Hindi Story: जातियों को कंट्रोल करने के लिए मांगलिक दोष का डर बिहार के एक छोटे से कसबे में रहने वाली सविता शर्मा पढ़ीलिखी थी. वह नौकरी करती थी और अपने परिवार का सहारा भी थी. उस के लिए शादी के लिए रिश्ते आते थे, बातचीत होती थी, लड़का और लड़की एकदूसरे को पसंद भी कर लेते थे, लेकिन जैसे ही कुंडली मिलाई जाती, एक शब्द पूरे रिश्ते पर भारी पड़ जाता कि लड़कीमांगलिकहै.
इस के बाद सवाल होते, बातचीत. यह पूछा जाता कि सविता कैसी इनसान है. यह कि वह अच्छे जीवनसाथी के तौर पर कितनी जिम्मेदार साबित हो सकती है. बस, इतना कहा जाता कि हम अपने बेटे की जान खतरे में नहीं डाल सकते.

सविता शर्मा हर बार चुपचाप सुन लेती. धीरेधीरे उसे खुद पर शक होने लगा कि क्या सच में वह किसी की जिंदगी के लिए खतरा है? क्या उस के जन्म के समय मंगल ग्रह की किसी स्थिति ने उसे दोषी बना दिया है?
यह कहानी किसी एक सविता शर्मा की नहीं है, बल्कि उन लाखों लड़कियों और लड़कों की है, जिन की जिंदगी पर मांगलिक दोष नाम का एक अनदेखा लेकिन जालिम ठप्पा लगा दिया गया है खासकर ऊंची जातियों में, जिन में अमूमन कुंडली मिलान करने के बाद ही शादी तय होती है. बिना किसी अपराध, बिना किसी सुबूत, सिर्फ एक ज्योतिषीय सोच की बुनियाद पर. यहीं से शुरू होते हैं वे सवाल, जिन्हें पूछने से हमारा समाज आज भी डरता है.

मांगलिक दोष है कितना सच भारतीय समाज में शादी होने केवल 2 लोगों का निजी संबंध नहीं माना जाता, बल्कि उसे परिवार, परंपरा, धर्मजाति, कुलगोत्र और ग्रहनक्षत्रों से जोड़ कर देखा जाता है. इसी सिलसिले में मांगलिक दोष एक ऐसा शब्द बन चुका है, जिस ने असंख्य युवाओं, खासकर महिलाओं के जीवन में भय, अपमान, मानसिक यातना और अस्वीकार की दीवारें खड़ी की हैं. यह दोष केवल विवाह को कठिन बनाता है, बल्कि प्रेम, समानता और व्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे आधुनिक मूल्यों पर भी सीधा प्रहार करता है.
मांगलिक दोष के नाम पर आज भी भारत में रिश्ते टूटते हैं, लड़कियों को अशुभ कहा जाता है, लड़कों को डराया जाता है और परिवारों को मानसिक गुलामी में जकड़ दिया जाता है.

सवाल यह नहीं है कि ज्योतिष में मंगल ग्रह का क्या स्थान है? सवाल यह भी है कि क्या किसी ग्रह की कथित स्थिति के आधार पर किसी मनुष्य के पूरे जीवन को अभिशप्त घोषित कर देना नैतिक, वैज्ञानिक और मानवीय है? मांगलिक दोष क्या है, इस संबंध में पंडित वाचस्पति ने बताया कि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह कुछ विशेष भावों पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो उसे मांगलिक कहा जाता है. यह मान लिया जाता है कि ऐसा व्यक्ति विवाह के लिए अशुभ होता है और उस के जीवनसाथी को कष्ट, बीमारी या मृत्यु तक का सामना करना पड़ सकता है.

