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पलंगतोड़ सैक्स की चाहत को कैसे करें पूरा

यौन उत्तेजना या कहें सैक्स पावर. देसी भाषा में मर्दाना कमजोरी. उसे बढ़ाने की ललक को भुनाने वाला कारोबार सदियों से चला आ रहा है. इन दिनों नएनए तरीके और दवाओं का बाजार गर्म है. उस संबंध में कुछ सही तो कुछ गलत धारणाओं से भी लोग भ्रमित हो जाते हैं. और वे न केवल ठगे जाते हैं, बल्कि अपने शरीर का भी नुकसान कर बैठते हैं. इस के बावजूद भी सैक्स पावर के पीछे न केवल उम्रदराज मर्द बल्कि युवा भी इस तरह भाग रहे हैं कि…   कानपुर का रहने वाला  बिजनैसमैन सुंदर लखोटिया मर्दाना कमजोरी को ले कर चिंता में डूबा रहता था. हाल में ही उस की शादी हुई थी. उम्र 32 साल और पत्नी की उम्र 26-27 साल. वह अपनी पत्नी से यौन संबंध बनाने में खुद को कमजोर समझता था. इस की शिकायत पत्नी की तरफ से थी या नहीं, यह तो पता नहीं लेकिन फिर भी उसे लगता था कि उस की सैक्स लाइफ मजेदार नहीं है. जिस आनंद के बारे में उस ने दोस्तों से सुन रखा था, वैसा उसे कुछ भी अनुभव नहीं हो पा रहा था. पत्नी के साथ देर तक नहीं टिक पाता था. सैक्स की कुछ पोजीशनों के बाद ही स्खलित हो जाता था. एक रोज उस की नजर फेसबुक के जरिए एक विज्ञापन पर गई. वह एक कालसेंटर का विज्ञापन था, जिस में सैक्स समस्याओं के संबंध में सलाह देने की बात कही गई थी. उस ने तुरंत दिए गए नंबर पर काल कर दी.

कुछ समय में ही एक मैसेज आ गया. उस के साथ एक लिंक भी था. सुंदर ने झट लिंक को क्लिक कर दिया. उस पर सैक्स पावर बढ़ाने वाली कई जानकारियां थीं. उन में सैक्स पोजीशन, आहारविचार और लाइफस्टाइल से ले कर सैक्स की क्षमता बढ़ाने वाली गोलियां, स्प्रे और आयल की जानकारी भी थी. नीचे दिए रोहिणी, दिल्ली के पते से उसे कुरियर के जरिए मंगवाया जा सकता था. सुंदर ने बिना समय गंवाए और किसी से सलाहमशविरा किए बिना तुरंत 1800 रुपए का और्डर बुक कर दिया. महीनों बीतने के बावजूद और्डर का कोई कुरियर नहीं आया, उल्टे उसे पैसा कमाने के साथसाथ सैक्स के अनुभवों के बारे में प्रैक्टिकल जानकारियां लेने का एक औफर मिला.

वह औफर जिगोलो यानी ठेठ में कहें कि पुरुष वेश्या बन 30 की उम्र पार कर चुकी महिलाओं के साथ सैक्स करने का था. इस के बदले में रजिस्ट्रैशन फीस मांगी गई थी.  सुंदर के सामने एक ओर दूसरी औरतों के सैक्स की ललक थी और पैसा बनाने का मौका भी था. उस ने दिए गए नंबर पर काल की, वह कालसेंटर का नंबर था. टेलीकालर महिला ने उसे मीठीमीठी लुभावनी आवाज में समझा दिया कि इस से उस की सैक्स पावर बढ़ाने में मदद मिलेगी. इस के लिए निश्चित रजिस्ट्रैशन फीस चुकानी होगी. आश्वासन भी मिला कि उस के यहां से दवा और्डर बुक किया जा चुका है.

कुछ दिन बाद ही एक खबर पढ़ कर वह चौंक गया. खबर के अनुसार, राजधानी दिल्ली में रोहिणी इलाके की साइबर सेल ने एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया था, जिस में 8 युवतियां भी शामिल थीं. सभी फरजी कालसेंटर में काम करने वाली टेलीकालर थीं.  उस का मुख्य आरोपी टेलीकालर लड़कियों के माध्यम से जिगोलो का काम दिलाने का झांसा दे कर ठगी करता था. पुलिस ने फरजीवाड़े के गैंग सरगना अमन विहार निवासी मेहताब को गिरफ्तार कर लिया.

खबर पढ़ कर सुंदर को समझते देर नहीं लगी कि वह एक फरजी कंपनी की ठगी का शिकार हो चुका है. असल में वह कंपनी सैक्स पावर बढ़ाने वाली ‘शक्तिवर्द्धक गोली’ और ‘पावर स्प्रे’ बेचने का काम करती थी. पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच में देश भर के 50 से अधिक लोगों से ठगी की बात सामने आई. उस का सरगना मेहताब दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक था, उस ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर के दौरान अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और यूपीएससी की तैयारी करने लगा था. उसी दौरान उस ने कुछ कालसेंटरों में काम भी किया था. साइबर सेल को समयपुर बादली निवासी सुमित ने 2 जून को घोखाधड़ी की शिकायत की थी. उस ने बताया था कि उसे कालसेंटर से एक लड़की का फोन आया था. उस ने जिगोलो का काम दिलवाने और सैक्स पावर की गोलियां देने का झांसा दिया था. उस से 70 हजार रुपए ठग लिए. आरोपी ने रजिस्ट्रैशन, बुकिंग और एडवांस के नाम पर उस से ठगी की थी.

उस शिकायत पर ही जिला पुलिस उपायुक्त बृजेंद्र सिंह ने छापेमारी के आदेश दिए थे. कालसेंटर से 12 मोबाइल फोन, पेटीएम एप्लिकेशन चलाने के लिए इस्तेमाल एक एंड्राइड फोन, लेनदेन का विवरण रखने वाले 16 नोटबुक, कर्मचारियों का हाजिरी रजिस्टर और ‘कार्य सुख पावर’ नाम की गोलियों की 5 बोतलें समेत स्प्रे की 5 बोतलें बरामद की गई थीं. कालसेंटर में काम करने वाली टेली कालर किसी भी नंबर पर फोन करती थीं. फोन पर बात करने वाले लोगों को यौनशक्ति बढ़ाने की दवा लेने के लिए प्रेरित करती थीं.

यदि कोई दावा करता था कि उस की यौनशक्ति ठीक है और उसे किसी भी दवा की जरूरत नहीं है, तब लड़कियां उन्हें जिगोलो सेवा में शामिल होने के लिए अच्छा पारिश्रमिक देने की बात कहती थीं. यौनशक्ति में कमी की शिकायत वालों को भी सैक्स करने के तरीके सिखाने की बातें करती थीं. उल्लेखनीय है कि सैक्स से जुड़ी परेशानियों के शिकार अमूमन नवविवाहित युवा हैं. वैसे हर मर्द सैक्स का आनंद नए अंदाज में लेना चाहता है. इसी का फायदा सैक्स पावर बढ़ाने वाला बाजार उठाता है.

सैक्स पावर को बढ़ाने के लिए मार्केट  में कई तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं, जिन में आयुर्वेदिक से ले कर एलोपैथिक दवा वियाग्रा तक है. लोगों का मानना है कि नपुंसकता दूर करने वाली वियाग्रा एक महंगी और पूरी दुनिया में सैक्स पावर को तेजी से बढ़ाने वाली गोली मानी जाती है. इस तरह की दवाइयों से मर्दाना कमजोरी को दूर करने के दावे किए जाते हैं. लेकिन इस के खतरे भी कम नहीं हैं. अगर शादी से पहले इन की आदत लग जाए या फिर छिपे हुए रोग ग्रसित होने की स्थिति में इस का सेवन खतरनाक हो सकता है. कई बार ऐसी दवाओं की लत लग जाती है. इस का एहसास 28 साल के अमित को शादी के बाद हुआ.

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अमित ने शादी से पहले सैक्स के अनेक अनुभवों के ख्वाब देखे थे. पोर्न फिल्मों से ले कर सैक्स पावर बढ़ाने वाली दवाइयों के बारे में जानकारी जुटा ली थी.  उस के साथ जो हुआ, वह सुख में सेंध जैसी बात ही कही जाएगी. शादी की पहली रात तो जैसेतैसे निकल गई. असल में वह नई पत्नी संग रोमांस सुख से अधिक पलंगतोड़ सैक्स सुख की उम्मीद लगाए हुए था. लेकिन उस की समस्या उस का बारबार स्खलित होना था. तब उस ने अगले रोज वियाग्रा की डबल खुराक ले ली.  पलंगतोड़ यौनाचार की ख्वाहिश प्रबल थी. दिमाग की नसों में सैक्स का रक्त तेजी से बहने लगा था. उस ने लिंग की उत्तेजना तो हासिल कर ली, लेकिन पत्नी की मनोदशा को नहीं समझ पाया. यह कहें कि दिमाग में सैक्स की सुखानुभूति असंतुलित हो गई. शरीर के दूसरे अंगों के साथ तालमेल नहीं बन पाया.

