Hindi Story: ‘‘  री छमिया, री कहां रह गई. चल, जल्दीजल्दी चल. सब से पहले हमें पहुंचना है. तेरे भाई को मैं ने पहले ही भेज दिया, ताकि वह हमारी जगह रोक कर रखे.’’ ‘‘आई भाभी आई, कोई ढंग का कपड़ालत्ता नहीं मिल रिहा था. फटाफट  दर्जी से यह लहंगा बनवाने लग गई थी. इसी खातिर देर हो गई,’’ छमिया ने कहा.


जैसे ही छमिया लहंगा पहन कर झोपड़े से बाहर निकली, उस की मुंहबोली भाभी बस्ती के मांगेलाल की बहू लाजो बिना पलकें ? झपकाए उसे ही देखे जा रही थी. मानो उस ने कोई अजूबा देख लिया हो.
‘‘भाभी, चालो अब, यह मुझे मुझे टुकुरटुकुर क्या देख रही हो?’’ ‘‘वाह छोरी, मैं ने तो पहचाना ही नहीं, एकदम परी लग रही है आज तोध्यान से रहना वहां, कहीं कोई शहरी बाबू दिल दे बैठे .’’


‘‘क्या भाभी, तुम भी …’’ छमिया ने ऐसा कहते हुए शरमा कर नजरें झुका लीं. झॉ दोनों  उस तरफ चल पड़ीं, जिधर आज बहुत बड़ा पंडाल बना हुआ था. मुफ्त में खाना बंटने वाला था. खाने के साथ हर ?  झोपड़पट्टी वाले को 1-1 कंबल मुफ्त में दिया जाएगा. ऐसी घोषणा 2 दिन पहले हुई थी. कोई नेता रहे थे नारी उद्धार का बीड़ा उठाने. इस बस्ती में वे नारी उद्धार कर के रहेंगे. अब कोई नारी किसी भी वजह से दुखी नहीं रहेगी, इसलिए बस्ती के सभी लोगों को उस पंडाल में जमा होने को कहा गया था. सभी अपनीअपनी फरियाद ले कर पहुंचें, सभी की समस्याओं का हल किया जाएगा. ऐसी अनाउंसमैंट हुई थी.


लाजो और छमिया दोनों को जातेजाते रास्ते में और भी औरतें मिली थीं. बहुत ज्यादा बड़ी बस्ती तो थी नहीं, लेदे कर 400-500 घर ही होंगे उस बस्ती में. घर भी क्या ?ांपड़पट्टी ही कहो. सभी औरतें रास्ते में अपनीअपनी समस्याओं का जिक्र करती जा रही थीं. कोई कहती कि बस्ती में पानी की समस्या का समाधान होना चाहिए, तो कोई कहती कि बस्ती में एक भी डाक्टर नहींअगर कोई बीमार पड़ जाए तो दवादारू के लिए उसे शहर जाना पड़ता है. कभी किसी की हालत ज्यादा खराब हो तो शहर तक जातेजाते रास्ते में ही उस का राम नाम सत्य हो जाता है.


1-2 बार ऐसा हुआ भी था. बस्ती के नाई घसीटामल को सांस की तकलीफ थी. एक बार तकलीफ इतनी बढ़ी कि सांस लेना दूभर हो रहा था. बस्ती का ?ालाछाप डाक्टर भी कुछ नहीं कर पा रहा था. जितना वह इलाज करता, सांस लेने में और दिक्कत आती, इसलिए शहर के डाक्टर के पास जाने की सलाह दी गई.
लेकिन शहर जाते समय रास्ते में घसीटामल की सांस हमेशा के लिए बंद हो गई. इसी तरह के और भी कई केस हुए थे.


इसी तरह सभी औरतें अपनीअपनी समस्याओं के बारे में बातें करते हुए पंडाल में जा पहुंची थीं. तरहतरह के खाने की खुशबू से पंडाल महक रहा था. खुशबू इतनी शानदार थी कि सब के मुंह में पानी गया.
‘‘ भाई, ये साहब लोग कब तक आएंगे? मेरा तो खाना खाने का जी कर रहा है. इतना खुशबूदार खाना आज तक नहीं देखा है. पता नहीं आज क्याक्या मिलेगा खाने को.’’ ‘‘थम जा भाई, अभी जाएंगे. पहले साहब लोगों को खाने देना, फिर आप जितना जी चाहे खा लेना.’’ ‘‘रे बावले, यह जो खाना हम गरीब लोगों के लिए बनाया है, वह साहब लोग थोड़ी खाएंगे. साहब लोगों का खाना तो स्पैशल बनेगा…’’


थोड़ी ही देर में एक लंबी सी गाड़ी कर रुकी. उस के पीछेपीछे कुछ गाडि़यां और भी थीं. लंबी गाड़ी में से सफेद कुरताधोती पहने, सिर पर सफेद टोपी लगाए एक सज्जन निकले और दनदनाते हुए सीधे उस टैंट में घुस गए, जो खास उन के लिए शहर से आए लोगों ने बनाया था. उन के पीछेपीछे कुछ बस्ती वाले भी, जो अपना चौधरपना दिखाना चाहते थे, दुमछल्ले के जैसे पीछे लग लिए, जैसे वे इन मंत्री के सगे वाले हों.
लेकिन टैंट के पास आते ही नेताजी के चमचों ने उन्हें बाहर ही रोक लिया, मगर टैंट के अंदर की एकालक तो देखने को मिल ही गई.


