लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ‘गायब’ तेजस्वी सामने आए और कहा,”मेरे प्यारे बिहार, मैं यहीं हूं।”
मालूम हो कि लोकसभा चुनाव के बाद से ही बिहार में आरजेडी के युवा नेता और बिहार में महागठंधन की कमान संभालने वाले तेजस्वी यादव ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी और लोगों से मुखातिब हुए।

तेजस्वी ने क्या कहा

तेजस्वी के सक्रिय राजनीति से दूर रहने की वजह से विपक्ष के नेता उन पर राजनीतिक कटाक्ष कर रहे थे। कईयों ने तो यहां तक कह दिया था कि तेजस्वी यादव आरजेडी को मिली करारी हार की वजह से डर गए हैं और उन की राजनीति में पुनर्वापसी का इरादा नहीं है।
सोशल मीडिया पर भी तरहतरह के कयास लगाए जा रहे थे और यूजर्स उन्हें ट्रोल भी कर रहे थे।
एक ने लिखा था,”बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत हो रही है और उधर तेजस्वी इंगलैंड में क्रिकेट वर्ल्ड कप का मजा ले रहे हैं।”

तेजस्वी का जवाब

इधर सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय होते हुए तेजस्वी ने ट्वीट कर इस का जवाब देते हुए कहा है,”पिछले कुछ हफ्तों से मैं अपने चोट के इलाज में व्यस्त था। हालांकि, मैं राजनीतिक विरोधियों के साथसाथ मसालेदार कहानियों को पकाने वाले मीडिया के एक वर्ग को देख कर मजा ले रहा हूं।”

इस के बाद तेजस्वी ने एक के बाद एक 4 ट्वीट कर कहा, “हम उन लोगों के प्रति जवाबदेह हैं, जो हम में एक समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय के विकल्प की तलाश करते हैं और यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि हमारी लड़ाई जारी है।”

बच्चों की मौत दुखद

तेजस्वी ने बिहार में चमकी बुखार से सैकङों गरीब बच्चों की मौत पर संवेदना जताते हुए कहा,”इस दुखद समय में पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं से बिना किसी फोटोबाजी किए पीड़ित परिवारों के घर जाने को कहा गया। इस के अलावा सांसदों से इस मामले को संसद में उठाने को कहा गया, मेरे प्रिय बिहार, मैं यहीं हूं।”

राबङी को क्यों आया था गुस्सा

हाल ही में पत्रकारों के एक सवाल पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राबङी देवी झल्ला उठी थीं।
दरअसल, जब पत्रकारों ने पूछा कि तेजस्वी बहुत दिनों से नजर नहीं आ रहे, क्या वे इंगलैंड में क्रिकेट वर्ल्ड कप देखने गए हैं? तो राबङी देवी को इस सवाल पर गुस्सा आ गया और कहा कि नहीं, तेजस्वी तुम्हारे घर में हैं।

अब जब तेजस्वी ने जवाब दे दिया है तो सोशल मीडिया पर लोग उन्हें आराम करने की सलाह दे रहे हैं। कुछ कह रहे हैं, नेता को भी हक है निजी जीवन जीने की।
बात तो सही है, पर यहां डर्टी पौलिटिक्स की शुरुआत भी तो नेता लोग ही करते हैं, जनता जनार्दन तो बस उस में तङका लगाती है बस।

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