नतीजा वह वियाग्रा के साइड इफेक्ट का शिकार हो गया. डाक्टरी सलाह के बिना उस ने वियाग्रा की लगातार 4 गुना गोलियां खा लीं. सैक्स सुख में उस का आनंद कितना बढ़ा इस का तो पता नहीं, लेकिन वह अलग तरह के मनोवैज्ञनिक दबाव में जरूर आ गया था. उस असर को छिपा लिया. सोचा कुछ दिनों में अपने आप सही हो जाएगा. हालांकि जिसे वह सामान्य शारीरिक थकान और सिरदर्द समझ रहा था. दरअसल, वह उस के शरीर के लिए एक खतरे की घंटी थी. अचानक उस की तबीयत बिगड़ गई. काफी कमजोरी महसूस करने लगा. 5 जून, 2022 को उसे अस्पताल में भरती होने की नौबत आ गई. प्रयागराज के सब से बड़े सरकारी अस्पताल मोतीलाल नेहरू मैडिकल कालेज में उस का इलाज करने वाले डाक्टर भी उस की हालत देख कर हैरान थे.

डाक्टर के लिए यह अलग तरह का मामला था. डाक्टरी जांच में पाया गया कि उस  के लिंग में तनाव कम नहीं हो रहा है. साथ ही उस के शरीर के दूसरे हिस्से की नसें भी उभर गई थीं. डाक्टर इतना तो समझ गए थे कि मामला सैक्स से जुड़ा है. अमित से हमदर्दी जताते हुए पूछताछ की गई. उस ने बगैर कुछ छिपाए हुए वियाग्रा की डोज के बारे में बताया. डाक्टर के लिए चुनौती यह थी कि किस तरह से उस दवा के असर को खत्म किया जाए.

यूरोलौजी विभाग के हेड डा. दिलीप चौरसिया ने केस अपने हाथ में लिया. इलाज शुरू किया गया. प्राइवेट पार्ट की नसों के तनाव को कम करने के लिए दूसरी दवाओं का सहारा लिया गया, लेकिन इस का भी ध्यान रखा गया कि उन दवाओं के असर से दिल की धड़कनें प्रभावित न हों और दिमाग की नसों पर भी कोई असर न पड़े. डाक्टरों की टीम ने मुंबई के एक डा. रुपिन शाह के फार्मूले को अपनाया और पेनाइथल प्रोस्थेसिस के एक महीने के अंतर से 2 औपरेशन कर अमित को ठीक तो कर दिया लेकिन उस के लिंग का तनाव फिर भी कम नहीं हुआ. इस हालत में अमित को परिवार और समाज के सामने रहना असहज महसूस होने लगा. इस का डाक्टरों ने एक ही उपाय बताया कि वह मोटा कपड़ा पहने या लंगोट बांधे.

लिंग में हर समय उत्तेजना बने रहने का अमित को खामियाजा भी भुगतना पड़ा. पति की सैक्स पावर से परेशान हो कर उस की नवविवाहिता मायके चली गई. अमित के साथ घटित इस घटना से वैसे युवाओं को सैक्स पावर की दवाओं के सेवन के प्रति सतर्क कर दिया है. अधिकतर युवक लुभावने विज्ञापनों को देख कर यह कदम उठा लेते हैं. इस की खुराक का पता नहीं करते. नीमहकीमों के चक्कर में पड़ कर अपनी जिंदगी तबाह कर लेते हैं.

सैक्स पावर बढ़ाने की ललक में वह अपनी सैक्स पावर को और कम कर लेते हैं या फिर नपुंसकता के शिकार हो जाते हैं. कुछ नहीं तो प्रजनन क्षमता में कमी आ ही जाती है.  सैक्स रोग विशेषज्ञों ने सैक्स पावर बढ़ाने वाली गोलियों के सेवन और उस के दुष्प्रभाव के बारे में कई सुझाव दिए हैं. उस का सब से बुरा दुष्प्रभाव स्खलन दोष से संबंधित होता है. लंबे समय तक सैक्स के लिए उत्तेजना तो आ जाती है, लेकिन उस का टिकाऊपन उस का स्वस्थ शरीर और दूसरे मनोविज्ञान पर भी निर्भर करता है.

मैडिकल साइंस में इरेक्टाइल डिसफंक्शन एक सैक्स संबंधी समस्या है, जिसे नपुंसकता के रूप में भी जाना जाता है. इरेक्शन अर्थात सैक्स के लिए उत्तेजना प्राप्त करने या बनाए रखने में असमर्थ होने पर यह समस्या पैदा होती है. मर्दों में यौन उत्तेजना एक जटिल समस्या है, जिस में हार्मोंस, मस्तिष्क, भावनाएं, मांसपेशियां, तंत्रिकाएं और रक्त वाहिकाएं शामिल हैं. इन में से किसी भी हिस्से की समस्या होने की स्थिति में इरेक्टाइल डिसफंक्शन आ सकती है.  हालांकि पुरुषों के एक बड़े वर्ग में यह खराब हृदय स्वास्थ्य के कारण होता है. यही कारण है कि दिल के मरीजों को इस समस्या के निपटारे के लिए सैक्स पावर की गोलियां खाने से बचने की सलाह दी जाती है. वियाग्रा के अधिक सेवन से होने वाली मौतों का कारण हार्ट अटैक ही पाया गया है.

सामान्य स्वास्थ्य बीमारियां, जैसे हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्राल, उच्च रक्तचाप और मधुमेह सभी एक पुरुष की यौन उत्तेजना हासिल करने या बनाए रखने की क्षमता को प्रभावित करते हैं. यौन उत्तेजना में कमी का उपचार शारीरिक रोगों को ध्यान में रख कर किया जाता है. वैसे इस के लिए कई दवाएं उपलब्ध हैं. उन में वियाग्रा (सिल्डेनाफिल), सियालिस (तडालाफिल), वर्डेनाफिल (लेवित्रा) और अवानाफिल (स्टेंद्र) प्रचलन में हैं. इन का सेवन डाक्टरी सलाह के बगैर करना काफी खतरनाक हो सकता है.

ये दवाएं रक्त में नाइट्रिक आक्साइड के स्तर को बढ़ा कर अपना काम करती हैं. नाइट्रिक आक्साइड रक्त वाहिकाओं को चौड़ा कर देता है. इस संबंध में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि इस से लिंग में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है. ऐसा होने पर पुरुषों के लिए यौन उत्तेजना प्राप्त करने और बनाए रखने में सहूलियत होती है. यौन उत्तेजना वाली दवा के दुष्प्रभाव के बारे में पुरुषों को सचेत रहने की जरूरत है. दुष्प्रभावों में सिरदर्द, चक्कर आना, नाक और छाती में अधिक खून का जमाव, शरीर में ऐंठन, पाचन संबंधी समस्या, नजर दोष और त्वचा के रंग में बदलाव होते हैं.

कई पुरुषों में ऐसी दवा लेते समय छाती और नाक में रक्त जमाव का अनुभव होता है या फिर नाक बहने जैसी समस्या आ जाती है. ये दुष्प्रभाव भी नाइट्रिक आक्साइड के बढ़े हुए स्तर के कारण होते हैं. इस का स्तर बढ़ने पर नाक बंद हो जाती है और छाती में जमाव हो जाता है. सीने में दर्द होने लगता है. यही हृदय गति में तेजी आने का कारण बन जाता है.

सैक्सवर्धक दवा न केवल पाचन को प्रभावित कर देती है, बल्कि पूरे शरीर की मांसपेशियों में दर्द की समस्या को भी बढ़ा देती है. पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने लगता है. इन दवाओं को लेने से दस्त और अपच का खतरा भी बढ़ जाता है. सैक्सवर्धक दवाओं का इंसान पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है, इस से दवा बनाने वाली कंपनियों को कोई खास मतलब नहीं. उन की नजर तो धंधे के मुनाफे पर है. वे करोड़ों की कमाई कर रही हैं.

नीमहकीमों की तो बात ही अलग है. वे तो अच्छेभले इंसान में भी कई तरह की कमियां निकाल कर उन का संबंध सैक्स से जोड़ देते हैं. इस के बाद वे जिस तरह जेब ढीली करते हैं, उस का अहसास बाद में होता है. कुल मिला कर स्वस्थ और सुखद यौन संबंध के लिए जीवनशैली को सहज सरल बना कर ही यौन आनंद की अनुभूति की जा सकती है, जो हमारे दैनिक संतुलित आहार से संभव है. सैक्स के लिए किए जाने वाले प्रयोग जोखिम से भरे होते हैं

क्या मास्टरबेट करने से मैं बच्चा पैदा नहीं कर पाउंगा ?

