Hindi Story: अजय वर्मा ने अपना रेलवे टिकट का रिफंड मांगने का औनलाइन तरीका अपनाया और एक अनजान नंबर से आए लिंक पर क्लिक कर दिया. उस के बाद शुरू हुआ एक ऐसा खेल जो उन पर भारी पड़ा. क्या था माजरा?

मे  रा नाम अजय वर्मा है और मेरा रेलवे का टिकट रद्द किए हुए पूरा एक महीना बीत चुका था, लेकिन 12,850 रुपए का रिफंड अभी तक मेरे खाते में नहीं आया था. थकहार कर मैं ने रेलवे को एक ट्वीट कर दिया. उम्मीद थी कि एक हफ्ते में जवाब मिल जाएगा, पर जो हुआ, वह उम्मीद से तेज और अचरज से भरा हुआ था.


शिकायत डालने के कुछ ही मिनट बाद इनबौक्स में संदेश गया. प्रोफाइल पर रेलवे का लोगो था और संदेश जैन्युइन लग रहा था. संदेश बहुत भरोसेमंद अंदाज में लिखा हुआ था, ‘प्रिय ग्राहक, आप की शिकायत प्राप्त हुई. कृपया अपना संपर्क नंबर भेजें, ताकि तत्काल रिफंड प्रोसैस शुरू किया जा सके.’
दिल में एक उम्मीद जगी. मन में एक सवाल कौंध गया. क्या वाकई अब सरकारी तंत्र इतना तेज हो गया है?


मैं ने बिना देरी किए उसे अपना फोन नंबर भेज दिया. यह मेरी पहली और सब से बड़ी गलती थी.
कुछ ही पलों में मु? फोन गया. सामने एक आत्मविश्वासी आवाज थी, ‘सर, मैं रेलवे रिफंड सैल से बोल रहा हूं.’ उस आदमी की भाषा और लहजा बिलकुल आधिकारिक लग रहे थे. उस ने पूछा, ‘टिकट कहां से बुक किया था आप ने?’’


मैं ने अपने बैंक का नाम बताया और कहा, ‘‘इस के ईमोबाइल ऐप से.’’ उस ने कहा, ‘ठीक है सर, आप के अकाउंट को कन्फर्म करना होगा. कृपया अपना यूजरनेम बताएं.’ यहीं मु? थोड़ा शक हुआ. मैं ने फोन होल्ड कर अपने बेटे से पूछा, ‘‘यूजरनेम मांग रहा है. बता दूं क्या?’’ बेटा बोला, ‘‘दे दो पापा, इस में कोई दिक्कत नहीं है.’’


और हम ने उसे अपना यूजर नेम दे दिया. यह मेरी दूसरी गलती थी. अब वह आदमी सीधा मेरे बेटे से बात करने लगा, क्योंकि उसे लगा कि यह स्मार्ट तरीके से जवाब करेगा. उस आदमी ने कहा, ‘अभी एक लिंक भेज रहा हूं. अपना ईमोबाइल ऐप खोल कर लिंक पर क्लिक कर दीजिए. आप की रकम 12,850 रुपए आप के खाते में जाएंगे.’ कुछ ही सैकंड में उस आदमी का भेजा गया एक लिंक आया और हम ने क्लिक भी कर दिया, बिना पढ़े, बिना सोचे. वह लिंकपेमेंट रिक्वैस्टका था. यहीं से शुरू हुआ असली खेल.
जल्दी कीजिए सर,’ वह आदमी लगातार दबाव बना रहा था.


घबराहट में हम ने सबमिट बटन दबा दिया और तुरंत मैसेज आया, ‘12,850 रुपए आप के खाते से डैबिट किए गए.’ मैं दंग रह गया, ‘‘अरे, हमारे पैसे कैसे कट गए?’’ सामने से आवाज आई, ‘नो प्रौब्लम सर, यह सिर्फ डमी ट्रांजैक्शन है. अभी नया लिंक भेजता हूं, उस से आप को रिफंड जाएगा.’ और हम ने वही गलती दोहराई, एक बार 2 बार कुल 5 बार. अब हमारे खाते से 64,250 रुपए निकल चुके थे. जब उस ने छठी बार 10,000 रुपए का नया लिंक भेजा, बेटे ने कांपती आवाज में पूछा, ‘‘बारबार पैसे कट रहे हैं पापा, रिफंड क्यों नहीं रहा?’’


फोन पर आदमी झल्ला गया, ‘सर, यह कन्फर्मेशन है. फास्ट करिए.’ बेटे ने बैंक ऐप खोला और उस ने देखा तो पता चला पूरे 64,250 रुपए हमारे खाते से निकल चुके थे. हम ने उसे एक भद्दी सी गाली दी और उस ने तुरंत फोन काट दियाअब हम ने बैंक की हैल्पलाइन से बात की. जवाब मिला, ‘यह फिशिंग फ्रौड है. तुरंत साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज करें.’ मेरा मन बहुत बो?िल हो गया था. मरता क्या करता. 2 घंटे में हम ने एफआईआर से ले कर औनलाइन शिकायत तक सबकुछ पूरा किया.


लेकिन अगले ही दिन सुबह एक चमत्कार हुआ. फोन खोला तो देखा पूरर 64,250 रुपए वापस मेरे खाते में जमा हो गए थे. खुशी के आंसू गए. पहली बार लगा कि सरकारी विज्ञापन सच बोलते हैं, ‘तुरंत शिकायत करो, पूरा पैसा वापस मिल जाएगा.’ एक महीना बीत गया. जिंदगी धीरेधीरे सामान्य हो चली थी, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. बैंक से फिर हमें 4 एसएमएस मिले. चैक किया तो पता चला कि कुल 5 में से 4 रिफंड वापस ले लिए गए थे. मतलब 51,400 रुपए फिर से काट लिए गए थे.


मैं ने घबरा कर बैंक को फोन लगाया. जवाब मिला, ‘सर, हम ने रिफंड की पुष्टि के लिए आप को फोन किया था. आप ने रिसीव नहीं किया, इसलिए रकम वापस डैबिट हो गई है.’ मेरे पैरों तले की जमीन खिसक गई. ठगी से बचने के डर ने मु? अनजान फोन उठाने नहीं दिया और अब उसीसतर्कताकी सजा मिल गई थी. हम ने बैंकिंग लोकपाल में शिकायत की. एक महीने बाद जवाब आया, ‘आप की शिकायत निराधार है.’


सरकारी तंत्र ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के नाम पर बस औपचारिकता कर दी थी. उस दिन सम? में आया कि खतरा सिर्फ ठगों से नहीं, खतरा उस व्यवस्था से भी है, जो जनता से जागरूकता की उम्मीद तो करती है, पर खुद कभी संवेदनशीलता नहीं दिखाती. अब मु? एक ही बात सम? में रही थी, वह यह थी कि सावधानी कोई औप्शन नहीं, बल्कि आज की पहली जरूरत है. एक गलत क्लिक हमारी सारी सिक्योरिटी में सेंध लगा सकता है. किसी तंत्र, संस्था या नियम से पहले अपनी सोच पर भरोसा करना ही सब से बड़ा कवच है.    Hindi Story                     

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