शादी क्या की, उन की खरीदी हुई गुलाम हो गई. जब जी में आया फोन कर देंगे, ‘डार्लिंग, आज कुछ लोगों को डिनर पर बुलाया है, खाना तैयार रखना.’ कभी कोई कोलाबा से आ रहा है तो कोई अंधेरी से. जब कहती हूं, मैं तुम्हारे बच्चे को संभालूं या खाना बनाऊं तो बड़े प्यार से कहेंगे, ‘डार्लिंग, तुम खाना ही इतना अच्छा बनाती हो कि बस, खाने वाले उंगलियां चाटते रह जाते हैं. रोहन को मैं आ कर संभाल लूंगा.’ अब मैं क्या बताऊं, लीना के यहां 3 और निर्मला के यहां 2 नौकर हैं. यहां तक कि दांत से पैसा पकड़ने वाली उमा के यहां भी चौबीसों घंटे काम करने के लिए आया है और बाजार के काम के लिए एक लड़का अलग. और एक हम हैं कि दिनरात काम की चक्की में पिसते रहते हैं.

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