सवाल 

मैं 24 वर्षीय नौजवान हूं शादी को दो साल हो गए हैं . मैं घर से दूर रहकर नौकरी करता हूं और साल में 4-5 बार ही घर जा पाता हूं. कुछ घरेलू वजहों के चलते अभी पत्नी को साथ नहीं ला पा रहा हूं. मेरी समस्या यह है कि सेक्स की तलब लगने और पत्नी की याद आने पर मैं संतुष्टि के लिए मास्टरबेट करता हूं पर यह सोच कर चिंतित हूं कि कहीं मास्टरबेट करने से मैं बच्चा पैदा कर पाऊंगा या नहीं.

जवाब

आपकी चिंता फिजूल है मास्टरबेट करने से बच्चा पैदा करने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ता है इसलिए आप सेक्स की जरूरत पूरी करने निसंकोच मास्टरबेट करते रहें. अच्छी बात यह है कि शरीर की भूख मिटाने आप काल गर्ल्स के पास नहीं जाते. वे महंगी भी पड़ती हैं और उनके पास जाने में खतरे भी बहुत रहते हैं इसलिए आप ने संतुष्टि के लिए बेहतर रास्ता चुना है.

हां इतना जरूर ध्यान रखें कि यह रोज रोज न करें . रही चिंता बच्चे पैदा करने की तो उसे दिल से निकाल दें क्योंकि शादी से पहले 99 फीसदी लोग मास्टरबेट करते हैं और शादी के बाद पिता भी बनते हैं. शादी के बाद पत्नी से दूर रहने पर भी सेहत या क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ता इसलिए जरूरत पड़ने पर आप बेहिचक मास्टरबेट करते रहें और बीवी को जल्द अपने पास लाने की कोशिश करें क्योंकि जो हालत आप की है वही उसकी भी होगी.

आप डैमीसैक्सुअल तो नहीं

आप ने अब तक सैक्सुअलिटी को ले कर कई शब्द सुने होंगे जैसे बाईसैक्सुअल, पैनसैक्सुअल, पौलिसैक्सुअल, असैक्सुअल, सेपोसैक्सुअल और भी कई तरह के शब्द. पर अब एक और नया शब्द सैक्सुअलिटी को ले कर एक नए रूप में आ रहा है और वह है डैमीसैक्सुअल. ये वे लोग हैं जो असैक्सुअलिटी के कगार पर हो सकते हैं पर पूरी तरह से अलैंगिक नहीं हैं. यदि आप किसी से सैक्सुअली आकर्षित होने से पहले अच्छे दोस्त होना पसंद करते हैं तो आप निश्चित रूप से डैमीसैक्सुअल हैं.

1. सैक्सुअलिटी की पहचान

यह जानने के कई तरीके हैं कि आप डैमीसैक्सुअल हैं या नहीं. सब से मुख्य तरीका यह है कि जब तक आप किसी से भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ते, आप सैक्सुअल फीलिंग्स महसूस नहीं करते. आप के लिए भावनाएं महत्त्वपूर्ण हैं. आप सारी उम्र एक ही व्यक्ति से संबंध बना कर रह सकते हैं. आप प्रयोग से डरते हैं.

आप सैक्सुअल इंसान नहीं हैं, इस में कोई बुराई नहीं है. सैक्स के पीछे भागने से ज्यादा आप को जीवंत, वास्तविक बातचीत करना ज्यादा अच्छा लगता है. यदि आप किसी से रिलेशनशिप में हैं और उस से इमोशनली जुड़ हुए हैं तभी आप अपने पार्टनर के प्रति सैक्सुअली आकर्षित होते हैं. यदि आप सिंगल हैं, तो आप निश्चित रूप से सैक्स से ज्यादा पार्क में एक अच्छी सैर या अपनी पसंद की कोई चीज खाना पसंद करेंगे.

जिसे आप पसंद करती हैं, उस से मिलने के बाद आप उस के व्यक्तित्व से प्रभावित होंगी, उस के लुक्स से नहीं, इसलिए किसी भी चीज से पहले आप की उस से दोस्ती होगी. आप किसी से मिलने पर सैक्सुअल होने या फ्लर्टिंग में विश्वास नहीं रखते. यदि एक व्यक्ति ने आप को अपने व्यक्तित्व से प्रभावित किया है तो आप पहले दोस्ती में अपना हाथ बढ़ाएंगे. घंटों, हफ्तों, महीनों में ही डेटिंग शुरू करने की आप सोच भी नहीं सकते, फ्लर्टिंग आप के दिमाग में आती ही नहीं है.

2. आकर्षण के प्रकार

आकर्षण 2 तरह का होता है-प्राइमरी और सैकेंडरी. प्राइमरी आकर्षण में आप किसी के लुक्स से आकर्षित होते हैं और सैकेंडरी आकर्षण में आप किसी के व्यक्तित्व से प्रभावित होते हैं. यदि आप डैमीसैक्सुअल हैं तो आप निश्चित रूप से सैकेंडरी पर्सनैलिटी टाइप में फिट बैठते हैं. अब इस का मतलब यह नहीं है कि आप को कोई आकर्षित नहीं करता. बहुत लोग आप को आकर्षक लगे होंगे पर आप लुक्स पर ही संबंध नहीं बना सकते. आप तभी आगे बढ़ते हैं जब किसी का व्यक्तित्व आप को प्रभावित करता है.

जब आप के दिल में किसी के लिए फीलिंग्स पैदा होने लगती हैं, विशेषरूप से सैक्सुअल फीलिंग, तो आप दुविधा में पड़ जाते हैं, क्योंकि आप उतने सैक्सुअल पर्सन नहीं हैं. आप नहीं जानते कि इन फीलिंग्स पर क्या प्रतिक्रिया दें या उस व्यक्ति से कैसे शारीरिक कनैक्शन बनाएं. एक बार आप घबराहट और दुविधा की स्थिति से बाहर निकल गए, तो आप अपने पार्टनर से ही सैक्स करना चाहेंगे और किसी से भी नहीं. किसी से सैक्सुअली खुलने के लिए उसे बताएं कि आप उसे कितना प्यार करते हैं, क्योंकि आप बहुत भावुक हैं और फिर सैक्स आप दोनों के लिए बहुत कंफर्टेबल हो जाएगा.

3. लोगों का आप के प्रति नजरिया

क्योंकि आप सैक्स को ले कर ज्यादा नहीं सोचते, लोग सोच सकते हैं कि आप विवाह होने का इंतजार कर रहे हैं. वे आप को घमंडी और पुराने विचारों का समझ सकते हैं पर इस से आप विचलित न हों. जैसे हैं वैसे ही रहें. आप किसी स्विच को औनऔफ करने की तरह किसी से भी सैक्स नहीं कर सकते. लोगों को अपने मनोभावों पर स्पष्टीकरण देने की चिंता में पड़ें ही नहीं. आप को अपने आसपास हाइली सैक्सुअल लोगों से कोई समस्या भी नहीं होती है. बस आप स्वयं इस स्थिति से खुद को दूर रखते हैं, क्योंकि आप वैसे नहीं हैं. आप सही इंसान का इंतजार कर रहे हैं और अपना जीवन उस के साथ ही सैक्स कर के बिताना चाहते हैं. इस में कुछ भी गलत नहीं है.

डैमीसैक्सुअल होने का मतलब यह नहीं है कि आप को सैक्स पसंद नहीं है. आप को सैक्स पसंद है, सब को सैक्स पसंद होता है पर आप उसी के साथ सैक्स करना चाहते हैं जिस से आप का भावनात्मक जुड़ाव हो. जब सही इंसान आप को मिलता है, आप सैक्सुअली उस से जुड़ जाते हैं. बातचीत और बौंडिंग दोनों आप के लिए ज्यादा महत्त्व रखते हैं.

आप डैमीसैक्सुअल हैं तो आप को यह नहीं सोचना है कि यह कुछ गलत है. आप भावुक हैं, मन के मिले बिना तन से न जुड़ पाएं, तो इस में बुरा क्या है और मन मिलने पर तो आप खुल कर जीते ही हैं. यह बहुत अच्छा है. तो अपनी पसंद का व्यक्ति मिलने पर जीवन का आनंद उठाएं, प्रसन्न रहें.