एक शानदार सोफा और सैंट्रल टेबल पर ताजा फूलों से महकता हुआ गुलदस्ता सजा हुआ था. साथ में फलों से भरी हुई छोटी सी खूबसूरत टोकरी रखी हुई थी. और भी जाने क्याक्या पीने के सामान रखे थे, ये वे मासूम बस्ती वाले क्या जानेंखैर, थोड़ी ही देर में जो खाना यहां बना हुआ था उस की एक थाली अंदर टैंट में ले जाई गई और उस के बाद अनाउंसमैंट हुई, ‘‘बस्ती वालो, जो खाना आप लोगों के लिए बनवाया गया है, वही खाना नेताजी को भी दिया गया है, क्योंकि हमारे आदर्श नेता आप सब को अपना भाईबंधु मानते हैं, इसलिए वे भी आप के साथ ही बैठ कर खाना खाना चाहते थे.


‘‘मगर तबीयत खराब होने की वजह से उन का खाना अंदर ही दे दिया गया है और अब आप सब भी खाना शुरू करें. उस के बाद नेताजी खुद कर आप सब के उद्धार के बारे में चर्चा करेंगे.’’ सभी लोग यह सुनते ही खाने वाले पंडाल की तरफ टूट पड़े. आज जाने कितने सालों बाद इतने लजीज खाने की खुशबू सूंघी है. जैसे ही जनता खाने वाले स्टौल की तरफ लपकी, नेताजी का एक चमचा दौड़ कर नेताजी की कार में से टिफिन बौक्स निकाल लाया. हां, इस बस्ती में एक बंदा ऐसा था, जो थोड़ाबहुत सुनसुना कर टूटीफूटी इंगलिश ?ाड़ता था. उस ने नेताजी के बाशिंदे को टिफिन ले जाते देख करा झट से उसे दबोच लिया, ‘‘क्यों सरजी, बट इज इट…’’

‘‘नथिंग, नथिंग, जस्ट मैडिसन…’’
‘‘हांजीक्या बोले जी? अरे, हम पूछिंग, बट इज दिस…’’
‘‘ओह, इस टिफिन में साहब की दवाएं हैं. खाने के साथ लेनी होती हैं, इसलिए ले जा रहा हूं.’’
‘‘ओके, ओके, गो, गो…’’


आप समझ सकते हैं सबकुछ कि टिफिन में कौन दवाएं रखता है. अरे, नेताजी भला वह खाना खाएंगे जो आम लोगों के लिए लंगर चलवाया था? खैरभोजनपानी हो गया. सब लोग पंडाल में गए. नेताजी भी दांतों मेंसे कुछ फंसा हुआ चिकन का पीस
माचिस की तीली से निकालते हुए पधार रहे हैं. चमचों ने सब को शांत हो कर बैठने को कह दिया. सब लोग शांति से बैठ गए.


जिन के छोटे बच्चे थे, वे थोड़ा शोरशराबा करने लगे, तो नेताजी के चमचों ने फरमान सुनाया कि इन बच्चों को उन के दादादादी पंडाल के पीछे के हिस्से में खेलने के लिए ले जाएं, ताकि वे जवान लोगों को उन के उद्धार का तरीका अच्छे ढंग से सम? सकें. औरतें आगे और मर्द पीछे बैठ गए. नेताजी कि नजरें उद्धार करने लायक चेहरे खोजने लगीं. अब हुआ नेताजी का भाषण शुरू.


नेताजी ने सब की शिकायतें सुनीं और अपने एक चमचे को हुक्म दिया कि कागज पर सब की शिकायतें नोट कर लें, ताकि किसी की भी कोई समस्या रह जाए, जिस का समाधान हो. अब नेताजी ने सब को आश्वासन दिया कि सत्ता में आते ही सब की समस्या का समाधान किया जाएगा और इस बस्ती का उद्धार नेताजी कर के रहेंगे. नेताजी ने एक और बहुत बड़ी बात कह दी कि चाहे वे सत्ता में आएं या आएं, लेकिन इस बस्ती का उद्धार तो वे आज से करना शुरू करेंगे, क्योंकि यह बस्ती उन्हें अपने परिवार की तरह है.


जी हां, सामने छमिया जैसी कई सुंदरियां उन्हें अपनी ही लग रही थीं, इसलिए भाषण के बाद उन के टैंट में उन सुंदरियों की भीड़ लग गई, जिनजिन के नाम ले कर उद्धार के लिए बुलाया गया था. नेताजी उन सब सुंदरियों को शहर में अच्छी नौकरी, अच्छा रहनसहन, अच्छा खानपान और शहरी सलीका सिखाने के लिए साथ ले गए. 2 साल बाद छमिया जैसी सभी वे लड़कियां जिन का उद्धार करने के लिए ले जाया गया था, बस्ती में आईं. सब ने बेशकीमती कपड़े और गहने पहने हुए थे. हाथों में पान की छोटी सी डिबिया जिन में से वे पान निकाल कर मुंह में ठूंस कर इधरउधर पीक फेंक रही थीं. उन के परिवारजनों के पास छोटेछोटे पक्के मकान थे. बिजलीपानी की सुविधा थी.


दूसरे  झांपड़पट्टी वालों ने उद्धार की गुहार लगाई, तो उन्हें बताया गया कि शहर में केवल सुंदरियों को ही काम पर रखा जाता है. उन के द्वारा ही उन के परिवारों का उद्धार हो सकता है और इसलिए वे उद्धार करने के लिए ही दूसरी सुंदरियों को चुनने आई हैं.  Hindi Story 

लेखक प्रेम बजाज

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