिवार की जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया. बाजार से कटहल काटने के नाम पर 90 रुपए का चाकू खरीद कर लाया और पत्नी समेत 3 बेटियों का गला काट कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया. आरोपी का कहना है कि वह खुद भी खुदकुशी करना चाहता था, लेकिन कर नहीं सका.
हरियाणा में महिला के नाम पर गाड़ी लेने से मिलेगी छूट हरियाणा सरकार ने बजट 2026-27 में दी गई राहतों के तहत एक घोषणा यह भी की है कि अगर कोई परिवार अपनी पत्नी, बेटी या मां के नाम पर गैरपरिवहन (निजी उपयोग) गाड़ी रजिस्टर करवाता है, तो मोटर वाहन टैक्स में एक फीसदी की छूट मिलेगी. यह लाभ कार, स्कूटर या दूसरे निजी वाहनों पर लागू होगा. इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के नाम पर संपत्ति बढ़ाना और उन की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करना है.