युवाओं के लिए बेहद जरूरी है सेक्स एजुकेशन

आज जिस तेजी से युवाओं की सोच बदल रही है, उन में जो खुलापन आया है वह मानसिक विकास के लिए तो जरूरी है, लेकिन खुलापन शारीरिक स्तर तक बढ़ जाए, यह गलत है. गलत इसलिए है क्योंकि हर कार्य को करने का समय होता है. किसी काम को समय से पहले ही अंजाम दिया जाए, तो उस का परिणाम भी गलत ही होता है. आज युवाओं में सेक्स के प्रति बढ़ती रुचि का ही नतीजा है कि युवतियां प्रैग्नैंट हो जाती हैं और अपनी जान तक गंवा देती हैं.

किशोरों के शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ विकास के लिए सब से जरूरी है, उन्हें सेक्स से संबंधित हर तरह की जानकारी से अवगत कराया जाए. खासकर पेरैंट्स को अपने जवान होते बच्चों को सेक्स से संबंधित जानकारी देने में जरा भी संकोच नहीं करना चाहिए, लेकिन अपने देश में बहुत कम ऐसे पेरैंट्स होते होंगे, जो अपने बच्चों को इस बारे में जागरूक और सचेत करने की पहल करते हों. यही कारण है कि हमारे देश में अधिकतर बच्चे सेक्स ऐजुकेशन से संबंधित जानकारी दोस्तों, किताबों, पत्रिकाओं, पौर्नोग्राफिक वैबसाइट्स और अन्य कई साधनों के जरिए चोरीछिपे हासिल करते हैं. उन्हें यह नहीं मालूम कि सेक्स से संबंधित ऐसी अधकचरी जानकारी मिलने से नुकसान भी होता है.

दरअसल, किशोर या युवा इन स्रोतों के जरिए सेक्स के प्रति अपने मन में गलत धारणाएं विकसित कर लेते हैं. उन्हें लगता है कि सेक्स मात्र ऐंजौय करने की चीज है, जिस से उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा.

एशिया के तमाम देशों जैसे भारत में सेक्स ऐजुकेशन को पाठ्यक्रम में शामिल करने के सफल प्रयास किए गए हैं, लेकिन यह आज भी एक बहस का मुद्दा बना हुआ है. यदि ऐसा संभव हुआ तो सेक्स ऐजुकेशन के जरिए बच्चों को इस की पूरी जानकारी दी जा सकेगी, जिस से किशोरों का विकास सही रूप में हो सकेगा.

1. सेक्स ऐजुकेशन क्यों जरूरी

सेक्स के प्रति युवाओं की अधूरी जानकारी न केवल सेक्स के प्रति धारणाओं को बदल रही है बल्कि इन पर शारीरिक और मानसिक रूप से नकारात्मक असर को भी उन्हें झेलना पड़ता है.

साइकोलौजिस्ट अरुणा ब्रूटा कहती हैं, ‘‘सेक्स ऐजुकेशन किशोरों को सब से पहले घर से ही मिलनी चाहिए, लेकिन पेरैंट्स आज भी इस विषय पर बात करना पसंद नहीं करते. उन्हें इस बारे में बात करने पर शर्म महसूस होती है, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि युवाओं को सेक्स की पूरी जानकारी न होने से उन का भविष्य खराब भी हो सकता है.

‘‘आज बच्चे लैपटौप, टैलीफोन, कंप्यूटर आदि पर निर्भर हो गए हैं और इस का कहीं न कहीं वे गलत इस्तेमाल भी कर रहे हैं. मुझे याद है कि एक बार मेरे पास एक 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले लड़के का केस आया था. वह लड़का प्रौस्टीट्यूट एरिया में पकड़ा गया था.

‘‘जब मैं ने उस से पूछताछ की कि तुम वहां कैसे पहुंचे, तो उस का कहना था कि वह 11वीं क्लास के एक छात्र के कहने पर वहां चला गया था. उस बच्चे का कहना था कि वह औरत का शरीर देखना चाहता था. इस तरह की जिज्ञासा किशोर में तभी संभव है, जब वह दोस्तों की गलत संगत में रह कर चोरीछिपे उन की बातें सुनता है.

‘‘यदि किशोर ऐसा करता है, तो युवा होतेहोते सेक्स के प्रति उस का ऐटीट्यूड वल्गर होता चला जाएगा. हालांकि सेक्स कोई वल्गर चीज नहीं है. यह एक नैचुरल प्रोसैस है, जो स्त्रीपुरुष के जीवन का एक अहम हिस्सा है.

‘‘यह सिर्फ मीडिया का ही नतीजा है कि बच्चे सेक्स को गलत रूप में लेते हैं. ऐसे में पेरैंट्स को चाहिए कि वे युवा होते बच्चों को सही और पूरी जानकारी दें. किशोरों को भी ऐसी वर्कशौप अटैंड करनी चाहिए, जिस में 10-15 किशोरों का समूह हो और जहां खुल कर सेक्स से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होती हो. इस से बच्चे भी शांत माहौल में सब कुछ समझ सकेंगे.’’

‘‘किशोरावस्था के दौरान खासकर यौनांगों का विकास होता है और साथ ही शरीर में हारमोनल बदलाव भी होते हैं, जो किशोरों को यह जानने के लिए उत्तेजित करते हैं कि वे इन बदलावों को ऐक्सप्लोर कर सकें. जो उन्होंने मीडिया के जरिए ऐक्सपीरियंस किया है, उसे वे सही में ट्राई कर बैठते हैं. ऐसे किशोरों के बीच ‘सैक्सुअल ऐरेना’ हौट टौपिक होता है. सही जानकारी न होने से इस से किशोरों को शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचता है.’’

2. पेरैंट्स की भूमिका

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सेक्स ऐजुकेशन उन सभी बच्चों को देनी चाहिए, जो 12 वर्ष और इस से ऊपर के हैं. खासकर जिस तरह से देश में टीनएज प्रैग्नैंसी और एचआईवी के मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में यह काफी गंभीर विषय बनता जा रहा है.

लगातार स्कूलों या आसपास के इलाकों में बलात्कार, यौन शोषण, स्कूली छात्रछात्राओं को डराधमका कर उन के साथ जबरदस्ती करना, उन्हें अश्लील वीडियो, पिक्चर्स देखने पर मजबूर किया जाता है. इसलिए पेरैंट्स की भूमिका काफी बढ़ जाती है कि वे अपनी युवा होती बेटी को उस के शरीर के बदलावों के बारे में समय रहते ही जानकारी दें ताकि वह खुद को सुरक्षित रख सके, अच्छेबुरे लोगों की पहचान कर सके, सेक्स और प्यार में फर्क समझ सके.

यह बताना भी जरूरी है कि सेक्स जैसे विषय पर शर्म नहीं बल्कि खुल कर बात करें. इस तरह की शर्म और भय को अपने मन से निकाल दें कि कहीं आप का युवा होता बच्चा असमय ही इस ज्ञान का अनुचित लाभ न उठा ले.

ऐसी स्थिति को पैदा ही न होने दें कि जब उस की शादी हो तो उसे अपने हसबैंड के पास जाने में घबराहट हो. मां की सही भूमिका निभाते हुए आप बेटेबेटियों को शरीर से संबंधित ज्ञान, विकास, काम से संबंधित थोड़ीबहुत जानकारी, प्रैग्नैंसी, कौंट्रासैप्टिव पिल्स, ऐबौर्शन आदि के नकारात्मक असर के बारे में जरूर बता दें. इस से वे जिंदगी में कई तरह की परेशानियों से बच सकते हैं. वह अपनी शारीरिक सुरक्षा और जीवन के सभी सुखों को प्राप्त कर सकते हैं.

3. स्कूलों में शामिल हो सेक्स ऐजुकेशन

कई अध्ययनों से पता चला है कि प्रभावकारी ढंग से जब किशोरों को सेक्स ऐजुकेशन के बारे में जानकारी दी गई, तो उन्होंने सही उम्र में ही सेक्स का आनंद लेना ठीक समझा. हालांकि देश में आज भी स्कूलों में सेक्स ऐजुकेशन को पाठ्यक्रम के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है. आज भी हमारी शिक्षा प्रणाली स्कूलों में सेक्स ऐजुकेशन से संबंधित वर्कशौप और प्रोग्राम्स आयोजित करने में असहमति दिखाती है. इस की मुख्य वजह पेरैंट्स, समाज के कुछ रूढि़वादी तत्त्वों और स्कूल के शिक्षकों का मानना है कि सेक्स ऐजुकेशन से किशोर लड़केलड़कियां और भी ज्यादा आजाद खयालों के हो जाएंगे, जिस से वे सैक्सुअल इंटरकोर्स में ज्यादा फ्री हो कर लिप्त होंगे.

