तोषी की जिंदगी के खाते पर उस के पति ने स्याही पोत दी थी. गवाह चंद सिक्कों के लालच में बिक गए थे. बेकसूर होते हुए उसे ही विषकन्या बन कर झूठ का विष पीनापड़ा.