नशे से छुटकारा दिलाने के नाम पर देशभर में नशा छुटकारा दुकानेें कुकुरमुत्तों की तरह उगने लगी हैं. दीवारों पर अब पोस्टर, पेंङ्क्षटग, लिखाई दिखने लगी हैं. जिन में नशे से छुटकारा दिलाने के लिए फोन नंबर लिखे होते हैं. नशेडिय़ों के घर वाले घर में नशा करने वाले से इस कदर परेशान रहते हैं कि  वे उन से छुटकारा पाने के लिए इन को मिलते हैं और जैसे भी हो, पैसा दे कर अपने घर के नशेड़ी को ठीक करने के लिए सौंप देते हैं.

अब पता चल रहा है कि इन में से ज्यादातर सिर्फ नीमहकीम होते हैं जिन्हें नशे की वजह और इलाज के बारे में कुछ नहीं मालूम होता और आमतौर पर सिर्फ अपने क्लिनिक को जेल की तरह अपडेट करते हैं जहां नशेड़ी को बांध कर रखा जाता है और उस के चीखनेचिल्लाने के बाद उसे मारपीट कर सुधारा जाता है. इस दौरान नशेड़ी के मातापिता, बेटा या पत्नी आते हैं तो सिर्फ पैसा या खाना देने के लिए.

नशे का इलाज आसान नहीं है क्योंकि इस की लत इस तरह पड़ती है कि नशा न मिलने पर रोगी बुरी तरह तड़पता है, चीखता है, अपने को मारतापीटता है. उस पर उस समय काबू लाना मुश्किल होता है. नशे के व्यापार के फलनेफूलने की वजह ही यह है कि एक बार जिसे नशा अच्छा लगने लगे वह सबकुछ बेचबाच कर नशे के लिए एक और डोज लेेने को तैयार हो जाता है.

नशे के रोगी के एक इसी तरह के क्लिनिक में एक रोगी की बेवजह से मौत हो गई क्योंकि रोगी आप से बाहर हो कर पहलवान किस्म के अटैंडैंटों से लडऩे लगा. पुलिस ने इन अटैंडैंटों को गिरफ्तार किया है पर नशा करने वाले कम होने वाले हैं और न इस तरह धोखा देने वाले क्लिनिक बंद होने वाले हैं. रोगी के घर वालों के लिए ये ज्यादा सुरक्षित होते हैं क्योंकि इन में कम लोग होते हैं और उन की जगहंसाई कम होती है.

नशा करने वाले मानसिक बीमार भी हैं यह अभी भी सभी समझने को तैयार नहीं हैं. ज्यादातर तो पंडितों, ओझाओं, बंगाली बाबाओं की शरण में जाते हैं जहां और ज्यादा मामला खराब किया जाता है और भभूत और दवा में दूसरा नशा मिला कर मरीज को कुछ देर सुला दिया जाता है. रोगी के घर वाले इसे ही इलाज समझ लेते हैं.

नशे का व्यापार हर रोज बढ़ रहा है. नई मादक दवाएं बाजार में आ रही हैं. पानमसाले के जरीए इस की लत आसानी से डाली जा रही है. ड्रग्स अब हर कोने पर मिलने लगी है और सिर्फ एक बार टेस्ट करनेके नाम पर शुरू करने वाले जल्दी ही पक्के नशेड़ी बन कर घर वालों के लिए आफत बन जाते हैं. नशा करने वाली दवाएं शराब से भी ज्यादा खतरनाक हैं पर हर तरफ इन का मिलना आसान होता जा रहा है. पुलिस को इस में मोटा पैसा मिलता है इसलिए वह ऊपरऊपर से ही काम करती है.

इस जंजाल का आसान जवाब नहीं है. ये नीमहकीम वाले दुकानदार तो कतई इलाज नहीं कर सकते पर यही ज्यादातर को मिलेंगे.

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