4. सेक्स ऐजुकेशन का फायदा

द्य इस से टीनएज प्रैग्नैंसी में बहुत हद तक कमी आएगी. युवतियां हैल्थ, शिक्षा, भविष्य यहां तक कि गर्भ में पलने वाले भू्रण पर होने वाले अप्रत्यक्ष परिणामों से भी बच सकती हैं. उन में सेक्स के प्रति जागरूकता आएगी.

समय पर सेक्स ऐजुकेशन की जानकारी होने से आगे चल कर बहुत हद तक तनाव से बचा जा सकता है.

यहां तक कि यदि कोई किशोर सैक्सुअल इंटरकोर्स में शामिल होता है, तो भी कौंट्रासैप्टिव मैथड्स जैसे कंडोम का इस्तेमाल, कौंट्रासैप्टिव पिल्स की जानकारी होने पर सैक्सुअल ट्रांसमिटेड डिसीज और टीनएज प्रैग्नैंसी से बचा जा सकता है.

सैक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज जैसे गौनोरिया, पैल्विक इंफ्लैमैटरी डिसीज और सिफिलिस से बचाव होता है.

युवाओं और किशोरों में सेक्स ऐजुकेशन की जानकारी इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि उन्हें गर्भनिरोधक और मौर्निंग पिल्स, कंडोम और ऐबौर्शन के बारे में जानकारी मिल सकती है.

सैक्स के दौरान हो सकता है हार्टअटैक, पढ़ें खबर

Sex Tips: सेक्स के कारण दिल का धड़कना बंद हो जाए, यह दुर्लभ होता है. यूएसए टुडे की संवाददाता किम पेंटर का कहना है कि एक बड़ी शोध के अनुसार यह तथ्य सामने आया है कि सेक्स के दौरान या इसके बाद आमतौर पर हृदय गति रुकना बहुत कम अवसरों पर होता है और अगर ऐसा होता भी है तो यह आम तौर पर एक पुरुष के साथ ज्यादा होता है.

1 हजार महिलाओं में से किसी एक को तकलीफ…

शोध में बताया गया है कि एकाएक दिल की धड़कन रुकने के एक सौ मामलों में मात्र एक मामला सेक्स से जुड़ा होता है और एक हजार महिलाओं में से किसी एक को यह तकलीफ होती है. यह अध्ययन अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की वैज्ञानिक बैठक के दौरान पेश किया गया था. इस अध्ययन को जर्नल औफ द अमेरिकन कौलेज औफ कार्डियोलाजी में प्रकाशित किया गया है.

सेक्स से संबंधित खतरा बहुत कम…

सीडार्स-सिनाई हार्ट इंस्टीट्यूट, लॉस एंजिलिस के एक कार्डियोलाजिस्ट और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक सुमित चुघ का कहना है कि हृदय रोग से पीड़ित लोग इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि सेक्स खतरनाक हो सकता है, लेकिन आज हम कह सकते हैं कि इससे संबंधित खतरा बहुत कम है.

इन लोगों को ज्यादा खतरा…

एकाएक हृदयगति रुक जाने का कारण एक इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी है जिसके चलते दिल धड़कना बंद हो जाता है. इसके ज्यादातर शिकार मारे जाते हैं लेकिन यह हृदयाघात से अलग स्थिति है क्योंकि इसके अंतर्गत हृदय को रक्त प्रवाह का बहाव रुक जाता है. लेकिन जिन लोगों को पहले भी हृदयाघात हो चुका है या फिर उनको हृदय संबंधी तकलीफें होती हैं, उनको हृदय गति रुकने का खतरा ज्यादा होता है.

शादी से पहले प्रोटैक्शन है जरूरी

अगर आप भी सुगंधा और अश्विनी जैसी परेशानी से दोचार नहीं होना चाहते तो जरूरी है कि आप सुरक्षित सैक्स के बारे में सबकुछ जानें खासतौर से उस वक्त जब आप शादीशुदा नहीं हैं. लिवइन में रह रहे सुगंधा और अश्विनी दोनों नए जमाने के युवा हैं जो इन सड़ेगले सवालों और प्रवचनों में सिर नहीं खपाते कि शादी के पहले सैक्स संबंध क्यों नहीं बनाना चाहिए. वे 2 व्यस्कों के बीच सहमति से बने सैक्स संबंधों को कतई अनैतिक या पाप नहीं मानते. उन की नजर में कोई भी जरूरत जिस से किसी को कोई तकलीफ न होती हो और कानूनी अपराध न होता हो उसे पूरा करने में हिचकना नहीं चाहिए और न ही किसी और का लिहाज करना चाहिए.

लौकडाउन के दिनों में सिर्फ एक बार दोनों कंडोम का इस्तेमाल करना भूल गए थे, तब उन्हें लगा था कि कुछ गड़बड़ नहीं होगी. लेकिन गड़बड़ भी शायद उन की इसी तरह की किसी लापरवाही का इंतजार कर रही थी, सो हो ही गई. सुगंधा को समय पर पीरियड नहीं आया तो शुरू के चारपांच दिन तो उस ने यह सोच कर इस पर कोई ध्यान नहीं दिया कि ऐसा तो हर कभी हो जाता है लेकिन इस बार बात कुछ और थी और चारपांच दिनों बाद उसे खटका हुआ कि कहीं ऐसा तो नहीं कि….

ऐसा ही हुआ

…..आशंका सच निकली जब उस ने स्ट्रिप टैकस्ट किया तो लाल रंग की धारियों ने उसे टैंशन में डाल दिया. अश्विनी को बताया तो पहले तो वह भी घबराया लेकिन फिर हिम्मत बंधाते बोला, ‘ झं झट तो हो गई है यार, पर निबट लेंगे. मैं किसी लेडी डाक्टर से बात करता हूं.’ दोनों दूसरे दिन ही शहर की नामी डाक्टर से मिले और बिना कुछ छिपाए परेशानी बताई तो वे बोलीं, ‘अकसर युवाओं से असावधानी और लापरवाही में यह चूक हो जाती है, आइंदा ध्यान रखें.’ अगले दिन एबौर्शन हो गया जिस में न वक्त ज्यादा लगा और न ही पैसा. 5 हजार रुपए में दोनों आने वाली परेशानी से बच गए.

इस घटना से उन्हें जिंदगीभर के लिए सबक मिल गया कि शादी के पहले सैक्स प्रोटैक्शन बहुत जरूरी है, नहीं तो लेने के देने पड़ जाते हैं और ऐसी स्थिति में अगर समय पर एबौर्शन न कराया जाए तो फिर तरहतरह की ऐसी परेशानियां खड़ी हो जाती हैं जिन के बारे में पहले कभी सुना व सोचा नहीं होता.

डिस्चार्ज करते वक्त डाक्टर ने उन्हें मशवरा दिया था कि शुरू के दोतीन महीने तक तो अबौर्शन में कोई दिक्कत नहीं होती पर इस के बाद कई कौम्लिकेशंस आने लगते हैं- शारीरिक भी मानसिक भी, सामाजिक भी और कानूनी भी. सुगंधा को उन्होंने सलाह दी कि इस का जिक्र वह कभी किसी से न करे, यह गैरजरूरी है जो भविष्य में दिक्कतें खड़ी कर सकता है.

सुगंधा डाक्टर से यह सुन कर और बेफिक्र थी कि इस अबौर्शन से उस की हैल्थ पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा और उसे कभी इसे ले कर गिल्ट नहीं पालना चाहिए. अश्विनी ने भी बेफिक्री की सांस ली क्योंकि वह सुगंधा से बहुत प्यार करता है और शादी उस से हो न हो, इस से उस के प्यार पर कोई फर्क नहीं पड़ना. अस्पताल से आने के बाद उस ने सुगंधा को सौरी भी बोला. बड़े सदमे से बाहर आई सुगंधा ने कहा, ‘कोई बात नहीं. उस दिन मु झे भी ध्यान रखना चाहिए था कि बिना कंडोम के सैक्स करना कितना रिस्की होता है.’

और भी रिस्क हैं सैक्स में

सैक्स बिलाशक कुदरती जरूरत और मजा है लेकिन पर्याप्त जानकारियां न हों तो यह रिस्की भी हो जाता है. आज का युवा आजादी से जीना चाहता है और जी भी रहा है लेकिन आजादी का आनंद कुछ जरूरी सावधानियों को जानने व उन्हें अमल में लाने के बाद वह और भी बढ़ जाता है. शादी के पहले सैक्स इन्हीं आजादियों में से एक है. इस के खतरे पहले भांप और जांच लिए जाएं तो कोई अड़चन पेश नहीं आती. फिलौसफी की तरह सैक्स भी एक ऐसा विषय है जिस के बारे में कोई भी सबकुछ नहीं जान सकता. फिर भी इतना जान लेना तो जरूरी है कि रिस्क न के बराबर हो.

