Reader Problem: मैं 28 साल की लड़की हूं और उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहती हूं. मेरा छोटा भाई मोबाइल फोन पर इतना ज्यादा समय बिताता है और रील बनाता है कि हम सब उस से परेशान हो गए हैं. उस की उम्र अभी 24 साल है और वह यही राग गाता है कि रील बना कर पैसे कमाएगा.


इस चक्कर में वह एक दिन अपना मोबाइल फोन ले कर पेड़ पर चढ़ गया और मधुमक्खी का छत्ता छेड़ दिया. इस के बाद मधुमक्खियों ने उस का इतना बुरा हाल किया कि वह पेड़ से नीचे जा गिरा. मोबाइल फोन टूटा, सो अलग. पर इस बात से भी उस ने कोई सबक नहीं लिया. उस के दोस्त भी ऐसे ही हैं. रील बनाने में ऊटपटांग हरकतें करते हैं और अपनी जिंदगी बरबाद कर रहे हैं. मुझे ऐसा क्या करना चाहिए कि मेरे भाई को अक्ल जाए?


अब आप के भाई का सुधरना मुश्किल है, क्योंकि रील बनाने का नशा किसी ड्रग के नशे से कम नहीं होता. फिर भी ये उपाय आजमा कर देखें, शायद कुछ बात बने:
* उसे रील बनाने से रोकने के लिए सख्ती करें और ही डांटेपीटें. इस से वह या कोई सुधरता होता तो दुनिया से यह रोग कभी का खत्म हो जाता.
* उस की बनाई रील्स में दिलचस्पी लें. उस से पूछें कि यह रील बनाने का उस का मकसद क्या था और दर्शकों को इस से क्या मिलेगा.
* उसे रील बनाने के लिए कुछ आइडिया दें, जिन में ज्यादा मेहनत
लगनी हो.
* उसे समझाएं कि फिल्मों की तरह एक अच्छी रील बनाने से पहले उस की स्क्रिप्ट लिखें तो रील में जान जाएगी. इस से उस में लिखने का शौक पैदा होगा.
* कुछ दिन यह सब करने के बाद उस की रील्स की तारीफ करते हुए उसे बताएं कि रील बनाना कोई हर्ज की बात नहीं, लेकिन इस का टाइम फिक्स होना चाहिए. इस से आदत कम हो सकती है. फिर उसे समझाएं कि रील बनाने से जिंदगी नहीं चलती. इस से सिवा समय और पैसे की बरबादी के कुछ हासिल नहीं होता.
  
मेरी उम्र 37 साल है. मैं कानपुर की एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं. चूंकि मैं मूल रूप से दक्षिण भारत का रहने वाला हूं, तो मुझे कानपुर वालों की एक बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती कि ज्यादातर लोग पान
और पान मसाले का सेवन करते हैं और सड़क पर ही थूक देते हैं.
सरकारी दफ्तरों के आसपास भी पान की पीक के लाल निशान देखे जा सकते हैं.
प्रशासन ने इस पर जुर्माना भी तय किया हुआ है, पर लोग मानते ही नहीं हैं. ऐसा लगता है कि पूरा कानपुर ही पानमसाले से लाल हो गया है.
इस सब के चलते मुझे रात को नींद नहीं आती है और मैं तनाव में रहता हूं. मैं क्या करूं?
पान गुटखा खा कर कहीं भी पीक थूकना कानपुर का जैसे कल्चर है. इसे बदल पाना मुश्किल है. अकेले आप तो कुछ नहीं कर सकते, लेकिन अपने दफ्तर घर के आसपास के लोगों को समझा सकते हैं.
इन दिनों स्वच्छता अभियान का बड़ा जोर है. अपने लैवल पर इस का प्रचार करें और सोशल मीडिया पर मुहिम चलाएं कि हम कानपुर वाले स्वच्छता
के मामले में इंदौर को पीछे क्यों नहीं छोड़ सकते.
कानपुर पान मसाला, खैनी बनाने का भी गढ़ है, इसलिए भी वहां के लोग यहांवहांपिचपिचकरते रहते हैं और इस पर उन्हें शर्म नहीं आती, बल्कि गर्व होता है.
तो आप इस आदत पर मन ही मन लानत भेजते रहिए और दूसरों के किए गए तनाव को मत पालिए. इस पर भी तनाव कम हो, तो किसी दूसरे शहर में ट्रांसफर करवा लीजिए.          


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नंबर : 08826099608  

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