यहीं से समस्या शुरू होती है. बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण के, एक अनुमान को सामाजिक सत्य बना दिया गया. यह मान्यता पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रही और धीरेधीरे यह भय, अफवाह और सामाजिक दबाव का औजार बन गई. विज्ञान बनाम ज्योतिष आज का युग विज्ञान, तर्क और प्रमाण का युग है. खगोल विज्ञान और ज्योतिष में बुनियादी अंतर है. खगोल विज्ञान ग्रहों की गति, दूरी और भौतिक गुणों का अध्ययन करता है, जबकि ज्योतिष उन ग्रहों को मनुष्य के भाग्य से जोड़ देता है, बिना किसी ठोस वैज्ञानिक आधार के.
अब तक दुनिया में ऐसी कोई वैज्ञानिक स्टडी नहीं हुई है जो यह साबित करे कि मंगल ग्रह की स्थिति शादी, मौत, बीमारी या शादी से जुड़े ?ागड़े की वजह बनती है. अगर मंगल ग्रह सच में इतना असरदार होता, तो एक ही दिन जनमे लाखों लोगों की जिंदगी एक सी होती, लेकिन हकीकत इस से ठीक उलट है.

सफल और असफल विवाह, सुख और दुख, बीमारी और सेहत, ये सब सामाजिक, माली, दिमागी और बायोलोजिकल वजह से जुड़े होते हैं, कि किसी ग्रह की काल्पनिक स्थिति से. मांगलिक दोष के सब से बड़े शिकार भारतीय समाज में मांगलिक दोष का सब से खतरनाक असर लड़कियों पर पड़ता है. मांगलिक लड़की को अकसर मनहूस, अशुभ, खतरनाक जैसे शब्दों से नवाजा जाता है. उस की कुंडली उस के किरदार, उस की तालीम, उस की काबिलीयत से बड़ी मान ली जाती है. कई परिवारों में मांगलिक लड़की की शादी देर से होती है या उसे जबरन किसी ऐसे लड़के से ब्याह दिया जाता है, जिसे भी मांगलिक बताया गया हो. चाहे उन दोनों की सोच, पढ़ाईलिखाई या जिंदगी को सम?ाने के नजरिए में कोई तालमेल हो.ऐसे हालात में लड़की की नई सोच और आत्मसम्मान पर सीधा हमला होता है. उसे यह भरोसा दिला दिया जाता है कि वह अपने जीवनसाथी के लिए खतरा है. यह मानसिक हिंसा का एक गहरा और अनदेखा रूप है.

दिमागी सेहत पर असर
मांगलिक दोष के डर से पीडि़त नौजवान डिप्रैशन और चिंता का शिकार हो जाते हैं. कई लड़कियां यह मानने लगती हैं कि वे अपने पति की मौत की वजह बन सकती हैं. यह सोच उन के आत्मविश्वास को तोड़ देती है और जिंदगी को बो? बना देती है. कुछ मामलों में मांगलिक होने का ठप्पा खुदकुशी जैसे खतरनाक कदमों तक ले गया है. सवाल यह है कि क्या एक अप्रमाणित सोच किसी की जान से ज्यादा कीमती है?

धार्मिकता या सामाजिक कंट्रोल
अकसर मांगलिक दोष को धर्म से जोड़ कर उसे सवालों से परे रखा जाता है, लेकिन सच यह है कि यह धार्मिक आस्था से ज्यादा सामाजिक कंट्रोल का उपकरण बन चुका है. ब्याह के बाजार में यह दोष सौदेबाजी का हथियार बन जाता हैदहेज बढ़ाने, लड़की को नीचा दिखाने या रिश्ते तोड़ने के लिए.
मांगलिक दोष और पाखंड सब से बड़ा विरोधाभास यह है कि मांगलिक दोष को उपायों से खत्म किया जा सकता है.
ज्योतिषी द्वारा यह बताया जाता है कि मांगलिक लड़कियों का ग्रह से छुटकारा पाने के लिए पेड़ या मूर्ति से ब्याह पहले किया जाता है, खास तरह का पूजापाठ कराया जाता है. पर अगर कोई दोष इतना घातक है कि वह मौत तक करा सकता है, तो वह किसी पेड़ या मूर्ति से शादी कर के कैसे खत्म हो सकता है? यह साफ करता है कि मांगलिक दोष एक डर पैदा करने वाला सिद्धांत है, जिसे बाद में आर्थिक और धार्मिक पाखंड से जोड़ा गया.