हर युवा जानता है कि बगैर कंडोम के सैक्स संबंध बनाना सैक्स के लिए सब से बड़ा रिस्क है. इसलिए सैक्स संबंध बनाने के पहले बहुतकुछ जान लेना जरूरी है खासतौर से उन युवाओं के लिए जिन की शादी नहीं हुई है. कंडोम अनचाहे गर्भ से तो बचाता ही है, साथ ही, इस के इस्तेमाल से सैक्स संबंधी सैकड़ों बीमारियों से भी बचाव होता है जिन्हें एसआईडी यानी सैक्सुअल ट्रांस्मिटेड डिजीज कहते हैं.

एचआईवी, एड्स, सिफलिस और गोनोरिया जैसी गंभीर बीमारियों के अलावा मामूली इन्फैक्शन से भी कंडोम आप को बचाता है. 62 साल के इतिहास में कंडोम के कई दिलचस्प पड़ाव देखने में आते हैं. अब तो ये कई फ्लेवर्स में भी मिलने लगे हैं जिन से ओरल सैक्स में सहूलियत रहती है.

ओरल सैक्स का चलन तेजी से युवाओं में बढ़ रहा है जो हर्ज की बात नहीं लेकिन इसे करने से पहले प्राइवेट पार्ट्स की साफसफाई और हाइजीन का खास खयाल रखा जाना चाहिए, नहीं तो इन्फैक्शन का जोखिम बढ़ जाता है. ओरल सैक्स के लिए फ्लेवर्ड कंडोम इस्तेमाल करना ज्यादा आनंददायक रहता है. किसी भी तरह के सैक्स में एक कंडोम को एक बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

दबाएं नहीं, सहलाएं

शादी के पहले सैक्स में युवाओं में बेताबी ज्यादा और तजरबा कम रहता है, इसलिए वे कई बार वे अपने पाटनर्स की फीलिंग्स और डिमांड को सम झ नहीं पाते. इन में से एक है प्राइवेट पार्ट्स को बेरहमी से दबाना. युवक सोचते हैं कि जोरजोर से अपनी पार्टनर के स्तन दबाएंगे तो वे ज्यादा एंजौय करेगी. लेकिन, हकीकत उलट है कि युवतियों को स्तन व निपिल सहलाए जाने में ज्यादा मजा आता है. जोर से दबाने और काटने से ये पार्ट दर्द करते हैं जिस के चलते युवतियां ऐसे युवकों से सैक्स करने में कतराने लगती हैं. इसलिए इस से बचना चाहिए. नाजुक युवकों का प्राइवेट पार्ट भी होता है, इसे भी जोर से दबाया जाए तो दर्द तो होता ही है, साथ ही, अंदरूनी नुकसान और चोट वगैरह का डर बना रहता है.

संबंधों को छिपाना सीखें

सैक्स संबंध आम होते हैं तो कई फसाद भी उठ खड़े होते हैं. इसलिए इन्हें छिपा कर रखना चाहिए जिसे सोशल प्रोटैक्शन कहा जा सकता है. आएदिन की खबरों में यह बहुत आम होती है कि चूंकि लड़का लड़की को बहलाफुसला कर सैक्स संबंध बना रहा था, इसलिए लड़की के घर वालों ने न केवल उस की मारकुटाई की, बल्कि उस के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा दी कि वह शोषण कर रहा था. जबकि, ज्यादातर मामलों में ऐसा होता नहीं है. सैक्स संबंध आमतौर पर दोनों की सहमति से ही बनते हैं. इसलिए सैक्स सुरक्षित जगह पर करना चाहिए जहां पकड़े जाने का डर न हो. इस के अलावा खुद भी अपने सैक्स संबंधों का ढिंढोरा नहीं पीटना चाहिए इस से, खासतौर से, लड़कियों की शादी में अड़चन पेश आती है. सोशल मीडिया पर भी अपने सैक्स संबंध की चर्चा से बचना चाहिए. शादी भले ही न हुई हो लेकिन परस्पर विश्वास दोनों को एक बेफिक्री देता है.

सैक्स पावर मैडिसिन

युवाओं को हमेशा से ही यह वहम रहा है कि सैक्स पावर की दवाएं लेने से वे अपनी पार्टनर को ज्यादा और इतना संतुष्ट कर पाएंगे कि वह बारबार उन से सैक्स करना चाहेगी. आजकल के युवा इस के लिए नीमहकीमों के चक्कर लगाने के अलावा वियाग्रा का सेवन भी बहुत कर रहे हैं. नीमहकीम तो सैक्स पावर की दवाओं के नाम पर जड़ीबूटियां बेच कर उन की जेब और सेहत पर डाका ही डालते हैं. कई बार तो यह सब जानलेवा हो जाता है.

वियाग्रा कारगर है लेकिन इस को बिना डाक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए, जो मुख्यतया ईडी यानी इरैक्टाइल डिसफंक्शन के लिए दी जाती है. यह बीमारी कम, एक बड़ी गलतफहमी ज्यादा है कि वियाग्रा लेने से वे ज्यादा देर टिकेंगे.

शादी के पहले इस को लेना नुकसानदेह भी होता है क्योंकि इसे से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है. हर कभी या हर बार सैक्स में इस का सेवन डायबिटीज, दिल की बीमारी और ब्लडप्रैशर जैसी बीमारियों की वजह बन सकता है. इसलिए इसे ईडी होने पर ही, वह भी डाक्टर की सलाह पर, लेना चाहिए. रही बात ज्यादा देर सैक्स करने की तो इस से आप की पार्टनर को भी नुकसान हो सकता है. उसे दर्द की शिकायत हो सकती है और आप को भी इस से दोचार होना पड़ सकता है. सैक्स में सब से बड़ा रोल आत्मविश्वास का और इस के बाद फोरप्ले का होता है, इसलिए सैक्स पावर बढ़ाने वाली दवाइयों से बचें. इन की आदत सैक्स में कमजोर बनाती है.

नशे से भी बचें

शादी के पहले का सैक्स टेम्परेरी होता है, जल्दबाजी में होता है. इसलिए इस का लुत्फ उठाने के लिए नशे से बचें. आजकल युवतियां भी यह मानने लगी हैं कि हलका नशा करने के बाद सैक्स करना ज्यादा मजा देता है, जोकि गलत है. नशे में सैक्स संबंध बनाने से, दरअसल, आप सैक्स को कम एंजौय कर पाते हैं, नशे की धुन में ज्यादा रहते हैं. अलावा इस के, नशे के दूसरे नुकसान जगजाहिर हैं. बीती 31 दिसंबर को एक कपल भोपाल के एक अस्पताल में आया था क्योंकि युवती को शराब और ड्रग का इतना ओवरडोज हो गया था कि वह बेहोश हो गई थी.

रात को 2 बजे डाक्टरों ने उसे देखा तो बिना मांबाप की सहमति के इलाज करने तैयार नहीं हुए जिस से घबराया उस का प्रेमी अस्पताल से भाग गया. लड़की ने  झख मार कर पेरैंट्स को बुलाया जिन्होंने आ कर उस का इलाज तो कराया लेकिन बाद में उस पर कई बंदिशें लगा दीं क्योंकि बात अगर आम होती तो उन की जो बदनामी होती उसे वे बरदाश्त न कर पाते.

यह  झमेला इसलिए हुआ क्योंकि युवती शादी के पहले गलत ढंग से यानी नशे में सैक्स संबंध बना रही थी. इसलिए इस से बचना चाहिए. कई बार नशे की आदी युवतियों का लड़के अश्लील वीडियो भी बना लेते हैं और बाद में उसे वायरल करने की धमकी दे कर युवती का तरहतरह से गलत फायदा भी उठाते हैं.

सैक्सी चैट : न बाबा न

ब्लैकमेलिंग का एक बड़ा जरिया सैक्सी चैट भी है जिसे शादी से पहले करना आ बैल मुझे मार जैसी बात है. अधिकतर युवा अपने अंतरंग क्षणों की बातें तो व्हाट्सऐप पर करते ही हैं, साथ ही, फोटो और वीडियो भी एकदूसरे से शेयर करते हैं. शादी में यह चैट अड़ंगा बन जाती है.

ऋचा की शादी इसलिए रुक गई थी क्योंकि उस के प्रेमी ने ये चैट उस के होने वाले पति और ससुराल वालों को भेज दी थीं. शादी के पहले सैक्स संबंध गुनाह नहीं, गुनाह है इन संबंधों के सुबूतों को जिंदा रखना. इसलिए इन्हें वक्त रहते नष्ट कर देना चाहिए और उस से भी बेहतर है कि इन्हें बनने ही नहीं देना चाहिए.

