मनोज अपनी मां को गांव से ले तो आया पर मां बहू की गृहस्थी में अपनापन न पा सकीं. उन्होंने थोड़ी हिम्मत दिखा कर समाज सेवा और स्वार्जन का काम कर बहू को चाहे नाराज कर दिया, पर घर में अपनी स्वतंत्र जगह बना ली.