कानून का नजरिया
भारतीय संविधान लोगों की बराबरी, इज्जत और आजादी की गारंटी देता है. किसी इनसान को ग्रहों की बुनियाद पर भेदभाव का शिकार बनाना, उस की शादी के हक को सीमित करना या मानसिक पीड़ा देना, संवैधानिक वैल्यू के खिलाफ है. हालांकि, कानून सीधे मांगलिक दोष को नहीं पहचानता, लेकिन इस के चलते होने वाला भेदभाव, दहेज, मानसिक हिंसा और सामाजिक बहिष्कार कानूनन अपराध की श्रेणी में सकते हैं.
तालीम और वैज्ञानिक सोच का रोल मांगलिक दोष जैसे अंधविश्वासों के खिलाफ सब से बड़ा हथियार पढ़ाईलिखाई है. वैज्ञानिक सोच, तर्कभरी बातें और सवाल करने की आदत समाज को इस डर से दूर कर सकती हैं. आज जरूरी है कि स्कूलकालेजों और सामाजिक मंचों पर यह चर्चा खुले रूप में हो कि शादी की बुनियाद ग्रह नहीं, बल्कि आपसी सम?, इज्जत और जिम्मेदारी होनी चाहिए.

नई पीढ़ी और बदलाव की उम्मीद
अच्छा संकेत यह है कि शहरी और पढ़ेलिखे नौजवानों में मांगलिक दोष की पकड़ कमजोर पड़ रही है. प्रेम विवाह, अंतर्जातीय विवाह और बराबरी की बुनियाद पर खड़े रिश्ते इस अंधविश्वास को चुनौती दे रहे हैं.
लेकिन यह बदलाव अभी अधूरा है. गांवदेहात के इलाकों और पारंपरिक परिवारों में आज भी यह डर गहराई से मौजूद है, इसलिए लड़ाई लंबी है, लेकिन लड़नी जरूरी है.

मांगलिक दोष के विरोध का मतलब
मांगलिक दोष का विरोध केवल ज्योतिष का विरोध नहीं है, बल्कि यह विरोध है मर्द और औरत की बराबरी के पक्ष में, वैज्ञानिक सोच के समर्थन में, मानसिक आजादी के लिए, शादी को इनसानी संबंध मानने के लिए, कि यह ग्रहों का खेल है. यह विरोध उस सिस्टम के खिलाफ है, जो डर पैदा कर के लोगों को कंट्रोल करता है, उन्हें बुजदिल बनाता है. ग्रह नहीं, इनसान जिम्मेदार हैं,
किसी भी शादी की कामयाबी या नाकामी की वजह कोई ग्रह नहीं, बल्कि इनसान होते हैं. उन की सोच, उन का बरताव, उन के हालात होते हैं. जब हम यह जिम्मेदारी ग्रहों पर डाल देते हैं, तो हम खुद से भागते हैं.
मांगलिक दोष जैसा अंधविश्वास एक सामाजिक भरम है, जिसे मिटाना बहुत ज्यादा जरूरी है. यह केवल लोगों की निजी आजादी का सवाल है, बल्कि एक ज्यादा बेहतर समाज बनाने की शर्त भी है.
जब तक हम यह नहीं सम?ोंगे कि इनसान का भविष्य किसी ग्रह की स्थिति से नहीं, बल्कि उस के काम, फीलिंग्स और सामाजिक ढांचे से बनता है, तब तक मांगलिक दोष जैसे अंधविश्वास हमारी जिंदगी पर ग्रहण बन कर छाए रहेंगे. अब समय गया है कि हम उस ग्रहण को हटाएं.                      

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