युवतियां इन्हें आजमाएं

सुगंधा पर जो गुजरी उसे वह जिंदगीभर नहीं भूल पाएगी. उस वक्त अगर अश्विनी उस का साथ न देता तो उस का हाल क्या होता, सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. अगर कभी कंडोम का इस्तेमाल करना भूल जाएं तो युवतियों के लिए एक बेहतर विकल्प इमरजैंसी कांट्रा सैप्टिक पिल्स हैं जिन्हें सहवास के 72 घंटे बाद तक लेने से प्रैग्नैंसी का डर काफी हद तक कम हो जाता है. बेहतर तो यह होता है कि इन गोलियों के सेवन के पहले डाक्टर से सलाह ले ली जाए.

क्या आप भी करते हैं मन मार कर सैक्स?

आप दिन भर के थके हुए घर लौटे हैं और आप के मन में सैक्स का खयाल दूरदूर तक नहीं हैं. लेकिन जैसे ही आप बिस्तर पर लेटते हैं, यह साफ हो जाता है कि आप के साथी के मन में आज सैक्स के अलावा कुछ भी नहीं है. उस को मना करने के बजाय आप अनमने मन से उस के साथ सैक्स कर लेते हैं. शायद आप यह उस की खुशी के लिए करते हैं या शायद इसलिए क्योंकि आप को पता है कि मना करने से उस का मूड खराब हो जाएगा.

अपना मन मारना

मन ना होने पर भी सैक्स करने को शोधकर्ताओं ने ‘अनुवर्ती सैक्स’ का नाम दिया है. अध्ययन से पता चला है कि पुरुषों की तुलना में ऐसा महिलाएं ज्यादा करती हैं. अनुवर्ती सैक्स और जबरदस्ती करे जाने वाले सैक्स में फर्क है. इस में आप इसलिए यौन संबंध नहीं बनाते क्योंकि आप का साथी आप के साथ जोरजबरदस्ती करता है, बल्कि यहां तो आप के साथी को यह पता ही नहीं चलता कि आप सैक्स नहीं करना चाहते और केवल उस का मन रखने के लिए कर रहे हैं, चाहे अपना मन मार कर ही सही.

तो ऐसा महिलाएं क्यों करती हैं? यह जानने के लिए अमेरिकी शोधकर्ताओं के एक समूह ने विश्विद्यालय में पढ़ने वाली 250 लड़कियों से संपर्क किया. उन्हें औनलाइन एक सर्वे भरने को कहा गया जिस में उन्हें अपने उस समय के अनुभव के बारे में बताना था जब उन्होंने अपना मन मार कर सैक्स किया. यहां सैक्स का मतलब था प्रवेशित सैक्स, गुदा और मुख मैथुन. शोधकर्ता यह भी जानना चाहते थे कि सैक्स करते हुए उन का व्यक्तित्व कैसा रहता है और अपने रिश्ते में वो अपने साथी से किस तरह से पेश आती हैं.

परिणाम आने के बाद शोधकर्ताओं को पता चल चुका था कि लगभग आधी महिलाओं ने कभी ना कभी मन मार कर सैक्स किया है. 30 प्रतिशत महिलाएं ऐसी थी जिन्होंने यह अपने वर्तमान साथी के साथ किया था या फिर उस साथी के साथ जिस के साथ उन का रिश्ता सब से लंबा चला था.

60 प्रतिशत महिलाओं का कहना था कि उन्होंने यह किया तो है लेकिन उन का मानना था कि ऐसा बहुत कम होता है. लेकिन 4 में से एक महिला ऐसी भी थी जिन्होंने लगभग 75 प्रतिशत से ज्यादा बार अपना मन मार कर सैक्स किया था.

तो यह लोग ऐसा क्यों कर रहे थे? इसका एक कारण तो यह था कि उन की नजर में ऐसा करने से उन का रिश्ता बेहतर और मजबूत होगा. एक महिला अपने साथी के साथ केवल इसलिए सैक्स के लिए तैयार हो जाती है क्योंकि उसे पता है कि उसे लगे ना लगे उस के साथी को यह अच्छा लगेगा. एक और कारण जो इतना सामान्य नहीं है, वो यह है कि महिलाओं को लगता है कि सैक्स करने से उन का रिश्ता चलता रहेगा – उन्हें यह डर रहता है कि कहीं उन के मना करने से उन का साथी उन्हें छोड़ कर ना चला जाए.

सैक्स को ले कर बातचीत

अध्ययन से यह भी पता चला कि जो महिलाएं अपने साथी को अपनी कामुक पसंद और नापसंद के बारे में बता कर रखती थी, उन के ‘अनुवर्ती सैक्स’ करने की संभावना कम थी क्योंकि जब उन का सैक्स करने का मूड नहीं होता था तब भी वो मन मारने के बजाय, वो बात अपने साथी को बता देती थीं.

अगर यह सब आप को जाना पहचाना लग रहा है तो शायद आप को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कैसे आप अपनी यौन इच्छाओं को अपने साथी को बता सकें और उस बारे में भी, जब आप सैक्स नहीं करना चाहते हों. इस से आप को बेहद फायदा होगा.

पुरुष भी इस का खयाल रख सकते हैं. अगली बार सैक्स करते हुए ध्यान दें कि क्या आप का साथी पूर्ण रूप से कामोत्तेजक है और क्या उसे सच में मजा आ रहा या फिर वो केवल आप का मन रखने के लिए यौन क्रिया में लिप्त हो रही है. यह जानने का सब से आसान तरीका जानते हैं क्या है? सीधा ही उस से पूछ न लो मेरे भाई. शानदार सैक्स की ओर यह आप का पहला कदम होगा.

कंडोम एक खूबियां अनेक

यह जान कर हैरानी होती है कि अब लोग कंडोम का इस्तेमाल हमबिस्तरी का ज्यादा से ज्यादा मजा उठाने और ओरल सैक्स के अलावा देर तक टिके रहने के लिए भी कर सकते हैं. कैसे हैं ये नए कंडोम? इस के पहले यह जान लेना जरूरी है कि कंडोम के इस्तेमाल में क्याक्या सावधानियां बरतनी चाहिए.

आमतौर पर पहली बार सैक्स करने वाले लोग कंडोम का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं, इसलिए उन्हें इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए:

* कंडोम हमेशा नामी कंपनी का ही इस्तेमाल करना चाहिए और इस्तेमाल करने से पहले इस की ऐक्सपायरी डेट यानी इस्तेमाल करने की तारीख देख लेनी चाहिए जो इस के पैकेट पर लिखी रहती है.

* कंडोम के पैकेट को दांतों या धारदार चीज से नहीं खोलना चाहिए. ऐसा करने से इस के फट जाने का खतरा बना रहता है.

* कंडोम तभी खोलना चाहिए जब अंग पूरी तरह जोश में आ जाए. शुरू में ही कंडोम खोल लेने से भी इस के फटने का डर बना रहता है.

* कंडोम पहनते वक्त उस में हवा नहीं जानी चाहिए. ऐसी हालत में भी उस के फटने का डर बना रहता है.

* अगर गलती से या जल्दबाजी से कंडोम उलटा पहन लें तो उसे फिर सीधा कर के दोबारा पहनने की भूल न करें. इस से औरत के पेट से ठहरने का डर बना रहता है, क्योंकि कंडोम पर शुक्राणु लग सकते हैं.

* कंडोम पहनने के लिए थूक, चिकनाई या दूसरी किसी चीज मसलन तेल या वैसलीन वगैरह का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

* कंडोम को कभी पर्स में नहीं रखना चाहिए और इसे धूप से बचा कर रखना चाहिए.

* कंडोम के इस्तेमाल से पहले यह तसल्ली कर लेनी चाहिए कि कहीं वह कटाफटा तो नहीं है.

* कंडोम अपने अंग के साइज के मुताबिक ही खरीदें. बाजार में हर साइज के कंडोम मिलते हैं.

* कंडोम को अंग पर चढ़ाने के बाद इस की नोक पर जगह नहीं छोड़नी चाहिए. इस से भी उस के फटने का डर बना रहता है.

* एक कंडोम को एक बार ही इस्तेमाल करें.

* इस्तेमाल करने के बाद कंडोम को पहने नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे तुरंत उतार कर ठिकाने लगा देना चाहिए.

* कंडोम के हर पैकेट पर उस के इस्तेमाल करने का तरीका लिखा रहता है. उसे ध्यान से पढ़ लेना चाहिए.

ये तो हुईं कंडोम के इस्तेमाल से ताल्लुक रखती सावधानियां, लेकिन अब कंडोम की उन खूबियों के बारे में भी जानें जो सैक्स और रोमांस को और भी खास बनाती हैं.

