Hindi Story: सरपंच सोहन ठाकुर को पराई औरतों को ताड़ने की गंदी आदत थी. वे एक दलित औरत बलुई को अपनी छत से नहाते हुए देखते और उसे पाने की तरकीब लगाने लगे. क्या सोहन ठाकुर बलुई को पा सके?
सो हन ठाकुर की उम्र 48 साल की हो गई थी, पर उन के अंदर अब भी जवानों के जैसा जोश बरकरार था. वे जम कर खाते और दंड पेलते थे. उन का अच्छाखासा शरीर था. सोहन ठाकुर को देख कर कोई यह नहीं कह सकता था कि उन का 20 साल का एक बेटा भी है. सोहन ठाकुर की एक खूबसूरत पत्नी भी थी, जिसे वे प्यार से रूपमती कहा करते थे. गांव का सरपंच होने के नाते उन की खूब इज्जत भी थी.
गांव में सोहन ठाकुर का दोमंजिला मकान बना हुआ था, जिस के अंदर रूपमती के लिए एक खूबसूरत सी रसोई भी बड़े मन से बनवाई गई थी.
पंचायत में भी सोहन ठाकुर की बात को मान दिया जाता था. जब भी पंचायत लगती तो सोहन ठाकुर कोई भी फैसला देने से पहले एक अलग अंदाज में अपनी मूंछ पर ताव देते और फिर फैसला सुनाते और फैसला सुनाते समय उन के चेहरे पर गजब की चमक आ आती थी. 48 साल की उम्र होने के बाद और गांव में इतना रसूख होने के बाद भी सोहन ठाकुर का एक और पहलू था, जिसे सिर्फ वे ही जानते थे. वह पहलू यह था कि उन की आंखें किसी भी औरत का नंगा जिस्म देखने को हमेशा आतुर रहती थीं. गांव में खेतों के बीच काम करते समय मजदूर औरतों की छाती पर सोहन ठाकुर की नजरें बरबस ही जम जाती थीं.
सुबह के तकरीबन 10 बजे सोहन ठाकुर गांव के तालाब की तरफ टहलने चले जाते और वहां पर कोई न कोई औरत कपड़े धोते दिख जाती, तो उस के खुले अंगों पर किसी गिद्ध की तरह उन की नजरें टिक जाती थीं.
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