सरस सलिल विशेष

बौलीवुड के ‘शोमैन’ यानी राज कपूर एक मल्टि टैलेंटेड और बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी थे. भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों में से एक राज कपूर ने अपने काम के ज़रिए आने वाली पीढ़ी को खूब प्रेरित किया है. फिल्म में अभिनय के अलावा वो फिल्मों के निर्माता और निर्देशक भी रह चुके है. बौलीवुड के पहले परिवार की दूसरी पीढ़ी के सदस्य राज कपूर ने क्वालिटी सिनेमा का निर्माण किया था.

आज हम आपको बताने जा रहे है उनकी दस अनसुनी कहानियां जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे.

राज कपूर ने करियर की शुरुआत एक क्लैपर ब्वाय के तौर पर की थी. 1943 में अभिनेता केदार शर्मा जब फिल्म ‘विषकन्या’ के लिए शूटिंग कर रहे थे तब राज कपूर को उनके क्लोज़अप शौट के लिए क्लैप करना था. केदार शौट के लिए नकली दाढ़ी लगाए हुए थे लेकिन राज कपूर ने उनके मुंह के बहुत पास क्लैपबोर्ड ऐसे बजाया कि उनकी दाढ़ी ही निकल गई. शर्मा ने इस गुस्ताखी के लिए पूरी यूनिट के सामने कपूर को एक थप्पड़ जड़ दिया.

राज कपूर ने एक्टिंग की दुनिया में कदम 1935 में फिल्म ‘इंकलाब’ में एक बाल कलाकार के रूप में रखा था. उनको बड़ा ब्रेक 12 वर्षों बाद फिल्म ‘नील कमल’ से मिला जिसमें मधुबाला उनकी सह-अभिनेत्री थीं

‘राज’ तीनों कपूर भाईयों में इस्तेमाल किया जाता है. राज कपूर का पूरा नाम रणबीर राज कपूर है. शम्मी का पूरा नाम शमशेर राज कपूर और शशि का पूरा नाम बलबीर राज कपूर है.

बहुत कम लोग जानते हैं कि राज कपूर संगीत के खूब शौकीन और जानकार थे. उनको संगीत की अच्छी समझ थी और यहां तक कि वो अभिनेता बनने से पहले एक संगीतकार बनना चाहते थे.

दिलीप कुमार की शादी जो उस समय में काफी आकर्षक मानी जाती थी उसमें राज कपूर, पृथ्वी राज कपूर और देव आनंद बाराती के तौर पर शामिल हुए थे.

निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी को फिल्म आनंद को बनाने का सुझाव राज कपूर से ही आया था. दरअसल राज कपूर की उन दिनों तबियत काफ़ी खराब रहती थी और मुखर्जी को उनकी म्रत्यु का डर सता रहा था. इस डर से प्रभावित होकर उन्होंने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन को लेकर सने 1971 में फिल्म ‘आनंद’ बनाई जो सुपरहिट रही.

राज कपूर की फिल्म ‘बौबी’ का वो सीन तो आपको याद ही होगा जिसमें ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया एक घर में मिलते है. ये सीन असल में राज कपूर और नरगिस की पहली मुलाकात से ही प्रेरित था.

1991 में आई फिल्म ‘हिना’ राज कपूर की आखिरी निर्देशित फिल्म थी जिसे वो पूरी तरह निर्देशित नहीं कर पाए और उनका बीच में ही निधन हो गया था. उनके बेटे रंधीर कपूर ने बाकी के बचे फिल्म के द्रश्यों को डायरेक्ट किया था.

नरगिस की तरह राज कपूर का नाम वैजयंतीमाला के साथ भी बहुत समय तक जुड़ा रहा. बाद में उनसे अनबन हो गई लेकिन राज कपूर के ज़हन में वैजयंतीमाला इस क़दर नक़्स थी कि वो दक्षिण भारत से उनकी काफ़ी हमशक्ल एक हिरोइन को ले आए जिसका नाम था पद्मिनी. इनके साथ उन्होंने जिस देश में गंगा बहती है फिल्म की.

नरगिस और राज कपूर साथ में आखिरी बार फिल्म जागते रहो में दिखे थे वो भी एक छोटे से दृश्य के लिए जिसमें नरगिस राज कपूर को पानी पिलाती हुई नजर आती है.