1. ओरल सैक्स के लिए

आजकल के नौजवानों में ओरल सैक्स यानी मुख मैथुन का चलन तेजी से बढ़ रहा है जो कतई हर्ज या नुकसान की बात नहीं. लेकिन इस में साफसफाई का ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है ताकि किसी तरह का इंफैक्शन न हो.

ओरल सैक्स के इस नुकसान से बचने का खुशबूदार कंडोम एक बेहतर उपाय है. केला, आम, वनिला, स्ट्राबेरी और चौकलेट फ्लेवर के कंडोम बाजार में मौजूद हैं जो ओरल सैक्स के लिए मुफीद और सुरक्षित हैं.

अपनी पार्टनर की पसंद के मुताबिक फ्लेवर्ड कंडोम खरीद कर ओरल सैक्स का मजा लिया जा सकता है.

2. टिके रहने के लिए

देर तक हमबिस्तरी का मजा उठाने के लिए ऐक्स्ट्रा प्लेजर कंडोम बनाया गया है, जो खासतौर से उन लोगों के लिए है जो जल्द ही डिस्चार्ज हो जाते हैं.

ऐक्स्ट्रा प्लेजर कंडोम में बैंजोकिना नाम का पदार्थ होता है जो लंबे वक्त तक टिकाए रखने में मदद करता है.

3. डौटेड कंडोम का मजा

ये कंडोम हमबिस्तरी के दौरान आप की पार्टनर में ज्यादा जोश पैदा कर उसे मजा भी ज्यादा देते हैं. इन पर बने डौट्स के निशान से औरतों का मजा दोगुना बढ़ जाता है, लेकिन अगर उन के प्राइवेट पार्ट की चमड़ी नाजुक है तो इस के इस्तेमाल में सब्र रखना चाहिए.

4. धारीदार कंडोम भी

ये कंडोम भी डौटेड कंडोम की तरह ही होते हैं, फर्क बस इतना है कि इन में डौट्स की जगह धारियां होती हैं, जो आप की पार्टनर को एक अलग तरह के सुख का एहसास कराती हैं. इस के इस्तेमाल से भी आप ज्यादा देर तक सैक्स का लुत्फ उठा सकते हैं.

5. ज्यादा जोश के लिए

सब से बेहतर है अल्ट्रा थिन कंडोम, जो दूसरे कंडोम के मुकाबले पतले रबड़ का बना होता है. इस से आप देर तक सैक्स का मजा ले सकते हैं.

इस कंडोम के इस्तेमाल से पार्टनर में जोश भी ज्यादा पैदा होता है और उसे सैक्स का भरपूर मजा भी मिलता है. चूंकि यह पतले रबड़ का बना होता है, इसलिए इस के फटने का भी डर बना रहता है.

6. हर बार करें इस्तेमाल

अब हर तरह के कंडोम बाजार में मौजूद हैं तो इन को इस्तेमाल करने से हिचकना नहीं चाहिए. इस बाबत जरूरी है कि कंडोम हमेशा अपने पास रखा जाए. लड़कियां भी अपनी सुरक्षा और बाद की परेशानियों से बचने के लिए इन्हें खरीद कर अपने पास रख सकती हैं.

सुखदायक सेक्स लाइफ चाहते हैं तो इन चीजों को कहें अलविदा

डा. कुंदरा के मुताबिक, सेक्स सफल दांपत्य जीवन का महत्त्वपूर्ण आधार है. इस की कमी पतिपत्नी के रिश्ते को प्रभावित करती है. पतिपत्नी की एकदूसरे के प्रति चाहत, लगाव, आकर्षण खत्म होने के कई कारण होते हैं जैसे शारीरिक, मानसिक, लाइफस्टाइल. ये सेक्स ड्राइव को कमजोर बनाते हैं.

  • तनाव: औफिस, घर का वर्कलोड, आर्थिक समस्या, असमय खानपान आदि का सीधा असर तनाव के रूप में नजर आता है, जो हैल्थ के साथसाथ सेक्स लाइफ को भी प्रभावित करता है.
  • डिप्रैशन: यह सेक्स का सब से बड़ा दुश्मन है. यह पतिपत्नी के संबंधों को प्रभावित करने के साथसाथ परिवार में कलह को भी जन्म देता है. डिप्रैशन के कारण वैसे ही सेक्स की इच्छा में कमी आ जाती है. ऊपर से डिप्रैशन की दवा का सेवन भी कामेच्छा को खत्म करने लगता है.
  • नींद पूरी न होना: 4-5 घंटे की नींद से हम फ्रैश फील नहीं कर पाते, जिस से धीरेधीरे हमारा स्टैमिना कम होने लगता है. इतना ही नहीं सेक्स में भी हमारा इंट्रैस्ट नहीं रहता है.
  • गलत खानपान: वक्तबेवक्त खाना और जंक फूड व प्रोसैस्ड फूड का सेवन भी सेक्स ड्राइव को खत्म करता है.
  • टेस्टोस्टेरौन की कमी: शरीर में मौजूद यह हारमोन हमारी सेक्स इच्छा को कंट्रोल करता है. इस की कमी से पतिपत्नी दोनों ही प्रभावित होते हैं.
  • बर्थ कंट्रोल पिल्स: बर्थ पिल्स महिलाओं में टेस्टोस्टेरौन लैवल को कम करती हैं, जिस से महिलाओं में सेक्स संबंधों को ले कर विरक्ति हो जाती है. पतिपत्नी का दांपत्य जीवन तभी सफल होता है, जब सेक्स में दोनों एकदूसरे को सहयोग करें. सेक्स एक दोस्त की तरह भी जीवन में रंग भर देता है. शादीशुदा जिंदगी से प्यार की कशिश और इश्क का रोमांच खत्म होने लगा है तो सावधान हो जाएं.
  • यदि आप की सेक्स लाइफ अच्छी है तो इस का सकारात्मक प्रभाव आप की सेहत पर भी पड़ता है.
  • जानिए, सेक्स के सेहत से जुड़े कुछ फायदे:
  • शारीरिक तथा मानसिक पीड़ा में राहत दिलाता है: सेक्स के समय शरीर में हारमोन पैदा होते हैं, जो दर्द की अनुभूति कम करते हैं. भले ही कुछ समय के लिए.
    10.सर्दीजुकाम के असर को कम करता है: सेक्स गरमी, सर्दीजुकाम के प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है. अमेरिका स्थित ओहियो यूनिवर्सिटी के अध्ययन बताते हैं कि चुंबन एवं प्यारदुलार करने से रक्त में बीमारियों से लड़ने वाले टी सैल्स की तादाद बढ़ जाती है.
  • मानसिक तनाव को कम करता है: सेक्स मन को शांति देने के साथसाथ मूड को भी बढि़या बनाने वाले हारमोन ऐंडोर्फिंस के उत्पादन में वृद्धि करता है. इस के मानसिक तनाव कम हो जाता है.
  • मासिकधर्म के पूर्व की कमी को कम करता है: सेक्स में लगातार गरमी के चलते ऐस्ट्रोजन स्तर काफी हद तक कम होता है. इस दौरान शरीर में थकान कम महसूस होती है.
  • दिल के रोग और दौरों की आशंका कम होती है: अकसर दिल के मरीजों को सेक्स संबंध बनाने से दूर रहने की सलाह दी जाती है. मगर अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ हृदयरोग विशेषज्ञ,  डा. के.के. सक्सेना के अनुसार, पत्नी के साथ सेक्स संबंध बनाने से पूरे शरीर का समुचित व्यायाम होता है, जिस से दिमाग तनावरहित हो जाता है. दिल के दौरों की आशंका कम हो जाती है. सेक्स संबंध बनाने से धमनियों में रक्त का प्रवाह और हृदय की मांसपेशियों की क्षमता बढ़ती है.

मेरा चाचा अकेले में मेरे साथ छेड़छाड़ करता है. उससे कैसे बचूं?

सवाल
मेरी उम्र 15 वर्ष है. मेरे एक चाचा मेरे हमउम्र हैं. मैं जब भी उस के घर जाती हूं, तो हम लोग एक ही जगह सोते हैं. रात को वह मेरे नजदीक आ जाता है और अश्लील हरकतें करता है. मैं यह बात पसंद नहीं करती, पर उसे मना भी नहीं कर पाती. बताएं, क्या करूं?

जवाब

आप जानती हैं कि आप का चाचा आप के साथ जो व्यवहार रात को चोरीछिपे करता है, वह सही नहीं है, बावजूद इस के आप इस का विरोध नहीं कर रहीं, जिस का मतलब है कि आप को यह सब अच्छा लगता है (अर्थात आप की इस में सहमति है). यदि यह सिलसिला बंद नहीं हुआ तो आप किसी समस्या में पड़ सकती हैं.

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