अस्पताल में अब जान बचाने का काम कम, लेने का काम ज्यादा होता दिखता है. कभी लापरवाही की शक्ल में मरीज दम तोड़ते हैं तो कभी मोटे इलाज के बिल देख कर. आखिर चिकित्सा जगत लूट का अड्डा क्यों बनता जा रहा है?